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तमिलनाडु में भाजपा कार्यकर्ता की निर्मम हत्या, अज्ञात लोगों ने घर जाते समय घेरकर मारा: BJP ने डीएमके पर निशाना साधा, कहा- राज्य में पुलिस का नहीं बचा डर

तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में भारतीय जनता पार्टी के जिला सचिव सेल्वाकुमार की निर्मम हत्या का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि शनिवार को भाजपा कार्यकर्ता को सड़क पर घेरकर अज्ञात लोगों ने मौत के घाट उतार दिया। अब बीजेपी ने इस हत्या के बाबत डीएमके पर निशाना साधा है और राज्य में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं जबकि इलाके के सांसद कार्ति पी चिदंबरम का कहना है कि इस हत्या का कोई राजनीतिक कारण नहीं था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेल्वाकुमार शनिवार (27 जुलाई 2024) को अपने ईंट भट्टे से मोटरसाइकल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उन पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद आरोपित फरार हो गए। राहगीरों ने सेल्वाकुमार को खून से लथपथ देखा और अधिकारियों को सूचित किया। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुँच देखा तो सेल्वाकुमार को अस्पताल लेकर गया जहाँ पता चला कि उसकी मौत हो चुकी थी।

हत्या की खबर सुनने के बाद भाजपा कार्यकर्ता समेत सेल्वाकुमार के समर्थक और ग्रामीण सड़कों पर आ गए। सबकी माँग थी कि आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए इलाके में पुलिस बल को तैनात किया है।

वहीं राज्य भाजपा प्रमुख के अन्नामलाई ने तमिलनाडु में बिगड़ते कानून व्यवस्था की ओर ध्यान दिलाते हुए इसे हत्याओं की राजधानी कहा। उन्होंने कहा, “असामाजिक तत्वों को सरकार या पुलिस का कोई डर नहीं है। मुख्यमंत्री, जिनके नियंत्रण में पुलिस है, एक राजनीतिक नाटक चला रहे हैं।” उन्होंने एमके स्टालिन से यह भी कहा कि वे आत्मचिंतन करें कि क्या उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का अधिकार है। उन्होंने मृतक के परिजनों को आश्वासन दिया है कि भाजपा उन्हें हर तरह से सपोर्ट करेगी।

इस मामले में सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने दावा किया कि सेल्वाकुमार की हत्या में कोई राजनीतिक संबंध नहीं है। कार्ति चिदंबरम ने एक्स पर कहा, “हत्या के संबंध में शिवगंगा जिले के एसपी से बात की, जिन्होंने कहा कि हत्या दो समूहों के बीच दुश्मनी के कारण हुई है और उन्होंने संदिग्धों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। इसमें कोई राजनीतिक कोण नहीं है। लेकिन हत्याओं की बढ़ती आवृत्ति चिंताजनक है।”

लाइन पर आ रहा मालदीव… आँख दिखाने वाले राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत को दिया धन्यवाद, माना- कर्ज चुकाने में चीन के अलावा इंडिया ने दी सबसे ज्यादा मदद

कुछ समय पहले तक भारत को आँख दिखाने वाला मालदीव और उसके नेता अब भारत का आभार जताते नहीं थक रहे। हाल में मालदीव के राष्ट्रपत मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव की नाजुक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करने के लिए चीन के साथ भारत को भी धन्यवाद दिया।

मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जु जिन्हें चीन का समर्थक माना जाता है, उन्होंने अपने देश की आजादी की 59वीं वर्षगाँठ के मौके पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चीन और भारत देश के कर्ज को चुकाने में सबसे अधिक मदद प्रदान करते हैं।

इसके अलावा एक स्थानीय समाचार पोर्टल ने मुइज्जू के हवाले से कहा, “मैं अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, आर्थिक संप्रभुता को सुनिश्चित करने और जनता की खातिर सहयोग करने के लिए मालदीव की ओर से चीन सरकार और भारत सरकार को धन्यवाद देता हूँ।”

बता दें कि मोहम्मद मुइज्जू पिछले वर्ष मालदीव में भारत विरोधी एजेंडा ‘इंडिया आउट’ अभियान के सहारे सत्ता में आए थे और सरकार में आते ही इन्होंने भारत से करीबन 80 सैन्यकर्मियों को वापस बुलाने की बात कही थी। वहीं बाद में मुइज्जू सरकार में मंत्री ने पीएम मोदी को अनाप-शनाप कहा था।

इस घटना के बाद अचानक मालदीव बॉयकॉट का ट्रेंड चला था जिसका असर मालदीव को अपने यहाँ आने वाले टूरिस्टों में कमी से देखना पड़ा था। बाद में मुइज्जु ने भारत के साथ बैर के दुष्परिणामों को समझा और दोनों देशों के संबंध सुधारने पर काम करना शुरू किया।

हाल की बात करें तो मुइज्जू ने प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के लिए आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भी शिरकत की थी। इसके अलावा मालदीव ने भारत की तरफ से दिए गए डोर्नियर विमान और हेलिकाप्टरों का इस्तेमाल इमरजेंसी चिकित्सा सेवाओं के लिए फिर से शुरू कर दिया है।

ओलंपिक के मैदान में उतरा ’12 साल की बच्ची का बलात्कारी’, दर्शकों के विरोध के बाद खुली सच्चाई: तरफदारी करने पर BBC पैनलिस्ट को माँगनी पड़ी माफी

