काफी पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में शामिल होकर अपने बल्ले से धमाल मचाने वाले अहमद शहजाद ने इस साल पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की विश्वकप में बुरी हार को लेकर बाबर आजम को जमकर घेरा था। अहमद शहजाद ने न सिर्फ बाबर आजम, बल्कि शाहीन शाह अफरीदी और मोहम्मद रिजवान को भी लपेटे में लिया था और डिमांड की थी कि पाकिस्तानी क्रिकेट को तीनों बर्बाद कर दे रहे हैं। इस बीच, अहमद शहजाद का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो किसी बाग में लड़कों के साथ क्रिकेट खेल रहा है। खास बात तो ये है कि शहजाद जो खुद को तुर्रम खाँ कहता है, वो लोकल लड़के की बॉल भी नहीं झेल पाता और एक ओवर के भीतर 3-3 बार क्लीन बोल्ड हो जाता है।
अहमद शहजाद की बेईज्जती का वीडियो पाकिस्तान के त्रिचाल शहर का बताया जा रहा है, जहाँ वो स्थानीय फैन्स के साथ क्रिकेट खेलते नजर आए। हालाँकि उनकी बुरी हालत का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग अहमद शहजाद का वीडियो शेयर कर बोल रहे हैं कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम चरस के नशे में रहती है। ये इंटरनेशनल क्रिकेटर हैं और इन्हें गली के लड़के भी एक ओवर में 3 बार क्लीन बोल्ड कर दे रहे हैं।
Ahmed Shehzad was bowled out three times in an over by a local resident in Chitral…. ? pic.twitter.com/yJUZlLRJcY
सैयद मुहम्मद हसन ने लिखा, “मैं किसी गली के बॉलर पर शॉट क्यों नहीं मार पाया, ये आप बाबर से पूछे क्यों कि वो 5 साल से किंग बना हुआ है-अहमद शहजाद”- हंसना मना है।
Mai kisi gully k bowler pr shot kyu nh maar paya ye ap Babar se pouche kyu k wo 5 saal se KING bana howa hai – Ahmed Shehzad.
— Syed Muhammad Hassaan (@SHassaan1589) July 23, 2024
बता दें कि अहमद शहजाद ने बाबर आजम, शाहीन शाह अफरीदी और मोहम्मद रिजवान पर टीम में गुटबाजी का आरोप लगाया था। शहजाद ने तीनों ही खिलाड़ियों को टीम से निकालने की माँग की थी। हालाँकि अहमद शहजाद की बड़ी-बड़ी बातों के वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं, जिसमें बोल जा रहा है कि साल 2019 से खुद नेशनल टीम से बाहर अहमद शहजाद की इतनी भी औकात नहीं रह गई है कि वो किसी पर बोल सके।
बिहार के गया में दादा के उम्र के एक शख्स के निकाह के बाद जब खबर इलाके में फैली तो सब हैरान रह गए। कलीमुल्लाह की उम्र 70 वर्ष है, जबकि उसने जिस लड़की से निकाह किया है उसकी आयु मात्र 25 वर्ष है। मामला शेरघाटी आमस प्रखंड के हमजापुर का है। उसके निकाह को जायज ठहराने वाले उसके करीबी कह रहे हैं कि प्यार-मोहब्बत की कोई उम्र नहीं होती। परिजनों के साथ-साथ गाँव वाले भी इस निकाह में पूरे उत्साह के साथ शामिल रहे।
साथ ही कई मीडिया वालों को भी यहाँ देखा गया। बुजुर्ग का नाम कलीमुल्लाह नूरानी है, वहीं जिस लड़की से उन्होंने निकाह किया है उसका नाम रेशमा परवीन है। रेशमा परवीन आमस प्रखंड के हमजापुर वार्ड नंबर 11 में रहती है। वहीं 70 वर्षीय बुजुर्ग कलीमुल्लाह नूरानी बैदा गाँव के रहने वाले हैं। शादी दोनों ने अपनी मर्जी से की है। हालाँकि, इस दौरान कलीमुल्लाह लोगों को ये कहते नज़र आए कि उनकी उम्र 70 साल नहीं है, बल्कि वो सिर्फ 50 साल के ही हैं।
इस निकाह से परिजनों को कोई दिक्कत नहीं है। लड़की का का भी कहना है कि वो ख़ुशी-ख़ुशी इस निकाह को कबूल कर रही है। मीडिया के सामने भी उसने इसी बात को दोहराया। जब मीडिया वालों ने कलीमुल्लाह से सवाल किया कि आखिर क्या कारण है कि वो इस उम्र में शादी कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि शादी की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने कहा कि उनका ख्याल रखने वाला अब कोई नहीं रहा, लिहाजा निकाह को लेकर उन्होंने बात की।
बिहार: 80 साल के बुजुर्ग ने 25 साल की लड़की से रचाया निकाह, मोहम्मद कलीमुल्लाह ने कहा कि मुझे शादी करने की सख्त जरुरत पड़ गई है। इसलिए मुझे निकाह करना पड़ा।#Bihar#Biharnews#gayapic.twitter.com/0u5aZ1X847
— FirstBiharJharkhand (@firstbiharnews) July 24, 2024
याद दिला दें कि मोहम्मद कलीमुल्लाह नूरानी और रेशमा परवीन ने बिना दवाब के निकाह किया है। हालाँकि, इसकी पूरे इलाके में इसकी चर्चा काफी तेज़ी से फैल रही है। आखिर 70 साल के बुजुर्ग ने 25 साल की युवती से शादी क्यों की? लोगों द्वारा बताया जा रहा है कि दो बच्चों के पिता कलीमुल्लाह, पत्नी की मौत के बाद अकेले पड़ गए थे, उन्हें अपने घरेलू काम निपटाने में समस्या हो रही थी। सोशल मीडिया पर भी इसकी खासी चर्चा है।
