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20 साल की यशश्री को दाऊद शेख ने चाकुओं से गोदा, प्राइवेट पार्ट को भी नहीं छोड़ा… हत्या के बाद चेहरे को कुचला, काटे बाल: POCSO में जेल भेजवाने का ‘बदला’

महाराष्ट्र के नवी मुंबई में लगभग 20 वर्षीय युवती की चाकू से गोद-गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी गई है। यशश्री शिंदे के रूप में पहचानी गई युवती का वीभत्स शव उरण रेलवे स्टेशन के पास झाड़ियों में मिला है। पहचान मिटाने के लिए उसके चेहरे को कुचल दिया गया था। उसके निजी अंगों से लेकर शरीर पर जगह-जगह चाकू गोदे गए थे। हत्या का आरोप उसके जानकार दाऊद शेख पर है, जो फिलहाल फरार है।

नवी मुंबई के पुलिस उपायुक्त विवेक पानसरे ने बताया कि पुलिस को 27 जुलाई की रात करीब दो बजे फोन आया कि उरण रेलवे स्टेशन के पास झाड़ियों में एक लड़की का शव मिला है। शव पर कई चोट के निशान और चाकू से वार के निशान हैं। इससे पता चलता है कि उसकी बहुत बेरहमी से हत्या की गई है। उधर यशश्री की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज थी। बाद में परिजनों ने यशश्री को कपड़ों से पहचाना।

जानकारी के मुताबिक, यशश्री के प्राइवेट अंगों पर काफी वार किए गए हैं। उसके हाथ-पैर तोड़ दिए गए हैं। पीठ और पेट पर धारदार हथियार से कई वार किए गए हैं। उसकी छाती पर भी काफी निशान हैं। चेहरे को भी बुरी तरह कुचल दिया गया है। यशश्री के शव के बाल भी काट दिए हैं। शव के कपड़े भी फटे हुए मिले हैं। हत्या से पहले उसके साथ रेप हुआ है या नहीं, इसके लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

मृतका के पिता सुरेश शिंदे ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उनकी पत्नी ने 25 जुलाई को नवी मुंबई के उरन पुलिस स्टेशन में उनकी बेटी यशस्वी शिंदे के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने इसमें मामला दर्ज करते हुए खोजबीन शुरू की। इसी बीच रेलवे स्टेशन के पास एक युवती का कुचला शव मिला और उसके कपड़ों ने परिजन ने यशश्री के रूप में पहचान की।

दरअसल, मृतक यशश्री उरण की रहने वाली थी और बेलापुर में एक कॉल सेंटर में काम करती थी। वह 25 जुलाई 2024 को सुबह घर से निकली, लेकिन वापस घर नहीं लौटी। हर जगह खोजने के बाद परिजनों ने थक-हार कर पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। इसके बाद पुलिस ने जाँच शुरू की तो उसे अंतिम बार लगभग 1:30 बजे उरण मार्केट एरिया में देखा गया।

पुलिस ने उसके कॉल रिकॉर्ड खंगाला तो उसके सीडीआर से पता चला कि मृतका का एक नंबर पर लगातार घंटों बातचीत करती थी। यह नंबर दाऊद शेख नाम के लड़के का है। गमुशुदगी के दौरान पुलिस को अंदेशा हुआ कि यशश्री कहीं-कहीं भागकर दाऊद शेख के साथ चली गई है। हालाँकि, पुलिस को पता चला कि जिस दिन से लड़की गायब है, उसी दिन से उसका फोन भी बंद है।

पुलिस ने दाऊद शेख का बैकग्राउंड खंगाला तो पता चला कि यशश्री और उसके परिवार ने साल 2019 में उसके खिलाफ पॉक्सो केस में एफआईआर दर्ज करवाई थी। लड़की के परिजनों ने दाऊद शेख को यशश्री के साथ गलत हरकत करते हुए देख लिया था। उस समय यशश्री नाबालिग थी। इसके बाद पॉक्सो में मामला दर्ज करते हुए पुलिस ने दाऊद शेख को गिरफ्तार कर लिया था।

लंबे समय तक जेल में रहने के बाद जब दाऊद शेख बाहर आया तो कहा जाता है कि वह कर्नाटक चला गया था। पुलिस को यह भी आशंका है कि वह जेल से निकलने के बाद यशश्री से बदला लेना चाहता था। इसके लिए उसने यशश्री को फिर से अपने चंगुल में फँसाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, उसने यशश्री से बार-बार माफी माँगी और फिर से दोस्ती करने के लिए आग्रह किया।

यशश्री उसकी बातों में आ गई और दोनों के बीच फिर से बातचीत होने लगी। दाऊद और यशश्री घंटों बातें किया करते थे। पुलिस इस सवाल में उलझी हुई हुई है कि क्या वाकई दाऊद बदला लेने के लिए नाटक किया था या कुछ और था। यदि दाऊद को यशश्री से मोहब्बत थी तो ऐसा क्या हुआ कि उसने इतनी बेरहमी से यशश्री की हत्या कर दी। दाऊद शेख भी उरण का ही रहने वाला है।

जाँच में यह भी पता चला है कि घटना के दिन दाऊद की लोकेशन उरण में थी। इसलिए आशंका जताई जा रही है कि उसने कर्नाटक से उरण आने के बाद यशश्री को बुलाया और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी और भाग गया। हालाँकि, हत्या की असली वजह उसकी गिरफ्तारी के बाद ही पता चल पाएगा। पुलिस फिलहाल उसकी जोर-शोर से तलाश कर रही है। एक टीम कर्नाटक भेजी गई है। है।

इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह का इजरायल पर हमला,बच्चों समेत 12 की मौत: फुटबाल मैच पर दागे रॉकेट, बोले नेतन्याहू- कीमत चुकाएँगे आंतकी

