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1 साल में बढ़े 80 हजार वोटर, जिनमें 70 हजार का मजहब ‘इस्लाम’, क्या याद है आपको मंगलदोई? डेमोग्राफी चेंज के खिलाफ असम के CM ने यूँ ही नहीं किया है शंखनाद

बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ती तादाद को नकारना देश के लिए खतरे से कम नहीं है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार इसके खिलाफ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो 2044 तक राज्य इस्लाम बहुल हो जाएगा। मुख्यमंत्री बिस्वा की ये चेतावनियाँ निराधार कतई नहीं है। उन्हें अपने राज्य के हालात मालूम हैं… इसी राज्य ने 1977 और 1978 के बीच में बांग्लादेशियों की ऐसी घुसपैठ कराई गई थी जिसे देख हर कोई सन्न रह गया था।

किसी को समझ नहीं आया था कि एक साल में एक ही राज्य की एक लोकसभा सीट पर 80000 वोटर कैसे बढ़े। तमाम शिकायतें हुई। सवाल उठे। तब समझ आया कि ये अचानक हुई वृद्धि बांग्लादेश से हुई घुसपैठ का नतीजा है।

असम में एक साल में बढ़े 80 हजार वोट

दरअसल, साल 1977 जब इमरजेंसी के बाद पहली बार चुनाव हुए तो 14 सीटों में 3 सीट जनता पार्टी के हिस्से आई। इनमें एक सीट मंगलदोई की थी जिसे हीरा लाल (तिवारी) ने जीता था। जानकारी मिलती है कि इन चुनावों तक मंगलदोई में 5,60, 297 मतदाता थे। हालाँकि एक साल बाद जब हीरा लाल का निधन हो गया तो उपचुनाव कराए गया और एक साल से थोड़े से अधिक समय में वोटर लिस्ट) अपडेट की गई तो मतदाताओं की यह संख्या 80,000 बढ़ गई थी! इनमें से लगभग 70,000 मतदाताओं का मजहब इस्लाम था।

साभार: द लास्ट बैटल आफ सरायघाट

अजीत झा अपनी रिपोर्ट में ‘द लास्ट बैटल ऑफ सरायघाट’ किताब से इस घुसपैठ की जानकारी देते हैं। किताब में लिखा है अचानक इलाके में लोगों की संख्या ये जो 15% का इजाफा हुआ था उसे मंगलदोई में कॉन्ग्रेस ने इंपोर्ट किया था। आम नागरिकों ने इनके खिलाफ शिकायत भी दी थी। बाद में 70 हजार में से केवल 26900 ही टिक पाए थे। बाकी सब अवैध घुसपैठिए साबित हुए थे।

1977 से लेकर 2024 में हालात बदले नहीं हैं बल्कि और भयावह हुए हैं। असम मुख्यमंत्री जो खुद इस्लामी कट्टरपंथ और बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ सक्रिय होकर काम कर रहे हैं वो न्यूज चैनल से बातचीत में राज्य की स्थिति को स्वीकार रहे हैं। वो स्पष्ट कहते हैं कि 2044 तक अनुमान है असम मुस्लिम बहुल हो जाएगा जबकि बंगाल 2051 तक।

असम मुख्यमंत्री हालातों पर चिंता जताते हुए कहते हैं जिस तरह से असम में हिंदू आबादी के मुकाबले मुस्लिम आबादी बढ़ रही है, उसे देखते हुए लग रहा है कि 20 साल बाद राज्य की कुल आबादी में मुसलमानों की संख्या 50 फीसदी हो जाएगी। इसके साथ ही असम जम्मू-कश्मीर के बाद देश में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला दूसरा राज्य बन जाएगा।

उन्होंने अपनी बात रखते हुए असम के उन इलाकों का उदाहरण दिया जहाँ मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ती जा रही हैं। इन इलाकों में एक धुबरी इलाका भी है जहाँ की मुस्लिम आबादी 85 फीसद पहुँच गई है। वहीं पूरे राज्य की बात करे तो राज्य में मुस्लिम आबादी 40 प्रतिशत तक पहुँच गई है। जिन्हें ऐसा लगता है कि ये संख्या कम है या फिर सामान्य है उन्हें जानना जरूरी है कि इसी असम में 1951 तक मुस्लिमों की संख्या केवल 12 फीसद थी।

सीएम सरमा इस जनसांख्यिकी बदलाव को राजनैतिक मुद्दा नहीं, जीवन और मृत्यु का मामला बताते हैं। वो बताते हैं कि राज्य में हिंदू बहुल इलाके धीरे-धीरे मुस्लिम बहुल हो रहे हैं। वहीं असम के सीएम ने यह भी बताया कि कैसे बांग्लादेश और पड़ोसी देशों से आए प्रवासी यहाँ तेजी से बढ़ रहे हैं और इनके कारण उन संसाधनो पर दबाव पड़ रहा है जो हकीकत में असम की मूल जनता के लिए होने चाहिए।

1978 से उठ रहा घुसपैठ का मुद्दा

असम में हो रहे ये जनसांख्यिकी बदलाव को लेकर चिंता 1977-78 के बाद से अब तक मे कई बार उठाई जा चुकी है। साल 1988 में असम के राज्यपाल एसके सिन्हा ने तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायण को पत्र लिखकर असम में हो रही अवैध घुसपैठ के मुद्दे की रिपोर्ट दी थी। पत्र में बांग्लादेशियों की बढ़ती तादाद और जनसांख्यिकी में होते बदलाव की ओर ध्यान दिलाया गया था। पत्र में कहा गया था कि ये बदलाव असमिया लोगों की पहचान और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए गंभीरता खतरा है।

2004 में, भारत के गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने भारतीय संसद में कहा था कि, 31 दिसंबर 2001 तक देश में 12 मिलियन अवैध बांग्लादेशी थे, जिनमें से 5 मिलियन असम में थे। वहीं साल 2010 में मनोहर पार्रिकर रक्षा अध्य्यन एवं विश्लेषण संस्थान पर प्रकाशित रिपोर्ट में भी इस मुद्दे को उठाया गया था। नम्रता गोस्वामी की रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे असम राज्य को अवैध प्रवासियों का मुद्दा दशकों से परेशान कर रहा है। वहीं असमिया लोगों को चिंता यह है कि इस तरह की घुसपैठ कैसे उनके जीवन जीने के तरीके को प्रभावित करेगी।

