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शूटिंग क्लब का सदस्य था डोनाल्ड ट्रम्प पर गोली चलाने वाला, शिकारी वाली वेशभूषा थी पसंद: रिपब्लिकन पार्टी ने बुलाया राष्ट्रीय सम्मेलन, पूर्व राष्ट्रपति के भाषण का इंतजार

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर शनिवार (13 जुलाई, 2024) को जानलेवा हमला हुआ, जिसमें एक गोली उनके कान को छूती हुई निकली। वायरल तस्वीर में उनके चेहरे पर खून भी देखा गया। हमलावर की पहचान थॉमस मैथ्यू क्रूक्स के रूप में हुई है, जो मौके पर ही सीक्रेट सर्विस के जवानों ने मार गिराया। 20 वर्षीय थॉमस मैथ्यू क्रूक पश्चिमी पेंसिलवानिया का रहने वाला था। अब डोनाल्ड ट्रम्प रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन के लिए मिल्वॉकी पहुँच गए हैं।

बटलर में हुए इस हमले के दौरान राइफलधारी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति से मात्र 130 यार्ड्स की दूरी पर था। इस हमले में ‘बफैलो टाउनशिप’ के 50 वर्षीय पूर्व फायर चीफ कोरी कॉम्पेरटर की मौत भी हो गई। वहीं 2 लोग घायल भी हुए हैं। अमेरिका की मेनस्ट्रीम मीडिया ने ‘डोनाल्ड ट्रम्प की सभा में हंगामा’ और ‘मंच पर गिरे डोनाल्ड ट्रम्प’ जैसे शीर्षकों के साथ इस खबर को शेयर किया, उनकी हत्या के प्रयास वाली बात को छिपाया गया। थॉमस मैथ्यू क्रूक्स पिट्सबर्ग सबअर्ब के बेथल पार्क का निवासी था।

जहाँ पर हमला हुआ, वहाँ से ये जगह 1 घंटे की दूरी पर है। वो लगभग 1 साल से पास में ही स्थित ‘क्लेयरटन स्पोर्ट्समेन क्लब’ का सदस्य भी था। इसमें कई शूटिंग रेंज हैं। गन्स क्लब के अटॉर्नी रॉब बूटे ने कहा कि क्लब इस घटना की निंदा करता है, साथ ही मृतक के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करता है, पूर्व राष्ट्रपति व अन्य घायलों के लिए प्रार्थना करता है। क्रूक्स बेथल पार्क हाईस्कूल के उन 24 छात्रों में शामिल था, जिन्हें नेशनल मैथ्स एन्ड साइंस इनिशिएटिव के तहत 500 डॉलर का इनाम मिला था।

उसके खिलाफ पहले कोई भी आपराधिक या ट्रैफिक चालान का मामला दर्ज नहीं था। उसने ‘प्रोग्रेसिव टर्नआउट प्रोजेक्ट’ में 15 डॉलर का डोनेशन दिया था। ये शिकागो में स्थित एक डेमोक्रेट समर्थक एक्शन कमिटी है। FBI इस घटना की जाँच कर रही है। Discord नामक नामक कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म पर उसने अकाउंट बन रखा था। इस हैंडल को हटा दिया गया है। वो अकेले रहना पसंद करता था, दब कर रहता था और हंटिंग आउफिट व वीडियो गेम में रुचि रखता था।

अब तक हत्या के प्रयास के पीछे की मंशा सामने नहीं आई है। वो नर्सिंग एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में भी खानपान सहायक के रूप में काम कर चुका था। RNG में डोनाल्ड ट्रम्प के संबोधन का अब सबको इंतजार है। उन्होंने कहा कि उन्हें देश को एक करने का मौका मिला है। उन्होंने मुट्ठी भींच कर ललकार वाले अंदाज़ में तस्वीरों में कैद होने वाली बात पर कहा कि वो बताना चाहते थे कि वो ठीक हैं, अमेरिका आगे बढ़ता रहेगा। ट्रम्प के समर्थक अब सोशल मीडिया पर भी लामबंद हो रहे हैं।

