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‘संगम शुद्ध शाकाहारी ढाबा’ बना ‘सलीम ढाबा’, ‘चाय लवर प्वॉइंट’ हो गया ‘वकील अहमद टी-स्टॉल’: योगी सरकार के आदेश के बाद काँवड़ मार्ग पर बहुत कुछ बदला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि पूरे प्रदेश में काँवड़ यात्रा मार्ग पर के दुकानदारों को अपने दुकान पर नाम लिखना होगा। इसके पहले मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने जिले के लिए यह आदेश जारी किया था। इसके बाद इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया था। हालाँकि, सीएम योगी के आदेश के बाद अब काँवड़ मार्ग पर काफी कुछ बदला हुआ नजर आने लगा है।

मुजफ्फरनगर में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे-58 पर स्थित जो दुकान कुछ दिन पहले ‘चाय लवर पॉइंट’ के नाम से हुआ करती थी, अब वह ‘वकील अहमद टी स्टॉल’ हो गया है। पुलिस के आदेश के बाद दुकान को चलाने वाले फहीम ने अपनी दुकान का नाम बदल दिया है। फहीम ने बताया कि इस निर्देश के बाद काँवड़ यात्रा के दौरान उनके काम पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है।

इसी हाइवे पर पिछले ‘संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ नाम का एक ढाबा कुछ दिन पहले तक होता था। अब इस ढाबे का नाम बदल गया। संगम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय की जगह यह ‘सलीम शुद्ध शाकाहारी भोजनालय’ है। सलीम ने खाद्य सुरक्षा विभाग में इसी नाम से इसका रजिस्‍ट्रेशन भी करवा दिया है। इस दुकान को सलीम पिछले 25 सालों से चला रहा था।

दिल्ली-देहरादून हाइवे पर ही स्थित ‘साक्षी होटल’ के मालिक लोकेश भारती ने बताया, “कल हमारे पास दो पुलिस वाले आए और कहा कि दुकान के आगे नाम लिखना है। इसके साथ ही होटल में काम करने वाले कर्मचारियों के भी नाम डिस्प्ले होना चाहिए। पुलिस के आदेश के बाद हमने दुकान पर काम करने वाले चार मुस्लिमों को फिलहाल हटा दिया है।”

दरअसल, काँवड़ यात्रियों की आस्था एवं शुद्धता की शुचिता को बनाए रखने के लिए सरकार ने यह सभी दुकानों, ढाबों, होटलों और ठेला वालों को आदेश दिया है कि वे अपनी दुकान के बाहर एक सूची लटकाएँ। उस पर दुकान के मालिक और वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों का नाम अंकित हो। इस आदेश के बाद कई दुकानों के नाम बदल गए।

आदेश हलाल सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट बेचने वालों पर भी कार्रवाई करने की बात कही गई है। आदेश में सभी दुकानों, ढाबा, ठेलों पर अपना नाम लिखना होगा, ताकि काँवड़ यात्री जान सकें कि वो किस दुकान से सामान खरीद रहे हैं। बता दें कि काँवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु शुद्धता को लेकर खानपान में काफी परहेज करते हैं। इसको लेकर ही योगी सरकार ने यह कदम उठाया है।

उत्तर प्रदेश वाली व्यवस्था उत्तराखंड में भी लागू की गई है। उत्तराखंड के हरिद्वार में बड़ी संख्या में काँवड़ में गंगाजल भरने के लिए काँवडिये आते हैं। इसको देखते हुए हरिद्वार के SSP ने आदेश दिया है कि जिले में सभी काँवड़ रूट पर दुकानदार का नाम और पहचान स्पष्ट रूप से लिखी जाए। यह आदेश हरिद्वार के SSP प्रमेन्द्र डोबाल ने दिया है।

SSP के अनुसार, जिले में जितने भी खाने-पीने के होटल-ढाबे या ठेला लगाते हैं उन्हें मालिक का नाम, QR कोड और मोबाइल नम्बर आवश्यक रूप से लिखना होगा। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति पहचान छुपाएगा, उसकी दुकान हटा दी जाएगी।

उत्तर प्रदेश में इस आदेश का राजनीतिक दलों द्वारा विरोध किए जाने पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि लोग पहचान छिपाकर धर्म भ्रष्ट करने का षड्यंत्र करते हैं। देवी-देवताओं के नाम पर ऐसा नहीं होना चाहिए। खतौली के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता विक्रम सैनी ने कहा है कि मुस्लिम के ढाबों में लहसुन-प्याज का प्रयोग होता है, जबकि इस दौरान शिवभक्त इससे परहेज रखते हैं। 

विवादित ट्रेनी IAS पूजा खेडकर के खिलाफ UPSC ने दर्ज कराई FIR, सेलेक्शन रद्द करने को लेकर माँगा जवाब: पिस्टल लहराने में माँ हो चुकी है गिरफ्तार, पिता की तलाश जारी

विवादित ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर के खिलाफ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कई कार्रवाई शुरू की है। यूपीएससी ने पूजा से जुड़े मामले की जाँच करने के बाद कई अहम कदम उठाने की घोषणा की है, जिसमें पूजा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, उनकी यूपीएसी क्वॉलिफिकेशन रद्द करने और भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में बैठने से डिबार करने की कार्रवाई तक शामिल है। इस बारे में यूपीएससी की तरफ से पीआईबी ने प्रेस रिलीज भी जारी कर पूरी जानकारी को सार्वजनिक किया है।

यूपीएससी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, सिविल सेवा में चयनित होने के लिए पूजा ने बड़ी पैमाने पर फर्जीवाड़ा और जालसाजी की है। जाँच रिपोर्ट में बताया गया है कि पूजा खेडकर ने न केवल अपना नाम बदला बल्कि अपने पिता और माता का भी नाम बदला। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी तस्वीर, अपना हस्ताक्षर, अपनी ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता बदलकर अपनी पूरी पहचान बदलकर यूपीएससी की परीक्षा दी। यही नहीं, पूजा खेडकर ने यूपीएससी परीक्षा में चयन के लिए आयोग के नियमों के तहत मान्य अधिकतम सीमा से भी अधिक बार परीक्षा दी है और उसका लाभ उठाया है।