कनाडा के लिबरल पार्टी से सांसद चंद्र आर्य को खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने धमकाने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने तीखा पलटवार किया है। दरअसल, कनाडा में हिंदू मंदिर पर हमले को लेकर चंद्र आर्या ने खालिस्तानी आतंकियों पर हमला बोला था, तो गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उन्हें कनाडा की नागरिकता लौटाकर भारत लौट जाने के लिए कहा था। पन्नू की ओर से देश छोड़ने की धमकी मिलने के बाद सांसद आर्य ने भी जवाब दिया है।
दरअसल, खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी कर भारतीय मूल के कनाडाई सांसद चंद्र आर्य और उनके समर्थकों को तुरंत “भारत वापस चले जाने” का निर्देश दिया है। इसका जवाब देते हुए आर्य ने कहा है कि हमारे कनाडाई चार्टर ऑफ राइट्स में दी गई स्वतंत्रता का गलत इस्तेमाल करते हुए खालिस्तानी कनाडा की धरती में जहर बोते हुए इसे गंदा कर रहे हैं।
बता दें कि कनाडा के एडमॉन्टन शहर में बीएपीएस स्वामिनारायण मंदिर में तोड़फोड़ की गई और दीवार पर विवादित नारे लिखे गए। इसका आरोप खालिस्तानी तत्वों पर लगा है। इसी को लेकर सांसद चंद्र आर्य ने बयान जारी किया था, जिस पर पन्नू ने उनको देश छोड़ने के लिए धमकाया।
कनाडा के सांसद चंद्र आर्य ने खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की उनके खिलाफ धमकी जारी करने के लिए निंदा करते हुए एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा,’एडमॉन्टन में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में तोड़फोड़ और कनाडा में खालिस्तानियों के हिंसा फैलाने की मैंने निंदा की। मेरे निंदा किए जाने के जवाब में सिख्स फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी कर मुझसे और मेरे हिंदू कनाडाई दोस्तों को धमकी देते हुए कहा है कि भारत वापस जाओ।’
आर्य ने आगे लिखा, ‘हम हिंदू दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से कनाडा आए हैं। दक्षिण एशिया के देशों के अलावा अफ्रीका और कैरेबियन देशों और दुनिया के कई दूसरे हिस्सों से हम यहां आए हैं और हम यहां किराएदार नहीं है। कनाडा ही हमारा देश और हमारी अपनी जमीन है। हमने कनाडा के सामाजिक और आर्थिक विकास में बहुत सकारात्मकयोगदान दिया है। अभी भी कर रहे हैं और आगे भी जारी रखेंगे।’ आर्य ने आगे कहा कि हिंदू संस्कृति और विरासत के अपने लंबे इतिहास के साथ हिन्दू समाज ने कनाडा के बहुसांस्कृतिक ताने बाने को मजबूत करने का काम किया है। ये जरूर है कि हाल के समय में खालिस्तानी अतिवादियों ने कनाडाई चार्टर ऑफ राइट्स द्वारा गारंटीड हमारी स्वतंत्रता का दुरुपयोग करते हुए हमारी भूमि कनाडा को प्रदूषित किया है।
In response to my condemnation of the vandalism of the Hindu temple BAPS Swaminarayan Mandir in Edmonton and other acts of hate and violence by Khalistan supporters in Canada, Gurpatwant Singh Pannun of Sikhs for Justice has released a video demanding me and my Hindu-Canadian… pic.twitter.com/vMhnN45rc1
पन्नू ने कहा था कि “अपने आकाओं भारत के हितों को बढ़ावा दे रहे थे”। पन्नू ने कहा कि सांसद और उनके समर्थक “अपनी नागरिकता त्याग दें और अपनी मातृभूमि भारत वापस चले जाएँ।” पन्नू ने कहा, “हम खालिस्तान समर्थक सिखों ने दशकों से कनाडा के प्रति अपनी वफादारी दिखाई है।” हालाँकि चंद्र आर्य ने पन्नू को मुँहतोड़ जवाब दिया है। वो इस मुद्दे पर बैकफुट पर आने की जगह आगे बढ़कर खालिस्तानियों से मोर्चा ले रहे हैं
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस प्रशासन ने आदेश जारी किया था कि काँवड़ यात्रा मार्ग पर लगने वाली सभी दुकानों, ठेलों, होटलों, रेहड़ियों पर दुकानकार अपना और अपने कर्मचारियों के नाम साफ शब्दों में लिखे। इसका असर ये हुआ कि संगम शुद्ध शाकाहारी होटल का नाम अब सलीम शुद्ध शाकाहारी होटल हो गया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दिया। इस आदेश के बाद काँवड़ियों की भी प्रक्रिया सामने आई है, जिसमें लोगों ने मुजफ्फरनगर प्रशासन के फैसले की तारीफ की है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताई है।
यूपी तक से बातचीत में कई काँवड़ियों ने अपने मन की पीड़ा व्यक्त की। एक कावँड़िए ने कहा कि अगर नेम-प्लेट होता तो कम से कम ये तो साफ हो जाता कि जो भोजन वो कर रहे हैं, वो शाका हारी है या माँसाहारी। काँवड़ यात्रा पर निकले एक व्यक्ति ने अपना दुख कुछ इस तरह से जाहिर किया, “जो भोले नाथ के लिए जल लेकर जाते हैं, वो नॉनवेज छुएँगे तो अनर्थ हो जाएगा। लेकिन ऐसे होटलों में जिन बर्तनों में माँसाहारी भोजन बनाया गया, उसमें पलट कर हमें शाकाहारी भोजन दे दिया। हमारा तो धर्म भ्रष्ट हो गया न…।”
सुप्रीम कोर्ट की रोक पर बोलते हुए एक काँवड़िया ने कहा, “योगी जी ने तो बहुत अच्छा किया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हम क्या ही कहें।”
