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प्रयागराज, धनबाद, भीलवाड़ा, श्रीनगर… कहीं भगवा को रौंदा, कहीं चले पत्थर, कहीं लहराया फिलिस्तीन का झंडा: मुहर्रम पर ताजिए का जुलूस ही नहीं निकला, देशभर में उपद्रव-बवाल भी हुआ

मुहर्रम के मौके पर देश के अलग-अलग इलाकों से हिंसा की खबरें सामने आई हैं। कहीं ताजिया निकालने के रूट को लेकर विवाद में लाठी डंडे चले तो कहीं हिन्दुओं को घर में घुस कर पीटा गया, इसके अलावा डीजे बजाने को लेकर भी बवाल और पथराव हुआ। देश के अलग-अलग हिस्सों में फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया, इसको लेकर भी बवाल हुआ। पुलिस को मुहर्रम जुलूस के दौरान शान्ति व्यवस्था बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

प्रयागराज: ताजिया निकालने वालों ने घर में घुस हिन्दुओं को पीटा

प्रयागराज के लालापुर इलाके के अमिलिया गाँव में बुधवार (17 जुलाई, 2024) को मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था। यह लोग ताजिया लेकर जुलूस निकाल रहे थे। जब यह जुलूस गाँव में ही रहने वाले अधिवक्ता अवधेश कुमार के घर के पास पहुँचा तो जुलूस में शामिल युवकों ने हुल्लड़ मचाना चालू कर दिया। यह युवक अवधेश कुमार की दीवाल पर चढ़ गए।

जब उनको ऐसा करने से मना किया गया तो उन्होंने अवधेश कुमार के परिवार पर हमला बोला दिया। अवधेश कुमार के साथ ही उनके बेटे और बेटी पर तलवार और कट्टों से हमला किया गया। बीच बचाव करने आए आसपडोस के लोगों पर भी मुहर्रम निकाल रहे लोगों ने हमला किया। इस हमले में अवधेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए।

इलाके में तनाव कम करने के लिए भारी पुलिस और PAC बल को तैनात किया गया है। मामले में FIR भी दर्ज कर ली बजाने गई है और 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अवधेश कुमार ने घर से ₹3 लाख के गहने लूटने का आरोप भी इमरान, मिराज, सरताज समेत 10-12 लड़कों पर लगाया है।

बरेली: डीजे बजाने को लेकर विवाद, पुलिस पर भी हमला

उत्तर प्रदेश के बरेली में भी मुहर्रम पर जम कर हिंसा हुई। बरेली के अलीगंज इलाके में डीजे बजाने को लेकर काफी बवाल हुआ। जानकारी के अनुसार, बरेली के अलीगंज इलाके में मुहर्रम के मौके पर निकाले जाने वाले जुलूस को लकर पहले सहमति बनी थी मुस्लिम बड़ा डीजे नहीं लाएँगे। हालाँकि, उन्होंने यह बाद में नहीं माना और बुधवार को दो बड़े डीजे बाहर से मँगा लिए। इसको लेकर हिन्दू संगठनों ने विरोध किया। इसके बाद शाम को थाने और पुलिस की गाड़ी पर भी पथराव हो गया। बाद में पुलिस बल लगाकर मामला शांत करवाया गया।

भीलवाड़ा: भगवा झंडे को लातों तले रौंदा

भीलवाड़ा के कोटड़ी कस्बे में मुस्लिमों ने मुहर्रम जुलूस के दौरान भगवा झंडा हटाया और उसे रौंदा, यह आरोप हिन्दू संगठनों ने लगाया। हिन्दू संगठनों ने इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। हिन्दू व्यापारियों ने इसके विरोध में बाजार भी बंद कर दिया। हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया कि जुलूस में शामिल लोगों ने जानबूझकर हिन्दू पताकाओं का अपमान किया है।

जालौन: दो गुटों में पथराव, लाठी डंडे चले

उत्तर प्रदेश के जालौन में भी मुहर्रम को लेकर बवाल हुआ। यहाँ डकोर कोतवाली क्षेत्र के मुहम्मदाबाद गाँव में मुस्लिमों के दो गुट आपस में ही भिड गए। बताया गया कि गाँव में दो ताजी के जुलूस निकल रहे थे। यह दोनों ही आपस में पहले ताजिया निकालने को लेकर आपस में भिड़े। इसके बाद पथराव और लाठी डंडे चले। इसमें कई लोग घायल हो गए। इसके बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है और पुलिस बल को तैनात किया गया है।

हजारीबाग: दो पक्षों के बीच बवाल, पथराव

झारखंड के हजारीबाग के बड़कागाँव थाना क्षेत्र के नयाटांड में भी दो पक्षों के बीच हिंसा हो गई। दरअसल, इस इलाके रामनवमी और मुहर्रम के जुलूस को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद है। इसी को लेकर दो युवक धरने पर बैठे हुए थे। उनको गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद जब इसी रूट पर मुहर्रम का जुलूस निकला तो बवाल हो गया। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और पथराव होने लगा। इस पथराव में कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। अब इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया है।

धनबाद: बदल दिया मुहर्रम का रूट, पथराव

धनबाद के पांडरपाला इलाके में मुहर्रम जुलूस का रूट बदलने को लेकर हिंसा हुई। बताया गया कि पांडरपाला इलाके में मुहर्रम का जुलूस कुम्हार टोला में पहुँचा तो रास्ते को लेकर दूसरे पक्ष ने प्रश्न उठाए। इसके बाद बवाल चालू हुआ। यहाँ थोड़ी देर में ही पथराव होने लगा। बताया गया कि इसके बाद घरों पर पत्थर फेंके गए। बताया गया कि दोनों पक्षों ने एक दूसरे के घरों पर लाठी डंडों से भी हमला किया। पुलिस ने यहाँ बल प्रयोग किया। झारखंड में ही बिहार झारखंड सीमा पर भी बड़ा बवाल हुआ और पथराव किया गया।

मोतिहारी: आपस में ही भिड़े मुस्लिम, चली लाठी-गोली

बिहार के मोतिहारी में मुहर्रम के मौके पर मुस्लिमों के दो पक्ष ही पास में भिड गए। बताया गया कि यहाँ भी रूट को लेकर विवाद हुआ। यहाँ के नकरदेई गाँव में एक जुलूस निकल रहा था। इस दौरान दूसरे मुस्लिम पक्ष के लोग बवाल करने लगे। दोनों पक्ष के बीच पथराव भी होने लगा। इसके बाद जुलूस निकाल रहे लोगो ने नईम खान के घर पर फायरिंग कर दी और लाठियों से हमला कर दिया। बाद में पुलिस ने पहुँच कर मामला शांत करवाया।

संथाल परगना में दिखाया फिलिस्तीन का झंडा

झारखंड के दुमका में मुहर्रम के जुलूस के दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया। बताया गया कि दुधानी इलाके में मुहर्रम का जुलूस निकालने के दौरान कुछ युवक फिलिस्तीन का झंडा लहराने लगे। इसके बाद एक बस पर चढ़ कर करतब दिखाया गया। यह फोटो फेसबुक पर भी वायरल की गईं।

