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वाहन फूँके, पुलिस पर हमला… दंगों में जला ब्रिटेन का लीड्स: यहीं से सांसद चुना गया है गाजा समर्थक मोतिन अली, जीत के बाद लगे थे ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे

ब्रिटेन के शहर लीड्स में दंगे भड़क गए हैं। प्रवासी दंगाइयों ने एक इलाके में जम का उत्पात मचाया और पुलिस की गाड़ियों तोड़ आग लगा दी। उन्होंने कुछ वाहनों में आग लगा दी। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। दंगे का कारण एक समुदाय और सरकारी एजेंसी के बीच का विवाद बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लीड्स के हेयर हिल्स इलाके में यह दंगा गुरुवार (18 जुलाई, 2024) को चालू हुआ। दंगे की स्थिति शाम 5 बजे से ही बना चालू हो गई थी। इसके बाद दंगाइयों ने पुलिस की एक गाड़ी को पलट दिया और एक बस को आग लगा दी। पथराव होने की भी सूचना है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिखता है कि भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं और दंगा कर रहे हैं। वह पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ कर रहे है, इस बीच पुलिस यहाँ से गायब नजर आती है। इन दंगों के बीच यहाँ के नवनिर्वाचित सांसद मोतिन अली भी देखे गए हैं।

बताया गया है कि दंगे का कारण यहाँ रहने वाले लोगों के बच्चों को उनसे अलग करने का प्रयास रहा। ब्रिटेन में बच्चों की देखरेख करने वाली चाइल्ड केयर एजेंसी इस इलाके से बच्चों को बाल देखभाल गृह में ले जाना चाहती थी। इस इलाके में रहने वाले लोग इसके खिलाफ थे।

जब गुरुवार को एजेंसी ने यह प्रयास किया तो बच्चों के अभिभावक भड़क गए और एजेंसी के खिलाफ प्रदर्शन चालू कर दिया। इसके बाद यहाँ दंगा और तोड़फोड़ चालू हो गई। दरअसल, इस इलाके में ब्रिटेन के बाहर से आए शरणार्थी रहते हैं, इनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है।

इनकी आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण इनके बच्चों को अच्छी देखभाल ना मिल पाने का शक ब्रिटेन की चाइल्ड केयर एजेंसी को है। इसीलिए वह इन बच्चों को उनके माता-पिता से अलग करके अपने साथ रखना चाहती है। अभिभावक और कई मामलों में बच्चे, इसके लिए तैयार नहीं हैं।

लीड्स में हुए दंगों के बाद यहाँ भारी पुलिस बल और अग्निशमन दस्ते भेजे गए। स्थानीय नेताओं ने भी इस इलाके का दौरा करके लोगों को शांत रहने की अपील की। ब्रिटेन की गृह मंत्री यवेत्ते कूपर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मैं आज रात लीड्स में पुलिस वाहनों और सार्वजनिक परिवहन पर हुए चौंकाने हमलों से स्तब्ध हूँ। इस तरह की अव्यवस्था का हमारे समाज में कोई स्थान नहीं है। मैं वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस को उनकी कार्रवाई के लिए धन्यवाद देती हूँ। मैं लगातार अपडेट ले रही हूँ।”

जहाँ सब हैं भोले के भक्त, बोल बम की सेवा जहाँ सबका धर्म… वहाँ अस्पृश्यता की राजनीति मत ठूँसिए नकवी साब!

सावन का पवित्र महीना शुरू होने को है। काँवड़िए अपनी पवित्र यात्रा पर निकलने को तैयार हैं। शायद दुनिया की सबसे अनोखी यात्रा पर, जिसमें शामिल होने की एक मात्र शर्त होती है ‘काँवड़िया’, ‘भोला’, ‘बम’ होना। इस काँवड़ यात्रा के दौरान होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए यूपी के मुजफ्फरनगर की पुलिस ने एक आदेश जारी किया, जिसमें सभी दुकानदारों को अपनी असली पहचान के साथ दुकानें, ढाबे, फलों की रेहड़ियों को लगाने के लिए कहा गया।

मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश के सामने आते ही तमाम सेकुलर रुदालियाँ उठनी शुरू हो गईं। असदुद्दीन ओवैसी उसे नाजीवाद से जोड़ने लगे, तो अखिलेश यादव किसी और चीज से। मोहम्मद जुबैर जैसे वामपंथी-कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम के झूठ फैलाने वाले कथित ‘फैक्ट चेकर’ इस आदेश को ‘धार्मिक भेदभाव’ कह कर लोगों को भड़काने की कोशिश में जुट गए। इसी बीच, आवाज आई पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी की, जिन्होंने इसे अस्पृश्यता से ही जोड़ दिया।

मुख्तार अब्बास नकवी ने एक्स पर लिखा, “कुछ अति-उत्साही अधिकारियों के आदेश हड़बड़ी में गडबड़ी वाली ..अस्पृश्यता की बीमारी को बढ़ावा दे सकते हैं…आस्था का सम्मान होना ही चाहिए,पर अस्पृश्यता का संरक्षण नहीं होना चाहिए….”जनम जात मत पूछिए, का जात अरु पात। रैदास पूत सब प्रभु के,कोए नहिं जात कुजात।।”

अब नकवी साहब ने बात तो कह दी, लेकिन वो शायद भूल गए कि वो काँवड़ यात्रा पर सवाल उठा रहे हैं, और आस्था को अस्पृश्यता से जोड़ रहे हैं। पुलिसिया फैसले पर सवाल उठाते-उठाते उन्होंने ऐसी नाजुक डोर को छोड़ दिया, जिसका काँवड़ यात्रा से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं।

दरअसल, सावन का महीना नजदीक आते ही शिव भक्त तैयारी में लग जाते हैं। शिव भक्त उस यात्रा की तैयारी में लगते हैं, जिसमें उन्हें कई कई दिन तक पैदल चलना पड़ता है। इस यात्रा को ‘काँवड़ यात्रा’ कहा जाता है। उत्तर भारत में खासकर यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान जैसे राज्यों में शिव भक्त काँवड़ यात्रा पर निकलते हैं। वो पवित्र जलाशयों से जल लाते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव को जल समर्पित करते हैं। काँवड़ यात्रा के दौरान काँवड़िए तमाम कठिनाईयों का सामना करते हैं। पैरों में छाले पड़ जाते हैं। शरीर में भयंकर दर्द होता रहता है। बुखार-जुकाम से शरीर तपने लगता है। एक-एक कदम आगे बढ़ाना दूभर होने लगता है।

