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सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को 10% आरक्षण: हरियाणा के CM सैनी का ऐलान- आयुसीमा में भी मिलेगी छूट, बंदूक का लाइसेंस भी मिलेगा

भारतीय सेनाओं में भर्ती की नई योजना अग्निवीर पर उठ रहे सवालों के बीच हरियाणा की सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार (17 जुलाई 2024) को कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से अग्निवीरों को पुलिस भर्ती और माइनिंग गार्ड समेत कई अन्य पदों की भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही 5 लाख रुपए ब्याज मुक्त ऋण देने की बात भी कही है।

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि पीएम मोदी सरकार ने 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना लागू की थी। इस योजना के तहत अग्निवीरों को 4 साल के लिए भारतीय सेना में तैनात किया जाता है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार अब अग्निवीरों के लिए राज्य सरकार द्वारा भर्ती किए जाने वाले कॉन्स्टेबल, माइनिंग गार्ड, फॉरेस्ट गार्ड, जेल वॉर्डन और SPO के पदों पर सीधी भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण देगी।”

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उम्र संबंधी छूट का भी जिक्र किया। सीएम सैनी ने कहा कि ग्रुप C और D की भर्ती में अग्निवीरों को आयुसीमा में 3 साल की छूट दी जाएगी। इसके अलावा, ग्रुप C की भर्ती में 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा। वहीं, इसके पहले बैच वाले को आयुसीमा में पाँच साल की छूट मिलेगी। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोई निजी कंपनी किसी अग्निवीर को 30,000 रुपए वेतन देती है तो सरकार उस कंपनी को सालाना 60,000 रुपए की सब्सिडी देगी। इसके अलावा, अग्निवीरों को हथियारों का लाइसेंस देने की भी उन्होंने घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने अग्निवीरों को अपना व्यवसाय शुरू करने पर 5 लाख रुपए तक की राशि बिना ब्याज के जी जाएगी।

बता दें कि सीआरपीएफ, बीएसएफ जैसे सेंट्रल सिक्योरिटी फोर्सेस ने भी अग्निवीरों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की घोषणा की थी। इन संस्थानों के संबंधित प्रमुखों ने कहा था कि आने वाले सभी CRPF, BSF रिक्रूटमेंट्स में अग्निवीर के रूप में सेना में सेवा दे चुके युवाओं के लिए 10 प्रतिशत पद आरक्षित रखे जाएँगे। इसके साथ आयुसीमा में भी छूट दी जाएगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी अग्निवीर योजना को लेकर लगातार दुष्प्रचार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत अच्छी योजना है। इससे स्किल्ड यूथ फोर्स तैयार होता है। उन्होंने कहा कि अग्निवीर में युवाओं की 4 सालों की मेहनत बेकार नहीं जाएगी।

मॉल में बेटे के साथ फिल्म देखने जा रहे थे बुजुर्ग, धोती पहना देख गार्ड ने गेट पर ही रोक दिया: Video वायरल, किसान संगठन धोती में प्रदर्शन करने पहुँचे

कर्नाट़क की राजधानी बेंगलुरु में फकीरअप्पा नाम के बुजुर्ग व्यक्ति को धोती पहनकर म़़ॉल में घुसने से मना कर दिया गया। बुजुर्ग व्यक्ति मॉल में अपने बेटे के साथ फिल्म देखने पहुँचे थे। उन्होंने टिकट भी पहले से कराई हुई थी फिर भी मॉल के गार्ड उन्हें उनकी धोती देख रोकने लगे।

काफी जिरहबाजी के बाद एंट्री हुई, लेकिन फिर बुजुर्ग के बेटे ने एक वीडियो बनाई जिसमें उसने पूरी घटना के बारे में बताया। अब यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसे देख किसान संगठन से लेकर कन्नड़ समर्थक संगठन काफी नाराज हैं। वह इस घटना के विरोध में प्रदर्शन करने मॉल के बाहर पहुँच गए।

सामने आई जानकारी के अनुसार, मामला मंगलवार (16 जुलाई 2024) की शाम का है। बुजुर्ग को धोती पहनकर जीटी वर्ल्ड मॉल में एंट्री लेने से मना किया गया था। इसके बाद वहाँ काफी बहस हुई। वीडियो में देख सकते हैं कि बुजुर्ग बता रहे हैं कि मॉल के गार्ड ने उन्हें पैंट में आने को कहा था, लेकिन उन्होंने कहा कि वो तो बहुत दूर से मॉल में आए हैं और वो धोती छोड़कर पैंट नहीं पहन सकते। इसके बाद मॉल के गार्ड और उनमें बहुत बहस हुई तब जाकर बुजुर्ग को मॉल में एंट्री दी गई।