झारखंड के गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “संथाल परगना में आदिवासी समाज को भगाकर अब घुसपैठियों का मन इतना बढ़ गया है कि झारखंड की उप राजधानी दुमका जो हेमंत सोरेन जी का कर्म क्षेत्र है वहाँ आज मुहर्रम के जुलूस में फ़िलिस्तीन का झंडा लहराया गया । गृह मंत्रालय को जाँच कर देशद्रोही तालिबानी समर्थकों को फाँसी दिलाना चाहिए।”

श्रीनगर में भी लहराया फिलिस्तीन का झंडा

श्रीनगर में मुहर्रम के जुलूस के दौरान फिलस्तीन के झंडे लहराए गए। इसकी कई फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कई युवकों को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है।

नई नहीं है दुकानों पर नाम लिखने की व्यवस्था, मुजफ्फरनगर पुलिस ने काँवड़िया रूट पर मजहबी भेदभाव के दावों को किया खारिज: जारी की नई एडवायजरी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस ने ताजी एडवायजरी जारी की है, जिसमें दुकानों और होटलों पर मालिकों के नाम लिखने को ऐच्छिक कर दिया है। एक्स पर एक पोस्ट में मुजफ्फरनगर पुलिस ने कहा कि उसका इरादा किसी भी तरह का धार्मिक भेदभाव पैदा करना नहीं है, बल्कि मुजफ्फरनगर जिले से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए है।

मुजफ्फरनगर काँवड़ यात्रा मार्ग पर ये व्यवस्था पहले से चली आ रही है। मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा जारी एडवायजरी में कहा गया है, “श्रावण काँवड़ यात्रा के दौरान समीपवर्ती राज्यों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश होते हुए भारी संख्या में काँवड़िए हरिद्वार से जल उठाकर मुजफ्फरनगर जनपद से होकर गुजरते हैं। श्रावण के पवित्र माह में कई लोग खासकर काँवड़िए अपने खानपान में कुछ खाद्य सामग्री से परहेज करते हैं। पूर्व में ऐसे दृष्टांत प्रकाश में आए हैं, जहाँ काँवड़ मार्ग पर हर प्रकार की खाद्य सामग्री बेचने वाले कुछ दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानों के नाम इस प्रकार से रखे गए, जिससे काँवड़ियं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होकर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई।”

इसमें आगे लिखा है, “इस प्रकार की पुनरावृत्ति रोकने एवं श्रद्धालुओं की आस्था के दृष्टिगत काँवड़ मार्ग पर पड़ने वाले होटल, ढाबे एवँ खानपान की सामग्री बेचने वाले दुकानदारों से अनुरोध किया गया है कि वो स्वेच्छा से अपने मालिक और काम करने वालों का नाम प्रदर्शित करें। इस आदेश का आशय किसी प्रकास का धार्मिक विभेद न होकर सिर्फ मुजफ्फरनगर जनपद से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, आरोप-प्रत्यारोप एवँ कानून व्यवस्था की स्थिति को बचाना है। यह व्यवस्था पूर्व में भी प्रचलित रही है।”

मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा जारी एडवायजरी

काँवड़ यात्रा को लेकर सहारनपुर के डीआईजी अजय कुमार साहनी ने कहा, “पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं कि काँवड़ियों के बीच होटल और ढाबों पर खाने की रेट लिस्ट को लेकर बहस हुई है। इसके अलावा, ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहाँ किसी होटल/ढाबे पर नॉनवेज मिलता है या किसी दूसरे समुदाय के व्यक्ति ने किसी और नाम से होटल/ढाबा खोल लिया है और इससे विवाद हुआ है।”

उन्होंने आगे कहा, “इसके मद्देनजर यह निर्णय लिया गया कि दुकानों/होटल/ढाबों के मालिक/मालिक का नाम बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा, रेट लिस्ट स्पष्ट रूप से लिखी जाएगी और श्रमिकों के नाम भी स्पष्ट रूप से लिखे जाएँगे ताकि किसी भी तरह की कोई समस्या न हो…सभी से बातचीत की गई है और सभी होटल/ढाबे इस पर सहमत हैं…हमारे काँवड़ रूट के लिए यह निर्णय लिया गया है…”

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के जिला प्रशासन में हाल ही में एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया है कि जिले के भीतर जिन रास्तों से कांवड़िये निकलते हैं, उन पर पड़ने वाली खान-पान की दुकानों पर दुकानदार के नाम का बोर्ड लगे। यह आदेश काँवड़ यात्रा में असुविधा ना हो, इसके लिए किया गया है। इस आदेश पर सोशल मीडिया पर लिबरल-वामपंथी समुदाय काफी उछलकूद मचाए हुए है। हालाँकि, यही गैंग तब कोई प्रश्न नहीं उठाता जब खाने-पीने के सामानों में 18% समुदाय की ‘हलाल’ को जिद बहुसंख्यकों पर थोपी जाती है।

गुरु पूर्णिमा पर मध्य प्रदेश के स्कूलों में होंगे 2 दिन के कार्यक्रम, छात्रों को गुरु-शिष्य परंपरा और गुरुकुल के बारे में बताया जाएगा: कॉन्ग्रेस कर रही विरोध

मध्य प्रदेश की मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को गुरु पूर्णिमा पर दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है। हिंदुओं के प्रसिद्ध त्योहार पर ये कार्यक्रम 20 और 21 जुलाई को आयोजित करने के लिए कहा गया है। इन दो दिनों में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। वहीं कॉन्ग्रेस ने इसका विरोध किया है।

मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 20 जुलाई को प्रार्थना के बाद शिक्षकों द्वारा गुरु पूर्णिमा के महत्व और गुरु-शिष्य परंपरा पर महत्व डाला जायेगा। इसके बाद प्राचीन काल में प्रचलित गुरुकुल व्यवस्था एवं उसका भारतीय संस्कृति पर प्रभाव विषय पर निबंध लेखन कराया जाएगा।

विभाग के आदेश में अगले दिन यानी 21 जुलाई 2024 के लिए कार्यक्रम के बारे में विवरण दिया गया था। इस दिन स्कूलों में सरस्वती वंदना, गुरु वंदना, दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण किया जाएगा। इस अवसर पर गुरुजनों और शिक्षकों का सम्मान किया जाएगा। इसके बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा गुरु संस्मरण पर भाषण दिए जाएँगे।

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को गुरु पूर्णिमा पर दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है।
साभार: एमपी ब्रेकिंग

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 जुलाई को जारी आदेश में गुरु पूर्णिमा उत्सव के दूसरे दिन के कार्यक्रम में संतों, शिक्षकों और छात्रों को आमंत्रित करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही इस दौरान संबंधित स्कूल के सेवानिवृत्त शिक्षकों और स्कूल के पूर्व विद्यार्थियों को भी आमंत्रित करने के लिए कहा गया है।