अब इन्हीं लोगों की तरह हिमंता बिस्वा सरमा ने भी तथ्यों को आधार बनाते हुए अपनी चिंता को जाहिर किया है। लेकिन कुछ लोग इस पर भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा मुद्दा छेड़ा ही क्यों। इस पर हिमंता सरमा कहते हैं कि उन्होंने जो भी कहा है वो तथ्यों और आँकड़ों के आधार पर कहा है। अगर किसी को उन्हें झूठा साबित करना है तो तथ्यों को गलत बता सकता है, लेकिन इस सच को नहीं पलटा जा सकता कि राज्य में मुस्लिम बढ़ रहे हैं। उन्होंने अपने राज्य के साथ-साथ बंगाल और झारखंड में भी मुस्लिमों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है।

5 साल में 123% तक बढ़ गए मुस्लिम वोटर, फैक्ट फाइडिंग रिपोर्ट से सामने आई झारखंड की 10 सीटों की जमीनी हकीकत: बाबूलाल का CM को पत्र- ST महिलाओं से जबरन शादी कर डेमोग्राफी बदल रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए

झारखंड की 10 विधानसभा सीटों के कई बूथ पर वोटरों की संख्या में पाँच साल में 100% से अधिक वृद्धि हुई है। यह खुलासा झारखंड भाजपा ने एक रिपोर्ट में किया है। वोटर बढ़ने वाले अधिकांश वह इलाके हैं जो संताल परगना में आते हैं। इन इलाकों में भारी बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ की बात लगातार सामने आई है।

भाजपा ने इस रिपोर्ट के आधार पर झारखंड चुनाव आयोग से जाँच की माँग की है। भाजपा ने कहा कि अगर ढंग से जाँच हुई तो डेमोग्राफी बदलने की बड़ी साजिश सामने आएगी। भाजपा की यह रिपोर्ट एक तीन सदस्यीय समिति ने तैयार की है, इस समिति के मुखिया प्रदेश उपाध्यक्ष अवधेश कुमार हैं। यह पूरी रिपोर्ट ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

भाजपा की रिपोर्ट में क्या सामने आया

भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची और 2024 की मतदाता सूची का अध्ययन किया है। भाजपा ने पाया है कि झारखंड की 10 विधानसभा सीटों के कुछ बूथ पर (विशेष कर मुस्लिम आबादी वाले बूथ) पर वोटरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि पाँच वर्षों में हुई है।

भाजपा की रिपोर्ट में सामने आया है कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में वोटरों की संख्या में यह अप्रत्याशित बढ़त 20% से 123% तक की है। यह बढ़त इन 10 विधानसभा के कुल 1467 बूथ पर हुई है। भाजपा ने कहा है कि सामान्यतः पाँच वर्षों में 15% से 17% की वृद्धि होती है, इसीलिए यह वृद्धि असामान्य है। भाजपा ने यह भी बताया है कि हिन्दू आबादी वाले बूथ पर वोटरों की संख्या में बढ़त मात्र 8% से 10% हुई है। भाजपा ने यह भी बताया है कि कई बूथ पर हिन्दू मतदाता घट भी गए हैं।

डेमोग्राफी बदलने की साजिश

भाजपा की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इस इन भी बूथ की जाँच हो तो डेमोग्राफी बदलने की एक साजिश सामने आएगी। भाजपा ने आरोप लगाया है कि विदेशी घुसपैठियों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपना नाम वोटरों की सूची में दर्ज करवाया गया है, जिसके लिए अवैध रूप से कागज बनवाए गए हैं। भाजपा ने माँग की है कि इस मतदाता सूची में फर्जी पाए जाने जाने वाले वोटरों पर जनप्रितिनिधि कानून के तहत कार्रवाई हो।

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया है कि कई बूथों पर सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से बहुसंख्यक आबादी के नाम काट दिए गए हैं। इस कारण से यह 2024 लोकसभा चुनाव में वोट डाल नहीं पाए। भाजपा ने इस संबंध में झारखंड चुनाव आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपी है और जाँच की माँग की है।

राजमहल विधायक ने भी की थी जाँच की माँग

जहाँ अब झारखंड की 10 विधानसभा सीटों पर अप्रत्याशित रूप से मतदाता बढ़ने की बात सामने आई है, वहीं इससे पहले राजमहल के विधायक अनंत ओझा ने भी इस संबंध में शिकायत की थी। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया था कि उनकी विधानसभा के 187 नंबर बूथ पर 2019 में 672 वोट थे। 2024 में यह बढ़ कर 1461 हो गए। यानी इसमें लगभग 117% की वृद्धि हुई। इसी के साथ सरकारी मदरसा बूथ पर 754 वोट बढ़ कर 1189 हो गए। ऐसे कम से कम 73 बूथ इस विधानसभा के भीतर हैं जहाँ की वोटर वृद्धि असामान्य है।

विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया को बताया था कि यह सभी बूथ मुस्लिम आबादी के बीच स्थित हैं। इसी इलाके में हिन्दू आबादी वाले 17 बूथ पर इसी दौरान आबादी कम हो गई है। उन्होंने इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग से भी शिकायत की थी। राज्य चुनाव आयोग ने इस मामले में एक टीम बनाकर एक्शन लेने की बात कही थी।

घुसपैठ की समस्या पर बाबूलाल मरांडी ने लिखा पत्र

भाजपा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण यहाँ की आदिवासी जनसंख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा है कि घुसपैठिए यहाँ तेजी से बढ़ रहे है जिससे आदिवासी जनसंख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि घुसपैठिए यहाँ महिलाओं से विवाह कर जमीनें कब्जा रहे हैं।

