उत्तर प्रदेश के गोंडा के पास चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई। ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसकी वजह से 4 लोगों के मौत और 20 लोगों के घायल होने की सूचना मिल रही है। इस बीच, दावा किया जा रहा है कि लोको पायलट ने धमाके की आवाज सुनी थी, जिसके बाद इमर्जेंसी ब्रेक लगाने के चलते ये हादसा हुआ। वहीं, रेलवे ने हादसे से पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। मृतकों के परिजनों को 10 लाख, गंभीर रूप से घायलों को 2.5 लाख और मामूली रूप से घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी।
धमाके के बाद लगाए गए इमर्जेंसी ब्रेक के चलते हादसा?
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रेलवे के सूत्रों ने बताया कि ट्रेन के ड्राइवर यानी लोको पायलट ने हादसे से पहले धमाके की एक आवाज सुनी थी। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के पूछताछ के दौरान ट्रेन के लोको पायलट ने खुलासा किया कि उसने किसी तेज धमाके की आवाज सुनी थी और आवाज सुनकर पालयट ने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। चूँकि गाड़ी ठीक स्पीड पर थी, इसलिए अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाने के कारण कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए। हालाँकि अब तक ये साफ नहीं हो पाया कि आवाज किस चीज की थी।
धमाके की आवाज यात्रियों ने भी सुनी?
डिब्रूगढ़-चंडीगढ़ एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे एक यात्री ने भी दावा किया है कि उसने धमाके की आवाज सुनी थी। यात्री ने कहा, “मुझे हाजीपुर जाना था… (घटना से पहले) हल्का विस्फोट हुआ और उसके बाद एक जोरदार झटका महसूस हुआ और हमारा कोच पटरी से उतर गया। हम चंडीगढ़ से आ रहे थे…”
#WATCH | Gonda Train Derailment | A passenger travelling in the Dibrugarh-Chandigarh Express claims, "I had to go to Hajipur… There was a mild explosion (before the incident) and after that a strong jolt was felt and our coach derailed. We were coming from Chandigarh…" pic.twitter.com/ytD0UhSfWB
जिलाधिकारी डॉ. नेहा शर्मा ने बताया कि दुर्घटना में ट्रेन के आठ डिब्बे पटरी से उतर गये और अब तक चार लोगों की मौत की सूचना है। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्य जारी है तथा सभी मृतकों और घायलों को बाहर निकाला जा चुका है. घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।
रेलवे ने की मुआवजे की घोषणा
इस हादसे के हताहतों के लिए रेलवे ने मुआवजे की घोषणा की है। रेल मंत्रालय ने एक बयान जारी कर ये घोषणा की। रेल मंत्रालय ने कहा, “मृतकों के परिवार को 10 लाख रुपए, गंभीर रूप से घायलों को 2.5 लाख रुपए और मामूली रूप से घायलों को 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। सीआरएस जाँच के अलावा, उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दिए गए हैं।”
Gonda Train Derailment | Ex gratia of Rs. 10 lakhs to the family of the deceased, Rs 2.5 lakhs for grievous injury and Rs. 50,000 to the minor injured, has been announced. Apart from the CRS enquiry, a high-level enquiry has been ordered: Ministry of Railways pic.twitter.com/0mDy97pheD
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। हादसे के कारण सम्बन्धित रेल खंड पर कटिहार-अमृतसर एक्सप्रेस और गुवाहाटी-श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा एक्सप्रेस का मार्ग परिवर्तन करके इन्हें दूसरे रास्ते से रवाना किया गया है। इसके अलावा भी कई ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है, तो कुछ ट्रेनों को रद्द भी करना पड़ा है।
हेल्पलाइन नंबर जारी
रेलवे बोर्ड ने कई हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं – कमर्शियल कंट्रोल: 9957555984, फुर्केटिंग (FKG): 9957555966, मारियानी (MXN): 6001882410, सिमलगुड़ी (SLGR): 8789543798, तिनसुकिया (NTSK): 9957555959, डिब्रूगढ़ (DBRG): 9957555960
स्वामी यशवीर महाराज ने 18 जुलाई 2024 को एक वीडियो बयान जारी कर इस्लामिक कट्टरपंथियों और तथाकथित ‘सेकुलरों’ को आड़े हाथों लिया, जो यूपी के मुजफ्फरनगर के काँवड़ रूट पर दुकानों और ठेलों पर उनके मालिकों के नाम लिखने के मुजफ्फरनगर पुलिस के निर्देश का विरोध कर रहे हैं।
काँवड़ यात्रियों के बीच दुकानों के मालिक को लेकर किसी तरह के भ्रम की स्थिति न हो, इसके लिए ये निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें कि लंबे समय से ऐसी खबरें आ रही हैं, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदू देवी-देवताओं के नाम का इस्तेमाल कर होटल, दुकानें, ढाबे और फल के ठेले चला रहे हैं। यशवीर महाराज लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं।
स्वामी यशवीर महाराज ने वीडियो में कहा, “हमने सवाल उठाए कि मुजफ्फरनगर में काँवड़ मार्ग पर खाने-पीने की दुकानें, फलों के ठेले आदि चलाने वाले मुस्लिम दुकानदार अपनी दुकानों के नाम हिंदू देवी-देवताओं के नामों पर क्यों रखते हैं। जब हमने माँग की कि सभी दुकानों और ठेलों पर मालिकों/कर्मचारियों के नाम बोर्ड पर मोटे अक्षरों में लिखे होने चाहिए, तो पुलिस ने हमारी माँग मान ली और इसके लिए निर्देश जारी कर दिए। दुकानदार निर्देशों के अनुसार मालिकों के नाम मोटे अक्षरों में लिख रहे हैं। हालाँकि ओवैसी जैसे कट्टरपंथी पुलिस के निर्देशों पर आपत्ति जता रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “एक तथाकथित पत्रकार है, मोहम्मद जुबैर। यह वही मोहम्मद जुबैर है जिसने अपनी पोस्ट से मुसलमानों को हिंदुओं के खिलाफ भड़काया और वह कई बार जेल जा चुका है। उस पर कई मुकदमे चल रहे हैं। मुजफ्फरनगर में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज है। इसलिए मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि किसी काँवड़ यात्री के साथ कोई दुर्घटना न हो। अगर किसी काँवड़ यात्री को कुछ होता है, तो उसके लिए मोहम्मद जुबैर को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। इसलिए, उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उसके खातों की भी जाँच की जानी चाहिए, ताकि पता चल सके कि उसे विदेशी फंडिंग तो नहीं मिल रही है।”