इजरायल के मजदल शम्स इलाके में इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह ने रॉकेट से हमला किया है। इस हमले में बच्चों सहित 12 की मौत हो गई है। हमले में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। इजरायल ने इस हमले के बाद आतंकियों से बदला लेने की बात कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल के गोलन पहाड़ियों में स्थित मजदल शम्स में यह हमला शनिवार (27 जुलाई, 2024) को हुआ। यह हमला एक फुटबाल मैदान को निशाना बना कर किया गया। लेबनान के भीतर से किए गए इस हमले में बड़ी संख्या में रॉकेट हिजबुल्लाह ने दागे।

हमले के वक्त फुटबाल मैदान में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। हमले के कारण 10 की मौके पर ही मौत हो गई जबकि 2 घायलों को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। बताया गया कि हमले में जान गंवाने वाले सभी 10-20 वर्ष की आयु के थे। हमले से पहले खतरे का सायरन बजा था लेकिन रॉकेट इतनी तेजी से आए कि लोगों को भागने का मौका ही नहीं मिला।

बताया गया है कि यह हमला लेबनान की सीमा के भीतर बसे छेबा गाँव से हुआ। यहाँ से इजरायल पर हिजबुल्लाह ने कई रॉकेट दागे और फुटबाल मैदान को निशाना बनाया। हमले के बाद चारों तरफ लाशें बिखर गईं। हिजबुल्लाह ने पहले इस हमले की जिम्मेदारी लेकिन बाद में बच्चों की मौत के खबर के बाद अपने स्टैंड से पलट गया।

हिजबुल्लाह ने पहले यह स्वीकार की कि उसने इस इलाके में कुछ इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालाँकि, इसके बाद उसने कहा कि वह इन हमलों में शामिल नहीं है। दूसरी तरफ इजरायल ने इस बात की पुष्टि की है कि यह हमला हिजबुल्लाह ने ही किया था।

इजरायल ने बताया है हमले में ईरान में बने रॉकेट का उपयोग हुआ है। इसका इस्तेमाल सिर्फ हिजबुल्लाह ही करता है। जिस रॉकेट से इजरायल के भीतर हमला हुआ, उसमें 50 किलो गोला-बारूद भरा हुआ था। इसने फुटबाल मैदान पर भारी तबाही मचाई।

हिजबुल्लाह का यह हमला इजरायल की एक आतंक विरोधी कार्रवाई के बाद हुआ। इजरायल ने शनिवार को लेबनान के भीतर हवाई हमले में एक आतंकी ठिकाने को उड़ा दिया। इस हवाई हमले में 4 हिजबुल्लाह आतंकियों का सफाया हो गया। यह हिजबुल्लाह के नकबा फ़ोर्स के सदस्य थे।

इजरायली सेना के प्रवक्ता रियल एडमिरल डैनियल हगारी ने कहा, “यह हमला हिजबुल्लाह का असली चेहरा दिखाता है, एक आतंकवादी संगठन जो शनिवार की शाम को फुटबॉल खेल रहे बच्चों को निशाना बनाता है और उनको मार देता है।”

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हमले की आलोचना की है और बदले की बात कही है। उन्होंने कहा, “आप की तरह, मैं भी स्तब्ध हूँ। मारे गए लोगों में फुटबॉल खेल रहे छोटे बच्चे और अन्य लोग भी शामिल हैं। इन दृश्यों को देखकर हमारा दिल टूट गया है। हम इस मुश्किल घड़ी में द्रुज समुदाय के परिवारों के साथ हैं। जब से मुझे इस आपदा के बारे में बताया गया है, मैं लगातार सुरक्षा सम्बन्धी एक्शन ले रहा हूँ। मैं कह सकता हूँ कि इजरायल इस पर चुपचाप नहीं बैठेगा।”

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह को अब वह कीमत अदा करनी पड़ेगी जो उसने कभी नहीं अदा की है। इजरायल पर हुए इस हमले की आलोचना अमेरिका समेत तमाम देशों ने की है। यह हमला इजरायल और हमास-हिजबुल्लाह जैसे संगठनों के बीच अक्टूबर 2023 से चालू युद्ध के सिलसिले में आया है। अब इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच बड़े युद्ध की आशंका जताई जा रही है।

विदेश जाने से पहले नहीं लेना होगा कोई टैक्स सर्टिफिकेट, फैलाई जा रही झूठी खबर: जानें क्या है नियम, किस पर होता है लागू

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के बजट के अंतर्गत विदेश यात्रा के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति भारत छोड़ कर बाहर जा रहा है, तो उसे टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट में अब काले धन ना होने के संबंध में भी अनुमति लेनी पड़ेगी। हालाँकि, यह नियम भारतीय नागरिकों पर लागू नहीं होगा। लेकिन कई जगह इसे इस तरह प्रचारित किया जा रहा है कि अब भारतीय नागरिकों को विदेश यात्रा पर जाने से पहले टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा।

इस नए नियम को गलत संदर्भ में पेश करके यह दिखाया जा रहा है कि यदि कोई भी भारतीय, विदेश यात्रा पर जाता है तो उसे नए बजट के बाद अब टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा। हालाँकि, इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। दरअसल, यह नियम पहले से हैं और इनमें केवल एक बदलाव अब किया गया है।

क्या होता है टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट?

टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट, देश की टैक्स एजेंसियों द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र होता है। इस संबंध में नियम इनकम टैक्स एक्ट के अनुच्छेद 230 में बताए गए हैं। इसके अंतर्गत एजेंसियाँ प्रमाणित करती हैं कि जिस भी व्यक्ति को यह दिया जा रहा है, उसने भारत के भीतर नियमानुसार अपने सारे टैक्स भर दिए हैं और उसका कोई भी बकाया भारत छोड़ने से पहले नहीं है।

यह टैक्स सर्टिफिकेट, आयकर आयुक्त के जरिए जारी होता है। इसके पहले आवेदन कर्ता को अपने सभी टैक्स जमा करके प्रमाण सहित आवेदन करना होता है। इसके अंतर्गत इनकम टैक्स, सम्पत्ति टैक्स, गिफ्ट टैक्स समेत अन्य टैक्स जमा करने का प्रमाण दिखाना होता है। यह व्यवस्था लम्बे समय से जारी है।

क्या बदलाव किया गया है?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 का बजट पेश करने के दौरान टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट सम्बन्धित एक नए नियम का ऐलान किया है। इसके अंतर्गत ऊपर बताए गए टैक्स के जमा होने के साथ ही इस बात को प्रमाणित करना होगा कि देश छोड़ने वाले ने सारी कमाई वैध माध्यमों से की है और उसने कोई भी काला धन अर्जित नहीं किया है। काले धन को रोकने से सम्बन्धित यह नियम 1 अक्टूबर, 2024 से लागू किए जाएँगे। अक्टूबर तक भारत से बाहर जाने वालों को पुरानी प्रक्रिया से ही गुजरना होगा।

किसे देना होगा यह सर्टिफिकेट?

इस सर्टिफिकेट का भारतीय नागरिकों से कोई लेना-देना नहीं है। इसके अंतर्गत सारे नियम ऐसे लोगों पर लागू होते हैं जो विदेशी नागरिक हैं लेकिन भारत में आकर धन अर्जित कर रहे हैं। उनका पैसा कमाने का यह तरीका कोई व्यापार भी हो सकता है और नौकरी भी हो सकती है।

इसके अंतर्गत यदि कोई भी विदेश से आया पैसा कमाने के बाद व्यक्ति भारत से बाहर अपने देश जाता है तो उसे यह सर्टिफिकेट लेना होगा। इसके अलावा यदि वह व्यक्ति भारत में नहीं रहता लेकिन भारत से आय अर्जित करता है तो उसे भी भारत यात्रा के बाद यह सर्टिफिकेट लेना होगा।

यानी यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश की यात्रा करता है तो उसे इस सर्टिफिकेट को लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसे में यह दावा कि देश के नागरिकों को भारत से बाहर यात्रा करने से पहले अब इनकम टैक्स सर्टिफिकेट लेना होगा, सरासर गलत है।

हालाँकि, ऐसे मामलों में जहाँ यह टैक्स एजेंसियों को यह शक हो कि किसी नागरिक ने टैक्स नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके यह सर्टिफिकेट लेने के आदेश दिए जा सकते हैं। इसके अलावा इस सर्टिफिकेट की आवश्यकता ऐसे लोगों को भी पड़ सकती है जो भारत छोड़ विदेश में बस रहे हैं।

दिल्ली के Rau IAS एकेडमी में बारिश के कारण 3 की मौत: बेसमेंट में पढ़ाई कर रहे थे छात्र, तेज बहाव के साथ 12 फुट भरा पानी

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित राव IAS एकेडमी के बेसमेंट में अचानक पानी भर जाने से सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे तीन विद्यार्थियों की डूबकर मौत हो गई है। एनडीआरएफ और गोताखोरों की टीम ने कई घंटों की मशक्कत के बाद दो छात्राओं और एक छात्र के शवों को बरामद कर लिया। इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही जाँच के आदेश भी दिए गए हैं।

मृतकों की पहचान 25 वर्षीय तानिया सोनी पुत्री विजय कुमार, 25 वर्षीय श्रेया यादव पुत्री राजेंद्र यादव और 28 वर्षीय नेवीन डाल्विन के रूप में हुई है। तानिया और श्रेया उत्तर प्रदेश की रहने वाली थीं, जबकि नेवीन केरल का रहने वाला था। नेवीन JNU से PhD कर रहा था। वह बीते लगभग आठ महीने से दिल्ली के पटेल नगर में रह रहा था। घटना के वक्त वह कोचिंग की लाइब्रेरी में पढ़ने गया था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शनिवार (27 जुलाई 2024) की शाम को इलाके में तेज बारिश हुई थी। इसके कारण कोचिंग के बेसमेंट में पानी घुस गया। कहा जा रहा है कि पानी का बहाव इतना तेज था कि कई छात्र-छात्राओं को बचने का मौका नहीं मिला और वे बेसमेंट में ही फँस कर रह गए। कहा जा रहा है कि घटना के वक्त बेसमेंट में करीब 30 विद्यार्थी थे।

घटना से प्रभावित एक छात्र ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज था कि वे सीढ़ियाँ नहीं चढ़ पा रहे थे। 2-3 मिनट के अंदर पूरे बेसमेंट में लगभग 12 फुट पानी भर गया। छात्र का कहना है कि निकलने के लिए वहाँ रस्सियाँ फेंकी गईं, लेकिन पानी इतना गंदा था कि कुछ भी नहीं दिख रहा था। वहाँ से एक-एक करके लोग निकाले जा रहे थे, लेकिन 2 लड़कियाँ और एक लड़का निकल नहीं पाए।

इस हादसे को लेकर एक अन्य चश्मदीद ने बताया, “राव IAS अकादमी के बेसमेंट में बायोमैट्रिक लगा हुआ है। बिना अंगूठा लाए, आप यहाँ से बाहर नहीं निकल सकते हैं। मुझे लगता है कि पानी की वजह से बायोमैट्रिक मशीन खराब हो गई थी और कोई भी बाहर नहीं निकल सका।” उसने आगे कहा, “इस हादसे के लिए प्रशासन जिम्मेदार है। यहाँ के विधायक और सांसद एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं।”

