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आरक्षण पर बांग्लादेश में हो रही हत्याएँ, सीख भारत के लिए: परिवार और जाति-विशेष से बाहर निकले रिजर्वेशन का जिन्न

बांग्लादेश जल रहा है। हर तरफ हिंसा और आफरा-तफरी का माहौल है। हिंसा को नियंत्रित करने के लिए सेना को सड़कों पर उतारा गया है। देश में इंटरनेट, रेल सेवा, बस सेवा आदि ठप है। जेलों से कैदी भाग रहे हैं। सरकारी भवनों में आग लगाई जा रही है। अब तक 105 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। ये सब कुछ हो रहा है आरक्षण के विरोध में। इस घटना से पड़ोसी देश भारत को भी शिक्षा लेने की जरूरत है।

दरअसल, बांग्लादेश की सरकारी नौकरियों में कुछ समूहों के लिए साल 2018 तक 56% आरक्षण का प्रावधान था। इन आरक्षण को बांग्लादेश में बेहद आकर्षक माना जाता है। इन समूहों में विकलांग व्यक्ति (1%), स्वदेशी समुदाय (5%), महिलाएँ (10%), अविकसित जिलों के लोग (10%) और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार (30%) शामिल हैं।

इसमें योग्यता के आधार पर चयन के लिए केवल 44% सीटें बचीं। साल 2018 में छात्र समूहों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके कारण हसीना सरकार ने कोटा खत्म कर दिया। फिर जून 2024 में हाई कोर्ट और फिर बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस फैसले को पलट दिया और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए 30% आरक्षण को खत्म करने को अवैध ठहराया।

इसके बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने आरक्षण की व्यवस्था को फिर से लागू कर दिया। इससे बांग्लादेश के छात्र-छात्राएँ भड़क गए और सड़कों पर उतर आए। बांग्लादेश के विद्यार्थी पिछले एक महीने से अधिक समय से इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि योग्यता के आधार पर चयन सिर्फ 44 प्रतिशत सीटों पर होता है, जो सामान्य वर्ग के मुश्किलें पैदा कर रही हैं।

बांग्लादेश में बेरोजगारी दर साल 2023 में 4.7 प्रतिशत थी। इसके पहले साल 2019 में यह दर 5.32 प्रतिशत थी। किसी भी देश के लिए लगभग 5 प्रतिशत बेरोजगारी दर भले देखने में कम लगे, लेकिन जीवकोपार्जन के लिए आस लगाए नाराज-हताश युवकों की यह बहुत बड़ी जनसंख्या है। अगर ये सड़कों पर उतर आएँ तो क्या हो सकता है, इसका असर बांग्लादेश में दिख रहा है।

अब इससे भारत को सीख क्यों लेनी चाहिए, ये एक महत्वपूर्ण प्रश्न हो सकता है। इससे भारत को इस संदर्भ में सीख लेनी चाहिए कि युवकों के आक्रोश को शांत रखने के लिए शिक्षा एवं रोजगार के व्यापक प्रबंध किए जाने चाहिए। इसके साथ ही उन्हें मिलने वाले अवसरों की सीमितता को भी समय के साथ समीक्षा के दायरे में लाना जाना चाहिए, ताकि युवाओं में असंतोष ना उपजे।

भारत बहुत बड़ा देश है। यहाँ किसी तरह का असंतोष देश के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। केंद्र में कुल आरक्षण 63.5 प्रतिशत है। इसका बँटवारा कुछ इस तरह है- अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5%, अनुसूचित जाति के लिए 15%, पिछड़ा वर्ग के लिए 27%, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग 10% और दिव्यांगता के लिए 4 प्रतिशत। कुछ-कुछ राज्यों में तो आरक्षण की सीमा और अधिक है।

ऐसे में भारत में 36.5 प्रतिशत सीटें ही ऐसी हैं, जिस पर योग्यता के आधार पर विद्यार्थी फाइट कर सकते हैं। भारत में लगभग हर साल 10 लाख नए स्नातक निकलते हैं और वे विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इनमें कुछ को सफलता मिलती है और अधिकांश को नहीं है। इस तरह साल-दर-साल बेरोजगारों की एक नई फौज खड़ी होती जा रही है।

देश में जिन वर्गों को आरक्षण दिया जाता है, उनकी कुछ जातियाँ ही उसका फायदा उठा पाती हैं। निचले स्तर तक इसका फायदा नहीं पहुँच पाता है। जैसे कि ओबीसी वर्ग में अहीर, कोइर, कुर्मी आदि कुछ ऐसी जातियाँ हैं जो शिक्षा और नौकरी में आरक्षण का सीधा फायदा ले लेती हैं। इस वर्ग के अन्य लोगों को इसका फायदा नहीं मिल पाता और वे गरीबी रेखा से खुद को बाहर नहीं निकाल पाते।

इसी तरह अनुसूचित जनजाति में मीणा जैसी कुछ जाति है, जो बेहद संपन्न एवं समृद्ध हैं। इनमें शिक्षा और नौकरी का स्तर काफी ऊँचा है। उसी आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (EWS) वर्ग में सभी जातियों को इसका समान रूप लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसी तरह अनुसूचित जाति (SC) में भी इस वर्ग का लाभ कुछ वर्गों तक सिमटकर रह गया है।

