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गालीबाज शौहर से सोबिया लेना चाहती थी तलाक, अब्बा ने कुल्हाड़ी लेकर पाँव काटे: खून से लथपथ हाल में छोड़ा, पाकिस्तान की घटना

पाकिस्तान में महिलाओं के प्रति की जाने वाली क्रूरता की तस्वीरें वैसे कई हैं लेकिन अगर ताजा मामले की बात करें तो घटना गुल नगर की है। यहाँ पर एक अब्बा ने अपनी ही बेटी की टांग काट दी सिर्फ इसलिए क्योंकि लड़की अपने शौहर से तलाक लेना चाहती थी।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में महिला के पाँव काटने का यह मामला गुल नगर से हाल में सामने आया। महिला का नाम सोबिया बातूल शाह है। बताया गया कि सोबिया अपनी शादी से परेशान थी और वो अपने शौहर से डायवोर्स लेना चाहती थीं।

महिला की शौहर से शिकायत थी कि वो घर-परिवार का ख्याल नहीं रखता था। साथ ही उन लोगों के साथ मारपीट आदि भी करता था। महिला अपने शौहर के इसी रवैये से तंग आकर तलाक लेना चाहती थी, लेकिन उसके अब्बा और अब्बा के भाइयों को यह मंजूर नहीं था।

इसी कारण से गुल नगर में पीड़ित के अब्बा सैयद मुस्तफा शाह और उसके चाचा सैयद कुरबान शाह, एहसान शाह, शाह नवाज और मुस्ताख शाह ने कुल्हाड़ी लेकर सोबिया के पाँव काट दिए। सोबिया चिल्लाती रही, खून से लथपथ रही लेकिन उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।

बाद में पुलिस के पहुँचने के बाद सोबिया को नवाब शाह अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसका इलाज चल रहा है। महिला का कहना है कि उसके दो बच्चे हैं, उसका शौहर उसके साथ अक्सर गाली-गलौज करता था, जिसके कारण वो कराची में अकेले रहने लगी।

सोबिया बताती हैं कि उन्होंने अपने अम्मी-अब्बा को कई बार चीजें बताई थीं लेकिन कोई उसकी सुनवाई नहीं करता था। जब सोबिया ने निर्णय लिया कि वो अब किसी भी हाल में शौहर के साथ नहीं रह पाएँगी तब उनके परिवार वालों ने उनपर इल्जाम लगाया कि ये उनके परिवार की तौहीन है। इसी के बाद उनके ऊपर कुल्हाड़ी और चाकुओं से हमला हुआ।

प्राइवेट सेक्टर में भी दलितों एवं पिछड़ों को मिले आरक्षण: लोकसभा में MP चंद्रशेखर रावण ने उठाई माँग, जानिए आगे क्या होंगे इसके परिणाम

उत्तर प्रदेश के नगीना लोकसभा सीट से निर्दलीय सांसद चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ ने शुक्रवार (26 जुलाई 2024) को लोकसभा में आरक्षण को लेकर एक प्राइवेट बिल किया। इस बिल में उन्होंने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) के लिए निजी क्षेत्र और उन अन्य प्रतिष्ठानों में आरक्षण की माँग की है।

चंद्रेशेखर ने अपने निजी विधेयक में कहा है कि निजी क्षेत्र के जिन प्रतिष्ठानों में कम-से-कम 20 लोगों को रोजगार मिलता है और सरकार का कोई वित्तीय हित नहीं होता है, उसमें आरक्षण लागू की जाए। इस विधेयक को उन्होंने ‘निजी क्षेत्र में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण अधिनियम, 2024’ नाम दिया है।

इसको लेकर चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट भी किया है। अपने पोस्ट में निर्दलीय सांसद ने लिखा, “आज मैंने लोकसभा में 3 निम्नलिखित गैर-सरकारी विधेयक पेश किए- 1. निजी क्षेत्रों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था। 2. अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के बच्चों के लिए आवासीय स्कूल।3. देश मे सभी बालकों को उच्च एवम् माध्यमिक स्तर तक निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने वाले विद्यालयों की स्थापना।”

    इस विधेयक में आगे कहा गया है कि निजी क्षेत्रों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू करने के लिए केंद्र सरकार को आगे आना चाहिए। इसके लिए केंद्र को विशेष रियायतों के जरिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करना चाहिए और उन्हें राष्ट्रीयकृत बैंकों से कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराना चाहिए।

