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‘मैं बचा क्योंकि भगवान मेरे साथ थे’ : डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के बाद पहली बार जनता को किया संबोधित, बोले- आज बता रहा हूँ दोबारा नहीं साझा करूँगा दर्दनाक पल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले के बाद पहली बार लोगों की भीड़ को संबोधित किया। उन्होंने 19 जुलाई को विस्कॉन्सिन के मिलवोकी में रिपब्लिकन नेशनल कंवेंशन में हिस्सा लेते हुए 13 जुलाई को उनके साथ घटित घटना पर बात रखी।

उन्होंने कहा कि वो सबसे पहले 13 जुलाई को रैली में जो हुआ था उससे बात शुरू करना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने अपने ऊपर हुए हमले के बाद अमेरिकी लोगों द्वारा दिए गए प्यार और समर्थन के लिए उनको आभार जताया। उन्होंने कहा, “कई लोगों ने मुझसे पूछा क्या हुआ हमें बताइए। आज मैं आप सभी को बताऊँगा कि क्या हुआ था। इसे आप मुझसे कभी दोबारा नहीं सुनेंगे क्योंकि इस बारे में बात करना बेहद दर्दनाक होता है।”

उन्होंने घटना को याद करते हुए कहा, “बटलर शहर में वो दिन बहुत खूबसूरत था। तेज म्यूजिक बज रहा था, प्रचार बहुत सही चल रहा था, मैं मंच पर पहुँचा और रैली में पहुँचे लोग समर्थन में नारे लगा रहे थे। मैंने मजबूती से, ताकत और खुशी के साथ भाषण देना शुरू किया… कुछ देर में मुझे कुछ बहुत तेज महसूस हुआ, मुझे पता चल गया कि यह एक गोली है और हम पर हमला हो रहा है।”

ट्रंप बोले, “हत्यारे की गोली मेरी जान लेने के एक चौथाई इंच के अंतर से रह गई, लेकिन मैं शांत था, सुरक्षित महसूस कर रहा था क्योंकि मेरे साथ भगवान थे। अगर मैंने आखिरी पलों में अपना सिर नहीं हिलाया होता तो हत्यारे की गोली बिल्कुल सही निशाने पर लगी होती और मैं आज रात आप लोगों के साथ नहीं होता।”

उन्होंने कहा, “मुझे आज यहाँ नहीं होना चाहिए था। सर्वशक्तिमान ईश्वर की कृपा से ही मैं इस एरिना में आपके सामने खड़ा हूँ। जनता मुझसे प्यार करती है, वे भागे नहीं। मैं आज रात यहाँ नहीं होता। हम झुकेंगे नहीं, टूटेंगे नहीं। और हम कभी पीछे नहीं हटेंगे। मैं इस राष्ट्र को अपनी आत्मा समर्पित करता हूँ।”

अपने भाषण के दौरान उन्होंने अमेरिका में रहने वाले सभी धर्म के लोगों के विकास और सुरक्षा देने की बात कही। उन्होंने अमेरिका में आ रहे अवैध प्रवासियों का मुद्दा उठाया, देश में बढ़ते क्राइम रेट की चर्चा की और जो बाइडेन के कार्यकाल में हुई गलतियों का जिक्र किया। इस भाषण के दौरान भीड़ ने भी हल्ला करके ट्रंप के साथ एकजुटता दिखाई।

दुकानदारों को लिखना ही होगा नाम, हलाल बेचा तो खैर नहीं: काँवड़ रूट के लिए CM योगी ने दिया आदेश, उत्तराखंड में भी पहचान बताकर ही होगा धंधा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि पूरे प्रदेश में दुकानदारों को दुकान पर अपना नाम लिखना होगा। यह आदेश पूरे प्रदेश के कांवड़ रूटों पर लागू होगा। इसी के साथ जो भी इन रूट पर हलाल उत्पाद बेचता पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। यूपी जैसा ही आदेश उत्तराखंड में भी जारी किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यह आदेश दिया है कि सभी कांवड़ रूट पर दुकानों के संचालक का नाम और पहचान एक प्लेट पर लिखा जाए। इससे कांवड़ ले जाने वालों को अपने खाने-पीने की शुचिता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके अलावा यह आदेश भी दिया है कि कोई भी हलाल सर्टिफाइड उत्पाद ना बेंचे। जो भी ऐसा करे उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। उत्तर प्रदेश में पहले से हलाल सर्टिफाइड उत्पादों पर प्रतिबन्ध लगाया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने यह भी आदेश दिया है कि प्रदेश के शहरी इलाकों में सावन महीने के दौरान रोशनी और साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए और इनकी व्यवस्था की जाए। इसके अलावा कांवड़ रूटों पर साफ़ पानी और पेय पदार्थ की भी व्यवस्था की जाए।

गौरतलब है इससे पहले मुजफ्फरनगर पुलिस ने जिले के कांवड़ रूट पर नाम प्रदर्शित किए जाने को लेकर एक आदेश दिया था। इस पर लिबरल और वामपंथी भड़क गए थे। मुजफ्फरनगर पुलिस ने बाद में नाम प्रदर्शित करने के आदेश को स्वैच्छिक कर दिया था। अब योगी सरकार ने यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है ताकि कांवड़ियों को कोई परेशानी ना हो और उनके पास मनपसंद जगह से खाने-पीने की छूट हो।