ऐसे हर वर्ग में जिन जाति समुदाय को लोगों को इसका कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है, उनके युवाओं के मन में देर-सबेर असंतोष पनपेगा। इस असंतोष को पनपने से पहले ही इसका समाधान आवश्यक है। भारत में लगभग 3,000 जातियाँ और 25,000 उपजातियाँ हैं। ऐसे में किसी वर्ग का फायदा सिर्फ दो-तीन जातियों तक सीमित रहना असंतोष को बढ़ावा देना ही है।

सरकार को चाहिए कि जिन जातियों में शिक्षा, नौकरी और आय में वृद्धि होने के साथ-साथ सामाजिक चेतना आ गई है, उन्हें सामान्य वर्ग में डाल दिया जाए। इससे हर वर्ग को देर सबेर लाभ मिलेगा और आखिरकार आरक्षण के लागू करने के उद्देश्यों की पूर्ति होगी, अन्यथा भारत में आरक्षण राजनीतिक ब्लैकमेल का हथियार बनकर रह जाएगा और इसके लाभार्थी सीमित रह जाएँगे।

इसका सबसे अनोखा मामला महाराष्ट्र की ट्रेनी IAS अधिकारी पूजा खेडकर हैं। पूजा खेडकर ओबीसी कोटा का इस्तेमाल करते हुए UPSC परीक्षा पास की हैं। महत्वपूर्ण बात ये है कि उनके पिता भी IAS अधिकारी रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने ओबीसी कोटा का फायदा लिया। ऐसा ही मामला IAS अधिकारी टीना डाबी और उनकी बहन रिया डाबी हैं। दोनों अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखती हैं।

उनके पिता भारतीय दूरसंचार सेवा और माँ भारतीय इंजनीयरिंग सेवा से ताल्लुक से संबद्ध हैं। ऐसे में सवाल उठेगा कि अगर रिया और टीना डाबी की जगह यह आरक्षण किसी और को मिलता तो दो अन्य परिवारों का कल्याण हो सकता था। माता-पिता के इतने उच्च पदस्थ अधिकारी होने के बावजूद उनकी अगली पीढ़ी द्वारा आरक्षण का लाभ लेना उस वर्ग के वंचित जाति/लोगों के प्रति अन्याय है।

भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति कभी ना पैदा हो, इससे सरकार को सीख लेने की जरूरत है। असंतोष का पनपना किसी राज्य के लिए सबसे दुष्कर होता है। राजनीतिक दलों के चाहिए कि वे मिलकर बैठकर इसका कुछ इस तरह समाधान निकालें कि जारी आरक्षण के अस्तित्व को चुनौती निकट भविष्य में चुनौती ना मिल सके और यह समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े परिवार को भी इसका लाभ मिल सके।

कर्नाटक के बाद अब तमिलनाडु में YouTuber अजीत भारती के खिलाफ FIR, कॉन्ग्रेस नेता सैमुअल MC ने की शिकायत: राहुल गाँधी से जुड़ा है मामला

कर्नाटक के बाद अब तमिलनाडु पुलिस ने YouTuber एवं पत्रकार अजीत भारती के खिलाफ FIR दर्ज की है। उन पर ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने का आरोप लगाया गया है। M सैमुअल द्रवियन MC की शिकायत पर ये केस दर्ज किया गया है, जो चेन्नई ईस्ट में कॉन्ग्रेस पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि अजीत भारती ने दावा किया था कि राहुल गाँधी अयोध्या के राम मंदिर को ध्वस्त कर उसकी जगह फिर से बाबरी मस्जिद को खड़ी कर देंगे।

FIR में यूट्यूबर पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने और जनता के बीच घृणा फैलाने के लिए द्वेषपूर्ण भावना के साथ भ्रामक सूचना फैलाने का आरोप मढ़ा गया है। इसके लिए ‘X’ को ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS) के तहत नोटिस भी जारी किया गया है। सोमवार (15 जुलाई, 2024) को चेन्नई के वेपेरी स्थित सेन्ट्रल क्राइम ब्रांच के साइबर क्राइम पुलिस थाने के इंस्पेक्टर ने इस पर हस्ताक्षर किया। जिस पोस्ट को लेकर ये मामला दर्ज किया गया है, वो 13 जून, 2024 का है।

अजीत भारती के खिलाफ पूर्ववर्ती IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153A (मजहब-भाषा इत्यादि का रआधार पर विभिन्न समूहों को लड़ाने के उद्देश्य से काम करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही उनके खिलाफ IPC की धारा-505(1)(b) भी लगाई गई है, जो जनता के बीच डर बनाने के उद्देश्य से कोई बयान जारी करने पर दर्ज की जाती है। ‘X’ से अजीत भारती के हैंडल के संबंध में कई जानकारियाँ माँगी गई हैं, जैसे उनके डिवाइस, लॉगिन-लॉआउट का समय और ईमेल-फोन नंबर।