उन्होंने आशंका जताई है कि आने वाले समय में यहाँ आदिवासी अल्पसंख्यक हो जाएँगे। उन्होंने इसके समर्थन में कुछ आँकड़े भी दिए हैं। मरांडी के दिए आँकड़ों में बताया गया है कि 1951 में संताल परगना में 41% आदिवासी आबादी थी जो कि 2011 में 28% ही बची है। उन्होंने अपने पत्र में बताया है कि इस बीच मुस्लिमों की आबादी 9.4% से 22% पहुँच चुकी है। झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस मामले को उठाया है।

कितनी गंभीर है घुसपैठ की समस्या

मार्च, 2024 में आजतक की रिपोर्ट में बताया गया था कि यहाँ बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिए, पश्चिम बंगाल के रास्ते आते हैं। इसके बाद वह बस जाते हैं। इनमें से कुछ आदिवासियों की लड़कियों को निशाना बनाते हैं। जब लडकियाँ उनके दिखावे में फंस जाती हैं तो उनसे शादी कर ली जाती है।

शादी के बाद लड़की की कागजों में पहचान आदिवासी के तौर पर ही रहने दी जाती है। इसके बाद उस लड़की के नाम पर जमीन ली जाती है या फिर उसकी ही जमीन कब्जा ली जाती है। रिपोर्ट में बताया गया था कि यह सब करने के लिए बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को फंडिंग मिलती है।

लड़की की पहचान आदिवासी रखने के पीछे सरकारी फायदे लेने के मकसद रहता है। इसके अलावा कई जगह उन लड़कियों को चुनाव भी लड़वाया गया, जिन्होंने मुस्लिमों से शादी की। बांग्लादेशी घुसपैठियों की यह समस्या शादी करने और जमीन हथियाने तक सीमित नहीं रही है। इसका कनेक्शन लोकसभा चुनाव तक से जुड़ा है।

नाम कुलदीप, काम हिंदुओं को ईसाई बनाना: मुरादाबाद में लालच दे धर्मांतरण करवा रहे 4 गिरफ्तार, महाराजगंज में धर्म परिवर्तन पर बजरंग दल उबला

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और महाराज गंज से ईसाई मिशनरियों से जुड़ी खबरें सामने आई हैं। मुरादाबाद में हिंदूवादी कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने उत्तराखंड के पादरी कुलदीप समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से तीन स्थानीय लोग हैं, जो अपने घरों में प्रार्थना सभा का आयोजन कराते थे और लोगों को धर्मांतरण का लालच देते थे। वहीं, महाराज गंज में हिंदू वादी कार्यकर्ताओं ने ईसाई मिशनरियों के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर पुलिस थाने का घेराव किया और कार्रवाई की माँग की है। इस मामले में एक महिला ने एफआईआर दर्ज कराई है कि लोगों को बहला-फुसला कर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।

मुरादाबाद में पादरी कुलदीप समेत 4 गिरफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा प्रखंड के रम्मनवाला गाँव से पादरी कुलदीप समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कुलदीप उत्तराखंड के उधमसिंहनगर का रहने वाला है। वहीं, रम्मनवाला गाँव के ही अमरजीत, जयपाल और मुकेश को भी गिरफ्तार किया गया है। इनके खिलाफ लोगों को ‘सहायता’ देने की आड़ में लोगों का धर्म परिवर्तन कराने के आरोप हैं। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा मामला उठाए जाने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की। मुरादाबाद वीएचपी के महासचिव पंकज सिंह की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

ठाकुरद्वारा के सर्किल ऑफिसर राजेश कुमार ने बताया कि यह घटना 12 जुलाई की रात को रम्मनवाला गाँव में हुई, जब कुछ लोग ईसाई मजहबी सभा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि दो हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप किया और पुलिस से संपर्क कर वित्तीय और अन्य लाभ देने के बहाने जबरन धर्म परिवर्तन की शिकायत की।

एफआईआर के मुताबिक, आरोपितों ने अबतक 15 परिवारों के 60 लोगों को ईसाई बनाया है और वो अन्य लोगों को भी ईसाई बना रहे थे। विहिप पदाधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में बताया गया है कि आरोपित हिंदुओं को ईसाई धर्म अपनाने के बदले में पैसे, रेफ्रिजरेटर, टीवी, साइकिल, मोटरसाइकिल और सिलाई मशीन मुहैया कराते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने वाले लोगों को 25,000 रुपये का इनाम दिया जाता है, जबकि उनका धर्म परिवर्तन कराने वाले पादरी को ईसाई धर्म में शामिल होने वाले प्रत्येक गैर-ईसाई के लिए 35,000 रुपये मिलते हैं। इस मामले में शनिवार (13 जुलाई 2024) को ठाकुरद्वारा थाने में बीएनएस की धारा 351(2) व 351(3) के तहत अपमानजनक और आपराधिक धमकी के साथ ही उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3 व 5(1) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

महाराजगंज में ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ रोष

मुरादाबाद ही नहीं, बल्कि महाराज गंज जिले में भी क्रिश्चियन मिशनरी बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। महाराज गंज के सिंदुरिया थाना इलाके में अवैध तरीके से धर्मपरिवर्तन कराने वाले क्रिश्चियन मिशनरी को हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया, तो उन्हें छोड़ दिया गया, जिसके बाद हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने थाने में जमकर हंगामा काटा। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (16 जुलाई 2024) को बजरंग दल, विश्व हिंदू महासंघ, गौ रक्षा प्रकोष्ठ से जुड़े कार्यकर्ता सिंदुरिया थाना पहुँचे। उन्होंने ईसाई मिशनरियों द्वारा अवैध रूप से धर्म परिवर्तन कराने के मामलों को उठाया और उप-निरीक्षक प्रवीण कुमार सिंह से सवाल भी पूछा कि जिन ईसाई मिशनरियों को हिंदू कार्यकर्ताओं ने उन्हें सौंपा था, उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। हालाँकि उनके सवालों के जवाब पुलिस वालों से मिलते नहीं दिखे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में बजरंग दल के विश्व हिंदू परिषद (बजरंग दल) के जिला संयोजक विवेक श्रीवास्तव और कार्यकर्ताओं ने सिंदुरिया पुलिस पर ईसाई मिशनरियों के सहयोग का आरोप लगाया। विकेक श्रीवास्तव ने कहा कि रविवार (14 जुलाई 2024) को सिंदुरिया पुलिस को सूचना दी गई थी कि अरनहवा गाँव में धर्म परिवर्तन का कार्य हो रहा है, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने उप निरीक्षक प्रवीण कुमार सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब (हिंदू कार्यकर्ता) ईसाई मिशनरियों को पकड़ने जाते है तो आरोपितों को बुला कर एक घंटे थाने पर बैठा लिया जाता है और फिर छोड़ दिया जाता है।