स्वामी ने आगे कहा, “जो कट्टरपंथी और सेकुलर लोग पुलिस के निर्देशों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि अगर हिंदू उनके होटल में खाना खाते रहेंगे, जिस पर थूका गया हो, पेशाब किया गया हो और गोमाँस मिला हो, तो यह (उनके लिए) ठीक है, लेकिन अगर वे (हिंदू) विरोध करते हैं, तो यह एक समस्या बन जाती है और वे (कट्टरपंथी और सेकुलर) इसके खिलाफ अभियान शुरू कर देते हैं। हमें मुस्लिमों के होटलों और ढाबों से कोई समस्या नहीं है। वो उन्हें चलाने के लिए आजाद हैं लेकिन उन्हें हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर और हिंदुओं के भ्रामक नामों पर चलाने की जगह अपने नाम से दुकानें चलानी चाहिए। अगर किसी को लगता है कि पहले जैसे ही सबकुछ चलता रहेगा, तो ऐसा नहीं होने वाला।हम इसे कम से कम मुजफ्फरनगर में जारी नहीं रहने देंगे। अगर कोई ऐसा करना जारी रखने की कोशिश करता है, तो हम इसके खिलाफ आवाज उठाकर इसे रोकेंगे।” इस दौरान उन्होंने काँवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश देने के लिए पुलिस अधिकारियों को धन्यवाद दिया।
दुकानों और ठेलों पर लिखे जाएँ मालिकों के नाम: पुलिस
बता दें कि इस साल काँवड़ यात्रा 22 जुलाई से शुरू होकर 2 अगस्त तक चलेगी। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्थानीय प्रशासन ने आदेश जारी कर होटल , ढाबे और खाने-पीने का सामान बेचने वाले ठेलों पर दुकान या ठेला चलाने वाले मालिक और संचालक का नाम लिखने को कहा है। हालाँकि, कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और इस्लामिस्टों ने धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने मीडिया को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने प्रशासन के फैसले के बारे में जानकारी साझा की। मीडिया चैनलों से बात करते हुए एसएसपी अभिषेक सिंह ने कहा कि काँवड़ यात्रा के निशान पर आने वाले ढाबों, होटलों, भोजनालयों और खाद्य सामग्री बेचने वाले ठेलों को मालिकों और संचालकों के नाम लिखने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इससे कांवड़ियों के लिए भ्रम की स्थिति से बचा जा सकेगा और बहस या टकराव से बचा जा सकेगा और साथ ही किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भोजनालयों ने अपनी मर्जी से आदेश का पालन करना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि काँवड़ यात्रियों को सामान खरीदने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है और वे कहीं से भी खरीदारी करने के लिए स्वतंत्र हैं।
प्रशासन के आदेश के अनुसार, क्षेत्र के कई ठेले वालों और खाने-पीने की दुकानों ने बैनर या पेपर बोर्ड पर नाम लिखना शुरू कर दिया है। नई मंडी, छपार, पुरकाजी, मंसूरपुर और खतौली जैसे थानों के पुलिसकर्मियों ने आदेश का पालन कराना शुरू कर दिया है। शहर के इलाके में मीनाक्षी चौक के पास कई खाने-पीने की दुकानों ने अपने नाम लिखे पोस्टर लगाने शुरू कर दिए हैं।
मुस्लिमों के दुकानों के भ्रामक नामों के खिलाफ यशवीर महाराज का अभियान
गौरतलब है कि पिछले साल काँवड़ यात्रा के दौरान और इस साल की यात्रा से पहले स्वामी यशवीर महाराज ने गंभीर आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में मुस्लिम ढाबे मालिकों ने अपनी पहचान छिपाकर फर्जी हिंदू नामों वाले पोस्टर लगाए हैं। उन्होंने कहा कि काँवड़ यात्रा के मार्गों पर मुस्लिम ढाबे वालों ने पोस्टर लगाए हैं। इसे देखते हुए स्वामी यशवीर महाराज ने माँग की है कि प्रशासन ढाबे मालिकों से अपने मालिकों या संचालकों के नाम बोर्ड पर लिखने के लिए कहे।
स्वामी यशवीर महाराज ने कहा , “काँवड़ यात्रा के दौरान एक समुदाय विशेष के कुछ लोग हिंदू देवी-देवताओं के नाम के बोर्ड लगाकर दुकानें चलाते हैं, जिससे शिवभक्त कांवड़ियों की भावनाओं को ठेस पहुँचने की आशंका है। हिंदू देवी-देवताओं के नाम के बोर्ड लगाकर दुकानें चलाने वाले समुदाय विशेष के लोगों की पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए। पुलिस को इसके लिए अभियान चलाना चाहिए।” उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि अगर एक सप्ताह के भीतर प्रशासन इस मामले में कार्रवाई नहीं करता है तो वे विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे।
इस मुद्दे पर बवाल काट रहे इस्लामिक कट्टरपंथी
प्रशासन का ये आदेश ऐसे कई मामलों के सामने आने के बाद आया है, जिसमें मुस्लिम दुकानदारों के काँवड़ियों के धोखा देने के आरोप लगे। वो सावन के पवित्र महीने में नकली नामों वाले ढाबों, फलों के ठेलों, होटलों में व्रत के नियमों के विपरीत खाना खिलाकर भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने ये आदेश जारी किया है कि दुकानों, ढाबों के मालिकों को अपना नाम बड़े अक्षरों में लिखना होगा। क्योंकि ऐसे मामलों में टकराव होने से कानून व्यवस्था की स्थिति खड़ी हो जाती है। हालाँकि, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ये आरोप लगाते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया कि दुकान के मालिक का नाम लिखना “धार्मिक भेदभाव” है।