पुलिस अधिकारी का कहना है कि भारी बारिश के कारण सड़क पर पहले से ही पानी भरा था। इसके कारण बेसमेंट में पानी भरने में समय नहीं लगा। कोचिंग के बेसमेंट में पानी भरने के बाद उसे निकालने के लिए मोटर पंप का इस्तेमाल किया गया था। बताया जा रहा है कि चार मोटर पंप के जरिए बेसमेंट से पानी निकाला गया। इसके बाद गोताखोर को उतारकर शव को निकाला गया।

फायर चीफ ऑफिसर ने कहा कि शाम 7 बजे उनके पास कॉल आई थी। उन्हें बताया गया कि कोचिंग सेंटर में पानी भर गया है और इसमें कुछ बच्चे फँसे हैं। वहाँ 5 गाड़ियाँ भेजी गईं। बेसमेंट से पानी निकाला जा रहा था, लेकिन पानी वापस बेसमेंट में जा रहा था। पानी का लेवल थोड़ा कम हुआ तो एक बच्ची का शव निकाला गया। उन्होंने कहा कि बेसमेंट में घुसा पानी बारिश और नाले का था।

राव IAS एकेडमी के बगल में अन्य कोचिंग संस्थान या दुकान-मकान हैं, लेकिन उनमें बारिश का पानी नहीं घुसा। कहा जा रहा है कि कोचिंग सेंटर के ठीक बगल में ही एक ड्रेनेज पाइप है। आशंका है कि यह पाइप फट गई, जिससे कोचिंग के बेसमेंट में बाढ़-सी आ गई और पानी इतनी तेजी से भरा कि ये 3 छात्र-छात्राएँ वहाँ से निकल नहीं पाए। हालाँकि, इसके पीछे की असली वजह की जाँच की जा रही है। 

डीसीपी हर्षवर्धन ने कहा कि तीनों विद्यार्थियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इसके साथ ही इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज करके दो लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। वहीं, दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी ने इस घटना की मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए गए हैं और 24 घंटे में रिपोर्ट माँगी गई है। आतिशी ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा।

इस घटना के बाद छात्रों ने प्रदर्शन भी किया है। प्रदर्शन कर रहे एक छात्र का कहना है कि उसे आपदा प्रबंधन के लोगों ने कहा कि इस घटना में 8 से 10 लोग मारे गए हैं। घटनास्थल पर भी छात्रों को जाने से रोका गया है। इससे उनमें नाराजगी है। बता दें कि पिछले सप्ताह वेस्ट पटेल नगर में बारिश के कारण जलजमाव होने और उसमें करंट दौड़ने के कारण UPSC की तैयारी कर रहे एक छात्र नीलेश की मौत हो गई थी। नीलेश इस साल मुख्य परीक्षा देने वाला था।

केरल में कारगिल विजय दिवस के दूसरे ही दिन पाकिस्तानी तानाशाह परवेज मुशर्रफ का सम्मान, बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों का था प्लान

भारत देश को बाहरी दुश्मनों से जितना खतरा है, उससे कहीं ज्यादा देश के अंदर के दुश्मनों से, देश के दुश्मनों को अपना हीरो मानने वाले लोगों से। पूरे देश ने सेना के शौर्य, और पाकिस्तान पर भारत की जीत को याद करते हुए 26 जुलाई 2024 को ही ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया है। जिस समय देश कारगिल विजय दिवस मनाने की तैयारियों में जुटा था, ठीक उसी समय कारगिल युद्ध की सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान के उस समय आर्मी चीफ और बाद में पाकिस्तान के तानाशाह बने भारत के सबसे बड़े दुश्मन परवेज मुशर्रफ को सम्मानित किए जाने की भी योजना बनाई जा रही थी। जी हाँ, भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंकों में से एक बैंक ऑफ इंडिया के केरल की कर्मचारी यूनियन 27 जुलाई 2024 को परवेज मुशर्रफ को ही सम्मानित करने जा रही थी।

बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ यूनियन (केरल) ने अपने 23वें स्टेट कॉन्फ्रेंस में पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ को सम्मानित करने का फैसला किया था। बैंक यूनियन की राज्य समिति द्वारा जारी पोस्टर में भी 27 जुलाई 2024 को अलप्पुझा में आयोजित राज्य सम्मेलन के दौरान मुशर्रफ को श्रद्धांजलि देने की तैयारी की योजना के बारे में बताया गया है। बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ यूनियन (केरल) अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) से जुड़ा है। ये पोस्टर 26 जुलाई 2024 को सामने आए, ठीक उसी दिन, जब कारगिल के सबसे बड़े खलनायक की कारस्तानी पर भारतीय सेना की जीत को याद दिया जा रहा था। ये मुशर्रफ की ही खोपड़ी की उपज थी कि उसने मुजहिद्दीनों के वेश में पाकिस्तानी सेना को भारत से जंग के लिए भेजा था।

बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ यूनियन (केरल) द्वारा मुशर्रफ को सम्मानित करने की योजना का तीखा विरोध हुआ, जिसके बाद यूनियन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। खास बात ये है कि जिस कार्यक्रम में मुशर्रफ को सम्मानित किया जाना था और उसे श्रद्धांजलि दी जानी थी, उसका उद्धाटन कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में से एक और मौजूदा सांसद केसी वेणुगोपाल को करना था।

ये मामला सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने अलपुझा में बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ यूनियन (केरल) के सम्मेलन स्थल पर विरोध प्रदर्शन किया। श्रद्धांजलि सूची से नाम हटाए जाने के बाद भी उन्होंने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि सरकारी बैंक के कर्मचारी भारत पर हमला करने वाले पाकिस्तानी तानाशाह को श्रद्धांजलि दे सकते हैं, लेकिन पिछले महीने तक उन्हें आरएसएस में शामिल होने की अनुमति नहीं थी।

नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स और नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स ने इस घटनाक्रम पर बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ यूनियन (केरल) के राष्ट्रविरोधी चरित्र की निंदा की है। इस बारे में जारी एक बयान में कहा गया है कि संगठन ने जानबूझकर कारगिल विजय दिवस के ठीक एक दिन बाद मुशर्रफ को श्रद्धांजलि देने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “यह बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों का भी अपमान है, जिनमें से कुछ ने कारगिल युद्ध में भी भाग लिया था और जो वर्तमान में बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत हैं। हम बहुत दुख के साथ इस राष्ट्रविरोधी कृत्य की निंदा करना चाहते हैं।”

बैंकर्स वॉयस द्वारा एक्स पर पोस्ट किए गए बयान में कहा गया है, “उनकी मूल संस्था AlBEA का भी राष्ट्रविरोधी तत्वों का समर्थन करने का एक लंबा इतिहास रहा है।” बयान में आगे कहा गया है, “भारत चीन संघर्ष के दौरान हमारे सैनिकों को रक्तदान के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने और हाल ही में टुकड़े टुकड़े गैंग और फिलिस्तीनियों को दान देने के उनके कृत्यों को याद रखें, जो वैश्विक आतंकवादी संगठन हमास का समर्थन करते हैं।”

इस मामले में वित्त मंत्रालय से तुरंत हस्तक्षेप करने और उचित जाँच शुरू करने की माँग की गई है। बयान में कहा गया, “हम बैंक ऑफ इंडिया से आग्रह करते हैं कि इस बैठक में शामिल उन कर्मचारियों को निष्कासित किया जाए, जो बहादुर शहीदों का अपमान कर रहे हैं और बैंक को बिना किसी देरी के इस ट्रेड यूनियन की मान्यता रद्द कर देनी चाहिए। हम बीएमएस से आग्रह करते हैं कि वह भारत सरकार के अधिकारियों को उचित कार्रवाई शुरू करने के लिए सूचित करे।”

गौरतलब है कि शुक्रवार को कारगिल विजय दिवस के ठीक दो दिन बाद बैंक कर्मचारी संघ द्वारा मुशर्रफ को सम्मानित किया जाना था। कारगिल युद्ध के दौरान परवेज़ मुशर्रफ़ ही पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष थे और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने दावा किया है कि कारगिल आक्रमण की योजना मुशर्रफ़ ने बनाई थी और उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। हालाँकि, मुशर्रफ़ ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा है कि मुशर्रफ़ को मिशन शुरू होने से पहले ही इसके बारे में जानकारी दे दी गई थी।

बैंक ऑफ इंडिया एक सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है, जिसका मुख्यालय मुंबई में है। बैंक प्रबंधन ने अभी तक इस घटनाक्रम पर कोई बयान जारी नहीं किया है।

एक तरफ अमरनाथ यात्रा को दहलाने की साजिश विफल, दूसरी तरफ काँवड़ यात्रा की सुरक्षा के लिए ATS को सँभालनी पड़ी जिम्मेदारी: ‘ढाई मोर्चे’ पर लड़ता भारत

अब से करीब 7 साल पहले जून 2017 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत अपने दुश्मनों से ढाई मोर्चे पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार है और देश की रक्षा के लिए भी। उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में हमें पाकिस्तान-चीन के साथ ही देश के अंदर के दुश्मनों से लड़ने के लिए तैयार रहना होगा। उनकी भविष्यवाणी सच साबित होती दिख रही है। एक तरफ अमरनाथ यात्रा के लिए भारत सरकार को सुरक्षा की अभूतपूर्व तैयारियाँ करनी पड़ रही हैं, तो अब देश के भीतर ही काँवड़ियों की सुरक्षा के लिए भी सरकार को एटीएस जैसी एजेंसियों की तैनाती करनी पड़ रही है। एटीएस का मतलब तो जानते ही होंगे? एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड।

यूपी एटीएस के हवाले काँवड़ियों की सुरक्षा

अब देश के उन हिस्सों में भी आतंकवाद निरोधक दस्तों की तैनाती करनी पड़ रही है, जहाँ कभी किसी ने नहीं सोचा था कि आतंकवाद खतरा इस कदर बढ़ जाएगा कि काँवड़ यात्रा को आतंकवादियों से सुरक्षा के लिए एटीएस की तैनाती करनी पड़ेगी, लेकिन सिक्योरिटी इनपुट के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर रूट पर एटीएस की तैनाती की है। एटीएस के कमांडोज को काँवड़ियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। एसएसपी अभिषेक सिंह ने एटीएस के कमांडोज को ब्रीफिंग दी है और अलर्ट मोड पर रहने को कहा है। इसकी के साथ मुजफ्फरनगर में एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड) की टीम भी तैनात कर दी गई है।

शनिवार (27 जुलाई 2024) की सुबह लखनऊ से पहुंची एटीएस की टीम ने मुजफ्फरनगर में शिवचौक पर डेरा डाला। यहाँ एसएसपी अभिषेक सिंह ने टीम में शामिल जवानों को कांवड़ यात्रा रूट के संबंध में जानकारी दी और पूरी मुस्तैदी से निगरानी का निर्देश दिया। मुजफ्फरनगर में इनकी सबसे ज्यदा भीड़ रहती है, क्योंकि यहां शिव चौक मंदिर की परिक्रमा करते हुए शिव भक्त हरियाणा राज्य के विभिन्न जनपदों के साथ ही राजस्थान और दिल्ली के अलावा गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, हापुड़ लिए भी निकलते हैं। जनपद में कांवड़ यात्रा का पूरा रूट लगभग 240 किलोमीटर का है। यात्रा की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने दो हजार से ज्यादा स्थानों पर सीसीटीवी लगाए हैं। प्रत्येक दो किलोमीटर की दूरी पर पुलिस की तैनाती की गई है।

