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साथियों ने हाथ-पाँव पकड़ा, काज़िम अंसारी ने ताबतोड़ घोंपा चाकू… धराया VIP अध्यक्ष मुकेश सहनी के पिता का हत्यारा, रात के डेढ़ बजे घर में घुस कर मार डाला

बिहार के पशपालन एवं मत्स्यपालन मंत्री रहे मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी की हत्या दरभंगा के सुपौल बाजार स्थित जीरात मोहल्ले स्थित उनके आवास पर कर दी गई थी। अब इस मामले में हत्यारे काज़िम अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। 70 वर्षीय जीतन सहनी का उनके घर में ही शव मिला था और सामान अस्त-व्यस्त थे। काज़िम अंसारी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने 2022 में 1 लाख रुपए और फिर 2023 में 50,000 रुपए सूद पर लिया था।

इस तरह काज़िम अंसारी ने 70 वर्षीय जीतन सहनी से सूद पर डेढ़ लाख रुपए उधार ले रखे थे। इन्हीं पैसों को लेकर हत्याकांड को अंजाम दिया गया है। पैसों के अभाव में काज़िम अंसारी की दुकान बंद हो गई थी, बेरोजगार होने के बाद उसने 4% मासिक ब्याज पर अपनी जमीन गिरवी रखी हुई थी। वो पैसा नहीं चुका पा रहा था। 12 जुलाई को वो अपने साथी मोहम्मद सितारे उर्फ़ छेदी के साथ जीतन सहनी के पास गया था। उधर के हिसाब की बात करते हुए वो ब्याज की रकम कम करने और जमीन वापस लेने की बातें कर रहे थे।

इस दौरान दोनों में झगड़ा हो गया। मौके पर मौजूद मोहम्मद छेदी और VIP अध्यक्ष मुकेश सहनी के चचेरे भाई प्रमोद ने इसकी पुष्टि की है। फिर काज़िम अंसारी ने अपने साथियों के साथ मिल कर अपने लोन का कागज़ात जबरन छीनने की साजिश रची, इसके लिए घटना की रात उसने 10-11 बजे के बीच रेकी भी की थी जो CCTV में कैद है। रात के करीब डेढ़ बजे ये लोग पीछे के दरवाजे से घर में घुसे। इन्होंने जीतन सहनी को जगा कर अपने लोग के कागज़ात वापस माँगे।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, जीतन सहनी ने इन्हें गाली देना शुरू कर दिया। काज़िम अंसारी ने उन पर ताबड़तोड़ चाकू से वार करना शुरू कर दिया, जबकि उसके साथियों ने जीतन सहनी का हाथ-पाँव पकड़ रखा था। इन्होंने घर में रखी अलमारी को भी पानी में फेंक दिया, क्योंकि इन्हें न चाभी मिली न इनके कागज़ात। इन्होंने सोचा कि इससे ये उधार चुकाने से बच जाएँगे। वारदात के समय उसने जो कपड़े पहने थे, उन्हें भी पुलिस ने जब्त कर लिया है। उस पर फारेंसिक जाँच में खून मिला है। इधर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भी सांत्वना देने के लिए मुकेश सहनी के आवास पर पहुँचे।

‘जो आया है, उसे तो जाना ही है’: हाथरस हादसे पर बोले सूरजपाल- होनी को कौन टाल सकता है

उत्तर प्रदेश के हाथरस में सत्संग के दौरान भगदड़ में 123 लोगों की जान चली गई थी। इनमें अधिकांश महिलाएँ एवं बच्चे थे। इस घटना की जाँच के लिए SIT और न्यायिक जाँच कमिटी बनाई गई है। वहीं, आयोजकों पर FIR दर्ज करके कुछ को गिरफ्तार किया गया है। यह सत्संग सूरजपाल जाटव उर्फ नारायण हरि साकार उर्फ भोले बाबा द्वारा आयोजित किया गया था। अब उनका बयान आया है।