उत्तराखंड में भी दुकानदारों को दिखाना होगा नाम

इसी के साथ उत्तर प्रदेश वाली व्यवस्था उत्तराखंड में भी लागू की गई है। उत्तराखंड में हरिद्वार में बड़ी संख्या में कांवड़ भरने कांवडिये जल भरने आते हैं। हरिद्वार के SSP ने भी यह आदेश दिया है कि जिले में सभी कांवड़ रूट पर दुकानदार का नाम और पहचान स्पष्ट रूप से लिखी जाए।

हरिद्वार SSP प्रमेन्द्र डोबाल ने इस संबध में कहा है कि जिले के भीतर जितने भी खाने-पीने के होटल-ढाबे या ठेला लगाते हैं उन्हें मालिक का नाम, QR कोड और मोबाइल नम्बर आवश्यक रूप से लिखना होगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

हरिद्वार SSP ने कहा है कि यह आदेश दिया गया है क्योंकि बीते वर्षों में इसको लेकर विवाद हुए हैं। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पहचान छुपाएगा, उसकी दुकान हटा दी जाएगी।

हिंदू लड़की का Video किया वायरल, हिंदुओं पर ही हमला, घर छोड़कर भागे भी हिंदू: यह पाकिस्तान नहीं, झारखंड के एक गाँव में ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ का आतंक है

झारखंड के पाकुड़ में हिंदुओं के घरों पर पथराव का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले पाकुड़ में एक मुस्लिम लड़के ने हिंदू लड़की का वीडियो बनाकर वायरल करने का प्रयास किया था, जिसके बाद हिंदुओं ने इस घटना का विरोध किया और लड़के की पिटाई भी हुई। इसी घटना से नाराज होकर मुस्लिम पक्ष के लोग हिंदुओं के घरों के बाहर आ खड़े हुए और दोनों पक्षों की ओर से जमकर ईट-पत्थर चलाए गए।

खबरों के मुताबिक, घटना में कई लोगों के गंभीर रूप से चोटिल होने और कई घरों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इस दौरान पुलिस को भी निशाना बनाया गया जिसके चलते तीन पुलिसकर्मी घायल होने की बात भी कही जा रही है। वहीं भाजपा नेताओं का दावा है कि इस घटना से भयभीत होकर हिंदू इलाके से पलायन करने को तैयार हैं। गाँव वीरान हो रहा है। भाजपा नेताओं ने इन हालातों के पीछे बंगाल से आए बांग्लादेशी घुसपैठियों का हाथ बताया है। साथ ही वर्तमान सोरेन सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा नेताओं ने उठाया मुद्दा

घटना की बाबत झारखंड के गोड्डा क्षेत्र से सांसद बने डॉ निशिकांत दुबे ने कहा, “झारखंड में कॉन्ग्रेस के शासन में यह पाकुड़ का तारानगर इलामी गाँव वीरान हो गया। दोष क्या, एक नाबालिग लड़की का वीडियो बनाकर मुस्लिम लड़का ब्लैकमेल कर रहा था। विरोध करने पर पूरे हिंदू को ही गाँव छोड़ने के लिए पश्चिम बंगाल से बांग्लादेशी घुसपैठिए आ गए। झारखंड पुलिस अब पश्चिम बंगाल के लोगों के हाथों असहाय। संथालपरगना कश्मीर घाटी बनने की राह पर, जहाँ हिंदू विस्थापित हुए अपने ही देश में।”

इसके बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा, “जब रोम जल रहा था, तब नीरो बंसी बजा रहा था…आज के संदर्भ में ये बात हेमंत सोरेन पर भी सटीक लागू होती है।” उन्होंने कहा, “झारखंड का संथाल परगना क्षेत्र बांग्लादेशी घुसपैठियों के आतंक की आग में झुलस रहा है, और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भ्रमण में व्यस्त हैं। घुसपैठियों के आतंक से संथाल परगना के जनजातीय मूलवासी अब अपने घरों से ही पलायन करने को विवश हो चुके हैं।”

उन्होंने कहा, “झारखंड के हालात 90 के दशक की कश्मीर और वर्तमान बंगाल-केरल के जैसे बदतर बनते जा रहे हैं, जहाँ राज्य सरकारें मुस्लिम तुष्टिकरण की आड़ में हिन्दुओं के उपर हो रहे हमले को देखकर आँखे मूँद ले रही है। पाकुड़ के तारानगर गाँव में मुस्लिम युवक द्वारा युवती को ब्लैकमेल किए जाने का विरोध करने पर बांग्लादेशी घुसपैठयों ने हिन्दुओं के घरों पर हमले कर दिए। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चुप्पी बताती है कि उनकी सरकार का मौन समर्थन इन घुसपैठियों को प्राप्त है।” उन्होंने अंत में लिखा, “हेमंत जी, याद रखिए झारखंड को तालिबान नहीं बनने दिया जाएगा… आपकी सरकार कुछ महीनों की मेहमान है। फिर इन घुसपैठियों और उनके सरपरस्तों को भी प्रदेश से बाहर खदेड़ा जाएगा।”

पुलिस ने बताया स्थिति नियंत्रण

इस मामले में पुलिस का बयान भी आया है। प्रभात खबर की रिपोर्ट अनुसार घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहँची और मामले को शांत कराया। फिलहाल पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों समुदायों के साथ बैठक की जा रही है। स्थिति नियंत्रण में है। जल्द ही मामले को सुलझाया लिया जाएगा। वहीं जिला प्रशासन ने बयान जारी कर बताया है कि पाकुड़ के तारानगर गाँव में घटित घटना को अंजाम देने वाले दोषियों को चिह्नित कर लिया गया है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। आरोपितों को बख्शा नहीं जाएगा। सख्त कार्रवाई होगी।