वीडियो के जरिए जब इस बारे में संगठनों को पता चला तो वो भी भड़क गए। नतीजतन किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों ने तो बुधवार को जीटी वर्ल्ड के सामने विरोध प्रदर्शन भी किया। इस दौरन सभी प्रदर्शनकारी धोती पहनकर मॉल के बाहर आए। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा, “यहाँ एक किसान आया था, उसने धोती पहन रखी थी। इसलिए सुरक्षा गार्ड ने उसे अंदर नहीं जाने दिया। इसलिए हम यहाँ विरोध कर रहे हैं।”

वहीं सोशल मीडिया पर भी लोगों में नाराजगी है कि एक बुजुर्ग के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। लोग माँग कर रहे हैं कि इस मॉल पर फाइन लगाया जाना चाहिए जो इन्हें ये नहीं पता कि इंसान के साथ व्यवहार कैसे करते हैं।

12वीं पास को ₹6000, डिप्लोमा वाले को ₹8000, ग्रेजुएट को ₹10000: क्या है महाराष्ट्र की ‘लाडला भाई योजना’, कैसे और किनको मिलेगा फायदा?

महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने युवाओं को बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार युवाओं को 6 हजार से 10 रुपए हर महीने देगी। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने लाडली बहन योजना की तर्ज पर ‘लाडला भाई योजना’ शुरू किया है। इस योजना के तहत युवाओं को प्रतिमाह 6 हजार रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक दिए जाएँगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र में ‘लाडला भाई योजना’ के तहत 12वीं पास करने वाले युवाओं को 6 हजार रुपए हर महीने मिलेंगे। डिप्लोमा करने वाले युवाओं को आठ हजार रुपए हर महीने मिलेंगे, और ग्रेजुएट युवाओं को 10 हजार रुपए हर महीने दिए जाएँगे।

बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने जून में पेश किए गए अपने बजट में बेटियों के लिए माझी लड़की योजना की घोषणा की थी। इसके साथ ही लाडली बहन योजना भी चलाई जा रही है। जिसके बाद से युवकों के लिए भी इस तरह की योजनाओं की माँग की जा रही थी और अब सरकार ने लाडला भाई योजना की घोषणा कर दी है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि राज्य सरकार लड़कियों के लिए लाडली बहन योजना लेकर आई है। उन्होंने कहा कि हम लड़कों के लिए लाडला भाई योजना भी लेकर आए हैं। लाडला भाई योजना के तहत 12वीं पास से डिप्लोमा और डिग्री धारक युवकों को हर महीने नकद राशि दी जाएगी। सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा, इस योजना से महाराष्ट्र में कुशल जनशक्ति तैयार होगी। हम प्रदेश के साथ देश के उद्योग जगत को कुशल युवा देने जा रहे हैं। सरकार युवाओं को उनकी नौकरियों में कुशल बनाने के लिए भुगतान करने जा रही है।

सीएम शिंदे ने कहा, ”इतिहास में यह पहली बार है कि किसी सरकार ने ऐसी योजना पेश की है। इस योजना के माध्यम से हमने बेरोजगारी का समाधान ढूँढ लिया है। इस योजना के तहत हमारे युवा कारखानों में ट्रेनिंग हासिल करेंगे और सरकार उन्हें वजीफा देगी। इसके तहत युवाओं को एक साल तक अप्रेंटिसशिप भी मिलेगी और फिर अप्रेंटिसशिप के अनुभव के आधार पर युवाओं को नौकरी मिलेगी।”

महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री युवा कार्य प्रशिक्षण योजना नाम की इंटर्नशिप योजना के ज़रिए राज्य के बेरोज़गार युवाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए 5,500 करोड़ रुपये आवंटित करने की योजना बनाई है। प्रतिस्पर्धी नौकरी बाज़ार के लिए युवाओं की रोज़गार क्षमता और कौशल में सुधार करने के लिए डिज़ाइन की गई इस पहल की घोषणा उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजीत पवार ने बजट 2024-25 में की थी।

उद्योगपतियों के बाद कॉन्ग्रेस के ‘लोकल कोटा’ पर IT इंडस्ट्री भी भड़की, NASSCOM ने कहा- बिल वापस नहीं हुआ तो जाएँगे कर्नाटक से बाहर: कन्नड़ बोलने वालों को प्राइवेट सेक्टर में 50-75% रिजर्वेशन

कर्नाटक सरकार का कन्नड़ लोगों को निजी नौकरियों में 50-75% तक का आरक्षण देने वाला बिल गले की फांस बनता जा रहा है। प्रमुख कारोबारियों के बाद अब IT कंपनी संगठन NASSCOM (नेशनल असोसिएशन फॉर सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेस कंपनीस) ने भी इस निर्णय अपनी चिंताएँ जाहिर की हैं। NASSCOM ने कर्नाटक सरकार से इस बिल को वापस लेने की माँग की है और कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें राज्य से बाहर जाने का कदम उठाना पड़ सकता है।