हालाँकि इन्हीं रास्तों पर इन शिवभक्तों की खूब आव-भगत भी होती है। जगह-जगह कैंप लगे होते हैं। भंडारे चल रहे होते हैं। काँवड़ियों के जख्मों पर मरहम लगाया जाता रहता है। पैरों को दबाया जाता है। भोजन-पानी-आराम-दवा सबकी व्यवस्था लोग करते हैं, जिसमें एक ही भाव होता है-‘बम यानी शिव भक्तों की सेवा’। ये सेवा उन्हें महादेव से जोड़ती है और जो माध्यम बनते हैं काँवड़िए- वो माँझी भी होते हैं, पासवान भी, सिंह भी होते हैं, गहलोत भी, ब्राह्मण भी, क्षत्रिय भी, इनमें गुर्जर भी होते हैं, जाट भी, इनमें एससी वर्ग के लोग होते हैं, तो ओबीसी भी होते हैं, जनरल भी होते हैं, तो कुछ शौकिया मुस्लिम, सिख, क्रिश्चियन भी, लेकिन इनकी सेवा कर रहे लोग इनसे न तो इनकी जाति पूछते हैं और न ही उनकी इसमें कोई दिलचस्पी होती है।

काँवड़ यात्रा यूँ तो देश के अनेक हिस्सों में विराजते ज्योतिर्लिंगों तक निकलती ही है, लेकिन हरिद्वार से दिल्ली-एनसीआर, बिहार-झारखंड में सुल्तानपुर-देवघर की, वाराणसी में बाबा विश्वनाथ की काँवड़ यात्रा खास मानी जाती है। इस दौरान प्रशासन भी इनकी सेवा में लगा होता है। यूपी, उत्तराखंड जैसे राज्यों में काँवड़ियों का अब स्वागत होने लगा है। सरकार उनके ऊपर पुष्पवर्षा भी करती है। वर्ना एक समय होता था, जब काँवड़ियों को हरिद्वार से दिल्ली और फिर हरियाणा पहुँचने में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब तो खैर जन दबाव में ही सही, काँवड़ियों के लिए कॉरिडोर तक बनाया जाने लगा है, वर्ना वो दिन बहुत पीछे नहीं छूटे, जब आए दिन काँवड़ियों पर हमले या फिर उनके पलटवार की खबरें अखबारों के पन्नों में होती थी। इन सबके बावजूद कभी काँवड़ियों के उमंग और उत्साह में कोई कमीं नहीं आई।

ये अलग बात है कि उनपर सवाल उठाने वालों की कोई कमीं कभी नहीं रही। अब तो बाकायदा काँवड़ यात्रा को हिंदुत्व और राजनीति से जोड़कर काँवड़ियों को राजनीतिक निशाना बनाया जाने लगा है। यकीन नहीं आ रहा हो, तो तथाकथित ‘सेकुलर’ नेताओं की टाइमलाइन ही देख लीजिए। पर इन सब बातों को ध्यान दिलाते हुए सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा कि भोले के भक्तों को राजनीतिक और सामाजिक अस्पृश्यता से मत जोड़िए, क्योंकि काँवड़ यात्रा में न तो कोई अगड़ा होता है, न कोई पिछड़ा होता है, न कोई स्वधर्मी होता है, न कोई विधर्मी होता है। अगर कोई हर तरफ दिखता है, तो वो सिर्फ भोले का भक्त होता है। ‘बम’ होता है। खुद ‘भोला’ होता है।

‘कितने क्रूर हो सकते हैं इंसान…’: मुहर्रम के जुलूस के वीडियो में दिखा ‘घायल घोड़ा’ तो भड़के सोशल मीडिया यूजर, शरीर पर जगह-जगह कटे निशान की जानिए हकीकत

मुस्लिम समुदाय के शिया तबके ने बुधवार (17 जुलाई 2024) को आशूरा या मुहर्रम के महीने का 10वाँ दिन मनाया। इस दिन इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के नवासे इमाम हुसैन कर्बला में शहीद हो गए थे। उनकी याद में शिया मुस्लिम जुलूस निकालकर दुख प्रकट करते हैं। इस दौरान मुंबई का वीडियो सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि गंभीर रूप से जख्मी एक घोड़े को परेड कराया जा रहा है।

सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि शिया मुस्लिम मोहर्रम का जुलूस निकालने के दौरान एक बेजुबान प्राणी का जुलूस निकाल रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि शोक मनाने की रस्म के दौरान घोड़े के शरीर पर गंभीर रूप से चोट के कई निशान हैं। ऐसा लग रहा है जैसे तलवार या चाकू से उसके शरीर को चीरा गया हो। उसके शरीर पर भी खून जैसे रंग दिख रहे हैं।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वे मुस्लिम समुदाय पर चाकू-ब्लेड से मासूम जानवर को घायल करने का आरोप लगा रहे हैं। दरअसल, इस वीडियो को सबसे पहले मुंबई स्थित एक पशु अधिकार समूह ने शेयर किया था। हालाँकि, बाद में इसे हटा लिया और स्पष्टीकरण दिया कि जानवर पर कोई कट के निशान नहीं थे। यह शरीर पर रंग के निशान थे।

@AmyMek नाम के X हैंल ने लिखा, “इस साल, मुंबई की सड़कों पर डरे हुए मुस्लिम एक मासूम घोड़े को लेकर उसे बार-बार चाकू से काटते हैं और खून से लथपथ, घायल जानवर को पैगंबर के पोते की मौत की याद में घुमाते हैं। ये मनोरोगी खुद को काटने और पीटने से थक गए हैं और इसके बजाय उन्होंने एक मासूम जानवर को निशाना बनाने का फैसला किया है। इसकी अनुमति कैसे दी जा सकती है?”

@sneheshphilip नाम के हैंडल ने लिखा, “आज एक बहुत ही परेशान करने वाला वीडियो देखा। अब रिपोर्ट्स के अनुसार यह वीडियो मुंबई में मुहर्रम के जुलूस का है। घोड़े को चाकू से काटा गया और उसे कई चोटों के साथ चलने पर मजबूर किया गया। इंसान कितने क्रूर हो सकते हैं। दयनीय।”

सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो मुंबई के डोंगरी का है। शिया मुस्लिम शोक मनाने के लिए डोंगरी के पास बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं। वे सड़कों पर बिना चप्पल के काले कपड़े पहनकर परेड करते हैं। इस दौरान चाकू और दूसरी नुकीली चीज़ों से खुद को चोट भी पहुँचाते हैं। उनके शरीर पर चोट और खून के निशान भी दिखते हैं।