अब तक 39 मौतें, स्कूल-कॉलेज-इंटरनेट बंद, सरकारी मीडिया के मुख्यालय पर हमला: ‘आरक्षण’ की आग में जल रहा बांग्लादेश, भारत ने जारी की एडवाइजरी

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर हो रहे प्रदर्शन हिंसक होता जा रहा है। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार झडपें हो रही हैं। इन दंगों में अब तक 39 मौतें हो चुकी हैं। शेख हसीना सरकार ने दंगे रोकने के लिए देश के सभी स्कूल-कॉलेज अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए हैं। प्रदर्शनकारी अब भी कई शहरों में डटे हुए हैं। इस बीच भारत ने भी बांग्लादेश में रहने वाले अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

बांग्लादेश में दंगे क्यों हो रहे

बांग्लादेश में प्रदर्शन करने वाले अधिकांश प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राएँ हैं। इनके प्रदर्शन के पीछे हाल ही बांग्लादेश के हाई कोर्ट द्वारा आरक्षण को लेकर दिया गया एक निर्णय है। बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने 1 जुलाई, 2024 को दिए गए फैसले में देश में 56% आरक्षण दोबारा से चालू करने का फैसला किया है। इसमें से 30% आरक्षण 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हिस्सा लेने वालों के वंशजों को दिया जाता है। यह 56% 2018 में शेख हसीना की सरकार ने ही खत्म कर दिया था। लेकिन अब हाई कोर्ट इसे दोबारा लागू करने के पक्ष में है।

हाई कोर्ट के इस निर्णय का छात्र छात्राएँ विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में लड़ने वाली तीसरी पीढ़ी को क्यों मिल रहा है। हाई कोर्ट के इस निर्णय पर बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने तात्कालिक रोक लगा दी है। हालाँकि, प्रदर्शनकारी अब भी शांत नहीं हैं। उनका कहना है कि इस पर तत्काल प्रभाव से सरकार स्थायी रोक लगा दे। हालाँकि, हसीना सरकार का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय का इन्तजार करेगी।

कौन कर रहा प्रदर्शन, कितनी मौतें

बांग्लादेश में हो रहे इस प्रदर्शन के केंद्र में देश भर के छात्र हैं। दरअसल, आरक्षण के खिलाफ उतरे छात्रों का कहना है कि पहले से ही बांग्लादेश में सरकारी नौकरियाँ कम हैं, ऊपर से उनमें 50% से अधिक आरक्षण प्रतिभावान उम्मीदवारों को बाहर कर रहा है। छात्र बेरोजगारी के मसले को लेकर लगातार बांग्लादेश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय ढाका यूनिवर्सिटी में छात्रों ने कब्जा जमा लिया है। ढाका के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। स्कूल-कॉलेज के छात्र सड़कों पर हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों का सत्ताधारी आवामी लीग के छात्र मोर्चा से भी टकराव हुआ। जब प्रदर्शनकारी हिंसक हुए तो उन पर पुलिस ने कार्रवाई की। इस कारण से कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। बड़ी संख्या में घायल भी हुए। इसके बाद स्थितियाँ बिगड़ती चली गईं। बताया गया कि अब तक लगभग 39 मौतें हो चुकी हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों पर भी हमला किया और तोड़फोड़ की। उन्होंने बांग्लादेश के सरकारी चैनल BTV के हेडऑफिस में आग लगा दी।

शेख हसीना सरकार का क्या रवैया

शेख हसीना सरकार लगातार प्रदर्शन शांत करने की कोशिश कर रही है। उसने बांग्लादेश के सुरक्षाबलों को ढाका समेत बाकी शहरों की सड़कों पर उतार दिया है। शेख हसीना सरकार ने देश में दंगों को भडकने से रोकने के लिए मोबाइल और इन्टरनेट सेवाओं पर भी रोक लगा दी है। इसने आदेश दिया है कि सभी स्कूल, कॉलेज, मदरसे और छात्रावास बंद कर दिए जाएँ। शेख हसीना सरकार ने छात्रों को घर लौट जाने को कहा है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की पहल भी की है।

इस पूरे प्रदर्शन में रजाकार कौन

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में प्रदर्शन के दौरान तोड़ फोड़ करने वालों को ‘रजाकार‘ कह कर संबोधित किया। रजाकार बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान का साथ देकर बंगालियों पर अत्याचार करने वालों को कहा जाता है। इसी को लेकर प्रदर्शनकारी और भड़के। उन्होंने खुद को रजाकार कह कर नारे लगाने चालू कर दिए और साथ ही शेख हसीना को तानाशाह का तमगा दे दिया। अब पूरे मामले को शांत करने की कोशिशें हो रही हैं।

भारत का इस मामले में क्या रवैया

बांग्लादेश का आंतरिक मामला होने के कारण भारत इस पर कोई टिप्पणी अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं की है। हालाँकि, भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूर कदम उठाए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद सलाह जारी की है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रदर्शनों के दौरान भारतीयों से घरों के भीतर रहने को कहा है और किसी भी आपात स्थिति में दूतावस से सम्पर्क करने को कहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में अपने दूतावास के नम्बर भी जारी किए हैं। इस बीच कई भारतीयों के वापस अपने देश लौटने की सूचना भी है।