इस दौरान हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभा रहा है। ऐसे में हिंदूवादी संगठन अपने तरीके से चीजों को सही करने लगेंगे, तो दिक्कतें बढ़ जाएँगी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से ईसाई मिशनरियों के खिलाफ एक्शन लेने की अपील भी की।

इस मामले में एक महिला ने बहलाफुसला कर अवैध धर्मांतरण के मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई है। एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। जिसमें भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि किसी भी तरह की गिरफ्तारी की सूचना नहीं मिल पाई है। इस मामले में सिंदुरिया थाना प्रभारी से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखने तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। जैसे ही इस मामले में कोई अपडेट आता है, हर खबर को अपडेट करेंगे।

सिक्योरिटी अपडेट से बैठ गई माइक्रोसॉफ्ट, दुनियाभर में बैंक से लेकर बाजार पर सीधा असर: ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया में न्यूज प्रसारण बंद, भारत में भी उड़ानें बाधित

तकनीक हमारे जीवन को जीतना आसान बनाता है, उतना ही कभी-कभी मुश्किल में भी डाल देता है। दुनिया की प्रसिद्ध टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर में खराबी आने के बाद बैंकिंग, शेयर मार्केट, विमानन, मीडिया आदि क्षेत्रों के ठप पड़ने के कारण दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। माइक्रोसॉफ्ट में खराबी आने के कारण Window पर काम करने वाले सिस्टम को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।

माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर में खराबी के कारण कई उद्योगों को सेवाएँ देने वाली साइबर सुरक्षा फर्म क्राउडस्ट्राइक शुक्रवार सुबह दुनिया भर के कुछ हिस्सों में बंद हो गई। इसके कारण समाचार प्रसारण रुक गए। लंदन स्टॉक एक्सचेंज सहित दुनिया भर के एक्सचेंजों में ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। इतना ही नहीं, इसका अच्छा-खासा प्रभाव विमानन क्षेत्र पर भी पड़ा है। बड़ी संख्या में उड़ाने प्रभावित हुई हैं।

भारत में भी इसका असर देखने को मिला है। देश की 5 एयरलाइन– इंडिगो, स्पाइसजेट, अकासा एयर, विस्तारा और एयर इंडिया एक्सप्रेस की बुकिंग, चेक-इन और फ्लाइट अपडेट सर्विस बुरी तरह से प्रभावित हुई है। एयरपोर्ट पर लोगों को सर्विसेज नहीं मिल रहे हैं। जिन देशों में सबसे अधिक असर पड़ा है उनमें अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड प्रमुख हैं।

साइबर सिक्योरिटी के काम नहीं करने के कारण कई कंपनियों में वायरस अटैक की बात भी कही जा रही है। कहा जा रहा है कि हैदराबाद और बेंगलुरु में ज्यादातर कॉर्पोरेट कंपनी में वायरस अटैक की बात कही जा रही है। सिस्टम ब्लू स्क्रीन में आने के बाद रीस्टार्ट हो रहे हैं। हैदराबाद में कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को अगले 2 घंटे तक सिस्टम ऑफ रखने को कहा है।

इस समस्या के कारण लोग शेयर ट्रेडिंग नहीं कर पा रहे हैं। बैंकिंग सेवाओं पर भी असर पड़ा है। मीडिया में दिक्कत आ रही है। ब्रिटेन में स्काई न्यूज चैनल का प्रसारण बंद हो गया है। ऑस्ट्रेलिया की टेलीकॉम कंपनी टेल्स्ट्रा ग्रुप ने बताया उसे भी व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि, भारत का स्टॉक एक्सचेंज NSE का कहना है कि उस पर इस समस्या का इम्पैक्ट नहीं पड़ा है।

इस समस्या पर भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने कहा, “माइक्रोसॉफ्ट 365 और माइक्रोसॉफ्ट सुइट का इस्तेमाल लाखों भारतीय करते हैं। इस प्लेटफ़ॉर्म पर कोई भी रुकावट कई कंपनियों के कारोबार और संचालन को बाधित करती है। मुझे उम्मीद है कि माइक्रोसॉफ्ट जल्द ही अपनी सेवाएँ बहाल कर देगा। भारत सरकार माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिलकर सेवाएँ की जल्दी बहाली सुनिश्चित करेगी।”

क्या है समस्या?

लोगों का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट विंडोज पर नीली स्क्रीन दिखाई दे रही है। इसके साथ ही सिस्टम ऑटोमैटिकली रीस्टार्ट या शटडाउन हो गए हैं। डेल टेक्नोलॉजीज का कहना है कि यह समस्या हाल में क्राउडस्ट्राइक अपडेट के कारण हुई है। CrowdSrike साइबर सिक्योरिटी प्लेटफ़ॉर्म है, जो साइबर सिक्योरिटी का समाधान उपलब्ध कराती है।

CrowdSrike का प्रमुख काम कंपनियों को हैकर्स, साइबर अटैक, रैंसमवेयर और डेटा लीक से बचाना है। यही वजह है कि इस कंपनी के प्रमुख कस्टमर दुनिया भर के बड़े बैंक, यूनिवर्सिटी और सरकारी एजेंसियाँ भी हैं। हाल के दिनों में हैकर्स के बढ़ते हमलों की वजह से कंपनियों की CrowdStrike जैसे साइबर सिक्योरिटी फर्म पर निर्भरता बढ़ी है।