नीदरलैंड्स की तरफ से एक ऐसा खिलाड़ी पेरिस ओलंपिक में उतरा है, जिसने 12 साल की बच्ची का इंग्लैंड जाकर रेप किया था। उसे 4 साल की सजा सुनाई गई थी। ये मामला 2014 का था, तब उस खिलाड़ी की उम्र 19 साल थी। इस खिलाड़ी का नाम स्टीवन वान डे वेल्डे (Steven van de Velde) है, जो वॉलीबाल खिलाड़ी है। पेरिस में स्टीवन जब नीदरलैंड के लिए खेलने के लिए मैदान पर उतरा, तो दर्शकों ने उसको खूब उल्टा-सीधा सुनाया और जमकर हूटिंग की, जिसके बाद ये मामला पूरी दुनिया की नजर में आ गया।

हैरानी की बात है कि एक तरफ स्टार महिला घुड़सवार चार्लोट दुजार्डिन को इसलिए ओलंपिक से बाहर कर दिया गया, क्योंकि 4 साल पहले उन्होंने अपने घोड़े को 24 कोड़े मारे थे। इस काम को अमानवीय और जानवरों पर अपराध करार दिया गया था और हॉर्स चैरिटी के एंबेसडर पद से भी हटा गिया गया था। वहीं, स्टीवन जैसे बलात्कारी को ओलंपिक में जगह दी जा रही है। ये ओलंपिक खेलों के आयोजकों के दोहरे रवैय्ये को भी दर्शाता है।

हैरानी की बात है कि एक ओलंपियन पाउला रैडक्लिफ, जो बीबीसी की कमेंट्री एक्सपर्ट टीम में शामिल है, उन्होंने ये कह कर स्टीवन का बचाव किया कि वो पुरानी बात हो गई है और अब स्टीवन शादीशुदा है, साथ ही काफी बदल गया है।

मैदान पर जबरदस्त हूटिंग के बाद खुला मामला

यूँ तो ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाले एथलीट्स को हीरो माना जाता है, लेकिन स्टीवन वान डे वेल्डे एक घोषित अपराधी हैं और 12 साल की बच्ची के रेप के अपराध में जेल की सजा काट चुके हैं। मामला 2014 का है, जब उस समय 19 साल के स्टीवन वान डे वेल्डे ने सोशल मीडिया के जरिए 12 साल की ब्रिटिश लड़की को अपने जाल में फंसाया था। वो ब्रिटेन गए थे और 12 साल की बच्ची को शराब पिलाकर उसके साथ संबंध बनाए थे। बच्ची को स्टीवन वान डे वेल्डे ने तबतक नहीं छोड़ा, जबतक उसने दर्द की शिकायत नहीं की और रोने नहीं लगी।

इस मामले में स्टीवन वान डे वेल्डे को गिरफ्तार कर लिया गया और 2016 में 4 साल की जेल की सजा सुनाई गई। एक साल की सजा उसे इंग्लैंड में काटनी पड़ी, और फिर उसे नीदरलैंड भेज दिया गया। बाकी कुछ महीने उसने नीदरलैंड की जेल में बिताए, फिर उसे रिहा कर दिया गया। स्टीवन वान डे वेल्डे आज के समय में नीदरलैंड का स्टार खिलाड़ी है और वॉलीबाल के खेल में पेरिस ओलंपिक में नीदरलैंड की टीम का प्रतिनिधित्व कर रहा है, जबकि पीड़ित लड़की उस भयावह हादसे से कभी उबर ही नहीं पाई और ड्रग्स में डूब गई। उस लड़की की जिंदगी फटेहाल और नर्क सरीखी बीती।

ओलंपिक गाँव से अलग हाई सिक्योरिटी होटल में रखा गया है स्टीवन वान डे वेल्डे

स्टीवन वान डे वेल्डे एक बाल यौन शोषक है, जिसकी वजह से उसे ओलंपिक खेलों के आयोजन वाली जगह से दूर रखा गया है। चूँकि ओलंपिक खेल में 11 साल की एथलीट भी हिस्सा ले रही है, ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक महासंघ ने उसे ओलंपिक गाँव में ठहराने की जिम्मेदारी ही नहीं ली, जिसके बाद नीदरलैंड्स की ओलंपिक कमेटी ने उसे अपनी गारंटी पर एक होटल में ठहराया है।

नीदरलैंड की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति का कहना है कि स्टीवन वान डे वेल्डे ने अपनी सजा पूरी कर ली है, साथ ही पुनर्वास कार्यक्रम पूरा कर लिया है। विशेषज्ञ भी इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि वो अब दोबारा ऐसा अपराध नहीं करेगा। वहीं, वान डी वेल्डे के वॉलीबॉल पार्टनर मैथ्यू इमर्स ने उन्हें “दूसरे पिता की तरह” बताया, जिनके साथ वह “सहज” महसूस करते हैं। हालाँकि आम दर्शकों ने स्टीवन को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया है और वो इस खिलाड़ी को लगातार हूट कर रहे हैं।