फ्लाइट में साथ बैठे थे, पूछा मूवी देखती हो, दिखाने लगे पोर्न… जिंदल स्टील के CEO पर महिला यात्री ने लगाया इल्जाम, कहा- मुझे पकड़ने लगे तो एयरस्टाफ ने बचाया

फ्लाइट में यौन उत्पीड़न का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर अनन्या छौछरिया नाम की महिला ने आरोप लगाया है कि उनके साथ कलकत्ता से अबू धाबी जाने के रास्ते में जिंदल स्टील के CEO ने बदसलूकी की। अनन्या छौछरिया की प्रोफाइल के अनुसार वह सिटिजन फॉर लीडरशिप की को-फाउंडर रही हैं और पेंट इन रेड की फाउंडर। अपने एक्स पोस्ट में उन्होंने यह आरोप लगाए, साथ ही एतिहाद एयरवेज की सक्रियता की तारीफ की।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “मैं एक उद्योगपति के बगल में बैठी थी (दिनेश कुमार सारोगी, जिंदल स्टील के सीईओ) उनकी उम्र करीबन 65 रही होगी। उन्होंने बताया कि वो ओमान में रहते हैं और ट्रैवल करते रहते हैं। उन्होंने मुझसे बातचीत शुरू की। बहुत सामान्य बातचीत जैसे परिवार के बारे में, हमारी जड़ों पर आदि।”

अनन्या के मुताबिक, “उस व्यक्ति ने उन्हें बताया वह चुरू राजस्थान से है। उनके दोनों बेटों की शादी हो गई है, वो अमेरिका में सेटल हैं। इसके बाद बातचीत आदतों पर आ गई। उन्होंने पूछा कि क्या मुझे मूवीज देखना पसंद है। मैंने कहा- ‘हाँ’ क्यों नहीं। उन्होंने मुझे कहा कि उनके फोन में कुछ मूवी क्लिप हैं। उन्होंने अपना फोन, ईयरफोन निकाला और मुझे पोर्न दिखाने लगे।”

आगे महिला ने बताया, “फोन निकालने के बाद उन्होंने मुझे पकड़ना शुरू कर दिया था। मैं सदमे में थी, डर गई थी। मैं तुरंत वॉशरूम की ओर भागी। वहाँ मैंने एयरस्टाफ से शिकायत की। एतिहाद टीम का शुक्रिया कि उन्होंने सक्रिय होकर इसपर एक्शन लिया। उन्होंने मुझे अपने बैठक वाले इलाके में बिठाया, मुझे चाय व फल दिए।”

आगे वो व्यक्ति जिसे महिला ने जिंदल स्टील का सीईओ बताया वो लगातार एयरस्टाफ से उनके बारे में पूछता था, लेकिन स्टाफ ने उन्हें बताने की बजाय इस घटना के बारे में अबू धाबी स्थित पुलिसकर्मियों को जानकारी दी, जहाँ वो एयरक्राफ्ट के बाहर खड़े होकर इंतजार कर रहे थे ताकि वो आदमी उनके ईर्द-गिर्द न आए।

महिला के अनुसार उन्हें जल्दी थी इसलिए वो इस मामले में शिकायत नहीं करवा पाईं, अगर वो ऐसा करतीं तो शायद उनकी बॉस्टन की फ्लाइट छूट जाती, इसलिए वो वहाँ से निकल गईं। अनन्या ने बताया कि उन्हें पुलिसकर्मी गेट तक छोड़ने आए थे। इसके साथ उन्होंने जब आरोपित व्यक्ति से पूछताछ की तो वो भी इन बातों से इनकार नहीं कर पाया।

पीड़िता बताती हैं कि वो इस घटना को सिर्फ इसलिए बता रही हैं क्योंकि ऐसा तो किसी के साथ भी हो सकता है। फिलहाल वो इस घटना के संबंध में जिंदल स्टील के संस्थापक नवीन जिंदल को बताने के लिए प्रयासरत हैं ताकि उन्हें पता चल सके कि कैसे लोग उनकी कंपनी में नेतृत्व कर रहे हैं। अनन्या यह भी कहती हैं कि वो इस घटना से घबराई हुई और परेशान हैं। साथ ही अपमानित भी महसूस कर रही हैं इसलिए वो सुनिश्चित करना चाहती हैं कि किसी के साथ ऐसा न हो। उन्हें घटना के बाद ये डर सताया कि आखिर ऐसे लोग कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों के साथ कैसा बर्ताव करते होंगे।

वाहन फूँके, पुलिस पर हमला… दंगों में जला ब्रिटेन का लीड्स: यहीं से सांसद चुना गया है गाजा समर्थक मोतिन अली, जीत के बाद लगे थे ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे

ब्रिटेन के शहर लीड्स में दंगे भड़क गए हैं। प्रवासी दंगाइयों ने एक इलाके में जम का उत्पात मचाया और पुलिस की गाड़ियों तोड़ आग लगा दी। उन्होंने कुछ वाहनों में आग लगा दी। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। दंगे का कारण एक समुदाय और सरकारी एजेंसी के बीच का विवाद बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लीड्स के हेयर हिल्स इलाके में यह दंगा गुरुवार (18 जुलाई, 2024) को चालू हुआ। दंगे की स्थिति शाम 5 बजे से ही बना चालू हो गई थी। इसके बाद दंगाइयों ने पुलिस की एक गाड़ी को पलट दिया और एक बस को आग लगा दी। पथराव होने की भी सूचना है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिखता है कि भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं और दंगा कर रहे हैं। वह पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ कर रहे है, इस बीच पुलिस यहाँ से गायब नजर आती है। इन दंगों के बीच यहाँ के नवनिर्वाचित सांसद मोतिन अली भी देखे गए हैं।