मोहम्मद जुबैर, जो खुद को फैक्ट चेकर कहता है, लेकिन वामपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए फैक्ट चेक की ओट लेता है। उसने इस आदेश को खतरनाक बताते हुए ‘धार्मिक भेदभाव’ करार दिया था। इसके अलावा एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तो एक कदम आगे बढ़कर इसकी तुलना दक्षिण अफ्रीका के “रंगभेद” और जर्मनी के “यहूदी बहिष्कार” से कर दी।
जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में 15 जुलाई को हुए आतंकी हमले में 4 जवानों के बलिदान होने के बाद एक और आतंकी हमला हुआ है। ये हमला कास्तीगढ़ इलाके के जद्दन बाटा गाँव में हुआ। गुरुवार (18 जुलाई 2024) को हुए इस अटैक में सेना के 2 जवान घायल हो गए। इनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।
माना जा रहा है कि ये वही आतंकी हैं जिन्होंने सोमवार को हमला किया था। ऐसे में सैन्यकर्मियों ने इन आतंकियों के खिलाफ एक ओर जहाँ तलाशी अभियान छेड़ा हुआ है तो वहीं डोडा पुलिस ने जिले में ओवर ग्राउंड वर्कर के नेटवर्क पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ये ओवर ग्राउंड वर्कर वो होते हैं जो आतंकियों की पनाह देते हैं, उनकी मदद करते हैं।
डोडा पुलिस ने 17 जून को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जून और जुलाई में हुए हमलों की प्रतिक्रिया में डोडा पुलिस ने ओजीडब्लू नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसी जानकारी के बीच सामने आया है कि पुलिस ने एक शौकत अली नाम के OGW को पकड़ा है।
Doda Police has intensified its Crackdown on the OGW's network in the District, arresting several OGW's and supporters in response to recent attacks in June and July. @JmuKmrPolice@ZPHQJammu@adgp_igp
शौकत अली का आतंकियों से कनेक्शन बताया जा रहा है और वह ओवरग्राउंड वर्कर है। शौकत अली पर आरोप है कि उसने सेना के जवानों पर हमला करने वाले तीन आतंकियों को कुछ दिन अपने घर में रखा था और न केवल इस दौरान उसने उन्हें खाने पीने की चीजें मुहैया करवाई थी बल्कि वाईफाई भी दिया था जिससे उन्होंने पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से संपर्क किया था।
अब पुलिस ने शौकत अली को दबोच लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। मालूम हो कि ये पहली बार नहीं है कि किसी ओजीडब्लू वर्कर को पकड़ा गया हो। जून महीने में भी इनके खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार एसडीपीओ गंडोह के नेतृव में जाँच के बाद, मुबशिर हुसैन, सफदर अली और सज्जाद अहमद को 18 और 20 जून को न्यायिक हिरासत में लिया गया था। इसके बाद 26 जून 2024 को गंडोह पुलिस स्टेशन में एक और एफआईआर (सं. 70/2024) दर्ज की गई और शौकत अली को 14 जुलाई 2024 को गिरफ्तार हुआ। आने वाले समय में और भी ओजीडब्लू वर्कर्स के पकड़े जाने की संभावना है। पिछली घटनाओं को देखते हुए डोडा पुलिस ओजीडब्लू के नेटवर्क को खत्म करने के प्रतिबद्ध है।
मुहर्रम के मौके पर देश के अलग-अलग इलाकों से हिंसा की खबरें सामने आई हैं। कहीं ताजिया निकालने के रूट को लेकर विवाद में लाठी डंडे चले तो कहीं हिन्दुओं को घर में घुस कर पीटा गया, इसके अलावा डीजे बजाने को लेकर भी बवाल और पथराव हुआ। देश के अलग-अलग हिस्सों में फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया, इसको लेकर भी बवाल हुआ। पुलिस को मुहर्रम जुलूस के दौरान शान्ति व्यवस्था बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
प्रयागराज: ताजिया निकालने वालों ने घर में घुस हिन्दुओं को पीटा
प्रयागराज के लालापुर इलाके के अमिलिया गाँव में बुधवार (17 जुलाई, 2024) को मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था। यह लोग ताजिया लेकर जुलूस निकाल रहे थे। जब यह जुलूस गाँव में ही रहने वाले अधिवक्ता अवधेश कुमार के घर के पास पहुँचा तो जुलूस में शामिल युवकों ने हुल्लड़ मचाना चालू कर दिया। यह युवक अवधेश कुमार की दीवाल पर चढ़ गए।
जब उनको ऐसा करने से मना किया गया तो उन्होंने अवधेश कुमार के परिवार पर हमला बोला दिया। अवधेश कुमार के साथ ही उनके बेटे और बेटी पर तलवार और कट्टों से हमला किया गया। बीच बचाव करने आए आसपडोस के लोगों पर भी मुहर्रम निकाल रहे लोगों ने हमला किया। इस हमले में अवधेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए।
इलाके में तनाव कम करने के लिए भारी पुलिस और PAC बल को तैनात किया गया है। मामले में FIR भी दर्ज कर ली बजाने गई है और 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अवधेश कुमार ने घर से ₹3 लाख के गहने लूटने का आरोप भी इमरान, मिराज, सरताज समेत 10-12 लड़कों पर लगाया है।
बरेली: डीजे बजाने को लेकर विवाद, पुलिस पर भी हमला
उत्तर प्रदेश के बरेली में भी मुहर्रम पर जम कर हिंसा हुई। बरेली के अलीगंज इलाके में डीजे बजाने को लेकर काफी बवाल हुआ। जानकारी के अनुसार, बरेली के अलीगंज इलाके में मुहर्रम के मौके पर निकाले जाने वाले जुलूस को लकर पहले सहमति बनी थी मुस्लिम बड़ा डीजे नहीं लाएँगे। हालाँकि, उन्होंने यह बाद में नहीं माना और बुधवार को दो बड़े डीजे बाहर से मँगा लिए। इसको लेकर हिन्दू संगठनों ने विरोध किया। इसके बाद शाम को थाने और पुलिस की गाड़ी पर भी पथराव हो गया। बाद में पुलिस बल लगाकर मामला शांत करवाया गया।
भीलवाड़ा: भगवा झंडे को लातों तले रौंदा
भीलवाड़ा के कोटड़ी कस्बे में मुस्लिमों ने मुहर्रम जुलूस के दौरान भगवा झंडा हटाया और उसे रौंदा, यह आरोप हिन्दू संगठनों ने लगाया। हिन्दू संगठनों ने इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। हिन्दू व्यापारियों ने इसके विरोध में बाजार भी बंद कर दिया। हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया कि जुलूस में शामिल लोगों ने जानबूझकर हिन्दू पताकाओं का अपमान किया है।