आयोग ने बताया है कि सिविल सेवा परीक्षा-2022 की अनंतिम रूप से अनुशंसित उम्मीदवार पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के दुर्व्यवहार की विस्तृत और गहन जाँच की गई है। इस जाँच में पता चला है कि उन्होंने अपना नाम, अपने पिता और माता का नाम, अपनी तस्वीर/हस्ताक्षर, अपनी ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता बदलकर अपनी पहचान बदलकर परीक्षा नियमों के तहत अनुमेय सीमा से अधिक प्रयासों का लाभ उठाया है। वैसे, इसकी जानकारी ऑपइंडिया पहले ही दे चुका है।

इस जाँच के बाद यूपीएससी ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग ने अब पूजा खेडकर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का फैसला किया है। इस बावत उनके खिलाफ पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इसके अलावा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा-2022 के नियमों के अनुसार उनकी उम्मीदवारी रद्द करने और भविष्य की परीक्षाओं में शामिल होने पर प्रतिबंध लगाने के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

माँ गिरफ्तार, पिता की तलाश जारी

महाराष्ट्र की महिला ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर का चिट्ठा खुलने के बाद अब उनके माता-पिता के खिलाफ जाँच जारी है। पुलिस ने उनकी माँ मनोरमा खेडकर को महाड के होटल से हिरासत में ले लिया है, तो पिता दिलीप खेडकर की तलाश चल रही है। उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो अपनी जाँच कर रहा है। उन पर उनकी सर्विस में रहते हुए दो बार घूस लेने के आरोप हैं।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर का 46 साल बाद खुला रत्न भंडार: 7 अलमारी-संदूकों में भरे मिले सोने-चाँदी, जानिए कहाँ से आए इतने रत्न एवं आभूषण

ओडिशा के पुरी में स्थित महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार में रखा खजाना गुरुवार (18 जुलाई) को निकाल लिया गया। पुरी के महाराजा गजपति दिव्यसिंह देव चतुर्थ की उपस्थिति में कमिटी के 11 सदस्य मौजूद थे। यह कमिटी राज्य सरकार द्वारा गठित की गई थी। यहाँ 7 अलमारियाँ और संदूकें मिली हैं। इनमें हीरे जवाहरात और सोने हैं।

यहाँ मोटे काँच की तीन और लोहे की एक (6.50 फुट ऊंची, 4 फुट चौड़ी) अलमारियाँ मिलीं। इसके अलावा 3 फीट ऊँचे और 4 फीट चौड़े लकड़ी के दो संदूक और एक लोहे का संदूक था। सभी के अंदर कई सारे बॉक्स रखे हुए थे, जिनमें सोना रखा गया था। इन सभी बॉक्स से खजाने को निकालकर महाप्रभु के शयन कक्ष में रखा गया। इसमें लगभग 7 घंटे लग गए।

इससे पहले 14 जुलाई को 46 साल बाद रत्न भंडार को खोला गया। बाहरी रत्न भंडार में 6 संदूक मिले थे। इन संदूकों में 95.325 किलोग्राम सोना और 19.480 किलोग्राम चाँदी मिली थीं। इन सभी को यहाँ से निकाल करके स्ट्रॉन्ग रूम में शिफ्ट कर दिया गया था। रविवार 14 जुलाई को भीतरी रत्न भंडार भी खोला गया था, लेकिन यहाँ घुप्प अंधेरा और मकड़ी के जाले आदि लगे हुए थे।

काफी संख्या में चमगादड़ भी निकले। अंधेरा और गंदगी को देखते हुए समिति ने चार दिन बाद खोलने का निर्णय लिया था। इसके बाद इसे 18 जुलाई 2024 को सुबह 9:15 बजे खोला गया। यहाँ से 50.6 किलोग्राम सोना और 134.50 किलोग्राम चाँदी मिली है। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ सोने-चाँदी के 12 बॉक्स मिले हैं। इनकी कुल कीमत 100 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।

गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने बताया कि भंडार घर में ताला लगाकर चाबी सरकारी ट्रेजरी में दे दी है। बाहरी और भीतरी रत्न भंडार का सारा कीमती सामान भगवान जगन्नाथ के शयन कक्ष में है। दोनों भंडार ASI को सौंप दिए जाएँगे। वो दीवारों की लेजर स्कैनिंग करके इनकी मरम्मत का खाका तैयार करेगी। सोना और आभूषणों की लिस्टिंग और ऑडिट पर अभी फैसला नहीं हुआ है।

इसके पहले अफवाह उड़ी थी कि भीतरी रत्न भंडार में साँप और कई सुरंग देखे गए हैं। हालाँकि, यह अफवाह साबित हुआ। मंदिर प्रशासक और समिति सदस्य अरविंद पाढ़ी ने बताया कि भीतरी रत्न भंडार में न साँप दिखे और न ही किसी सुंरग का पता चला है। यह सब अफवाह थी। स्नेक हेल्पलाइन के सदस्य सुवेंदु मलिक ने बताया कि हम पूरे समय भंडार कक्ष के बाहर मौजूद रहे।

कब-कब खोला गया रत्न भंडार?

बता दें कि इस मंदिर के रत्न भंडार को पहले 1805 में चार्ल्स ग्रोम की ओर से खजाने का डॉक्यूमेंटेंशन किया गया था, उस दौरान 64 सोने चांदी के आभूषण थे। साथ ही 128 सोने के सिक्के, 1,297 चांदी के सिक्के, 106 तांबे के सिक्के और 1,333 प्रकार के कपड़े थे। उसके बाद 1905 में खोला गया था। फिर साल 1926 में इस मंदिर के रत्न भंडार को खोला गया है।

इसके बाद 1978 में इसे फिर से खोला गया और आभूषणों एवं सोने-चाँदी की सूची बनाई गई। इस दौरान इसमें करीब 128 किलोग्राम सोना 222 किलोग्राम चाँदी मिले थे। इस दौरान सोने-चाँदी के कई वस्तुओं का आंकलन ही नहीं किया गया था। कहा जाता है कि साल 1985 में भी रत्न भंडार को खोला गया था, लेकिन लिस्ट को अपडेट नहीं किया गया।

ओडिशा हाईकोर्ट ने साल 2018 में राज्य सरकार को रत्न भंडार खोलने के लिए निर्देश दिए थे। हालाँकि, 4 अप्रैल 2018 को कोर्ट के आदेश पर जब 16 लोगों की टीम रत्न भंडार के कक्ष तक पहुँची थी। हालाँकि, उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था, क्योंकि ये दावा किया गया कि रत्न भंडार की चाबी खो गई है। जब चाबी नहीं मिली तो हंगामा हुआ।