98 दिन ASI ने किया सर्वे, 2000 पन्नों की रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश: भोजशाला में ब्रह्मा-गणेश-नरसिंह-भैरव सबकी प्रतिमाएँ मिलीं, हिन्दू पक्ष ने कहा- सार्वजनिक हो सब कुछ

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जमा कर दिया गया है। इस रिपोर्ट में सर्वे में मिली सभी संरचनाओं की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में सर्वे के दौरान मिली मूर्तियों, सिक्कों और चिन्हों के विषय में जानकारी दी गई है।

आजतक की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सर्वे के दौरान चाँदी, तांबे, एल्युमिनियम और स्टील के 31 सिक्के पाए गए हैं। यह सिक्के अलग-अलग ऐतिहासिक समय के हैं। इसमें दिल्ली के सल्तनत काल, मुग़ल काल और अलग-अलग समय के हैं। सिक्कों के अलावा 94 वास्तुशिल्प मिले हैं। इनमें मूर्तियाँ, मूर्तियों के खंडित हिस्से और पत्थरों पर उकेरी प्रतिमाएँ शामिल हैं।

इस सर्वे में यह भी पाया गया है कि यहाँ के स्तम्भों पर मूर्तियाँ उकेरी गई थी। इन पर बने हुए देवता सशस्त्र थे। बताया गया कि इन छवियों में ब्रम्हा, गणेश, नरसिंह और भैरव के साथ ही पशुओं की आकृतियाँ भी हैं। इनमें कुछ मानव आकृतियाँ भी हैं।

इसके अलावा इस परिसर के एक हिस्से में भित्तिचित्रों में मानव औए सिंह समेत कई पशुओं के मुख वाली आकृतियाँ भी हैं। एक हिस्से में यह विकृत की गई थीं जबकि कुछ जगह यह सुरक्षित थीं। यहाँ कई शिलालेख भी मिले हैं। इनमें कई रचनाएँ लिखी हुई हैं। इन रचनाओं से भोजशाला के रूप में जानकारी मिलती है।

बताया गया है कि सर्वे में मिले एक शिलालेख में यहाँ परमार वंश के राजा नरवर्मन का शासन था। इससे इंगित होता है कि यहाँ मुस्लिमों के शान करने से पहले हिन्दू शासक शासन कर रहे थे। रिपोर्ट में यहाँ से मिले अन्य कई शिलालेख और चिन्ह को रिपोर्ट में जगह दी गई है। यह रिपोर्ट 2000 पेज की है।

इस मामले में हिन्दू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने ऑपइंडिया को बताया, “हिन्दू पक्ष की याचिका पर हाई कोर्ट ने यहाँ सर्वे का आदेश ASI को दिया था। यहाँ 98 दिन तक सर्वे चला। इस सर्वे में 1700 से अधिक अवशेष मिले हैं। इनमें 39 से अधिक मूर्तियाँ और प्रतिमाएँ हैं। इनमें गदा, पद्म, कमल और स्तम्भ के टुकड़े हैं। अब इस विषय में 22 जुलाई, 2024 को कोर्ट में सुनवाई है। हम इस मामले में कोर्ट से रिपोर्ट सार्वजनिक करने की अपील करेंगे।”

मालूम हो कि इस संबंध में हिंदू पक्ष ने याचिका डाली हुई है कि भोजशाला उनकी माँ वाग्देवी का मंदिर है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे अपना मजहबी स्थल बताकर सर्वे के खिलाफ बोल रहे हैं। इस मामले में 11 मार्च को इंदौर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सर्वे की अनमुति दी थी। 22 मार्च से सर्वे शुरू हुआ, 1 अप्रैल को मुस्लिम पक्ष इसे रोकने सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, 29 अप्रैल को एएसआई के आवेदन पर सर्वे की समयसीमा और बढ़ाई गई, अब इस मामले में ASI ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है।

