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कमलेश तिवारी हत्याकांड के साजिशकर्ता को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, घटना से पहले हत्यारों से लगातार बात कर रहा था सैयद आसिम अली: HC ने नहीं दी थी बेल

सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू नेता कमलेश तिवारी की हत्या के एक साजिशकर्ता को जमानत दे दी है। अप्रैल 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सैयद आसिम अली को बेल देने से इनकार कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने के आदेश के बाद अब वो न्यायिक हिरासत से बाहर आ जाएगा। कमलेश तिवारी ‘हिन्दू समाज पार्टी’ संगठन के नेता थे। जस्टिस अभय S ओका और जस्टिस अगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने ये फैसला सुनाया। इन दोनों ने कहा कि आरोपित पहले से ही साढ़े 4 वर्ष से जेल में है।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ता/आरोपित के खिलाफ लगाए गए आरोपों का भी जिक्र किया। बता दें कि सैयद आसिम अली पर हत्यारों के संपर्क में रहने और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का आरोप है। सर्वोच्च न्यायालय का मानना है कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उसे उत्तर प्रदेश के 1986 के गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला नहीं चलाया गया था। बता दें कि 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को लखनऊ से प्रयागराज ट्रांसफर कर दिया था।

अक्टूबर 2019 में इस्लामी कट्टरपंथियों ने कमलेश तिवारी के दफ्तर में घुस कर उन्हें मार डाला था। उन पर गोली चलाई गई थी, साथ ही चाकू से भी वार किया गया था। मोहम्मद मुफ़्ती नईम काज़मी और इमाम मौलाना अनवारुल हक़ ने 2016 में ही उनकी हत्या का फरमान जारी करते हुए इनाम देने की घोषणा की थी। मुस्लिम कट्टरपंथियों का मानना था कि कमलेश तिवारी ने पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया है। इसके पीछे गहरी साजिश का पता चला, 13 आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

हाईकोर्ट ने इसे क्रूरता से दिनदहाड़े हुई हत्या बताते हुए कहा था कि ये कट्टर सांप्रदायिक घृणा का प्रदर्शन था। हाईकोर्ट ने माना था कि सैयद आसिम अली का भी इस हत्याकांड में किरदार है। हत्यारों से उसने घटना से तुरंत पहले कई बार बात की थी। इसके इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी हैं। कमलेश तिवारी की हत्या अशफाक और मोईनुद्दीन ने की थी। हाईकोर्ट ने माना था कि सैयद आसिम अली पूरी साजिश में शामिल था। कमलेश तिवारी की हत्या के बाद भारत में इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव पर बड़ी बहस छिड़ गई थी।

4 बच्चों के बाप आलम के साथ लिव-इन रिलेशन में रहने लगी पूजा, गला घोंट कर मार डाला: लाश नहर में फेंका, UP पुलिस ने दबोचा

गाजियाबाद में मोहम्मद आलम ने अपनी लिव इन पार्टनर पूजा की हत्या कर शव नहर में फेंक दिया। मोहम्मद आलम का पहले ही निकाह हो चुका था, वह पूजा को अपने साथ नहीं रखना चाहता था। पुलिस ने मामला दर्ज कर मोहम्मद आलम को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद आलम पूजा के साथ 4 साल से लिव इन में रहता था। पूजा का अपने पहले पति से विवाद चल रहा था। पूजा बीते कुछ समय से उसके साथ रहने की जिद कर रही थी। इसी से क्रुद्ध हो कर उसने पूजा की चुन्नी से गला घोंट कर हत्या कर दी और शव नहर में फेंक दिया। इसके बाद उसने पुलिस के पास गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखा दी।

यह पूरा मामला पूजा की बहन के पूनम के पुलिस के पास पहुँचने के बाद खुला। पूनम ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसकी बहन कुछ दिनों से गायब हो गई है। पूनम ने अपनी बहन के साथ रहने वाले आलम पर शक जताया था। इसके बाद पुलिस ने इस मामले की जाँच चालू की।

पुलिस ने आलम को हिरासत में लिया और उससे पूछताछ की। इसके बाद आलम ने पूरी वारदात का खुलासा किया। आलम ने बताया कि उसकी पूजा से मुलाक़ात 5 साल पहले हुई थी। उसकी मुलाक़ात पूजा से गाजियाबाद के विजयनगर में हुई थी। यहाँ वह कार मैकेनिक की दुकान करता था।