इसके बाद ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 4 जून 2018 को इस मामले में न्यायिक जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। जाँच कमिटी ने 29 नवंबर 2018 को चाबी से जुड़ी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, लेकिन सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया। रत्न भंडार की चाबी का भी कुछ पता नहीं चल सका। बता दें कि रत्न भंडारे में दो कमरे हैं। एक बाहरी और आंतरिक कमरा है।

बाहरी कमरे की 3 चाबियाँ थीं, जिनमें से एक गजपति महाराज, दूसरी मंदिर प्रशासन और तीसरी एक सेवक को सौंपा गया था। वहीं आंतरिक कमरे की एक चाबी गायब थी। दरअसल, आंतरिक रत्न भंडार खोलने के लिए गठित कमिटी के अध्यक्ष सेवानिवृत न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ ने गजपति महाराजा दिव्य सिंह देव से अनुरोध किया था कि वे रत्न भंडार में उपस्थित रहकर प्रक्रिया की निगरानी करें।

किसने दिए मंदिर में इतने आभूषण

राजतंत्र में राजा-महाराजा विभिन्न क्रिया-कलापों के लिए मंदिरों को दाना दिया करते थे। आम जनता और धनाढ्य लोग भी मंदिर में दान देते रहे हैं। कहा जाता है कि 9वीं सदी शुरू होकर 10वीं में बनकर तैयार हुए जगन्नाथ मंदिर में तत्कालीन क्षत्रिय महाराजा अनंग भीमदेव ने कई लाख माधा सोना दान किया था। एक तोला सोने में दो माधा होता है, यानी एक माधा पाँच ग्राम का होता है।

इस हिसाब से महाराजा ने करीब 5 किलोग्राम सोना मंदिर को दान किया था। इसके अलावा भी कई क्षत्रिय शासकों ने भगवान जगन्नाथ को सोना एवं बहुमूल्य रत्न अर्पित किया था। 15वीं सदी में सूर्यवंशी क्षत्रिय महाराजा कपिलेंद्र देव ने मंदिर में सोना, चाँदी और कई कीमती हीरे आदि दान किए थे। कहा जाता है कि इन सामानों को कई हाथियों पर लादकर मंदिर लाया गया था।

इनके अलावा महाराजा रणजीत सिंह ने भी इस मंदिर को काफी सोना दान किया था। महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी वसीयत में कोहिनूर हीरे को जगन्नाथ मंदिर को देने की बात कही थी। इसके बाद भी राजाओं ने यहाँ दान दिया। दान में सोना-चाँदी मिलने के बाद मंदिर में ‘सुना बेशा’ की परंपरा शुरू हुई। इस परंपरा के तहत भगवान जगन्नाथ का सोने से श्रृंगार किया जाता है।

मालदीव से सिर्फ 50 मील दूर मिनिकॉय आईलैंड पर भारत बनाएगा एयर स्ट्रिप, लक्षद्वीप में 2 नई हवाई पट्टियों से अरब सागर में भारत का बढ़ेगा दबदबा: चीन की अकड़ होगी ढीली

अरब सागर में अपना दबदबा बढ़ाने और पड़ोसियों खासकर मालदीव जैसे देशों पर से निगरानी जैसी निर्भरता को खत्म करने के लिए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। भारत ने लक्षद्वीप में 2 हवाई पट्टियों के निर्माण की योजना बनाई है। ये हवाई पट्टियाँ सैन्य और नागरिक दोनों तरह की उड़ानों के लिए होंगी। खास बात ये है कि इनमें से एक हवाई पट्टी मिनिकॉय द्वीप पर तैयार की जाएगी, जो मालदीव की सीमा से महज 50 मील की दूरी पर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने गुरुवार (18 जुलाई 2024) को एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। उन्होंने बताया कि सैन्य मामलों के विभाग के नेतृत्व में तीनों सेनाओं का प्रस्ताव मिनिकॉय द्वीप में एक नया एयरबेस बनाने और भारत के पश्चिमी हिस्से में अरब सागर में अगत्ती द्वीप पर मौजूदा एयरफील्ड का विस्तार करने का है। दोहरे उद्देश्य वाले ये हवाई अड्डे, जिनका उपयोग नागरिक एयरलाइनों द्वारा भी किया जाएगा, सभी प्रकार के लड़ाकू और परिवहन विमानों के साथ-साथ लंबी दूरी के ड्रोनों की तैनाती और संचालन करने में सक्षम होंगे और इस क्षेत्र में भारतीय सेनाओं को बढ़त प्रदान करेंगे।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब चीनी नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है और इस क्षेत्र में पाकिस्तानी नौसेना के साथ मिलकर काम कर रही है। अब इन दोनों पट्टियों के निर्माण के बाद भारत की पकड़ इन इलाकों पर मजबूत हो जाएगी और वो आस-पास के इलाकों पर भी निगरानी में सक्षम हो जाएगा। इन पट्टियों का उपयोग सेना के तीनों अंगों के साथ ही तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) भी करेगा। कोस्ट गार्ड ने ही इन पट्टियों को बनाने का सुझाव रक्षा मंत्रालय को दिया था।

सरकार द्वारा पास किए गए प्रस्ताव के मुताबिक, मिनिकॉल हवाई पट्टी का इस्तेमाल मूल रूप से एयरफोर्स करेगी। मिनिकॉय में हवाई अड्डा रक्षा बलों को अरब सागर में निगरानी के अपने क्षेत्र का विस्तार करने की क्षमता भी प्रदान करेगा। मिनिकॉय में हवाई अड्डा क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा देगा, जैसा कि सरकार ने योजना बनाई है।

1 साल में बढ़े 80 हजार वोटर, जिनमें 70 हजार का मजहब ‘इस्लाम’, क्या याद है आपको मंगलदोई? डेमोग्राफी चेंज के खिलाफ असम के CM ने यूँ ही नहीं किया है शंखनाद

बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ती तादाद को नकारना देश के लिए खतरे से कम नहीं है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार इसके खिलाफ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो 2044 तक राज्य इस्लाम बहुल हो जाएगा। मुख्यमंत्री बिस्वा की ये चेतावनियाँ निराधार कतई नहीं है। उन्हें अपने राज्य के हालात मालूम हैं… इसी राज्य ने 1977 और 1978 के बीच में बांग्लादेशियों की ऐसी घुसपैठ कराई गई थी जिसे देख हर कोई सन्न रह गया था।