इंटरनेट यूज़र्स को लगा कि अगर शिया मुस्लिम शोक प्रकट करने के लिए खुद को नुकसान पहुँचा सकते हैं तो इस घोड़े या अन्य जानवरों को भी चोट पहुँचा सकते हैं। हालाँकि, इस वीडियो में जो दिख रहा है, वह सच नहीं है। दरअसल, शिया मुस्लिम इमाम हुसैन के घोड़े की याद में मुहर्रम के दिन एक घायल घोड़े को परेड कराने की रस्म निभाते हैं।

कहा जाता है कि कर्बला की लड़ाई के दौरान यह घोड़ा गंभीर रूप से घायल हो गया था। यह भी कहा जाता है कि इमाम हुसैन शहीद हो गए थे और उन्हें 10 से अधिक घोड़ों के पैरों तले रौंद दिया गया था। खैर जो भी हो, जिस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया यूजर नाराज हैं, वह असली नहीं है। हकीकत पता चलने पर कई लोगों ने अपने पोस्ट डिलीट कर दिए।

भारतीय क्रिकेट टीम पर गौतम गंभीर की छाप: श्रीलंका दौरे के लिए हार्दिक नहीं सूर्या बने कप्तान, वनडे टीम में लौटे KL राहुल, जिम्बॉब्वे में डेब्यू करने वाले 4 खिलाड़ियों की छुट्टी

गौतम गंभीर के भारतीय क्रिकेट टीम का हेड कोच बनने के बाद श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंडिया का ऐलान हो गया है, जिस पर साफ तौर पर गौतम गंभीर का असर देखा जा सकता है। श्रीलंका दौरे के लिए भारत की टी-20 और वनडे क्रिकेट टीम का ऐलान हुआ है, जिसमें टी-20 टीम की कप्तानी सूर्यकुमार यादव को सौंपी गई है। इसके साथ ही वन-डे सीरीज के लिए रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों की वापसी भी हुई है, लेकिन जो सबसे चौंकाने वाली बात है, वो है हार्दिक पांड्या को लीडरशिप रोल से हटाना और शुभमन गिल को टी-20 के साथ ही वन-डे टीम का भी उप-कप्तान बना देना, क्योंकि हार्दिक पांड्या अभी विश्वकप जीतने वाली टीम के उप-कप्तान थे।

गौतम गंभीर का टीम इंडिया के कोच के तौर पर यह पहला दौरा होगा। श्रीलंका दौरे के लिए चुनी गई भारतीय टीम में गौतम गंभीर की छाप दिख रही है। हार्दिक पंड्या की दावेदारी को नजरअंदाज कर सूर्यकुमार यादव को कप्तान बनाया जाना इसका सबूत है। हार्दिक पांड्या को वनडे टीम में जगह तक नहीं मिली, उन्हें सिर्फ टी-20 टीम में शामिल किया गया है।

जिम्बाब्वे में डेब्यू करने वाले 4 खिलाड़ी बाहर

विश्वकप जीत के बाद भारत की युवा टीम ने जिम्बॉब्वे का दौरा किया था। इस दौरे पर 5 खिलाड़ियों ने डेब्यू किया था, लेकिन रियान पराग को छोड़कर सभी को बाहर कर दिया गया है। इसमें चौंकाने वाला नाम बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अभिषेक शर्मा का है, जिन्होंने न सिर्फ शतक बनाया था, बल्कि अहम मौके पर गेंदबाजी करते हुए विकेट भी लिया था। वहीं, साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल और तुषार देशपांडे को भी बाहर कर दिया गया। दरअसल, टीम में सीनियर खिलाड़ियों की वापसी हुई है, ऐसे में सभी को एक साथ जगह नहीं मिल सकती थी। संजू सैमसन, शिवम दुबे, यशस्वी जायसवाल, वाशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों को चुना गया है।

श्रीलंका दौरे के लिए भारत की टी20 टीम

सूर्यकुमार यादव (कप्तान), शुभमन गिल (उप कप्तान), यशस्वी जायसवाल, रिंकू सिंह, रियान पराग, ऋषभ पंत, संजू सैमसन, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, अर्शदीप सिंह, खलील अहमद और मोहम्मद सिराज।

रोहित-विराट की वनडे टीम में वापसी, संभालेंगे कप्तानी

श्रीलंका दौरे के लिए वनडे टीम का ऐलान हुआ है। माना जा रहा था कि इस दौरे पर सीनियर खिलाड़ी नहीं जाएँगे, लेकिन गौतम गंभीर की बतौर कोच पहली सीरीज बेरंग न दिखे, इसके लिए सभी सीनियर खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया गया है, सिवाय रविंद्र जड़ेजा और जसप्रीत बुमराह के। वहीं, केकेआर के कप्तान रहे श्रेयस अय्यर की भी वन-डे टीम में वापसी हुई है, तो लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान केएल राहुल की भी। दोनों की गौतम गंभीर से नजदीकियाँ किसी से छिपी नहीं है, साथ ही दोनों बेहतरीन खिलाड़ी भी हैं। इस समय दोनों पूरी तरह से फिट भी हैं। वहीं, ऋषभ पंत की भी बतौर विकेटकीपर वन-डे टीम में वापसी हुई है, तो शुभमन गिल को टी20 की तरह वनडे टीम का उप कप्तान भी बना दिया गया है। टीम की कमान रोहित शर्मा संभालेंगे, तो विराट कोहली भी उनका साथ देने के लिए मौजूद रहेंगे।

भारत की वनडे टीम

रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल (उप कप्तान), विराट कोहली, केएल राहुल, ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर, शिवम दुबे, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, वाशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, रियान पराग, अक्षर पटेल, खलील अहमद और हर्षित राणा।

SI के पेट को चीर कर कॉन्स्टेबल के सिर जा घुसा बुलेट, कॉन्स्टेबल याकूब की मौत: पशु तस्करों के खिलाफ रेड मारने गई थी पुलिस, पिस्टल हो गई जाम

अलीगढ़ में एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में एक कॉन्स्टेबल की मौत हो गई, जबकि एक सब-इंस्पेक्टर घायल हो गया। दरअसल, पुलिस पशु तस्करों की तलाश में छापेमारी करने एक गाँव में पहुँची थी, वहाँ एक पुलिसकर्मी की पिस्टल जाम हो गई। पिस्टल जब एसआई चेक करने लगे, तो उससे गोली चल गई। वो गोली एसआई के पेट को चीरती हुई कॉन्स्टेबल के सिर में जा घुसी। इस हादसे में एसआई गंभीर रुप से घायल हो गए, तो कॉन्स्टेबल की मौत हो गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना बुलंदशहर जिले की सीमा से लगे एक गाँव में पशु तस्करों को पकड़ने के लिए चल रही छापेमारी के दौरान हुई। मृत कॉन्स्टेबल का नाम याकूब खान है, तो एसआई राजीव कुमार घायल हो गए हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजीव सुमन के अनुसार, 9 जुलाई को गोवंश तस्करी की घटना हुई थी, जिसके बाद पुलिस अपराधियों की तलाश कर रही थी। जब पुलिस को सूचना मिली कि वही तस्कर फिर से गोवंश तस्करी की कोशिश कर रहे हैं, तो स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और इलाके के दो थानों की पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए मौके पर पहुँच गई।