    बता दें कि आरक्षण भारत के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है। जहाँ पिछड़ा एवं दलित वर्ग इसे उनके समाज के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण मानता है, वही सामान्य एवं बुद्धिजीवी वर्ग इसे देश के विकास में एक बाधक के रूप में देखता है, जहाँ प्रतिभा की अनदेखी की जाती है। जाति आधारित आरक्षण के बजाय लोगों का आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की वकालत करते हैं।

    ऐसे में निजी क्षेत्रों में आरक्षण की माँग समाज में एक तरह का विखंडन पैदा करेगा। इसके साथ ही यह निर्णय आर्थिक जगत को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा। आरक्षण के कारण फिलहाल बड़े पैमाने पर ब्रेन ड्रेन (प्रतिभा का दूसरे देशों में पलायन) होता है। अगर निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू कर दिया गया तो उद्योग जगत का अन्य देशों में पलायन की आशंका बढ़ जाएगी।

    इसका परिणाम ये होगा कि समाज में भ्रष्टाचार, हिंसा और अराजकता का माहौल बन जाएगा। इसके साथ ही, आरक्षण के कारण निजी कंपनियों को प्रतिभावान लोगों को दरकिनार करके ऐसे लोगों को नियुक्त करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जो कंपनी के लिए उत्पादक साबित नहीं होंगे। इससे कंपनी का विकास और उत्थान के साथ-साथ उसकी उत्पादकता में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।

    प्रतिभा के साथ-साथ उद्योग-धंधों का पलायन भारत की प्रगति के लिए बेहद हानिकारक होगा। इसके कारण रोजगार में कमी आएगी और बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ेगी। ये कुछ ऐसे कारण है, जो सीधे तौर पर देखने को मिलेंगे, जबकि इसके अप्रत्यक्ष परिणाम कहीं ज्यादा गंभीर होंगे। समाज में असंतोष, वर्गों के बीच खाई, उद्योग-धंधों के कारण देश के विकास पर विपरीत प्रभाव देखने को मिलेंगे।

    ‘तुम कोटा के हो ब#$द… कोटा में रहना है या नहीं तुम्हें?’: राजस्थान विधानसभा में कॉन्ग्रेस विधायक ने सभापति और अधिकारियों को दी गाली, BJP ने कार्रवाई की माँग की

    राजस्थान कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने विधानसभा में बोलते हुए गालियों की बौछार कर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने सदन में सभापति को भी धमकी दे दी। कॉन्ग्रेस विधायक ने सभापति से कहा कि ‘कोटा में रहना है कि नहीं।’ उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को भी नहीं छोड़ा और उन्हें खूब गालियाँ दी। ये विधायक कोई और नहीं, बल्कि वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल हैं।

    बजट सत्र में प्रश्नकाल के दौरान कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और कोटा उत्तर से विधायक शांति कुमार धारीवाल ने स्पीकर से बात करते हुए असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल किया। आरोप है कि उन्होंने बोलते हुए बार-बार गालियों का इस्तेमाल किया। साथ ही सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों के लिए भी उन्होंने अपशब्दों का इस्तेमाल किया।

    जिस वक्त यह वाकया हुआ, उस वक्त सभापति के आसन पर कोटा दक्षिण से विधायक संदीप शर्मा थे। उन्होंने कम समय की बता करते हुए शांति धारीवाल को अपनी बात खत्म करने के लिए कहा। इस पर धारीवाल ने 5 मिनट और माँगे, लेकिन सभापति ने असमर्थता जताई और कहा कि आज बोलने वाले 65 लोग हैं। इस पर धारीवाल ने कहा, “अरे कितने भी बोलने वाले हों, देर तक चला लेना।”

    धारीवाल ने सभापति संदीप शर्मा से कहा, “तुम कोटा के हो ब#$द… कोटा में रहना है या नहीं तुम्हें?” इतना ही नहीं, नगरपालिका और प्राधिकरणों के अधिकारियों का जिक्र करते हुए भी शांति धारीवाल ने गाली दे डाला। इस दौरान शांति धारीवाल और सभापति संदीप शर्मा भी मुस्कुराते हुए बातें करते हुए नजर आए।