किसी को समझ नहीं आया था कि एक साल में एक ही राज्य की एक लोकसभा सीट पर 80000 वोटर कैसे बढ़े। तमाम शिकायतें हुई। सवाल उठे। तब समझ आया कि ये अचानक हुई वृद्धि बांग्लादेश से हुई घुसपैठ का नतीजा है।

असम में एक साल में बढ़े 80 हजार वोट

दरअसल, साल 1977 जब इमरजेंसी के बाद पहली बार चुनाव हुए तो 14 सीटों में 3 सीट जनता पार्टी के हिस्से आई। इनमें एक सीट मंगलदोई की थी जिसे हीरा लाल (तिवारी) ने जीता था। जानकारी मिलती है कि इन चुनावों तक मंगलदोई में 5,60, 297 मतदाता थे। हालाँकि एक साल बाद जब हीरा लाल का निधन हो गया तो उपचुनाव कराए गया और एक साल से थोड़े से अधिक समय में वोटर लिस्ट) अपडेट की गई तो मतदाताओं की यह संख्या 80,000 बढ़ गई थी! इनमें से लगभग 70,000 मतदाताओं का मजहब इस्लाम था।

साभार: द लास्ट बैटल आफ सरायघाट

अजीत झा अपनी रिपोर्ट में ‘द लास्ट बैटल ऑफ सरायघाट’ किताब से इस घुसपैठ की जानकारी देते हैं। किताब में लिखा है अचानक इलाके में लोगों की संख्या ये जो 15% का इजाफा हुआ था उसे मंगलदोई में कॉन्ग्रेस ने इंपोर्ट किया था। आम नागरिकों ने इनके खिलाफ शिकायत भी दी थी। बाद में 70 हजार में से केवल 26900 ही टिक पाए थे। बाकी सब अवैध घुसपैठिए साबित हुए थे।

1977 से लेकर 2024 में हालात बदले नहीं हैं बल्कि और भयावह हुए हैं। असम मुख्यमंत्री जो खुद इस्लामी कट्टरपंथ और बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ सक्रिय होकर काम कर रहे हैं वो न्यूज चैनल से बातचीत में राज्य की स्थिति को स्वीकार रहे हैं। वो स्पष्ट कहते हैं कि 2044 तक अनुमान है असम मुस्लिम बहुल हो जाएगा जबकि बंगाल 2051 तक।

असम मुख्यमंत्री हालातों पर चिंता जताते हुए कहते हैं जिस तरह से असम में हिंदू आबादी के मुकाबले मुस्लिम आबादी बढ़ रही है, उसे देखते हुए लग रहा है कि 20 साल बाद राज्य की कुल आबादी में मुसलमानों की संख्या 50 फीसदी हो जाएगी। इसके साथ ही असम जम्मू-कश्मीर के बाद देश में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला दूसरा राज्य बन जाएगा।

उन्होंने अपनी बात रखते हुए असम के उन इलाकों का उदाहरण दिया जहाँ मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ती जा रही हैं। इन इलाकों में एक धुबरी इलाका भी है जहाँ की मुस्लिम आबादी 85 फीसद पहुँच गई है। वहीं पूरे राज्य की बात करे तो राज्य में मुस्लिम आबादी 40 प्रतिशत तक पहुँच गई है। जिन्हें ऐसा लगता है कि ये संख्या कम है या फिर सामान्य है उन्हें जानना जरूरी है कि इसी असम में 1951 तक मुस्लिमों की संख्या केवल 12 फीसद थी।

सीएम सरमा इस जनसांख्यिकी बदलाव को राजनैतिक मुद्दा नहीं, जीवन और मृत्यु का मामला बताते हैं। वो बताते हैं कि राज्य में हिंदू बहुल इलाके धीरे-धीरे मुस्लिम बहुल हो रहे हैं। वहीं असम के सीएम ने यह भी बताया कि कैसे बांग्लादेश और पड़ोसी देशों से आए प्रवासी यहाँ तेजी से बढ़ रहे हैं और इनके कारण उन संसाधनो पर दबाव पड़ रहा है जो हकीकत में असम की मूल जनता के लिए होने चाहिए।

1978 से उठ रहा घुसपैठ का मुद्दा

असम में हो रहे ये जनसांख्यिकी बदलाव को लेकर चिंता 1977-78 के बाद से अब तक मे कई बार उठाई जा चुकी है। साल 1988 में असम के राज्यपाल एसके सिन्हा ने तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायण को पत्र लिखकर असम में हो रही अवैध घुसपैठ के मुद्दे की रिपोर्ट दी थी। पत्र में बांग्लादेशियों की बढ़ती तादाद और जनसांख्यिकी में होते बदलाव की ओर ध्यान दिलाया गया था। पत्र में कहा गया था कि ये बदलाव असमिया लोगों की पहचान और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए गंभीरता खतरा है।

2004 में, भारत के गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने भारतीय संसद में कहा था कि, 31 दिसंबर 2001 तक देश में 12 मिलियन अवैध बांग्लादेशी थे, जिनमें से 5 मिलियन असम में थे। वहीं साल 2010 में मनोहर पार्रिकर रक्षा अध्य्यन एवं विश्लेषण संस्थान पर प्रकाशित रिपोर्ट में भी इस मुद्दे को उठाया गया था। नम्रता गोस्वामी की रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे असम राज्य को अवैध प्रवासियों का मुद्दा दशकों से परेशान कर रहा है। वहीं असमिया लोगों को चिंता यह है कि इस तरह की घुसपैठ कैसे उनके जीवन जीने के तरीके को प्रभावित करेगी।

अब इन्हीं लोगों की तरह हिमंता बिस्वा सरमा ने भी तथ्यों को आधार बनाते हुए अपनी चिंता को जाहिर किया है। लेकिन कुछ लोग इस पर भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा मुद्दा छेड़ा ही क्यों। इस पर हिमंता सरमा कहते हैं कि उन्होंने जो भी कहा है वो तथ्यों और आँकड़ों के आधार पर कहा है। अगर किसी को उन्हें झूठा साबित करना है तो तथ्यों को गलत बता सकता है, लेकिन इस सच को नहीं पलटा जा सकता कि राज्य में मुस्लिम बढ़ रहे हैं। उन्होंने अपने राज्य के साथ-साथ बंगाल और झारखंड में भी मुस्लिमों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है।