अजीत भारती ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि जिस केस में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्थगन का आदेश दे रखा है, उस पर कथित घटना और केस पर स्टे के बाद, वापस दूसरे राज्य में केस करना क्या बताता है? बता दें कि कर्नाटक सरकार ने उनके NCR स्थित फ़्लैट के पास अपने कुछ पुलिसकर्मी भेजे थे। बाद में यूपी पुलिस इन पुलिसकर्मियों को ले गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने अजीत भारती को राहत दी थी। अब तमिलनाडु में केस हुआ है, जहाँ DMK अध्यक्ष MK स्टालिन मुख्यमंत्री हैं और कॉन्ग्रेस सत्ता में साझीदार है।

हिंदू बन मुस्लिम लड़कियों ने की शादी, एक सप्ताह बाद फरार: 2-2 लाख रुपए लेकर धर्मशाला में दलाल ने कराए फेरे, लेकिन इलाका था मुस्लिम बहुल

राजस्थान के राजगढ़ में 2 हिंदू युवकों ने बिहार में पैसे देकर 2 युवतियों से शादी की और उन्हें राजस्थान ले आए। लेकिन एक ही सप्ताह बाद दोनों युवतियाँ फरार हो गईं। उन्हें जब पकड़ा गया, तो दोनों युवतियों ने कहा कि वो मुस्लिम हैं और उन्हें पैसे लेकर यहाँ लाया गया था। युवकों ने जब रिश्ते की दुहाई दी, तो मुस्लिम युवतियों ने कहा कि वो रेप का केस लगा देंगी। इस मामले में पुलिस भी बुलाई गई, लेकिन आखिर में दोनों युवकों को दोनों युवतियों को जाने देना पड़ा और पैसे भी डूब गए।

खास बात ये है कि दोनों युवकों से इस शादी के 2-2 लाख रुपए लिए गए और बिहार की जिस धर्मशाला में ये शादी कराई गई, वो भी मुस्लिम बहुल इलाके में थी। दोनों मुस्लिम लड़कियों ने हिंदू रीति-रिवाजों के साथ शादी की, और अब पैसे भी लेकर जा चुकी हैं। इधर दोनों दूल्हे सिर्फ हाथ मलते रह गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला राजगढ़ जिले के सुल्तानिया गाँव का है। जहाँ प्रेम सिंह नागर और पड़ोस के गाँव के रहने वाले मुकेश की शादी एक दलाल ने बिहार में कराई। उस दलाल ने दोनों से 2-2 लाख रुपए भी लिए थे। लेकिन ये दुल्हनें 1 सप्ताह भी नहीं टिकी और अपने परिजनों के साथ बिहार लौट गईं। जानकारी के मुताबिक, एक दुल्हन का भाई राजगढ़ पहुँचा और आरोप लगाया कि उसकी बहन को जबरदस्ती यहाँ लाया गया है। वो मुस्लिम हैं। युवतियों ने भी अपनी मुस्लिम आईडेंटिटी वाले आई कार्ड दिखाए। यही नहीं, एक युवती ने तो यहाँ तक भी कह दिया कि अगर उसके भाई के साथ उसे नहीं जाने दिया गया, तो वो कथित दूल्हों पर रेप का केस कर देंगी। ऐसे में उन्हें पैसे भूलकर जाने दिया जाए।

पुलिस के सामने भी दुल्हन ने मुस्लिम होने की जानकारी दी। इस मामले में डरे हुए दोनों युवकों ने थाने में समझौता कर लिया और रुपए भी छोड़ दिए। उन्होंने बताया कि बिहार की जिस धर्मशाला में उनकी शादी दलाल ने कराई थी, वो धर्मशाला भी मुस्लिम इलाके की थी और उसका मालिक भी मुस्लिम ही था। वहाँ उन्होंने 15 हजार की रसीद भी कटाई थी। इस पूरे मामले में पुलिस भी मूकदर्शक बनी नजर आई। क्योंकि थाने में समझौते के बाद लुटेरी दुल्हनें बिहार चली गई, जबकि पैसा-इज्जत सबकुछ गवाँ कर दूल्हे सिर्फ हाथ मलते रह गए।

गौरतलब है कि राजस्थान में लिंगानुपात अन्य राज्यों की तुलना में कहीं ज्यादा खराब है। ऐसे में बहुत सारे युवकों के घर नहीं बस पाते, तो वो गरीब राज्यों से शादी कर अपने लिए दुल्हन लाते हैं। कई बार युवकों के साथ ठगी की वारदातें भी सामने आती रही हैं। उन्हीं ठगी के मामलों में ये नया मामला भी जुड़ गया। हालाँकि उस कथित दलाल के खिलाफ पुलिस ने क्या कार्रवाई की, इस बात का पता नहीं चल पाया है।

आकिब ने ‘आकाश’ बन हिन्दू युवती को फाँसा, तमंचे के बल पर 2 साल करता रहा बलात्कार: इकलौते भाई की हत्या की धमकी, तस्वीरें भी खींच ली

उत्तर प्रदेश इ अलीगढ़ से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। हिन्दू युवती ने आरोप लगाया है कि आकिब ने ‘आकाश’ बन कर उसके साथ बलात्कार किया है। जब युवती ने शादी करने के लिए कहा, तब वो इस्लामी धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा। युवक ने बंदूक दिखा कर उसे उसके पूरे परिवार समेत खत्म करने की धमकी दी। बन्नादेवी थाना पहुँच कर पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई। इस दौरान कई हिन्दू कार्यकर्ता भी उसके साथ थे। पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