वाग्देवी मंदिर कैसे बना कमालुद्दीन मस्जिद

गौरतलब है कि भोजशाला विवाद बहुत पुराना विवाद है। हिंदू पक्ष का मत है कि ये माता सरस्वती का मंदिर है जिसकी स्थापना राजा भोज ने सन् 1000-1055 के मध्य कराई थी। सदियों पहले मुसलमान आक्रांताओं ने इसकी पवित्रता भंग करते हुए यहाँ मौलाना कमालुद्दीन (जिस पर तमाम हिंदुओं को छल-कपट से मुस्लिम बनाने के आरोप हैं) की मजार बना दी थी जिसके बाद यहाँ मुस्लिमों का आना जाना शुरू हो गया और अब इसे नमाज के लिए प्रयोग में लाया जाता है। हालाँकि हिंदू पक्ष का कहना है कि ये उनका मंदिर ही है क्योंकि आज भी इसके खंभों पर देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत में श्लोक लिखे साफ दिखते हैं। इसके अलावा दीवारों पर ऐसी नक्काशी है जिसमें भगवान विष्णु के कूर्मावतार के बारे में दो श्लोक हैं।

मात्र 2 किलोग्राम ही घटा अरविंद केजरीवाल का वजन, AAP कह रही – कोमा में चले जाएँगे, ब्रेन स्ट्रोक हो जाएगा: जेल प्रशासन ने जारी कर दी हर दिन के वजन की सूची

क्या तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का वजन घट रहा है? उनकी ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) का कहना है कि उसके संयोजक का जेल में साढ़े 8 किलो वजन घट गया है। हालाँकि, जेल प्रशासन ने इन आरोपों को नकारा है। बताया गया है कि कैद की अवधि में एशिया के सबसे बड़े हाई-सिक्योरिटी जेल में अरविंद केजरीवाल का वजन मात्र साढ़े 3 किलो ही घटा है। जेल के अधिकारियों ने सोमवार (15 जुलाई, 2024) को इस संबंध में बयान दिया।

जेल प्रशासन ने कहा कि 1 अप्रैल, 2024 को अरविंद केजरीवाल का वजन 65 किलोग्राम था। उसी दिन उन्हें तिहाड़ के सेन्ट्रल जेल संख्या 2 में भर्ती किया गया था। वहीं 10 मई को जब उन्हें जमानत पर रिहा किया गया, तब उनका वजन 64 किलो था। यानी, 1 महीने 10 दिन में उनका वजन मात्र 1 किलोग्राम घटा। 2 जून को चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। तब उनका वजन 63.5 किलोग्राम मापा गया था। अभी उनका वजन 61.5 किलोग्राम है।

सेन्ट्रल जेल संख्या 2 के सीनियर मेडिकल ऑफिसर ने जो रिपोर्ट बनाई है, उसके हिसाब से अरविंद केजरीवाल का वजन साढ़े 3 किलो घटने के पीछे का कारण उनके द्वारा भोजन कम करना या फिर कम कैलोरी लेना हो सकता है। वहीं AAP का कहना है कि उसके नेता के खून में शुगर लेवल में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है, जिससे वो कोमा में जा सकते हैं या उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। तिहाड़ जेल प्रशासन ने दिल्ली के डिप्टी सेक्रेटरी (होम) को इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट भेजी है।

जेल प्रशासन ने बताया कि 24 घंटे उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा गया है, प्रतिदिन उनके स्वास्थ्य संबंधित जाँच की जाती है। उनके द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर उन्हें दवा दी जाती है। मेडिकल बोर्ड ही उनका खानपान भी तय कर रहा है। जेल प्रशासन ने कहा कि लोगों में भ्रम फैलाने के लिए ऐसे बयान दिए जा रहे हैं। उन्हें दिन में 3 बार घर का बना हुआ भोजन दिया जा रहा है। 16 जून, 2024 को ऐसा दिन भी आया था जब अरविंद केजरीवाल ने अपना वजन जाँच कराने से इनकार कर दिया था।

‘हिंदुस्तान में रहना है, या हुसैन कहना है’ : अमेठी के मुसाफिरखाना में मुहर्रम पर हुई नारेबाजी का वीडियो वायरल, पुलिस ने केस दर्ज किया