एक काँवड़िए ने कहा, “अगर मुस्लिम ढाबा चला रहा है, तो वेज खाना देगा या नॉन-वेज, इसका कैसे पता चलेगा।” उन्होंने आगे कहा, “भगवान शिव के लिए हम पवित्र जल लेकर जा रहे हैं, अगर हम किसी ऐसे होटल में खाना खा रहे हैं, जहाँ नॉन वेज भी मिलता हो, तो हमारा तो पूरा व्रत ही खराब हो गया। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सही फैसला लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाकर गलत किया है।”
"हमारा तो धर्म भ्रष्ट हो गया ना…" छलका कांवड़ियों का दर्द।
कांवड़ यात्रा कॉन्ट्रोवर्सी: योगी सरकार के नेमप्लेट वाले फैसले पर आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक लागा दी है। इसे लेकर यूपी Tak ने कांवड़ियों से बात की तो उन्होंने अपने दिल का हाल सुना डाला।#KanwarYatraOrder#UttarPradesh… pic.twitter.com/b4eTbSP7Ah
एक कावँडिए ने कहा कि अब हम कहीं भी खाना खाते समय पूरी तरह से परेशान रहेंगे कि हम सही शुद्ध शाकाहारी खाना खा रहे हैं, साफ सुथरे बर्तन में या नहीं, यो तो धर्म संकट वाली बात हो गई।
बता दें कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने जब नेम-प्लेट का आदेश जारी किया, तो राजनीतिक रूप से बहुत हल्ला मचाया गया। ये मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया, जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। हालाँकि इस मामले में अभी आखिरी फैसला नहीं आया है। लेकिन पुलिस के आदेश के बाद कई सारी चौंकाने वाली बातें सामने आई। मुजफ्फरनगर में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे-58 पर स्थित जो दुकान कुछ दिन पहले ‘चाय लवर पॉइंट’ के नाम से हुआ करती थी, अब वह ‘वकील अहमद टी स्टॉल’ हो गया है। पुलिस के आदेश के बाद दुकान को चलाने वाले फहीम ने अपनी दुकान का नाम बदल दिया है। फहीम ने बताया कि इस निर्देश के बाद काँवड़ यात्रा के दौरान उनके काम पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है।
इसी हाइवे पर पिछले ‘संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ नाम का एक ढाबा कुछ दिन पहले तक होता था। अब इस ढाबे का नाम बदल गया। संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय की जगह यह ‘सलीम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ है। सलीम ने खाद्य सुरक्षा विभाग में इसी नाम से इसका रजिस्ट्रेशन भी करवा दिया है। इस दुकान को सलीम पिछले 25 सालों से चला रहा था।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने संसद में आतंकवाद की चुनौती से संबंधित सवालों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि विगत कुछ दिनों में जम्मू कश्मीर में 28 आतंकवादी मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि ये दुःख का विषय है कि इन मुठभेड़ों में हमारे सैनिक भी बलिदान हुए हैं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि मृत सैनिकों की संख्या मारे गए आतंकियों की संख्या से बहुत कम है। उन्होंने याद किया कि 2004 से लेकर 2014 तक आतंकी की 7217 घटनाएँ हुई थीं।
मोदी सरकार की तरफ से जवाब देते हुए नित्यानंद राय ने बताया कि इसके उलट मोदी सरकार के कार्यकाल में 2014 से लेकर 2014 जुलाई तक 2259 आतंकी वारदातें हुई थीं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि ये नहीं होना चाहिए था और ये दुःखद है। साथ ही उन्होंने चेताया कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। नित्यानंद राय ने स्पष्ट कहा, “आतंकवाद के प्रति मोदी सरकार की जीरो टॉलेरेंस की नीति है। हम आतंकवाद को समाप्त कर देंगे।”
उन्होंने कहा कि वो आश्वस्त करना चाहते हैं कि आतंकियों की जगह या तो जेल में होगी या फिर जहन्नुम में। उन्होंने UPA काल की याद दिलाते हुए कहा कि तब 10 वर्षों में आतंकी हमलों में जान गँवाने वाले आम नागरिकों की संख्या 2829 थी। वहीं मोदी सरकार के एक दशक की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इन 10 वर्षों में ये आँकड़ा 67% घटते हुए 941 रह गई है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोग अब शांतिपूर्ण माहौल में रह रहे हैं, वहाँ सुरक्षा की पूरी गारंटी है।
'आतंकी घटनाओं में कुछ हमारे फौज की भी मौत हुई, जो दुखद है लेकिन जो आतंकी मरे उससे संख्या बहुत कम है'
उन्होंने कहा कि कश्मीर में हिन्दुओं को इतना प्रताड़ित किया गया, उनका नरसंहार हुआ और महिलाओं के साथ बलात्कार हुए, एक साजिश के तहत घिनौनी राजनीति को आधार बना कर कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ। उन्होंने बताया कि कश्मीर के विस्थापित सरकारी कर्मचारियों को समायोजित करने के लिए 6000 आवासों के निर्माण को मंजूरी दी है, जिनमें से 2088 का काम पूरा कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि विस्थापित हिन्दुओं के पुनर्वास एवं उन्हें नौकरी देने के लिए काम किया जा रहा है।