क्राउडस्ट्राइक के अपडेट के कारण माइक्रोसॉफ्ट के एज्योर क्लाउड और माइक्रोसॉफ्ट 365 सर्विसेज में परेशानी आई है। माइक्रोसॉफ्ट ऐज्योर क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है। ये एप्लिकेशन और सर्विसेज को बनाने, डिप्लॉय और मैनेज करता है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट 365 प्रोडक्टिविटी सॉफ्टवेयर है, जिसमें वर्ड, एक्सेल, पावरपॉइंट, आउटलुक और वन नोट जैसे लोकप्रिय एप्लिकेशन शामिल हैं।

इस समस्या को लेकर माइक्रोसॉफ्ट ने भी बयान जारी किया है। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा, “हमें समस्या की जानकारी है और हमने कई टीमों को इसे सुलझाने में लगाया है। हमने इसके कारण का पता लगा लिया है।” माइक्रोसॉफ्ट ने कहा है कि इस समस्या को जल्दी को सुलझा लिया जाएगा।

जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी… हिंदुओं के त्योहार आए करीब तो कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने ग्राउंड पर बैठा दिया ‘पहरा’, जिन मैदानों में हुईं रैली उनके गैर-शैक्षणिक इस्तेमाल पर रोक

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने कृष्ण जन्माष्टमी और गणेशोत्सव से पहले विवाद खड़ा कर दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब दक्षिण कन्नड़ जिला स्कूल शिक्षा निदेशक ने 16 जुलाई 2024 को एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें मैंगलोर में स्कूलों के खेल के मैदानों का गैर-शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करने पर रोक लगा दी गई।

दक्षिण कन्नड़ जिला स्कूल शिक्षा निदेशक ने सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को एक परिपत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि स्कूल के मैदान और इमारतों का इस्तेमाल गैर-शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि शिक्षा विभाग के पास मंजूरी के लिए कोई प्रस्ताव भी ना भेजा जाए।

सर्कुलर

सर्कुलर में साफ चेतावनी दी गई है कि स्कूल परिसर में शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा किसी भी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यदि इस आदेश का उल्लंघन किया जाता है तो संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक जिम्मेदार होंगे। शिक्षा विभाग के आदेश के बाद स्कूल प्रबंधन बोर्ड ने गणेशोत्सव और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

इस प्रकार सार्वजनिक तौर पर आयोजित होने वाले गणेशोत्सव समारोह का कार्यक्रम बाधित हो जाएगा। गणेशोत्सव और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले कर्नाटक सरकार के इस तानाशाही वाले सर्कुलर निकाले जाने के बाद हिंदू संगठनों में भारी रोष है। इस पर राज्य की मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी आपत्ति जताई है।

भाजपा और हिंदू संगठनों का कहना है कि दक्षिण कन्नड़ जिले के कई सरकारी स्कूलों के मैदान में कई वर्षों से गणेशोत्सव मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार शिक्षा विभाग ने एक नए आदेश के जरिए गणेशोत्सव समारोह को रोकने का फैसला किया है। बेलथांगडी से भाजपा विधायक हरीश पूँजा ने माँग की है कि सरकार इस आदेश को तुरंत वापस ले।

सोशल मीडिया साइट X पर लोग कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार को इसके लिए लताड़ लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सीएम सिद्धारमैया की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने स्कूलों और कॉलेज के मैदानों में गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी और सरस्वती पूजा रोकने की साजिश रची। लोगों का यह भी कहना है कि सिद्धारमैया ने चुनावों के दौरान अपनी रैलियों के लिए उन्हीं मैदानों का इस्तेमाल किया था।

कोई वकील, कोई गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन… पहले खुद ईसाई बने, फिर दूसरों को बनाने में जुटे: धर्म परिवर्तन के लिए ₹20 लाख का दे रहे थे ऑफर

मध्य प्रदेश के भोपाल में गरीब बस्ती में जाकर ईसाई धर्मांतरण के लिए ₹20 लाख का ऑफर करने वाले पाँच लोग पुलिस के शिकंजे में आए हैं। पुलिस जाँच में इनके बारे में कई जानकारियाँ सामने आई हैं। अब पुलिस इनके फंडिंग के तार खोजने में जुड़ी हुई है।

भोपाल की गरीब बस्तियों में घूम-घूम कर ईसाई बनने का ऑफर देने वाले पाँच लोगों को हाल ही में पुलिस ने पकड़ा था। इनमें तेन महिलाएँ और 2 पुरुष थे। मौके पर तीन महिलाएँ पकड़ी गई थीं जबकि दोनों पुरुष भागने में कामयाब हो गए थे। बाद में इन्हें भी दबोच लिया गया था।

ईसाई धर्मांतरण करवाने वाली महिलाओं का नाम मैरी बस्तवाल, मैरी मसीह और सुमन मसीह है जबकि पुरुषों का नाम बद्राप्र्साद और चंद्रभान हैं। इनमें से बद्राप्रसाद 55 साल का है और वह तेलंगाना का रहने वाला वकील है। उसने पुलिस को बताया है कि वह 2002 में ईसाई बना था और उसे कोई तब पैसा नहीं मिला था, वह लगातार लोगों को ईसाई बनाने के मिशन में जुटा है।

वहीं दूसरा पुरुष चंद्रभान बिहार का रहने वाला है। उसने 2016 में सुमन पासवान उर्फ़ सुमन मसीह से शादी की थी। वह अपनी पत्नी के प्रभाव में आकर कन्वर्ट हो गया। इनके साथ पकड़ी गई महिला मैरी बस्त्वाल मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक हॉस्टल में वार्डन है।

वह एक ईसाई प्रार्थना स्थल से जुड़ी हुई है। दूसरी महिला मैरी मसीह जन्म से ईसाई है। तीसरी महिला दो माह पहले ही ईसाई बनी थी। यह सभी हर रविवार को अलग-अलग इलाकों में जाकर ईसाई धर्म का प्रचार करते थे। लोगों को इसके लिए लालच भी देते थे।

पुलिस ने अब इनके विरुद्ध FIR दर्ज कर ली है। पुलिस इनकी फंडिंग का स्रोत भी पता लगा रही है। हालाँकि, इन सभी को जमानत मिल गई है लेकिन इन्हें पुलिस ने साथ में नोटिस भी थमाया है। अब आगे इनके खिलाफ मामला चलेगा।