नारायण हरि साकार ने उस घटना को लेकर कहा, “2 जुलाई की घटना से मैं बेहद ही अवसाद हैं… अवसाद से ग्रसित हैं, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। जो आया है, उसे तो एक दिन जाना ही है। भले कोई आगे-पीछे हो। हमारे वकील डॉक्टर एपी सिंह जी एवं हमें भी जैसा कि प्रत्यक्षदर्शियों ने विषैला स्प्रे के बारे में बताया, ये पूर्णतया सत्य है कि कोई ना कोई साजिश जरूर हुई है।”

पेपर पर लिखे बयान को पढ़ते हुए सूरजपाल ने कहा, “सनातन रूप से संचालित सत्य के साथ में, जिसे कुछ लोग बदनाम करने में लगे हुए हैं। हमें SIT और न्यायिक आयोग पर भरोसा है और वे दूध का दूध और पानी का पानी करते हुए साजिशकर्ताओं को बेनकाब करेंगे। मैंने कहा है कि दिवंगत आत्माओं के परिजनों और इलाजरत घायलों के साथ जीवनपर्यंत तन-मन-धन से खडे़ रहेंगे।”

सूरजपाल जाटव ने कहा कि अभी वे चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार स्वास्थ्य लाभ के लिए अपनी जन्मभूमि बहादुरनगर कासगंज में हैं। इससे पहले हादसे के चार दिन बाद यानी 6 जुलाई को सूरजपाल ने बयान दिया था। घटना को दुखद बताते हुए उन्होंने कहा था, “पीड़ितों के परिवार की जिम्मेदारी हमारा ट्रस्ट लेगा और हम उनकी पूरी मदद करेंगे। जिनकी वजह से उपद्रव हुआ, प्रशासन उन्हें छोड़ेगा नहीं।”

हाथरस कांड के मुख्य आरोपित देव प्रकाश मधुकर को पुलिस ने 5 जुलाई 2024 को गिरफ्तार कर लिया गया। हादसे के बाद मधुकर पर एक लाख रुपये का इनाम रखा गया था। दिल्ली के नजफगढ़-उत्तम नगर के बीच के एक अस्पताल में यूपी की हाथरस पुलिस पहुँची थी। वहाँ देव प्रकाश ने सरेंडर कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

प्राइवेट नौकरियों में 75% आरक्षण वाले बिल पर कॉन्ग्रेस सरकार का U-टर्न, वापस लिया फैसला: IT कंपनियों ने दी थी कर्नाटक छोड़ने की धमकी

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने निजी क्षेत्र की नौकर‍ियों में लोकल लोगों को र‍िजर्वेशन देने के फैसले से कदम वापस खींच लिए हैं। सिद्धारमैया के फैसले का भारी विरोध भी हो रहा था, जिसकी वजह से कॉन्ग्रेसी सरकार बुरी तरह से घिर गई थी। यही नहीं, इस फैसले की जानकारी देने वाले ट्वीट को भी मुख्यमंत्री को डिलीट करना पड़ा था।

प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण वाले बिल पर से कदम खींचने की जानकारी खुद मुख्‍यमंत्री सिद्धारमैया ने दी। उन्‍होंने एक्स पर लिखा, “निजी क्षेत्र के संगठनों, उद्योगों और उद्यमों में कन्नडिगाओं के लिए आरक्षण देने के लिए कैबिनेट द्वारा अनुमोदित विधेयक को अस्थाई रूप से रोक दिया गया है। आने वाले दिनों में इस पर फिर से विचार किया जाएगा और निर्णय लिया जाएगा।”

बता दें कि कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने राज्य में निजी संस्थानों में कन्नड़ लोगों के लिए आरक्षण लागू करने का फैसला लिया था। सिद्दारमैया कैबिनेट ने इस संबंध में एक बिल पर मुहर लगाई थी। इस बिल में कहा गया था कि कर्नाटक की गैर प्रबंधकीय नौकरियों में 75% और प्रबंधकीय नौकरियों में 50% आरक्षण कन्नड़ भाषाई लोगों को दिया जाएगा।

इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी फैक्ट्रियों और दफ्तरों में नौकरी पर रखे जाने वाले लोग अब कन्नड़ ही होने चाहिए। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी दफ्तरों और फैक्ट्रियों में काम पर रखे जाने वाले ग्रुप सी और ग्रुप डी (सामान्यतः क्लर्क और चपरासी या फैक्ट्री के कामगार) के 75% लोग कन्नड़ होने चाहिए। इसके अलावा, बिल के अनुसार इससे ऊँची नौकरियों में 50% नौकरियाँ कन्नड़ लोगों को मिलनी चाहिए। हालाँकि इस बिल का काफी तीखा विरोध हुआ था।

प्रमुख कारोबारियों के बाद IT कंपनी संगठन NASSCOM (नेशनल असोसिएशन फॉर सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेस कंपनीज) ने इस निर्णय पर अपनी चिंताएँ जाहिर करते हुए कहा था कि सरकार को ये बिल वापस लेना चाहिए। NASSCOM ने एक पत्र जारी करके इस नए बिल को लेकर समस्याएँ बताई थी। NASSCOM ने इस बिल पर चिंता जताते हुए कहा, “इस तरह के बिल बेहद परेशान करने वाला है, यह ना केवल टेक इंडस्ट्री के विकास में बाधा डालेगा, बल्कि यहाँ नौकरियों और कर्नाटक के ब्रांड पर भी असर डालेगा। NASSCOM सदस्य इस बिल के प्रावधानों को लेकर काफी चिंतित हैं और राज्य सरकार से इसे वापस लेने की माँग करते हैं।” NASSCOM ने कहा कि इस बिल से राज्य के विकास और कम्पनियों के राज्य से बाहर जाने और स्टार्टअप को मुश्किल में पड़ने का खतरा है। NASSCOM ने कहा है कि इस कानून के कारण कम्पनियों को बाहर जाना पड़ सकता है जिससे उन्हें टैलेंट मिल सके।

देश भर की 3200 से अधिक टेक कम्पनियाँ NASSCOM की सदस्य हैं और 245 बिलियन डॉलर (लगभग ₹20 लाख करोड़) की इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करती है। NASSCOM के विरोध के कारण कर्नाटक सरकार पर अब दबाव बन रहा है। NASSCOM से पहले NITI आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कान्त ने भी इस बिल को लेकर चिंताएँ जाहिर की थी।

अब सरकार की हो गई माफिया अतीक अहमद की ₹50 करोड़ की प्रॉपर्टी, किसानों-गरीबों को धमका कर किया था अवैध कब्ज़ा

उत्तर प्रदेश में ऑपरेशन माफिया के तहत चल रही कार्रवाई में कमिश्नरेट पुलिस प्रयागराज और राज्य सरकार ने बड़ी सफलता हासिल की है। माफिया अतीक अहमद की करीब 50 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति अब राज्य सरकार की हो गई है। कमिश्नरेट पुलिस ने महज लगभग 11 महीने में कुर्की से लेकर जमीन को सरकारी बनाने की ऐतिहासिक कार्रवाई की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (16 जुलाई 2024) को जिला न्यायालय की गैंगस्टर कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए राजमिस्त्री हुबलाल के नाम पर खरीदी गई जमीन को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया। जस्टिस विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस कमिश्नर की कार्रवाई को निष्पक्ष और न्यायसंगत करार देते हुए अर्जित संपत्ति को सरकार के पक्ष में करने को कहा है।

प्रयागराज के जिलाधिकारी इस आदेश के अनुपालन में अब खतौनी में हुबलाल के स्थान पर राज्य सरकार का नाम दर्ज कराएँगे। इसे प्रदेश में इस तरह की पहली कार्रवाई माना जा रहा है। इससे माफिया अतीक गैंग के सदस्यों को बड़ा झटका लगा है।