बताया गया है कि दंगे का कारण यहाँ रहने वाले लोगों के बच्चों को उनसे अलग करने का प्रयास रहा। ब्रिटेन में बच्चों की देखरेख करने वाली चाइल्ड केयर एजेंसी इस इलाके से बच्चों को बाल देखभाल गृह में ले जाना चाहती थी। इस इलाके में रहने वाले लोग इसके खिलाफ थे।

जब गुरुवार को एजेंसी ने यह प्रयास किया तो बच्चों के अभिभावक भड़क गए और एजेंसी के खिलाफ प्रदर्शन चालू कर दिया। इसके बाद यहाँ दंगा और तोड़फोड़ चालू हो गई। दरअसल, इस इलाके में ब्रिटेन के बाहर से आए शरणार्थी रहते हैं, इनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है।

इनकी आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण इनके बच्चों को अच्छी देखभाल ना मिल पाने का शक ब्रिटेन की चाइल्ड केयर एजेंसी को है। इसीलिए वह इन बच्चों को उनके माता-पिता से अलग करके अपने साथ रखना चाहती है। अभिभावक और कई मामलों में बच्चे, इसके लिए तैयार नहीं हैं।

लीड्स में हुए दंगों के बाद यहाँ भारी पुलिस बल और अग्निशमन दस्ते भेजे गए। स्थानीय नेताओं ने भी इस इलाके का दौरा करके लोगों को शांत रहने की अपील की। ब्रिटेन की गृह मंत्री यवेत्ते कूपर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मैं आज रात लीड्स में पुलिस वाहनों और सार्वजनिक परिवहन पर हुए चौंकाने हमलों से स्तब्ध हूँ। इस तरह की अव्यवस्था का हमारे समाज में कोई स्थान नहीं है। मैं वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस को उनकी कार्रवाई के लिए धन्यवाद देती हूँ। मैं लगातार अपडेट ले रही हूँ।”

जहाँ सब हैं भोले के भक्त, बोल बम की सेवा जहाँ सबका धर्म… वहाँ अस्पृश्यता की राजनीति मत ठूँसिए नकवी साब!

सावन का पवित्र महीना शुरू होने को है। काँवड़िए अपनी पवित्र यात्रा पर निकलने को तैयार हैं। शायद दुनिया की सबसे अनोखी यात्रा पर, जिसमें शामिल होने की एक मात्र शर्त होती है ‘काँवड़िया’, ‘भोला’, ‘बम’ होना। इस काँवड़ यात्रा के दौरान होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए यूपी के मुजफ्फरनगर की पुलिस ने एक आदेश जारी किया, जिसमें सभी दुकानदारों को अपनी असली पहचान के साथ दुकानें, ढाबे, फलों की रेहड़ियों को लगाने के लिए कहा गया।

मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश के सामने आते ही तमाम सेकुलर रुदालियाँ उठनी शुरू हो गईं। असदुद्दीन ओवैसी उसे नाजीवाद से जोड़ने लगे, तो अखिलेश यादव किसी और चीज से। मोहम्मद जुबैर जैसे वामपंथी-कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम के झूठ फैलाने वाले कथित ‘फैक्ट चेकर’ इस आदेश को ‘धार्मिक भेदभाव’ कह कर लोगों को भड़काने की कोशिश में जुट गए। इसी बीच, आवाज आई पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी की, जिन्होंने इसे अस्पृश्यता से ही जोड़ दिया।

मुख्तार अब्बास नकवी ने एक्स पर लिखा, “कुछ अति-उत्साही अधिकारियों के आदेश हड़बड़ी में गडबड़ी वाली ..अस्पृश्यता की बीमारी को बढ़ावा दे सकते हैं…आस्था का सम्मान होना ही चाहिए,पर अस्पृश्यता का संरक्षण नहीं होना चाहिए….”जनम जात मत पूछिए, का जात अरु पात। रैदास पूत सब प्रभु के,कोए नहिं जात कुजात।।”

अब नकवी साहब ने बात तो कह दी, लेकिन वो शायद भूल गए कि वो काँवड़ यात्रा पर सवाल उठा रहे हैं, और आस्था को अस्पृश्यता से जोड़ रहे हैं। पुलिसिया फैसले पर सवाल उठाते-उठाते उन्होंने ऐसी नाजुक डोर को छोड़ दिया, जिसका काँवड़ यात्रा से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं।

दरअसल, सावन का महीना नजदीक आते ही शिव भक्त तैयारी में लग जाते हैं। शिव भक्त उस यात्रा की तैयारी में लगते हैं, जिसमें उन्हें कई कई दिन तक पैदल चलना पड़ता है। इस यात्रा को ‘काँवड़ यात्रा’ कहा जाता है। उत्तर भारत में खासकर यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान जैसे राज्यों में शिव भक्त काँवड़ यात्रा पर निकलते हैं। वो पवित्र जलाशयों से जल लाते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव को जल समर्पित करते हैं। काँवड़ यात्रा के दौरान काँवड़िए तमाम कठिनाईयों का सामना करते हैं। पैरों में छाले पड़ जाते हैं। शरीर में भयंकर दर्द होता रहता है। बुखार-जुकाम से शरीर तपने लगता है। एक-एक कदम आगे बढ़ाना दूभर होने लगता है।