बीसीसी की पैनलिस्ट ने दी थी शुभकामनाएँ

बीबीसी की स्पोर्ट्स एक्सपर्ट और खुद ओलंपियन रह चुकी पाउला रैडक्लिफ ने स्टीवन वान डे वेल्डे को शुभकामनाएँ दी, साथ ही ये कहकर बचाव किया कि वो अब शादीशुदा व्यक्ति हैं और पूरी तरह से बदल चुके हैं। उन्होंने कहा, “वह उन्हें “शुभकामनाएँ” देती हैं, क्योंकि उन्होंने अपना जीवन बदल लिया है और अब विवाहित हैं।” हालाँकि लोगों ने जब रेडक्लिफ की तीखी आलोचना की, तो उन्होंने माफी माँग ली।

ये पूरा मामला बताता है कि ओलंपिक जैसे खेल भी ऐसे अपराधियों से अछूते नहीं हैं, जहाँ बाल यौन शोषण के अपराधी भी हिस्सा ले रहे हैं। हालाँकि इस पूरे मामले के सामने आने के बाद बाल यौन अपराधों और अपराधियों को लेकर लोगों में जागरुकता भी आ रही है। वहीं वान डे वेल्डे जैसे खिलाड़ियों की हूटिंग ये बताती है कि भले ही उसने सजा काट ली है और पुनर्वास कार्यक्रम में हिस्सा लिया हो, लेकिन उसके सर पर से अपराधी होने का टैग कभी नहीं हट सकता।

गीता में कृष्ण ने अर्जुन से जो कहा… बस वही था दिमाग में: पेरिस ओलंपिक्स 2024 में भारत को पहला मेडल दिलाने के बाद बोलीं मनु भाकर, कहा- सिर्फ कर्म पर था ध्यान

पेरिस ओलंपिक-2024 में भारत को पहला मेडल दिलाने के बाद मनु भाकर ने अपनी जीत पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया है कि खेल के अंतिम क्षणों में उनके मन में क्या चल रहा था। इस दौरान उन्होंने अपनी गीता पढ़ने की आदत और श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दी गई सीख की बात की।

दरअसल, मैच जीतने के बाद जब वो कैमरे के सामने आईं तो उन्होंने कहा कि वो इस जीत से बेहद खुश हैं। ये वो मेडल है जिसका भारत को इंतजार था, वो सिर्फ जो कुछ महसूस कर रही हैं वो बहुत अद्भुत है। उन्होंने बहुत मेहनत की थी और हर शॉट पूरी ताकत से लगाया। उन्होंने कहा कि वो खुद हैं कि उन्हें कास्य पदक मिला। आगे वो कोशिश करेंगी कि मेडल का रंग बदल सकें।

मनु से जब आखिरी पलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह शांत थीं और अपना कर्म करना चाहती थीं और ये उन्होंने गीता पढ़कर सीखा जिससे उन्हें मेडल जीतने में मदद मिली। उन्होंने कहा, “मैं गीता पढ़ती हूँ तो आखिरी में मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि मैं वो करता हूँ जो मैं कर सकता हूँ, मैं वो करूँ जो करने की मुझसे उम्मीद की जा रही है और बाकी सब कुछ किस्मत पर छोड़ देती हूँ। गीता में कृष्णा ने कहा है कि आप अपने कर्म पर ध्यान दो उसका जो परिणाम है उस पर नहीं। मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि अपना काम करती हूँ बाकी देखा जाएगा।”

बता दें कि मनु भाकर के इस मेडर से भारत का पेरिस ओलंपिक में खाता खुला। मनु भाकर ने 10 मीटर विमेंस एयर पिस्टल में कांस्य पदक जीत लिया है। उन्होंने आखिर तर कोरियाई खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर दी, लेकिन वो तीसरे नंबर पर रही। इस स्पर्धा का स्वर्ण और रजत पदक, दोनों ही दक्षिण कोरियाई खिलाड़ियों ने जीता है। दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता है। मनु भाकर ने फाइनल में 221.7 अंक के साथ कांस्य पदक जीता है।

सिर पर थूका और पटक कर किया गैंगरेप, हमले में बचे टेनिस कोच ने हमास के आतंक की सुनाई कहानी: कहा- मैं तबसे तनाव में

इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमले से बच कर आए एक व्यक्ति ने अपनी दास्तान मीडिया को सुनाई है। उसने बताया है कि हमास के आतंकियों ने उसके साथ रेप किया और उसे पकड़ कर प्रताड़ित किया। उसने तबसे घर से बाहर निकलना बंद कर दिया है।

ब्रिटिश न्यूज वेबसाइट डेली मेल को दिए एक इंटरव्यू में पीड़ित ने अपनी कहानी बताई है। उसने बताया कि वह इजरायल का एक विख्यात टेनिस कोच है। वह हमास के हमले से पहले एक सामान्य जीवन जी रहा था। लेकिन हमले ने उसका जीवन बदल दिया।

उसने बताया कि वह 6 अक्टूबर, 2024 को इजरायल के किब्बुत्ज़ इलाके में पहुँचे थे जहाँ नोवा म्यूजिक फेस्टिवल चल रहा था। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर की सुबह तक पार्टी अच्छी तरीके से चल रही थी और यहाँ हजारों लोग शामिल हो रहे थे। यहाँ माहौल काफी अच्छा था।