जानकारी के मुताबिक, माफिया अतीक के खिलाफ गैंगस्टर का मुकदमा पंजीकृत है। मुकदमे की विवेचना के दौरान पता चला कि एयरपोर्ट थाना क्षेत्र अतीक की लगभग 25 बीघा जमीन है, जो अनुसूचित जाति के राजमिस्त्री हुबलाल के नाम पर है। पूछताछ में हुबलाल ने बताया कि अतीक ने वर्ष 2015 में धमकाकर उसके नाम पर गरीब-किसानों की जमीन लिखवाई थी। इसके बाद छह नवंबर 2023 को गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 (1) के तहत जमीन कुर्क की गई।

जब्त की गई प्रॉपर्टी की पत्रावली पुलिस कमिश्नर कोर्ट पहुँची, जहां अतीक के वारिस को पक्ष रखने का मौका दिया गया, लेकिन तीन माह बीत जाने बाद भी वह कोई साक्ष्य पेश नहीं कर पाए। इसके बाद पत्रावली जिला न्यायालय की गैंगस्टर कोर्ट में भेज दी गई। वहाँ सुनवाई के बाद कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट में की गई कार्रवाई को पुष्ट करते हुए संपत्ति राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया।

गौरतलब है कि अतीक अहमद की हत्या बीते साल 15 अप्रैल को हुई थी। उमेश पाल की हत्या के मामले में पुलिस ने बीते साल अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को रिमांड पर लिया था। प्रयागराज में 15 अप्रैल 2023 की रात करीब 10 बजे पुलिस अतीक और उसके भाई को जब मेडिकल जाँच के लिए अस्पताल लेकर जा रही थी, उसी वक्त पत्रकार बनकर आए तीन हमलावरों अरुण मौर्या, सनी और लवलेश तिवारी ने दोनों भाइयों को गोलियों से छलनी कर दिया।

‘रुक जाएगा विकास’: कर्नाटक सरकार के 75% आरक्षण वाले बिल से डरा IT कंपनियों का सबसे बड़ा समूह, CM नायडू के मंत्री बेटे ने कहा – आंध्र में स्वागत है, हम देंगे सारी सुविधाएँ

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार ने मैनेजमेंट से जुड़ी 50% और नॉन-मैनेजमेंट से जुड़ी 75% नौकरियों को स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित कर दिया है। इसके बाद IT कंपनियों के सबसे बड़े समूह ने इस कदम की आलोचना की है। ‘कर्नाटक स्टेट एम्प्लॉयमेंट ऑफ लोकल इंडस्ट्रीज फैक्ट्रीज इस्टैब्लिशमेंट एक्ट बिल, 2024’ का विरोध करते हुए ‘नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एन्ड सर्विस कंपनीज’ (NASSCOM) ने कहा है कि वो फैसले को लेकर हताश एवं चिंतित है। उसने याद दिलाया कि तक कंपनियाँ कर्नाटक की GDP में 25% का योगदान देती हैं।

IT कंपनियों के सबसे बड़े संघ ने कहा कि स्थानीय प्रतिभाओं की कमी होने के कारण कंपंनियों को किसी अन्य राज्य का रुख करने को मजबूर होना पड़ सकता है। NASSCOM ने कहा है कि आज की प्रतियोगी दुनिया में ज्ञान पर आधारित कारोबार वहीं स्थापित होंगे जहाँ प्रतिभाएँ होंगी, क्योंकि दक्ष कर्मचारी सफलता के लिए ज़रूरी हैं। नैसकॉम ने कहा कि दुनिया भर में प्रतिभाओं की कमी है और कर्नाटक कोई अपवाद नहीं है। संस्था ने कहा कि किसी भी राज्य को तकनीक का हब बनने के लिए उसे दुनिया भर की प्रतिभाओं को आकर्षित करना होगा, साथ ही उसे स्थानीय प्रतिभाओं को भी तैयार करना होगा।

संगठन ने याद दिलाया कि बेंगलुरु देश का ‘सिलिकन वैली’ माना जाता है, यहाँ सामाजिक-आर्थिक विकास में इसका खासा योगदान है, इसी कारण यहाँ राष्ट्रीय औसत से अधिक प्रतिव्यक्ति आय है। संगठन ने याद दिलाया कि राज्य में 11,000 स्टार्टअप हैं। NASSCOM ने कहा कि नए बिल से न सिर्फ इंडस्ट्री के विकास को बाधित करेगा, बल्कि बल्कि नौकरियों और राज्य की वैश्विक छवि पर भी दुष्प्रभाव डालेगा। संगठन ने कहा कि इस फैसले से कंपनियाँ बाहर जाएँगी।