NASSCOM ने एक पत्र जारी करके इस नए बिल को लेकर समस्याएँ बताई हैं। इस पत्र में NASSCOM ने कहा, “टेक सेक्टर कर्नाटक की अर्थव्यवस्था और समाज के विकास में बड़ा कारक रहा है। टेक सेक्टर राज्य की GDP में लगभग 25% योगदान देता है और प्रदेश के रफ़्तार से तरक्की में बड़ा सहायक रहा है जिससे राज्य की प्रति व्यक्ति आय देश के औसत से ऊँची हो गई है। राज्य में देश के 30% GCC (ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर) और 11,000 स्टार्टअप हैं।”

NASSCOM ने इस बिल पर चिंता जताते हुए कहा, “इस तरह के बिल बेहद परेशान करने वाला है, यह ना केवल टेक इंडस्ट्री के विकास में बाधा डालेगा, बल्कि यहाँ नौकरियों और कर्नाटक के ब्रांड पर भी असर डालेगा। NASSCOM सदस्य इस बिल के प्रावधानों को लेकर काफी चिंतित हैं और राज्य सरकार से इसे वापस लेने की माँग करते हैं।”

NASSCOM ने कहा कि इस बिल से राज्य के विकास और कम्पनियों के राज्य से बाहर जाने और स्टार्टअप को मुश्किल में पड़ने का खतरा है। NASSCOM ने कहा है कि इस कानून के कारण कम्पनियों को बाहर जाना पड़ सकता है जिससे उन्हें टैलेंट मिल सके।

देश भर की 3200 से अधिक टेक कम्पनियाँ NASSCOM की सदस्य हैं और 245 बिलियन डॉलर (लगभग ₹20 लाख करोड़) की इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करती है। NASSCOM के विरोध के कारण कर्नाटक सरकार पर अब दबाव बन रहा है। NASSCOM से पहले NITI आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कान्त ने भी इस बिल को लेकर चिंताएँ जाहिर की।

उन्होंने कहा, कि यह एक अच्छा कदम नहीं है और इसका देश में IT सेक्टर तंत्र पर नुकसानदेह प्रभाव पड़ेगा। इस कदम से IT सेक्टर बढ़ने की बजाय रुक जाएगा। इससे पहले देश के बड़े कारोबारियों ने भी इस बिल की आलोचना की थी।

BIOCON कि मुखिया किरण मजूमदार शॉ, मनिपाल ग्लोबल सिस्टम के मुखिया TV मोहनदास पाई और युलू के को फाउंडर RK मिश्रा ने इस बिल में खामियां बताई थी। मोहनदास पाई ने इस कानून को अलोकतांत्रिक करार दिया था और इसे वापस लेने की माँग की थी।

गौरतलब है कि मंगलवार (15 जुलाई, 2024) को बेंगलुरु में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दे दी गई है। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी फैक्ट्रियों और दफ्तरों में नौकरी पर रखे जाने वाले लोग अब कन्नड़ ही होने चाहिए। इस बिल के अनुसार, राज्य में स्थित सभी दफ्तरों और फैक्ट्रियों में काम पर रखे जाने वाले ग्रुप सी और ग्रुप डी (सामान्यतः क्लर्क और चपरासी या फैक्ट्री के कामगार) के 75% लोग कन्नड़ होने चाहिए। इसके अलावा, बिल के अनुसार इससे ऊँची नौकरियों में 50% नौकरियाँ कन्नड़ लोगों को मिलनी चाहिए।

बिल के अनुसार कर्नाटक में जन्मा या कर्नाटक में पिछले 15 वर्षों से रह रहा कोई भी व्यक्ति कन्नड़ माना जाएगा और इसे इस आरक्षण का लाभ मिलेगा। कन्नड़ आरक्षण का लाभ लेने के लिए व्यक्ति को 12वीं पास होना चाहिए और इस दौरान उसके पास कन्नड़ एक विषय के तौर पर होनी जरूरी है। यदि उसके पास यह नहीं है तो उसे कन्नड़ सीखनी होगी।

फेक एड्रेस पर बनवाया राशन कार्ड, फिर इसी कार्ड का इस्तेमाल कर लिया दिव्यांगता का सर्टिफिकेट: IAS पूजा खेडकर का एक और फ्रॉड आया सामने, पारिवारिक बंगले के पास चला बुलडोजर

महाराष्ट्र की ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर को लेकर हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। कभी उनके नाम में कुछ गड़बड़ मिलती है तो कभी प्रमाणपत्र में… हर दस्तावेज में कुछ न कुछ फर्जीवाड़ा निकलने के बीच अब पता चला है कि पूजा खेडकर ने गलत एड्रेस कार्ड देकर राशन कार्ड बनवाया हुआ था और इसका प्रयोग उन्होंने दिव्यांगता सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए किया था।