उन्होंने बताया कि सुबह उन्हें अलर्ट सायरन सुनाई दिए। उन्होंने बताया कि वह पहले कुछ समझ नहीं पाए लेकिन कुछ ही देर में साफ़ हो गया कि यहाँ आतंकी घुस आए हैं। पीड़ित ने बताया कि वह इसके बाद भागे लेकिन उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था।

थोड़ी देर बाद उन्हें आतंकियों ने पकड़ लिया। आतंकियों ने उन्हें घेर रखा था। पीड़ित ने बताया कि आतंकियों ने उनको जमीन पर गिरा दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें पकड़ने वाले आतंकी हमास की नकबा ब्रिगेड के थे। यह ब्रिगेड हमास की स्पेशल फ़ोर्स है।

इसके बाद उनके साथ मारपीट की जाने लगी। आतंकियों ने उनके कपड़े उतरवा दिए। उसके बाद आतंकियों ने उनके सर पर थूकना चालू कर दिया। उन्हें यहूद के नाम से पुकार कर गालियाँ दी। आतंकी इन सबके बीच हंस रहे थे। वह आपस में लोगों की हालत को लेकर मजाक बना रहे थे।

इसके बाद आतंकियों ने पीड़ित का रेप चालू कर दिया। पाँच आतंकियों ने मिल कर उनका रेप किया। इस बीच मारपीट और थूकना जारी रहा। वह लगातार रेप करते रहे और कई लोगों को इस बीच अपने साथ उठा ले गए। पीड़ित को उन्होंने वहीं छोड़ दिया जिसके बाद उसने छुप कर अपनी जान किसी तरह बचाई।

जब उन्हें बचाने वाले आए तो उन्होंने बाहर निकल कर घटना के बारे में बताया। उन्होंने बताया वह तबसे कहीं निकल कर नहीं जाते हैं। उनके घर में रहने के कारण टेनिस का करियर भी रुक गया है। तनाव के कारण उनका 20 किलोग्राम वजन भी बढ़ चुका है।

गौरलतब है कि 7 अक्टूबर, 2024 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल में बड़ा आतंकी हमला किया था। हजारों हमास आतंकियों ने इजरायली सीमा में घुस कर एक म्यूजिक फेस्टिवल में 1200 से अधिक लोगों को मार दिया था। उन्होंने कई गाँव भी तबाह कर दिए थे। हमास के आतंकी अपने साथ 250 से अधिक लोगो को पकड़ ले गए थे।

हमास के आतंकियों ने एक जर्मन यहूदी महिला शानी लौक की अर्धनग्न देह की परेड पूरे फिलिस्तीन में करवाई थी। फिलिस्तीन के लोगों ने शानी के शरीर पर थूका था। इसके कई वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुए थे। उन्होंने अन्य कई महिलाओं के साथ भी बलात्कार किया था। तब से लगातार इजरायल और हमास आमने सामने हैं।

पोर्न की जकड़ में बेटा, हैवानियत का शिकार बनी बेटी… लाश देख भी नहीं रोया घरवालों का दिल, लड़के को बचाने में जुटे: खोखले होते रिश्तों की भयावह तस्वीर, क्या होगा आगे

बहन-भाई का रिश्ता समाज में सबसे पवित्र रिश्तों में से एक माना जाता है लेकिन क्या हो अगर इस रिश्ते को तार-तार करने वाले उदाहरण कंटेंट बनाकर बच्चों के आगे परोसे जाएँ। क्या उसका असर उनके दिमाग पर या आपसी रिश्तों में नहीं पड़ेगा?

हाल में एक शर्मनाक मामला मध्यप्रदेश के रीवा से सामने आया है। 13 साल के लड़के ने पोर्न फिल्म देखने के बाद अपनी 9 साल की मासूम बहन का रेप किया और बाद में जब बहन ने कहा कि वो पापा से शिकायत करेगी तो डर से उसकी हत्या कर दी। लड़का पकड़ा न जाए इसके लिए उसने माँ को कॉन्फिडेंस में लिया, माँ को सारी बात बताई… लेकिन माँ ने सबकुछ जानते हुए बेटी की हत्या पर विरोध नहीं किया और न ही दोनों 17 और 18 साल की बड़ी बहनों ने पूछा कि उनके भाई ने ये क्या किया है। उलटा सबने लड़के को बचाने के लिए मामले को बरगलाने का पूरा प्रयास किया। वो तो पुलिस के संज्ञान में मामला आने के बाद केस का खुलासा हुआ और मीडिया में जानकारी आई।

अब ऐसा नहीं है कि ऐसी घटना पहली बार देखने को मिली है। आप एक बार गूगल पर सर्च करके देखिए तो आपको तमाम ऐसे मामले देखने को मिलेंगे जब पोर्न देखने के बाद रिश्तों की खिल्ली उड़ी। बच्चियों ने अपने भाई, पिता, चाचा या मामा में ही हैवान देखा। ऑपइंडिया पर कुछ दिन पहले ही एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी जिसमें तमाम वो मामले गिनाए गए थे जब अश्लील सामग्री देखने के बाद लड़कों ने बहन, बेटियों को ही हवस का शिकार बना लिया।

