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पिता सबसे क्रूर, सबसे निर्दयी… दुनिया के सबसे अमीर आदमी की ट्रांसजेंडर बेटी का पहला इंटरव्यू, बताया- एलन मस्क नहीं बनने दे रहे थे लड़की इसलिए उनसे नफरत है

दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क ने पिछले दिनों ‘वोक माइंड वायरस’ पर अपनी बात रखी थी। इसमें उन्होंने अपनी ट्रांसजेंडर बेटी विवियन विलियम्स का जिक्र भी किया था। इस इंटरव्यू को मीडिया में हर जगह जगह मिली जिसके बाद 20 साल की विवियन विलियम्स मीडिया के सामने आईं और उन्होंने अपने पिता के इंटरव्यू पर प्रतिक्रिया दी।

अमेरिकी मीडिया NBC न्यूज से बात करते हुए 20 साल की विवियन जेन्ना विलियम्स ने अपने पिता को निर्दयी और क्रूर कहा। साथ ही बताया कि मस्क कभी मानते नहीं थे कि वो विवियन में लड़की वाले गुण हैं। उन्होंने बतायास “मस्क ने कहा था कि मैं एक लड़की नहीं हूँ। मैं उनके लिए मर चुकी हूँ। यह कहकर उन्होंने हद पार कर दी। अगर वे लाखों लोगों के सामने झूठ बोलेंगे तो मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूँगी।”

विवियन का कहना है कि उन्होंने मस्क को कोई धोखा नहीं दिया। मस्क को मालूम था कि विवियन अपना जेंडर बदलवा रही हैं। विवियन के अनुसार इंटरव्यू में ये बात कहकर हद पार कर दी गई है ट्रीटमेंट के लिए मस्क को बरगलाया गया। अपने बचपन को याद करते हुए विवियन ने कहा, “मस्क कभी भी एक अच्छे पिता नहीं रहे। उन्होंने कभी हमारा साथ नहीं दिया। मुझे और मेरे भाई-बहनों को मां के पास छोड़ दिया था। वे जब भी मिलते थे तो हमसे बुरा व्यवहार करते थे। हमेशा चिल्लाते रहते थे। वे लापरवाह थे। उनका ध्यान सिर्फ खुद पर रहता था।”

विवियन ने इंटरव्यू में कहा कि वह बचपन से ही एक लड़की जैसा महसूस करती थीं। इस पर मस्क ने उन्हें कई बार प्रताड़ित भी किया था। मस्क उसे बार-बार लड़कों की तरह रहने का दबाव डालते थे। आगे विवियन ने कहा,  वे अपने पिता से कोई संपर्क नहीं रखना चाहती हैं। वे 20 साल की हैं और अपने फैसले खुद ले सकती हैं। 

उन्होंने कहा कि 2020 में जब वो 16 साल की थी जब वो अपना इलाज कराना चाहती थीं लेकिन माता-पिता दोनों की अनुमति इसके लिए जरूरी थी। माँ सपोर्टिव थीं, मगर मस्क कभी साथ देने को तैयार नहीं थे। महामारी के वक्त उन्हें मौका मिला कि वो मस्क की क्रूरता से पीछा छुड़ा लें। बाद में उन्होंने किया भी ऐसा ही।

मालूम हो कि 2022 में विवियन ने अपना जेंडर बदलवाया था। इसके बाद भी उन्होंने यही बयान दिया था कि वे अपने पिता एलन मस्क से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती हैं। विवियन ने अपने नाम से मस्क हटाकर माँ का सरनेम लगाया और कहा था कि वो अपनी माँ से प्यार करती हैं। पिता क्रूर और निर्दयी हैं।

बता दें कि पिछले दिनों मस्क ने एक इंटरव्यू में बेटे के लिंग परिवर्तन को लेकर कहा था कि उन्हें पूरी तरह सूचित नहीं किया गया था कि ट्रीटमेंट के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं। ‘लिंग की पुष्टि’ किए जाने की अवधारणा को उन्होंने एक ‘भयानक प्रथा’ करार दिया। उनका मानना है कि वो अपने बेटा खो चुके हैं, उनके बेटे को मार डाला जा चुका है। उन्होंने इसे ‘Woke Mind Virus’ का दुष्प्रभाव बताते हुए कहा कि वो इसे खत्म कर देंगे। इसी के बाद उनकी बेटी का यह इंटरव्यू सामने आया है।

केरल हाई कोर्ट ने रद्द किया नाबालिग से रेप का मामला… क्योंकि पीड़ित-आरोपित ने कर ली है शादी: कहा- परिवार को राजी-खुशी रहने दें

केरल हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ POCSO और रेप की गम्भीर धाराओं में दर्ज किए गए एक मामले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपित और पीड़िता अब समझौता करके शादी कर चुके हैं और खुशी-खुशी जी रहे हैं इसलिए इस मामले को रद्द कर दिया जाए।

केरल हाई कोर्ट ने नाबालिग का अपहरण और रेप के मामले के विरुद्ध दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कार्रवाई की। कोर्ट के समक्ष आरोपित ने अपने विरुद्ध दर्ज FIR को रद्द करने की माँग की थी क्योंकि अब उसकी और पीड़िता की शादी हो चुकी है।