    शांति धारीवाल का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। लोग उनकी खूब आलोचना कर रहे हैं। वहीं, भाजपा ने भी कॉन्ग्रेस विधायक के बयान की कड़ी आलोचना की है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रत्युष कांत ने कहा, “कॉन्ग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने विधानसभा में अपशब्द बोले हैं। ये हैं राजस्थान कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल हैं।”

    भाजपा नेता आगे कहा, “विधानसभा में धमकी दे रहे हैं कि आपको कोटा में रहना है या नहीं देख लेंगे। स्पीकर पद के लिए कॉन्ग्रेस का यह सम्मान है, जो कि एक संवैधानिक पद है। दिल्ली में इनके नेता संविधान की रक्षा का ढोंग करते है। कॉन्ग्रेस पार्टी क्या इन पर कोई कार्रवाई करेगी या जयराम रमेश सिर्फ़ बयान से किनारा करेंगे?”

    बांग्लादेशियों को शरण देने वाले बयान पर CM ममता बनर्जी कायम, बोलीं- ‘7 बार सांसद रही हूँ, मुझे सिखाने की जरूरत नहीं’

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बांग्लादेशी लोगों को शरण देने के मामले में जो टिप्पणी की, उसके बाद उनका जगह-जगह विरोध हुआ। अब इसी मामले में सीएम ममता बनर्जी ने जवाब दिया है। उन्होंने मामले की गंभीरता को समझने की बजाय कहा है कि वो 7 बार से सांसद हैं और उन्हें किसी से सीखने की जरूरत नहीं है।

    सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “मैं संघीय ढांचे को अच्छी तरह से जानती हूँ। मैं सात बार सांसद रही और दो बार केंद्रीय मंत्री रही हूँ। मैं विदेश मंत्रालय की नीति को किसी और से बेहतर जानती हूँ। उन्हें मुझे सबक नहीं सिखाना चाहिए बल्कि उन्हें सिस्टम से सीखना चाहिए।”

    गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बांग्लादेश में हिंसक झड़पों के बाद ममता बनर्जी ने संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के तहत बांग्लादेश से आए लोगों को शरण देने की अपनी प्रतिबद्धता पर बात कही थी। उन्होंने ने तृणमूल कॉन्ग्रेस की ‘शहीद दिवस’ रैली में कहा था, ”अगर असहाय लोग बंगाल के दरवाजे पर दस्तक देंगे तो हम निश्चय रूप से आश्रय देंगे।

    इसी टिप्पणी के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ममता बनर्जी की टिप्पणियों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी भ्रम पैदा कर सकती हैं और जनता गुमराह हो सकती है। वहीं भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा था, “विदेशी संबंधों से जुड़े मामले केंद्र सरकार का विशेषाधिकार है।

    अग्निवीरों को पुलिस एवं अन्य सेवाओं की भर्ती में देंगे आरक्षण: CM योगी ने की घोषणा, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ सरकारों ने भी रिजर्वेशन का किया ऐलान

    विपक्षी दलों द्वारा अग्निपथ योजना पर सवाल उठाने के बीच अग्निवीरों के लिए खुशखबरी आई है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकार ने सेना के अग्निवीरों को राज्य पुलिस की भर्ती में आरक्षण देने की घोषणा की है। कारगिल विजय के 25 साल पूरे होने पर तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसकी घोषणा की है। हालाँकि, कितना आरक्षण दिया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

    सबसे पहले घोषणा करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (26 जुलाई 2024) को कहा कि अग्निवीर जब अपनी सेवा के बाद वापस आएँगे तो उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार पुलिस सेवा और PAC में प्राथमिकता के आधार पर समायोजित करेगी। उन्होंने कहा कि अग्निवीरों को उत्तर प्रदेश पुलिस में एक निश्चित आरक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

    इसके बाद मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने भी राज्य पुलिस और फॉरेस्ट गार्ड की भर्ती में छूट देने की बात कही। सीएम योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “सुधार, प्रगति और समृद्धि से जुड़ी हर चीज में बाधा डालना उनका काम है। विपक्ष ने इस मामले पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। मुझे लगता है कि हमें राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च मानते हुए सशस्त्र बल सुधार पर आगे बढ़ना चाहिए।”