गौरतलब है कि 14 जुलाई, 2024 को भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र की एक बस्ती में यह पाँचों घूम घूम कर कई परिवारों को ईसाई बनने का प्रलोभन दे रहे थे। यह महिलाएँ महिलाएँ इन परिवारों को बता रहीं थी कि यदि वह ईसाई बनते हैं तो उन्हें ₹20 लाख मिलेंगे। इसके अलावा उनके बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया जाएगा। इन महिलाओं ने उन परिवारों को मकान का भी प्रलोभन दिया। महिलाओं ने बस्ती के लोगों को आर्थिक तंगी और दुखों से बचने के लिए ईसाई प्रार्थना करने को कहा।

इन लोगों ने यहाँ ईसाई धर्म साहित्य भी बाँटा। इस बीच यहीं के कारोबारी धनवीर सिंह की निगाह उनके ऊपर पड़ गई। उन्होंने जब महिलाओं से पूछताछ की तो महिलाओं ने उन्हें जवाब दिया कि वह अपने धर्म का प्रचार कर रही हैं। उन्होंने धनवीर सिंह को भी ईसाई बनने का ऑफर दे डाला।

महिलाओं ने धर्मवीर सिंह को ईसाई बनने के फायदे गिनाने चालू कर दिए। एक महिला ने बताया कि वह दो महीने पहले ही ईसाई बनी है और उसे मकान और नकद रूपए मिले हैं। महिलाओं ने कारोबारी के बच्चों को मिशनरी स्कूल में पढ़ाने के फायदे गिनाए। इसके बाद धनवीर सिंह ने पुलिस बुला ली। इन महिलाओं को पुलिस पकड़ कर ले गई थी और बाद में दोनों युवकों को भी पकड़ लिया था। अब इस पर पुलिस ने कार्रवाई की है।

‘मैं बचा क्योंकि भगवान मेरे साथ थे’ : डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के बाद पहली बार जनता को किया संबोधित, बोले- आज बता रहा हूँ दोबारा नहीं साझा करूँगा दर्दनाक पल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले के बाद पहली बार लोगों की भीड़ को संबोधित किया। उन्होंने 19 जुलाई को विस्कॉन्सिन के मिलवोकी में रिपब्लिकन नेशनल कंवेंशन में हिस्सा लेते हुए 13 जुलाई को उनके साथ घटित घटना पर बात रखी।

उन्होंने कहा कि वो सबसे पहले 13 जुलाई को रैली में जो हुआ था उससे बात शुरू करना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने अपने ऊपर हुए हमले के बाद अमेरिकी लोगों द्वारा दिए गए प्यार और समर्थन के लिए उनको आभार जताया। उन्होंने कहा, “कई लोगों ने मुझसे पूछा क्या हुआ हमें बताइए। आज मैं आप सभी को बताऊँगा कि क्या हुआ था। इसे आप मुझसे कभी दोबारा नहीं सुनेंगे क्योंकि इस बारे में बात करना बेहद दर्दनाक होता है।”

उन्होंने घटना को याद करते हुए कहा, “बटलर शहर में वो दिन बहुत खूबसूरत था। तेज म्यूजिक बज रहा था, प्रचार बहुत सही चल रहा था, मैं मंच पर पहुँचा और रैली में पहुँचे लोग समर्थन में नारे लगा रहे थे। मैंने मजबूती से, ताकत और खुशी के साथ भाषण देना शुरू किया… कुछ देर में मुझे कुछ बहुत तेज महसूस हुआ, मुझे पता चल गया कि यह एक गोली है और हम पर हमला हो रहा है।”

ट्रंप बोले, “हत्यारे की गोली मेरी जान लेने के एक चौथाई इंच के अंतर से रह गई, लेकिन मैं शांत था, सुरक्षित महसूस कर रहा था क्योंकि मेरे साथ भगवान थे। अगर मैंने आखिरी पलों में अपना सिर नहीं हिलाया होता तो हत्यारे की गोली बिल्कुल सही निशाने पर लगी होती और मैं आज रात आप लोगों के साथ नहीं होता।”

उन्होंने कहा, “मुझे आज यहाँ नहीं होना चाहिए था। सर्वशक्तिमान ईश्वर की कृपा से ही मैं इस एरिना में आपके सामने खड़ा हूँ। जनता मुझसे प्यार करती है, वे भागे नहीं। मैं आज रात यहाँ नहीं होता। हम झुकेंगे नहीं, टूटेंगे नहीं। और हम कभी पीछे नहीं हटेंगे। मैं इस राष्ट्र को अपनी आत्मा समर्पित करता हूँ।”

अपने भाषण के दौरान उन्होंने अमेरिका में रहने वाले सभी धर्म के लोगों के विकास और सुरक्षा देने की बात कही। उन्होंने अमेरिका में आ रहे अवैध प्रवासियों का मुद्दा उठाया, देश में बढ़ते क्राइम रेट की चर्चा की और जो बाइडेन के कार्यकाल में हुई गलतियों का जिक्र किया। इस भाषण के दौरान भीड़ ने भी हल्ला करके ट्रंप के साथ एकजुटता दिखाई।

दुकानदारों को लिखना ही होगा नाम, हलाल बेचा तो खैर नहीं: काँवड़ रूट के लिए CM योगी ने दिया आदेश, उत्तराखंड में भी पहचान बताकर ही होगा धंधा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि पूरे प्रदेश में दुकानदारों को दुकान पर अपना नाम लिखना होगा। यह आदेश पूरे प्रदेश के कांवड़ रूटों पर लागू होगा। इसी के साथ जो भी इन रूट पर हलाल उत्पाद बेचता पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। यूपी जैसा ही आदेश उत्तराखंड में भी जारी किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यह आदेश दिया है कि सभी कांवड़ रूट पर दुकानों के संचालक का नाम और पहचान एक प्लेट पर लिखा जाए। इससे कांवड़ ले जाने वालों को अपने खाने-पीने की शुचिता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके अलावा यह आदेश भी दिया है कि कोई भी हलाल सर्टिफाइड उत्पाद ना बेंचे। जो भी ऐसा करे उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। उत्तर प्रदेश में पहले से हलाल सर्टिफाइड उत्पादों पर प्रतिबन्ध लगाया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने यह भी आदेश दिया है कि प्रदेश के शहरी इलाकों में सावन महीने के दौरान रोशनी और साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए और इनकी व्यवस्था की जाए। इसके अलावा कांवड़ रूटों पर साफ़ पानी और पेय पदार्थ की भी व्यवस्था की जाए।