उधर आंध्र प्रदेश सरकार ने NASSCOM की चिंताओं को जायज बताते हुए कंपनियों को आमंत्रित किया है। उन्होंने नैस्कॉम के सदस्यों से कहा कि हम आपकी निराशा समझते हैं, हम आपकी IT सेवाओं का विस्तार करने के लिए स्वागत करते हैं। उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम में AI एन्ड डेटा क्लस्टर सेंटर बनाया जा रहा है। राज्य के IT, इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार और मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि उनके पिता चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार कंपनियों को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएँ, निर्बाध पॉवर सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा दक्ष प्रतिभाएँ भी देंगी।

‘तलाक, तलाक, तलाक… योर एक्स वाइफ’: दुबई की शहजादी शेखा महरा ने शौहर को छोड़ा, इंस्टाग्राम पर ही शरिया की उड़ा दी धज्जियाँ

दुबई की शहजादी शेखा महरा बिंत मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने इस्लामिक कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए अपने शौहर शेख माना बिन मोहम्मद बिन राशिद बिन माना अल मकतूम को तलाक दे दिया है। इस्लामिक कानूनों के तहत महिला अपने शौहर को तलाक नहीं दे सकती, बल्कि इसके लिए ‘खुला’ की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ये तलाक की तरह ही होता है, लेकिन शहदारी महरा ने सोशल मीडिया पर ही अपने शौहर और शरिया कानून दोनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए ‘तलाक…तलाक…तलाक’ बोल दिया है। शहजादी महरा ने तलाक की घोषणा उस समय में की है, जब उन्होंने महज 2 माह पहले ही बेटी को जन्म दिया है।

शहजादी शेखा महरा बिंत मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की ओर से इंस्‍टाग्राम पर किए गए पोस्‍ट से शौहर के साथ उनकी तल्‍खी का अंदाजा लगाया जा सकता है। शेखा महरा ने पोस्‍ट किया, “डियर हसबैंड…आप किसी और के साथ हैं, ऐसे में मैं आपको तलाक देने की घोषणा करती हूँ। मैं आपको तलाक देती हूँ, मैं आपको तलाक देती हूँ और मैं आपका तलाक देती हूँ। अपना ख्‍याल रखें…आपकी एक्‍स वाइफ।” सोशल मीडिया में शेखा महरा के इस ऐलान से खलबली मच गई। लोगों को पहले लगा कि उनके इंस्‍टग्राम अकाउंट को किसी ने हैक कर लिया है, फिर बाद में हकीकत का पता चला।

शुरुआत में सभी को लगा कि शेखा महरा का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो गया है, लेकिन बाद में ये साफ हो गया कि उन्होंने अपने शौहर को तलाक दे दिया है और उनकी प्रोफाइल पर पोस्ट उन्हीं के द्वारा किया गया है।

बता दें कि पिछले साल ही मई महीने में इस जोड़े की शादी हुई थी। 12 महीने बाद शेखा महरा ने बेटी को जन्म दिया। इस दौरान शेखा माहरा ने बच्चे को जन्म देने के की खबर साझा की थी। वहीं, कुछ समय पहले उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी बच्ची के साथ पोस्ट किया था और लिखा था ‘सिर्फ हम दोनों।’ तभी से इस बात की चर्चा की जा रही थी कि दोनों के बीच कुछ सही नहीं चल रहा है। हालाँकि शेखा माहरा की तरफ से की गई पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, कई लोग राजकुमारी की तारीफ कर रहे हैं।

होटलों, दुकानों और ठेले वालों को मालिक और कर्मचारियों के नामों की लगानी होगी सूची: यूपी में 240 km काँवड़िया मार्ग के लिए जारी हुआ आदेश, ओवैसी उखड़े