जैसे मध्यप्रदेश से ही कुछ समय पहले एक मामला सामने आया था जहाँ 9 साल की ही लड़की को निशाना बनाया था। मामले में फर्क सिर्फ इतना था कि उस बच्ची के साथ हैवानियत करने वाला उसका पिता था। पूछताछ में आरोपित ने बताया था कि उसे पोर्न देखने की आदत थी और इसी लत के चलते उसने अपना निशाना अपनी बच्ची को बनाया।

अब सोचिए ये भाई और पिता के रिश्तों का हाल है तो बाकी पुरूष जिनका लड़की से किसी रूप में लेना-देना नहीं होता तो उन पर पोर्न आदि का क्या असर पड़ता होगा… उनका मन क्या एक भी बार लड़की को शिकार बनाने से पहले झिझकेगा। पोर्न की सुलभता सिर्फ मानसिक रूप से किसी को उग्र नहीं कर रही बल्कि रिश्तों को खोखला भी कर रही है।

आसानी से मौजूद है पोर्न और अश्लील कंटेंट

छोटे बच्चों के हाथ में आज के समय में मोबाइल का होना चिंताजनक नहीं है बल्कि मोबाइल पर आसानी से उपलब्ध होने वाली सामग्री चिंताजनक है। बच्चे मोबाइल पर क्या करते हैं किसी को नहीं पता। मान लीजिए वो फिल्म या कोई सीरिज ही देख रहे हैं… क्या आप इस चीज को सुनिश्चित कर पाएँगे कि वहाँ उसे अश्लील सामग्री देखने को न मिले… नहीं। ऐसा हो ही नहीं सकता है। एक बटन दबाने के साथ सब कुछ सामने आ जाता है।

रही-सही कसर फिल्में और ओटीटी कंटेंट पूरा कर देते हैं। अश्लील सामग्री आज के फिल्म निर्माताओं की सबसे बड़ी पसंद है। चाहे छोटा सा सीन डालकर ही फिल्म को तड़कता भड़कता बनाएँ लेकिन वो ऐसा करते जरूर हैं। आप देखेंगे आजकल हर सामान्य फिल्म में भी अश्लीलता का छौंक लगाकर उसे दर्शकों तक पहुँचाया जाता है। शायद फिल्म निर्माताओं के लिए वो सिर्फ कंटेंट होता है जिससे उनकी कमाई के मौके बढ़ें, लेकिन नैतिकता के नाते यदि सोचें तो ये सवाल तो उठता है न कि आखिर इसे भोगेगा कौन, उनकी टारगेट ऑडियंस क्या होगी… क्या ऐसी सामग्री देखने वाले इतने परिपक्व होंगे कि उसे सिर्फ वो मनोरंजन के लिहाज से ग्रहण करें और दिमाग पर असर न होने दें… ।

आज फिल्ममेकरों से अश्लील सामग्रियों को फिल्म कंटेंट बनाने पर अगर कोई सवाल भी करे तो वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसे पेश करने के तरीकों पर बहस करने लगते हैं। आखिर में तर्क दियाय जाता है कि जो समाज में हो रहा है वो उसी को तो दिखा रहे हैं।

पोर्न देखने का असर

दुखद बात ये है कि ये पोर्न का कॉन्सेप्ट बच्चों तक पहुँचना उन्हें कितना रोगी बना रहा है इसका अंदाजा कोई लगा ही नहीं सकता। पोर्न की पकड़ में आने के बाद बच्चे मानसिक रूप से तो प्रभावित हो ही रहे हैं, साथ में उन्हें समाज से भी कोई लेना-देना नहीं रह गया। उनके भीतर हर चीज को लेकर बढ़ रहे नीरसता के भाव ने उनके अंदर से उन्हें संभालने और समझने की शक्ति को शून्य कर दिया है।इंटरनेट पर मौजूदा लेख भी बताते हैं कि पोर्न देखने की लत एक बच्चे को पहले उसके परिवार से दूर करती है, मानसिक रूप से कमजोर बनाती है। धीरे-धीरे वो इतना टॉक्सिक हो जाता है कि कोई सामान्य बात भी हो तो उसे चिड़चिड़ापन रहता है। उसके भीतर की इंसानियत खत्म कर देती है। नतीजा भाई-बहन का लिहाज नहीं करता, पिता-बेटी का। इसके अलावा निजी जीवन की बात करें तो लोग ऐसी वीडियो देखने के बाद उसे अपने पार्टनर पर आजमाने की कोशिश करते हैं और तरह-तरह से पार्टनर को टॉर्चर किया जाता है।

समाज में लड़के की गलती कुछ नहीं

इन सब बिंदुओं के अलावा मध्यप्रदेश से जो मामला सामने आया है ये एक पहलू और आपके सामने रखता है। वो क्या है इसे समझिए। एक लड़के ने अपनी बहन का रेप किया, फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी, लेकिन घर के लोग उसे बचाने में लगे रहे। जिस घर में ये सब हुआ वहाँ लड़कियाँ तीन थीं और लड़का एक। बहनों को भी अपने बहन की हत्या पर गुस्से से ज्यादा भाई को बचाने का भाव था। शायद उन्हें लगा हो कि जो चला गया उसे वो ला नहीं सकते लेकिन जो है उसे उन्हें बचाना चाहिए। ये स्थिति मध्यप्रदेश के रीवा के सिर्फ उस घर की नहीं है। ये हाल ज्यादातर जगह है। बेटे के प्रेम में कई बार परिजन अच्छे-बुरे और सही-गलत में फर्क करना भूल जाते हैं। उन्हें लड़की पर होने वाले अत्याचार, उसके साथ होने वाला भेदभाव इस हद्द तक नजर नहीं आता कि लड़की की लाश सामने होने के बाद भी वो बेटे का समर्थन करते हैं जैसे कि इस मामले में हुआ है।