गौरतलब है इससे पहले मुजफ्फरनगर पुलिस ने जिले के कांवड़ रूट पर नाम प्रदर्शित किए जाने को लेकर एक आदेश दिया था। इस पर लिबरल और वामपंथी भड़क गए थे। मुजफ्फरनगर पुलिस ने बाद में नाम प्रदर्शित करने के आदेश को स्वैच्छिक कर दिया था। अब योगी सरकार ने यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है ताकि कांवड़ियों को कोई परेशानी ना हो और उनके पास मनपसंद जगह से खाने-पीने की छूट हो।

उत्तराखंड में भी दुकानदारों को दिखाना होगा नाम

इसी के साथ उत्तर प्रदेश वाली व्यवस्था उत्तराखंड में भी लागू की गई है। उत्तराखंड में हरिद्वार में बड़ी संख्या में कांवड़ भरने कांवडिये जल भरने आते हैं। हरिद्वार के SSP ने भी यह आदेश दिया है कि जिले में सभी कांवड़ रूट पर दुकानदार का नाम और पहचान स्पष्ट रूप से लिखी जाए।

हरिद्वार SSP प्रमेन्द्र डोबाल ने इस संबध में कहा है कि जिले के भीतर जितने भी खाने-पीने के होटल-ढाबे या ठेला लगाते हैं उन्हें मालिक का नाम, QR कोड और मोबाइल नम्बर आवश्यक रूप से लिखना होगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

हरिद्वार SSP ने कहा है कि यह आदेश दिया गया है क्योंकि बीते वर्षों में इसको लेकर विवाद हुए हैं। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पहचान छुपाएगा, उसकी दुकान हटा दी जाएगी।

हिंदू लड़की का Video किया वायरल, हिंदुओं पर ही हमला, घर छोड़कर भागे भी हिंदू: यह पाकिस्तान नहीं, झारखंड के एक गाँव में ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ का आतंक है

झारखंड के पाकुड़ में हिंदुओं के घरों पर पथराव का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले पाकुड़ में एक मुस्लिम लड़के ने हिंदू लड़की का वीडियो बनाकर वायरल करने का प्रयास किया था, जिसके बाद हिंदुओं ने इस घटना का विरोध किया और लड़के की पिटाई भी हुई। इसी घटना से नाराज होकर मुस्लिम पक्ष के लोग हिंदुओं के घरों के बाहर आ खड़े हुए और दोनों पक्षों की ओर से जमकर ईट-पत्थर चलाए गए।

खबरों के मुताबिक, घटना में कई लोगों के गंभीर रूप से चोटिल होने और कई घरों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इस दौरान पुलिस को भी निशाना बनाया गया जिसके चलते तीन पुलिसकर्मी घायल होने की बात भी कही जा रही है। वहीं भाजपा नेताओं का दावा है कि इस घटना से भयभीत होकर हिंदू इलाके से पलायन करने को तैयार हैं। गाँव वीरान हो रहा है। भाजपा नेताओं ने इन हालातों के पीछे बंगाल से आए बांग्लादेशी घुसपैठियों का हाथ बताया है। साथ ही वर्तमान सोरेन सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा नेताओं ने उठाया मुद्दा

घटना की बाबत झारखंड के गोड्डा क्षेत्र से सांसद बने डॉ निशिकांत दुबे ने कहा, “झारखंड में कॉन्ग्रेस के शासन में यह पाकुड़ का तारानगर इलामी गाँव वीरान हो गया। दोष क्या, एक नाबालिग लड़की का वीडियो बनाकर मुस्लिम लड़का ब्लैकमेल कर रहा था। विरोध करने पर पूरे हिंदू को ही गाँव छोड़ने के लिए पश्चिम बंगाल से बांग्लादेशी घुसपैठिए आ गए। झारखंड पुलिस अब पश्चिम बंगाल के लोगों के हाथों असहाय। संथालपरगना कश्मीर घाटी बनने की राह पर, जहाँ हिंदू विस्थापित हुए अपने ही देश में।”

इसके बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा, “जब रोम जल रहा था, तब नीरो बंसी बजा रहा था…आज के संदर्भ में ये बात हेमंत सोरेन पर भी सटीक लागू होती है।” उन्होंने कहा, “झारखंड का संथाल परगना क्षेत्र बांग्लादेशी घुसपैठियों के आतंक की आग में झुलस रहा है, और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भ्रमण में व्यस्त हैं। घुसपैठियों के आतंक से संथाल परगना के जनजातीय मूलवासी अब अपने घरों से ही पलायन करने को विवश हो चुके हैं।”

उन्होंने कहा, “झारखंड के हालात 90 के दशक की कश्मीर और वर्तमान बंगाल-केरल के जैसे बदतर बनते जा रहे हैं, जहाँ राज्य सरकारें मुस्लिम तुष्टिकरण की आड़ में हिन्दुओं के उपर हो रहे हमले को देखकर आँखे मूँद ले रही है। पाकुड़ के तारानगर गाँव में मुस्लिम युवक द्वारा युवती को ब्लैकमेल किए जाने का विरोध करने पर बांग्लादेशी घुसपैठयों ने हिन्दुओं के घरों पर हमले कर दिए। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चुप्पी बताती है कि उनकी सरकार का मौन समर्थन इन घुसपैठियों को प्राप्त है।” उन्होंने अंत में लिखा, “हेमंत जी, याद रखिए झारखंड को तालिबान नहीं बनने दिया जाएगा… आपकी सरकार कुछ महीनों की मेहमान है। फिर इन घुसपैठियों और उनके सरपरस्तों को भी प्रदेश से बाहर खदेड़ा जाएगा।”