ऑपरेशन के दौरान रात करीब 1 बजे इंस्पेक्टर अजहर हुसैन की सर्विस पिस्टल जाम हो गई। जब वे पिस्टल को अनलॉक नहीं कर पाए तो सब-इंस्पेक्टर राजीव कुमार ने इसे अनलॉक करने की कोशिश की। जब वे पिस्टल को अनलॉक करने की कोशिश कर रहे थे, तो गलती से गोली चल गई। गोली सब इंस्पेक्टर राजीव कुमार के पेट से होते हुए पास में खड़े कांस्टेबल याकूब के सिर में जा लगी।

दोनों पुलिसकर्मियों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने याकूब को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर राजीव कुमार की जान बचाने में सफल रहे, लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। उनकी आँत में कई घाव थे। सर्जरी के बाद होश में आने के बाद एसआई राजीव कुमार ने पुष्टि की कि यह घटना तब हुई जब उनके सहकर्मी ने उन्हें अनलॉक करने के लिए जाम हुई पिस्तौल दी। उन्होंने कहा कि पिस्तौल से गलती से गोली चल गई और वह उनके पेट में जा लगी और फिर एसओजी कान्स्टेबल याकूब को जा लगी।

एसएसपी संजीव सुमन ने बताया कि कान्स्टेबल याकूब का पार्थिव शरीर पूरे पुलिस सम्मान के साथ उसके परिवार को सौंप दिया गया है। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि उन्हें हरसंभव मदद मुहैया कराई जाएगी। इस बीच, याकूब खान का परिवार पुलिस की बात पर भरोसा नहीं कर रहा है।

पीड़ित के पिता ने कहा कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि गोली राजीव कुमार के पेट में घुसने के बाद याकूब के सिर में कैसे लगी। परिवार ने इसे हत्या का मामला बताते हुए जाँच की माँग की है। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी आश्चर्य व्यक्त किया कि याकूब के शरीर की स्थिति क्या थी कि उसके सिर में गोली लग गई जो राजीव कुमार के पेट से होकर गुजरी। उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि जाँच होगी।”

अजमेर दरगाह के सामने ‘सर तन से जुदा’ मामले की जाँच में लापरवाही! कई खामियाँ आईं सामने: कॉन्ग्रेस सरकार ने कराई थी जाँच, खादिम गौहर चिश्ती बरी

राजस्थान के अजमेर शरीफ दरगाह के सामने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने वाले दरगाह के खादिम मौलवी गौहर चिश्ती सहित छह आरोपितों को कोर्ट ने बरी कर दिया था। हालाँकि, चिश्ती जेल से बाहर नहीं आ पाया था। उस पर अन्य मुकदमे भी हैं। इन मुकदमों में जमानत या रिहाई मिलने के बाद ही वह जेल से बाहर आ पाएगा। इस बीच कोर्ट के निर्णय का डिटेल सामने आया है।

दरअसल, अदालत के निर्णय वाले दिन आरोपितों के वकील अजय वर्मा ने कहा था कि भड़काऊ नारे वाले जो वीडियो सामने आए थे, उनका सत्यापन नहीं हो पाया। पुलिस ने मौके का नक्शा नहीं बनाया और जो पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, वे भी अपनी मौजूदगी के दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। कोर्ट ने इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाया और सभी आरोपितों को बरी कर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार राहुल शिवशंकर ने सोशल मीडिया साइट X पर एक पोस्ट करके जजमेंट के कुछ हिस्से साझा किए हैं। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा बरती गई लापरवाही को भी इंगित किया है। उन्होंने लिखा है, “राजस्थान पुलिस द्वारा 2022 में जाँच के दौरान की गई ‘अस्पष्ट’ चूकों की एक श्रृंखला को न्यायाधीश ने अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती को बरी करते हुए चिह्नित किया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “खादिम पर आधा दर्जन अन्य लोगों के साथ ‘सर तन से जुदा’ का नारा लगाने का आरोप था। बरी किए जाने पर तीखी बहस छिड़ गई क्योंकि चिश्ती को तत्कालीन भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा की गई टिप्पणियों की प्रतिक्रिया में दिनदहाड़े घृणित नारा लगाते हुए स्पष्ट रूप से कैमरे पर कैद किया गया था।”

राहुल शिवशंकर द्वारा साझा किए जजमेंट के कुछ अंश में कहा गया है, “परिवादी जयनारायण के द्वारा जो घटना का वीडियो 17.06.2022 को अपने मोबाइल से बनाया जाना बताया है, उस वीडियो को 17 जून से 25 जून 2022 तक अपने पास रखा गया। जयनारायण द्वारा स्वयं का मोबाइल इस प्रकरण में जब्त नहीं किया गया।”

कोर्ट ने आगे कहा है, “जयनारायण के द्वारा घटना का वीडियो बनवारी लाल और दलवीर सिंह दिखाना बताता है, परंतु उसके बावजूद भी कोई कार्यवाही उनके द्वारा नहीं किया जाना भी अभियोजन पक्ष की कहानी को संदेहास्पद बनाता है। जयनारायण साल 2023 में अपनी मोबाइल खराब होना बताता है।”

दरअसल, अजमेर दरगाह के बाहर लगभग गौहर चिश्ती और 3000 लोगों की उपस्थिति में ‘सर तन से जुदा के नारे’ लगे थे। इसको लेकर कॉन्स्टेबल जयनारायण जाट ने इस मामले की रिपोर्ट थाने में दर्ज करवाई थी। जाट की रिपोर्ट के आधार पर चिश्ती पर हिंसा के लिए भीड़ को उकसाने और हत्या की अपील करने का मामला दर्ज किया गया था।

कॉन्स्टेबल जयनारायण जाट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि था कि घटना के दिन वह दोपहर करीब 3 बजे निजाम गेट पर ड्यूटी दे रहे थे। उस दौरान मौन जुलूस निकाला जा रहा था। जाट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस दौरान सुनियोजित तरीके से खादिम गौहर चिश्ती हित कुछ लोगों ने नारे लगाने शुरू कर दिए थे। उसमें रिक्शे पर लाउडस्पीकर लगाकर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाए थे।