हालाँकि, विपक्षी कांग्रेस ने स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देश का विरोध करते हुए कहा कि यह धर्मनिरपेक्षता की भावना के खिलाफ है, जो संविधान का अभिन्न अंग है। राज्य कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता अब्बास हाफिज ने कहा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहाँ सभी धार्मिक समुदायों के छात्र स्कूल और कॉलेजों में पढ़ते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “इसलिए स्कूलों में किसी एक धर्म से जुड़ी कोई नई परंपरा शुरू करने से विवाद पैदा हो सकता है। अगर एक धर्म से जुड़ी परंपरा को सभी के लिए अनिवार्य कर दिया जाता है तो दूसरे समुदायों के छात्र अपनी परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम शुरू करने की माँग कर सकते हैं।”

कहा जाता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। वेद व्यास ने ही महाभारत की रचना की थी और वेदों का वर्गीकरण किया था। इसके अलावा, गुरु पूर्णिमा के दिन ही भगवान गौतम बुद्ध ने सबसे पहले अपने पाँच शिष्यों को दिया था। ये सभी ब्राह्मण थे और सिद्धार्थ को पहले से जानते थे। इसे हिंदुओं के साथ-साथ बौद्ध और जैन धर्म लोगों द्वारा श्रद्धा से मनाया जाता है।

शाजिया बनी सपना… 14 की घर वापसी, 4 का शुद्धिकरण: इंदौर के खजराना मंदिर में फिर से मुस्लिम बने हिंदू, कहा- इस्लाम की कुरीतियों से थे परेशान

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित खजराना मंदिर में 14 मुस्लिम लोगों ने हिंदू धर्म में स्वेच्छा से घर वापसी की है। मंदिर में पूरा कार्यक्रम विधि-विधान से संपन्न हुआ। घर वापसी करने वालों ने सनातन स्वीकार करके अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस धर्म का न आरंभ है और न ही अंत है। इसके चलते वह हिंदू धर्म में आ रहे हैं।

शाजिया हाशमी से सपना बनने वाली युवती ने कैमरे पर बताया कि वो बिना किसी के दबाव के हिंदू धर्म में आ रही हैं। उन्हें ये धर्म बहुत अच्छा लगता है इसलिए उन्होंने ये निर्णय लिया। इसी प्रकार से अलफीजा से आलिया बनने वाली लड़की ने भी सनातन में आने की खुशी जताई।

घर वापसी करने वालों के नाम नीचे दिए गए हैं। आखिर के चार नाम वो हैं जिन्होंने मुस्लिम लड़की से शादी की थी, इसलिए कार्यक्रम में उनका शुद्धिकरण भी कराया गया। कुल 18 नाम हैं।

  1. शाजिया हाशमी से सपना
  2. अलफीजा से आलिया
  3. आमिना से अमृता
  4. आरजू से एलिना
  5. अदनान शाह से आरव
  6. तरन्नुम बी से तम्मन्ना
  7. मुमताज बी से मीना
  8. मुबारक शाह से मुकेश
  9. समीर से सावन
  10. सोफिया से भूमिका
  11. अबेल मसीह से भरत
  12. अयाना से प्रशंसा
  13. अफसाना से आरती
  14. मरयम से आश्रिता
    शुद्धिकरण वाले
    15.राकेश
  15. महिमा
  16. अनिता
  17. अभिषेक

बता दें कि ये घर वापसी विहिप नेता संतोष कुमार शर्मा के नेतृत्व में कराई गई है जिन्हें पिछले दिनों घर वापसी अभियान के कारण धमकी की भी मिली थी। हालाँकि वह इन धमकियों से डरे नहीं और कहा कि आने वाले समय में भी वो घर वापसी करवाएँगे। संतोष ने ऑपइंडिया से बात करते 14 लोगों की घर वापसी और 4 लोगों के शुद्धिकरण की जानकारी की पुष्टि की। मालूम हो कि उन्होंने पिछले महीने भी खजराना के मंदिर में 30 लोगों को हिंदू धर्म में घरवपासी कराई थी। इस बार भी ये संख्या 14 है। वहीं अप्रैल माह में ये गिनती 8 थी। उस समय 8 मुस्लिमों ने हिंदू धर्म को स्वीकार था।

इस घर वापसी से पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई थीं। इन 18 लोगों में 2 मंदसौर के रहने वाले हैं और कुछ इंदौर के खजराना के ही हैं। इन लोगों ने बताया है कि ये लोग मुस्लिम समाज की विभिन्न तरह की कुरीतियों से परेशान हो गए थे इसलिए ये हिंदू धर्म में आए।

वहीं एक मुस्लिम महिला ने बात करते हुए कहा कि उसे बचपन से ही मंदिर जाना और हिंदुओं को देखकर जिस तरह से वह पूजा पाठ करते थे काफी अच्छा लगता था और हमारे मुस्लिम समुदाय में इस तरह का कोई कार्यक्रम नहीं होता था। साथ ही उनका तो यह भी कहना है की मस्जिदों में भी मुस्लिम महिलाओं को जाने पर प्रतिबंध है और इन्हीं सब कारणों से परेशान होकर उसने मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया।

कदाचार देशव्यापी हो तभी दोबारा हो सकती है NEET परीक्षा: सुप्रीम कोर्ट, प्रवेश परीक्षा रद्द करने को लेकर दाखिल की गईं हैं 40+ याचिकाएँ

पेपरलीक और परीक्षा में अनियमितता से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (18 जुलाई 2024) को सुनवाई की। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि NEET-UG 2024 की दोबारा परीक्षा तभी संभव हो सकती है, जब ‘ठोस आधार’ पर यह बात सामने आए कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पवित्रता बड़े पैमाने पर ‘प्रभावित’ हुई है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने यह टिप्पणी की। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की पीठ NEET-UG विवाद से संबंधित कदाचार और अनियमितताओं से संबंधित 40 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई शुरू कर रही है। इन याचिकाओं में परीक्षा को रद्द करके NEET की परीक्षा दोबारा कराने की माँग की गई है। पीठ में सीजेआई के अलावा जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेन्द्र हुड्डा दलील पेश कर रहे थे। CJI चंद्रचूड ने हुड्डा से कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पेपरलीक व्यवस्थित था और इसने पूरी परीक्षा को इस तरह प्रभावित किया कि पूरी परीक्षा को रद्द करना आवश्यक हो गया है। CJI ने कहा, “केवल इसलिए कि 23 लाख में से केवल 1 लाख को प्रवेश मिलेगा, हम दोबारा परीक्षा का आदेश नहीं दे सकते।”

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अधिवक्ता हुड्डा से देश भर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या के बारे में भी पूछा। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता हुड्डा ने पीठ को बताया कि यह संख्या 1,08,000 है। उन्होंने तर्क दिया कि दोबारा परीक्षा होने पर केवल उतने ही अभ्यर्थी होंगे, जितने पहले 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे।

मुख्य न्यायाधीश ने हुड्डा से उन स्थितियों पर भी जवाब माँगा, जब कोई अभ्यर्थी ‘वैध रूप से’ 1,08,000 परीक्षार्थियों की श्रेणी में नहीं आता। इस पर हुड्डा ने कहा कि शेष 22 लाख उम्मीदवार एक मौका पाना चाहेंगे। इस पर CJI ने कहा, “हम केवल इसलिए दोबारा परीक्षा का आदेश नहीं दे सकते, क्योंकि वे दोबारा परीक्षा देना चाहते हैं। यह तभी हो सकता है जब परीक्षा की पवित्रता प्रभावित हुई हो।”