पूजा खेडकर से जुड़ी ये नई जानकारी इंडिया टुडे की पड़ताल में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पूजा खेडकर ने पिंपरी के यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल से फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाया था। इसके लिए उन्होंने अपना एड्रेस पिंपरी चिंचवाड़ में बताया था और आगे प्लॉट नंबर 53, देहू-आलंदी, तलवड़े लिखा था।

जाँच होने के बाद सामने आया कि ये एड्रेस कोई रिहायशी प्रॉपर्टी नहीं है बल्कि बंद हो चुकी कंपनी थर्मोवेरिटा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड की है, मगर पूजा खेडकर ने इसका प्रयोग राशन कार्ड बनवाने के लिए किया और फिर उस राशन कार्ड की मदद से वह वीसीएफ अस्पताल से दिव्यांगता सर्टिफिकेट हासिल करने में सफल हो पाईं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में जोड़े गए दस्तावेज

हैरानी की बात ये है कि पूजा खेडकर ने जिस कंपनी का एड्रेस अपने राशन कार्ड के लिए दिया था उसी कंपनी के नाम पर रजिसटर्ड ऑडी कार वह चलाती थीं। कंपनी पर ढाई लाख से ज्यादा का टैक्स बकाया है। इसका कनेक्शन पूजा से क्या है ये सामने अभी नहीं आ पाया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन एकेडमी ने पूजा खेडकर का महाराष्ट्र से ट्रेनिंग प्रोग्राम को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही एकेडमी ने उन्हें तत्काल वापस बुलाने के लिए लेटर भी जारी किया। एकेडमी ने महाराष्ट्र सरकार को भी इस संबंध में पत्र लिखकर जानकारी दी थी। पूजा खेडकर को भेजे गए निर्देश में कहा गया था कि उनको जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्थगित रखने तथा आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए तुरंत वापस बुलाने का निर्णय लिया है।

पूजा खेडकर के घर चला बुलडोजर

बता दें कि ट्रेनी महिला आईएएस के मामले में इतने खुलासे होने के बीच एक भी खबर सामने आई थी कि पूजा खेडकर की माँ मनोरमा के बंगले के पास अवैध अतिक्रमण हो रखा था। इसपर कुछ दिन पहले पुणे नगर निगम ने उन्हें नोटिस भी जारी किया। सुनवाई न होने पर आज वहाँ नगर निगम ने बुलडोजर चला दिया। दरअसल, पुणे के बाणेर इलाके में खेडकर परिवार का बंगला स्थित है। इन्होंने बंगले के सौंदर्यीकरण के लिए फुटपाथ पर अतिक्रमण कर रखा था। लोगों के पैदल चलने के लिए बनाए गए फुटपाथ पर उन्होंने पेड़-पौधे लगा दिए थे। पूजा खेडकर के खिलाफ विवाद बढ़ने के बीच पुणे नगर निगम का ध्यान इस पर गया और उन्होंने इसपर संज्ञान लेते हुए उन्हें नोटिस जारी किया और आज इस पर बुलडोजर एक्शन लिया गया।

‘गवाहों के हस्ताक्षर नहीं, खुद ही गढ़ दिया नम्बी नारायणन का भी बयान’: CBI की चार्जशीट में खुलासा – केरल पुलिस और IB को पता था ISRO जासूसी कांड के नहीं हैं सबूत

1994 में आया ‘ISRO जासूसी कांड’ पूर्णतः फर्जी था और S विजयन नामक एक सर्किल इंस्पेक्टर ने मलेशिया की एक महिला से बदला लेने के लिए ये पूरी कहानी रची थी। 30 वर्षों बाद इस मामले में दायर की गई CBI चार्जशीट तो यही कहती है। तिरुवनंतपुरम स्थित ‘चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट’ (CJM) के समक्ष दायर चार्जशीट में बताया गया है कि कैसे मरियम रशीदा के साथ हवस की आग न बुझा पाने के कारण S विजयन ने उससे बदला लेने की ठानी और इस मामले में ISRO के वैज्ञानिकों को भी घसीट लिया।

मरियम रशीदा को 2 बार गिरफ्तार किया गया था और उनके वीजा व श्रीलंका जाने का टिकट भी पुलिस ने रख लिया था, 27 मार्च, 2024 को CBI ने दायर की गई चार्जशीट में ये बताया है। मरियम रशीदा को 1994 में एक बार 20 अक्टूबर और फिर उनकी कस्टडी खत्म होने से 1 दिन पहले 13 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। उनके व्यक्तिगत संपर्कों के आधार पर उनके जासूस होने की बात कही गई। विजयन ने कहानी बनाई थी कि रूटीन चेक के दौरान उसे मरियम रशीदा पर शक हुआ था, और वो होटल में रुकने फिर किराए के घर में रहने के लिए आ रहे पैसे के स्रोत के बारे में नहीं बता पाईं।