अमरनाथ यात्रा पर खालिस्तानी आतंकी हमले का खतरा

अमरनाथ यात्रा पर अब तक पाकिस्तानी और उनके कश्मीरी प्यादे आतंकवादियों के हमलों का डर रहता था, लेकिन इस बार अमरनाथ यात्रा पर खालिस्तानी आतंकियों के हमले का भी खतरा बढ़ गया है। खुफिया एजेंसियों ने खालिस्तानी आतंकियों के कुछ मैसेज इंटरसेप्ट किए हैं, जिसके बाद अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। खुफिया जानकारी के अनुसार, आईएसआई तीर्थयात्रा के दौरान हमला करने के लिए पंजाब के गैंगस्टर नेटवर्क, कट्टरपंथी समूहों और आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अराजकता और भय पैदा करने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय आपराधिक तत्वों का फायदा उठाने की एक ठोस कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, खुफिया रिपोर्ट से पता चलता है कि आईएसआई बब्बर खालसा इंटरनेशनल का इस्तेमाल पंजाब और दिल्ली में भाजपा नेताओं और प्रमुख हिंदू हस्तियों को निशाना बनाने के लिए कर रही है। आईएसआई और बब्बर खालसा के बीच यह गठजोड़ न केवल तीर्थयात्रियों के लिए बल्कि क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के लिए भी बहुआयामी खतरा पैदा करता है। बता दें कि इस साल अमरनाथ यात्रा पर काफी लोग जा रहे हैं, जिनका पहले से रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इस साल खालिस्तानी आतंकियों का खतरा सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।

जनरल बिपिन रावत ने साल 2017 में ही किया था आगाह

बता दें कि जून 2017 में उस समय के भारतीय सेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत को आने वाले दिनों में ढाई मोर्चे पर युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि भारतीय सेना बाहर के किसी भी हमले या अंतर के किसी भी हमले यानी दोनों मोर्चों पर एक साथ युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में साफ तौर पर कहा था, “भारतीय सेना ढाई मोर्चों पर युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।” उन्होंने चीन, पाकिस्तान के साथ ही देश के अंदर मौजूद खतरों के बारे में आगाह किया था। उनके इस बयान के महज 7 साल के भीतर ही देश के अंदर धार्मिक यात्राओं के लिए भी एटीएस जैसी एजेंसियों की तैनाती इस बात पर मुहर लगाती है कि वो कितने दूरदर्शी थे।

गौरतलब है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े कई टेरर मॉड्यूल भंग किए जा चुके हैं। पश्चिमी यूपी के कई जिलों से कट्टरपंथी आतंकवादियों को पकड़ा जा चुका है, तो अलीगढ़ जैसे शहरों से आईएसआईएस का मॉड्यूल भी पकड़ा जा चुका है। वहीं, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने वाले, जासूसी करने वाले और आईएसआई के इशारे पर आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए तैयार आतंकवादियों को भी पकड़ा जा चुका है। अब काँवड़ यात्रा पर आतंकी हमले का अलर्ट जारी होने के बाद यूपी एटीएस ने मोर्चा संभाल लिया है, तो अमरनाथ यात्रा को खालिस्तानी आतंकियों से बचाने की भी फुलप्रूफ तैयारी हो चुकी है। ये घटनाक्रम ये भी बताते हैं कि भारत देश और भारत देश की सुरक्षा एजेंसियाँ हर खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

यूपी के जालौन में चरम पर ‘लव जिहाद’: डेढ़ महीने में गायब हुई 5 लड़कियाँ, हिंदू संगठनों ने प्रशासन को चेताया, अकरम पर 15 हजार का ईनाम घोषित

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में लव जिहाद के कई मामले सामने आए हैं। महज डेढ़ महीने के भीतर 5 हिंदू लड़कियाँ गायब हो चुकी हैं। इनके अपहरण की आशंका मुस्लिम युवकों पर जताई जा रही है। लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए हिंदू संगठन भी मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है। इस बीच, पुलिस ने अकरम नाम के आरोपित पर 15 हजार का ईनाम भी घोषित कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लव जिहाद की वजह से बीते डेढ़ माह में जालौन नगर से पाँच हिंदू लड़कियाँ गुम हो गईं। इसको लेकर हिंदू संगठनों में आक्रोश पनप रहा है और वह जिले के अधिकारियों को ज्ञापन सौंप चुके हैं। पुलिस के द्वारा लड़कियों की बरामदगी न होने पर उन्होंने अनशन की चेतावनी दी थी। देर रात इसको लेकर रणनीति बनाई जा रही थीं, इसकी भनक जिला प्रशासन को लगी तो मौके पर डीएम और एसपी ने पहुँचकर अनशन न करने की बात कही। आश्वासन पर अनशन की स्थगित कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, जालौन कस्बे में कट्टरपंथी मुस्लिम युवक हिंदू समाज की लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। इसको लेकर हिंदू संगठनों ने कई बार विरोध प्रदर्शन किया और रोष प्रकट करते हुए उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर हिंदू संगठनों ने अनिश्चितकालीन अनशन की चेतावनी दी थी। इसी बात को लेकर वह अपनी रणनीति शुक्रवार (26 जुलाई 2024) की रात तैयार कर रहे थे। किसी तरह पुलिस को इसकी भनक लग गई और एसपी को इसकी जानकारी दी गई।

शादी के 15 दिन पहले गुम हो गई थी लड़की, हिंदू संगठन नाराज

बीती 14 जुलाई को कोतवाली क्षेत्र निवासी एक युवती की शादी थी। लेकिन शादी से पूर्व ही बीती तीन जुलाई को युवती घर से लापता हो गई। जिसके संबंध में पीड़ित के भाई ने जालौन कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 13 जुलाई की रात में युवती के पिता की मृत्यु हो गई थी। इस घटना को लेकर 15 जुलाई को हिंदू सगठनों के नेता द्वारिकाधीश मंदिर पर एकत्रित हुए और मौन जुलूस निकालकर तहसील परिसर में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा था। ज्ञापन देने एक सप्ताह के बाद भी पुलिस किसी युवती को बरामद नहीं कर पाई। इस केस में मुख्य आरोपित का नाम अकरम है।