असम में युवा कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष अंगकिता दत्ता ने युवा कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उन्होंने राहुल गाँधी से भी न्याय माँगा था। इसी जनवरी 2024 में न्याय यात्रा के तहत राहुल गाँधी असम भी पहुँचे थे, तब भी दत्ता ने न्याय माँगा था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। इस बीच, बीवी श्रीनिवास पहुँच गए बिहार की राजधानी पटना। युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ धरना-प्रदर्शन करने लगे और पुलिस से भिड़ गए। जिसके बाद पटना पुलिस ने श्रीनिवास ही नहीं, उनके साथियों को भी बल भर कूटा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महंगाई पेपर लीक कांड सहित कई मुद्दों को लेकर बुधवार (24 जुलाई 2024) को युवा कॉन्ग्रेस के द्वारा विधानसभा मार्च निकाला गया था। पटना के बोरिंग रोड पंचमुखी हनुमान मंदिर से कॉन्ग्रेस के युवा कार्यकर्ता सैकड़ों की संख्या में निकले, बोरिंग रोड चौराहे पर वो पुलिस से भिड़ गए। जिसके बाद पुलिस ने युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी कूट दिया। इसी में अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास भी पुलिस वालों के हत्थे चढ़ गए, तो उनकी भी कुटाई हो गई।
इस लाठीचार्ज के दौरान युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस पर हमले किए। इस भिडंत में कई पुलिस वाले भी घायल हुए हैं।
बीवी श्रीनिवास कुटे, तो जाहिर सी बात है कि एक रुदाली गैंग भी कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम का हिस्सा है। वो तुरंत रोने लग गई। यू-ट्यूबर के तौर पर मशहूर हो चुके अजित अंजुम ने तो इसे लोकतंत्र पर ही हमला करार दे दिया।
अजित अंजुम ने लिखा, “विरोध प्रदर्शन किसी भी राजनीतिक नेता/कार्यकर्ता का लोकतांत्रिक अधिकार है। पुलिस का तरीका किसी भी सूरत में ठीक नहीं है। यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास पर ऐसे लाठी बरसाई जा रही है, जैसे किसी बहुत बड़ा अपराधी पकड़ में आया।”
विरोध प्रदर्शन किसी भी राजनीतिक नेता/कार्यकर्ता का लोकतांत्रिक अधिकार है . पुलिस का तरीका किसी भी सूरत में ठीक नहीं है . यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष @srinivasiyc पर ऐसे लाठी बरसाई जा रही है , जैसे किसी बहुत बड़ा अपराधी पकड़ में आया . https://t.co/QvYWmWNyk6
ये वही श्रीनिवास हैं, जो महिलाओं का उत्पीड़न करते हैं, तो भी हाई कमान उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेता, बल्कि पीड़ित पर ही कार्रवाई करता है। करीब 5 साल से युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास लगातार विवादों में भी रहे हैं। खैर, इनका एक वीडियो दिल्ली से सामने आया है, जिसमें विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद अपना हाथ छुड़ाकर इतनी रफ्तार से भागे थे, मानो ओलंपिक पदक जीतने की रेस हो। खैर, भगोड़ों, उत्पीड़कों के साथ सहानुभूति रखने वालों की कोई कमीं नहीं है। पटना में पिटाई का समाचार समाप्त हुआ।
कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में कानून व्यवस्था और आर्थिक हालत, दोनों ही बिगड़ती जा रहीं हैं। कर्नाटक की राजधानी में सरेआम एक महिला की पीजी में घुस कर हत्या कर दी गई। कर्नाटक के एक और जिले में भी एक महिला की हत्या हुई। वहीं यह जानकारी भी सामने आई है कि कॉन्ग्रेस सरकार में लगभग 1200 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु के कोरमंगला इलाके में रहने वाली एक महिला की पीजी के भीतर घुस कर एक व्यक्ति ने हत्या कर दी। मृतका कृति कुमारी बिहार की रहने वाली थी। उसकी हत्या करने वाले की पहचान नहीं हो पाई है। यह घटना मंगलवार (23 जुलाई, 2024) को देर रात में हुई।
पुलिस को शक है कि महिला की हत्या उसकी किसी जान पहचान वाले व्यक्ति ने ही की है। मृतका कृति कुमार बेंगलुरु में रह कर एक निजी कम्पनी में काम करती थी। पुलिस अब आसपास के इलाकों के CCTV की जाँच करके हत्यारे की तलाश करने का प्रयास कर रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच चालू कर दी है।
बेंगलुरु के अलावा कर्नाटक के बड़े शहर शिवमोगा में भी एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी और शव को दफना दिया। बताया गया कि महिला ने उससे प्रेम विवाह किया था। दोनों के परिवार इस विवाह के लिए राजी नहीं थे। दोनों के बीच कुछ समय से विवाद चल रहा था। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
कर्नाटक में कानून व्यवस्था के अलावा भ्रष्टाचार के मामले भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में कर्नाटक के CM सिद्दारमैया की पत्नी को मैसुरु में एक महँगे इलाके में जमीन आवंटन का मामला सामने आया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि MUDA ने सिद्दारमैया की पत्नी की कम दाम वाली जमीन अधिग्रहित कर बदले में महँगे इलाके में जमीन दी।