उत्तर प्रदेश के अमेठी के मुसाफिरखाना थाना से हाल में एक वीडियो सामने आई है। ये वीडियो मुहर्रम के दिन की बताई जा रही है। इसमें कुछ मुस्लिम लड़के जोर-जोर से भड़काऊ नारेबाजी कर रहे हैं। वीडियो में मुस्लिम लड़कों को उछल-उछलकर कहते सुना जा सकता है- “हिंदुस्तान में रहना है या हुसैन कहना है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पता चला है कि मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र में रविवार (14 जुलाई 2024) देर शाम मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था, जिसमें युवकों के झुंड में शामिल लड़कों ने ऐसे नारे लगाने शुरू कर दिए। बाद में वीडियो वायरल हुई और लोगों ने इस मुद्दे को उठाया। इसके बाद पुलिस ने इस पर संज्ञान लिया और वीडियो में नजर आ रहे 7 लड़कों को पकड़ा जबकि अन्य लड़कों की तलाश शुरू कर दी है।

वीडियो को शेयर करते हुए स्वराज्य की वरिष्ठ पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने अपने एक्स पर कहा कि ये वीडियो उत्तर प्रदेश के अमेठी की है। इसी समुदाय के लोग और नेता बाद में कहते हैं कि इनके मजहब के लोगों को सताया जा रहा है वो डर में जी रहे है और नरसंहार का सामना कर रहे हैं।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद अमेठी पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई की। उन्होंने वीडियो में शामिल युवकों में से 7 को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही उनके ऊपर सुसंगत धाराओं में अभियोग भी पंजीकृत किया गया है। आगे की कार्रवाई जाँच के बाद होगी।

वायरल वीडियो के बाद अमेठी के संत समाज में भी नाराजगी है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक सागरा आश्रम पीठाधीश्वर मौनी महाराज ने वायरल वीडियो पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री व पुलिस अधीक्षक से मामले में कार्रवाई की गुहार लगाई है और कहाँ है कि ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो जिससे भविष्य में इस तरह का माहौल न बन पाए।

शराब घोटाले में दिल्ली CM के खिलाफ जाँच पूरी, अब ₹1100 करोड़ की प्रॉपर्टी कुर्क करने की तैयारी: रिपोर्ट में ED अधिकारी के हवाले से बताया, AAP बोली- अरविंद केजरीवाल का ब्रेन डैमेज होने का खतरा

दिल्ली शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी जहाँ लगातार इस मामले में अपनी संलिप्ता को नकार रही है तो वहीं जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि उनकी इस केस में पार्टी के साथ-साथ अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जाँच पूरी हो गई है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ये जानकारी खुद ईडी ने दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक ईडी ने बताया है कि उनका ध्यान अब इस बात पर है कि 1100 करोड़ की अपराध आय के बराबर कौन सी संपत्तियाँ कुर्क की जाए। जाँच एजेंसी ने अब तक 244 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की है। इस रिपोर्ट के अनुसार ईडी के एक अधिकारी ने पहचान न छापने की शर्त पर बताया,

“अरविंद केजरीवाल और आप, आरोपित संख्या 37 और 38 के संबंध में हमारी जाँच पूरी हो गई है। अ्दालत ने हमारी टीम द्वारा दायर सभी आठ आरोप पत्रों का संज्ञान लिया है और अधिकांश आरोपितों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। हम अब अपराध की शेष राशि का पता लगाने और उसे जब्त करने की प्रक्रिया में हैं।”

इसी रिपोर्ट के अनुसार ईडी के ही एक दूसरे अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि वह लोग अब इस मामले में तेजी से सुनवाई के लिए कोशिश करेंगे, क्योंकि इसमें 40 आरोपित, सैकड़ों गवाह और हजारों पन्नों में दस्तावेजी सबूत हैं।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट में दायर की गई अपनी चार्जशीट में शराब घोटाला मामले का सरगना सिर्फ दिल्ली सीएम को बनाया हुआ है। उन्होंने दिल्ली सीएम पर लगे आरोपों की पुष्टि के लिए ओंगोल से तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सांसद मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी, उनके बेटे राघव मगुंटा और व्यवसायी पी सरथ रेड्डी के बयानों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा उन्होंने आरोप पत्र में दावा किया है कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पार्टी के पूर्व मीडिया प्रभारी विजय नायर ने गोवा और पंजाब में चुनावी फंडिंग के लिए 100 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत की माँग की थी। इसमें से 45 करोड़ का सीधा फायदा आप को हुआ था।