राहत खलील का बेटा आकिब के बारे में बताया गया है कि वो सराय रहमान मछली वाली गली का निवासी है। व्हाट्सएप्प पर उसने हिन्दू पीड़िता से दोस्ती के लिए खुद का नाम ‘आकाश’ बताया। दोनों में नज़दीकियाँ बढ़ती चली गईं और उन्होंने शारीरिक संबंध भी बनाए। पीड़िता का कहना है कि जब उसे ‘आकाश’ के मुस्लिम होने का पता चला तो उसके होश उड़ गए। जब उसने विरोध किया तो उसे और उसके परिवार को धमका कर आकिब तमंचे के बल पर बलात्कार करता रहा।

लगभग 2 वर्षों तक ये सिलसिला चला। उसे कई बार नशीली दवाएँ भी दी गईं। वो कहने लगा कि निकाह के लिए धर्म-परिवर्तन करो। जब पीड़िता ने हिन्दू संगठनों को इसकी जानकारी दी तो भाजपा की पूर्व महापौर शकुंतला भारती के संज्ञान में मामला लाया गया। वो पीड़िता और हिन्दू कार्यकर्ताओं को लेकर बन्नादेवी थाना पहुँचीं। पूर्व मेयर ने कहा कि हिन्दू बहन-बेटियों को फँसा कर मुस्लिम बनाया जाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

थानाधिकारी RK सिसौदिया ने कहा कि पहचान छिपा कर युवती को शादी का झाँसा दिए जाने का मामला सामने आया है। उन्होंने बताया कि शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली गई है। साथ ही आरोपित की गिरफ़्तारी के लिए 3 टीमों का गठन किया गया है। पीड़िता की तस्वीरें भी उसके पास है, जिनके सहारे वो ब्लैकमेल कर रहा था। वो इन्हें वायरल करने की धमकी दे रहा था। गुरुवार (18 जुलाई, 2024) की रात वो पीड़िता को धमकाने के लिए उसके घर भी पहुँच गया था। पीड़िता का इकलौता भाई है, जिसकी हत्या की वो धमकी देता है।

सरकारी स्कूल में क्रिश्चियन मिशनरी वाली बाँट रही थी मजहबी किताबें: ‘पवित्र शास्त्र भजन संहिता और नीति वचन’, हिंदू बच्चों को भ्रम में रखने के लिए नाम भी फर्जी

मध्य प्रदेश के विदिशा में क्रिश्चियन मिशनरी सक्रिय हैं। मिशनरी से जुड़े लोग एनजीओ की आड़ लेकर ईसा मसीह की कहानियों से जुड़े मजहबी पुस्तकें बाँट रहे हैं। इन पुस्तकों के नाम भी शास्त्र, संहिता की तरह हैं, जबकि अंदर की कहानियाँ ईशु की महिमा से भरी हैं। ये मामले सीधे तौर पर लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के लगते हैं।

ताजा मामला विदिशा के लायरा का है, जहाँ शुक्रवार (19 जुलाई 2024) को पांड़ोछा मिडिल स्कूल में एक युवती पहुँची और खुद को एनजीओ से जुड़ा बताकर स्कूली बच्चों को मुफ्त में ईशु महिमा से जुड़ी पुस्तकें बाँटने लगी। पुस्तक का नाम ‘पवित्र शास्त्र भजन संहिता और नीति वचन’ था। इन पुस्तकों के नाम से एक बार में भ्रम होता है कि इस पुस्तक में हिंदू धर्म से बातें होंगी, लेकिन असल में ये पुस्तक ईसा मसीह की चमत्कारिक कहानियों से भरी पड़ी थी। यही नहीं, उसमें हिंदू संतों की निंदा की गई थी, जबकि क्रिश्चियानिटी का बखान। युवती द्वारा पुस्तक बाँटने का शिक्षकों ने विरोध किया, तो वो शिक्षकों से ही भिड़ गई। जब पुलिस बुलाने की बात की गई, तो वो फरार हो गई।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, युवती ने खुद को हैदराबाद से आया हुआ बताया। उसने कई बार पूछने पर भी अपना नाम नहीं बताया, सिर्फ इतना कहा कि वो एनजीओ के लिए मुफ्त में ये काम करती है। बताया जा रहा है कि वो बीना से ऑटो में सवार होकर 2 अन्य महिलाओं के साथ आई थी। उन महिलाओं पर भी अलग-अलग गाँवों में ऐसी पुस्तकें बाँटने का शक जताया जा रहा है।

घटना वाले स्कूल में ही तैनात संजय लोधी नाम के शिक्षक ने युवती को रोका था। स्थानीय मीडिया से बातचीत में संजय लोधी ने बताया कि युवती आसपास के गाँवों में भी पुस्तक मुफ्त में बाँट रही थी और ज्यादा उन घरों तक पुस्तक पहुँचाने की कोशिश कर रही थी, जो गरीब और अनुसूचित जाति वर्ग के हैं। युवती ने दावा किया कि वो सागर और इटारसी में भी पुस्तकें बाँट चुकी है।

इस मामले में बजरंग दल के सह संयोजक रवि लोधी और संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने कहा है कि वो स्थानीय पुलिस थाने में शनिवार (20 जुलाई 2024) को शिकायत दर्ज कराएँगे। इस पूरे मामले में शिक्षक ने वीडियो भी बनाया है, जो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