इसके बाद उसकी पूजा से नजदीकी बढ़ गई। पूजा अपने पूर्व पति से अलग रहती थी, उसका तलाक को चुका था। पूजा के भी तीन बच्चे हैं। पूजा से नजदीकियाँ बढ़ने के बाद आलम ने उसके साथ लिव इन में रहना चालू कर दिया। आलम भी इससे पहले से निकाह कर चुका था। उसके 4 बच्चे हैं और उसकी पत्नी शना गाँव में रहती है।

पूजा से मुलाक़ात के कुछ समय बाद उसने नोएडा में कार मैकेनिक दुकान खोल ली थी। यह भी बताया गया कि आलम ने 6 माह पूर्व पूजा से भी निकाह कर लिया था। आलम ने बताया कि यह निकाह घर पर ही हुआ था। इसके कुछ दिनों के बाद से पूजा दबाव बनाती थी कि आलम उसके साथ ही रहे।

पूजा लगातार आलम पर दबाव बढ़ाती जा रही थी जबकि आलम इसके लिए तैयार नहीं था। आलम ने पूजा को इसके बाद रास्ते से हटाने का सोच लिया था। आलम ने उसकी हत्या का प्लान तैयार किया था। इसके बाद 19 जुलाई को पूजा ने उससे फिर यही मांग की और मिलने का दबाव बनाने लगी।

इस दौरान आलम का बेटा गाजियाबाद के एक अस्पताल में भर्ती था। पूजा उससे अस्पताल मिलने आने का दबाव बनाने लगी। इसके बाद दोनों बाहर एक जगह मिले और आलम पूजा को गाड़ी में बिठा ले गया। इसी दौरान दोनों में विवाद हुआ। इसके बाद आलम ने चुन्नी से गला घोंट कर पूजा की हत्या कर दी।

आलम ने पूजा के शव को गाजियाबाद की एक नहर में फेंक दिया। इसके बाद वह खुद पुलिस के पास पहुँचा और गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवा दी। हालाँकि, बाद में पूरा मामला खुल गया। पुलिस ने मोहम्मद आलम को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

वकील चलाता था वेश्यालय, पुलिस ने की कार्रवाई तो पहुँचा हाई कोर्ट: जज ने कहा- इसके कागज चेक करो, लगाया ₹10000 का जुर्माना

मद्रास हाई कोर्ट में एक वकील ने अपने वेश्यालय के विरुद्ध कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर कर दी। वकील ने दावा किया कि वह लोगों को स्वेच्छा से सेक्स के लिए मिलाने का काम करता है। हाई कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई करते हुए वकील की डिग्री जाँचने के आदेश दे दिए।

मद्रास हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई करते समय बिफर गया। हाई कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कोई वकील वेश्यालय जैसी चीज को बचाने के लिए याचिका लेकर आया है। हाई कोर्ट ने इसे बड़े दुख की बात बताया और कहा कि यह वकील भी कन्याकुमारी से है जो 100% साक्षर है।

कोर्ट इस याचिका से उखड़ गया और वेश्यालय चलाने वाले वकील से उसकी डिग्री और उसका बार काउंसिल सर्टिफिकेट दिखाने का आदेश जारी कर दिया। कोर्ट ने बार काउंसिल से कहा कि अच्छे कॉलेज से पढ़े वकीलों को ही पंजीकृत करे और इधर उधर से डिग्री लेने वालों को मान्यता ना दे। कोर्ट ने बार काउंसिल को उसके कागज जाँचने के आदेश भी दे दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि वकालत एक इज्जतदार पेशा है और वकील सामाजिक बदलाव के इंजीनियर हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक गरीब लड़की की गरीबी का फायदा उठा कर उसको वेश्यावृत्ति में झोंका है। कोर्ट ने वकील की याचिका को खारिज कर दिया और उस पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया।

गौरलतब है कि मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच में एक वकील मुरुगन ने एक याचिका दायर की थी। याचिका में माँग की गई थी कि उसके ऊपर नागरकोइल शहर में वेश्यालय चलाने के कारण दर्ज की गई FIR को रद्द कर दिया जाए और उन पुलिस वालों पर कार्रवाई की जाए जो इस धंधे में खलल डाल रहे थे।