इस मामले में कोर्ट ने जो आगे सवाल उठाया है वह है, 16 जून 2022 की मीटिंग जो अभियोजन पक्ष के द्वारा अभियुक्त गौहर चिश्ती के द्वारा आहूत किया जाना बताया है, उसकी डीवीआर जो अंजुमन यादगार कमिटी के सीसीटीवी कैमरे का होना बताया गया है, उक्त डीवीआर वैध अभिरक्षा से प्राप्त होना प्रमाणित नहीं होता है।”

कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि इस डीवीआर को हासिल करने के लिए अंजुमन यादगार कमिटी को पत्र लिखा गया हो, ऐसा किसी गवाह ने नहीं है। इस डीवीआर को चाँद मोहम्मद डब्ल्यू द्वारा देना बताया गया है। कोर्ट ने कहा कि जब इस डीवीआर को चलाकर देखा गया तो इसमें कोई आवाज नहीं आ रही थी।

कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया की गौहर चिश्ती के भाषण से संंबंधित पुलिस द्वारा जो सीडी पेश की गई उसमें काँट-छाँट की गुंजाईश लग रही है। चिश्ती द्वारा किसी को जान से मारने की भी जो बात कही गई है, उसे सुनने के लिए पूरा सीडी देखना जरूरी है, जो कि सीडी में पूरा है नहीं। इसलिए यह सीडी संदेहास्पद बन जाती है।

इस तरह कोर्ट इस मामले से जुड़े जयनारायण जाट के द्वारा घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग से लेकर, उसे अपने साथी तक दिखाने की बात और फिर मोबाइल का टूट जाना आदि इस केस में कदम-कदम पर खामियाँ और अंतर्विरोध है। इसका फायदा आरोपित गौहर चिश्ती को मिला और कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।

दरअसल, आरोपितों की ओर से पेश कोर्ट में पेश वकील अजय वर्मा ने कहा था कि भड़काऊ नारे वाले जो भी  वीडियो सामने आए थे, उनका सत्यापन नहीं हो पाया है। पुलिस ने मौके का नक्शा नहीं बनाया और जो पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, वे भी अपनी मौजूदगी के दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। वकील ने कहा कि कोर्ट ने इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाया और सभी आरोपितों को बरी कर दिया।

इससे साफ लगता है कि पुलिस ने इस मामले की पैरवी ढंग नहीं कर पाई। जो वीडियो वायरल हुआ, उसका सत्यापन नहीं करा पाना भी एक बड़ी नाकामी है। जिस पुलिसकर्मी जयनारायण जाट ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वे घटना के दिन ड्यूटी निजाम गेट पर थी। इस बात को भी जाट एवं अन्य पुलिसकर्मी पेश नहीं कर पाए। सत्यनारायण जाट के हर बयान में विरोधाभास है।

ये सारा उस समय अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस के शासन काल में हुआ था। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कॉनग्रेस ने जानबूझकर मामले में लापरवाही की और ढंग से पैरवी ना करके गौहर चिश्ती को बचाने की कोशिश की। जिस तरह से कोर्ट ने इस मामले में खामियों की ओर इशारा किया है, वह पुलिस की लापरवाही को साफ दर्शाता है।

धमाके के कारण हुआ ट्रेन हादसा?: चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के ड्राईवर का दावा- विस्फोट की आवाज सुन लगाई थी इमर्जेंसी ब्रेक पटरी से उतरने के कारण 4 की मौत

उत्तर प्रदेश के गोंडा के पास चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो गई। ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसकी वजह से 4 लोगों के मौत और 20 लोगों के घायल होने की सूचना मिल रही है। इस बीच, दावा किया जा रहा है कि लोको पायलट ने धमाके की आवाज सुनी थी, जिसके बाद इमर्जेंसी ब्रेक लगाने के चलते ये हादसा हुआ। वहीं, रेलवे ने हादसे से पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। मृतकों के परिजनों को 10 लाख, गंभीर रूप से घायलों को 2.5 लाख और मामूली रूप से घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी।

धमाके के बाद लगाए गए इमर्जेंसी ब्रेक के चलते हादसा?

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रेलवे के सूत्रों ने बताया कि ट्रेन के ड्राइवर यानी लोको पायलट ने हादसे से पहले धमाके की एक आवाज सुनी थी। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के पूछताछ के दौरान ट्रेन के लोको पायलट ने खुलासा किया कि उसने किसी तेज धमाके की आवाज सुनी थी और आवाज सुनकर पालयट ने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। चूँकि गाड़ी ठीक स्पीड पर थी, इसलिए अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाने के कारण कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए। हालाँकि अब तक ये साफ नहीं हो पाया कि आवाज किस चीज की थी।

धमाके की आवाज यात्रियों ने भी सुनी?

डिब्रूगढ़-चंडीगढ़ एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे एक यात्री ने भी दावा किया है कि उसने धमाके की आवाज सुनी थी। यात्री ने कहा, “मुझे हाजीपुर जाना था… (घटना से पहले) हल्का विस्फोट हुआ और उसके बाद एक जोरदार झटका महसूस हुआ और हमारा कोच पटरी से उतर गया। हम चंडीगढ़ से आ रहे थे…”

जिलाधिकारी डॉ. नेहा शर्मा ने बताया कि दुर्घटना में ट्रेन के आठ डिब्बे पटरी से उतर गये और अब तक चार लोगों की मौत की सूचना है। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्य जारी है तथा सभी मृतकों और घायलों को बाहर निकाला जा चुका है. घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।

रेलवे ने की मुआवजे की घोषणा

इस हादसे के हताहतों के लिए रेलवे ने मुआवजे की घोषणा की है। रेल मंत्रालय ने एक बयान जारी कर ये घोषणा की। रेल मंत्रालय ने कहा, “मृतकों के परिवार को 10 लाख रुपए, गंभीर रूप से घायलों को 2.5 लाख रुपए और मामूली रूप से घायलों को 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। सीआरएस जाँच के अलावा, उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दिए गए हैं।”

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। हादसे के कारण सम्बन्धित रेल खंड पर कटिहार-अमृतसर एक्सप्रेस और गुवाहाटी-श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा एक्सप्रेस का मार्ग परिवर्तन करके इन्हें दूसरे रास्ते से रवाना किया गया है। इसके अलावा भी कई ट्रेनों को डायवर्ट किया गया है, तो कुछ ट्रेनों को रद्द भी करना पड़ा है।

हेल्पलाइन नंबर जारी

रेलवे बोर्ड ने कई हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं – कमर्शियल कंट्रोल: 9957555984, फुर्केटिंग (FKG): 9957555966, मारियानी (MXN): 6001882410, सिमलगुड़ी (SLGR): 8789543798, तिनसुकिया (NTSK): 9957555959, डिब्रूगढ़ (DBRG): 9957555960