दरअसल, केंद्र सरकार और NEET-UG परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी– NTA ने फिर से परीक्षा कराने की माँग का विरोध किया है। केंद्र और एजेंसी ने कहा कि कथित कदाचार और अनियमितताएँ स्थानीय स्तर की हैं और इससे संपूर्ण मेडिकल परीक्षा की पवित्रता पर कोई असर नहीं पड़ा है।

इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। इस हलफनामे में कहा गया था कि आईआईटी-मद्रास द्वारा आयोजित नीट-यूजी 2024 परिणामों के डेटा विश्लेषण से पता चला है कि न तो बड़े पैमाने पर कदाचार का कोई संकेत था और न ही उम्मीदवारों का कोई स्थानीय समूह इससे लाभान्वित हो रहा था और ना ही असामान्य रूप से उच्च अंक प्राप्त कर रहा था।

NTA ने भी अलग से हलफनामा पेश करते हुए कहा कि राष्ट्रीय, राज्य और शहर स्तर पर अंकों के वितरण के उसके विश्लेषण से पता चला है कि कुछ नीट उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त किए गए उच्च अंक व्यवस्थित विफलता नहीं थे। परीक्षा आयोजित कराने वाली इस एजेंसी ने आगे कहा कि पाठ्यक्रम में लगभग 25 प्रतिशत की कमी से उम्मीदवारों को परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करने में मदद मिली।

‘भ#$गी हो, भ$गी बन के रहो’: जामिया के 3 प्रोफेसर पर FIR, दलित कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का डाल रहे थे दबाव; कहा- ईमान लाओ, हम रखेंगे ख्याल

दिल्ली पुलिस ने 15 जुलाई 2024 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नाज़िम हुसैन अल जाफ़री, मोहम्मद नसीम हैदर और प्रोफेसर शाहिद तसलीम के खिलाफ़ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(पी) और 3(1)(क्यू) के तहत एफ़आईआर दर्ज की है। ये एफ़आईआर राम निवास सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई है, जो विश्वविद्यालय में प्राकृतिक विज्ञान डिपार्टमेंट में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। इस एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

इस एफआईआर में आरोपित नाज़िम हुसैन अल-जाफ़री जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार हैं तो नसीम हैदर डिप्टी रजिस्ट्रार। इनके साथ ही आरोपित शाहिद तसलीम प्रोफ़ेसर हैं। इस मामले में विश्वविद्यालय में बतौर असिस्टेंट कार्यरत राम निवास सिंह (एससी वर्ग) ने तीनों पर जाति-आधारित गाली-गलौच, अमानवीय व्यवहार करने और उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर करने, दुर्व्यवहार समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

एफआईआर के मुताबिक, राम निवास सिंह 2007 से जामिया में अपर डिपीजन क्लर्क के रूप में नौकरी कर रहे थे। बीच में वो दिसंबर 2015 से नवंबर 2021 तक IHBAS में काम कर रहे थे और दिसंबर 2021 में फिर से जामिया लौट आए। इस दौरान वो विश्वविद्यालय में उच्च पदों पर अप्लाई कर सकें, इसके लिए उन्होंने एनओसी माँगा, तो उनके एनओसी एप्लिकेशन को बिना कोई वजह बताए खारिज कर दिया गया। यही नहीं, उन्हें प्रशासनिक कामों का बहाना बताकर हर 2-3 महीनों में ट्रांसफर किया जाता रहा। इसके बाद उन्होंने एससी कमीशन में भी मामला दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जामिया में किसी को भी आगे बढ़ने से नहीं रोका जा रहा, सिवाय उनके।

एससी आयोग में शिकायत के बारे में पता चलने पर रजिस्टार नाजिम हुसैन अल-जाफरी ने उन्हें 13 अप्रैल 2023 को दोपहर 12.30 बजे कनीज फातिमा के निर्देश पर बुलाया और घंटों उन्हें ऑफिस के बाहर इंतजार कराया। इसके बाद जब उन्हें ऑफिस में बुलाया गया, तो अल-जाफरी के साथ कई लोग मौजूद थे।

ऑफिस में मीटिंग के दौरान अल-जाफरी ने कहा, “रामनिवास, तुम किस तरह के कर्मचारी हो? तुम इस विश्वविद्यालय से पैसे ले रहे हो, तुम्हारे बच्चे यहीं पले-बढ़े हैं। तुम सीधे आयोग (एससी कमीशन) के पास नहीं जा सकते।” कुछ मिनट बाद जब वो अज्ञात व्यक्ति बाहर चला गया, तब अल-जाफरी ने राम निवास सिंह को धमकाना शुरू किया। अल जाफरी ने कहा, “तुम निचली जाति के हो, तुम भंगी हो, और तुम्हें ऐसे ही रहना चाहिए। तुम्हारे जैसे लोगों को आरक्षण के आधार पर नौकरी मिलती है, लेकिन फिर भी उन्हें अपनी जगह का पता नहीं होता। यह मत भूलो कि जामिया एक मुस्लिम विश्वविद्यालय है, और तुम्हारी नौकरी हमारी दया पर है।” इस दौरान उन्हें यौन उत्पीड़न के फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी दी गई, जिसमें उनकी नौकरी भी जा सकती थी। यही नहीं, अल-जाफरी के खिलाफ किसी भी शिकायत के लिए उच्च अधिकारियों से भी मिलने से मना कर दिया गया और जातिसूचक गालियाँ बकी गईं।

स्रोत: दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर का अंश

इस दौरान राम निवास ने उनकी बातें रिकॉर्ड करने की कोशिश की, जिसमें कुछ ही हिस्सा ही वो रिकॉर्ड कर सके। इस बीच अल-जाफरी ने उनका फोन देख लिया और उसे छीन लिया। कुछ दिनों के बाद 29 अप्रैल 2023 को जामिया में वैकेंसी निकाली गई, लेकिन एससी-एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षण नहीं दिया गया। जिसके बाद उन्होंने आरक्षण की माँग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इस मामले में 16 जून 2023 को दिल्ली हाई कोर्ट ने जामिया को निर्देश दिया कि वो हर पद के लिए आरक्षण के नियमों के हिसाब से वैकेंसी निकाले।

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद राम निवास सिंह की जामिया में प्रताड़ना बढ़ा दी गई। इसके बाद अल-जाफरी के इशारे में प्रोफेसर शाहिद तसलीम ने एक फर्जी शिकायत दर्ज कराई, ताकी उनके पेशेवर विकास को बाधित किया जा सके। इसमें उनके लिए ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया। इसके कुछ समय बाद उन्हें उनके खिलाफ की गई शिकायत की कॉपी मिली, जिसका उन्होंने आधिकारिक तौर पर जवाब दिया। उन्हें प्रताड़ित करने की सारी सीमाएँ पार कर गई गई। इस बीच, उन्होंने जब दिल्ली राज्य औद्योगिक एवँ अवसंरचना एवँ विकास निगम (DSIIDC) में प्रतिनियुक्ति के आधार पर नौकरी के लिए अप्लाई किया, तो जान बूझकर उनके आवेदन को लटका दिया गया।