टीम से बाहर होने पर मोहम्मद शमी का वायरल वीडियो, कहा – किसी के बाप से कुछ नहीं लेता हूँ, बल्कि देता हूँ

तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी को T20 विश्व कप 2024 में भारतीय टीम में न चुने जाने का मलाल है। भारत ये वर्ल्ड कप रोहित शर्मा की कप्तानी में जीतने में कामयाब रहा। मोहम्मद शमी ने YouTube पर शुभंकर मिश्रा के साथ पॉडकास्ट में 1 घंटे से भी अधिक समय तक कई मुद्दों पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि वो हमेशा देश के लिए योगदान करने के लिए सोचते हैं और उन्हें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ पसंद हैं। तेज़ गेंदबाज ने बताया कि उन्होंने ज़्यादातर न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड व वेस्टइंडीज जैसी शीर्ष टीमों के खिलाफ ही खेला है।

मोहम्मद शमी ने कहा कि छोटी टीमों का नाम आता है तो वो आराम करने चले जाते हैं, इससे शरीर भी रिकवर हो जाता है और फ्रेश भी महसूस होता है, आप परिवार से मिलते हैं। उन्होंने याद किया कि 2023 के ODI वर्ल्ड कप में नॉनस्टॉप 10 मैच जीत कर भारत फाइनल में पहुँचा था, इस बार भी वो फाइनल मैच देख रहे थे तो एक समय उनके भीतर वही दुःख था। उन्होंने कहा कि 2023 में किसी को भारत की जीत को लेकर शक नहीं था। विश्व विजेता टीम का हिस्सा होने को लेकर शमी ने कहा कि वो वास्तविकता में विश्वास रखते हैं।

उन्होंने कहा कि इस टीम में जो भी था, वो डिजर्व करता है। उन्होंने कहा कि वो अनफिट थे तो सिर्फ एक फैन की तरह मैच देख सकते हैं, कुछ गलत लगे तो मैसेज डाल सकते हैं। उन्होंने 2015 वनडे वर्ल्ड कप याद किया, जहाँ उन्होंने सबसे अधिक विकेट लिया था। वहीं उन्होंने बताया कि 2019 में भी उनका प्रदर्शन अच्छा रहा। उन्होंने कहा कि अगर आप मुझे चांस दोगे तो मैं परफॉर्म करूँगा, आप नहीं लेते मुझे तो ये आपका निर्णय है। मोहम्मद शमी ने कहा कि जब-जब उन्हें चांस मिला वो टॉप पर बैठे हैं।

रिटायरमेंट पर मोहम्मद शमी ने कहा कि न तो वो किसी के बाप से कुछ लेते हैं, देते हैं। उन्होंने कहा कि वो बुढ़ापे में भी यही आत्मविश्वास रखेंगे और तब उन्हें कोई नहीं हरा सकता। उन्होंने कहा कि मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह साथ में खेलते हुए दिखेंगे। ‘गुजरात टाइटंस’ अगर उन्हें हटा दे तो? तो उन्होंने कहा कि जो उन्हें लेगा वो उसके साथ खेल लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर आपको परफॉर्मर चाहिए तो रखो, वहीं अगर शक्ल पसंद है तो मॉडल ढूँढ कर लाओ।

क्या भारतीय टीम में पक्षपात होता है? इस सवाल पर मोहम्मद शमी ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा नोटिस नहीं किया। उन्होंने कहा कि आप जिसको अधिक देखते हो, उसकी स्किल पर आपको अधिक भरोसा होता है। मोहम्मद शमी ने कहा कि IPL में शुभमन गिल ने अच्छी कप्तानी की थी। कप्तान बनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वो मना नहीं करेंगे, लेकिन बल्लेबाजों को अधिक प्राथमिकता दी जाती है। बकौल मोहम्मद शमी, विकेटकीपर सबसे अच्छा कप्तान होता है क्योंकि उसे सब दिखता रहता है और वो विकेट के पीछे खड़ा रहता है।

मोहम्मद शमी ने कहा, “एक चीज मुझे समझ नहीं आती, मेरे दिमाग में भी एक सवाल रहता है। आपको वैसे खिलाड़ी चाहिए जो परफॉर्म कर रहे हों। 3 मैच में 13 विकेट लिए हैं, और क्या चाहिए आपको? मेरे पास न तो सवाल है न इसका जवाब है। मुझे मौका दोगे तभी तो मैं अपनी स्किल दिखाऊँगा, जब आप हाथ में गेंद दोगे। मैंने 7 मैच में 24 विकेट लिया। मैं सवाल नहीं पूछता। जिसे मेरी ज़रूरत है, वो मुझे मौका देगा।” पाकिस्तान द्वारा बॉल टेम्परिंग के आरोप पर उन्होंने कहा कि सब गेंदें रखी हुई हैं जिनसे उन्होंने विकेट लिए, वो जाकर दिखा देंगे कि कहाँ गड़बड़ है।