ये स्थिति शर्मनाक और विचार करने वाली दोनों है। क्या लड़की के साथ हुए अत्याचार पर तभी आवाज उठाई जाएगी जब वहशी कोई बाहरवाला होगा। अगर कोई घर का उसके साथ गलत करता है तो क्यों उस हरकत को छिपाया जाता है… रीवा का मामला पहला या आखिर नहीं है। ऐसे स्थिति पहले भी आई हैं और आने वाले वक्त में भी आएँगी…बस हमें सटीक आँकड़े नहीं पता चल पाएँगे क्योंकि जरूरी नहीं हर बार ये मामले पुलिस तक पहुँचें और मीडिया में इनकी जानकारी आए। कई बार ऐसे मामले घर के भीतर ही दबाकर रख दिए जाते हैं और लड़की धीरे-धीरे मान लेती है कि जो उसके साथ हुआ वही उसकी किस्मत में था…।

आकाश बन नसीम ने शादीशुदा महिला को फँसाया, पति से तलाक दिलवा कर ली शादी: बाद में हुआ फरार, घरवालों ने कहा- मुस्लिम बनो तब घर में रखेंगे

उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला नसीम अपनी पहचान छिपाकर आकाश बन गया और फिर पंजाब के मोहाली की एक शादीशुदा महिला को अपने जाल में फँसा लिया। नसीम ने महिला को उसके पति से तलाक करवाने के बाद उसके साथ हिंदू रीति रिवाज से शादी कर ली। जब महिला को सच्चाई पता चली तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने नसीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।

दरअसल, बिजनौर शहर के कोतवाली क्षेत्र स्थित फरीदपुर काज़ी उर्फ खेड़की का रहने वाला नसीम चंडीगढ़ के मोहाली में बढ़ई का काम करता है। वहाँ उसकी मुलाकात रौशनी नाम की एक महिला से हुई। रौशनी हिंदू है और पहले से ही शादीशुदा थी। महिला ने बताया कि नसीम ने अपना नाम आकाश बताया और उससे दोस्ती कर ली। इसके बाद धीरे-धीरे उसने उससे नजदीकियाँ बढ़ा ली।

जागरण के अनुसार, नसीम अब रौशनी को शादी का ख्वाब दिखाने लगा था। शादी के नाम पर उसने महिला को अपने पति को तलाक देने के लिए उकसाने लगा। उसकी बातों में आकर महिला ने अपने पति को तलाक दे दी और इसमें आकाश बने नसीम ने उसकी सहायता की। तलाक के बाद उसने हिंदू रीति-रिवाज के साथ उससे शादी कर ली। इसके बाद दोनों पति-पत्नी बनकर साथ रहने लगे।

शादी के कुछ समय बाद नसीम उर्फ आकाश रौशनी को बिना बताए मोहाली से फरार हो गया। वह दो महीने तक वापस नहीं लौटा। इसके बाद उसे तलाशते हुए महिला 16 जुलाई 2024 को बिजनौर के उसके गाँव पहुँची। उस समय नसीम घर पर नहीं मिला। वहाँ नसीम के परिजनों ने उसके साथ मारपीट की। नसीम के परिजनों ने बताया वह साथ नहीं रह सकती है, क्योंकि वे मुस्लिम हैं।

उन्होंने शर्त रखी कि अगर महिला इस्लाम कबूल कर मुस्लिम बन जाएगी तो उसका नसीम से निकाह करा देंगे और फिर साथ रखेंगे। हालाँकि, रौशनी इसके लिए तैयार नहीं हुई। वहीं पता चला कि उसका नाम नसीम नहीं, बल्कि आकाश है। इसके बाद पीड़ित थाने पहुँची और उसने तहरीर दी। इस घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठन के लोग भी थाने पहुँचे और हंगामा करने लगे।

महिला की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपित नसीम उर्फ आकाश, भाई वसीम, पिता शमीम, और ताऊ हासिल के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। नसीम के खिलाफ झाँसा देकर शादी करने और उसके तथा उसके परिजनों के खिलाफ मारपीट की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपितों को जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

मनु भाकर ने दिलाया पेरिस ओलंपिक का पहला पदक, 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतिस्पर्धा में जीता कांस्य पदक, कोरियन खिलाड़ियों को दी कड़ी टक्कर

पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर ने मेडल टैली में भारत का खाता खोल दिया है। मनु भाकर ने 10 मीटर विमेंस एयर पिस्टल में कांस्य पदक जीत लिया है। उन्होंने आखिर तर कोरियाई खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर दी, लेकिन वो तीसरे नंबर पर रही। इस स्पर्धा का स्वर्ण और रजत पदक, दोनों ही दक्षिण कोरियाई खिलाड़ियों ने जीता है। दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी ने ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता है। मनु भाकर ने फाइनल में 221.7 अंक के साथ कांस्य पदक जीता है।