आरोप लगाया गया था कि दोनों जमीनों की कीमत में काफी अंतर था और इससे सिद्दारमैया की पत्नी को इससे भारी फायदा हुआ। इसके अलावा हाल ही कर्नाटक में वाल्मीकि निगम में भी घोटाले का मामला सामने आया था। यह निगम कर्नाटक में जनजातियों के विकास के लिए काम करता है।
आरोप है कि जनजातियों के विकास के लिए दिए गए ₹88 करोड़ रूपए का हेरफेर किया गया। इस मामले में कर्नाटक सरकार में मंत्री बी नागेन्द्र को मंत्रिपद छोड़ना पड़ा था। वह वर्तमान में जेल में हैं और जाँच एजेंसियाँ इस मामले की तह तक पहुँचने का प्रयास कर रही हैं।
किसानों की आत्महत्या भी बड़ा मुद्दा
कर्नाटक में किसानों की हालत भी बिगडती जा रही है। हाल ही में कर्नाटक सरकार के राजस्व विभाग ने स्वयं माना है कि पिछले 15 माह में ही 1182 किसान राज्य में आत्महत्या कर चुके हैं। सबसे अधिक आत्महत्या के मामले बेलगावी, धारवाड़ और हावेरी में सामने आए हैं। इन जिलों में 100 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है।
बताया गया है कि इनमें से अधिकांश किसानों ने सूखा, बढ़ते कर्ज और फसल खराब होने के कारण आत्महत्या की है। कर्नाटक के इन किसानो की आत्महत्या का मुद्दा सितम्बर 2023 में भी उठा था। तब राज्य के APMC मंत्री शिवानंद पाटिल ने कहा था कि जबसे सरकार ने मुआवजा बढ़ाया है तबसे किसानों की आत्महत्या के मामले अधिक सामने आ रहे हैं।
OpIndia को बैन करने की बातें सोशल मीडिया पर चल रही हैं। क्यों? क्योंकि कुछ लोगों को सच सुनने-पढ़ने से चिढ़ मचती है। वो खुद को अपने समुदाय या मजहब का ठेकेदार मान लेते हैं। कौन हैं वो लोग, किस बात पर बैन-बैन चिल्ला रहे? वो हैं कुछ कट्टर इस्लामी और उनके भाईचारे वाले कुछ वामपंथी। हज पर गई मुस्लिम औरतें और बच्चियों के साथ यौन शोषण की खबरों से इनके पाजामे वाले दिमाग में गुस्सा उतर आया है। अपने मजहब के कुछ मर्दों की हकीकत पर शर्म करने के बजाय अपनी ही बहन-बहू-बेटियों से हुई छेड़छाड़ को छिपाने में लग गए हैं।
OpIndia ने बस एक खबर लिखी। खबर 100% सच्ची। वो भी आपबीती। आपबीती जिसे पीड़ित औरतों और बच्चियों ने CNN को सुनाई। CNN की उस खबर का लिंक भी OpIndia ने पूरे सम्मान के साथ लगाया। पाजामे वाले दिमाग से दुनिया को देखने वाले शायद वो लिंक खोल कर पढ़ना भूल गए। ‘इस्लाम को बदनाम’, ‘खतरे में इस्लाम’ आदि-इत्यादि विशेषणों के साथ रिपोर्ट को ही झूठा साबित करने का खेल सोशल मीडिया पर खेल दिया। अब खेल शुरू ही हो गया है तो इसका दायरा बढ़ाते हैं। सिर्फ CNN ही क्यों, हज पर सिर्फ 5-6 यौन शोषण की खबरें ही क्यों… अन्य बड़े मीडिया संस्थानों में छपी खबरों के साथ समझते हैं इनकी मानसिकता।
पत्रकारिता की दुनिया में BBC को कट्टर इस्लामी-वामपंथी लगभग अपना बाप मानते हैं… मतलब BBC ने बोला तो बोला! इसी से शुरू करते हैं। बात 2010 की है। एंगी एंगुन्नी (Anggi Angguni) नाम की महिला के साथ हज के दौरान यौन शोषण हुआ था। उसकी बहन के साथ ‘पाक-मस्जिद’ के भीतर एक गार्ड ने यौन शोषण किया था। एंगी एंगुन्नी यह बताती हैं कि हज पर जाना महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है और BBC इसे दिखाता है।
BBC की रिपोर्ट के अनुसार एंगी एंगुन्नी ऐसी अकेली महिला नहीं हैं, जिनके साथ हज के दौरान यौन शोषण हुआ हो। #MosqueMeToo नाम के ट्रेंड के साथ BBC ने अन्य पीड़ित महिलाओं की आपबीती भी प्रकाशित किया – कई पीड़ितों की आपबीती नाम के साथ तो कई का नाम छिपा (कारण: कट्टर इस्लामी सर तन से जुदा कर देते हैं, कार्टून बनाने पर एकसाथ कई पत्रकारों को गोलियों से छलनी कर देते हैं) कर।
हज पर गई महिलाओं-बच्चियों के यौन शोषण पर BBC की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट
The Washington Post – भारी-भरकम नाम है। वामपंथी कसमें खाते हैं इसकी। कम-अक्ल कट्टर इस्लामी भी दिन में 5 बार लाउडस्पीकर पर इसका नाम चिल्लाते हैं। इसी वॉशिंगटन पोस्ट पर मोना अल्ताहवी (Mona Eltahawy) ने हज के दौरान उनके साथ हुए यौन शोषण की आपबीती लिख डाली है।
मोना अल्ताहवी के साथ हज पर 2 बार यौन शोषण तब हुआ, जब यह सिर्फ 15 साल की थीं। पहली बार भीड़ में किसी ने इनके पिछवाड़े में हाथ डाला, छुड़ाने की कोशिश करने पर भी नहीं छोड़ रहा था। दूसरी बार यौन शोषण हुआ काले पत्थर को चूमने के दौरान। वहाँ खड़े पुलिस वाले ने ही मोना के स्तन को दबोच लिया।
हज के दौरान यौन शोषण, वॉशिंगटन पोस्ट पर प्रकाशित
‘इस्लाम सबसे पाक’ मानने वाली कट्टर इस्लामी मानसिकता का नमूना भी मोना अल्ताहवी ने The Washington Post में बताया है। उन्होंने हज के दौरान हुए यौन शोषण का जिक्र जब आम जनता के सामने किया तो एक मुस्लिम औरत ही उनको चुप करवाने लगी। तर्क दिया कि विदेशियों के सामने हज पर मुस्लिम औरतों का यौन शोषण टाइप बातें करोगी तो इस्लाम की बदनामी होगी।