5 साल में 123% तक बढ़ गए मुस्लिम वोटर, फैक्ट फाइडिंग रिपोर्ट से सामने आई झारखंड की 10 सीटों की जमीनी हकीकत: बाबूलाल का CM को पत्र- ST महिलाओं से जबरन शादी कर डेमोग्राफी बदल रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए

झारखंड की 10 विधानसभा सीटों के कई बूथ पर वोटरों की संख्या में पाँच साल में 100% से अधिक वृद्धि हुई है। यह खुलासा झारखंड भाजपा ने एक रिपोर्ट में किया है। वोटर बढ़ने वाले अधिकांश वह इलाके हैं जो संताल परगना में आते हैं। इन इलाकों में भारी बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ की बात लगातार सामने आई है।

भाजपा ने इस रिपोर्ट के आधार पर झारखंड चुनाव आयोग से जाँच की माँग की है। भाजपा ने कहा कि अगर ढंग से जाँच हुई तो डेमोग्राफी बदलने की बड़ी साजिश सामने आएगी। भाजपा की यह रिपोर्ट एक तीन सदस्यीय समिति ने तैयार की है, इस समिति के मुखिया प्रदेश उपाध्यक्ष अवधेश कुमार हैं। यह पूरी रिपोर्ट ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

भाजपा की रिपोर्ट में क्या सामने आया

भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची और 2024 की मतदाता सूची का अध्ययन किया है। भाजपा ने पाया है कि झारखंड की 10 विधानसभा सीटों के कुछ बूथ पर (विशेष कर मुस्लिम आबादी वाले बूथ) पर वोटरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि पाँच वर्षों में हुई है।

भाजपा की रिपोर्ट में सामने आया है कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में वोटरों की संख्या में यह अप्रत्याशित बढ़त 20% से 123% तक की है। यह बढ़त इन 10 विधानसभा के कुल 1467 बूथ पर हुई है। भाजपा ने कहा है कि सामान्यतः पाँच वर्षों में 15% से 17% की वृद्धि होती है, इसीलिए यह वृद्धि असामान्य है। भाजपा ने यह भी बताया है कि हिन्दू आबादी वाले बूथ पर वोटरों की संख्या में बढ़त मात्र 8% से 10% हुई है। भाजपा ने यह भी बताया है कि कई बूथ पर हिन्दू मतदाता घट भी गए हैं।

डेमोग्राफी बदलने की साजिश

भाजपा की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इस इन भी बूथ की जाँच हो तो डेमोग्राफी बदलने की एक साजिश सामने आएगी। भाजपा ने आरोप लगाया है कि विदेशी घुसपैठियों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपना नाम वोटरों की सूची में दर्ज करवाया गया है, जिसके लिए अवैध रूप से कागज बनवाए गए हैं। भाजपा ने माँग की है कि इस मतदाता सूची में फर्जी पाए जाने जाने वाले वोटरों पर जनप्रितिनिधि कानून के तहत कार्रवाई हो।

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया है कि कई बूथों पर सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से बहुसंख्यक आबादी के नाम काट दिए गए हैं। इस कारण से यह 2024 लोकसभा चुनाव में वोट डाल नहीं पाए। भाजपा ने इस संबंध में झारखंड चुनाव आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपी है और जाँच की माँग की है।

राजमहल विधायक ने भी की थी जाँच की माँग

जहाँ अब झारखंड की 10 विधानसभा सीटों पर अप्रत्याशित रूप से मतदाता बढ़ने की बात सामने आई है, वहीं इससे पहले राजमहल के विधायक अनंत ओझा ने भी इस संबंध में शिकायत की थी। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया था कि उनकी विधानसभा के 187 नंबर बूथ पर 2019 में 672 वोट थे। 2024 में यह बढ़ कर 1461 हो गए। यानी इसमें लगभग 117% की वृद्धि हुई। इसी के साथ सरकारी मदरसा बूथ पर 754 वोट बढ़ कर 1189 हो गए। ऐसे कम से कम 73 बूथ इस विधानसभा के भीतर हैं जहाँ की वोटर वृद्धि असामान्य है।

विधायक अनंत ओझा ने ऑपइंडिया को बताया था कि यह सभी बूथ मुस्लिम आबादी के बीच स्थित हैं। इसी इलाके में हिन्दू आबादी वाले 17 बूथ पर इसी दौरान आबादी कम हो गई है। उन्होंने इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग से भी शिकायत की थी। राज्य चुनाव आयोग ने इस मामले में एक टीम बनाकर एक्शन लेने की बात कही थी।

घुसपैठ की समस्या पर बाबूलाल मरांडी ने लिखा पत्र

भाजपा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण यहाँ की आदिवासी जनसंख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा है कि घुसपैठिए यहाँ तेजी से बढ़ रहे है जिससे आदिवासी जनसंख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि घुसपैठिए यहाँ महिलाओं से विवाह कर जमीनें कब्जा रहे हैं।

उन्होंने आशंका जताई है कि आने वाले समय में यहाँ आदिवासी अल्पसंख्यक हो जाएँगे। उन्होंने इसके समर्थन में कुछ आँकड़े भी दिए हैं। मरांडी के दिए आँकड़ों में बताया गया है कि 1951 में संताल परगना में 41% आदिवासी आबादी थी जो कि 2011 में 28% ही बची है। उन्होंने अपने पत्र में बताया है कि इस बीच मुस्लिमों की आबादी 9.4% से 22% पहुँच चुकी है। झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस मामले को उठाया है।

कितनी गंभीर है घुसपैठ की समस्या

मार्च, 2024 में आजतक की रिपोर्ट में बताया गया था कि यहाँ बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिए, पश्चिम बंगाल के रास्ते आते हैं। इसके बाद वह बस जाते हैं। इनमें से कुछ आदिवासियों की लड़कियों को निशाना बनाते हैं। जब लडकियाँ उनके दिखावे में फंस जाती हैं तो उनसे शादी कर ली जाती है।

शादी के बाद लड़की की कागजों में पहचान आदिवासी के तौर पर ही रहने दी जाती है। इसके बाद उस लड़की के नाम पर जमीन ली जाती है या फिर उसकी ही जमीन कब्जा ली जाती है। रिपोर्ट में बताया गया था कि यह सब करने के लिए बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को फंडिंग मिलती है।