तलाक पर मोहम्मद शमी ने कहा कि एक व्यक्ति के आने-जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि वो अपनी बेटी से बात करते हैं। मोहम्मद शमी ने कहा कि समय का इंतज़ार करना होता है, धैर्य रखना होता है। उन्होंने कहा कि वो भारत के लिए खेलेंगे, उसके बाद कुछ देखा जाएगा। सानिया मिर्जा से जुड़ने के खबरों पर उन्होंने कहा कि ये अजीब है, किसी को ऐसे नहीं खींचना चाहिए। उन्होंने कहा कि मीम्स आपके लिए मजाक होंगे, लेकिन ये किसी के जीवन का सवाल होता है।

थूक लगी रोटी सोनू सूद को कबूल है, कबूल है, कबूल है! खुद की तुलना भगवान राम से, खाने में थूकने वाले उनके लिए शबरी

नाम है सोनू सूद। बॉलीवुड में काम करके पैसे कमाता है। सोशल मीडिया पर उसने खुद की तुलना भगवान राम से की है। सोनू सूद का कहना है कि वो किसी कट्टर मुस्लिम द्वारा थूक कर बनाई हुई रोटी को खा सकता है। क्यों? क्योंकि भगवान राम ने भी शबरी के जूठे बेर खाए थे।

सोनू सूद का यह भाईचारा भरा सोशल मीडिया पोस्ट आया है 20 जुलाई को। क्यों आया? क्योंकि काँवड़ यात्रा और काँवड़ियों की शुद्धता को ध्यान रख कर उत्तर प्रदेश पुलिस-प्रशासन ने सभी दुकानदारों को उनके नाम बोर्ड पर लिखने का आदेश दिया है। वामपंथियों और कट्टर इस्लामियों को इससे दिक्कत हुई। हाय-तौबा करने लगे। सोनू सूद भी इसी लाइन में लग कर हुआँ-हुआँ करने लगे।

एक दिन पहले हर दुकान पर ‘मानवता’ का बोर्ड लगाने की अपील कर चुके थे सोनू सूद। सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें दुकानदार का नाम क्यों स्पष्ट लिखा होना चाहिए, इसको लेकर तर्क दिए। रोटी पर थूकते वीडियो के साक्ष्य दिए। सोनू सूद ठहरे कट्टर भाईचारावादी! उन्होंने अपना नहीं… दूसरे का थूक पीने की ठान ली। थूक लगी रोटी खाकर खुद को भगवान राम के समकक्ष बनाने का कुतर्क भी गढ़ दिया।

सोनू सूद की जाग गई मानवता, भगवान राम से तुलना

सोनू सूद ने लिखा, “हमारे श्री राम जी ने शबरी के झूठे बेर खाए थे तो मैं क्यों नहीं खा सकता। हिंसा को अहिंसा से पराजित किया जा सकता है मेरे भाई। बस मानवता बरकरार रहनी चाहिए। जय श्री राम।”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसके बाद सोनू सूद की लोगों ने छीछालेदर कर दी। एक्स यूजर्स ने ग्राहक के खाने पर थूकने के कृत्य का बचाव करने के लिए उन्हें आड़े हाथों लिया। कई एक्स यूजर्स ने बताया कि माता शबरी द्वारा बेर चखने के पीछे की मंशा भगवान श्री राम को केवल मीठे बेर देने की थी, जो उनके भगवान के प्रति भक्ति थी, जबकि खाने में थूकने का कट्टर मुस्लिमों का कृत्य धार्मिक घृणा से प्रेरित होता है।

एक्स यूजर रोजी ने सोनू सूद से वीडियो में दिख रहे ढाबे पर जाकर थूक से सनी रोटियाँ खाते हुए अपना वीडियो बनाने का अनुरोध किया।

कई यूजर्स ने सोनू सूद की इस उपमा पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कट्टर मुस्लिमों को शबरी के बराबर बताया और खुद की तुलना भगवान श्री राम से की।

राजनीतिक विश्लेषक अभिषेक तिवारी ने उनकी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “थूक कर रोटी बनाने वाला माता शबरी नहीं है और आप राम नहीं हैं।” उन्होंने लिखा कि माता शबरी प्रेम की प्रतीक हैं, यह व्यक्ति घृणा से थूक रहा है।

एक अन्य यूजर ने लिखा, “शबरी के प्रेम और ‘थूक जिहाद’ से इस विचित्र तुलना के लिए आपको शर्म आनी चाहिए! यह सिर्फ आपकी एकतरफा धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के कारण है। सात्विक भोजन करने वाले काँवड़ियों के लिए आपके मन में सम्मान नहीं है, उनकी कई दिनों की तपस्या आपके लिए कुछ भी नहीं है। घृणित सोच।”

सोनू सूद को शायद यह पता नहीं। उनकी जानकारी के लिए बता दें कि 9 महीने में 9 लोग रोटियों पर थूक लगाते पुलिस से धरा चुके हैं। कई इस्लामी कट्टरपंथी झूठे हिंदू नामों से अपने भोजनालय/ठेले/दुकान चलाते हैं, जिससे कई बार कानून-व्यवस्था की स्थिति तक पैदा हुई है। लेकिन सोनू सूद पढ़ेंगे यह सब? वो डॉक्टरों से एक कदम आगे बढ़ कर कोमा में गए आदमी को बचाने वाले ‘अवतार’ हैं… भले ही सोशल मीडिया पर लोग उनके फर्जीवाड़े की हवा निकाल दें!