क्या हज पर यौन शोषण की खबरें इक्की-दुक्की हैं? इसका जवाब भी मोना अल्ताहवी ने दिया है। उनके अनुसार #MosqueMeToo नाम के ट्रेंड के साथ हजारों मुस्लिम महिलाओं ने अपने-अपने साथ हुए यौन शोषण की आपबीती को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इंडोनेशिया, अरब, तुर्की, जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, ईरान… मतलब अलग-अलग देशों की पीड़िताओं ने अपनी-अपनी भाषा में हज पर अपने बुरे अनुभवों से दुनिया को रूबरू करवाया है।
वामपंथी मीडिया संस्थानों से एक कदम आगे बढ़ते हैं। इस्लामी मुल्क कतर वाले न्यूज चैनल में छपी खबर पर चलते हैं। सउदी अरब में नरजीस अल-अवामी (Narjis al-Awami) नाम की एक TV एंकर हैं। यह जब हज पर गई थीं, तो इनका भी यौन शोषण हुआ था। newarab.com नाम की वेबसाइट पर आप इस खबर को पढ़ सकते हैं।
हज पर TV एंकर के साथ भी यौन शोषण
नरजीस बताती हैं कि काबा में काले पत्थर को चूमने के दौरान उनका यौन शोषण किया गया। उनके अनुसार वहाँ महिलाओं की लाइन में मुस्लिम मर्द गलत मंशा के साथ घुस जाते हैं, भीड़ का फायदा उठाते हैं। ऐसी ही भीड़ में नरजीस की जाँघों को दबोच कर उनका यौन शोषण किया गया था।
कट्टर इस्लामी समाज में औरतों की औकात
सोशल मीडिया पर ऐसी हजारों औरतें हैं, जिन्होंने हज के दौरान उनके साथ हुए यौन शोषण की घटनाओं का सिलसिलेवार वर्णन किया है। यहाँ उनका जिक्र जानबूझ कर नहीं किया जा रहा। इसलिए क्योंकि कट्टर इस्लामी मानसिकता वाले मर्द उनकी आपबीती को झूठा करार देंगे। कुछ तो महिलाओं-बच्चियों के हज पर जाने को ही गैर-इस्लामी बताने लग जाते हैं। आखिर अपनी ही बहन-बेटी-बहू को लेकर इतनी घटिया सोच आती कहाँ से है इनके दिमाग में? अपने भाईजान के पाजामे की गंदगी से इनको दिक्कत नहीं होती लेकिन OpIndia अगर उस गंदगी को लेकर खबर छाप दे तो लाउडस्पीकर पर 5 बार बैन-बैन चिल्लाने लगते हैं! झुंड वाली मानसिकता का आधार क्या है आखिर?
शरिया कानून टाइप का कुछ होता है। कट्टर इस्लामी लोग इसके ख्वाब में बहुत कुछ बुनते रहते हैं। शरिया कानून के ख्वाब में ही लोग फट जाते हैं, लड़कियाँ भाग कर या फँसा कर सीरिया ले जाई जाती हैं… सेक्स स्लेव बना दी जाती हैं। ऊपर जिस मानसिकता का जिक्र है, शरिया कानून के ख्वाब से ही वो पनपता है।
मर्दों का, मर्दों के लिए, मर्दों के द्वारा – शरिया कानून को मोटा-मोटी आप ऐसे समझ सकते हैं। यहाँ औरतों की औकात मर्दों की जूती के बराबर होती है। जिनको विश्वास नहीं होगा, उनके लिए BBC का लिंक लगा दे रहा हूँ। विकिपीडिया पर भी है सब कुछ लेकिन उसका लिंक जानबूझ कर नहीं लगा रहा क्योंकि वो खुद ही वामी-इस्लामी गठबंधन के गढ़ में है।
वापस लौटते हैं शरिया कानून में औरतों की औकात मर्दों की जूती के बराबर वाली बात पर। इसको उदाहरण से समझते हैं। सउदी अरब में अगर कोर्ट के अंदर एक औरत गवाही देगी और एक मर्द गवाही देगा तो शरिया कानून के तहत औरत की गवाही मर्द से आधी मानी जाएगी। न्यायालय ने ही औरतों की औकात आधी कर दी… कट्टर इस्लामी समाज से क्या उम्मीद!
बीबीसी का स्क्रीनशॉट, ताकि वामी-इस्लामी का मुँह रहे बंद
शरिया कानून का एक और उदाहरण। एक शब्द है – हुदूद। शब्द मात्र एक है, लेकिन इस्लामी औरतों के लिए यह नरक का द्वार है। पाकिस्तान में इस शब्द के साथ एक कानून बना दिया गया। इस्लाम के नाम पर बने इस मुल्क के हुदूद कानून से जुड़ा पूरा नरक पढ़ना चाहते हैं तो एशियन ह्यूमन राइट्स कमीशन की इस रिपोर्ट को पढ़ सकते हैं। मोटा-मोटी इसको ऐसे समझ सकते हैं – अगर पाकिस्तान में किसी महिला का बलात्कार हुआ है तो उस महिला को ही कोर्ट में यह साबित करना होगा कि उसने अपनी मर्जी से सेक्स नहीं किया था। इतना ही नहीं, उसे अपनी ही रेप की गवाही के लिए 4 लोगों को कोर्ट में लाना होगा।
कट्टर इस्लामी मानसिकता वाले लोग, समाज या मुल्क में यह है औरतों की औकात।
वामी हो या इस्लामी… सच स्वीकार नहीं
धर्म या मजहब से परे, औरतों-बच्चियों के साथ कहीं कुछ वीभत्स हुआ या होता है तो उसकी रिपोर्टिंग होनी चाहिए। उस रिपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए। इसमें दिक्कत क्यों है? हज पर जाने वाली महिलाओं के साथ मुस्लिम मर्द छेड़छाड़ करते हैं – इस खबर को तो मुस्लिम समाज को ही ज्यादा से ज्यादा फैलाना चाहिए, ताकि ऐसी अपराधी प्रवृति के लोग डरें-सहमें। लेकिन नहीं। खबरें दबाई जा रही हैं, OpIndia को बैन करने की बात ट्रेंड की जा रही है।
हज पर जाने वाली महिलाओं के साथ मुस्लिम मर्द छेड़छाड़ करते हैं – इस खबर में इस्लाम या इस्लाम के ‘पाक’ जगहों पर सवाल कहाँ है? फिर बवाल क्यों? बवाल इसलिए क्योंकि औरतों को कट्टर इस्लामी इंसान ही नहीं मानते हैं।
OpIndia को बैन की बात ये इसलिए कर रहे क्योंकि इससे इनका असली चेहरा सामने आ गया। एक पल के लिए मान भी लें कि OpIndia को बैन कर देना चाहिए… तो तर्क क्या होगा आपका? क्योंकि OpIndia ने एक खबर छापी, जो 100% सच है? या कोई और झूठ रचेंगे? या तर्क ही नहीं देंगे… जैसे अपने कौम की औरतों को बोलने तक नहीं देते, गवाही तक नहीं मानी जाती उनकी?