लड़की की पहचान आदिवासी रखने के पीछे सरकारी फायदे लेने के मकसद रहता है। इसके अलावा कई जगह उन लड़कियों को चुनाव भी लड़वाया गया, जिन्होंने मुस्लिमों से शादी की। बांग्लादेशी घुसपैठियों की यह समस्या शादी करने और जमीन हथियाने तक सीमित नहीं रही है। इसका कनेक्शन लोकसभा चुनाव तक से जुड़ा है।

नाम कुलदीप, काम हिंदुओं को ईसाई बनाना: मुरादाबाद में लालच दे धर्मांतरण करवा रहे 4 गिरफ्तार, महाराजगंज में धर्म परिवर्तन पर बजरंग दल उबला

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और महाराज गंज से ईसाई मिशनरियों से जुड़ी खबरें सामने आई हैं। मुरादाबाद में हिंदूवादी कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने उत्तराखंड के पादरी कुलदीप समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से तीन स्थानीय लोग हैं, जो अपने घरों में प्रार्थना सभा का आयोजन कराते थे और लोगों को धर्मांतरण का लालच देते थे। वहीं, महाराज गंज में हिंदू वादी कार्यकर्ताओं ने ईसाई मिशनरियों के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर पुलिस थाने का घेराव किया और कार्रवाई की माँग की है। इस मामले में एक महिला ने एफआईआर दर्ज कराई है कि लोगों को बहला-फुसला कर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।

मुरादाबाद में पादरी कुलदीप समेत 4 गिरफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा प्रखंड के रम्मनवाला गाँव से पादरी कुलदीप समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कुलदीप उत्तराखंड के उधमसिंहनगर का रहने वाला है। वहीं, रम्मनवाला गाँव के ही अमरजीत, जयपाल और मुकेश को भी गिरफ्तार किया गया है। इनके खिलाफ लोगों को ‘सहायता’ देने की आड़ में लोगों का धर्म परिवर्तन कराने के आरोप हैं। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा मामला उठाए जाने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की। मुरादाबाद वीएचपी के महासचिव पंकज सिंह की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

ठाकुरद्वारा के सर्किल ऑफिसर राजेश कुमार ने बताया कि यह घटना 12 जुलाई की रात को रम्मनवाला गाँव में हुई, जब कुछ लोग ईसाई मजहबी सभा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि दो हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप किया और पुलिस से संपर्क कर वित्तीय और अन्य लाभ देने के बहाने जबरन धर्म परिवर्तन की शिकायत की।

एफआईआर के मुताबिक, आरोपितों ने अबतक 15 परिवारों के 60 लोगों को ईसाई बनाया है और वो अन्य लोगों को भी ईसाई बना रहे थे। विहिप पदाधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में बताया गया है कि आरोपित हिंदुओं को ईसाई धर्म अपनाने के बदले में पैसे, रेफ्रिजरेटर, टीवी, साइकिल, मोटरसाइकिल और सिलाई मशीन मुहैया कराते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने वाले लोगों को 25,000 रुपये का इनाम दिया जाता है, जबकि उनका धर्म परिवर्तन कराने वाले पादरी को ईसाई धर्म में शामिल होने वाले प्रत्येक गैर-ईसाई के लिए 35,000 रुपये मिलते हैं। इस मामले में शनिवार (13 जुलाई 2024) को ठाकुरद्वारा थाने में बीएनएस की धारा 351(2) व 351(3) के तहत अपमानजनक और आपराधिक धमकी के साथ ही उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3 व 5(1) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

महाराजगंज में ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ रोष

मुरादाबाद ही नहीं, बल्कि महाराज गंज जिले में भी क्रिश्चियन मिशनरी बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। महाराज गंज के सिंदुरिया थाना इलाके में अवैध तरीके से धर्मपरिवर्तन कराने वाले क्रिश्चियन मिशनरी को हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया, तो उन्हें छोड़ दिया गया, जिसके बाद हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने थाने में जमकर हंगामा काटा। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (16 जुलाई 2024) को बजरंग दल, विश्व हिंदू महासंघ, गौ रक्षा प्रकोष्ठ से जुड़े कार्यकर्ता सिंदुरिया थाना पहुँचे। उन्होंने ईसाई मिशनरियों द्वारा अवैध रूप से धर्म परिवर्तन कराने के मामलों को उठाया और उप-निरीक्षक प्रवीण कुमार सिंह से सवाल भी पूछा कि जिन ईसाई मिशनरियों को हिंदू कार्यकर्ताओं ने उन्हें सौंपा था, उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। हालाँकि उनके सवालों के जवाब पुलिस वालों से मिलते नहीं दिखे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में बजरंग दल के विश्व हिंदू परिषद (बजरंग दल) के जिला संयोजक विवेक श्रीवास्तव और कार्यकर्ताओं ने सिंदुरिया पुलिस पर ईसाई मिशनरियों के सहयोग का आरोप लगाया। विकेक श्रीवास्तव ने कहा कि रविवार (14 जुलाई 2024) को सिंदुरिया पुलिस को सूचना दी गई थी कि अरनहवा गाँव में धर्म परिवर्तन का कार्य हो रहा है, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने उप निरीक्षक प्रवीण कुमार सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब (हिंदू कार्यकर्ता) ईसाई मिशनरियों को पकड़ने जाते है तो आरोपितों को बुला कर एक घंटे थाने पर बैठा लिया जाता है और फिर छोड़ दिया जाता है।

इस दौरान हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभा रहा है। ऐसे में हिंदूवादी संगठन अपने तरीके से चीजों को सही करने लगेंगे, तो दिक्कतें बढ़ जाएँगी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से ईसाई मिशनरियों के खिलाफ एक्शन लेने की अपील भी की।

इस मामले में एक महिला ने बहलाफुसला कर अवैध धर्मांतरण के मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई है। एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। जिसमें भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि किसी भी तरह की गिरफ्तारी की सूचना नहीं मिल पाई है। इस मामले में सिंदुरिया थाना प्रभारी से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखने तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। जैसे ही इस मामले में कोई अपडेट आता है, हर खबर को अपडेट करेंगे।

सिक्योरिटी अपडेट से बैठ गई माइक्रोसॉफ्ट, दुनियाभर में बैंक से लेकर बाजार पर सीधा असर: ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया में न्यूज प्रसारण बंद, भारत में भी उड़ानें बाधित