एग्जिट पोल के दिन शेयर बाजार में नहीं हुई हेरफेर या इनसाडर ट्रेडिंग: जाँच के बाद SEBI के सूत्रों ने बताया, राहुल गाँधी ने लगाया था आरोप

इस साल संपन्न हुए लोकसभा चुनावों के अंतिम चरण में मतदान के बाद एग्जिट पोल दिखाए गए थे। इसमें एक बार फिर से नरेंद्र मोदी की प्रचंड बहुमत से जीत बताई गई थी। इसके बाद शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई थी। हालाँकि, मतगणना के दिन अनुकूल नतीजे नहीं आए और मार्केट भरभरा कर गिर गई। इसे विपक्ष दलों, खासकर कॉन्ग्रेस ने हेराफेरी बताया था। हालाँकि, बाजार नियामक SEBI ने इससे इनकार किया है।

विपक्षी दलों के आरोप पर बाजार नियमाक संस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने इसकी जाँच शुरू की थी। सेबी ने इस जाँच को अब पूरी कर ली है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सेबी का कहना है कि लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल के दिन बाजार में कोई हेराफेरी या इनसाडर ट्रेडिंग नहीं हुई। सभी मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर से डेटा माँगा गया था। उनके गहन विश्लेषण में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है।

एग्जिट पोल के औसत अनुमान के अनुसार, भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को करीब 367 सीटें मिलने की बात कही गई थी। इसके बाद अगले दिन यानी 3 जून को सेंसेक्स और निफ्टी में 3% से अधिक की बढ़त देखी गई थी। हालाँकि, मतगणना के दिन 4 जून को एनडीए को सिर्फ 293 सीटें मिलीं। इसके बाद बाजार में 6% की गिरावट आ गई थी।

इसके बाद कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाजार में हेरफेर का आरोप लगाया था। उन्होंने इसे शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा स्कैम करार दिया था और इसकी जाँच संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से कराने की माँग की थी। राहुल गाँधी के बाद टीएमसी के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने इसी तरह के आरोप लगाते हुए SEBI को एक पत्र लिखा था।

अपने पत्र में गोखले ने लिखा था, “एग्जिट पोल कंपनियों ने एग्जिट पोल के प्रसारण से पहले अपने ग्राहकों को उन्नत जानकारी प्रदान की थी, जिससे उन्हें गैर-सार्वजनिक जानकारी के माध्यम से शेयर बाजार में अनुचित और अंदरूनी लाभ मिला।” उन्होंने इसकी जाँच कराने की माँग की थी। इसके बाद SEBI ने इसकी जाँच शुरू की थी।

बांग्लादेशी महिला के 5 छोटे बच्चे, 3 लड़कियाँ… इसलिए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दे दी जमानत: सपा विधायक की मदद से भारत में रहने के लिए बना था फर्जी कागजात

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भारत में जेल में बंद एक बांग्लादेशी महिला हिना रिजवान को जमानत दे दी। महिला अपने बच्चों के साथ अवैध रूप से भारत में रही थी। उसकी वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी थी। इस मामले में पुलिस ने उसे पति-बच्चों सहित गिरफ्तार कर लिया था। हिना ने वकील ने कहा कि महिला के 5 बच्चे हैं, जिनमें तीन लड़कियाँ हैं। इसलिए उसे जमानत दी जाए।

हिना रिजवान को जमानत देने का फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश राजीव मिश्रा ने दिया है। हिना रिजवान के खिलाफ 11 दिसंबर 2022 को कानपुर नगर के मूलगंज थाने में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक षडयंत्र और विदेशी नागरिक अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। तब से वह जेल में बंद है।

महिला की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कोर्ट में दलील दी कि हिना रिजवान के पाँच छोटे बच्चे हैं, जिनमें तीन लड़कियाँ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में याची के तीन बच्चों की जमानत पहले ही मंजूर हो चुकी है। कोर्ट ने अनूप त्रिवेदी की दलील को मान लिया और कुछ शर्तों के साथ ही याची को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।

कानपुर पुलिस ने इस मामले में अन्य आरोपितों के अलावा समाजवादी पार्टी के विधायक इरफान सोलंकी और एक सभासद के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। महिला हिना रिजवान ने जमानत के लिए सेशन कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी। हालाँकि, वहाँ से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उसने हाई कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी।

आरोप है कि हिना ने बांग्लादेशी नागरिक रिजवान मोहम्मद के निकाह किया था। इसके बाद वह बांग्लादेश चली गई और वहाँ की नागरिकता ले ली थी। बांग्लादेश से वह वीजा लेकर भारत आई थी। वीजा 2018 तक के लिए मान्य था। इसके बाद भी वह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में ही रुकी रही। कहा जाता है कि फर्जी दस्तावेज बनवाने में इरफान सोलंकी ने मदद की थी।

इरफान सोलंकी पर बांग्लादेशी मुस्लिमों को भारतीय नागरिक होने का सर्टिफिकेट देने और दंगों के आरोपितों के साथ नजदीकी संबंध होने के भी आरोप हैं। हिना रिजवान के कागजों को इरफान सोलंकी ने वेरिफाई किया था। इनके पास से कई पासपोर्ट और आधार कार्ड बरामद किए गए थे। इनमें से एक कई देशों की यात्रा भी कर चुका था और उसके पास तमाम देशों की करेंसी भी बरामद हुई थी।