    बता दें कि दो साल पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी BSF, CRPF, ITBP, SSB और CISF में अग्निवीरों को 10% आरक्षण देने की घोषणा की थी। इनमें भर्ती के लिए उनके लिए आयु सीमा में भी छूट दी गई है। वहीं, हरियाणा सरकार अग्निवीरों को 10% आरक्षण देने का फैसला कर चुकी है। उत्तराखंड सरकार ने भी 21 जुलाई को अग्निवीरों को आरक्षण देने का ऐलान किया है।

    अग्निपथ योजना की वर्तमान स्थिति और नियोजित अग्निवीरों की संख्या के बारे में भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल चन्नीरा बंसी पोनप्पा ने 21 जुलाई को जानकारी दी। उन्होंने कहा कहा, “जून 2022 से यह योजना शुरू की गई है और फिर दिसंबर 2022-जनवरी 2023 में हमारे पास पहला बैच था जिसे भर्ती किया गया और नामांकित किया गया।

    उन्होंने आगे बताया, “लगभग 1 लाख अग्निवीर सेना में भर्ती हुए हैं। इसमें लगभग 200 महिलाएँ भी शामिल हैं, लगभग 70,000 को पहले ही इकाइयों में भेजा जा चुका है और वे बटालियनों में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं… इसमें लगभग 100 महिला पुलिस भी शामिल हैं। इस वर्ष 2024-25 में लगभग 50,000 वैकेंसी जारी की गई है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया जारी है।”

    भारत सरकार ने 2022 में अग्रिवीर स्कीम की घोषणा की थी। इसमें 4 साल के लिए जवानों की भर्ती होगी। इस दौरान उनकी ट्रेनिंग और उच्च शिक्षा की भी व्यवस्था की जाएगी। इसमें से 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना में स्थाई कमीशन दिया जाएगा, जबकि 75 अग्निवीरों को वापस देश की सिविल लाइफ में भेज दिया जाएगा। इन अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाएगा।

    जाँघ पर गुदे थे 22 दुश्मनों के नाम, लाश से खुला हत्या का राज: मुंबई के स्पा हत्याकांड में फिरोज-साकिब समेत 5 गिरफ्तार, ₹7000 की कैंची से किया गया मर्डर

    मुंबई में बुधवार (24 जुलाई 2024) को वर्ली के एक स्पा सेंटर में हिस्ट्रीशीटर गुरु वाघमारे उर्फ चुलबुल की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। छानबीन के दौरान पुलिस ने अब तक इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारी मृतक के पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर गुदे टैटू और अन्य सबूतों के कारण हुई।

    सामने आई तस्वीरों के मुताबिक मृतक ने अपनी जांघ पर अपने दुश्मनों के 22 नामों को गुदवाया हुआ था। इसी में एक नाम स्पा मालिक संतोष शेरेकर का भी था। पुलिस ने संतोष के साथ साथ इस केस में दो हमलावर और दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है।

    बता दें कि वर्ली में बुधवार को सॉफ्ट टच स्पा में वाघमारे की हत्या हुई थी। पुलिस का कहना है कि स्पा मालिक शेरेकर ने कथित तौर पर वाघमारे की हत्या के लिए फिरोज अंसारी को 6 लाख रुपए सुपारी दी थी, क्योंकि वह वाघमारे की जबरन वसूली की धमकियों से तंग आ गया था।

    छानबीन में पुलिस को पता चला कि अंसारी भी नालासोपारा में एक स्पा भी चलाता था, उसका स्पा पिछले साल छापेमारी के बाद बंद हो गया था। कहा जाता है कि वाघमेरे ने ही उसके स्पा की शिकायत की थी, जिसके बाद उसके स्पा पर ताला लगा। बाद में ऐसी शिकायतों को लेकर शेरेकर से संपर्क किया था, तब शेरेकर ने कथित तौर पर उससे वाघमारे की हत्या करने को कहा।

    इसके बाद अंसारी ने दिल्ली के रहने वाले साकिब अंसारी से संपर्क किया और तीन महीने पहले उसकी हत्या की साजिश रची। इतने समय में साकिब और फिरोज वाघमेरे की दिनचर्या पर नजर रखे हुए थे। इन्हें सायन में एक शराब बार के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज में भी देखा गया था। दोनों बाद में वाघरे का स्कूटर का पीछा करते हुए शेरेकर के स्पा पहुँचे। जहाँ हत्या को अंजाम दिया गया।