मुरुगन ने हाई कोर्ट में याचिका लगाकर कहा था कि देश में सहमति से किया गया सेक्स मान्य है और वह ऐसे ही लोगों को मिलवाता है। मुरुगन ने अपन वेश्यालय पर कार्रवाई के पीछे रिश्तेदारों की साजिश की भी बात कही थी। उसने हाई कोर्ट से उसके खिलाफ सभी मामले रद्द करने की माँग की थी।

इस मामले में फरवरी, 2024 में नागरकोइल के इस वेश्यालय पर मारे गए छापे में एक 17 वर्ष की लड़की को भी बचाया गया था। लड़की ने पुलिस को बताया था कि उसका यहाँ शोषण हो रहा था। इस कार्रवाई के बाद मुरुगन के विरुद्ध POCSO समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

माजिद फ्रीमैन पर आतंक का आरोप: ‘कश्मीर टाइप हिंदू कुत्तों का सफाया’ वाले पोस्ट और लेस्टर में भड़की हिंसा, इस्लामी आतंकी संगठन हमास का है समर्थक

ब्रिटेन के लेस्टर में 2022 में हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा भड़काने वाले मुस्लिम कट्टरपंथी माजिद फ्रीमैन पर सुरक्षा एजेंसियों ने आतंक को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उसके इस्लामी आत्न्क्की संगठन हमास और फ़्रांस में हुए चार्ली अब्दो पर हमले को बढ़ावा देने के सबूत मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 36 वर्षीय माजिद नोवसरका को बुधवार (24 जुलाई, 2024) को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में उसके ऊपर दिसम्बर, 2023 और जून, 2024 के बीच माजिद ने लगातार इस्लामी आतंकी संगठन हमास के समर्थन में खूब प्रचार किया।

हमास ब्रिटेन के भीतर एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है। इसके अलावा माजिद ने 2015 में फ्रांस की पत्रिका चाली अब्दो पर हुए इस्लामी आतंकियों के हमले को भी सही ठहराया था और लोगों को ऐसा ही हमला करने के लिए भड़काया था। चार्ली अब्दो पर यह हमला ISIS ने किया था क्योंकि उसने पैगम्बर मुहम्मद का एक कार्टून छाप दिया था।

माजिद फ्रीमैन को 9 जुलाई, 2024 को गिरफ्तार किया गया था। उसे कोर्ट में पेश होने किए जाने के बाद शर्तों के साथ जमानत भी दे दी गई है। माजिद पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने और अपना घर छोड़ने को लेकर रोक लगाई गई है। अब आगे उस पर यह मुकदमा चलता रहेगा।

लेस्टर में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने में सबसे आगे था माजिद फ्रीमैन

माजिद फ्रीमैन लेस्टर का एक स्थानीय मुस्लिम “कार्यकर्ता” है, जो समस्या पैदा करने वाला और चरमपंथी इस्लामी विचारों को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। लेस्टर हिंसा के दौरान, माजिद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वाली फर्जी खबरें फैलाने में सबसे आगे था।

भारत और पाकिस्तान के बीच 28 अगस्त 2022 को टी-20 मैच में हुई हार के बाद भारतीय ध्वज का अपमान होने के बाद झड़प हो गई थी। झड़प के बाद हिंदुओं ने माहौल को शांत किया और उस व्यक्ति की मदद की जिसने भारतीय ध्वज छीनकर उसका अपमान किया था। हालाँकि, माजिद फ्रीमैन की कहानी कुछ और ही थी।

लेस्टर पुलिस ने 30 अगस्त को जब मुस्लिम संगठनों से प्रभावित होकर झूठ बोला कि हिंदू ‘मुस्लिमों को मारो’ के नारे लगा रहे हैं (बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी जाँच में ऐसा कोई नारा नहीं सुना गया था), तो माजिद ने हिंदुओं के खिलाफ दंगा भड़काने के लिए ट्विटर का सहारा लिया।

शौकत एडम का समर्थक है माजिद फ्रीमैन

माजिद फ्रीमैन एक इस्लामिक कट्टरपंथी है। वो 2022 के लेस्टर प्रकरण के दौरान हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने में सबसे आगे था, तो फिलिस्तीन समर्थक शौकत एडम का भी समर्थक है।

माजिद ने अपने ट्वीट्स में शौकत का खूब समर्थन किया। उसने एक ट्वीट में लिखा “पिछले हफ़्ते की यह बात याद है? @JonAshworth को अभी इसका पछतावा हो रहा होगा। सबसे बढ़िया आदमी @ShockatAdam ने जीत हासिल की और अब लेस्टर साउथ में उनकी जगह ले ली है।”