जबकि सच्चाई ये थी कि वीजा की अवधि बढ़ाने के किए खुद मरियम रशीदा पुलिस के पास गई थीं। फिर S विजयन उसके घर पहुँचा और जबरदस्ती की, लेकिन सफल न हो पाने के बाद वो बदला लेने के लिए अड़ गया। विजयन उसके होटल वाले कमरे और फिर घर में भी गया था। उसके साथ रह ही फौजिया को उसने बाहर भेज दिया था। विजयन ने उनका वीजा रख लिया था, ऐसे में उन्हें भारत में रुकना पड़ा और इसे ही आधार बना कर विजयन ने FIR दायर करवाई।

इसमें सबसे पहले ISRO के वैज्ञानिक D शशिकुमारन को फँसाया गया। वो ‘लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर’ (LPSC) से जुड़ा हुआ था। VR राजीवन तब पुलिस कमीशन थे। IB को सूचित किया गया, लेकिन उसे जासूसी वाली कोई बात मिली ही नहीं। विजयन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि दोनों महिलाएँ भारत की संप्रभुता एवं अखंडता के खिलाफ काम कर रही थीं, जिससे पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते भी खराब होंगे। असिस्टेंट पुलिस प्रॉसिक्यूटर हबीब पिल्लई की सलाह के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई, लेकिन पिल्लई ने इसे नकार दिया।

इसमें IB के कुछ अधिकारियों ने भी केरल पुलिस का साथ दिया। CBI ने IB द्वारा दायर की गई 4 रिपोर्ट्स को देखा, लेकिन किसी पर भी हस्ताक्षर नहीं था। किसी भी गवाह के बयान के नीचे उसका हस्ताक्षर नहीं था। गवाहों के बयान के न सिर थे न पाँव। केरल पुलिस की 16 नवंबर, 1994 की डायरी में लिखा गया कि मरियम रशीदा और फौजिया D शशिकरण के अलावा बेंगलुरु में रूस की स्पेस एजेंसी ग्लावकोस्मोस के एजेंट K चंद्रशेखर से संपर्क में थीं।

‘बहुमूल्य सूचनाएँ’ बाहर भेजने का आरोप लगाया गया, लेकिन बताया नहीं गया कि वो कौन सी सूचनाएँ थीं। खुद नम्बी नारायणन व अन्य वैज्ञानिकों के बयान पुलिस ने खुद से गढ़े। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर S जोगेश ने नम्बी नारायणन को गिरफ्तार किया था, लेकिन उन्होंने CBI को बताया कि उन्हें पूछताछ के दौरान आसपास भी नहीं फटकने दिया गया। SIT के मुखिया सिबी मैथ्यूज ने उन्हें नम्बी नारायणन का टाइप किया हुआ बयान सौंपा, जिस पर उन्हें सिर्फ सिग्नेचर करना था।

CBI की चार्जशीट में कहा गया है कि केरल पुलिस और IB अधिकारियों को ये पूरी तरह पता था कि जासूसी के आरोपों के पक्ष में सबूतों का अभाव था और पूछताछ रिपोर्ट की विषय-वास्तु भी आधारहीन थी, फिर भी गिरफ़्तारी के लिए इन्हीं चीजों का इस्तेमाल किया गया। बेंगलुरु के एक सुधीर शर्मा नामक लेबर कॉन्ट्रैक्टर को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। अप्रैल 2021 में जैन कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल पुलिस के 11 और IB के 7 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने के लिए कहा।

पटना से मोतिहारी तक बवाल लेकर आया मुहर्रम जुलूस: पथराव-मारपीट में दर्जनों घायल, पुलिसकर्मियों को भी नहीं छोड़ा

मुहर्रम के मौके पर जुलूस के दौरान बिहार के पटना, वैशाली, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और मोतिहारी बवाल की खबरें सामने आई हैं। मोहर्रम जुलूस के दौरान दो के बीच जमकर विवाद हो गया। दोनों पक्षों की ओर से जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें 6 लोग घायल हो गए। इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। पुलिस को आखिरकार लाठी भाँजनी पड़ी।

पटना में जुलूस के दौरान जमकर हंगामा किया गया। पटना के राजा बाजार में ताजिया जुलूस के दौरान देर रात तोड़फोड़ की गई थी। ताजिया जुलूस के दौरान राजा बाजार के मदरसा गली में शुभम किराना स्टोर में तोड़फोड़ की गई। इसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं। दुकानदार ने पहले हमले की बात कही, लेकिन बाद में मुकर गया। उसने कहा कि वह किसी लफड़े में नहीं पड़ना चाहता।