काँवड़ यात्रा पर किसी भी हमले के लिए मोहम्मद जुबैर होगा जिम्मेदार: यशवीर महाराज ने ‘सेकुलर’-इस्लामी रुदालियों पर बोला हमला, ढाबों मालिकों की सूची लगाने का दिया गया था निर्देश

स्वामी यशवीर महाराज ने 18 जुलाई 2024 को एक वीडियो बयान जारी कर इस्लामिक कट्टरपंथियों और तथाकथित ‘सेकुलरों’ को आड़े हाथों लिया, जो यूपी के मुजफ्फरनगर के काँवड़ रूट पर दुकानों और ठेलों पर उनके मालिकों के नाम लिखने के मुजफ्फरनगर पुलिस के निर्देश का विरोध कर रहे हैं।

काँवड़ यात्रियों के बीच दुकानों के मालिक को लेकर किसी तरह के भ्रम की स्थिति न हो, इसके लिए ये निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें कि लंबे समय से ऐसी खबरें आ रही हैं, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदू देवी-देवताओं के नाम का इस्तेमाल कर होटल, दुकानें, ढाबे और फल के ठेले चला रहे हैं। यशवीर महाराज लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं।

स्वामी यशवीर महाराज ने वीडियो में कहा, “हमने सवाल उठाए कि मुजफ्फरनगर में काँवड़ मार्ग पर खाने-पीने की दुकानें, फलों के ठेले आदि चलाने वाले मुस्लिम दुकानदार अपनी दुकानों के नाम हिंदू देवी-देवताओं के नामों पर क्यों रखते हैं। जब हमने माँग की कि सभी दुकानों और ठेलों पर मालिकों/कर्मचारियों के नाम बोर्ड पर मोटे अक्षरों में लिखे होने चाहिए, तो पुलिस ने हमारी माँग मान ली और इसके लिए निर्देश जारी कर दिए। दुकानदार निर्देशों के अनुसार मालिकों के नाम मोटे अक्षरों में लिख रहे हैं। हालाँकि ओवैसी जैसे कट्टरपंथी पुलिस के निर्देशों पर आपत्ति जता रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “एक तथाकथित पत्रकार है, मोहम्मद जुबैर। यह वही मोहम्मद जुबैर है जिसने अपनी पोस्ट से मुसलमानों को हिंदुओं के खिलाफ भड़काया और वह कई बार जेल जा चुका है। उस पर कई मुकदमे चल रहे हैं। मुजफ्फरनगर में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज है। इसलिए मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि किसी काँवड़ यात्री के साथ कोई दुर्घटना न हो। अगर किसी काँवड़ यात्री को कुछ होता है, तो उसके लिए मोहम्मद जुबैर को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। इसलिए, उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उसके खातों की भी जाँच की जानी चाहिए, ताकि पता चल सके कि उसे विदेशी फंडिंग तो नहीं मिल रही है।”

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स्वामी ने आगे कहा, “जो कट्टरपंथी और सेकुलर लोग पुलिस के निर्देशों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि अगर हिंदू उनके होटल में खाना खाते रहेंगे, जिस पर थूका गया हो, पेशाब किया गया हो और गोमाँस मिला हो, तो यह (उनके लिए) ठीक है, लेकिन अगर वे (हिंदू) विरोध करते हैं, तो यह एक समस्या बन जाती है और वे (कट्टरपंथी और सेकुलर) इसके खिलाफ अभियान शुरू कर देते हैं। हमें मुस्लिमों के होटलों और ढाबों से कोई समस्या नहीं है। वो उन्हें चलाने के लिए आजाद हैं लेकिन उन्हें हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर और हिंदुओं के भ्रामक नामों पर चलाने की जगह अपने नाम से दुकानें चलानी चाहिए। अगर किसी को लगता है कि पहले जैसे ही सबकुछ चलता रहेगा, तो ऐसा नहीं होने वाला।हम इसे कम से कम मुजफ्फरनगर में जारी नहीं रहने देंगे। अगर कोई ऐसा करना जारी रखने की कोशिश करता है, तो हम इसके खिलाफ आवाज उठाकर इसे रोकेंगे।” इस दौरान उन्होंने काँवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश देने के लिए पुलिस अधिकारियों को धन्यवाद दिया।

दुकानों और ठेलों पर लिखे जाएँ मालिकों के नाम: पुलिस

बता दें कि इस साल काँवड़ यात्रा 22 जुलाई से शुरू होकर 2 अगस्त तक चलेगी। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्थानीय प्रशासन ने आदेश जारी कर होटल , ढाबे और खाने-पीने का सामान बेचने वाले ठेलों पर दुकान या ठेला चलाने वाले मालिक और संचालक का नाम लिखने को कहा है। हालाँकि, कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और इस्लामिस्टों ने धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरनगर के एसएसपी ने मीडिया को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने प्रशासन के फैसले के बारे में जानकारी साझा की। मीडिया चैनलों से बात करते हुए एसएसपी अभिषेक सिंह ने कहा कि काँवड़ यात्रा के निशान पर आने वाले ढाबों, होटलों, भोजनालयों और खाद्य सामग्री बेचने वाले ठेलों को मालिकों और संचालकों के नाम लिखने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इससे कांवड़ियों के लिए भ्रम की स्थिति से बचा जा सकेगा और बहस या टकराव से बचा जा सकेगा और साथ ही किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भोजनालयों ने अपनी मर्जी से आदेश का पालन करना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि काँवड़ यात्रियों को सामान खरीदने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है और वे कहीं से भी खरीदारी करने के लिए स्वतंत्र हैं।

प्रशासन के आदेश के अनुसार, क्षेत्र के कई ठेले वालों और खाने-पीने की दुकानों ने बैनर या पेपर बोर्ड पर नाम लिखना शुरू कर दिया है। नई मंडी, छपार, पुरकाजी, मंसूरपुर और खतौली जैसे थानों के पुलिसकर्मियों ने आदेश का पालन कराना शुरू कर दिया है। शहर के इलाके में मीनाक्षी चौक के पास कई खाने-पीने की दुकानों ने अपने नाम लिखे पोस्टर लगाने शुरू कर दिए हैं।

मुस्लिमों के दुकानों के भ्रामक नामों के खिलाफ यशवीर महाराज का अभियान

गौरतलब है कि पिछले साल काँवड़ यात्रा के दौरान और इस साल की यात्रा से पहले स्वामी यशवीर महाराज ने गंभीर आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में मुस्लिम ढाबे मालिकों ने अपनी पहचान छिपाकर फर्जी हिंदू नामों वाले पोस्टर लगाए हैं। उन्होंने कहा कि काँवड़ यात्रा के मार्गों पर मुस्लिम ढाबे वालों ने पोस्टर लगाए हैं। इसे देखते हुए स्वामी यशवीर महाराज ने माँग की है कि प्रशासन ढाबे मालिकों से अपने मालिकों या संचालकों के नाम बोर्ड पर लिखने के लिए कहे।