शौकत एडम की तरह ही माजिद फ्रीमैन भी उन्मादी मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई हिंसा को सही ठहराने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ता। ऐसे में उसी की तर्ज पर फ्रीमैन ने लगातार फर्जी खबरें फैलाकर और अपने सह-धर्मियों को ‘हिंदुओं को सबक सिखाने’ के लिए उकसाकर इसे एक स्तर आगे बढ़ाया।

सितंबर 2022 में इस इस्लामिक कट्टरपंथी ने आरोप लगाया कि 3 लोगों ने एक किशोर मुस्लिम लड़की का अपहरण करने की कोशिश की थी। उसने ट्वीट किया, “कंफर्म: आज सुबह लेस्टर के एक कॉलेज से कुछ ही दूरी पर एक घटना घटी।”

उसने दावा किया, “एक मुस्लिम किशोरी से तीन लोगों ने संपर्क किया था, लेकिन वह स्कूल में भाग गई। कॉलेज और पुलिस को इसकी जानकारी है और लेस्टर पुलिस ने परिवार को घटना का नंबर दे दिया है।” उसने यहाँ तक ​​दावा कर दिया कि वो लड़की के परिजनों से मिला, और लड़की अभी सदमे में है।

माजिद के अन्य इस्लामिक कट्टरपंथी साथियों ने उसके इस झूठ को खूब फैलाया। इस मामले में RSS का नाम भी घसीटा गया कि वो कथित अपहरण के मामले में अहम भूमिका निभा रहा था। यही नहीं, इन इस्लामिक कट्टरपंथियों ने मुस्लिम लड़की के अपहरण के झूठे मामले में हिंदू व्यक्ति की जानकारी ऑनलाइन कर दी और उसका पता भी सोशल मीडिया पर लीक कर दिया। इसके साथ ही उस व्यक्ति को फेसबुक पर धमकियाँ दी गई।

इस मामले में लेस्टर पुलिस ने प्रेस रिलीज जारी कर सफाई दी थी और कहा था कि किसी मुस्लिम लड़की के अपहरण की कोई घटना नहीं हुई, लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथियों ने लगातार हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को भड़काने की कोशिश की।

भारतीय बल्लेबाजों की नकल कर गली क्रिकेट खेलने चले अहमद शहजाद, स्थानीय गेंदबाज ने 3 बार किया क्लीन बोल्ड: वीडियो वायरल, हुई बेइज्जती

काफी पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में शामिल होकर अपने बल्ले से धमाल मचाने वाले अहमद शहजाद ने इस साल पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की विश्वकप में बुरी हार को लेकर बाबर आजम को जमकर घेरा था। अहमद शहजाद ने न सिर्फ बाबर आजम, बल्कि शाहीन शाह अफरीदी और मोहम्मद रिजवान को भी लपेटे में लिया था और डिमांड की थी कि पाकिस्तानी क्रिकेट को तीनों बर्बाद कर दे रहे हैं। इस बीच, अहमद शहजाद का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो किसी बाग में लड़कों के साथ क्रिकेट खेल रहा है। खास बात तो ये है कि शहजाद जो खुद को तुर्रम खाँ कहता है, वो लोकल लड़के की बॉल भी नहीं झेल पाता और एक ओवर के भीतर 3-3 बार क्लीन बोल्ड हो जाता है।

अहमद शहजाद की बेईज्जती का वीडियो पाकिस्तान के त्रिचाल शहर का बताया जा रहा है, जहाँ वो स्थानीय फैन्स के साथ क्रिकेट खेलते नजर आए। हालाँकि उनकी बुरी हालत का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग अहमद शहजाद का वीडियो शेयर कर बोल रहे हैं कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम चरस के नशे में रहती है। ये इंटरनेशनल क्रिकेटर हैं और इन्हें गली के लड़के भी एक ओवर में 3 बार क्लीन बोल्ड कर दे रहे हैं।

एक एक्स यूजर ने तो यहाँ तक कह दिया कि ये स्टूडियो में बैठकर बकवास करने से कुछ नहीं होता। अगर आप भी अच्छा खेल रहे होते, तो ये दिन न देखने पड़ते।

सुहैब नाम के यूजर ने बाबर आजम की तस्वीर लगाकर लिखा, “लानत है।”

सैयद मुहम्मद हसन ने लिखा, “मैं किसी गली के बॉलर पर शॉट क्यों नहीं मार पाया, ये आप बाबर से पूछे क्यों कि वो 5 साल से किंग बना हुआ है-अहमद शहजाद”- हंसना मना है।