हिंदुओं का पवित्र महीना सावन 22 जुलाई 2024 से शुरू होने जा रहा है। इस महीने में हिंदू श्रद्धालु काँवड़ यात्रा करके भगवान भोले नाथ के दरबार जल अर्पित करते हैं। भक्तों की किसी प्रकार की दिक्कत ना हो, इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश में काँवड़ यात्रा का एक प्रमुख मार्ग मुजफ्फरनगर के लोगों के लिए जिला प्रशासन ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

काँवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण एवं कुशलता संपन्न कराने के लिए मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिषेक सिंह ने काँवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित ढाबों और होटलों पर उसके मालिक और संचालकों (उसे चलाने वालों) के नाम लिखने का आदेश दिया है। पुलिस ने हाईवे और नई मंडी, छपार व पुरकाजी, मंसूरपुर व खतौली आदि थानों की पुलिस ने कार्रवाई शुरू करा दी।

मुजफ्फरनगर जिले की सीमा पुरकाजी के गाँव भूराहेड़ी चेकपोस्ट से खतौली के भंगेला व बुढ़ाना, फुगाना, तितावी थानों की तक है, जिसमें काँवड़ यात्रा होती है। जिले के 240 किलोमीटर लंबे काँवड़ मार्ग है। हरिद्वार से आते समय हाईवे पर काफी होटल और ढाबे मुस्लिम समुदाय केे लोगों के भी हैं। इससे काँवड़ियों के इन होटलों और ढाबों में रुकने की संभावना बन जाती है।

इसको देखते हुए ही जिला प्रशासन ने सभी होटल और ढाबों पर प्रोपराइटर व संचालकों के नाम लिखने का आदेश दिया है, ताकि काँवड़ियों में भ्रम ना रहे। एसएसपी अभिषेक सिंह ने कहा, “काँवड़ यात्रा की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। जनपद के 240 किलोमीटर लंबे काँवड़ मार्ग पर जितनी भी होटल, ढाबे या ठेले हैं, जहाँ से भी काँवड़िया अपनी खाद्य सामग्री खरीद सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “सबको निर्देशित किया गया है कि इन होटलों-दुकानों-ढाबों-ठेलों पर प्रोपराइटर या काम करने वालों के नाम जरूर लिखें। यह इसलिए जरूरी है, ताकि किसी भी काँवड़िये के मन में किसी भी प्रकार का कोई संशय ना रहे। इससे ऐसी स्थिति ना बने जिसे कोई आरोप-प्रत्यारोप हो और कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो। यह सब सुरक्षा के लिए है।”

इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल और लोनी के भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने मुस्लिम दुकानदारों ने हिंदू नाम से ढाबा खोलने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये लोग अपना मजहब छिपाकर अपने होटल-ढाबे का नाम जनता वैष्णो ढाबा, साईं ढाबा, कृष्णा होटल आदि रखे हुए हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस पर कार्रवाई करने को कहा था। 

मुजफ्फरनगर प्रशासन के इस आदेश के बाद हैदराबाद से लोकसभा सांसद और AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ने सवाल उठाया है। सोशल मीडिया साइट X पर ओवैसी ने लिखा है, “उत्तर प्रदेश पुलिस के आदेश के अनुसार अब हर खाने वाली दुकान या ठेले के मालिक को अपना नाम बोर्ड पर लगाना होगा, ताकि कोई काँवड़िया गलती से मुसलमान की दुकान से कुछ न खरीद ले। इसे दक्षिण अफ्रीका में अपारथाइड कहा जाता था और हिटलर की जर्मनी में इसका नाम ‘Judenboycott’ था।”

खुलेआम इस्लामी धर्मांतरण और निकाह वाला कार्यक्रम स्थगित, मौलाना तौकीर रज़ा का हिन्दू संगठन कर रहे थे विरोध: बरेली के दंगों में आ चुका है नाम

‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ के अध्यक्ष एवं दरगाह हजरत खानदान के सदस्य मौलाना तौकीर रज़ा खान ने सामूहिक धर्मांतरण एवं निकाह के कार्यक्रम कोे स्थगित कर दिया है। दरअसल, हिंदू संगठनों के विरोध और सावन जैसे पवित्र महीने के शुरू होने से पहले शहर में किसी तरह की अशांति को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। इसको देखते हुए प्रशासन ने इस कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी।

प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं देने को लेकर तौकीर रजा ने कहा, “हम कानून के दायरे में काम करते हैं। सामूहिक निकाह कार्यक्रम प्रशासन की अनुमति के बाद ही आयोजित किया जाएगा। हमने प्रशासन से अनुमति माँगी थी, जो नहीं दी गई। प्रशासन की अनुमति के बिना कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।”

‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल’ के प्रदेश प्रभारी नदीम कुरैशी ने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट ने धर्म परिवर्तन कर जोड़ों का विवाह कराने की अनुमति नहीं दी है। इसलिए कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इस कार्यक्रम में 23 लड़के-लड़कियों का इस्लाम में धर्मांतरण कराने के बाद उनका निकाह कराने की घोषणा की गई थी।

तौकीर रजा के इस घोषणा का हिंदू संगठनों ने खूब विरोध किया था। इसके बाद पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया। पुलिस ने साफ कह दिया था कि बिना अनुमति के इस प्रकार के किसी भी कार्यक्रम का आयोजन नहीं करने दिया जाएगा। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि अगर कोई जोर-जबरदस्ती करने की कोशिश करता है तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा।

बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि किसी को भी शहर या जनपद की शांति व्यवस्था के साथ शरारत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अनुराग आर्य ने कहा कि 15 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट को एक आयोजन के लिए आवेदन दिया गया था, जिसकी जाँच पुलिस कर रही है। जाँच के बाद रिपोर्ट दी जाएगी।

दरअसल, तौकरी रजा ने मीडिया को कहा था कि दूसरे धर्म के 15 लड़के और 8 लड़कियाँ इस्लाम कबूलना चाहते हैं। ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से ही शादी कर रखी है। मौलाना ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से सामूहिक निकाह की अनुमति माँगी गई है। रविवार (21 जुलाई, 2024) को खलील स्कूल में सबसे पहले 5 जोड़ों के इस्लामी धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी किए जाने का प्लान है।

मौलाना तौकीर ने कहा कि इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है। कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। मौलाना ने कहा कि जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश से है, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े।

हिन्दुओं के घरों पर पत्थरबाजी, पुलिस से झड़प: कुछ ऐसे निकला उत्तराखंड में उपचुनाव जीतने वाले काजी निजामुद्दीन का विजय जुलूस, इरफान-अबरार समेत 5 गिरफ्तार

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की मंगलौर विधानसभा सीट पर हुए उप-चुनाव में कॉन्ग्रेस के काजी मोहम्मद निजामुद्दीन को जीत मिली। इस जीत के बाद मंगलौर में कॉन्ग्रेस विधायक का विजय जुलूस निकला, जिसमें कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल काटापत्थरबाजी, झड़प और बवाल की इन घटनाओं में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पचान इरफान, अबरार, कामिल, शमसाद और इरफान नाम के एक अन्य व्यक्ति के रूप में हुई है। इस बवाल में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने कई टीमें बनाई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधानसभा उप-चुनाव में जीत के बाद कॉन्ग्रेस के समर्थकों ने बिना अनुमति के ही विजय जुलूस निकाल दिया। इस विजय जुलूस के दौरान दूसरी पार्टियों के समर्थकों, हिंदू परिवारों के घरों और दुकानों पर पथराव किया। यही नहीं, काजी मोहम्मद निजामुद्दीन के कट्टरपंथी इस्लामिल समर्थकों ने लोगों पर हमला भी किया। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ भी झड़प की और अभद्रता की।