इस मुद्दे पर जब बैठक की जा रही थी, तभी मौके पर डीएम राजेश कुमार और एसपी दुर्गेश कुमार पहुँचे और वहाँ मौजूद लोगों से अनशन न करने की बात रखी। इसके अलावा उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ठोस कदम उठाए जाएँगे और मतांतरण या धर्मांतरण कराने वाले लोगों के घर पर बुलडोजर आदि की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।

इस मामले में क्षेत्राधिकारी रामसिंह ने बताया कि बीती 3 जुलाई को एक मुकदमा पंजीकृत कराया जा चुका है, जिसमें आरोपित युवक अकरम वांछित चल रहा है। युवक की गिरफ्तारी के लिए चार टीमों का गठन किया गया है। पुलिस अधीक्षक द्वारा आरोपित पर पंद्रह हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है और लड़की की बरामदगी के लिए चार टीमों का गठन किया गया है।

सहेली ने ब्रेकअप में गर्लफ्रेंड की मदद की, इसीलिए मार डाला… MP में धराया बेंगलुरु में बिहार की लड़की की हत्या करने वाला, वीडियो में दिखा कैसे हॉस्टल में घुस घोंपा चाकू

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के कोरमंगला इलाके में एक लड़की की हत्या की वारदात CCTV कैमरे में कैद हो गई। अब हत्यारा मध्य प्रदेश से धराया है। PG हॉस्टल में बिहार की कीर्ति कुमारी का गला काट कर हत्या कर दी गई थी। हत्यारा अभिषेक सिंह भोपाल में ही रह रहा था। ये घटना मंगलवार (23 जुलाई, 2024) की है। अभिषेक और कीर्ति अच्छे दोस्त हुआ करते थे। कीर्ति की दोस्त राजपाली के साथ अभिषेक रिलेशनशिप में था। हालाँकि, राजपाली बाद में अभिषेक से अलग हो गई। घटना वेंकटरेड्डी लेआऊट के ‘भार्गवी स्टेइंग होम फॉर लेडीज’ की है।

इस दौरान कीर्ति ने राजपाली के फैसले का समर्थन किया और अभिषेक से अलग होने में उसकी मदद की। इसी बात को लेकर अभिषेक, कीर्ति से नाराज़ था और आखिरकार उसने इस हत्याकांड को अंजाम दे दिया। MBA कर चुकी 24 वर्षीय कीर्ति एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी भी करती थी। वहीं राजपाली महाराष्ट्र की रहने वाली है। बेंगलुरु में काम करने के दौरान अभिषेक और राजपाली एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। दोनों में दोस्ती हुई जो बाद में प्यार में बदल गई।

कुछ समय बाद राजपाली को ये रिश्ता अच्छा नहीं लगा और उसने अभिषेक से बातचीत करना बंद कर दिया। कीर्ति ने नए PG हॉस्टल में शिफ्ट करने में राजपाली की मदद की। दोनों सहेलियों ने अभिषेक से सारे संपर्क तोड़ लिए थे। CCTV में हत्या की वरदा कैद हो गई। वीडियो फुटेज में अभिषेक को एक थैला लेकर पीजी हॉस्टल में घुसते हुए देखा जा सकता है, उसने हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर स्थित कीर्ति के कमरे के पास पहुँच कर दरवाजा खटखटाया।

जैसे ही कीर्ति ने दरवाजा खोला, उसने लड़की को कॉरिडोर में खींच लिया। दोनों में हाथापाई शुरू हो गई। वीडियो में देखा जा सकता है कि इसके बाद अभिषेक ने कीर्ति के गर्दन पर चाकू से वार किया, उसके बाद फिर कई वार किए। इस दौरान कीर्ति मदद के लिए चिल्लाती रही, लेकिन अपने-अपने कमरे के दरवाजे पर खड़े होकर ये वाकया देख रही लड़कियाँ मदद के लिए आगे नहीं आईं। हत्या कर अभिषेक फरार हो गया था। अभिषेक ने हत्या के लिए रात के साढ़े 11 बजे का समय चुना था।

‘ममता बनर्जी का ड्रामा स्क्रिप्टेड’: कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कहा – ‘दिल्ली में संत, लेकिन बंगाल में शैतान’

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी दिल्ली में नीति आयोग की बैठक में शामिल हुई। इस बैठक के बीच से ही निकलीं और आरोप लगाया कि उन्हें बोलने ही नहीं दिया गया। अब इस मामले में पश्चिम बंगाल कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और हाल ही में टीएमसी उम्मीदवार यूसुफ पठान से हार झेलने वाले अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोला है। अधीर ने कहा है कि ममता बनर्जी झूठ बोल रही हैं। उन्होंने ममता बनर्जी के दावे को स्क्रिप्टेड करार दिया। इस बीच, उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भी लिखा है। उन्होंने पत्र में कहा है कि ममता बनर्जी दिल्ली में तो संत बन जाती हैं, लेकिन वो पश्चिम बंगाल में शैतान बन जाती हैं।