तकनीक हमारे जीवन को जीतना आसान बनाता है, उतना ही कभी-कभी मुश्किल में भी डाल देता है। दुनिया की प्रसिद्ध टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर में खराबी आने के बाद बैंकिंग, शेयर मार्केट, विमानन, मीडिया आदि क्षेत्रों के ठप पड़ने के कारण दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। माइक्रोसॉफ्ट में खराबी आने के कारण Window पर काम करने वाले सिस्टम को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।

माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर में खराबी के कारण कई उद्योगों को सेवाएँ देने वाली साइबर सुरक्षा फर्म क्राउडस्ट्राइक शुक्रवार सुबह दुनिया भर के कुछ हिस्सों में बंद हो गई। इसके कारण समाचार प्रसारण रुक गए। लंदन स्टॉक एक्सचेंज सहित दुनिया भर के एक्सचेंजों में ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। इतना ही नहीं, इसका अच्छा-खासा प्रभाव विमानन क्षेत्र पर भी पड़ा है। बड़ी संख्या में उड़ाने प्रभावित हुई हैं।

भारत में भी इसका असर देखने को मिला है। देश की 5 एयरलाइन– इंडिगो, स्पाइसजेट, अकासा एयर, विस्तारा और एयर इंडिया एक्सप्रेस की बुकिंग, चेक-इन और फ्लाइट अपडेट सर्विस बुरी तरह से प्रभावित हुई है। एयरपोर्ट पर लोगों को सर्विसेज नहीं मिल रहे हैं। जिन देशों में सबसे अधिक असर पड़ा है उनमें अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड प्रमुख हैं।

साइबर सिक्योरिटी के काम नहीं करने के कारण कई कंपनियों में वायरस अटैक की बात भी कही जा रही है। कहा जा रहा है कि हैदराबाद और बेंगलुरु में ज्यादातर कॉर्पोरेट कंपनी में वायरस अटैक की बात कही जा रही है। सिस्टम ब्लू स्क्रीन में आने के बाद रीस्टार्ट हो रहे हैं। हैदराबाद में कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को अगले 2 घंटे तक सिस्टम ऑफ रखने को कहा है।

इस समस्या के कारण लोग शेयर ट्रेडिंग नहीं कर पा रहे हैं। बैंकिंग सेवाओं पर भी असर पड़ा है। मीडिया में दिक्कत आ रही है। ब्रिटेन में स्काई न्यूज चैनल का प्रसारण बंद हो गया है। ऑस्ट्रेलिया की टेलीकॉम कंपनी टेल्स्ट्रा ग्रुप ने बताया उसे भी व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि, भारत का स्टॉक एक्सचेंज NSE का कहना है कि उस पर इस समस्या का इम्पैक्ट नहीं पड़ा है।

इस समस्या पर भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने कहा, “माइक्रोसॉफ्ट 365 और माइक्रोसॉफ्ट सुइट का इस्तेमाल लाखों भारतीय करते हैं। इस प्लेटफ़ॉर्म पर कोई भी रुकावट कई कंपनियों के कारोबार और संचालन को बाधित करती है। मुझे उम्मीद है कि माइक्रोसॉफ्ट जल्द ही अपनी सेवाएँ बहाल कर देगा। भारत सरकार माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिलकर सेवाएँ की जल्दी बहाली सुनिश्चित करेगी।”

क्या है समस्या?

लोगों का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट विंडोज पर नीली स्क्रीन दिखाई दे रही है। इसके साथ ही सिस्टम ऑटोमैटिकली रीस्टार्ट या शटडाउन हो गए हैं। डेल टेक्नोलॉजीज का कहना है कि यह समस्या हाल में क्राउडस्ट्राइक अपडेट के कारण हुई है। CrowdSrike साइबर सिक्योरिटी प्लेटफ़ॉर्म है, जो साइबर सिक्योरिटी का समाधान उपलब्ध कराती है।

CrowdSrike का प्रमुख काम कंपनियों को हैकर्स, साइबर अटैक, रैंसमवेयर और डेटा लीक से बचाना है। यही वजह है कि इस कंपनी के प्रमुख कस्टमर दुनिया भर के बड़े बैंक, यूनिवर्सिटी और सरकारी एजेंसियाँ भी हैं। हाल के दिनों में हैकर्स के बढ़ते हमलों की वजह से कंपनियों की CrowdStrike जैसे साइबर सिक्योरिटी फर्म पर निर्भरता बढ़ी है।

क्राउडस्ट्राइक के अपडेट के कारण माइक्रोसॉफ्ट के एज्योर क्लाउड और माइक्रोसॉफ्ट 365 सर्विसेज में परेशानी आई है। माइक्रोसॉफ्ट ऐज्योर क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है। ये एप्लिकेशन और सर्विसेज को बनाने, डिप्लॉय और मैनेज करता है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट 365 प्रोडक्टिविटी सॉफ्टवेयर है, जिसमें वर्ड, एक्सेल, पावरपॉइंट, आउटलुक और वन नोट जैसे लोकप्रिय एप्लिकेशन शामिल हैं।

इस समस्या को लेकर माइक्रोसॉफ्ट ने भी बयान जारी किया है। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा, “हमें समस्या की जानकारी है और हमने कई टीमों को इसे सुलझाने में लगाया है। हमने इसके कारण का पता लगा लिया है।” माइक्रोसॉफ्ट ने कहा है कि इस समस्या को जल्दी को सुलझा लिया जाएगा।

जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी… हिंदुओं के त्योहार आए करीब तो कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने ग्राउंड पर बैठा दिया ‘पहरा’, जिन मैदानों में हुईं रैली उनके गैर-शैक्षणिक इस्तेमाल पर रोक

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने कृष्ण जन्माष्टमी और गणेशोत्सव से पहले विवाद खड़ा कर दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब दक्षिण कन्नड़ जिला स्कूल शिक्षा निदेशक ने 16 जुलाई 2024 को एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें मैंगलोर में स्कूलों के खेल के मैदानों का गैर-शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करने पर रोक लगा दी गई।

दक्षिण कन्नड़ जिला स्कूल शिक्षा निदेशक ने सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को एक परिपत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि स्कूल के मैदान और इमारतों का इस्तेमाल गैर-शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि शिक्षा विभाग के पास मंजूरी के लिए कोई प्रस्ताव भी ना भेजा जाए।