हिना रिजवान के पति मोहम्मद रिजवान ने पुलिस को बताया था कि वह कमाई के लिए हवाला का काम करता था, लेकिन वह देशद्रोही नहीं है। उसने यह भी बताया था कि हवाला के काम के लिए वह पाकिस्तान समेत कुछ अन्य देशों की यात्रा कर चुका है। इन सभी देशों में जाने के लिए वह बांग्लादेशी पासपोर्ट का इस्तेमाल करता था। वह पहले बांग्लादेश में एक होटल चलाता था।

पुलिस ने जब रिजवान और उसके परिवार का बैंक डिटेल खंगाला तो पता चला कि परिवार के पास चार बैंक खाते हैं। रिजवान के बैंक खाते में नवंबर महीने में 8 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। रुपए किसने भेजे थे, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। फिलहाल पुलिस उसके और उसके परिवार के अन्य लोगों के डिटेल खंगाल रही है।

वहीं, जाँच में यह भी पता चला है कि रिजवान का परिवार महीने के 2 लाख रुपए खर्च कर रहा था, जबकि परिवार के पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है। उसने पुलिस को बताया था कि वह हवाला का कारोबार करता है। हालाँकि, वह यह नहीं बताया कि पैसे कहाँ लगाता (investment) है। पुलिस को सबूतों के बिना इसे साबित करना मुश्किल होता जा रहा है।

पुलिस को रिजवान के घर छापेमारी के दौरान लगभग 14 लाख रुपए नकद मिले थे। उसके अलावा उसके घर से विदेशी करेंसी और महँगे गहने भी मिले थे। जाँच में तो यह बात भी सामने आई है कि रिजवान ने बांग्लादेश में करोड़ों रुपए की संपत्ति बनाई है। ऐसे में सवाल है कि जब रिजवान कोई काम नहीं करता तो उसके पास इतना रुपया कहाँ से आया। उसके खाते में रुपए कहाँ से आ रहे थे और कौन भेज रहा था।

मुहर्रम में गलत रास्ते से निकाला ताजिया, विरोध कर रहे हिंदुओं पर 100+ मुस्लिम कट्टरपंथियों का हमला: बरेली में 5 घायल, एक की हालत गंभीर

मुस्लिम के मुहर्रम का महीना चल रहा है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में फिलिस्तीन के झंडे फहराने, डीजे बजाने को लेकर विवाद करने और हिंदुओं पर हमले के मामले सामने आए हैं। बरेली में डीजे बजाने को लेकर हुए विवाद के बाद अब हिंदुओं के घरों पर हमला कर दिया गया। इसमें कई लोग घायल हो गए हैं। ये हिंदू मुहर्रम का जुलूस गलत रास्ते से निकालने का विरोध कर रहे थे।

मामला बरेली के थाना शाही के गौसगंज गाँव का है। दरअसल, शुक्रवार (19 जुलाई 2024) को यहाँ के एक इलाके में मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था। यह जुलूस हर साल निकलने वाले रास्ते से हटकर हिंदुओं के के इलाके ले जाया जा रहा था। नया रिवाज स्थापित करने पर हिंदुओं ने इसका विरोध किया और कहा कि जिस रास्ते से पहले जुलूस जाया करता था, उसी रास्ते का इस्तेमाल करो।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार (19 जुलाई 2024) की रात को रंजिश में आकर मुस्लिम युवाओं ने टॉर्च की रोशनी में हिंदू परिवार के लोगों की गिनती की। इसके बाद 100 से अधिक हमलावर घर में घुस गए। इस दौरान हमलावरों ने पथराव, तोड़फोड़ और घर के लोगों से मारपीट की। हमले में पाँच लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से एक हालत गंभीर बताई जा रही है।

सूचना मिलते मिलने पर जिले के एसपी मानुस पारीक भी वहाँ पहुँच गए। उन्होंने घटनास्थल पर पहुँचकर कई थानों की पुलिस फोर्स बुलाई। पुलिस फोर्स को देखकर आरोपितों में भगदड़ मच गई और वे भागने लगे। इस दौरान पुलिस ने घेराबंदी करके 10 मुस्लिमों को पकड़ लिया और उनसे पूछताछ के लिए थाने ले आए। इस मामले में 40 नामजद और 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

बता दें कि इससे पहले बरेली के ही अलीगंज कस्बे में मोहर्रम के जुलूस के दौरान जमकर हंगामा हुआ था। जुलूस में हाई पावर का डीजे बजाने को लेकर हिंदू पक्ष ने आपत्ति जाहिर की थी। उनका कहना था कि जुलूस के दौरान नई परंपरा डाली जा रही है और यह नियम के खिलाफ है। इस पर लोगों ने बीच रास्ते से डीजे नहीं निकलने की बात कही। करीब आधा घंटे तक जुलूस रोककर रखा।

मुस्लिम पक्ष का कहना था कि यह डीजे उन्होंने 90 रुपए देकर लिया है। इस पर हिंदू समुदाय के लोगों ने कहा कि वे आपस में चंदा करके डीजे का भाड़ा देंगे, लेकिन डीजे बजाने की नई परंपरा नहीं शुरू होनी चाहिए। उसके बाद एसपी ने मामले को शांत करते हुए डीजे निकलवाया।