वैशाली में बिदुपुर थाना के माइल भैरोपुर गाँव में मोहर्रम जुलूस के दौरान दो पक्षों ने एक-दूसरे के ताजिया पर जमकर पथराव किया। इसमें 6 लोग घायल हो गए। वहीं, एक युवक पर तलवार से हमला किया गया। युवक को बिदुपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। बाद में उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टर ने सदर अस्पताल हाजीपुर रेफर कर दिया है।

मुंगेर में मोहर्रम जुलूस के दौरान दो दलों के बीच विवाद हो गया। हवेली खड़गपुर थाना क्षेत्र के मुख्य बाजार के मोमिन टोला और रौशन नगर के इमामबाड़ा के समीप दोनों पक्ष ने एक-दूसरे पर जमकर पथराव किया। इसमें 6 लोग घायल हो गए हैं। इसके कारण तनाव फैल गया है। इस दौरान मुख्य बाजार में भागदौड़ का माहौल बना रहा है।

मुजफ्फरपुर में भी कुछ ऐसा मामला सामने आया है। वहाँ डीजे जब्त करने पहुँची पुलिस टीम पर हमला किया गया है। इसके बाद भीड़ पुलिसकर्मियों पर आक्रोशित हो गई और उसे लगभग एक किलोमीटर तक दौड़ाकर उन पर पथराव किया। इस घटना में करीब 12 पुलिसकर्मी घायल हाे गए। घायलों में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

मोतिहारी में ताजिया निकालने के दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया। पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है। दरअसल, मोहर्रम के दौरान 20-30 युवक हाथों में लाठी-डंडा लेकर करतब दिखा रहे थे। इस दौरान एक युवक फिलिस्तीन का झंडा लेकर घुमा रहा था। इसका वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने दबोच लिया।

वहीं, सीतामढ़ी के मेहसौल चौक और किरण चौक पर बुधवार (17 जुलाई) की सुबह दो ताजिया जुलूस में शामिल लोगों के बीच विवाद हो गया। इस बीच दोनों पक्षों में पत्थरबाजी हो गई। पथराव में दोनों पक्षों के करीब 25 लोग घायल हुए हैं। इस दौरान पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज भाँजी।

मुस्लिम आबादी में विस्फोट से लेकर ‘अल्पसंख्यक मोर्चा’ तक पर भाजपाई मुखर: सुवेंदु बोले- जो हमारे साथ हम उसके साथ, असम के CM ने कहा- डेमोग्राफी चेंज जीवन-मौत का सवाल

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने असम के भीतर जनसांख्यिकी में बदलाव को अपने लिए जिन्दगी और मौत का मुद्दा बताया है। उन्होंने असम में मुस्लिम जनसंख्या की बढ़ोतरी को लेकर भी आँकड़े दिए हैं। उन्होंने यह बयान झारखंड की राजधानी राँची में दिया है। वहीं पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने अल्पसंख्यक मोर्चा के औचित्य पर प्रश्न उठाते हुए कहा है कि हम उनके साथ हैं, जो हमारे साथ है।

हिमंता बिस्वा सरमा को झारखंड में भाजपा का सह प्रभारी बनाया गया है। वर्तमान में वह झारखंड के दौरे पर हैं। उन्होंने राँची में एक बैठक में हिस्सा लिया और झारखंड में घुसपैठ और आदिवादी लड़कियों के धर्म परिवर्तन को बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा, “झारखंड में घुसपैठिया यहाँ की बेटियों से शादी कर रहे हैं। यह रोकने में झारखंड की JMM-कॉन्ग्रेस विफल है। घुसपैठिए पहले असम-बंगाल आते हैं। उनको पहले रोकने की जिम्मेदारी केंद्र की है लेकिन अगर वो एक बार अंदर आ गए तो उन पर कार्रवाई राज्य सरकार को करनी होती है।”

उन्होंने कहा, “झारखंड हाई कोर्ट ने सरकार को आदेश भी दिया है कि घुसपैठियों को पकड़ा जाए और बंद किया जाए। फॉरेनर्स कानून के अंतर्गत घुसपैठिए बाहर निकालने का अधिकार राज्य सरकार का होता है, मैं असम में यह काम रोज करता हूँ। यदि आप अपना काम नहीं कर रहे हैं तो दिल्ली पर दोष डाल रहे हैं तो आपको कुर्सी छोड़ दीजिए।”

उन्होंने जनसांख्यिकी की समस्या को लेकर कहा, “बदलती जनसांख्यिकी मेरे लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। असम में 1951 में मुस्लिम जनसंख्या 12% थी अब यह बढ़ कर 40% हो चुकी है। आज असम में पूरा जिला खो चुके हैं। मेरे लिए यह राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि जीने-मरने का मुद्दा है। मैं इससे रोज संघर्ष करता हूँ।”