बता दें कि अहमद शहजाद ने बाबर आजम, शाहीन शाह अफरीदी और मोहम्मद रिजवान पर टीम में गुटबाजी का आरोप लगाया था। शहजाद ने तीनों ही खिलाड़ियों को टीम से निकालने की माँग की थी। हालाँकि अहमद शहजाद की बड़ी-बड़ी बातों के वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं, जिसमें बोल जा रहा है कि साल 2019 से खुद नेशनल टीम से बाहर अहमद शहजाद की इतनी भी औकात नहीं रह गई है कि वो किसी पर बोल सके।

‘बहुत ज़रूरत थी’: 70 साल के कलीमुल्लाह ने 25 साल की लड़की से रचाया निकाह, कहा – मेरा ख्याल रखने वाला कोई नहीं रहा

बिहार के गया में दादा के उम्र के एक शख्स के निकाह के बाद जब खबर इलाके में फैली तो सब हैरान रह गए। कलीमुल्लाह की उम्र 70 वर्ष है, जबकि उसने जिस लड़की से निकाह किया है उसकी आयु मात्र 25 वर्ष है। मामला शेरघाटी आमस प्रखंड के हमजापुर का है। उसके निकाह को जायज ठहराने वाले उसके करीबी कह रहे हैं कि प्यार-मोहब्बत की कोई उम्र नहीं होती। परिजनों के साथ-साथ गाँव वाले भी इस निकाह में पूरे उत्साह के साथ शामिल रहे।

साथ ही कई मीडिया वालों को भी यहाँ देखा गया। बुजुर्ग का नाम कलीमुल्लाह नूरानी है, वहीं जिस लड़की से उन्होंने निकाह किया है उसका नाम रेशमा परवीन है। रेशमा परवीन आमस प्रखंड के हमजापुर वार्ड नंबर 11 में रहती है। वहीं 70 वर्षीय बुजुर्ग कलीमुल्लाह नूरानी बैदा गाँव के रहने वाले हैं। शादी दोनों ने अपनी मर्जी से की है। हालाँकि, इस दौरान कलीमुल्लाह लोगों को ये कहते नज़र आए कि उनकी उम्र 70 साल नहीं है, बल्कि वो सिर्फ 50 साल के ही हैं।

इस निकाह से परिजनों को कोई दिक्कत नहीं है। लड़की का का भी कहना है कि वो ख़ुशी-ख़ुशी इस निकाह को कबूल कर रही है। मीडिया के सामने भी उसने इसी बात को दोहराया। जब मीडिया वालों ने कलीमुल्लाह से सवाल किया कि आखिर क्या कारण है कि वो इस उम्र में शादी कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि शादी की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने कहा कि उनका ख्याल रखने वाला अब कोई नहीं रहा, लिहाजा निकाह को लेकर उन्होंने बात की।

याद दिला दें कि मोहम्मद कलीमुल्लाह नूरानी और रेशमा परवीन ने बिना दवाब के निकाह किया है। हालाँकि, इसकी पूरे इलाके में इसकी चर्चा काफी तेज़ी से फैल रही है। आखिर 70 साल के बुजुर्ग ने 25 साल की युवती से शादी क्यों की? लोगों द्वारा बताया जा रहा है कि दो बच्चों के पिता कलीमुल्लाह, पत्नी की मौत के बाद अकेले पड़ गए थे, उन्हें अपने घरेलू काम निपटाने में समस्या हो रही थी। सोशल मीडिया पर भी इसकी खासी चर्चा है।

‘तुमलोग वापस भारत भागो’: कनाडा में अब सांसद को ही धमकी दे रहा खालिस्तानी पन्नू, हिन्दू मंदिर पर हमले का विरोध करने पर भड़का

कनाडा के लिबरल पार्टी से सांसद चंद्र आर्य को खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने धमकाने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने तीखा पलटवार किया है। दरअसल, कनाडा में हिंदू मंदिर पर हमले को लेकर चंद्र आर्या ने खालिस्तानी आतंकियों पर हमला बोला था, तो गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उन्हें कनाडा की नागरिकता लौटाकर भारत लौट जाने के लिए कहा था। पन्नू की ओर से देश छोड़ने की धमकी मिलने के बाद सांसद आर्य ने भी जवाब दिया है।