    पुलिस ने बताया कि हत्यारों में से एक ने शराब बार की दुकान के पास से गुटखा खरीदे थे। यूपीआई रिकॉर्ड से पता चला कि उसका नाम फिरोज अंसारी था। पुलिस ने फिरोज के नंबर की जाँच कराई तो शेरकर से कनेक्शन का पता चला। पूछताछ में सामने आया कि बुधवार को जब साकिब-फिरोज स्पा में घुसे और फिर उन्होंने 7000 की कैंची से हत्या को अंजाम दिया। हमलावरों ने वाघमेरे को ब्लेड से भी मारा। उन्होंने उसका गला काटा और उसे पेट में भी घुसाया। अब इसी हत्या केस में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने फिर अंसारी को नालासोपारा से गिरफ्तार किया है। वहीं साकिब अंसारी को राजस्थान के कोटा से पकड़ा है।

    कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने बदला ‘रामनगर’ जिले का नाम, अब कहलाएगा ‘बेंगलुरु दक्षिण’: भाजपा और जेडीएस ने किया विरोध, कुमारस्वामी बोले- आमरण अनशन करूँगा

    मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार रामनगर जिले का नाम बदलकर बेंगलुरु दक्षिण जिला करने जा रही है। कर्नाटक सरकार की कैबिनेट ने शुक्रवार (26 जुलाई 2024) को जिले का नाम बदलने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस संबंध में घोषणा की थी।

    कैबिनेट की बैठक के तुरंत बाद कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि रामनगर के लोगों और वहाँ के निर्वाचित प्रतिनिधियों की माँग पर विचार करते हुए इसे मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा, “ब्रांड बेंगलुरु को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने रामनगर के विधायकों द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।”

    हालाँकि, मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल नाम परिवर्तन है और बाकी तालुकाएँ वैसे ही रहेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया, “राजस्व विभाग इसे अधिसूचित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा और केवल जिले का नाम बदलेगा।” वर्तमान में रामनगर जिले में पाँच ब्लॉक- रामनगर, मगदी, कनकपुरा, चन्नपटना और हरोहल्ली हैं। ये सभी अब बेंगलुरु दक्षिण जिले का हिस्सा होंगे।

    इससे पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 9 जुलाई 2024 को रामनगर जिले का नाम बदलने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सौंपा था। शिवकुमार ने कहा था कि जिले के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने रामनगर का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा था कि रामनगर, चन्नपटना, मगदी, कनकपुरा, हारोहल्ली तालुकों के भविष्य और विकास को ध्यान में नेताओं ने यह प्रस्ताव दिया है।

    कैबिनेट के फैसलेे पर खुशी जाहिर करते हुए शिवकुमार ने कहा, “हम सभी मूल रूप से बेंगलुरु जिले के हैं। इसमें बेंगलुरु शहर, डोड्डाबल्लापुर, देवनहल्ली, होसकोटे, कनकपुरा, रामनगर, चन्नपटना, मगदी शामिल हैं। प्रशासनिक रूप से यह पहले बेंगलुरु शहर, बेंगलुरु ग्रामीण और रामनगर में विभाजित था। अब यह बेंगलुरु शहर, बेंगलुरु ग्रामीण और बेंगलुरु दक्षिण हो जाएगा।”

    उन्होंने कहा, “बेंगलुरु दक्षिण जिला बनाने से मैसूर तक रामनगर, चन्नपटना और मगदी का विकास होगा। उद्योगों की स्थापना को आमंत्रित किया जाएगा और संपत्ति के मूल्य को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। बेंगलुरु की सीमा एक तरफ आंध्र प्रदेश और दूसरी तरफ तमिलनाडु से लगती है। इस प्रकार यह हिस्सा बेंगलुरु के विकास और विस्तार के लिए छोड़ा गया है।”

    सरकार के इस फैसले का भाजपा और जेडीएस ने विरोध किया है। इनका कहना है कि रामनगर में रियल एस्टेट को बढ़ाने की मंशा से नाम बदला गया है। इस तरह के कदम से विकास नहीं होगा। केंद्रीय मंत्री और जेडीएस कुमारस्वामी ने रामनगर का नाम बदलने को लेकर डीके शिवकुमार की आलोचना की और आमरण अनशन करने की चेतावनी दी है।