गौरतलब है कि असम के पश्चिम बंगाल की सीमा से लगने वाले जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठ अब बड़ा मुद्दा बन रही है। कई जगह पर मुस्लिमों के जनजातीय लड़कियों से शादी करके उनके लिए बनाए गए कानूनों का फायदा उठाने की बात भी सामने आई है। वहीं कुछ जगह पर वोटरों की संख्या में एकाएक बढ़ोतरी देखी गई है।

सुवेंदु अधिकारी ने कहा- जो हमारे साथ हम उसके साथ

पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि जो हमारे साथ हैं अब हम उसके साथ हैं। वह पश्चिम बंगाल के भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “हम अब तक राष्ट्रवादी मुस्लिमों के विषय में बात करते थे और कहते थे सबका साथ, सबका विकास। अब और नहीं अब जो हमारे साथ वो उसके साथ। अब अल्पसंख्यक मोर्चा की जरूरत नहीं है। सबका साथ, सबका विकास बंद करो।”

सुवेंदु अधिकारी ने यह बयान वायरल होने के बाद इस पर ट्वीट भी किया। उन्होंने कहा, “मेरे बयान को गलत संदर्भ में लिया जा रहा है। मैं साफ़ तौर पर कहता हूँ कि जो राष्ट्रवादी हैं, इस देश और बंगाल के लिए खड़े हैं, हमें उनके साथ होना चाहिए। जो हमारे साथ नहीं खड़े हैं, देश और बंगाल के खिलाफ काम करते हैं, हमें उनका पर्दाफाश करना चाहिए। हमें इसी के साथ ममता बनर्जी की तरह लोगों को बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक में नहीं बाँटना चाहिए और उन्हें भारतीय के रूप में देखना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के नारे को पूरी तरह से मानता हूँ।”

सद्दाम सरदार ने घर में बना रखी थी सुरंग, बंगाल पुलिस पहुँची तो इसी से बांग्लादेश भाग गया: सोने की मूर्तियों के नाम पर करता था जालसाजी

पश्चिम बंगाल में अष्ठधातु और सोने की फर्जी मूर्तियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन सप्लाई करने वाले तस्कर सद्दाम सरदार ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। दरअसल, दक्षिण 24 परगना जिले में जब तस्कर सद्दाम सरदार और उसके भाई सैरुल को पुलिस ने पकड़ा, तो भीड़ ने पुलिस पर ही हमला बोल दिया और दोनों को छुड़ा लिया। इसके कुछ घंटों पर जब पुलिस टीम फिर से उसे पकड़ने के अभियान में जुटी और उसके घर पर छापा मारने पहुँची, तो उसके घर में 2 महिलाएँ मिली। दोनों महिलाओं ने पुलिस को उलझा कर रखा और सद्दाम सरदार को फरार होने का समय मिल गया।

दरअसल, वो घर में तो घुसा था, लेकिन उसके बाद गायब हो गया। पुलिस टीम ने घर में जब तलाशी ली, तो उसके होश उड़ गए, क्योंकि वहाँ एक सुरंग मिली, जिसका रास्ता सुंदर बन की तरफ जाता था। वहीं से सद्दाम सरदार फरार होने में सफल रहा। माना जा रहा है कि वो सीमा पार कर बांग्लादेश भाग गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला दक्षिण 24 परगना जिले के कुलतली का बताया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि कंक्रीट की सुरंग का एक छोर सद्दाम सरदार के घर के एक भूमिगत कमरे में खुलता है, जबकि दूसरा छोर एक नहर से जुड़ा है। पुलिस ने सोमवार (15 जुलाई 2024) को सरदार को उस मामले में गिरफ्तार किया, जिसमें उसने नकली सोने की मूर्ति के जरिए नादिया जिले के एक व्यक्ति से ₹12 लाख की ठगी की थी, हालाँकि भीड़ ने पुलिस टीम पर हमला करके सरदार को छुड़ा लिया था। बदमाशों ने पुलिस को डराने के लिए कुछ राउंड हवाई फायरिंग भी की थी।

पुलिस ने बताया कि इस घटना के बाद में पुलिस की बड़ी टीम सरदार के घर की तलाशी के लिए गाँव पहुँची, तभी उसके घर में 40 फुट की सुरंग का पता चला। ऐसा माना जा रहा है कि वो इसी रास्ते फरार होकर बांग्लादेश में दाखिल हो गया। पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार ने कहा कि किसी को भी बख्शा नहीं जायेगा। बरुईपुर पुलिस जिले के एक अधिकारी ने कहा, “सद्दाम और उसका भाई सैरुल कई मामलों में आरोपित हैं। पुलिस के उनके घर पर छापा मारे जाने की स्थिति में भागने के लिए ही घर में सुरंग बनाई गई थी।”