यही नहीं, उनके विजिलेंस क्लियरेंस में ‘कारण बताओ’ नोटिस के बारे में भी लिखा गया है, जिसे राम निवास सिंह ने ‘जाति आधारित भेदभाव’ करार दिया। इस बबारे में उन्होंने जब अपने पूर्व एचओडी शाहिद तसलीम से बात की, तो तसलीम ने बताया कि अल-जाफरी के कहने पर ही उन्होंने राम निवास की लिखिति शिकायत की थी। ऐसा करने के लिए उन्हें मजबूर किया गया था।

इस बीच, राम निवास सिंह ने अल-जाफरी से उनके चैंबर में मुलाकात की और इस प्रताड़ना को रोकने की माँग की। लेकिन तब जाफरी ने उनके सामने इस्लाम अपनाने का ऑफर रख दिया। एफआईआर के मुताबिक, अल जाफरी ने कहा, “अपने अंदर ईमान लाओ, मैं सब ठीक कर दूँगा। कलमा पढ़ लो, सब ठीक हो जाएगा। मैं तुम्हारे बच्चों का भविष्य भी बना दूँगा। तुम्हें हिंदू धर्म से क्या मिला? जामिया ने सचिन को मोहम्मद अली बना दिया और उसकी जिंदगी संवार दी। उसे ड्राइवर की स्थाई नौकरी मिल गई क्योंकि उसने दीन को मान लिया।”

स्रोत: दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर का अंश

पीड़ित राम निवास सिंह ने इसके बाद भी कई बार अल-जाफरी से मुलाकात की, लेकिन इस्लाम अपनाने से इनकार कर दिया। जिसके बाद अल-जाफरी ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि “मैं शिकायत वापस नहीं लूँगा। तुमने जामिया को चुनौती दी है, तो इसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी। जामिया मुस्लिमों के लिए है, काफिरों के लिए नहीं।” जाफरी ने सिंह के खिलाफ़ “जाहिल”, “चमार”, “भंगी” और “काफ़िर” जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।

विवादों से भरा रहा है जामिया मिल्लिया इस्लामिया का इतिहास

जामिया मिल्लिया इस्लामिया का नाम कई बार विवादों में रहा है। कई मौकों पर एससी/एसटी कर्मचारियों पर अत्याचार की खबरें आई हैं और विश्वविद्यालय के कुलपति को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने 2023 में तलब भी किया था।

यह कार्रवाई हरेंद्र कुमार की 2018 में की गई शिकायत के आधार पर की गई थी। कुमार यूनिवर्सिटी के अधीन आने वाली जामिया मिडिल स्कूल में गेस्ट टीचर थे। उनका आरोप है कि दलित होने की वजह से स्कूल के हेडमास्टर मोहम्मद मुर्सलीन उन्हें अपमानित और प्रताड़ित करते थे। 2018 में नौकरी से निकाले जाने के बाद कुमार ने यह शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें हेडमास्टर पर अन्य शिक्षकों के सामने अपने लिए जातिसूचक संबोधन के इस्तेमाल का आरोप लगाया था।

नियुक्ति और प्रमोशन में एससी/एसटी के लिए आरक्षण का मामला

जामिया की वॉइस चांसलर नजमा अख्तर को 2022 में भी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने समन जारी किया था। आरोप थे कि विश्वविद्यालय नियुक्तियों और प्रमोशन में कानूनन अनुसूचित जनजाति/ जाति के लोगों को मिलने वाले आरक्षण को लागू ही नहीं करता। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस जानबूझकर लागू नहीं करने का आरोप है।

विश्वविद्यालय में ही काम करने वाले हरेंद्र कुमार नाम के व्यक्ति आयोग में शिकायत कर नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी नियमों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। अनुसूचित जाति से आने वाले कुमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उनकी नियुक्ति यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित एक स्कूल में अतिथि कंप्यूटर शिक्षक के रूप में हुई थी। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके खिलाफ साजिश रची और बाद में उन्हें अवैध तरीके से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसी मामले को लेकर पिछले साल 2021 में भी आयोग ने वीसी को तलब किया था।

पूजा खेडकर की माँ होटल से हुई गिरफ्तार, नाम बदलकर लिया था कमरा: महिला IAS के पिता नौकरी में रहते 2 बार हुए थे सस्पेंड, अब हैं फरार

महाराष्ट्र की महिला ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर का चिट्ठा खुलने के बाद अब उनके माता-पिता के खिलाफ जाँच जारी है। एक खबर के अनुसार जहाँ पता चला है कि पुलिस ने उनकी माँ मनोरमा खेडकर को महाड के होटल से हिरासत में लिया है। वहीं पिता दिलीप खेडकर को लेकर जानकारी सामने आई है कि उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो अपनी जाँच कर रहा है। उन पर उनकी सर्विस में रहते हुए दो बार घूस लेने के आरोप हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, मनोरमा खेडकर, जिनपर किसानों को धमकाने का आरोप है, उनको लेकर पुणे ग्रामीण के एसपी पंकज देशमुख ने बताया कि उन्होंने महाड से पूजा खेडकर की माँ को हिरासत में ले लिया है। वह होटल में पाई गई हैं। उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस लेकर आ रही है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एक वीडियो भी सामने आई है जिसमें मनोरमा खेडकर को पुलिस ने पकड़ा हुआ है और पत्रकार उनसे सवाल कर रहे हैं कि उन्होंने आखिर क्यों किसानों को धमकी दी थी। वीडियो में मनोरमा को अपना चेहरा ढककर पुलिस के साथ जाते हुए देखा सकता है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक मनोरमा खेडकर महाड के होटल में नाम बदलकर रुकी थीं। उनके साथ एक लड़का भी था। इस लड़के को उन्होंने अपना बेटा बताया था। दोनों ने होटल का कमरा 1 हजार रुपए में लिया था। बाद में दोनों खाना खाने भी नहीं आए। होटल मालिक ने बताया कि उनके पास सिर्फ एक बैग था और कमरे में जाते ही उन्होंने उसे लॉक कर लिया। हालाँकि बाद में रात के करीब 2 बजे पुलिस आई और उन्हें हिरासत में लिया।

वहीं पूजा खेडकर के पिता की बात करें तो यही पता चला है कि वो अभी तक फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में है। इस बीच जानकारी आई है कि दिलीप खेडकर जो वर्तमान में वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता हैं वह प्रशासनिक अधिकारी रहते हुए दो बार भ्रष्टाचार के मामले में सस्पेंड हुए थे। एक बार 2018 में और एक बार 2020 में। इसके अलावा करीबन 300 छोटे व्यापारियों ने उनके खिलाफ 2015 में शिकायत दर्ज कराई थी कि वो उन्हें बेवजह परेशान करते हैं।