अधीर रंजन चौधरी ने ममता पर एक के बाद एक आरोप लगाए और यहाँ तक कह दिया कि ममता झूठ बोल रही हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता है। वे खुद बंगाल में तानाशाही करती हैं। अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “नीति आयोग की बैठक के बारे में ममता बनर्जी जो बातें कह रही हैं, मुझे लगता है कि वह झूठ बोल रही हैं… यह बहुत आश्चर्यजनक है कि किसी राज्य के सीएम को बोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ममता बनर्जी जानती थीं कि वहाँ क्या होने वाला है… उनके पास पहले से ही स्क्रिप्ट थी।” अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया है कि जिस तरह से राहुल गाँधी की देशभर में लोकप्रियता बढ़ रही है, उससे ममता बनर्जी को जलन हो रही है।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि दिल्ली में ममता बनर्जी संत की तरह नजर आती हैं लेकिन कोलकाता आते ही इनका रूप बदल जाता है। बंगाल में अघोषित आपातकाल है। तानाशाही का स्वरुप रोज देखने को मिलता है। ममता लगातार झूठ बोल रहीं हैं कि बोलने का मौका नहीं दिया जाता है।

इतना ही नहीं अधीर ने यह भी कहा कि चुनाव हो या न हो, बंगाल में जिस तरह की अराजकता का सामना करना पड़ रहा ह। नगर निगम चुनाव में हमें वोट देने का मौका नहीं मिला। जबरदस्ती चुनाव जीतते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान, वहाँ केंद्र द्वारा सुरक्षा बल तैनात किए गए थे इसलिए कुछ स्थानों पर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से हुआ लेकिन हम निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि सभी जगह मतदान शांतिपूर्ण ढंग से हुआ।

इस बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में भी उन्होंने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का मुद्दा उठाया है। चौधरी ने दो पन्नों के पत्र में लिखा, “मैं पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक जीवन में शिष्टाचार और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए आपके हस्तक्षेप की माँग करता हूँ। मेरे लिए, व्यक्तिगत स्तर पर, राज्य में अराजक स्थिति को देखना न केवल परेशान करने वाला है, बल्कि बहुत पीड़ादायक भी है, जिसका कारण सत्तारूढ़ पार्टी का विपक्ष के कार्यकर्ताओं, समर्थकों और समर्थकों के प्रति क्रूर रवैया है।”

उन्होंने कहा, “लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा फैलाए गए ‘आतंक’ के कारण विपक्षी पार्टी के सदस्यों और कार्यकर्ताओं को काफी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन बहुत गहरी चिंता वाली बात जिस पर तत्काल ध्यान दिये जाने की जरूरत है, वह है पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा जारी रहने और विपक्षी कार्यकर्ताओं को धमकाया जाना।”

बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार (27 जुलाई 2024) को नीति आयोग की बैठक में केंद्र के खिलाफ यह आरोप लगाया किया उन्हें बैठक में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। बनर्जी ने कहा कि जब वह बोल रही थीं तो उनका माइक बंद कर दिया गया और उन्होंने इसे “बंगाल और अन्य क्षेत्रीय दलों का अपमान” करार दिया।

‘दारू पीने के बाद जाग जाता था मेरे अंदर का शैतान’: जावेद अख्तर ने खूब कबूला – पूरे 25 साल रहा बहुत बड़ा शराबी

बॉलीवुडिया फिल्मों के माध्यम से आम लोगों की जिंदगी में उर्दू घुसेड़ने वाले और खुद को शायर कहने का दंभ भरने वाले जावेद अख्तर कभी दिन-रात शराब में डूबे रहते थे। जावेद अख्तर ने स्वीकार किया है कि वो 20-25 साल तक बहुत बड़े शराबी थे। वो शराब के नशे में शैतान बन जाते थे। उनका खुद पर कोई वश नहीं चलता था। हालाँकि जावेद अख्तर ने दावा किया है कि उन्होंने शराब को 3 दशक पहले ही छोड़ दिया था और वो अगर बीते वक्त में जा पाते, तो अपने जवाब वर्जन को समझाते कि शराब पीना कितना नुकसानदेह है।

We A Man, Yaar नाम के चैट शो में जावेद अख्तर ने कहा कि अपने करियर में सफलता पाने के साथ-साथ उन्होंने जिंदगी में शराब की लत का सामना भी किया है। वो शराब के आदी हो गए थे। शायद वो अपने जज्बातों को दबा रहे थे, लेकिन वो वाकई शैतान बन जाते थे। जावेद अख्तर ने शो के होस्ट से कहा, “शायद मेरे दबे हुए जज्बात थे, गुस्सा था, कड़वाहट थी। इसीलिए पीने के बाद मैं बहुत अपमानजनक हो जाता था, जो कि मैं आमतौर पर नहीं हूँ, न ही था। ये मेरे होश में रहते हुए कभी नहीं होता, लेकिन पीकर (पीने के बाद) कोई दूसरा शैतान निकल आता था।”

जावेद अख्तर ने आगे कहा कि मैंने अपनी जिंदगी में कुछ अच्छी चीजें की है, उनमें शराब छोड़ना भी एक है। उन्होंने कहा कि 31 जुलाई 1991 का वो दिन आखिरी दिन था जब मैंने शराब पी थी। उसके बाद मैंने कभी शैम्पेन की बोतल तक को नहीं छुआ, न ही कभी एक घूँट तक पी। यहाँ तक कि जश्न के दौरान चीयर्स करते हुए भी नहीं।

इस दौरान जब जावेद अख्तर से पूछा गया कि वो अपने जवान वर्जन से क्या कहना चाहेंगे? इसके जवाब में 79 साल के हो चुके जावेद अख्तर ने कहा कि वो अपने यंगर वर्जन से शराब न पीने के लिए कहते। अख्तर ने कहा कि मैंने 20-25 सालों तक जो शराब पी, वो नहीं करना चाहिए।

जावेद अख्तर ने कहा कि मेरा बहुत समय बर्बाद हुआ शराब में, मैंने अपनी जिंदगी का एक दशक बर्बाद कर दिया, जबकि उस समय मैं कुछ बेहतर काम कर सकता था। मैं उस समय में फ्रेंच या पर्शियन जैसी कोई भाषा सीख सकता था। मैंने समय और माहौल दोनों को बर्बाद कर दिया।