OpIndia ने क्यों बदला शीर्षक
OpIndia अपने पाठकों के दम पर है। पाठकों ने हमें बताया कि अपराध की विविधता के कारण, शीर्षक में उन विविधताओं के जिक्र होने के कारण वो शेयर करने से हिचक रहे हैं। यह खबर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे, शीर्षक में बदलाव इस कारण से किया गया। कोई इस मुगालते में न रहे कि OpIndia बैन को लेकर 4 सियार हुआँ-हुआँ करने लगे, इस कारण से शीर्षक बदला गया है। हकीकत तो यह है कि CNN की खबर के आधार पर पिछली खबर बनी थी। बैन वाले बवाल के बाद अब BBC, The Washington Post के साथ-साथ कतर के न्यूज चैनल के आधार पर अब ये खबर लोगों तक पहुँच रही है। हकीकत यह भी है पुराना शीर्षक सिर्फ बदला गया है, भूलाया नहीं गया है। हमारे जिन पाठकों को पुराना शीर्षक पसंद हो, वो उसके साथ उस खबर को शेयर कर सकते हैं।
हज पर महिलाओं-बच्चियों के यौन शोषण से संबंधित पिछली खबर का पुराना और नया दोनों ही शीर्षक दिया हुआ है:
पुराना शीर्षक: हज पर मुस्लिम मर्द दबाते हैं मुस्लिम बच्चियों-औरतों के स्तन, पीछे से सटाते हैं लिंग, घुसाते हैं ऊँगली: जिन-जिन ने झेला, पढ़िए उनकी कहानी
नया शीर्षक: हज पर मुस्लिम मर्द अपने ही मजहब की बच्चियों-औरतों के साथ करते हैं यौन शोषण: जिन-जिन ने झेला, पढ़िए उनकी कहानी
हिंदू-घृणा से सने वामी-इस्लामी के आगे नहीं झुकेगा OpIndia
शिवलिंग पर कंडोम पहनाने का काम किसने किया था? मीडिया में इस अश्लीलता को किसने फैलाया था? तब वामी-इस्लामी गठबंधन ने प्रेस क्लब जाकर मशाल जलाई थी क्या विरोध में?
भारत माता की योनि से खून बहने वाला ग्राफिक्स किसने बनाया था? मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर इसका प्रचार-प्रसार कौन लोग कर रहे थे?
रेप-पीड़ित किसी बच्ची के सामने भगवान राम को असहाय दिखाने वाले पोस्टर-बैनर-ग्राफिक्स कहाँ-कहाँ पोस्ट किए गए थे? तब किन-किन के बैन की बात उठी थी?
अगर शीर्षक पर सिर्फ अश्लील होने का आरोप है तो ऊपर के 3 पॉइंट भी खबरों से ही संबंधित हैं। भारत की खबरों से संबंधित। लेकिन इसमें घुसाए गए हिंदू देवी-देवता। न सिर्फ घुसाए गए बल्कि उनका अश्लील चित्रण भी किया गया। हज पर महिलाओं-बच्चियों के यौन शोषण से संबंधित पिछली खबर या इस खबर में क्या इस्लाम के किसी भी प्रतीक पर उँगली उठाई गई? अगर नहीं तो यह अश्लील कैसे? मुस्लिम मर्दों के अपराध को शीर्षक में लाना अगर अश्लील है तो हाँ मैंने किया है अपराध… और आगे भी करता रहूँगा। और मेरे अपराध पर किसी एक्शन ही ख्वाहिश है तो जाओ पहले ऊपर के 3 पॉइंट वाले सभी अपराधियों को पकड़ के लाओ!
अब बात उनकी, जो हज पर महिलाओं-बच्चियों के यौन शोषण से संबंधित पिछली रिपोर्ट को झूठा बता रहे थे। कट्टर इस्लामी सामान्यतः जाहिल-गँवार होते हैं। लिंक खोल कर पढ़ने की समझ उनमें होगी, यह सोचना भी पागलपन है। इसलिए CNN की खबर को टुकड़ों में बाँट कर सबका स्क्रीनशॉट नीचे लगा दिया है। अब सपा का कोई पूर्व-विधायक हो या कथित पत्रकार… बोलते रहिए इसे फेक न्यूज… चिल्लाते रहिए OpIndia बैन-बैन, अलुआ बैन-बैन!