पुलिस ने बताया स्थिति नियंत्रण

इस मामले में पुलिस का बयान भी आया है। प्रभात खबर की रिपोर्ट अनुसार घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहँची और मामले को शांत कराया। फिलहाल पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों समुदायों के साथ बैठक की जा रही है। स्थिति नियंत्रण में है। जल्द ही मामले को सुलझाया लिया जाएगा। वहीं जिला प्रशासन ने बयान जारी कर बताया है कि पाकुड़ के तारानगर गाँव में घटित घटना को अंजाम देने वाले दोषियों को चिह्नित कर लिया गया है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। आरोपितों को बख्शा नहीं जाएगा। सख्त कार्रवाई होगी।

अब तक 39 मौतें, स्कूल-कॉलेज-इंटरनेट बंद, सरकारी मीडिया के मुख्यालय पर हमला: ‘आरक्षण’ की आग में जल रहा बांग्लादेश, भारत ने जारी की एडवाइजरी

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर हो रहे प्रदर्शन हिंसक होता जा रहा है। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार झडपें हो रही हैं। इन दंगों में अब तक 39 मौतें हो चुकी हैं। शेख हसीना सरकार ने दंगे रोकने के लिए देश के सभी स्कूल-कॉलेज अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए हैं। प्रदर्शनकारी अब भी कई शहरों में डटे हुए हैं। इस बीच भारत ने भी बांग्लादेश में रहने वाले अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

बांग्लादेश में दंगे क्यों हो रहे

बांग्लादेश में प्रदर्शन करने वाले अधिकांश प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राएँ हैं। इनके प्रदर्शन के पीछे हाल ही बांग्लादेश के हाई कोर्ट द्वारा आरक्षण को लेकर दिया गया एक निर्णय है। बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने 1 जुलाई, 2024 को दिए गए फैसले में देश में 56% आरक्षण दोबारा से चालू करने का फैसला किया है। इसमें से 30% आरक्षण 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हिस्सा लेने वालों के वंशजों को दिया जाता है। यह 56% 2018 में शेख हसीना की सरकार ने ही खत्म कर दिया था। लेकिन अब हाई कोर्ट इसे दोबारा लागू करने के पक्ष में है।

हाई कोर्ट के इस निर्णय का छात्र छात्राएँ विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में लड़ने वाली तीसरी पीढ़ी को क्यों मिल रहा है। हाई कोर्ट के इस निर्णय पर बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने तात्कालिक रोक लगा दी है। हालाँकि, प्रदर्शनकारी अब भी शांत नहीं हैं। उनका कहना है कि इस पर तत्काल प्रभाव से सरकार स्थायी रोक लगा दे। हालाँकि, हसीना सरकार का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय का इन्तजार करेगी।

कौन कर रहा प्रदर्शन, कितनी मौतें

बांग्लादेश में हो रहे इस प्रदर्शन के केंद्र में देश भर के छात्र हैं। दरअसल, आरक्षण के खिलाफ उतरे छात्रों का कहना है कि पहले से ही बांग्लादेश में सरकारी नौकरियाँ कम हैं, ऊपर से उनमें 50% से अधिक आरक्षण प्रतिभावान उम्मीदवारों को बाहर कर रहा है। छात्र बेरोजगारी के मसले को लेकर लगातार बांग्लादेश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय ढाका यूनिवर्सिटी में छात्रों ने कब्जा जमा लिया है। ढाका के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। स्कूल-कॉलेज के छात्र सड़कों पर हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों का सत्ताधारी आवामी लीग के छात्र मोर्चा से भी टकराव हुआ। जब प्रदर्शनकारी हिंसक हुए तो उन पर पुलिस ने कार्रवाई की। इस कारण से कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। बड़ी संख्या में घायल भी हुए। इसके बाद स्थितियाँ बिगड़ती चली गईं। बताया गया कि अब तक लगभग 39 मौतें हो चुकी हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों पर भी हमला किया और तोड़फोड़ की। उन्होंने बांग्लादेश के सरकारी चैनल BTV के हेडऑफिस में आग लगा दी।

शेख हसीना सरकार का क्या रवैया

शेख हसीना सरकार लगातार प्रदर्शन शांत करने की कोशिश कर रही है। उसने बांग्लादेश के सुरक्षाबलों को ढाका समेत बाकी शहरों की सड़कों पर उतार दिया है। शेख हसीना सरकार ने देश में दंगों को भडकने से रोकने के लिए मोबाइल और इन्टरनेट सेवाओं पर भी रोक लगा दी है। इसने आदेश दिया है कि सभी स्कूल, कॉलेज, मदरसे और छात्रावास बंद कर दिए जाएँ। शेख हसीना सरकार ने छात्रों को घर लौट जाने को कहा है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की पहल भी की है।

इस पूरे प्रदर्शन में रजाकार कौन

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में प्रदर्शन के दौरान तोड़ फोड़ करने वालों को ‘रजाकार‘ कह कर संबोधित किया। रजाकार बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान का साथ देकर बंगालियों पर अत्याचार करने वालों को कहा जाता है। इसी को लेकर प्रदर्शनकारी और भड़के। उन्होंने खुद को रजाकार कह कर नारे लगाने चालू कर दिए और साथ ही शेख हसीना को तानाशाह का तमगा दे दिया। अब पूरे मामले को शांत करने की कोशिशें हो रही हैं।

भारत का इस मामले में क्या रवैया

बांग्लादेश का आंतरिक मामला होने के कारण भारत इस पर कोई टिप्पणी अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं की है। हालाँकि, भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूर कदम उठाए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद सलाह जारी की है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रदर्शनों के दौरान भारतीयों से घरों के भीतर रहने को कहा है और किसी भी आपात स्थिति में दूतावस से सम्पर्क करने को कहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में अपने दूतावास के नम्बर भी जारी किए हैं। इस बीच कई भारतीयों के वापस अपने देश लौटने की सूचना भी है।