    केंद्रीय मंत्री डीके कुमारस्वामी ने कहा, “रामनगर से मेरा कोई कारोबारी रिश्ता नहीं, बल्कि भावनात्मक रिश्ता है। अगर रामनगर जिले का नाम बदला जाता है तो मैं अपनी जान जोखिम में डालने और खराब स्वास्थ्य के बावजूद आमरण अनशन पर बैठने के लिए तैयार हूँ। आखिरी क्षण तक मैं उस जिले के गौरव की रक्षा के लिए लडूँगा।”

    एल्गार परिषद के 5 आरोपितों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने नहीं दी डिफॉल्ट बेल: भीमा कोरेगाँव मामले में UAPA के तहत 2018 में हुए थे गिरफ्तार, एडवोकेट से लेकर प्रोफेसर तक शामिल

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार (26 जुलाई 2024) को भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत, रोना विल्सन, सुधीर धावले और शोमा सेन को जमानत देने से इनकार कर दिया। खुद को दलित एक्टिविस्ट कहने वाले इन सभी पाँचों आरोपितों को एल्गार परिषद के मामले में जून 2018 में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

    बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम सी चांडक की खंडपीठ ने इन आरोपितों को याचिका पर सुनवाई की और उन्हें जमानत देने से इनकार दिया। आरोपितों ने विशेष अदालत के साल 2022 के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें डिफॉल्ट बेल देने से इनकार कर दिया गया था। इसके बाद वे 28 जून 2022 को हाई कोर्ट पहुँचे थे।

    महेश राउत को पिछले साल बॉम्बे हाई कोर्ट ने नियमित जमानत दी थी। हालाँकि, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए समय माँगे जाने के बाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी। इसके बाद एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सर्वोच्च न्यायालय ने नियमित जमानत पर रोक लगा दी।

    वहीं, नागपुर यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर शोमा सेन को 5 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत दी थी। वहीं, नागपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुधीर धवले, रिसर्चर रोना विल्सन और एडवोकेट सुरेंद्र गाडलिंग तथा महेश राउत अभी भी हिरासत में हैं। इससे पहले दिसंबर 2021 में न्यायमूर्ति संभाजी शिंदे की अगुवाई वाली हाईकोर्ट की बेंच ने गडलिंग को डिफ़ॉल्ट ज़मानत देने से मना कर दिया था।

    बेंच ने इस मामले में सह-आरोपित सुधा भारद्वाज को डिफ़ॉल्ट ज़मानत दे दी थी, जबकि गडलिंग सहित 8 को ज़मानत देने से इनकार कर दिया था। मौजूदा कार्यवाही में गडलिंग ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए नामित एक विशेष अदालत के 28 जून 2022 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उनकी डिफ़ॉल्ट ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया था।

    अपने आवेदन में गडलिंग ने कहा कि पुलिस ने पुणे की विशेष अदालत से चार्जशीट दाखिल करने के लिए और समय माँगा है। नागपुर में प्रैक्टिस करने वाले वकील ने अपनी याचिका में आगे बताया कि चार्जशीट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय माँगने वाली अर्जी सितंबर 2018 में दायर की गई थी और एनआईए को इसके लिए 90 दिन और मिले थे।

    याचिका में कहा गया है कि पहली चार्जशीट 90 दिनों की अवधि का उल्लंघन करते हुए नवंबर 2018 में दायर की गई थी। इसके अलावा, फरवरी 2019 में एक अतिरिक्त चार्जशीट दायर की गई थी। चार्जशीट दाखिल करने के लिए दिए गए समय का विस्तार गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों का उल्लंघन था।

    अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) देवांग व्यास के नेतृत्व में अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि तत्काल याचिका में दिए गए अधिकांश आधारों पर विचार करने के बाद न्यायमूर्ति शिंदे की पीठ ने दिसंबर 2021 में इसे खारिज कर दिया था और गडलिंग को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

    भगवान की पवित्र भूमि से खिलवाड़ नहीं करेंगे बर्दाश्त: तेलंगाना में चिलकूर बालाजी मंदिर के पास बन रहा था अवैध मस्जिद, बजरंग दल के विरोध के बाद निर्माण रुका

    तेलंगाना के चिलकुर बालाजी मंदिर के पास एक जमीन को वक्फ जमीन बताकर वहाँ मस्जिद बनाया जा रहा है। अब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसी का विरोध करते हुए कॉन्ग्रेस प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि मंदिर की पवित्रता के साथ कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने निर्माण हो रहे मस्जिद को गिराने की माँग की है।