दरअसल, खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी कर भारतीय मूल के कनाडाई सांसद चंद्र आर्य और उनके समर्थकों को तुरंत “भारत वापस चले जाने” का निर्देश दिया है। इसका जवाब देते हुए आर्य ने कहा है कि हमारे कनाडाई चार्टर ऑफ राइट्स में दी गई स्वतंत्रता का गलत इस्तेमाल करते हुए खालिस्तानी कनाडा की धरती में जहर बोते हुए इसे गंदा कर रहे हैं।

बता दें कि कनाडा के एडमॉन्टन शहर में बीएपीएस स्वामिनारायण मंदिर में तोड़फोड़ की गई और दीवार पर विवादित नारे लिखे गए। इसका आरोप खालिस्तानी तत्वों पर लगा है। इसी को लेकर सांसद चंद्र आर्य ने बयान जारी किया था, जिस पर पन्नू ने उनको देश छोड़ने के लिए धमकाया।

कनाडा के सांसद चंद्र आर्य ने खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की उनके खिलाफ धमकी जारी करने के लिए निंदा करते हुए एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा,’एडमॉन्टन में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में तोड़फोड़ और कनाडा में खालिस्तानियों के हिंसा फैलाने की मैंने निंदा की। मेरे निंदा किए जाने के जवाब में सिख्स फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी कर मुझसे और मेरे हिंदू कनाडाई दोस्तों को धमकी देते हुए कहा है कि भारत वापस जाओ।’

आर्य ने आगे लिखा, ‘हम हिंदू दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से कनाडा आए हैं। दक्षिण एशिया के देशों के अलावा अफ्रीका और कैरेबियन देशों और दुनिया के कई दूसरे हिस्सों से हम यहां आए हैं और हम यहां किराएदार नहीं है। कनाडा ही हमारा देश और हमारी अपनी जमीन है। हमने कनाडा के सामाजिक और आर्थिक विकास में बहुत सकारात्मकयोगदान दिया है। अभी भी कर रहे हैं और आगे भी जारी रखेंगे।’ आर्य ने आगे कहा कि हिंदू संस्कृति और विरासत के अपने लंबे इतिहास के साथ हिन्दू समाज ने कनाडा के बहुसांस्कृतिक ताने बाने को मजबूत करने का काम किया है। ये जरूर है कि हाल के समय में खालिस्तानी अतिवादियों ने कनाडाई चार्टर ऑफ राइट्स द्वारा गारंटीड हमारी स्वतंत्रता का दुरुपयोग करते हुए हमारी भूमि कनाडा को प्रदूषित किया है।

पन्नू ने कहा था कि “अपने आकाओं भारत के हितों को बढ़ावा दे रहे थे”। पन्नू ने कहा कि सांसद और उनके समर्थक “अपनी नागरिकता त्याग दें और अपनी मातृभूमि भारत वापस चले जाएँ।” पन्नू ने कहा, “हम खालिस्तान समर्थक सिखों ने दशकों से कनाडा के प्रति अपनी वफादारी दिखाई है।” हालाँकि चंद्र आर्य ने पन्नू को मुँहतोड़ जवाब दिया है। वो इस मुद्दे पर बैकफुट पर आने की जगह आगे बढ़कर खालिस्तानियों से मोर्चा ले रहे हैं

मुजफ्फरनगर में नेम-प्लेट लगाने वाले आदेश के समर्थन में काँवड़िए, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बोले – ‘हमारा तो धर्म भ्रष्ट हो गया न…’

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस प्रशासन ने आदेश जारी किया था कि काँवड़ यात्रा मार्ग पर लगने वाली सभी दुकानों, ठेलों, होटलों, रेहड़ियों पर दुकानकार अपना और अपने कर्मचारियों के नाम साफ शब्दों में लिखे। इसका असर ये हुआ कि संगम शुद्ध शाकाहारी होटल का नाम अब सलीम शुद्ध शाकाहारी होटल हो गया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दिया। इस आदेश के बाद काँवड़ियों की भी प्रक्रिया सामने आई है, जिसमें लोगों ने मुजफ्फरनगर प्रशासन के फैसले की तारीफ की है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताई है।