जाँच पूरी होने के बीच AAP मंत्री आतिशी मार्लेना का आरोप, भाजपा अध्यक्ष ने कहा सिर्फ बेल लेने के लिए हो रहा सब

उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी के खिलाफ जाँच पूरी होने को लेकर आई रिपोर्ट के बीच पार्टी की मंत्री आतिशी मार्लेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा है कि अरविंद केजरीवाल न्यायिक हिरासत में खतरे में हैं। उनका बीपी शुगर लेवल डिप हो रहा है। वह पिछले 30 साल से डायबिटीज के मरीज हैं। ऐसे में भाजपा का मकसद सिर्फ केजरीवाल को जेल में डालना नहीं बल्कि उनकी तबीयत को नुकसान पहुँचाना है। आतिशी मार्लेना के मुताबिक केजरीवाल का वजन 8.5 किलो कम हुआ है। उन्होंने यहाँ तक अपनी कॉन्फ्रेंस में कहा है कि अगर केजरीवाल का ब्रेन डैमेज हो गया तो फिर इसका जिम्मेदार आखिर कौन होगा। वहीं इस मामले में भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की हालत को लेकर सिर्फ कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास चल रहा है ताकि स्वास्थ्य के आधार पर अरविंद केजरीवाल को बेल मिल जाए।।

जो प्रधानमंत्री है खालिस्तानी आतंकियों का ‘हमदर्द’, उसने अब दिलजीत दोसांझ को दिया ‘सरप्राइज’: PM ट्रुडो से मिलकर बोले भारतीय सिंगर- विविधता कनाडा की शक्ति

पंजाबी सिंगर व एक्टर दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपनी जट एंड जूलियट 3 के कारण खूब चर्चा में हैं। वह इसका प्रमोशन विदेशों तक में जाकर कर रहे हैं। इसी क्रम में वो पिछले दिनों कनाडा भी पहुँचे थे जहाँ उनका कार्यक्रम ओंटारियो स्थित रॉजर्स सेंटर में होना था। पहले तो इस सेंटर में पहली बार किसी पंजाबी सिंगर के शो की सारी टिकट बिकने के कारण ये शो चर्चा में आया। फिर इस मंच पर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के पहुँचने से इस कार्यक्रम को और सुर्खियाँ मिल गईं।

दरअसल, जिस समय दोसांझ मंच पर टीम के साथ थे उसी समय जस्टिन ट्रूडो ने अपनी टीम के साथ एंट्री ले ली और उनका ये सरप्राइज देखते ही दिलजीत भावुक हो गए। वह ट्रुडो से गले लगकर मिले। इसके बाद वीडियो में दोसांझ के ग्रुप ने अपने ‘ओये पंजाबी आ गए’ वाली अपनी लाइन ट्रुडो के साथ बोली।

वहीं पीएम ट्रूडो कनाडा के ओंटारियो स्थित स्टेडियम रॉजर्ससेंटर पर दोसांझ से मिलने के बाद X पर लिखा, “शो से पहले दिलजीत दोसांझ को शुभकामनाएँ देने के लिए रॉजर्स सेंटर पर रुका। कनाडा एक महान देश है। जहाँ पंजाब से आकर एक शख्स इतिहास बनाता है। विविधता हमारी सिर्फ ताकत नहीं है। यह एक सुपर पॉवर है।”

वहीं इस मुलाकात को लेकर दोसांझ ने लिखा, “विविधता कनाडा की ताकत है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो इतिहास बनते देखने के लिए आए। रॉजर्स सेंटर पर हमारे सारे टिकट बिक गए थे।”