केरल हाई कोर्ट ने FIR रद्द करते हुए कहा, “रेप और POCSO के मामलों ने समझौता कानून को स्वीकार्य नहीं है। हालाँकि, इस मामले में, आरोपति ने नाबालिग पीड़िता के साथ संबंध बनाए और उसका यौन उत्पीड़न किया जिसके बाद वह गर्भवती हो गई। इसके बाद आरोपित ने पीड़िता से शादी कर ली है और अब वे दो बच्चों के साथ खुशी-खुशी रह रहे हैं। ऐसे मामलों में, समझौते के रास्ते में आने वाली बाधाओं को मानवता के नजरिए से देखते हुए हटा दिया जाना चाहिए। ताकि शांतिपूर्ण पारिवारिक जीवन सुनिश्चित हो सके।”

हाई कोर्ट ने कहा, “इस मामले में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है जिससे उन्हें मुकदमेबाजी झेलनी पड़े और बच्चों के हित को नुकसान पहुँचे। ऐसे में इस मामले में FIR को निरस्त किया जा सकता है।” कोर्ट ने इससे पहले ऐसे मामलों में समझौते पर कड़ी टिप्पणियाँ की।

कोर्ट ने कहा, “रेप या रेप के प्रयास के मामले में, किसी भी परिस्थिति में समझौते के बारे में नहीं सोचा जा सकता है। ये एक महिला के शरीर के खिलाफ अपराध हैं जो उसका अपना मंदिर है। ये ऐसे अपराध हैं जो प्रतिष्ठा को कलंकित करते हैं। जब एक मानव शरीर अपवित्र होता है, तो ‘सबसे शुद्ध खजाना’ खो जाता है। ऐसे मामलों में समझौता नहीं हो सकता क्योंकि यह उसक सम्मान के खिलाफ होगा जो सबसे ज्यादा मायने रखता है। यह पवित्र है।”

यह मामला 2021 में हुए अपराध से जुड़ा है। इस मामले में आरोप था केरल के एर्नाकुलम में एक व्यक्ति एक 17 वर्षीय नाबालिग को अपने साथ भगा ले गया और बाद में उसके साथ यौन शोषण किया। इसके कारण नाबालिग गर्भवती हो गई। मामले में लड़की की माँ को भी आरोपित बनाया गया क्योंकि उसने इस घटना को पुलिस को नहीं बताया था।

इसके बाद आरोपित लड़के के विरुद्ध POCSO, रेप, अपहरण समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। हालाँकि, कुछ समय बाद लड़की और आरोपित ने शादी कर ली और उनके दो बच्चे भी हैं। दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया और इस आरोपित के विरुद्ध FIR को रद्द करने की माँग की गई। इसके बाद कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया।

भारत को जापान-इजरायल एवं NATO सहयोगियों जैसा दर्जा दे अमेरिका: रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रुबियो ने पेश किया ‘यूएस-इंडिया डिफेंस कोऑपरेशन एक्ट’ बिल

अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने 25 जुलाई को कॉन्ग्रेस में एक विधेयक पेश कर भारत को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में जापान, इज़राइल, कोरिया और नाटो सहयोगियों के बराबर दर्जा देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, विधेयक में यह भी कहा गया है कि अगर यह साबित हो जाता है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रायोजित किया है तो उसकी सुरक्षा सहायता रोकी जाए।

सीनेटर रुबियो ने भारत की चिंताओं को रेखांकित करते हुए अपने विधेयक में भारत की क्षेत्रीय अखंडता का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर बढ़ते खतरों को देखते हुए भारत का हर स्तर पर समर्थन किया जाना चाहिए। सीनेटर मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बातें रखीं।

फ्लोरिडा के सीनेटर मार्को रुबियो ने कहा, “मैंने यूएस-इंडिया डिफेंस कोऑपरेशन एक्ट बिल पेश किया है। भारत के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करने के लिए, यह जरूरी है कि हम नई दिल्ली के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बढ़ाएँ। कम्युनिस्ट चीन की आक्रामकता का सामना कर रहे भारत को सर्वश्रेष्ठ समर्थन देने के लिए एक बिल पेश किया गया है।”

रिपब्लिकन नेता रुबियो ने कहा, “कम्युनिस्ट चीन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने क्षेत्र का आक्रामक रूप से विस्तार जारी रख रहा है और वह हमारे क्षेत्रीय भागीदारों की संप्रभुता और स्वायत्तता को बाधित करना चाहता है। इन दुर्भावनापूर्ण चालों का मुकाबला करने में अमेरिका के लिए अपना समर्थन जारी रखना महत्वपूर्ण है। क्षेत्र के अन्य देशों के साथ, भारत इसमें अकेला नहीं है।”

विधेयक में वामपंथी चीन के प्रभाव से निपटने में अमेरिका-भारत सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि इस सहयोग को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली के साथ अमेरिका द्वारा रणनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य संबंधों में सुधार करना आवश्यक और बेहद महत्वपूर्ण है।

इस विधेयक में एक ‘नीति निर्धारित किया जाएगा जिसमें कहा जाएगा कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारत की क्षेत्रीय अखंडता के लिए बढ़ते खतरों के जवाब में भारत का समर्थन करेगा। इसके साथ ही विरोधियों को रोकने के लिए भारत को आवश्यक सुरक्षा सहायता प्रदान करेगा और रक्षा, नागरिक अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और आर्थिक निवेश पर भारत के साथ सहयोग करेगा।’