हालाँकि इन्हीं रास्तों पर इन शिवभक्तों की खूब आव-भगत भी होती है। जगह-जगह कैंप लगे होते हैं। भंडारे चल रहे होते हैं। काँवड़ियों के जख्मों पर मरहम लगाया जाता रहता है। पैरों को दबाया जाता है। भोजन-पानी-आराम-दवा सबकी व्यवस्था लोग करते हैं, जिसमें एक ही भाव होता है-‘बम यानी शिव भक्तों की सेवा’। ये सेवा उन्हें महादेव से जोड़ती है और जो माध्यम बनते हैं काँवड़िए- वो माँझी भी होते हैं, पासवान भी, सिंह भी होते हैं, गहलोत भी, ब्राह्मण भी, क्षत्रिय भी, इनमें गुर्जर भी होते हैं, जाट भी, इनमें एससी वर्ग के लोग होते हैं, तो ओबीसी भी होते हैं, जनरल भी होते हैं, तो कुछ शौकिया मुस्लिम, सिख, क्रिश्चियन भी, लेकिन इनकी सेवा कर रहे लोग इनसे न तो इनकी जाति पूछते हैं और न ही उनकी इसमें कोई दिलचस्पी होती है।

काँवड़ यात्रा यूँ तो देश के अनेक हिस्सों में विराजते ज्योतिर्लिंगों तक निकलती ही है, लेकिन हरिद्वार से दिल्ली-एनसीआर, बिहार-झारखंड में सुल्तानपुर-देवघर की, वाराणसी में बाबा विश्वनाथ की काँवड़ यात्रा खास मानी जाती है। इस दौरान प्रशासन भी इनकी सेवा में लगा होता है। यूपी, उत्तराखंड जैसे राज्यों में काँवड़ियों का अब स्वागत होने लगा है। सरकार उनके ऊपर पुष्पवर्षा भी करती है। वर्ना एक समय होता था, जब काँवड़ियों को हरिद्वार से दिल्ली और फिर हरियाणा पहुँचने में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब तो खैर जन दबाव में ही सही, काँवड़ियों के लिए कॉरिडोर तक बनाया जाने लगा है, वर्ना वो दिन बहुत पीछे नहीं छूटे, जब आए दिन काँवड़ियों पर हमले या फिर उनके पलटवार की खबरें अखबारों के पन्नों में होती थी। इन सबके बावजूद कभी काँवड़ियों के उमंग और उत्साह में कोई कमीं नहीं आई।

ये अलग बात है कि उनपर सवाल उठाने वालों की कोई कमीं कभी नहीं रही। अब तो बाकायदा काँवड़ यात्रा को हिंदुत्व और राजनीति से जोड़कर काँवड़ियों को राजनीतिक निशाना बनाया जाने लगा है। यकीन नहीं आ रहा हो, तो तथाकथित ‘सेकुलर’ नेताओं की टाइमलाइन ही देख लीजिए। पर इन सब बातों को ध्यान दिलाते हुए सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा कि भोले के भक्तों को राजनीतिक और सामाजिक अस्पृश्यता से मत जोड़िए, क्योंकि काँवड़ यात्रा में न तो कोई अगड़ा होता है, न कोई पिछड़ा होता है, न कोई स्वधर्मी होता है, न कोई विधर्मी होता है। अगर कोई हर तरफ दिखता है, तो वो सिर्फ भोले का भक्त होता है। ‘बम’ होता है। खुद ‘भोला’ होता है।

‘कितने क्रूर हो सकते हैं इंसान…’: मुहर्रम के जुलूस के वीडियो में दिखा ‘घायल घोड़ा’ तो भड़के सोशल मीडिया यूजर, शरीर पर जगह-जगह कटे निशान की जानिए हकीकत

मुस्लिम समुदाय के शिया तबके ने बुधवार (17 जुलाई 2024) को आशूरा या मुहर्रम के महीने का 10वाँ दिन मनाया। इस दिन इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के नवासे इमाम हुसैन कर्बला में शहीद हो गए थे। उनकी याद में शिया मुस्लिम जुलूस निकालकर दुख प्रकट करते हैं। इस दौरान मुंबई का वीडियो सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि गंभीर रूप से जख्मी एक घोड़े को परेड कराया जा रहा है।

सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि शिया मुस्लिम मोहर्रम का जुलूस निकालने के दौरान एक बेजुबान प्राणी का जुलूस निकाल रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि शोक मनाने की रस्म के दौरान घोड़े के शरीर पर गंभीर रूप से चोट के कई निशान हैं। ऐसा लग रहा है जैसे तलवार या चाकू से उसके शरीर को चीरा गया हो। उसके शरीर पर भी खून जैसे रंग दिख रहे हैं।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वे मुस्लिम समुदाय पर चाकू-ब्लेड से मासूम जानवर को घायल करने का आरोप लगा रहे हैं। दरअसल, इस वीडियो को सबसे पहले मुंबई स्थित एक पशु अधिकार समूह ने शेयर किया था। हालाँकि, बाद में इसे हटा लिया और स्पष्टीकरण दिया कि जानवर पर कोई कट के निशान नहीं थे। यह शरीर पर रंग के निशान थे।

@AmyMek नाम के X हैंल ने लिखा, “इस साल, मुंबई की सड़कों पर डरे हुए मुस्लिम एक मासूम घोड़े को लेकर उसे बार-बार चाकू से काटते हैं और खून से लथपथ, घायल जानवर को पैगंबर के पोते की मौत की याद में घुमाते हैं। ये मनोरोगी खुद को काटने और पीटने से थक गए हैं और इसके बजाय उन्होंने एक मासूम जानवर को निशाना बनाने का फैसला किया है। इसकी अनुमति कैसे दी जा सकती है?”