यूपी तक से बातचीत में कई काँवड़ियों ने अपने मन की पीड़ा व्यक्त की। एक कावँड़िए ने कहा कि अगर नेम-प्लेट होता तो कम से कम ये तो साफ हो जाता कि जो भोजन वो कर रहे हैं, वो शाका हारी है या माँसाहारी। काँवड़ यात्रा पर निकले एक व्यक्ति ने अपना दुख कुछ इस तरह से जाहिर किया, “जो भोले नाथ के लिए जल लेकर जाते हैं, वो नॉनवेज छुएँगे तो अनर्थ हो जाएगा। लेकिन ऐसे होटलों में जिन बर्तनों में माँसाहारी भोजन बनाया गया, उसमें पलट कर हमें शाकाहारी भोजन दे दिया। हमारा तो धर्म भ्रष्ट हो गया न…।”

सुप्रीम कोर्ट की रोक पर बोलते हुए एक काँवड़िया ने कहा, “योगी जी ने तो बहुत अच्छा किया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हम क्या ही कहें।”

एक काँवड़िए ने कहा, “अगर मुस्लिम ढाबा चला रहा है, तो वेज खाना देगा या नॉन-वेज, इसका कैसे पता चलेगा।” उन्होंने आगे कहा, “भगवान शिव के लिए हम पवित्र जल लेकर जा रहे हैं, अगर हम किसी ऐसे होटल में खाना खा रहे हैं, जहाँ नॉन वेज भी मिलता हो, तो हमारा तो पूरा व्रत ही खराब हो गया। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सही फैसला लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाकर गलत किया है।”

एक कावँडिए ने कहा कि अब हम कहीं भी खाना खाते समय पूरी तरह से परेशान रहेंगे कि हम सही शुद्ध शाकाहारी खाना खा रहे हैं, साफ सुथरे बर्तन में या नहीं, यो तो धर्म संकट वाली बात हो गई।

बता दें कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने जब नेम-प्लेट का आदेश जारी किया, तो राजनीतिक रूप से बहुत हल्ला मचाया गया। ये मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया, जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। हालाँकि इस मामले में अभी आखिरी फैसला नहीं आया है। लेकिन पुलिस के आदेश के बाद कई सारी चौंकाने वाली बातें सामने आई। मुजफ्फरनगर में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे-58 पर स्थित जो दुकान कुछ दिन पहले ‘चाय लवर पॉइंट’ के नाम से हुआ करती थी, अब वह ‘वकील अहमद टी स्टॉल’ हो गया है। पुलिस के आदेश के बाद दुकान को चलाने वाले फहीम ने अपनी दुकान का नाम बदल दिया है। फहीम ने बताया कि इस निर्देश के बाद काँवड़ यात्रा के दौरान उनके काम पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है।

इसी हाइवे पर पिछले ‘संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ नाम का एक ढाबा कुछ दिन पहले तक होता था। अब इस ढाबे का नाम बदल गया। संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय की जगह यह ‘सलीम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ है। सलीम ने खाद्य सुरक्षा विभाग में इसी नाम से इसका रजिस्‍ट्रेशन भी करवा दिया है। इस दुकान को सलीम पिछले 25 सालों से चला रहा था।

10 वर्षों में 67% घटी आतंकी घटनाएँ: संसद में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री का ऐलान – आतंकियों की जगह जेल में होगी या फिर जहन्नुम में

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने संसद में आतंकवाद की चुनौती से संबंधित सवालों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि विगत कुछ दिनों में जम्मू कश्मीर में 28 आतंकवादी मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि ये दुःख का विषय है कि इन मुठभेड़ों में हमारे सैनिक भी बलिदान हुए हैं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि मृत सैनिकों की संख्या मारे गए आतंकियों की संख्या से बहुत कम है। उन्होंने याद किया कि 2004 से लेकर 2014 तक आतंकी की 7217 घटनाएँ हुई थीं।

मोदी सरकार की तरफ से जवाब देते हुए नित्यानंद राय ने बताया कि इसके उलट मोदी सरकार के कार्यकाल में 2014 से लेकर 2014 जुलाई तक 2259 आतंकी वारदातें हुई थीं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि ये नहीं होना चाहिए था और ये दुःखद है। साथ ही उन्होंने चेताया कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। नित्यानंद राय ने स्पष्ट कहा, “आतंकवाद के प्रति मोदी सरकार की जीरो टॉलेरेंस की नीति है। हम आतंकवाद को समाप्त कर देंगे।”