आखिर तक कोरियाई खिलाड़ियों को दी कड़ी टक्कर

मनु भाकर एक समय सिल्वर की तरफ भी बढ़ रही थी और आखिरी शॉट से पहले .1 अंक से आगे भी थी। आखिरी शॉट से पहले मनु का स्कोर 211.4 अंक था, तो कोई खिलाड़ी का 211.3… दोनों ही खिलाड़ियों ने आखिरी शॉट बेहतरीन लगाया, जिसमें मनु ने 10.3 का शॉट लगाया, तो कोरियाई खिलाड़ी ने अपनी सांसों पर काबू रखते हुए 10.5 का स्कोर किया, जिसके दम पर वो महज 0.1 अंक से आगे निकल गई। हालाँकि आखिरी शॉट में उनका स्कोर उतना बेहतर नहीं रहा और 9.6 का ही स्कोर लगा सकी, वहीं YJ Oh ने 243.2 अंक के साथ ओलंपिक रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल जीता, तो YJ KUM 241.3 अंकों के साथ सिल्वर पदक जीती। मनु 221.7 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रही और भारत का खाता खोल दिया।

भारत की ओलंपिक टीम ने मनु को बधाई दी है।

मनु भाकर क्वालिफिकेशन राउंड में भी तीसरे स्थान पर रही थीं। हालाँकि क्वालिफिकेशन राउंट में टॉप पर रही हंगरी की वी मेजर नाम की खिलाड़ी फाइनल मुकाबले में आखिरी यानी आठवें नंबर पर रहीं। इसी के साथ मनु भाकर शूटिंग में भारत को ओलंपिक पदक दिलाने वाली भारत की पहली महिला एथलीट बन गई हैं। यही नहीं, उन्होंने शूटिंग में भारत के पदक के 12 साल के सूखे को भी खत्म किया। 2012 लंदन ओलंपिक में गगन नारंग और विजय कुमार ने शूटिंग में पदक जीता था।

फेक न्यूज फैलाने वाले मोहम्मद जुबैर को X पर फॉलो करते मिले मुख्य चुनाव आयुक्त: जनता ने रगड़ दिया… अब राहुल गाँधी को भी कर दिया अनफॉलो

भारत में लोकसभा चुनाव हो या राज्यों में विधानसभा चुनाव। उस समय देश में सबसे ज्यादा ताकतवर पद कोई होता है, तो वो होता है मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) का। लेकिन भारत के मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, जिनके नेतृत्व में चुनाव आयोग ने 2 माह पहले ही दुनिया के सबसे बड़े चुनाव अभियान को संपन्न कराया है, वो सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने की फैक्ट्री मोहम्मद जुबैर को फॉलो करते पाए गए।

यही नहीं, चुनाव आयोग पर सबसे ज्यादा हमला बोलने वाले राहुल गाँधी को भी वो एक्स पर फॉलो करते पाए गए। हालाँकि सोशल मीडिया पर जिस बात को लेकर लोगों का गुस्सा फूटा, वो मामला जुबैर को फॉलो करने से जुड़ा था।

राजीव कुमार की फॉलोविंग लिस्ट में चुनाव आयोग का आधिकारिक हैंडल, आल इंडिया रेडियो न्यूज, राहुल गाँधी और मोहम्मद जुबैर था। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से फेक न्यूज पेडलर मोहम्मद जुबैर को फॉलो करने की बात सामने आते ही सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई। जिसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग के हैंडल को छोड़कर सभी को अनफॉलो कर दिया।

इस मामले में कई यूजर्स ने उन पर गुस्सा निकाला और पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त मोहम्मद जुबैर को क्यों फॉलो करते हैं, जो कि फेक न्यूज फैलाने वाला व्यक्ति है। वो चुनाव आयोग के खिलाफ फेक न्यूज फैलाकर उसे बदनाम करता रहा है।

कई लोगों ने बॉलीवुड फिल्म ‘द कश्मीर फाइल’ की मशहूर लाइन को लिखा, “सरकार भले ही आपकी हो, सिस्टम हमारा है।”

मिक्कू नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा, “राजीव साब एक ऐसे आदमी को फॉलो कर रहे हैं जिसने चुनाव के समय चुनाव आयोग और ईवीएम में धांधली का दावा करने वाली हर पोस्ट को बढ़ावा दिया।”

जयपुर डायलॉग्स ने लिखा, “भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ट्विटर पर सिर्फ़ 4 अकाउंट फ़ॉलो कर रहे हैं: चुनाव आयोग, राहुल गाँधी, एआईआर न्यूज़ और मोहम्मद ज़ुबैर, लेकिन अंदाज़ा लगाइए कि भारत में चुनावों को कौन प्रभावित कर रहा है?”