@sneheshphilip नाम के हैंडल ने लिखा, “आज एक बहुत ही परेशान करने वाला वीडियो देखा। अब रिपोर्ट्स के अनुसार यह वीडियो मुंबई में मुहर्रम के जुलूस का है। घोड़े को चाकू से काटा गया और उसे कई चोटों के साथ चलने पर मजबूर किया गया। इंसान कितने क्रूर हो सकते हैं। दयनीय।”

सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो मुंबई के डोंगरी का है। शिया मुस्लिम शोक मनाने के लिए डोंगरी के पास बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं। वे सड़कों पर बिना चप्पल के काले कपड़े पहनकर परेड करते हैं। इस दौरान चाकू और दूसरी नुकीली चीज़ों से खुद को चोट भी पहुँचाते हैं। उनके शरीर पर चोट और खून के निशान भी दिखते हैं।

इंटरनेट यूज़र्स को लगा कि अगर शिया मुस्लिम शोक प्रकट करने के लिए खुद को नुकसान पहुँचा सकते हैं तो इस घोड़े या अन्य जानवरों को भी चोट पहुँचा सकते हैं। हालाँकि, इस वीडियो में जो दिख रहा है, वह सच नहीं है। दरअसल, शिया मुस्लिम इमाम हुसैन के घोड़े की याद में मुहर्रम के दिन एक घायल घोड़े को परेड कराने की रस्म निभाते हैं।

कहा जाता है कि कर्बला की लड़ाई के दौरान यह घोड़ा गंभीर रूप से घायल हो गया था। यह भी कहा जाता है कि इमाम हुसैन शहीद हो गए थे और उन्हें 10 से अधिक घोड़ों के पैरों तले रौंद दिया गया था। खैर जो भी हो, जिस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया यूजर नाराज हैं, वह असली नहीं है। हकीकत पता चलने पर कई लोगों ने अपने पोस्ट डिलीट कर दिए।

भारतीय क्रिकेट टीम पर गौतम गंभीर की छाप: श्रीलंका दौरे के लिए हार्दिक नहीं सूर्या बने कप्तान, वनडे टीम में लौटे KL राहुल, जिम्बॉब्वे में डेब्यू करने वाले 4 खिलाड़ियों की छुट्टी

गौतम गंभीर के भारतीय क्रिकेट टीम का हेड कोच बनने के बाद श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंडिया का ऐलान हो गया है, जिस पर साफ तौर पर गौतम गंभीर का असर देखा जा सकता है। श्रीलंका दौरे के लिए भारत की टी-20 और वनडे क्रिकेट टीम का ऐलान हुआ है, जिसमें टी-20 टीम की कप्तानी सूर्यकुमार यादव को सौंपी गई है। इसके साथ ही वन-डे सीरीज के लिए रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों की वापसी भी हुई है, लेकिन जो सबसे चौंकाने वाली बात है, वो है हार्दिक पांड्या को लीडरशिप रोल से हटाना और शुभमन गिल को टी-20 के साथ ही वन-डे टीम का भी उप-कप्तान बना देना, क्योंकि हार्दिक पांड्या अभी विश्वकप जीतने वाली टीम के उप-कप्तान थे।

गौतम गंभीर का टीम इंडिया के कोच के तौर पर यह पहला दौरा होगा। श्रीलंका दौरे के लिए चुनी गई भारतीय टीम में गौतम गंभीर की छाप दिख रही है। हार्दिक पंड्या की दावेदारी को नजरअंदाज कर सूर्यकुमार यादव को कप्तान बनाया जाना इसका सबूत है। हार्दिक पांड्या को वनडे टीम में जगह तक नहीं मिली, उन्हें सिर्फ टी-20 टीम में शामिल किया गया है।

जिम्बाब्वे में डेब्यू करने वाले 4 खिलाड़ी बाहर

विश्वकप जीत के बाद भारत की युवा टीम ने जिम्बॉब्वे का दौरा किया था। इस दौरे पर 5 खिलाड़ियों ने डेब्यू किया था, लेकिन रियान पराग को छोड़कर सभी को बाहर कर दिया गया है। इसमें चौंकाने वाला नाम बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अभिषेक शर्मा का है, जिन्होंने न सिर्फ शतक बनाया था, बल्कि अहम मौके पर गेंदबाजी करते हुए विकेट भी लिया था। वहीं, साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल और तुषार देशपांडे को भी बाहर कर दिया गया। दरअसल, टीम में सीनियर खिलाड़ियों की वापसी हुई है, ऐसे में सभी को एक साथ जगह नहीं मिल सकती थी। संजू सैमसन, शिवम दुबे, यशस्वी जायसवाल, वाशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों को चुना गया है।