स्वामी यशवीर महाराज ने कहा , “काँवड़ यात्रा के दौरान एक समुदाय विशेष के कुछ लोग हिंदू देवी-देवताओं के नाम के बोर्ड लगाकर दुकानें चलाते हैं, जिससे शिवभक्त कांवड़ियों की भावनाओं को ठेस पहुँचने की आशंका है। हिंदू देवी-देवताओं के नाम के बोर्ड लगाकर दुकानें चलाने वाले समुदाय विशेष के लोगों की पहचान सार्वजनिक की जानी चाहिए। पुलिस को इसके लिए अभियान चलाना चाहिए।” उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि अगर एक सप्ताह के भीतर प्रशासन इस मामले में कार्रवाई नहीं करता है तो वे विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे।

इस मुद्दे पर बवाल काट रहे इस्लामिक कट्टरपंथी

प्रशासन का ये आदेश ऐसे कई मामलों के सामने आने के बाद आया है, जिसमें मुस्लिम दुकानदारों के काँवड़ियों के धोखा देने के आरोप लगे। वो सावन के पवित्र महीने में नकली नामों वाले ढाबों, फलों के ठेलों, होटलों में व्रत के नियमों के विपरीत खाना खिलाकर भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने ये आदेश जारी किया है कि दुकानों, ढाबों के मालिकों को अपना नाम बड़े अक्षरों में लिखना होगा। क्योंकि ऐसे मामलों में टकराव होने से कानून व्यवस्था की स्थिति खड़ी हो जाती है। हालाँकि, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ये आरोप लगाते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया कि दुकान के मालिक का नाम लिखना “धार्मिक भेदभाव” है।

मोहम्मद जुबैर, जो खुद को फैक्ट चेकर कहता है, लेकिन वामपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए फैक्ट चेक की ओट लेता है। उसने इस आदेश को खतरनाक बताते हुए ‘धार्मिक भेदभाव’ करार दिया था। इसके अलावा एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तो एक कदम आगे बढ़कर इसकी तुलना दक्षिण अफ्रीका के “रंगभेद” और जर्मनी के “यहूदी बहिष्कार” से कर दी।

3 आतंकियों को घर में रखा, खाना-पानी दिया, Wi-Fi से पाकिस्तान करवाई बात: शौकत अली हुआ गिरफ्तार, हमलों के बाद OGW नेटवर्क पर डोडा पुलिस की दबिश

जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में 15 जुलाई को हुए आतंकी हमले में 4 जवानों के बलिदान होने के बाद एक और आतंकी हमला हुआ है। ये हमला कास्तीगढ़ इलाके के जद्दन बाटा गाँव में हुआ। गुरुवार (18 जुलाई 2024) को हुए इस अटैक में सेना के 2 जवान घायल हो गए। इनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

माना जा रहा है कि ये वही आतंकी हैं जिन्होंने सोमवार को हमला किया था। ऐसे में सैन्यकर्मियों ने इन आतंकियों के खिलाफ एक ओर जहाँ तलाशी अभियान छेड़ा हुआ है तो वहीं डोडा पुलिस ने जिले में ओवर ग्राउंड वर्कर के नेटवर्क पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ये ओवर ग्राउंड वर्कर वो होते हैं जो आतंकियों की पनाह देते हैं, उनकी मदद करते हैं।

डोडा पुलिस ने 17 जून को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जून और जुलाई में हुए हमलों की प्रतिक्रिया में डोडा पुलिस ने ओजीडब्लू नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसी जानकारी के बीच सामने आया है कि पुलिस ने एक शौकत अली नाम के OGW को पकड़ा है।

शौकत अली का आतंकियों से कनेक्शन बताया जा रहा है और वह ओवरग्राउंड वर्कर है। शौकत अली पर आरोप है कि उसने सेना के जवानों पर हमला करने वाले तीन आतंकियों को कुछ दिन अपने घर में रखा था और न केवल इस दौरान उसने उन्हें खाने पीने की चीजें मुहैया करवाई थी बल्कि वाईफाई भी दिया था जिससे उन्होंने पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से संपर्क किया था।

अब पुलिस ने शौकत अली को दबोच लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। मालूम हो कि ये पहली बार नहीं है कि किसी ओजीडब्लू वर्कर को पकड़ा गया हो। जून महीने में भी इनके खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार एसडीपीओ गंडोह के नेतृव में जाँच के बाद, मुबशिर हुसैन, सफदर अली और सज्जाद अहमद को 18 और 20 जून को न्यायिक हिरासत में लिया गया था। इसके बाद 26 जून 2024 को गंडोह पुलिस स्टेशन में एक और एफआईआर (सं. 70/2024) दर्ज की गई और शौकत अली को 14 जुलाई 2024 को गिरफ्तार हुआ। आने वाले समय में और भी ओजीडब्लू वर्कर्स के पकड़े जाने की संभावना है। पिछली घटनाओं को देखते हुए डोडा पुलिस ओजीडब्लू के नेटवर्क को खत्म करने के प्रतिबद्ध है।

प्रयागराज, धनबाद, भीलवाड़ा, श्रीनगर… कहीं भगवा को रौंदा, कहीं चले पत्थर, कहीं लहराया फिलिस्तीन का झंडा: मुहर्रम पर ताजिए का जुलूस ही नहीं निकला, देशभर में उपद्रव-बवाल भी हुआ

मुहर्रम के मौके पर देश के अलग-अलग इलाकों से हिंसा की खबरें सामने आई हैं। कहीं ताजिया निकालने के रूट को लेकर विवाद में लाठी डंडे चले तो कहीं हिन्दुओं को घर में घुस कर पीटा गया, इसके अलावा डीजे बजाने को लेकर भी बवाल और पथराव हुआ। देश के अलग-अलग हिस्सों में फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया, इसको लेकर भी बवाल हुआ। पुलिस को मुहर्रम जुलूस के दौरान शान्ति व्यवस्था बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

प्रयागराज: ताजिया निकालने वालों ने घर में घुस हिन्दुओं को पीटा

प्रयागराज के लालापुर इलाके के अमिलिया गाँव में बुधवार (17 जुलाई, 2024) को मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था। यह लोग ताजिया लेकर जुलूस निकाल रहे थे। जब यह जुलूस गाँव में ही रहने वाले अधिवक्ता अवधेश कुमार के घर के पास पहुँचा तो जुलूस में शामिल युवकों ने हुल्लड़ मचाना चालू कर दिया। यह युवक अवधेश कुमार की दीवाल पर चढ़ गए।