जालौन: दो गुटों में पथराव, लाठी डंडे चले
उत्तर प्रदेश के जालौन में भी मुहर्रम को लेकर बवाल हुआ। यहाँ डकोर कोतवाली क्षेत्र के मुहम्मदाबाद गाँव में मुस्लिमों के दो गुट आपस में ही भिड गए। बताया गया कि गाँव में दो ताजी के जुलूस निकल रहे थे। यह दोनों ही आपस में पहले ताजिया निकालने को लेकर आपस में भिड़े। इसके बाद पथराव और लाठी डंडे चले। इसमें कई लोग घायल हो गए। इसके बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है और पुलिस बल को तैनात किया गया है।
हजारीबाग: दो पक्षों के बीच बवाल, पथराव
झारखंड के हजारीबाग के बड़कागाँव थाना क्षेत्र के नयाटांड में भी दो पक्षों के बीच हिंसा हो गई। दरअसल, इस इलाके रामनवमी और मुहर्रम के जुलूस को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद है। इसी को लेकर दो युवक धरने पर बैठे हुए थे। उनको गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद जब इसी रूट पर मुहर्रम का जुलूस निकला तो बवाल हो गया। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और पथराव होने लगा। इस पथराव में कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। अब इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया है।
धनबाद: बदल दिया मुहर्रम का रूट, पथराव
धनबाद के पांडरपाला इलाके में मुहर्रम जुलूस का रूट बदलने को लेकर हिंसा हुई। बताया गया कि पांडरपाला इलाके में मुहर्रम का जुलूस कुम्हार टोला में पहुँचा तो रास्ते को लेकर दूसरे पक्ष ने प्रश्न उठाए। इसके बाद बवाल चालू हुआ। यहाँ थोड़ी देर में ही पथराव होने लगा। बताया गया कि इसके बाद घरों पर पत्थर फेंके गए। बताया गया कि दोनों पक्षों ने एक दूसरे के घरों पर लाठी डंडों से भी हमला किया। पुलिस ने यहाँ बल प्रयोग किया। झारखंड में ही बिहार झारखंड सीमा पर भी बड़ा बवाल हुआ और पथराव किया गया।
मोतिहारी: आपस में ही भिड़े मुस्लिम, चली लाठी-गोली
बिहार के मोतिहारी में मुहर्रम के मौके पर मुस्लिमों के दो पक्ष ही पास में भिड गए। बताया गया कि यहाँ भी रूट को लेकर विवाद हुआ। यहाँ के नकरदेई गाँव में एक जुलूस निकल रहा था। इस दौरान दूसरे मुस्लिम पक्ष के लोग बवाल करने लगे। दोनों पक्ष के बीच पथराव भी होने लगा। इसके बाद जुलूस निकाल रहे लोगो ने नईम खान के घर पर फायरिंग कर दी और लाठियों से हमला कर दिया। बाद में पुलिस ने पहुँच कर मामला शांत करवाया।
संथाल परगना में दिखाया फिलिस्तीन का झंडा
झारखंड के दुमका में मुहर्रम के जुलूस के दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया। बताया गया कि दुधानी इलाके में मुहर्रम का जुलूस निकालने के दौरान कुछ युवक फिलिस्तीन का झंडा लहराने लगे। इसके बाद एक बस पर चढ़ कर करतब दिखाया गया। यह फोटो फेसबुक पर भी वायरल की गईं।
संथालपरगना में आदिवासी समाज को भगाकर अब घुसपैठियों का मन इतना बढ़ गया है कि झारखंड की उप राजधानी दुमका जो हेमंत सोरेन जी का कर्म क्षेत्र है वहाँ आज मुहर्रम के जुलूस में फ़िलिस्तीन का झंडा लहराया गया । गृह मंत्रालय @PIBHomeAffairs@NIA_India@HMOIndia को जॉंच कर देशद्रोही तालिबानी… pic.twitter.com/e9VW5Q3oll
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) July 17, 2024
झारखंड के गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “संथाल परगना में आदिवासी समाज को भगाकर अब घुसपैठियों का मन इतना बढ़ गया है कि झारखंड की उप राजधानी दुमका जो हेमंत सोरेन जी का कर्म क्षेत्र है वहाँ आज मुहर्रम के जुलूस में फ़िलिस्तीन का झंडा लहराया गया । गृह मंत्रालय को जाँच कर देशद्रोही तालिबानी समर्थकों को फाँसी दिलाना चाहिए।”
श्रीनगर में भी लहराया फिलिस्तीन का झंडा
श्रीनगर में मुहर्रम के जुलूस के दौरान फिलस्तीन के झंडे लहराए गए। इसकी कई फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कई युवकों को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस ने ताजी एडवायजरी जारी की है, जिसमें दुकानों और होटलों पर मालिकों के नाम लिखने को ऐच्छिक कर दिया है। एक्स पर एक पोस्ट में मुजफ्फरनगर पुलिस ने कहा कि उसका इरादा किसी भी तरह का धार्मिक भेदभाव पैदा करना नहीं है, बल्कि मुजफ्फरनगर जिले से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए है।
मुजफ्फरनगर काँवड़ यात्रा मार्ग पर ये व्यवस्था पहले से चली आ रही है। मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा जारी एडवायजरी में कहा गया है, “श्रावण काँवड़ यात्रा के दौरान समीपवर्ती राज्यों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश होते हुए भारी संख्या में काँवड़िए हरिद्वार से जल उठाकर मुजफ्फरनगर जनपद से होकर गुजरते हैं। श्रावण के पवित्र माह में कई लोग खासकर काँवड़िए अपने खानपान में कुछ खाद्य सामग्री से परहेज करते हैं। पूर्व में ऐसे दृष्टांत प्रकाश में आए हैं, जहाँ काँवड़ मार्ग पर हर प्रकार की खाद्य सामग्री बेचने वाले कुछ दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानों के नाम इस प्रकार से रखे गए, जिससे काँवड़ियं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होकर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई।”
इसमें आगे लिखा है, “इस प्रकार की पुनरावृत्ति रोकने एवं श्रद्धालुओं की आस्था के दृष्टिगत काँवड़ मार्ग पर पड़ने वाले होटल, ढाबे एवँ खानपान की सामग्री बेचने वाले दुकानदारों से अनुरोध किया गया है कि वो स्वेच्छा से अपने मालिक और काम करने वालों का नाम प्रदर्शित करें। इस आदेश का आशय किसी प्रकास का धार्मिक विभेद न होकर सिर्फ मुजफ्फरनगर जनपद से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, आरोप-प्रत्यारोप एवँ कानून व्यवस्था की स्थिति को बचाना है। यह व्यवस्था पूर्व में भी प्रचलित रही है।”
मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा जारी एडवायजरी
काँवड़ यात्रा को लेकर सहारनपुर के डीआईजी अजय कुमार साहनी ने कहा, “पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं कि काँवड़ियों के बीच होटल और ढाबों पर खाने की रेट लिस्ट को लेकर बहस हुई है। इसके अलावा, ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहाँ किसी होटल/ढाबे पर नॉनवेज मिलता है या किसी दूसरे समुदाय के व्यक्ति ने किसी और नाम से होटल/ढाबा खोल लिया है और इससे विवाद हुआ है।”
उन्होंने आगे कहा, “इसके मद्देनजर यह निर्णय लिया गया कि दुकानों/होटल/ढाबों के मालिक/मालिक का नाम बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा, रेट लिस्ट स्पष्ट रूप से लिखी जाएगी और श्रमिकों के नाम भी स्पष्ट रूप से लिखे जाएँगे ताकि किसी भी तरह की कोई समस्या न हो…सभी से बातचीत की गई है और सभी होटल/ढाबे इस पर सहमत हैं…हमारे काँवड़ रूट के लिए यह निर्णय लिया गया है…”
#WATCH | Uttar Pradesh: On Kanwar Yatra, DIG Saharanpur Ajay Kumar Sahni says, "Instances have come to light earlier that Kanwarias had arguments over rate list for food at hotels and dhabas. Besides this, there have been instances where non-veg is available at some hotel/dhaba… pic.twitter.com/fgRgjfsHBn
बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के जिला प्रशासन में हाल ही में एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया है कि जिले के भीतर जिन रास्तों से कांवड़िये निकलते हैं, उन पर पड़ने वाली खान-पान की दुकानों पर दुकानदार के नाम का बोर्ड लगे। यह आदेश काँवड़ यात्रा में असुविधा ना हो, इसके लिए किया गया है। इस आदेश पर सोशल मीडिया पर लिबरल-वामपंथी समुदाय काफी उछलकूद मचाए हुए है। हालाँकि, यही गैंग तब कोई प्रश्न नहीं उठाता जब खाने-पीने के सामानों में 18% समुदाय की ‘हलाल’ को जिद बहुसंख्यकों पर थोपी जाती है।
मध्य प्रदेश की मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को गुरु पूर्णिमा पर दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है। हिंदुओं के प्रसिद्ध त्योहार पर ये कार्यक्रम 20 और 21 जुलाई को आयोजित करने के लिए कहा गया है। इन दो दिनों में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। वहीं कॉन्ग्रेस ने इसका विरोध किया है।
मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 20 जुलाई को प्रार्थना के बाद शिक्षकों द्वारा गुरु पूर्णिमा के महत्व और गुरु-शिष्य परंपरा पर महत्व डाला जायेगा। इसके बाद प्राचीन काल में प्रचलित गुरुकुल व्यवस्था एवं उसका भारतीय संस्कृति पर प्रभाव विषय पर निबंध लेखन कराया जाएगा।
विभाग के आदेश में अगले दिन यानी 21 जुलाई 2024 के लिए कार्यक्रम के बारे में विवरण दिया गया था। इस दिन स्कूलों में सरस्वती वंदना, गुरु वंदना, दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण किया जाएगा। इस अवसर पर गुरुजनों और शिक्षकों का सम्मान किया जाएगा। इसके बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा गुरु संस्मरण पर भाषण दिए जाएँगे।
साभार: एमपी ब्रेकिंग
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 जुलाई को जारी आदेश में गुरु पूर्णिमा उत्सव के दूसरे दिन के कार्यक्रम में संतों, शिक्षकों और छात्रों को आमंत्रित करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही इस दौरान संबंधित स्कूल के सेवानिवृत्त शिक्षकों और स्कूल के पूर्व विद्यार्थियों को भी आमंत्रित करने के लिए कहा गया है।
हालाँकि, विपक्षी कांग्रेस ने स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देश का विरोध करते हुए कहा कि यह धर्मनिरपेक्षता की भावना के खिलाफ है, जो संविधान का अभिन्न अंग है। राज्य कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता अब्बास हाफिज ने कहा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहाँ सभी धार्मिक समुदायों के छात्र स्कूल और कॉलेजों में पढ़ते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “इसलिए स्कूलों में किसी एक धर्म से जुड़ी कोई नई परंपरा शुरू करने से विवाद पैदा हो सकता है। अगर एक धर्म से जुड़ी परंपरा को सभी के लिए अनिवार्य कर दिया जाता है तो दूसरे समुदायों के छात्र अपनी परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम शुरू करने की माँग कर सकते हैं।”
कहा जाता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। वेद व्यास ने ही महाभारत की रचना की थी और वेदों का वर्गीकरण किया था। इसके अलावा, गुरु पूर्णिमा के दिन ही भगवान गौतम बुद्ध ने सबसे पहले अपने पाँच शिष्यों को दिया था। ये सभी ब्राह्मण थे और सिद्धार्थ को पहले से जानते थे। इसे हिंदुओं के साथ-साथ बौद्ध और जैन धर्म लोगों द्वारा श्रद्धा से मनाया जाता है।
मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित खजराना मंदिर में 14 मुस्लिम लोगों ने हिंदू धर्म में स्वेच्छा से घर वापसी की है। मंदिर में पूरा कार्यक्रम विधि-विधान से संपन्न हुआ। घर वापसी करने वालों ने सनातन स्वीकार करके अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस धर्म का न आरंभ है और न ही अंत है। इसके चलते वह हिंदू धर्म में आ रहे हैं।
शाजिया हाशमी से सपना बनने वाली युवती ने कैमरे पर बताया कि वो बिना किसी के दबाव के हिंदू धर्म में आ रही हैं। उन्हें ये धर्म बहुत अच्छा लगता है इसलिए उन्होंने ये निर्णय लिया। इसी प्रकार से अलफीजा से आलिया बनने वाली लड़की ने भी सनातन में आने की खुशी जताई।