श्रीलंका दौरे के लिए भारत की टी20 टीम

सूर्यकुमार यादव (कप्तान), शुभमन गिल (उप कप्तान), यशस्वी जायसवाल, रिंकू सिंह, रियान पराग, ऋषभ पंत, संजू सैमसन, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, अर्शदीप सिंह, खलील अहमद और मोहम्मद सिराज।

रोहित-विराट की वनडे टीम में वापसी, संभालेंगे कप्तानी

श्रीलंका दौरे के लिए वनडे टीम का ऐलान हुआ है। माना जा रहा था कि इस दौरे पर सीनियर खिलाड़ी नहीं जाएँगे, लेकिन गौतम गंभीर की बतौर कोच पहली सीरीज बेरंग न दिखे, इसके लिए सभी सीनियर खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया गया है, सिवाय रविंद्र जड़ेजा और जसप्रीत बुमराह के। वहीं, केकेआर के कप्तान रहे श्रेयस अय्यर की भी वन-डे टीम में वापसी हुई है, तो लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान केएल राहुल की भी। दोनों की गौतम गंभीर से नजदीकियाँ किसी से छिपी नहीं है, साथ ही दोनों बेहतरीन खिलाड़ी भी हैं। इस समय दोनों पूरी तरह से फिट भी हैं। वहीं, ऋषभ पंत की भी बतौर विकेटकीपर वन-डे टीम में वापसी हुई है, तो शुभमन गिल को टी20 की तरह वनडे टीम का उप कप्तान भी बना दिया गया है। टीम की कमान रोहित शर्मा संभालेंगे, तो विराट कोहली भी उनका साथ देने के लिए मौजूद रहेंगे।

भारत की वनडे टीम

रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल (उप कप्तान), विराट कोहली, केएल राहुल, ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, वाशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, रियान पराग, अक्षर पटेल, खलील अहमद और हर्षित राणा।

SI के पेट को चीर कर कॉन्स्टेबल के सिर जा घुसा बुलेट, कॉन्स्टेबल याकूब की मौत: पशु तस्करों के खिलाफ रेड मारने गई थी पुलिस, पिस्टल हो गई जाम

अलीगढ़ में एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में एक कॉन्स्टेबल की मौत हो गई, जबकि एक सब-इंस्पेक्टर घायल हो गया। दरअसल, पुलिस पशु तस्करों की तलाश में छापेमारी करने एक गाँव में पहुँची थी, वहाँ एक पुलिसकर्मी की पिस्टल जाम हो गई। पिस्टल जब एसआई चेक करने लगे, तो उससे गोली चल गई। वो गोली एसआई के पेट को चीरती हुई कॉन्स्टेबल के सिर में जा घुसी। इस हादसे में एसआई गंभीर रुप से घायल हो गए, तो कॉन्स्टेबल की मौत हो गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना बुलंदशहर जिले की सीमा से लगे एक गाँव में पशु तस्करों को पकड़ने के लिए चल रही छापेमारी के दौरान हुई। मृत कॉन्स्टेबल का नाम याकूब खान है, तो एसआई राजीव कुमार घायल हो गए हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजीव सुमन के अनुसार, 9 जुलाई को गोवंश तस्करी की घटना हुई थी, जिसके बाद पुलिस अपराधियों की तलाश कर रही थी। जब पुलिस को सूचना मिली कि वही तस्कर फिर से गोवंश तस्करी की कोशिश कर रहे हैं, तो स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और इलाके के दो थानों की पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए मौके पर पहुँच गई।

ऑपरेशन के दौरान रात करीब 1 बजे इंस्पेक्टर अजहर हुसैन की सर्विस पिस्टल जाम हो गई। जब वे पिस्टल को अनलॉक नहीं कर पाए तो सब-इंस्पेक्टर राजीव कुमार ने इसे अनलॉक करने की कोशिश की। जब वे पिस्टल को अनलॉक करने की कोशिश कर रहे थे, तो गलती से गोली चल गई। गोली सब इंस्पेक्टर राजीव कुमार के पेट से होते हुए पास में खड़े कांस्टेबल याकूब के सिर में जा लगी।

दोनों पुलिसकर्मियों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने याकूब को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर राजीव कुमार की जान बचाने में सफल रहे, लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। उनकी आँत में कई घाव थे। सर्जरी के बाद होश में आने के बाद एसआई राजीव कुमार ने पुष्टि की कि यह घटना तब हुई जब उनके सहकर्मी ने उन्हें अनलॉक करने के लिए जाम हुई पिस्तौल दी। उन्होंने कहा कि पिस्तौल से गलती से गोली चल गई और वह उनके पेट में जा लगी और फिर एसओजी कान्स्टेबल याकूब को जा लगी।

एसएसपी संजीव सुमन ने बताया कि कान्स्टेबल याकूब का पार्थिव शरीर पूरे पुलिस सम्मान के साथ उसके परिवार को सौंप दिया गया है। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि उन्हें हरसंभव मदद मुहैया कराई जाएगी। इस बीच, याकूब खान का परिवार पुलिस की बात पर भरोसा नहीं कर रहा है।

पीड़ित के पिता ने कहा कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि गोली राजीव कुमार के पेट में घुसने के बाद याकूब के सिर में कैसे लगी। परिवार ने इसे हत्या का मामला बताते हुए जाँच की माँग की है। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी आश्चर्य व्यक्त किया कि याकूब के शरीर की स्थिति क्या थी कि उसके सिर में गोली लग गई जो राजीव कुमार के पेट से होकर गुजरी। उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि जाँच होगी।”