बता दें कि कनाडा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो का झुकाव पिछले कुछ समय से सिख समुदाय को अपनी ओर करने पर ज्यादा दिखाई दिया है। लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि शायद ट्रुडो का इस तरह शो में पहुँचना भी इसलिए था क्योंकि दोसांझ के सिख फैन ज्यादा हैं और उनके शो की टिकटें भी बिक चुकी थीं। ऐसे में हो सकता है दोसांझ को बधाई देने की बजाय ये सिखों का फेवरेट बने रहने का स्टंट हो।

ये भी बता दें कि ऐसे अंदाजा सोशल मीडिया पर कनाडा सीएम के पिछले बयानों को देखते हुए लगाए जा रहे हैं। ट्रुडो ने कुछ समय पहले ही अपनी एकजुटता खालिस्तानी तत्वों के साथ दिखाई थी। उन्होंने खुलेआम खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था जबकि भारत ने उनसे कई दफा सबूत भी माँगे, मगर बिन सबूतों के वे सिर्फ भारत पर इल्जाम लगाते रहे और खालिस्तानी तत्वों के आगे हीरो बनते रहे। उन्होंने एक कार्यक्रम में ये भी कहा था कि वो खालिस्तान के साथ हैं। इसके अलावा वो कई बार भारत को नीचा दिखाने वाले बयानबाजी करते रहे हैं। उनकी इन हरकतों को देख कनाडा के मूल निवासी उनसे सवाल करते हैं कि उनका झुकाव जितना खालिस्तान और खालिस्तान समर्थकों पर हैं उतना अगर कनाडा के विकास पर होता तो आज सब उन्हें पसंद कर रहे होते।

कॉन्ग्रेस के चुनावी चोचले ने KSRTC का भट्टा बिठाया, ₹295 करोड़ का घाटा: पहले महिलाओं के लिए बस सेवा फ्री, अब 15-20% किराया बढ़ाने की तैयारी

चुनाव के वक्त फ्री सेवाओं का वादा करना आसान है लेकिन उन्हें पूरा करना बहुत मुश्किल। यही वजह है कि अब कर्नाटक सरकार की फ्री बस सेवा देने के मामले में कमर टूटने लगी है। खबर आई है कि राज्य में महिलाओं को फ्री बस सेवा मुहैया कराने की वजह से कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC) ₹295 करोड़ रुपए के घाटे में चला गया है इसीलिए KSRTC ने बस के किराए में 15-20 फीसदी का इजाफा करने की माँग की है।

जानकारी के मुताबिक, कॉर्पोरेशन ने बस के किराए में इजाफा करने की डिमांड राज्य सरकार को भेजी है। KRCTC के अध्यक्ष और कॉन्ग्रेस विधायक एस आर श्रीनिवास ने बताया, “परसों बोर्ड मीटिंग हुई थी और उसमें हमने बस किराया बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया और इसकी जानकारी सीएम को दी है…।”

उन्होंने आगे कहा कि बस एक आवश्यक सेवा है। अगर एक ड्राइवर नहीं आता है तो गाँव को उस दिन बस सेवा नहीं मिल पाएगी। ऐसा हुआ, तो लोग हमें नहीं छोड़ेंगे। अब शक्ति योजना के बावजूद हमें पिछले 3 महीनों में 295 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। यही वजह है हम किराए में 15-20 फीसद बढ़ोतरी की माँग कर रहे हैं। हमें देखना होगा कि सीएम कितना किराए बढ़ाने को मंजूरी देते हैं। अगर उन्होंने हमारी नहीं सुनी तो संगठन नहीं बच पाएगा।”