सोशल मीडिया पर जबरदस्त गुस्सा देखते हुए सीईसी राजीव कुमार ने चुनाव निकाय को छोड़कर फर्जी खबर फैलाने वाले मोहम्मद जुबैर के एक्स हैंडल और विपक्ष के मौजूदा नेता राहुल गाँधी समेत बाकी सभी अकाउंट को अनफॉलो कर दिया। अपनी मौजूदा फॉलोइंग लिस्ट के अनुसार, सीईसी राजीव कुमार अब केवल चुनाव निकाय के आधिकारिक एक्स हैंडल को ही फॉलो कर रहे हैं।

(फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार केवल एक अकाउंट को फॉलो कर रहे हैं – चुनाव आयोग का आधिकारिक एक्स हैंडल)

इस मामले में लोगों ने सोशल मीडिया के मंच के सही उपयोग की तारीफ की है और कई लोगों ने लिखा है कि सोशल मीडिया कभी-कभी अच्छे कामों को अंजाम देने का मंच बन जाता है।

सऊदी अरब में महिलाएँ आजाद, जो चाहें सो पहने, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का आदेश: सच में? जानिए पूरी बात

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद (MBS) का एक बयान वायरल हो रहा है। इसमें कथित तौर पर दावा किया गया है कि मुहम्मद बिन सलमान ने महिलाओं के कपड़ों चुनने की आजादी का समर्थन किया है। उनका बयान ”केवल महिलाएँ ही तय कर सकती हैं कि उन्हें क्या कपड़े पहनना है।” के तौर पर प्रचारित हो रहा है।

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और मिस यूनिवर्स में भाग ले रही सऊदी अरब की पहली महिला रूमी अलकाहतानी की तस्वीरों के साथ यह बयान पोस्ट किया है। इन पोस्ट में लिखा गया है “MBS ने घोषणा की है कि अब से, सऊदी अरब में महिलाएँ पुरुषों की इजाजत के बिना अपनी पसंद के कपड़े पहन सकती हैं।”

ऐसा ही पोस्ट करने वाले ‘डॉ मालौफ’ नाम के एक यूजर की पोस्ट पर लोगों ने ‘कम्युनिटी नोट्स’ का इस्तेमाल किया। इसमें इस पोस्ट का खंडन करते हुए बताया गया कि असल में मोहम्मद बिन सलमान क्या कह रहे थे। नोट के अनुसार, मोहम्मद बिन सलमान ने ऐसी कोई बात नहीं की है। मोहम्मद बिन सलमान ने केवल इतना कहा कि इस्लामी कानून काले अबाया या काले हिजाब को जरूरी नहीं मानते। लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा कि महिलाएँ जो चाहें पहन सकती हैं।

नोट में कहा गया, “इसकी शुरुआत इस तरह से होती है कि शरिया के कानून बहुत साफ हैं और इसमें लिखा है कि महिलाएँ पुरुषों की तरह सभ्य, सम्मानजनक कपड़े पहनें। हालाँकि, इसमें अलग से काले अबाया या काले सिर स्कार्फ का उल्लेख नहीं है।”

एक अन्य सोशल मीडिया यूजर की पोस्ट पर भी ‘कम्युनिटी नोट्स’ लगे गए, इसने भी यही दावा किया था। इसमें लिखा गया, “क्राउन प्रिंस ने 2018 में यह बात कही थी, उनका कहना है कि महिलाओं को इस्लाम में बताए गए कपड़ों की बड़ी रेंज में से कुछ भी पहनने का अधिकार है। इसमें पोस्ट में दिखाने जाने वाले दूसरे या मॉडर्न कपड़ों का कोई लेनादेना नहीं है।”

असल में जो बात 2024 में वायरल हो रही है वह उन्होंने अमेरिकी नेटवर्क CBS न्यूज़ के साथ उनके 2018 में कही थी। उनके बयान को अब गलत तरीके से समझा जा रहा है, क्योंकि जब उन्होंने महिलाओं के खुद के कपड़े चुनने के बारे में बात की, तो उन्होंने पुरुषों की अनुमति के बिना कुछ भी पहनने की बात को लेकर कुछ नहीं कहा।

मुहम्मद बिन सलमान का असल बयान था, “शरिया के कानूनों में कानून बहुत साफ कि महिलाएँ पुरुषों की तरह सभ्य, सम्मानजनक कपड़े पहनें। हालाँकि, इसमें अलग से काले अबाया या काले सिर को ढंकने के बारे में नहीं लागू होता। यह पूरी तरह से महिलाओं की इच्छा है कि वह किस प्रकार का सभ्य और सम्मानजनक कपड़े पहनना पसंद करती हैं।”

यह बयान पत्रकार नोरा ओ’डॉनेल द्वारा के सवाल के जवाब में था। उन्होंने पूछा था, “आपने कहा है कि आप ‘सऊदी अरब को वापस उसी जगह ले जा रहे हैं, जो हम पहले था। यानी एक उदारवादी इस्लामी देश, इसका क्या मतलब है।”

मुहम्मद बिन सलमान ने इस पर कहा था, “हमारे यहाँ कट्टरपंथी हैं जो महिलाओं और पुरुषों के बीच घुलने-मिलने पर रोक लगाते हैं और एक पुरुष और एक महिला के बीच अकेले और ऑफिस में उनके साथ होने के बीच अंतर नहीं कर पा रहे। इनमें से कई के विचार पैगंबर और खलीफाओं के समय के जीवन के खिलाफ हैं।”

गौरतलब है कि सऊदी अरब में ही इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहर, मक्का और मदीना हैं। सख्त सामाजिक और धार्मिक नियंत्रण लंबे समय से सऊदी अरब के समाज का हिस्सा रहा है जो अरब प्रायद्वीप का सबसे बड़ा देश है। सऊदी अरब ने हाल ही में महिलाओं को कार चलाने की अनुमति दी है सिनेमाघर खोल रहा है म्यूजिक शो आयोजित कर रहा है।