अगर यह बिल पास हो जाता है तो यह भारतीय सेना द्वारा वर्तमान में उपयोग किए जा रहे रूसी उपकरणों की खरीद के लिए CAATSA प्रतिबंधों से उसे सीमित छूट मिल जाएगी। विधेयक में यह प्रस्ताव है कि भारत को रक्षा सामग्री, रक्षा सेवाएँ, डिजाइन और निर्माण सेवाएँ तथा प्रमुख रक्षा उपकरण बेचने के लिए प्रस्ताव पत्रों के प्रमाणन पर शीघ्र विचार करना अमेरिकी हितों के अनुरूप है।

इसके साथ ही इसमें यह भी कहा गया है कि आगामी खतरों को रोकने की भारत की क्षमता शांति और स्थिरता के हित में है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विधेयक में भारत के साथ वैसा ही व्यवहार करने का प्रस्ताव रखा गया है जैसे कि वह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के मामले में जापान, इजरायल, कोरिया और नाटो सहयोगियों जैसे अमेरिकी सहयोगियों के समान दर्जा रखता हो।

इस विधेयक में विदेश मंत्री को भारत के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत करने का भी प्रस्ताव है, ताकि सैन्य सहयोग बढ़ाया जा सके, दो वर्षों के लिए भारत को अतिरिक्त रक्षा सामग्री शीघ्र भेजी जा सके और भारत को अन्य सहयोगियों के समान दर्जा दिया जा सकेृ तथा नई दिल्ली के साथ अंतर्राष्ट्रीय सैन्य शिक्षा एवं प्रशिक्षण सहयोग का विस्तार किया जा सके।

अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा झटका हो सकता है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ आतंकवाद और छद्म आतंकी समूहों के इस्तेमाल पर कॉन्ग्रेस के समक्ष एक रिपोर्ट पेश की जानी चाहिए। इसके अलावा, आतंकवाद प्रायोजित करते हुए पाए जाने पर पाकिस्तान को सुरक्षा सहायता से वंचित करने का प्रस्ताव है।

निजाम और इरफान ने हिंदू युवक का चाकू से गला काटा, VHP कार्यकर्ता के साथ ‘सर तन से जुदा’ की कोशिश: पुलिस ने दबोचा

गुजरात के भुज में विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यकर्ता पर दो मुस्लिम युवकों ने हमला कर दिया, जिसमें वो बुरी तरह से घायल हो गए। घायल हुआ युवक अपने दोस्त का विवाद सुलझाने पहुँचा था, कि निजाम और इरफान ने उसपर हमला कर दिया। इस हमले में घायल का अस्पताल में इलाज चल रहा है, पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, गुजरात के भुज में सोमवार (22 जुलाई) 2024 को भावेश परमार नाम के विहिप कार्यकर्ता के साथ ‘सर तन से जुदा’ की कोशिश हुई। भावेश परमार भुज में मुंद्रा रोड पर रहते हैं और बजरंग टी हाउस नाम की चाय की दुकान चलाते हैं। इस घटना की शुरुआत 19 जुलाई को हुई, जहाँ माधापर पुलिस ने कुछ रिक्शा को हिरासत में ले लिया। ये रिक्शा गलत तरीके से चलाए जा रहे थे। इस बीच, स्थानीय पत्रकार राजू प्रजापति ने पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें खींच ली। जिसके बाद निजाम और इरफान ने राजू को मिलने के लिए बुलाया। राजू ने अपने दोस्त और विहिप कार्यकर्ता भावेश को ये बात बताई, जिसके बाद वो भी निजाम-इरफान से मिलने पहुँच गए।

इस मामले की एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। भावेश ने अपनी शिकायत में कहा कि वो, राजू प्रजापति और एक अन्य साथी जुबली सर्कल पहुँचे, जहाँ निजाम और इरफान भी पहुँच गए। निजाम ने यहाँ राजू के सीने पर हमला बोल दिया। भावेश ने मामले को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन निजाम ने चाकू निकाला और भावेश के गले पर चला दिया। इस हमले में भावेश ने बचने की कोशिश की, लेकिन चाकू बाएँ कंधे को चीरकर निकल गया। तेजी से खून बहने पर उन्होंने लोगों को आवाज लगाई, तो निजाम और इरफान फरार हो गए। दोनों ने फरार होने से पहले धमकी भी दी कि कहीं भी दिखने पर भावेश को जान से मार देंगे। बाद में भावेश के दोनों साथी उन्हें भुज अस्पताल लेकर गए, जहाँ उनका इलाज किया जा रहा है।

विहिप कार्यकर्ता को जानते थे हमलावर, फिर भी गले पर किया हमला

भावेश परमार वीएचपी कार्यकर्ता हैं और गौरक्षा में सक्रिय हैं। इस मामले को लेकर भावेश परमार ने ऑपइंडिया से बातचीत की। भावेश ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई अंदेशा नहीं था कि उन पर हमला किया जाएगा। आरोपित जानते थे कि वो विहिप के कार्यकर्ता हैं, और गौरक्षा में सक्रिय है। इस लिए उन्होंने जानबूझकर सोच-समझ कर हमला किया होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई तो कर रही है, लेकिन सरकार को इस बारे में खास ध्यान देने की जरूरत है कि हिंदू कार्यकर्ताओं और गौ-रक्षकों पर हमला करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि ऐसे मामले फिर न आएँ। उन्होंने आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग की है।