PS: हज पर गई मुस्लिम औरतों और बच्चियों के साथ यौन शोषण की हर खबर जो प्रकाशित हुई है, उन सबका लिंक लगाया गया है। साथ ही स्क्रीनशॉट भी। स्क्रीनशॉट इसलिए ताकि कठमुल्ले फिर से बिना पढ़े-देखे इन सब पीड़ितों के दुखों पर पर्दा डालते हुए खबर को ही न झुठलाने पर आमादा हो जाएँ… इस्लाम-पाक-मजहब आदि की दुहाई देते हुए फिर से रोना न शुरू कर दें। स्क्रीनशॉट इसलिए भी ताकि जिन-जिन मीडिया संस्थान की खबरों के आधार पर हमने अपनी खबर बनाई है, कल को वो अगर अपनी खबर डिलीट कर दें, तो हमारे पास साक्ष्य मौजूद रहे।
दिल्ली के भजनपुरा से एक जिम मालिक की हत्या का सीसीटीवी वीडियो सामने आया है। मृतक की पहचान सुमित गुर्जर के तौर पर हुई है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। आरोपित का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
दिल्ली के भजनपूरा इलाक़े में सुमित गुर्जर की “विशेष समुदाय” के लड़के ने 20 से ज़्यादा बार चाकुओं से गोद गोद कर हत्या की गई थी,उसका CCTV आया है। pic.twitter.com/eVnBaJeF3m
— Sagar Kumar “Sudarshan News” (@KumaarSaagar) July 24, 2024
सामने आए 10 सेकेंड के सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि गली में सुमित गुर्जर एक लड़के के पास खड़ा होता है। थोड़ी देर बाद अचानक वहाँ एक टोपी पहना लड़का सुमित के पास आता है और चाकू से ताबड़तोड़ अटैक करना शुरू कर देता है। घटना के बाद सुमित घायल होकर नाली में गिर जाता है।
दिल्ली के भजनपूरा इलाक़े में सुमित गुर्जर की “विशेष समुदाय” के लड़के ने 20 से ज़्यादा बार चाकुओं से गोद गोद कर हत्या की गई थी,उसका CCTV आया है। pic.twitter.com/eVnBaJeF3m
— Sagar Kumar “Sudarshan News” (@KumaarSaagar) July 24, 2024
मीडिया रिपोर्ट्स में घटना को 11 जुलाई का बताया जा रहा है। वहीं सुमित के शव को लेकर खबर है कि वो पुलिस को भजनपुरा के गामरी एक्सटेंशन में मिला। इस दौरान सुमित के चेहरे पर, गर्दन पर, पेट पर 17 बार चाकू से हमले की बात सामने आई है। हमले के बाद आरोपित घटनास्थल से फरार हो गया था।
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले दिल्ली के शाहबाद डेयरी से भी ऐसा मामला प्रकाश में आया था। उस समय 16 साल की लड़की की साहिल नाम के लड़के ने चाकू घोंप-घोंप हत्या की थी। ये घटना भी सीसीटीवी में कैद होने के कारण चर्चा में आई थी। सीसीटीवी में दिखा था कि कैसे साहिल ने लड़की को चाकू मारा था और फिर उसकी मौत सुनिश्चित करने के लिए उसका सिर पत्थर से कुचला था। इसके बाद वो सीसीटीवी में खुशी से भागते हुए भी दिखाई दिया था।
बरेली का 33 साल का दिलशाद अली बस्ती जिले में एक ईंट-भट्टे पर मजदूरी करता था। वहाँ उसने परसरामपुर थाना क्षेत्र की हिंदू लड़की को अपनी जाल में फंसा लिया। वो उसे 6 जुलाई को कॉलेज जाने के समय अगवा कर बरेली जिले के बिथरी ले आया। एक तरफ बस्ती में छात्रा के माता-पिता बच्ची को ढूँढ रहे हैं, और पुलिस से उसे वापस लाने की गुहार लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ बरेली के बिथरी में दिलशाद अली ने खुला ऐलान कर दिया है कि हिंदू लड़की उसके ‘कब्जे’ में है। जिसे जो बिगाड़ना है, वो बिगाड़ ले।
दिलशाद ने ऐलान किया है कि हिंदू लड़की को मुस्लिम बनाएगा और उससे निकाह करेगा। यही नहीं, दिलशाद अली ने बरेली एसडीएम कोर्ट में निकाह की अर्जी भी डाल दी है। इस बीच, हिंदू संगठनों को जब इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई की माँग की है और अगवा छात्रा के परिजनों और बस्ती पुलिस से भी संपर्क किया है। वहीं, बस्ती पुलिस ने कहा है कि छात्रा की तलाश जारी थी, आगे की कार्रवाई की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिलशाद अली पुत्र निसार अली, बरेली के गाँव बिथरी का निवासी है। वो बस्ती जिले के परसुराम थाना इलाके में स्थित एक ईंट-भट्टा पर मजदूरी करता था। छात्रा परसरामपुर क्षेत्र के तक्कीपुर खेकड़ी की रहने वाली है और माता-पिता किसान हैं।
दिलशाद अली ने छात्रा को अपनी जाल में फंसा लिया और 6 जुलाई को उसे अगवा कर बरेली ले आया। अब उसने एसडीएम कोर्ट में निकाह की मंजूरी के लिए प्रार्थनापत्र भी जमा किया है। छात्रा के बारे में जानकारी तब हुई, जब दिलशाद बरेली में अपने गाँव आकर ऐलानिया कहने लगा कि बस्ती की लड़की उसके कब्जे में है और वह उसका जबरन धर्म परिवर्तन करवा रहा है। इस बारे में बस्ती पुलिस ने कहा है कि छात्रा की गुमशुदगी का केस दर्ज है और जल्द से जल्द छात्रा की बरामदगी का प्रयास किया जा रहा है।
थाना परसरामपुर (9454403120) पर गुमशुदगी दर्ज कर बरामदगी का हर संभव प्रयास किया जा रहा था, जिसके क्रम में जांच व आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया।
विश्व हिंदू परिषद के नेता हिमांशु पटेल को इस बारे में पता लगा तो संगठन के पदाधिकारियों के साथ वह हरकत में आ गए। उन्होंने बस्ती पुलिस से संपर्क से साधा। हिमांशु पटेल ने बताया कि बस्ती पुलिस की टीम बरेली आ रही है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर अगवा छात्रा की अविलंब बरामदगी की माँग उठाई है।