2018 में दिलीप खेडकर जब रीजनल ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे थे तब स्थानीय आरा मिल और लकड़ी व्यापारी संघ ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने उनकी बिजली और पानी बहाल करने के लिए 25000 से 50000 तक की रिश्वत माँगी थी। इसके बाद 2019 में उनके ऊपर एक कंपनी से 20 लाख रुपए माँगने का आरोप लगा था। एंटी करप्शन ब्यूरो उनके खिलाफ लगे आरोपों की जाँच कर रहा है। उनकी गाड़ी, उनकी संपत्ति सब जाँच के घेरे में है। इसके अलावा ये भी पता चला है कि दिलीप खेडकर एक बार 6-7 महीने के लिए बिन बताए गायब हो गए थे।

बिना परोल के 24 साल से जेल में बंद हैं रवींद्र पाल उर्फ दारा सिंह, 60+ हो चुकी है उम्र: रिहाई की संस्तुति के बावजूद फाइल दबाए रही ओडिशा सरकार, अब सुप्रीम कोर्ट से आस

कुल 4 केसों में 1 से लेकर उम्रकैद की सजा काट रहे रवींद्र कुमार पाल उर्फ़ दारा सिंह की रिहाई के लिए उनके भाई ने 9 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। अरविन्द कुमार पाल की तरफ से दायर की इस याचिका में वकील के तौर पर विष्णु शंकर जैन पेश होंगे। ऑपइंडिया की टीम ने रविवार (14 जुलाई 2024) को पिछले 24 साल से ओडिशा की जेल में बंद दारा सिंह के घर जाकर उनके परिवार से मुलाकात की और इस संबंध में जानकारी ली।

दारा सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के रहने वाले हैं। दिल्ली से हम ट्रेन से उनके गृहनगर के नजदीकी स्टेशन फफूँद पहुँचे। यहाँ से हम एक प्राइवेट वाहन से औरैया शहर वाले मार्ग पर पड़ने वाले बाजार ककोड़ गए, जो लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है। रास्ते में हमने एक जगह एक बाइक सवार से रास्ता पूछा तो उसने हताशा भरे स्वर में तुरंत सवाल दाग दिया।

उसने कहा, “अरे वही दारा सिंह क्या जो हिन्दुओं को ईसाई बनाने वाले पादरी को मारे थे? उनके साथ तो बहुत गलत हुआ।” बहरहाल उन्होंने रास्ता बताया और ककोड़ मुख्य कस्बे में सड़क से 200 मीटर अंदर दारा सिंह के घर पर उनके भाई अरविन्द कुमार मौजूद मिले। अरविन्द कुमार ने दारा सिंह के लिए 24 साल तक लड़ी गई कानूनी लड़ाई के अधिकाँश कागजात सहेज कर रखे है।

कई बार रिहाई की संस्तुति, पर ओडिशा सरकार द्वारा नजरअंदाज

आखिरकार हम रवींद्र पाल उर्फ दारा सिंह के घर पहुँचे। वहाँ उनके भाई अरविन्द कुमार पाल से मुलाकात हुई। उन्होंने हमें बताया कि ओडिशा की जेल से औरैया के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को दारा सिंह की रिहाई के संबंध में समय-समय पर पत्र आते रहे हैं। इन पत्रों के जवाब में यहाँ के DM और SP ने उनकी रिहा की संस्तुति की। इसके बावजूद ओडिशा की तत्कालीन सरकार ने इसकी अनदेखा की।

अरविन्द पाल ने हमें सबूत के तौर पर 28 फरवरी 2018 का एक पत्र दिखाया, जिसमें औरैया के जिलाधिकारी की साइन और मोहर लगी थी। यह पत्र क्योंझर जेल ओडिशा से 18 नवम्बर 2017 को माँगी गई एक आख्या पर जवाब के तौर पर भेज गया था। उसमें जिले के पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए जिलाधिकारी ने पत्र संख्या 821 में लिखा था, “रवींद्र कुमार पाल उर्फ़ दारा सिंह को समय पूर्व रिहाई (प्रीमच्योर रिलीव) पर रिहा करने की संस्तुति की जाती है।”

DM औरैया का पत्र

ऑपइंडिया के पास 18 जनवरी 2018 को पुलिस अधीक्षक औरैया द्वारा जारी आख्या भी मौजूद है। इस आख्या में SP औरैया ने भी दारा सिंह को रिहाई योग्य माना है। इसके बाद 22 सितंबर 2022 को एक बार फिर से SP औरैया ने ओडिशा की क्योंझर जेल द्वारा माँगी गई आख्या पर अपना जवाब दाखिल किया। इसमें भी पुलिस अधीक्षक औरैया ने दारा सिंह की समय पूर्व रिहाई की संस्तुति की थी।

SP औरैया का पत्र

ऑपइंडिया से बात करते हुए अरविन्द कुमार पाल ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा बार-बार दारा सिंह को रिहा किए जाने की रिपोर्ट लगाने के बावजूद तत्कालीन ओडिशा सरकार ने उन पत्रों को अनदेखा किया। उन्होंने ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अगुवाई वाली बीजू जनता दल की सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।

प्रधानमंत्री कार्यालय से माँगे जवाब को भी ओडिशा सरकार ने घुमाया

दारा सिंह के छोटे भाई ने हमें आगे बताया कि उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों की आख्या को ओडिशा सरकार द्वारा लगातार अनदेखा करने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से गुहार लगाई। अरविन्द पाल ने 19 मई 2021 को प्रधानमंत्री कार्यालय दिल्ली को पत्र भेज कर दारा सिंह की रिहाई की माँग की।

अपने पत्र में अरविंद कुमार पाल ने तर्क दिया कि पिछले 21 सालों में उनके बड़े भाई रवींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह को कभी परोल नहीं मिला। इसके अलावा, भी उन्होंने कई बिंदुओं पर सरकार का ध्यान खींचा। अरविन्द का आरोप है कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जब इस पत्र पर ओडिशा सरकार से जवाब तलब किया गया तो उधर से बस मामले को टालने जैसे जवाब मिलते रहे।

प्रधानमंत्री से भी गुहार

अरविन्द कुमार पाल ने हमें 14 जुलाई 2021 का एक पत्र दिखाया, जो ओडिशा के DIG जेल द्वारा जारी किया गया था। इस पत्र में उन्होंने ओडिशा के गृह सचिव को बताया है कि 9 जुलाई 2021 को पूरे मामले की रिपोर्ट क्योंझर जेल के सुपरिंटेंडेंट दखिल कर चुके हैं। आगे की गेंद DIG जेल ने राज्य सरकार के पाले में डाल दी थी।

DIG जेल ओडिशा का पत्र

अब 28 साल से ज्यादा समय तक जेल में

ऑपइंडिया ने 9 जुलाई 2021 को क्योंझर जेल ओडिशा के सुपरिंटेंडेंट द्वारा दाखिल उस रिपोर्ट की पड़ताल की। अपनी इस रिपोर्ट में जेल सुपरिंटेंडेंट ने स्वीकार किया है कि जुलाई 2021 तक दारा सिंह ने छूट सहित 25 साल 3 महीने से अधिक समय की सजा काट ली है।

आगे की कार्रवाई के लिए जेल अधीक्षक ने उच्चाधिकारियों को अधिकृत बताया है। हालाँकि अरविन्द कुमार पाल का आरोप है कि इस रिपोर्ट पर अब तक ओडिशा शासन द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया और फ़ाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