भुज पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की जाँच

इस मामले में भुज-बी डिवीजन पुलिस ने मामला दर्ज कर निजाम मुगल और इरफान बलूच को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ भारतीय न्यायिक संहिता की धारा 109, 115(2), 296(बी), 351(2), 61(2)(बी) और धारा 135(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिए हैं।

हालाँकि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी संदेश जताया जा रहा है, क्योंकि दोनों आरोपितों की पुलिस ने कोर्ट से रिमांड ही नहीं माँगी, जिसके बाद दोनों को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ये मामला गंभीर है, इसके बावजूद रिमांड नहीं माँगा गया। वहीं, बताया जा रहा है कि आरोपित पहले भी कुछ मामलों में गिरफ्तार किए जा चुके हैं, इसलिए उनके खिलाफ PASA एक्ट लगाने की माँग की जा रही है। इस मामले में ऑपइंडिया ने अधिक जानकारी के लिए भुज पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जवाब मिलने के बाद रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।

ये खबर मूल रूप से ऑपइंडिया गुजराती पर प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

ब्राह्मण ‘लुटेरा’, ब्राह्मण ‘धोखेबाज’… दानपेटी पर रखते हो नजर, लोगों को ठगते हो: इन्फ्लुएंसर ने मजे के लिए बनाई रील तो बिदक गए ब्राह्मण विरोधी

सोशल मीडिया पर ब्राह्मण विरोधी माहौल का दिखना कोई नया नहीं है। लोग समय-समय पर ब्राह्मणों को टारगेट करते हैं और साबित करना चाहते हैं कि क्यों उनका विरोध सही है। इस बार इस नफरत का शिकार एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मानसी कुलकर्णी हुई हैं।

मानसी ने अपने इंस्टा अकॉउंट पर ट्रेंडिंग स्टाइल में ब्राह्मण जाति और उनकी सामाजिक आदतों को लेकर एक वीडियो बनाई थी। इसी वीडियो के नीचे ब्राह्मणों को लेकर कई लोगों ने अपनी तुच्छ मानसिकता जाहिर की।

ब्राह्मणों से नफरत करने वाले यूजर ने लिखा, “हम ब्राह्मण हैं हम लोगो को धर्म के नाम पर ठगते हैं।” एक यूजर ने कहा- “ब्राह्मण हैं, हमारे भीतर इंसानियत नहीं होती।” एक ने कहा, “हम ब्राह्मण हैं हम लोग सिर्फ दानपेटी पर ध्यान देते हैं।”

इन कमेंटों को देखने के बाद लोग हैरान है कि आखिर ब्राह्मणों की इतनी कम तादाद होने के बावजूद लोग ब्राह्मणों से इतनी घृणा कैसे कर सकते हैं। एक यूजर ने सारे कमेंट देख कहा, “मैं हैरान हूँ कि 2% ब्राह्मण हैं फिर भी लोग उनके खिलाफ नफरत को फैलाते हैं। ये नफरत हिंदुत्व के खिलाप है क्योंकि ब्राह्मण ही वो हैं जो हिंदू धर्म और संस्कृति से लोगों को अवगत कराते हैं।”

एक यूजर ने कहा, “70+ साल से ब्राह्मण विरोधी एजेंडा, हिंदू धर्म को नष्ट करने के उद्देश्य से ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है। विडंबना यह है कि ब्राह्मण राजा नहीं थे, वे अमीर नहीं थे, वे योद्धा नहीं थे और उनकी संख्या भी अधिक नहीं थी, फिर भी, उन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया जाता है, इस तरह का बकवास तर्क शायद दुनिया में कहीं और मौजूद नहीं है। हिंदू समुदाय के ज़्यादातर बेवकूफ़ वे हैं जो मुसलमान या ईसाई बनने के बारे में दो बार नहीं सोचेंगे।”

बता दें कि मानसी कुलकर्णी की जिस वीडियो पर ये सारा प्रोपगेंडा फैलाया गया है वो वीडियो 10 अप्रैल को पोस्ट की गई थी। कमेंट में उन्होंने कहा भी था कि ये सब उन्होंने किसी की भावनाएँ आहत करने की नहीं किया है। इस वीडियो को 5 मिलियम से ज्यादा बाद देखा जा चुका है जिसमें ब्राह्मणों को लुटेरा, धोखेबाज जैसे शब्द कहे गए हैं।

नोट: ये रिपोर्ट सिद्धि सोमानी की रिपोर्ट पर आधारित है। आप मूल रिपोर्ट इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

पेरिस ओलम्पिक से ठीक पहले फ्रांस में ट्रेन सेवा ठप, जगह-जगह रेल लाइन पर हमले, सरकार ने बताया साजिश: प्रवासियों ने यहीं किया था गैंगरेप

फ्रांस की राजधानी पेरिस में ओलम्पिक खेलों की शुरुआत से कुछ ही घंटे पहले देश की रेल सेवा बाधित हो गई है। फ्रांस के हाई स्पीड रेल नेटवर्क को देश भर में जगह-जगह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। फ्रांस की सरकार ने इसे साजिश और आपराधिक कृत्य बताया है। तुरंत ट्रेनों के चालू होने के कोई आसार नहीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस में चलने वाली TGV तेज गति रेल सेवाएँ गुरुवार (25 जुलाई, 2024) से ही बाधित हो गईं। इनके बाधित होने का कारण देश भर में ट्रेन की पटरियों के पास तोड़फोड़ रहा। ट्रेन पटरियों को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही रेल सेवा से जुड़े ढाँचे को देश भर में नुकसान पहुँचाया गया है।