घर वापसी करने वालों के नाम नीचे दिए गए हैं। आखिर के चार नाम वो हैं जिन्होंने मुस्लिम लड़की से शादी की थी, इसलिए कार्यक्रम में उनका शुद्धिकरण भी कराया गया। कुल 18 नाम हैं।
शाजिया हाशमी से सपना
अलफीजा से आलिया
आमिना से अमृता
आरजू से एलिना
अदनान शाह से आरव
तरन्नुम बी से तम्मन्ना
मुमताज बी से मीना
मुबारक शाह से मुकेश
समीर से सावन
सोफिया से भूमिका
अबेल मसीह से भरत
अयाना से प्रशंसा
अफसाना से आरती
मरयम से आश्रिता शुद्धिकरण वाले 15.राकेश
महिमा
अनिता
अभिषेक
बता दें कि ये घर वापसी विहिप नेता संतोष कुमार शर्मा के नेतृत्व में कराई गई है जिन्हें पिछले दिनों घर वापसी अभियान के कारण धमकी की भी मिली थी। हालाँकि वह इन धमकियों से डरे नहीं और कहा कि आने वाले समय में भी वो घर वापसी करवाएँगे। संतोष ने ऑपइंडिया से बात करते 14 लोगों की घर वापसी और 4 लोगों के शुद्धिकरण की जानकारी की पुष्टि की। मालूम हो कि उन्होंने पिछले महीने भी खजराना के मंदिर में 30 लोगों को हिंदू धर्म में घरवपासी कराई थी। इस बार भी ये संख्या 14 है। वहीं अप्रैल माह में ये गिनती 8 थी। उस समय 8 मुस्लिमों ने हिंदू धर्म को स्वीकार था।
इस घर वापसी से पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई थीं। इन 18 लोगों में 2 मंदसौर के रहने वाले हैं और कुछ इंदौर के खजराना के ही हैं। इन लोगों ने बताया है कि ये लोग मुस्लिम समाज की विभिन्न तरह की कुरीतियों से परेशान हो गए थे इसलिए ये हिंदू धर्म में आए।
वहीं एक मुस्लिम महिला ने बात करते हुए कहा कि उसे बचपन से ही मंदिर जाना और हिंदुओं को देखकर जिस तरह से वह पूजा पाठ करते थे काफी अच्छा लगता था और हमारे मुस्लिम समुदाय में इस तरह का कोई कार्यक्रम नहीं होता था। साथ ही उनका तो यह भी कहना है की मस्जिदों में भी मुस्लिम महिलाओं को जाने पर प्रतिबंध है और इन्हीं सब कारणों से परेशान होकर उसने मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया।
पेपरलीक और परीक्षा में अनियमितता से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (18 जुलाई 2024) को सुनवाई की। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि NEET-UG 2024 की दोबारा परीक्षा तभी संभव हो सकती है, जब ‘ठोस आधार’ पर यह बात सामने आए कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पवित्रता बड़े पैमाने पर ‘प्रभावित’ हुई है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने यह टिप्पणी की। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की पीठ NEET-UG विवाद से संबंधित कदाचार और अनियमितताओं से संबंधित 40 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई शुरू कर रही है। इन याचिकाओं में परीक्षा को रद्द करके NEET की परीक्षा दोबारा कराने की माँग की गई है। पीठ में सीजेआई के अलावा जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेन्द्र हुड्डा दलील पेश कर रहे थे। CJI चंद्रचूड ने हुड्डा से कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पेपरलीक व्यवस्थित था और इसने पूरी परीक्षा को इस तरह प्रभावित किया कि पूरी परीक्षा को रद्द करना आवश्यक हो गया है। CJI ने कहा, “केवल इसलिए कि 23 लाख में से केवल 1 लाख को प्रवेश मिलेगा, हम दोबारा परीक्षा का आदेश नहीं दे सकते।”
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अधिवक्ता हुड्डा से देश भर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या के बारे में भी पूछा। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता हुड्डा ने पीठ को बताया कि यह संख्या 1,08,000 है। उन्होंने तर्क दिया कि दोबारा परीक्षा होने पर केवल उतने ही अभ्यर्थी होंगे, जितने पहले 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
मुख्य न्यायाधीश ने हुड्डा से उन स्थितियों पर भी जवाब माँगा, जब कोई अभ्यर्थी ‘वैध रूप से’ 1,08,000 परीक्षार्थियों की श्रेणी में नहीं आता। इस पर हुड्डा ने कहा कि शेष 22 लाख उम्मीदवार एक मौका पाना चाहेंगे। इस पर CJI ने कहा, “हम केवल इसलिए दोबारा परीक्षा का आदेश नहीं दे सकते, क्योंकि वे दोबारा परीक्षा देना चाहते हैं। यह तभी हो सकता है जब परीक्षा की पवित्रता प्रभावित हुई हो।”
दरअसल, केंद्र सरकार और NEET-UG परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी– NTA ने फिर से परीक्षा कराने की माँग का विरोध किया है। केंद्र और एजेंसी ने कहा कि कथित कदाचार और अनियमितताएँ स्थानीय स्तर की हैं और इससे संपूर्ण मेडिकल परीक्षा की पवित्रता पर कोई असर नहीं पड़ा है।
इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। इस हलफनामे में कहा गया था कि आईआईटी-मद्रास द्वारा आयोजित नीट-यूजी 2024 परिणामों के डेटा विश्लेषण से पता चला है कि न तो बड़े पैमाने पर कदाचार का कोई संकेत था और न ही उम्मीदवारों का कोई स्थानीय समूह इससे लाभान्वित हो रहा था और ना ही असामान्य रूप से उच्च अंक प्राप्त कर रहा था।
NTA ने भी अलग से हलफनामा पेश करते हुए कहा कि राष्ट्रीय, राज्य और शहर स्तर पर अंकों के वितरण के उसके विश्लेषण से पता चला है कि कुछ नीट उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त किए गए उच्च अंक व्यवस्थित विफलता नहीं थे। परीक्षा आयोजित कराने वाली इस एजेंसी ने आगे कहा कि पाठ्यक्रम में लगभग 25 प्रतिशत की कमी से उम्मीदवारों को परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करने में मदद मिली।
दिल्ली पुलिस ने 15 जुलाई 2024 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नाज़िम हुसैन अल जाफ़री, मोहम्मद नसीम हैदर और प्रोफेसर शाहिद तसलीम के खिलाफ़ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(पी) और 3(1)(क्यू) के तहत एफ़आईआर दर्ज की है। ये एफ़आईआर राम निवास सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई है, जो विश्वविद्यालय में प्राकृतिक विज्ञान डिपार्टमेंट में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। इस एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।