    चिलकुर बालाजी देवस्थानम के अर्चक सीएस रंगराजन ने कहा, “चिलकुर बालाजी मंदिर के आसपास की जमीन पवित्र है और बहुत लंबे समय से मौजूद है। जिस तरह तिरुपति बालाजी मंदिर के आसपास की जमीन पूजनीय है, उसी तरह चिलकुर बालाजी मंदिर के आसपास का इलाका भी उतना ही पवित्र है और भगवान इसके असली मालिक हैं क्योंकि भगवान वेंकटेश्वर ने खुद को उन्हें सिलकुर में प्रकट किया है। यह अन्य धर्मों के पूजा स्थलों के लिए जगह नहीं है।”

    उन्होंने आगे कहा कि मंदिर की पवित्रता को सुनिश्चित करना पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों की जिम्मेदारी है। वह बोले, “मंदिर के दो किलोमीटर के भीतर एक नई मस्जिद बनाई जा रही है। वे भी हमारे भाई हैं और हम उनसे प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार और मस्जिद बनाने वालों से यह अनुरोध है कि भूमि की पवित्रता और स्वामित्व को बरकरार रखा जाए। यह प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय से हमारी सम्मानजनक अपील है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यहाँ किसी अन्य धर्म के लिए कोई नया पूजा स्थल न बनाया जाए।”

    बजरंग दल के राज्य संयोजक शिवरामुलु ने माँग की कि स्थानीय तहसीलदार जिन्होंने निजी भूमि को वक्फ भूमि बताने वाली रिपोर्ट बनाई, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में मुस्लिम एमएलसी की बात सुनी गई, साइट पर बोरवेल खोदने का काम हुआ। उनके मुताबिक इन सबसे दौरान पुलिस मौके पर थी और निर्माण कार्य करते समय स्थानीय लोगों को आतंकित कर रही थी। इसी के बाद बजरंग दल ने चेतावनी दी कि हिंदू समुदाय अपने खिलाफ साजिश का जवाब देगा।

    इस मामले में ताजा अपडेट के अनुसार हिंदू कार्यकर्ताओं और सीएस रंगराजन द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद, जिला कलेक्टर ने तुरंत इस मामले का संज्ञान लिया और मस्जिद के निर्माण को रोक दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर निर्माण जारी रहा तो प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

    ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाना संविधान का अपमान नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की समीर मलिक की याचिका, केंद्र के फैसले पर मुहर लगाई

    दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (26 जुलाई 2024) को ‘संविधान हत्या दिवस’ को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी। याचिका में हर साल 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने की केंद्र सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। इसमें उन लोगों को श्रद्धांजलि देने की बात है जिन्होंने 1975 में आपातकाल के खिलाफ संघर्ष किया था।

    इस याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सुनवाई की। पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी 13 जुलाई की अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सिर्फ सत्ता एवं संवैधानिक प्रावधानों के दुरुपयोग और इसके बाद हुई ज्यादतियों के खिलाफ है।

    इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “यह अधिसूचना संविधान का उल्लंघन या अनादर नहीं करती है।” दरअसल, यह जनहित याचिका समीर मलिक नाम के व्यक्ति ने दायर की थी। इस याचिका में तर्क दिया गया था कि आपातकाल संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत घोषित किया गया था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि यह संविधान की हत्या की गई थी।

    याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सरकार की अधिसूचना अत्यधिक अपमानजनक है। हालाँकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ता के तर्क को खारिज कर दिया। पीठ ने टिप्पणी की कि राजनेता हर समय लोकतंत्र की हत्या वाक्यांश का उपयोग करते हैं। न्यायालय ने कहा, “राजनेता हर समय लोकतंत्र की जननी वाक्यांश का उपयोग करते हैं। हम इसके लिए इच्छुक नहीं हैं। यह (PIL) इसके लायक नहीं है।”

    बताते चलें कि इसी तरह का एक मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी लंबित है। उत्तर प्रदेश के झाँसी के रहने वाले एक अधिवक्ता संतोष सिंह ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में PIL दाखिल करके केंद्र सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास की पीठ ने केंद्र से जवाब माँगा है। इस पर अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।