इस कारण से फ्रांस की सरकारी रेल सेवा एजेंसी SNCF ने अधिकांश ट्रेनों को रद्द कर दिया। SNCF ने एक बयान जारी करके कहा, “फ्रांस में साजिश के कारण, कई हाई स्पीड लाइनों पर असर पड़ा है, कई हाई स्पीड ट्रेनों का मार्ग बदला जा रहा है या उन्हें रद्द किया जा रहा है। हमारी टीमें स्टेशनों, कॉल सेंटरों पर पूरी तरह से सक्रिय हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी यात्री अपने गंतव्य तक पहुँच सकें।”

SNCF के अलावा ब्रिटिश चैनल के रास्ते फ्रांस से यूनाइटेड किंगडम को जाने वाली यूरोस्टार ट्रेन भी इस तोड़फोड़ के कारण प्रभावित है। फ्रांस से बेल्जियम की रेल सेवाएँ भी बंद हो गई हैं। बताया गया है कि इन रेल सेवाओं को सुचारू रूप से चालू होने में कम से कम 2 दिन लगने वाले हैं।

फ्रांस के यातायात मंत्री ने इन तोड़फोड़ की घटना को पहले से रची गई साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा, “कल रात कई TGV लाइनों को निशाना बनाकर की गई साजिश के कारण इस वीकेंडतक यातायात गंभीर रूप से बाधित रहेगा। मैं इन आपराधिक कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करता हूँ। इसे कई फ्रांसीसी लोगों की छुट्टियों पर आवाजाही प्रभावित होगी। यातायात की स्थिति को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए मौजूद SNCF टीमों को बहुत-बहुत धन्यवाद।”

फ्रांस में रेल लाइनों की बाधित करने की इस घटना के कारण लगभग 8 लाख यात्री प्रभावित हुए हैं। अभी यह जानकारी सामने नहीं आई है कि यह साजिश किसने रची और किन लोगों ने इन पटरियों को क्षतिग्रस्त किया। फ्रांस में रेल लाइनों को बाधित करने की यह घटना पेरिस ओलम्पिक के ठीक पहले हुई है।

इन ओलम्पिक की शुरुआत शुक्रवार (26 जुलाई, 2024) को होगी। पेरिस ओलम्पिक में 7500 खिलाड़ी और 3 लाख से अधिक दर्शक जुट रहे हैं। इससे पहले इस बाधा के कारण बड़ा खलल पड़ा है। फ्रांस में ओलम्पिक की सुरक्षा को लेकर बड़े इंतजाम किए गए हैं लेकिन लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं से इस पर प्रश्न उठ रहे हैं।

पेरिस में हाल ही में ऑस्ट्रेलिया से आई एक महिला से पाँच अफ्रीकी प्रवासियों ने गैंगरेप किया था। महिला को अकेला पाकर वह उसे गंभीर अवस्था में छोड़ गए थे। इसके बाद वह किसी तरह पुलिस के पास पहुँच पाई थी।

बलिया में ट्रकों से करोड़ों रुपए की अवैध वसूली, योगी सरकार ने चलाया हंटर: SP और ASP हटाए गए, CO सहित 18 पुलिसकर्मी निलंबित

बलिया के नरही थाना स्थित यूपी-बिहार बॉर्डर पर ट्रकों से अवैध वसूली मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। दो पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी और सीओ समेत 18 पुलिसकर्मियों के निलंबन के साथ ही जिले के पुलिस अधीक्षक और एएसपी को भी पद से हटा दिया गया है। वहीं, इस मामले में 7 पुलिसकर्मियों समेत 23 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

बलिया के एसपी देवरंजन वर्मा और एएसपी दुर्गा तिवारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। देवरंजन वर्मा और दुर्गा तिवारी को पद से हटाने के बाद उन्हें कहीं तैनाती नहीं दी गई है। उन्हें प्रतीक्षारत रखा गया है। वहीं, नरही के सीओ शुभ सुचित को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, 32वीं वाहिनी पीएसी में कमांडेंट रहे विक्रांत वीर को बलिया का नया एसपी बनाया गया है। 

दरअसल, बुधवार (24 जुलाई 2024) की देर रात एडीजी वाराणसी पीयूष मोर्डिया और डीआईजी आजमगढ़ वैभव कृष्ण के नेतृत्व में आजमगढ़ पुलिस ने नरही थाना के भरौली पिकेट और कोरंटाडीह चौकी पर छापा मारा था। यहाँ ट्रकों से अवैध वसूली की जा रही थी। इस मामले में दो पुलिसकर्मियों और 16 दलालों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, 5 पुलिसकर्मी और कुछ दलाल फरार हो गए थे। 

दबिश के दौरान लगभग 25 मोबाइल, 14 बाइक और 37500 रुपए भी बरामद किए गए हैं। इस मामले में सात पुलिसकर्मियों और दलालों समेत 23 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। दरअसल, यूपी-बिहार बार्डर पर पुलिसकर्मियों द्वारा ट्रकों से अवैध वसूली की शिकायतें उच्च अधिकारियों को मिली तो उनके कान खड़े हो गए। इसके बाद इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