जेल सुपरिंटेंडेंट की आख्या

स्थानीय थाने में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं

दारा सिंह मूलत: औरेया जिले के दिबियापुर थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। ओडिशा जेल से उनकी रिहाई के लिए जो आख्या माँगी गई थी, उसके बाद जिला प्रशासन ने स्थानीय थाने से दारा सिंह के रिकॉर्ड निकलवाए थे। 15 सितंबर 2022 को थाना दिबियापुर के सब इंस्पेक्टर शेर सिंह ने अपनी जाँच रिपोर्ट पेश की थी।

इस जाँच रिपोर्ट में सब इंस्पेक्टर शेर सिंह ने कहा था कि थाना दिबियापुर में दारा सिंह का कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं है। अपनी इस जाँच आख्या में स्थानीय थाने के अधिकारी ने भी दारा सिंह को समय पूर्व रिहा करने की संस्तुति की थी।

स्थानीय थाने पर नहीं है दारा सिंह का कोई आपराधिक रिकॉर्ड

जेल के कैरेक्टर सर्टिफिकेट में भी उत्तम व्यवहार

ओडिशा की क्योंझर जिला जेल के सुपरिटेंडेंट ने 10 जून 2022 को रवींद्र कुमार पाल उर्फ़ दारा सिंह का चरित्र प्रमाण पत्र जारी किया है। इस प्रमाण पत्र में उन्होंने बताया है कि क्योंझर जेल में दारा सिंह पिछले 15 वर्षों से जेल काट रहे हैं।

इसमें से 3 साल की सजा तो प्रमाण पत्र जारी करने वाले तत्कालीन जेल सुपरिटेंडेंट की मौजूदगी में काटी गई है। जेल सुपरिंटेंडेंट की इस आख्या में दारा सिंह के जेल स्टाफ व अन्य कैदियों के प्रति व्यवहार को अच्छा और संतोषजनक बताया गया है।

जेल द्वारा जारी कैरेक्टर सर्टिफिकेट में दारा सिंह का व्यवहार अच्छा

योगी आदित्यनाथ से भी उम्मीद

अरविन्द कुमार पाल ने 11 मार्च 2023 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजा। इस पत्र में उन्होंने दारा सिंह को 23 साल तक पेरोल नहीं मिलने की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाई थी। दारा सिंह के भाई ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कई बार दारा सिंह की रिहाई की संस्तुति की भी जानकारी अपने पत्र में दी है।

पत्र में अरविंद कुमार पाल ने कहा है कि दारा सिंह उर्फ़ रवींद्र कुमार पाल की उम्र अब 60 साल से अधिक हो चुकी है। ऐसे में उनके जीवन का बाकी समय उनके पैतृक आवास में अपने परिवार के लोगों के बीच बिताने की अनुमति दी जाए।

CM योगी आदित्यनाथ से भी गुहार

सब कुछ सही होने पर नहीं हुई सुनवाई तो अंतिम सहारा सुप्रीम कोर्ट

अरविन्द कुमार पाल ने हमें बताया कि उत्तर प्रदेश के थानेदार से लेकर SP और DM लगातार उनके भाई को रिहा किए जाने की संस्तुति कर रहे थे। जेल के सर्टिफिकेट में भी उनका व्यवहार अच्छा बताया गया। ओडिशा प्रशासन की आख्या में उनकी सजा 25 साल से अधिक (छूट सहित) गिनी गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय तक के पत्र को ओडिशा की राज्य सरकार घुमाती रही। ऐसे में उनको अंतिम उम्मीद और सुप्रीम कोर्ट से ही दिखी।

अरविन्द कुमार पाल की इस याचिका में ओडिशा राज्य सरकार, वहाँ के जेल DG और जेल सुपरिंटेंडेंट क्योंझर को विपक्षी बनाया गया है। याचिका पर अगली सुनवाई 27 अगस्त 2024 को हो सकती है। दारा सिंह के परिजनों को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा। अरविन्द कुमार के मुताबिक ओडिशा की राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में यह बताना ही पड़ेगा कि उनके हिसाब से उम्रकैद की सजा कितने साल की है और वो भी तक जब कई नसक्ली और अन्य दुर्दांत अपराधी प्रदेश में 15 साल की सजा के बाद छोड़े जा चुके हैं।

गौरक्षकों को देख नदी में कूद गए चाँद मियाँ, गुड्डू खान और सद्दाम कुरैशी … मचाया ‘मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग’ का प्रलाप, SIT ने बताया- न किसी ने पकड़ा, न किसी ने पीटा

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में जून माह में हुई तीन मुस्लिमों की मौत के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जाँच में सामने आया है कि इन तीनों की मौत सूखी नदी में कूद कर चोटिल होने के कारण हुई थी। इस मामले में पहले आरोप लगाया गया था कि इन तीनों की मौत मॉब लिंचिंग के कारण हुई।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की जाँच कर रही SIT ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में बताया है कि पाँच गौरक्षक इन मुस्लिमों का एक गाड़ी में पहले से इन्तजार कर रहे थे। गौरक्षकों को यह सूचना था कि यह तीनों एक ट्रक में भर कर गोवंश ले जा रहे हैं।

उन्होंने इन्हें रोक कर ट्रक की जाँच करने का प्रयास भी किया था लेकिन तीनों ने ही ट्रक रोकने की जगह उसे भगा दिया था। इसके बाद गाड़ी सवार पाँच लोगों ने उनका पीछा किया था। ट्रक में सवार लोगों ने इस दौरान 53 किलोमीटर तक भागने का प्रयास किया था।

चार्जशीट में बताया गया कि इसके बाद वह आरंग में स्थित महानदी के पुल पर ट्रक रोक कर कूद गए थे। उन्होंने नदी में यह सोच कर छलाँग लगाई थी कि इसमें पानी बह रहा है। हालाँकि, नदी उस दौरान सूखी थी और यह तीनों ही इसमें गिरने से घायल हो गए थे।

इस दुर्घटना के कारण चाँद मियाँ (23) की मौत तुरंत हो गई थी जबकि गुड्डू खान (35) की मौत अस्पताल ले जाए जाने के दौरान हुई थी। उनके साथी सद्दाम कुरैशी (18) की मौत बाद में इलाज के दौरान हो गई थी। यह तीनों उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और शामली जिलों के रहने वाले थे।

इस मामले में पहले आरोप लगाया गया था कि इन तीनों को रोक कर मारा पीटा गया। कहा गया था कि उनकी मॉब लिंचिंग हुई। अब इस मामले की चार्जशीट और पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि उन पर कभी हमला हुआ ही नहीं। तीनों की मौत इसलिए हुई क्योंकि वह डर गए और नदी में कूद गए।

गौरतलब है कि 7 जून, 2024 को चाँद, गुड्डू खान और सद्दाम छत्तीसगढ़ से एक ट्रक में मवेशी भर कर निकले थे। यह महासमुंद से रायपुर जा रहे थे। आरोप लगाया गया था कि इन्हें गौरक्षक बताने वाले युवकों ने महानदी के पुल पर रोका और पीटा जिसके बाद यह तीनों नदी में कूदे और इनकी मौत हो गई। इस मामले में मॉब लिंचिंग का आरोप लगाया गया था।