पुलिस अधिकारी ने बताया, “वह संभावित खरीदारों को यह कहकर लुभाता था कि उसके पास सोने की छड़ें और मूर्तियाँ हैं जिन्हें वह सस्ते दामों पर बेचना चाहता है। वह उन्हें नकली सोने की वस्तुएँ दिखाता था। जब खरीदार आते थे, तो सद्दाम उन्हें एक सुनसान जगह पर ले जाता था और उस व्यक्ति पर हमला करता था और उसका सारा सामान छीन लेता था।”

पुलिस की पूछताछ में इन महिलाओं ने बताया कि सद्दाम इन मूर्तियों की बिक्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से करता था। इसके लिए विधिवत अखबारों और सोशल मीडिया में विज्ञापन भी देता था। इसमें प्राचीनतम और अष्टधातु की मूर्तियों की बिक्री का दावा करता था, इसके लिए ग्राहकों से मोटी रकम वसूल करता था और उन्हें प्राचीनतम जैसी दिखने वाली नकली मूर्तियाँ भेज देता था।

YouTube पर सिखाती थी कैसे हो नॉर्मल डिलीवरी, ‘डॉक्टर’ सलमा का खुद का ही अस्पताल निकला फर्जी: जच्चा-बच्चा की मौत, पैथोलॉजी सेंटर सील

यूट्यूब पर डॉ सलमा नासिर नाम की महिला गर्भवती महिलाओं की ‘नॉर्मल डिलीवरी’ पर वीडियो बनाती है। इंस्टाग्राम पर भी सलमा नासिर के 50 हजार से अधिक फॉलोवर्स हैं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में उसका अस्पताल सीज कर दिया गया है। यहाँ जच्चा-बच्चा को गलत खून चढ़ाने से मौत हो गई थी, जिसके बाद प्रशासनिक जाँच में सलमा का अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन और बिना ट्रेंड स्टाफ के चलता पाया गया। यही नहीं, पैथोलॉजी सेंटर भी फर्जी तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसके बाद प्रशासन ने सबकुछ सीज कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (16 जुलाई) को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे डॉ. सलमा नासिर के हेल्थ केयर सेंटर को सील कर दिया । निरीक्षण के दौरान उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने यूट्यूबर और डॉक्टर सलमा नासिर के इस अस्पताल में अवैध लैब भी पाई। दोनों ‘दुकानों’ को सील करने के साथ ही टीम ने मझोला थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित शिकायत भी दर्ज कराई।

मंगलवार को नोडल अधिकारी वैक्स/उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने रहमत नगर स्थित सलमा नासिर हेल्थ केयर का निरीक्षण किया। क्लीनिक पर जयंतीपुर निवासी आरिफ (18 वर्ष) खून के नमूने ले रहा था। आरिफ 11वीं का छात्र है, जो पिछले दो माह से नमूने एकत्र कर रहा है। इसके अलावा डिंगरपुर निवासी सना खान वहाँ खाना बनाती मिली। निरीक्षण के दौरान आठ बेड, एक एनआईसीयू बेड, एक फोटोथेरेपी मशीन और एक ऑपरेशन थियेटर संचालित पाया गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने अधिकारियों को बताया कि डॉ. सलमा नासिर अस्पताल चलाती हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल में अवैध पैथोलॉजी लैब भी चलती मिली।

अस्पताल के लेटरहेड पर डॉ. मोहम्मद असीम, डीएमएलटी और डॉ. के कुमार, एमडी पैथोलॉजी दोनों का उल्लेख था, लेकिन उनमें से कोई भी अस्पताल में नहीं था। अवैध पैथोलॉजी लैब के अंदर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को रक्त संग्रह बैग, एक माइक्रोस्कोप, एक सेंट्रीफ्यूज, एक ब्लड रोलर, एक सेल काउंटर और एक मॉनिटर मिला। जब सीएमओ और उनकी टीम ने निरीक्षण किया तो सलमा नासिर के अस्पताल में दो मरीज भर्ती थे।

नोडल अधिकारी-उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि जाँच के दौरान दवाइयाँ भी पाई गईं। इनमें मल्टीविटामिन, बीटामेथासोन सोडियम फॉस्फेट और रैनिटिडीन आदि शामिल हैं। डॉ. नरेंद्र कुमार ने कहा, “अस्पताल को सील करने के अलावा अस्पताल के संचालक और चिकित्सक के खिलाफ थाना मझोला में मुकदमा दर्ज कराया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि संचालक के द्वारा आम लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ एवँ धोखाधड़ी की जा रही है।” उन्होंने बताया कि अस्पताल न तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में पंजीकृत है और न ही उन्होंने क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी के कार्यालय में पंजीकरण से संबंधित कोई रिकॉर्ड जमा किया है। स्वास्थ्य सेवा सुविधा में कोई पेशेवर डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था। अस्पताल में आग से सुरक्षा या बायोमेडिकल कचरे के निपटान की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।