नरही थाने के कर्मियों पर भी टीम ने कार्रवाई की। एसओ का कमरे को सील कर दिया गया। सभी बैरकों और उसमें रखे एक-एक बक्से को खँगाला गया। घंटों तक चली कार्रवाई के दौरान मीडिया को अंदर नहीं जाने दिया गया। बाद में डीआईजी वैभव कृष्ण ने बताया कि बक्सर पुल से होकर रोजाना दो से तीन हजार ट्रक गुजरते थे। हर ट्रक से 500 रुपए की वसूली की जाती थी।

उन्होंने बताया कि इस तरह रोजाना 10 से 15 लाख रुपए की वसूली होती थी। उन्होंने आशंका जाहिर की कि ये पूरा पैसा नरही थाने का स्टाफ अकेले नहीं पचा पाता होगा। कहा जाता है कि पन्नेलाल यहाँ दो साल से तैनात था और उसे कोई हिला नहीं पाता था। वह अक्सर किसी ना किसी थाने में ही तैनात रहता था। पुलिस लाइन बहुत कम देखा गया है।

कहा जाता है कि वसूली के 500 रुपए में से 400 रुपए पन्नेलाल रखथा था और 100 रुपए पिकेट ड्यटी पर रहने वाले सिपाही को दिया जाता था। उनका हिसाब थानाध्यक्ष पन्नेलाल महीने में करता था। यह भी बताया जा रहा है कि अवैध वसूली का एक बड़ा हिस्सा बिहार पुलिस के थानों को भी जाता था। यह इलाका बक्सर जिला से सटा हुआ है।

इस बारे में एडीजी जोन पीयूष मोर्डिया को जानकारी दी गई और कार्रवाई की गई। जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है वे हैं- थाना प्रभारी नरही पन्नेलाल, चौकी प्रभारी कोरंटाडीह राजेश प्रभाकर, नरही के सिपाही हरिदयाल सिंह, विष्णु यादव, दीपक मिश्रा, बलराम सिंह, कोरंटाडीह के सिपाही सतीश गुप्ता, भरौली के रविशंकर यादव, कोटवा नरायनपुर के विवेक शर्मा, भरौली के जितेश चौधरी, अर्जुनपुर बिहार के विरेंद्र राय, कथरिया के सोनू सिंह, भरौली के अजय पांडेय, सारिमपुर बिहार के विरेंद्र सिंह यादव, भरौली के अरविंद यादव, रमाशंकर चौधरी, जवाहिर यादव, अमांव के धर्मेंद्र यादव, चंडेश बिहार के विकास राय, भरौली के हरेंद्र यादव, सलाम अंसारी, आनंद ठाकुर, राजापुर गाजीपुर के दिलीप यादव। 

नरही थाने के जिन पुलिसर्मियों को निलंबित किया है उनके नाम हैं- थानाध्यक्ष पन्नेलाल, एसआई मंगला प्रसाद, मुख्य आरक्षी विष्णु यादव, सिपाही हरिदयाल सिंह, सिपाही दीपक मिश्रा, सिपाही बलराम सिंह, सिपाही उदयवीर, सिपाही प्रशान्त सिंह और चालक ओम प्रकाश। इनमें थानाध्यक्ष पन्नेलाल, सिपाही विष्णु यादव, सिपाही दीपक मिश्रा और सिपाही बलराम सिंह फरार हैं।

चौकी कोरंटाडीह के जिन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है उनमें शामिल हैं- प्रभारी राकेश प्रभाकर, मुख्य आरक्षी चन्द्रजीत यादव, मुख्य आरक्षी औरंगजेब खां, सिपाही परविन्द यादव, सिपाही सतीश चन्द्र गुप्ता, सिपाही पंकज कुमार यादव, सिपाही ज्ञानचन्द्र और सिपाही धर्मवीर पटेल। वहीं, प्रभारी राकेश प्रभाकर फरार है। थाना प्रभारियों और सिपाहियों के आवासों को सील कर दिया गया है।

डीआईजी वैभव कृष्ण ने बताया कि इस प्रकरण की जाँच आजमगढ़ के एएसपी शुभम अग्रवाल को सौंपी गई है। शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ, एसओ व चौकी प्रभारी के विरुद्ध संपत्तियों की विजिलेंस जाँच कराने का आदेश भी दिया है। जाँच के बाद अवैध बालू ढुलाई और बिहार में शराब की तस्करी से जुड़े बड़े सिंडिकेट भी सामने आ सकते हैं।

 

 

2004 से 2009 तक कारगिल विजय दिवस नहीं मनाती थी कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली UPA सरकार, मानती थी ‘BJP की लड़ाई’

आज ही के दिन यानी 26 जुलाई को साल 1999 में भारतीय सेना ने कारगिल की लड़ाई जीती थी। पाकिस्तान को करारी हार का मुँह देखना पड़ा था। पाकिस्तान हमेशा की तरह डिनायल के मोड में रहा, तो भारत में कॉन्ग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों के लिए कारगिल की लड़ाई सिर्फ बीजेपी की लड़ाई रही। इसकी वजह से आधिकारिक तौर पर साल 2004 से 2009 तक सेना की इतनी बड़ी जीत को कभी सेलिब्रेट ही नहीं किया गया। जी हाँ, भारतीय सेना और भारत की जीत को सिर्फ इसलिए श्रेय नहीं दिया गया, क्योंकि कॉन्ग्रेस और यूपीए की नजर में ये भारत और भारतीय सेना की लड़ाई नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की लड़ाई थी।