इस एफआईआर में आरोपित नाज़िम हुसैन अल-जाफ़री जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार हैं तो नसीम हैदर डिप्टी रजिस्ट्रार। इनके साथ ही आरोपित शाहिद तसलीम प्रोफ़ेसर हैं। इस मामले में विश्वविद्यालय में बतौर असिस्टेंट कार्यरत राम निवास सिंह (एससी वर्ग) ने तीनों पर जाति-आधारित गाली-गलौच, अमानवीय व्यवहार करने और उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर करने, दुर्व्यवहार समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
एफआईआर के मुताबिक, राम निवास सिंह 2007 से जामिया में अपर डिपीजन क्लर्क के रूप में नौकरी कर रहे थे। बीच में वो दिसंबर 2015 से नवंबर 2021 तक IHBAS में काम कर रहे थे और दिसंबर 2021 में फिर से जामिया लौट आए। इस दौरान वो विश्वविद्यालय में उच्च पदों पर अप्लाई कर सकें, इसके लिए उन्होंने एनओसी माँगा, तो उनके एनओसी एप्लिकेशन को बिना कोई वजह बताए खारिज कर दिया गया। यही नहीं, उन्हें प्रशासनिक कामों का बहाना बताकर हर 2-3 महीनों में ट्रांसफर किया जाता रहा। इसके बाद उन्होंने एससी कमीशन में भी मामला दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जामिया में किसी को भी आगे बढ़ने से नहीं रोका जा रहा, सिवाय उनके।
एससी आयोग में शिकायत के बारे में पता चलने पर रजिस्टार नाजिम हुसैन अल-जाफरी ने उन्हें 13 अप्रैल 2023 को दोपहर 12.30 बजे कनीज फातिमा के निर्देश पर बुलाया और घंटों उन्हें ऑफिस के बाहर इंतजार कराया। इसके बाद जब उन्हें ऑफिस में बुलाया गया, तो अल-जाफरी के साथ कई लोग मौजूद थे।
ऑफिस में मीटिंग के दौरान अल-जाफरी ने कहा, “रामनिवास, तुम किस तरह के कर्मचारी हो? तुम इस विश्वविद्यालय से पैसे ले रहे हो, तुम्हारे बच्चे यहीं पले-बढ़े हैं। तुम सीधे आयोग (एससी कमीशन) के पास नहीं जा सकते।” कुछ मिनट बाद जब वो अज्ञात व्यक्ति बाहर चला गया, तब अल-जाफरी ने राम निवास सिंह को धमकाना शुरू किया। अल जाफरी ने कहा, “तुम निचली जाति के हो, तुम भंगी हो, और तुम्हें ऐसे ही रहना चाहिए। तुम्हारे जैसे लोगों को आरक्षण के आधार पर नौकरी मिलती है, लेकिन फिर भी उन्हें अपनी जगह का पता नहीं होता। यह मत भूलो कि जामिया एक मुस्लिम विश्वविद्यालय है, और तुम्हारी नौकरी हमारी दया पर है।” इस दौरान उन्हें यौन उत्पीड़न के फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी दी गई, जिसमें उनकी नौकरी भी जा सकती थी। यही नहीं, अल-जाफरी के खिलाफ किसी भी शिकायत के लिए उच्च अधिकारियों से भी मिलने से मना कर दिया गया और जातिसूचक गालियाँ बकी गईं।
स्रोत: दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर का अंश
इस दौरान राम निवास ने उनकी बातें रिकॉर्ड करने की कोशिश की, जिसमें कुछ ही हिस्सा ही वो रिकॉर्ड कर सके। इस बीच अल-जाफरी ने उनका फोन देख लिया और उसे छीन लिया। कुछ दिनों के बाद 29 अप्रैल 2023 को जामिया में वैकेंसी निकाली गई, लेकिन एससी-एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षण नहीं दिया गया। जिसके बाद उन्होंने आरक्षण की माँग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इस मामले में 16 जून 2023 को दिल्ली हाई कोर्ट ने जामिया को निर्देश दिया कि वो हर पद के लिए आरक्षण के नियमों के हिसाब से वैकेंसी निकाले।
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद राम निवास सिंह की जामिया में प्रताड़ना बढ़ा दी गई। इसके बाद अल-जाफरी के इशारे में प्रोफेसर शाहिद तसलीम ने एक फर्जी शिकायत दर्ज कराई, ताकी उनके पेशेवर विकास को बाधित किया जा सके। इसमें उनके लिए ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया। इसके कुछ समय बाद उन्हें उनके खिलाफ की गई शिकायत की कॉपी मिली, जिसका उन्होंने आधिकारिक तौर पर जवाब दिया। उन्हें प्रताड़ित करने की सारी सीमाएँ पार कर गई गई। इस बीच, उन्होंने जब दिल्ली राज्य औद्योगिक एवँ अवसंरचना एवँ विकास निगम (DSIIDC) में प्रतिनियुक्ति के आधार पर नौकरी के लिए अप्लाई किया, तो जान बूझकर उनके आवेदन को लटका दिया गया।
यही नहीं, उनके विजिलेंस क्लियरेंस में ‘कारण बताओ’ नोटिस के बारे में भी लिखा गया है, जिसे राम निवास सिंह ने ‘जाति आधारित भेदभाव’ करार दिया। इस बबारे में उन्होंने जब अपने पूर्व एचओडी शाहिद तसलीम से बात की, तो तसलीम ने बताया कि अल-जाफरी के कहने पर ही उन्होंने राम निवास की लिखिति शिकायत की थी। ऐसा करने के लिए उन्हें मजबूर किया गया था।
इस बीच, राम निवास सिंह ने अल-जाफरी से उनके चैंबर में मुलाकात की और इस प्रताड़ना को रोकने की माँग की। लेकिन तब जाफरी ने उनके सामने इस्लाम अपनाने का ऑफर रख दिया। एफआईआर के मुताबिक, अल जाफरी ने कहा, “अपने अंदर ईमान लाओ, मैं सब ठीक कर दूँगा। कलमा पढ़ लो, सब ठीक हो जाएगा। मैं तुम्हारे बच्चों का भविष्य भी बना दूँगा। तुम्हें हिंदू धर्म से क्या मिला? जामिया ने सचिन को मोहम्मद अली बना दिया और उसकी जिंदगी संवार दी। उसे ड्राइवर की स्थाई नौकरी मिल गई क्योंकि उसने दीन को मान लिया।”
स्रोत: दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर का अंश
पीड़ित राम निवास सिंह ने इसके बाद भी कई बार अल-जाफरी से मुलाकात की, लेकिन इस्लाम अपनाने से इनकार कर दिया। जिसके बाद अल-जाफरी ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि “मैं शिकायत वापस नहीं लूँगा। तुमने जामिया को चुनौती दी है, तो इसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी। जामिया मुस्लिमों के लिए है, काफिरों के लिए नहीं।” जाफरी ने सिंह के खिलाफ़ “जाहिल”, “चमार”, “भंगी” और “काफ़िर” जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