सर्कुलर

सर्कुलर में साफ चेतावनी दी गई है कि स्कूल परिसर में शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा किसी भी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यदि इस आदेश का उल्लंघन किया जाता है तो संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक जिम्मेदार होंगे। शिक्षा विभाग के आदेश के बाद स्कूल प्रबंधन बोर्ड ने गणेशोत्सव और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

इस प्रकार सार्वजनिक तौर पर आयोजित होने वाले गणेशोत्सव समारोह का कार्यक्रम बाधित हो जाएगा। गणेशोत्सव और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले कर्नाटक सरकार के इस तानाशाही वाले सर्कुलर निकाले जाने के बाद हिंदू संगठनों में भारी रोष है। इस पर राज्य की मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी आपत्ति जताई है।

भाजपा और हिंदू संगठनों का कहना है कि दक्षिण कन्नड़ जिले के कई सरकारी स्कूलों के मैदान में कई वर्षों से गणेशोत्सव मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार शिक्षा विभाग ने एक नए आदेश के जरिए गणेशोत्सव समारोह को रोकने का फैसला किया है। बेलथांगडी से भाजपा विधायक हरीश पूँजा ने माँग की है कि सरकार इस आदेश को तुरंत वापस ले।

सोशल मीडिया साइट X पर लोग कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार को इसके लिए लताड़ लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सीएम सिद्धारमैया की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने स्कूलों और कॉलेज के मैदानों में गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी और सरस्वती पूजा रोकने की साजिश रची। लोगों का यह भी कहना है कि सिद्धारमैया ने चुनावों के दौरान अपनी रैलियों के लिए उन्हीं मैदानों का इस्तेमाल किया था।

कोई वकील, कोई गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन… पहले खुद ईसाई बने, फिर दूसरों को बनाने में जुटे: धर्म परिवर्तन के लिए ₹20 लाख का दे रहे थे ऑफर

मध्य प्रदेश के भोपाल में गरीब बस्ती में जाकर ईसाई धर्मांतरण के लिए ₹20 लाख का ऑफर करने वाले पाँच लोग पुलिस के शिकंजे में आए हैं। पुलिस जाँच में इनके बारे में कई जानकारियाँ सामने आई हैं। अब पुलिस इनके फंडिंग के तार खोजने में जुड़ी हुई है।

भोपाल की गरीब बस्तियों में घूम-घूम कर ईसाई बनने का ऑफर देने वाले पाँच लोगों को हाल ही में पुलिस ने पकड़ा था। इनमें तेन महिलाएँ और 2 पुरुष थे। मौके पर तीन महिलाएँ पकड़ी गई थीं जबकि दोनों पुरुष भागने में कामयाब हो गए थे। बाद में इन्हें भी दबोच लिया गया था।

ईसाई धर्मांतरण करवाने वाली महिलाओं का नाम मैरी बस्तवाल, मैरी मसीह और सुमन मसीह है जबकि पुरुषों का नाम बद्राप्र्साद और चंद्रभान हैं। इनमें से बद्राप्रसाद 55 साल का है और वह तेलंगाना का रहने वाला वकील है। उसने पुलिस को बताया है कि वह 2002 में ईसाई बना था और उसे कोई तब पैसा नहीं मिला था, वह लगातार लोगों को ईसाई बनाने के मिशन में जुटा है।

वहीं दूसरा पुरुष चंद्रभान बिहार का रहने वाला है। उसने 2016 में सुमन पासवान उर्फ़ सुमन मसीह से शादी की थी। वह अपनी पत्नी के प्रभाव में आकर कन्वर्ट हो गया। इनके साथ पकड़ी गई महिला मैरी बस्त्वाल मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक हॉस्टल में वार्डन है।

वह एक ईसाई प्रार्थना स्थल से जुड़ी हुई है। दूसरी महिला मैरी मसीह जन्म से ईसाई है। तीसरी महिला दो माह पहले ही ईसाई बनी थी। यह सभी हर रविवार को अलग-अलग इलाकों में जाकर ईसाई धर्म का प्रचार करते थे। लोगों को इसके लिए लालच भी देते थे।

पुलिस ने अब इनके विरुद्ध FIR दर्ज कर ली है। पुलिस इनकी फंडिंग का स्रोत भी पता लगा रही है। हालाँकि, इन सभी को जमानत मिल गई है लेकिन इन्हें पुलिस ने साथ में नोटिस भी थमाया है। अब आगे इनके खिलाफ मामला चलेगा।

गौरतलब है कि 14 जुलाई, 2024 को भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र की एक बस्ती में यह पाँचों घूम घूम कर कई परिवारों को ईसाई बनने का प्रलोभन दे रहे थे। यह महिलाएँ महिलाएँ इन परिवारों को बता रहीं थी कि यदि वह ईसाई बनते हैं तो उन्हें ₹20 लाख मिलेंगे। इसके अलावा उनके बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया जाएगा। इन महिलाओं ने उन परिवारों को मकान का भी प्रलोभन दिया। महिलाओं ने बस्ती के लोगों को आर्थिक तंगी और दुखों से बचने के लिए ईसाई प्रार्थना करने को कहा।

इन लोगों ने यहाँ ईसाई धर्म साहित्य भी बाँटा। इस बीच यहीं के कारोबारी धनवीर सिंह की निगाह उनके ऊपर पड़ गई। उन्होंने जब महिलाओं से पूछताछ की तो महिलाओं ने उन्हें जवाब दिया कि वह अपने धर्म का प्रचार कर रही हैं। उन्होंने धनवीर सिंह को भी ईसाई बनने का ऑफर दे डाला।

महिलाओं ने धर्मवीर सिंह को ईसाई बनने के फायदे गिनाने चालू कर दिए। एक महिला ने बताया कि वह दो महीने पहले ही ईसाई बनी है और उसे मकान और नकद रूपए मिले हैं। महिलाओं ने कारोबारी के बच्चों को मिशनरी स्कूल में पढ़ाने के फायदे गिनाए। इसके बाद धनवीर सिंह ने पुलिस बुला ली। इन महिलाओं को पुलिस पकड़ कर ले गई थी और बाद में दोनों युवकों को भी पकड़ लिया था। अब इस पर पुलिस ने कार्रवाई की है।