ये हम नहीं कह रहे, बल्कि ऐतिहासिक बयान, यूपीए सरकार के कार्यकाल के आधिकारिक पत्र कह रहे हैं। साल 2017 में बीजेपी के सांसद राजीव चंद्रशेखर ने आधिकारिक तौर पर दावा किया कि कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए-1 सरकार ने साल 2004 से 2009 के बीच कारगिल विजय दिवस को कोई तवज्जो नहीं दी और न ही आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना के विजय दिवस का कोई जश्न ही आयोजित किया।

संयोग से 2009 में कॉन्ग्रेस पार्टी के सांसद राशिद अल्वी ने कहा था कि उन्हें कारगिल की जीत का जश्न मनाने का कोई कारण नहीं दिखता। रिपोर्ट के अनुसार, अल्वी ने कहा कि कारगिल कोई जश्न मनाने वाली बात नहीं है क्योंकि यह युद्ध हमारे अपने क्षेत्र में लड़ा गया था। उन्होंने आगे कहा कि यह एनडीए ही है जो इसका जश्न मना सकता है (युद्ध तब लड़ा गया था जब एनडीए सत्ता में थी)।

यदि सांसद राजीव चंद्रशेखर के प्रयास न होते तो सरकार शायद इसे मनाना बंद कर देती। 21 जुलाई 2009 को उन्होंने राज्य सभा के महासचिव को पत्र लिखकर सभापति से 23 जुलाई को उच्च सदन में कारगिल विजय दिवस को सार्वजनिक महत्व के मामले के रूप में उल्लेखित करने की अनुमति माँगी थी।

राजीव चंद्रशेखर ने अपने पत्र में संसद सदस्यों का ध्यान कारगिल विजय की 10वीं वर्षगाँठ की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि यह दिन न केवल देश की जीत का प्रतीक है, बल्कि यह सशस्त्र बलों के हजारों सैनिकों के कर्तव्य और बलिदान की प्रेरणादायक भावना का भी प्रतीक है। उन्होंने रक्षा मंत्रालय और भारत सरकार से अपील की कि वे इस दिन को यादगार बनाएँ और हर साल इसे मनाएँ। उन्होंने अपने सहयोगियों से भी अपील की कि वे इसे ‘बीजेपी युद्ध या कुछ और’ कहकर इसका विरोध करके इसका मज़ाक उड़ाना बंद करें।

उनके प्रयासों को फल तब मिला जब 2010 में उन्हें तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी का पत्र मिला, जिसमें उन्होंने इस घटना को ध्यान में रखते हुए और शहीदों के सम्मान में कहा कि उस वर्ष अमर जवान ज्योति पर एक श्रद्धांजलि समारोह भी आयोजित किया जाएगा।

गौरतलब है कि 3 मई 1999 को ये बात पता चली थी कि पाकिस्तान ने कारगिल की पहाड़ियों पर 5 हजार से ज्यादा सैनिकों को आतंकवादियों के वेश में भेजा है और उन्होंने पहाड़ियों पर कब्जा जमा लिया था। इसके बाद घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ चलाया। इस लड़ाई में 2 लाख से ज्यादा सैनिकों ने हिस्सा लिया और 2 माह से ज्यादा समय की लड़ाई के बाद कारगिल को मुक्त कराया। 26 जुलाई 1999 को आधिकारिक तौर पर कारगिल युद्ध समाप्त हुआ और सारी दुनिया में पाकिस्तान एक्सपोज हुआ। तब से हर साल 26 जुलाई के दिन को ‘कारगिल विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, सिवाय 2004 से 2009 के समय को छोड़कर, जब यूपीए-1 सरकार सत्ता में रही थी।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में साल 2017 में प्रकाशित किया गया था। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

पंडित की मत सुनो बात… न सिंदूर लगाओ न मंगलसूत्र पहनो: राजस्थान में जनजातीय महिलाओं को भड़का रही थी सरकारी टीचर, शिक्षा विभाग ने किया सस्पेंड

राजस्थान में जनजातीय महिलाओं को हिंदू न होने का ज्ञान देने वाली सरकारी टीचर को सस्पेंड कर दिया गया है। टीचर का नाम मेनका डामोर है। उनके खिलाफ राजस्थान आचरण नियम के तहत एक्शन लिया गया है।

बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम में 19 जुलाई को आयोजित एक विशाल रैली में मेनका ने एक सार्वजनिक सभा में जनजातीय महिलाओं से पंडितों की बातों का पालन करने की बात कही थी।

उन्होंने कहा था, “जनजातीय परिवार सिंदूर नहीं लगाते, मंगलसूत्र नहीं पहनते। जनजातीय समाज की महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। आज से सभी व्रत-उपवास बंद कर दें। हम हिंदू नहीं हैं।”