विवादों से भरा रहा है जामिया मिल्लिया इस्लामिया का इतिहास
जामिया मिल्लिया इस्लामिया का नाम कई बार विवादों में रहा है। कई मौकों पर एससी/एसटी कर्मचारियों पर अत्याचार की खबरें आई हैं और विश्वविद्यालय के कुलपति को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने 2023 में तलब भी किया था।
यह कार्रवाई हरेंद्र कुमार की 2018 में की गई शिकायत के आधार पर की गई थी। कुमार यूनिवर्सिटी के अधीन आने वाली जामिया मिडिल स्कूल में गेस्ट टीचर थे। उनका आरोप है कि दलित होने की वजह से स्कूल के हेडमास्टर मोहम्मद मुर्सलीन उन्हें अपमानित और प्रताड़ित करते थे। 2018 में नौकरी से निकाले जाने के बाद कुमार ने यह शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें हेडमास्टर पर अन्य शिक्षकों के सामने अपने लिए जातिसूचक संबोधन के इस्तेमाल का आरोप लगाया था।
नियुक्ति और प्रमोशन में एससी/एसटी के लिए आरक्षण का मामला
जामिया की वॉइस चांसलर नजमा अख्तर को 2022 में भी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने समन जारी किया था। आरोप थे कि विश्वविद्यालय नियुक्तियों और प्रमोशन में कानूनन अनुसूचित जनजाति/ जाति के लोगों को मिलने वाले आरक्षण को लागू ही नहीं करता। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस जानबूझकर लागू नहीं करने का आरोप है।
विश्वविद्यालय में ही काम करने वाले हरेंद्र कुमार नाम के व्यक्ति आयोग में शिकायत कर नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी नियमों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। अनुसूचित जाति से आने वाले कुमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उनकी नियुक्ति यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित एक स्कूल में अतिथि कंप्यूटर शिक्षक के रूप में हुई थी। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके खिलाफ साजिश रची और बाद में उन्हें अवैध तरीके से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसी मामले को लेकर पिछले साल 2021 में भी आयोग ने वीसी को तलब किया था।
महाराष्ट्र की महिला ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर का चिट्ठा खुलने के बाद अब उनके माता-पिता के खिलाफ जाँच जारी है। एक खबर के अनुसार जहाँ पता चला है कि पुलिस ने उनकी माँ मनोरमा खेडकर को महाड के होटल से हिरासत में लिया है। वहीं पिता दिलीप खेडकर को लेकर जानकारी सामने आई है कि उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो अपनी जाँच कर रहा है। उन पर उनकी सर्विस में रहते हुए दो बार घूस लेने के आरोप हैं।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, मनोरमा खेडकर, जिनपर किसानों को धमकाने का आरोप है, उनको लेकर पुणे ग्रामीण के एसपी पंकज देशमुख ने बताया कि उन्होंने महाड से पूजा खेडकर की माँ को हिरासत में ले लिया है। वह होटल में पाई गई हैं। उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस लेकर आ रही है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Maharashtra | Manorama Khedkar, mother of IAS trainee Puja Khedkar, detained from Mahad,
Pankaj Deshmukh, SP, Pune Rural Police says, "We have detained her from Mahad. She is on her way here. We will question her and take further legal action. She was found in a hotel in… pic.twitter.com/kDpqDlkGn1
एक वीडियो भी सामने आई है जिसमें मनोरमा खेडकर को पुलिस ने पकड़ा हुआ है और पत्रकार उनसे सवाल कर रहे हैं कि उन्होंने आखिर क्यों किसानों को धमकी दी थी। वीडियो में मनोरमा को अपना चेहरा ढककर पुलिस के साथ जाते हुए देखा सकता है।
#WATCH | Maharashtra | Manorama Khedkar, who was detained from Mahad, brought to Pune
She is the mother of IAS trainee Puja Khedkar. She is facing action after she was seen pointing a pistol at farmers in a purported viral video. pic.twitter.com/gUGa4nTzLG
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक मनोरमा खेडकर महाड के होटल में नाम बदलकर रुकी थीं। उनके साथ एक लड़का भी था। इस लड़के को उन्होंने अपना बेटा बताया था। दोनों ने होटल का कमरा 1 हजार रुपए में लिया था। बाद में दोनों खाना खाने भी नहीं आए। होटल मालिक ने बताया कि उनके पास सिर्फ एक बैग था और कमरे में जाते ही उन्होंने उसे लॉक कर लिया। हालाँकि बाद में रात के करीब 2 बजे पुलिस आई और उन्हें हिरासत में लिया।
वहीं पूजा खेडकर के पिता की बात करें तो यही पता चला है कि वो अभी तक फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में है। इस बीच जानकारी आई है कि दिलीप खेडकर जो वर्तमान में वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता हैं वह प्रशासनिक अधिकारी रहते हुए दो बार भ्रष्टाचार के मामले में सस्पेंड हुए थे। एक बार 2018 में और एक बार 2020 में। इसके अलावा करीबन 300 छोटे व्यापारियों ने उनके खिलाफ 2015 में शिकायत दर्ज कराई थी कि वो उन्हें बेवजह परेशान करते हैं।
2018 में दिलीप खेडकर जब रीजनल ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे थे तब स्थानीय आरा मिल और लकड़ी व्यापारी संघ ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने उनकी बिजली और पानी बहाल करने के लिए 25000 से 50000 तक की रिश्वत माँगी थी। इसके बाद 2019 में उनके ऊपर एक कंपनी से 20 लाख रुपए माँगने का आरोप लगा था। एंटी करप्शन ब्यूरो उनके खिलाफ लगे आरोपों की जाँच कर रहा है। उनकी गाड़ी, उनकी संपत्ति सब जाँच के घेरे में है। इसके अलावा ये भी पता चला है कि दिलीप खेडकर एक बार 6-7 महीने के लिए बिन बताए गायब हो गए थे।