उन्होंने कहा कि वो आश्वस्त करना चाहते हैं कि आतंकियों की जगह या तो जेल में होगी या फिर जहन्नुम में। उन्होंने UPA काल की याद दिलाते हुए कहा कि तब 10 वर्षों में आतंकी हमलों में जान गँवाने वाले आम नागरिकों की संख्या 2829 थी। वहीं मोदी सरकार के एक दशक की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इन 10 वर्षों में ये आँकड़ा 67% घटते हुए 941 रह गई है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोग अब शांतिपूर्ण माहौल में रह रहे हैं, वहाँ सुरक्षा की पूरी गारंटी है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में हिन्दुओं को इतना प्रताड़ित किया गया, उनका नरसंहार हुआ और महिलाओं के साथ बलात्कार हुए, एक साजिश के तहत घिनौनी राजनीति को आधार बना कर कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ। उन्होंने बताया कि कश्मीर के विस्थापित सरकारी कर्मचारियों को समायोजित करने के लिए 6000 आवासों के निर्माण को मंजूरी दी है, जिनमें से 2088 का काम पूरा कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि विस्थापित हिन्दुओं के पुनर्वास एवं उन्हें नौकरी देने के लिए काम किया जा रहा है।

जिस पर असम की महिला नेता की यौन प्रताड़ना का आरोप, वो बिहार में कर रहा था उपद्रव: नीतीश की पुलिस ने पटक के कूट दिया, यूथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष BV श्रीनिवास का वीडियो

असम में युवा कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष अंगकिता दत्ता ने युवा कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उन्होंने राहुल गाँधी से भी न्याय माँगा था। इसी जनवरी 2024 में न्याय यात्रा के तहत राहुल गाँधी असम भी पहुँचे थे, तब भी दत्ता ने न्याय माँगा था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। इस बीच, बीवी श्रीनिवास पहुँच गए बिहार की राजधानी पटना। युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ धरना-प्रदर्शन करने लगे और पुलिस से भिड़ गए। जिसके बाद पटना पुलिस ने श्रीनिवास ही नहीं, उनके साथियों को भी बल भर कूटा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महंगाई पेपर लीक कांड सहित कई मुद्दों को लेकर बुधवार (24 जुलाई 2024) को युवा कॉन्ग्रेस के द्वारा विधानसभा मार्च निकाला गया था। पटना के बोरिंग रोड पंचमुखी हनुमान मंदिर से कॉन्ग्रेस के युवा कार्यकर्ता सैकड़ों की संख्या में निकले, बोरिंग रोड चौराहे पर वो पुलिस से भिड़ गए। जिसके बाद पुलिस ने युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी कूट दिया। इसी में अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास भी पुलिस वालों के हत्थे चढ़ गए, तो उनकी भी कुटाई हो गई।

इस लाठीचार्ज के दौरान युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस पर हमले किए। इस भिडंत में कई पुलिस वाले भी घायल हुए हैं।

बीवी श्रीनिवास कुटे, तो जाहिर सी बात है कि एक रुदाली गैंग भी कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम का हिस्सा है। वो तुरंत रोने लग गई। यू-ट्यूबर के तौर पर मशहूर हो चुके अजित अंजुम ने तो इसे लोकतंत्र पर ही हमला करार दे दिया।

अजित अंजुम ने लिखा, “विरोध प्रदर्शन किसी भी राजनीतिक नेता/कार्यकर्ता का लोकतांत्रिक अधिकार है। पुलिस का तरीका किसी भी सूरत में ठीक नहीं है। यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास पर ऐसे लाठी बरसाई जा रही है, जैसे किसी बहुत बड़ा अपराधी पकड़ में आया।”

वैसे, अपनी कुटाई को श्रीनिवास ने कुछ इस तरह से बताया, “जुल्म सहते नहीं हैं! अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से, डरते नहीं हैं!! युवा शक्ति जिंदाबाद!”

ये वही श्रीनिवास हैं, जो महिलाओं का उत्पीड़न करते हैं, तो भी हाई कमान उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेता, बल्कि पीड़ित पर ही कार्रवाई करता है। करीब 5 साल से युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास लगातार विवादों में भी रहे हैं। खैर, इनका एक वीडियो दिल्ली से सामने आया है, जिसमें विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद अपना हाथ छुड़ाकर इतनी रफ्तार से भागे थे, मानो ओलंपिक पदक जीतने की रेस हो। खैर, भगोड़ों, उत्पीड़कों के साथ सहानुभूति रखने वालों की कोई कमीं नहीं है। पटना में पिटाई का समाचार समाप्त हुआ।