उनके इसी बयान के खिलाफ पहले जनजातीय समाज की महिलाओं ने आपत्ति जताई और उसके बाद सरकार के शिक्षा विभाग ने इस पर एक्शन लेते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया। रिपोर्ट्स में बताया गया कि राजस्थान शिक्षा विभाग ने जनजातीय महिलाओं को सिंदूर न लगाने और मंगलसूत्र न पहनने के लिए कहने वाली महिला शिक्षिका मेनका डामोर को निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार मेनका डामोर जनजातीय परिवार संस्था की संस्थापक भी हैं और सादा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ हैं। उन्होंने जिस कार्यक्रम में अपना विवादित बयान दिया है वहाँ हजारों जनजातीय महिलाएँ उपस्थित थीं।

काँवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना और दंगा रोकना उद्देश्य: यूपी सरकार का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, अदालत ने रोक बढ़ाई

उत्तर प्रदेश सरकार ने काँवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों में नाम प्रदर्शित करने के अपने निर्देशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बचाव किया है। राज्य सरकार ने कहा कि यह निर्देश काँवड़ियों की धार्मिक भावनाओं को गलती से भी ठेस न पहुँचे तथा शांति बनी रहे, इसे ध्यान में रखकर जारी किया गया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश पर रोक को बढ़ा दिया।

राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा, “निर्देशों के पीछे का विचार पारदर्शिता और उपभोक्ता/काँवड़ियों की यात्रा के दौरान उनके द्वारा खाए जाने वाले भोजन के बारे में सूचित करना था, ताकि गलती से भी उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस ना पहुँचे। ऐसी स्थितियों से जाहिर तौर पर तनाव पैदा होगा, जहाँ लाखों-करोड़ों लोग पवित्र जल लेकर नंगे पैर चल रहे हैं।”

उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि ये निर्देश भेदभावपूर्ण नहीं हैं, क्योंकि ये काँवड़ यात्रा मार्ग पर सभी खाद्य विक्रेताओं पर समान रूप से लागू होते हैं। चाहे उनका धार्मिक या सामुदायिक जुड़ाव कुछ भी हो। इसका उद्देश्य काँवड़ यात्रा के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है, क्योंकि बड़ी संख्या में प्रतिभागी होते हैं और सांप्रदायिक तनाव की आशंका बनी रहती है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में आगे कहा है, “शांतिपूर्ण और सौहार्द्रपूर्ण तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए निवारक उपाय करना अनिवार्य है। पिछली घटनाओं से पता चला है कि बेचे जा रहे खाद्य पदार्थों के प्रकार के बारे में गलतफहमी के कारण तनाव और अशांति पैदा हुई है। निर्देश ऐसी स्थितियों से बचने के लिए एक सक्रिय उपाय है।”

सरकार ने कहा है कि काँवड़ियों को दिए जाने वाले भोजन के बारे में छोटी-सी आशंका भी उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा सकती हैं। इससे मुजफ्फरनगर जैसे सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाके में अशांति फैलने की आशंका रहती है। सरकार ने कहा है कि ये निर्देश संविधान के अनुच्छेद 51A में निहित नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों के अनुरूप हैं। इसमें सभी लोगों के बीच शांति बहाली की बात है।

दरअसल, हाल में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हृषिकेश रॉय और एसवीएन भट्टी की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार के इन निर्देशों पर रोक लगा दिया था। बेंच ने कहा था कि खाद्य विक्रेताओं को ‘मालिकों के नाम/पहचान प्रदर्शित करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए’। इसके बाद शुक्रवार (26 जुलाई 2024) की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इन पर लगाए गए रोक को बढ़ा दिया है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई 2024 को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के काँवड़ रूट पर दुकानदारों एवं वहाँ करने वालों के नाम दर्शाने वाले आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसी के साथ ही दोनों राज्यों को नोटिस जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दुकानों को सिर्फ यह बताना होगा कि वे मांसाहार बेचते हैं या शाकाहारी खाना।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के फैसले के खिलाफ कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका दाखिल की थी। सिंघवी ने दावा किया था कि यात्रा के दौरान नाम दिखाने वाला यह आदेश अल्पसंख्यकों के बॉयकाट का जरिया बनेगा। सिंघवी ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि इस संबंध में स्पष्ट आदेश नहीं है, बल्कि आदेश को अस्पष्ट भाषा में लिखा गया है।

इसके बाद कोर्ट ने कहा कि अगर किसी को स्वेच्छा से अपना नाम दुकान पर बताने को कहा गया है कि तो इसमें क्या समस्या है। कोर्ट ने कहा कि मामले को तूल देने की जरूरत नहीं है। जस्टिस रॉय ने कहा कि वह केरल में एक मुस्लिम द्वारा चलाए जाने वाले मुस्लिम रेस्टोरेंट में जाते थे जबकि हिन्दू द्वारा चलाए जाने वाले में जाने कतराते थे। उन्होंने इसके पीछे साफ़ सफाई का हवाला दिया।

कोर्ट ने कहा कि दुकानों को शाकाहारी या मांसाहारी खाने का प्रकार और उसकी कैलोरी बतानी होगी। साथ ही अपना लाइसेंस भी प्रदर्शित करना होगा। कोर्ट ने कहा था कि अगर दोनों राज्यों के इस आदेश को लागू होने से नहीं रोका गया तो इससे सेक्युलरिज्म और संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन होगा। प्रशासन काँवड़ रूट पर शुद्ध भोजन के लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आदेश जारी कर सकता है।