मंगलवार (16 जुलाई 2024) को पुलिस ने बताया कि कॉन्ग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन के विजय जुलूस में दुकानों और घरों पर पथराव किया गया और लाठियों से भी हमला किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन और उनके समर्थकों ने विजय जुलूस निकालने के लिए पुलिस से अनुमति नहीं ली थी। इसके बाद, गुंडों ने इलाके में मौजूद दूसरे दलों के समर्थकों और हिंदू परिवारों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। वे पुलिस कर्मियों से भी भिड़ गए और सड़कों पर हंगामा किया, इस हंगामे के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद पुलिस ने संगीता, एसआई नवीन नेगी और नौशाद की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

इस दौरान काजी निजामुद्दीन के समर्थकों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वो ‘कानून तोड़ेंगे’, क्योंकि विधानसभा उप-चुनाव में कॉन्ग्रेस की जीत के बाद उनके पास इसका ‘लाइसेंस’ है।

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरिद्वार एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने घटना में शामिल सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए। पुलिस ने आरोपियों की पहचान के लिए साक्ष्य जुटाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें भी गठित की हैं। आरोपितों की पहचान के लिए पुलिस टीम वीडियो फुटेज और इंटरनेट पर वायरल कई वीडियो के साथ-साथ मैनुअल इनपुट का विश्लेषण कर रही है।

हिंसक घटना की जाँच के दौरान पुलिस ने पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम इरफान पुत्र जुएब, अबरार पुत्र शुएब और इरफान पुत्र दिलनवाज हैं। ये सभी मोहल्ला मिर्दगान, मंगलौर के रहने वाले हैं। अन्य दो आरोपितों में कामिल पुत्र साकिब और शमशाद पुत्र सनाउल्लाह शामिल हैं। ये सभी सराय अजीज, मंगलौर के रहने वाले हैं। इस मामले में आगे की पुलिस कार्रवाई चल रही है।

‘वो मुख्यमंत्री हैं, आतंकवादी नहीं’: पाकिस्तान और इमरान खान का उदाहरण देकर भी अरविंद केजरीवाल को HC से बेल नहीं दिला पाए सिंघवी, ऑर्डर रिजर्व

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शराब घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर से जमानत नहीं दी है। उच्च न्यायालय ने आदेश को रिजर्व रख लिया और कहा कि सोमवार (29 जुलाई, 2024) को फैसला सुनाया जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश लिखने के लिए समय चाहिए। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इस मामले की सुनवाई की। अरविंद केजरीवाल की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी, विक्रम चौधरी और N हरिहरन ने उच्च न्यायालय में दलीलें पेश की।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल एक मुख्यमंत्री हैं, वो कोई आतंकवादी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ट्रायल कोर्ट ने जमानत दे रखी है। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण दिया जहाँ इमरान खान को एक मामले में रिहा होने के बाद दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लिया जाता है। सिंघवी ने कहा कि हम वो देश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि CBI सिर्फ एक ही चीज कह रही है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल से जेल से बाहर भी पूछताछ की जा सकती है।

CBI की तरफ से पेश हुए वकील DP सिंह ने कहा कि सिंघवी के दावे के उलट अरविंद केजरीवाल को एक गवाह के रूप में नहीं बुलाया गया था बल्कि धारा-160 के तहत आरोपित, संदिग्ध या गवाह किसी से भी पूछताछ की जा सकती है, उन्हें बुलाया जाता है जो तथ्यों से परिचित हों। अभिषेक मनु सिंघवी ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी को ‘इन्सुरेंस अरेस्ट’ कह कर संबोधित किया। वहीं DP सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को जमानत सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए मिली थी।

CBI ने बताया कि अरविंद केजरीवाल को पहले भी गिरफ्तार किया जा सकता था, लेकिन सुनवाई खत्म होने का इंतज़ार किया गया और सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसमें कम्प्लीट स्टे लगाने के बाद ही उन्हें गिरफ्तार किया गया। अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि 17 अगस्त, 2022 को CBI ने जो FIR दर्ज की थी उसमें अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं है। उनका कहना था कि तिहाड़ जेल में भी 3 घंटे केजरीवाल से पूछताछ हुई। उन्होंने बताया कि 2 बार सुप्रीम कोर्ट और 1 बार ट्रायल कोर्ट राहत दे चुका है।