जब उनको ऐसा करने से मना किया गया तो उन्होंने अवधेश कुमार के परिवार पर हमला बोला दिया। अवधेश कुमार के साथ ही उनके बेटे और बेटी पर तलवार और कट्टों से हमला किया गया। बीच बचाव करने आए आसपडोस के लोगों पर भी मुहर्रम निकाल रहे लोगों ने हमला किया। इस हमले में अवधेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए।

इलाके में तनाव कम करने के लिए भारी पुलिस और PAC बल को तैनात किया गया है। मामले में FIR भी दर्ज कर ली बजाने गई है और 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अवधेश कुमार ने घर से ₹3 लाख के गहने लूटने का आरोप भी इमरान, मिराज, सरताज समेत 10-12 लड़कों पर लगाया है।

बरेली: डीजे बजाने को लेकर विवाद, पुलिस पर भी हमला

उत्तर प्रदेश के बरेली में भी मुहर्रम पर जम कर हिंसा हुई। बरेली के अलीगंज इलाके में डीजे बजाने को लेकर काफी बवाल हुआ। जानकारी के अनुसार, बरेली के अलीगंज इलाके में मुहर्रम के मौके पर निकाले जाने वाले जुलूस को लकर पहले सहमति बनी थी मुस्लिम बड़ा डीजे नहीं लाएँगे। हालाँकि, उन्होंने यह बाद में नहीं माना और बुधवार को दो बड़े डीजे बाहर से मँगा लिए। इसको लेकर हिन्दू संगठनों ने विरोध किया। इसके बाद शाम को थाने और पुलिस की गाड़ी पर भी पथराव हो गया। बाद में पुलिस बल लगाकर मामला शांत करवाया गया।

भीलवाड़ा: भगवा झंडे को लातों तले रौंदा

भीलवाड़ा के कोटड़ी कस्बे में मुस्लिमों ने मुहर्रम जुलूस के दौरान भगवा झंडा हटाया और उसे रौंदा, यह आरोप हिन्दू संगठनों ने लगाया। हिन्दू संगठनों ने इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। हिन्दू व्यापारियों ने इसके विरोध में बाजार भी बंद कर दिया। हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया कि जुलूस में शामिल लोगों ने जानबूझकर हिन्दू पताकाओं का अपमान किया है।

जालौन: दो गुटों में पथराव, लाठी डंडे चले

उत्तर प्रदेश के जालौन में भी मुहर्रम को लेकर बवाल हुआ। यहाँ डकोर कोतवाली क्षेत्र के मुहम्मदाबाद गाँव में मुस्लिमों के दो गुट आपस में ही भिड गए। बताया गया कि गाँव में दो ताजी के जुलूस निकल रहे थे। यह दोनों ही आपस में पहले ताजिया निकालने को लेकर आपस में भिड़े। इसके बाद पथराव और लाठी डंडे चले। इसमें कई लोग घायल हो गए। इसके बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है और पुलिस बल को तैनात किया गया है।

हजारीबाग: दो पक्षों के बीच बवाल, पथराव

झारखंड के हजारीबाग के बड़कागाँव थाना क्षेत्र के नयाटांड में भी दो पक्षों के बीच हिंसा हो गई। दरअसल, इस इलाके रामनवमी और मुहर्रम के जुलूस को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद है। इसी को लेकर दो युवक धरने पर बैठे हुए थे। उनको गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद जब इसी रूट पर मुहर्रम का जुलूस निकला तो बवाल हो गया। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और पथराव होने लगा। इस पथराव में कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। अब इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया है।

धनबाद: बदल दिया मुहर्रम का रूट, पथराव

धनबाद के पांडरपाला इलाके में मुहर्रम जुलूस का रूट बदलने को लेकर हिंसा हुई। बताया गया कि पांडरपाला इलाके में मुहर्रम का जुलूस कुम्हार टोला में पहुँचा तो रास्ते को लेकर दूसरे पक्ष ने प्रश्न उठाए। इसके बाद बवाल चालू हुआ। यहाँ थोड़ी देर में ही पथराव होने लगा। बताया गया कि इसके बाद घरों पर पत्थर फेंके गए। बताया गया कि दोनों पक्षों ने एक दूसरे के घरों पर लाठी डंडों से भी हमला किया। पुलिस ने यहाँ बल प्रयोग किया। झारखंड में ही बिहार झारखंड सीमा पर भी बड़ा बवाल हुआ और पथराव किया गया।

मोतिहारी: आपस में ही भिड़े मुस्लिम, चली लाठी-गोली

बिहार के मोतिहारी में मुहर्रम के मौके पर मुस्लिमों के दो पक्ष ही पास में भिड गए। बताया गया कि यहाँ भी रूट को लेकर विवाद हुआ। यहाँ के नकरदेई गाँव में एक जुलूस निकल रहा था। इस दौरान दूसरे मुस्लिम पक्ष के लोग बवाल करने लगे। दोनों पक्ष के बीच पथराव भी होने लगा। इसके बाद जुलूस निकाल रहे लोगो ने नईम खान के घर पर फायरिंग कर दी और लाठियों से हमला कर दिया। बाद में पुलिस ने पहुँच कर मामला शांत करवाया।

संथाल परगना में दिखाया फिलिस्तीन का झंडा

झारखंड के दुमका में मुहर्रम के जुलूस के दौरान फिलिस्तीन का झंडा लहराया गया। बताया गया कि दुधानी इलाके में मुहर्रम का जुलूस निकालने के दौरान कुछ युवक फिलिस्तीन का झंडा लहराने लगे। इसके बाद एक बस पर चढ़ कर करतब दिखाया गया। यह फोटो फेसबुक पर भी वायरल की गईं।

झारखंड के गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “संथाल परगना में आदिवासी समाज को भगाकर अब घुसपैठियों का मन इतना बढ़ गया है कि झारखंड की उप राजधानी दुमका जो हेमंत सोरेन जी का कर्म क्षेत्र है वहाँ आज मुहर्रम के जुलूस में फ़िलिस्तीन का झंडा लहराया गया । गृह मंत्रालय को जाँच कर देशद्रोही तालिबानी समर्थकों को फाँसी दिलाना चाहिए।”

श्रीनगर में भी लहराया फिलिस्तीन का झंडा

श्रीनगर में मुहर्रम के जुलूस के दौरान फिलस्तीन के झंडे लहराए गए। इसकी कई फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कई युवकों को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है।