मामले की जाँच के लिए SIT का गठन किया गया था। अब उसने अपनी जाँच करके कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में तब मॉब लिंचिंग को लेकर खूब हल्ला मचाया गया था, यह आरोप अब गलत साबित हुए हैं।

‘ब्राह्मण है ज्योति मिश्रा, फिर भी SC कोटे से बन गई IFS’: जिस लड़की के UPSC चयन पर थे सवाल वह निकली पूरी फ्रॉड, दिल्ली में रहती है पर माँ-बाप से कह रखा था स्पेन में हूँ पोस्टेड

महाराष्ट्र की महिला ट्रेनी IAS पूजा खेडकर का मामला सामने आने के बाद कई नामों की चर्चा सोशल मीडिया पर शुरू हुई जिन्हें लेकर दावा किया गया कि उन्होंने गलत तरह से UPSC में प्रवेश लिया। इसी लिस्ट में एक नाम ज्योति मिश्रा का भी था। सोशल मीडिया पर ज्योति मिश्रा को लेकर सवाल उठ रहे थे कि उन्होंने जनरल कैटेगरी का होने के बावजूद अनुसूचित कैटेगरी से यूपीएससी में जगह पाई। मामले ने तूल पकड़ा तो कई रिपोर्टर इसकी पड़ताल में जुटे।

इस बीच ज्योति मिश्रा के पिता से टाइम्स ऑफ इंडिया के एक रिपोर्टर अरविंद चौहान ने संपर्क किया। पिता ने बताया उनकी बेटी स्पेन में है और टाइम बताया कि उससे कब बात हो पाएगी।

रिपोर्टर ने वॉट्सएप पर संपर्क किया तो ज्योति मिश्रा ने अपना पक्ष रखा और सारे आरोप खारिज कर दिए। साथ ही कोटे से एडमिशन लेने वाली ज्योति को कोई और कैंडिडेट बताया, वहीं अपने लिए कहा कि उसका नंबर दूसरी लिस्ट में आया था।

बातचीत से साफ था कि ज्योति अपने ऊपर लगे सारे आरोप निराधार बता रही थीं। हालाँकि पत्रकार ने अपनी पड़ताल जारी रखी। उन्होंने स्पेन के भारतीय दूतावास को इस संबंध में मेल किया और जवाब जब आया तो सब हैरान रह गए।

हकीकत में वहाँ कोई ज्योति IFS थी ही नहीं और ये ज्योति मिश्रा सिर्फ अपने परिजनों को गुमराह करने के लिए उनसे झूठ बोल रही थीं। बेटी का झूठ सामने आने के बाद परिजन हैरान हैं और कह रहे हैं कि उन्होंने अपनी बेटी पर कभी दबाव नहीं बनाया था फिर पता नहीं क्यों उसने इतना बड़ा झूठ बोला।

बता दें कि ये पूरा मामला पूजा खेडकर के फ्रॉड से जुड़ी खबरें आने के बीच उजागर हुआ। जाँच में पता चला कि ज्योति ने परिवार को दो साल से गुमराह किया हुआ था। उन्होंने इस झूठ की नींव डाली थी साल 2022 में। ज्योति ने अपने परिवार को बताया था कि उनका सिलेक्शन यूपीएससी में हो गया है और 432वीं रैंक आई है।

पिता सुरेश नारायण मिश्रा चूँकि यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर थे इसलिए उनकी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं थे कि उनकी बेटी ने उनका नाम रौशन कर दिया। उन्हें नहीं पता था कि उनकी बेटी ने अपनी असफलता छिपाने के लिए ये सारा खेल खेला है।

पूजा खेडकर विवाद के बाद जब ज्योति मिश्रा के कोटे से एडमिशन लेने पर सवाल खड़े हुए थे तो टाइम्स ऑफ इंडिया का एक पत्रकार उनके पिता से बात करने पहुँचा। पिता ने गर्व से बताया कि बेटी तो स्पेन के मैदरिड में आईएफएस के पद पर है। पिता ने रिपोर्टर से बिन डरे कहा कि वो बेटी से बात कर सकते हैं।

रिपोर्टर ने ज्योति मिश्रा को संपर्क किया तो ज्योति ने जवाब देने की बजाय एक्स पर साझा एक पोस्ट शेयर कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ दुष्प्रचार चल रहा है। इसलिए वो साफ करना चाहती हैं कि जिस ज्योति की बात हो रही है वो एससी है और आईएएस है जबकि वो IFS हैं और उनका सिलेक्शन दूसरी लिस्ट में हुआ। इस दौरान उन्होंने अपना फर्जी पासपोर्ट, यूपीएससी से मिला लेटर, लबसना का आईडी कार्ड सब दिखाया।

ज्योति मिश्रा का वर्जन लेने के बाद ये खबर हर जगह चली कि सोशल मीडिया पर लगे रहे आरोपों पर उनका क्या कहना है। हालाँकि बाद में पत्रकार ने क्रॉस चेक करने के लिए स्पेन में भारतीय दूतावास से भी संपर्क किया। सवाल का जवाब प्रेस सूचना और संस्कृति संभालने वाले दूसरे सचिव अमन चंद्नन ने दिया। चंद्रन ने बताया कि दूतावास में ज्योति नाम का कोई अधिकारी काम ही नहीं कर रहा है। इस मेल से ये तो क्लियर हो गया कि ज्योति मिश्रा ने घर परिवार, प्रेस सबसे झूठ बोला। लेकिन अगला सवाल था कि अगर वो स्पेन में नहीं है तो कहाँ हैं।

गहराई से जाँच हुई तो सामने आया कि वो तो दिल्ली में रह रही हैं। पत्रकार ने फिर उनसे संपर्क किया और इस बार उन्होंने झूठ स्वीकार कर लिया। पता चला कि असली ज्योति जिनका रोल नंबर 843910 था उनकी रैंक यूपीएससी में 432 आई थी जबकि जो डॉक्यूमेंट ज्योति मिश्रा दिखा रही थीं वो नकली थे उसमें रोल नंबर 5904317 लिखा था।

ज्योति के माता-पिता अपनी ही बेटी से धोका पाने के बाद हक्का-बक्का हैं। उनका कहना है कि उनके पास कभी अपनी बेटी पर शक करने की कोई वजह ही नहीं थी, वो हमेशा से अकादमिक रूप से अच्छा प्रदर्शन करती थीं। वहीं ज्योति ने कहा कि वो ये स्वीकार नहीं कर पाई थीं कि उनके कुछ साथियों ने सिविल परीक्षा पास कर ली और वो नहीं कर पाईं। अपने आपको साबित करने के लिए उन्होंने ये रास्ता अपनाया। परिवार कह रहा है कि उन्हें नहीं पता बेटी ने क्यों झूठ बोला और इतने समय वो दुनिया में कहाँ रह रही थीं। अब बस वो चाहते हैं कि ज्योति घर लौट आएँ।