वहीं इस मामले में एनडब्लूकेआरसीटी या उत्तर पश्चिमी कर्नाटक सड़क परिवहन निगम के अध्यक्ष और कॉन्ग्रेस विधायक राजू कागे ने कहा कि राज्य में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा प्रदान करने वाली शक्ति योजना की वजह से KRCTC को घाटा हो रहा है। वह बोले, “हमें अब बस किराए में संशोधन करना होगा। पिछले 10 सालों से किराया नहीं बढ़ा है। चाहे डीजल हो, पेट्रोल हो, तेल हो या टायर… कीमतें हर चीज की बढ़ी हैं इसलिए हम संशोधन करने के बारे में सोच रहे हैं।” उन्होंने यह भी जानकारी दी उत्तर पश्चिमी कर्नाटक सड़क परिवहन निगम घाटे में है, लेकिन फिर भी वो लोग किसी तरह मैनेज कर रहे हैं। लेकिन, शक्ति योजना जो पाँच गारंटियों में से एक है उसकी वजह से KRSTC इसे मैनेज कर रही है।

बता दें कि साल 2023 में कर्नाटक में कॉन्ग्रेस ने चुनाव लड़ने से पहले पाँच वादे किए थे। इन्हीं पाँच वादों में से एक वादा ये था कि अगर कर्नाटक में कॉन्ग्रेस आई तो गैर प्रीमियम सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त में यात्रा करवाई जाएगी। शुरू में इस योजना से सब बहुत खुश हुए। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार भी आ गई, लेकिन मुफ्त वाली कोई भी सेवा जनता को देना इतना आसान नहीं होता। नतीजतन कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को नुकसान झेलना पड़ा और अब किराया चालू करने की बजाय किराए बढ़ाने पर बात हो रही है।

‘बैकफुट पर आने की जरूरत नहीं, 2027 भी जीतेंगे’: लोकसभा चुनावों के बाद हुई पार्टी की पहली बैठक में CM योगी ने भरा जोश, कहा- वोट प्रतिशत घटा नहीं है

लोकसभा चुनावों के बाद पहली बार भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की लखनऊ में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को बैकफुट पर आने की जरूरत नहीं है। सीएम योगी ने विपक्ष के जातिवाद पर नजर रखते हुए 2027 की तैयारी शुरू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का कानून-व्यवस्था अब बदल चुका है। पहले मोहर्रम में ताजिया के नाम पर घर तोड़े जाते थे। अब मनमानी नहीं चलती है।

प्रदेश नेताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “जहाँ हम अति आत्मविश्वास में रहते हैं, लगता है कि जीत ही रहे हैं, वहाँ कई बार चोट पहुँच जाती है। इसकी वजह से विपक्ष उछलकूद कर रहा है। बीजेपी के कार्यकर्ताओं को किसी भी स्थिति में बैकफुट में आने की जरूरत नहीं है। हमने 500 वर्षों का इंतजार खत्म कर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का सपना साकार किया है।”

उन्होंने कहा, “आप सबके सहयोग से हमने यूपी को माफियाओं से मुक्त किया है। यूपी में आज सुरक्षा का माहौल है। पहले मोहर्रम में ताजिया के नाम पर घर तोड़े जाते थे, तार हटाए जाते थे लेकिन अब कोई मनमानी नहीं चलती है। हमने जाति और मजहब के नाम पर कभी कोई भेदभाव नहीं किया। तकरीबन 56 लाख गरीबों को बिना किसी भेदभाव के मकान दिए हैं।”

उन्होंने कार्यकर्ताओं से साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू कर देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीत का सिलसिला 2027 में भी जारी रखना होगा। इसके लिए आज से संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि जिले में बीजेपी का महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, चेयरमैन और पार्षद भी है। अगर यहाँ कोई खरोंच आती है तो इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव में पड़ेगा।

उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को तालमेल बैठाने को लेकर कहा, “ब्लॉक प्रमुख हो या चेयरमैन, महापौर हो या जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक हो या विधान परिषद के सदस्य, लोकसभा के सांसद हों या राज्यसभा के सांसद… सभी को संगठन के साथ तालमेल बनाकर काम करना होगा। संगठन जिसे तय करे, उसके साथ खड़ा होकर कमल के फूल को विजयी बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ें।”

विपक्षी दलों के जातिवाद पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चुनाव के दौरान समाज को जाति के नाम पर बाँटा गया। इसके लिए विदेशी ताकतों के जरिए सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार किया गया। बड़े पैमाने पर षडयंत्र करके सामाजिक सौहार्द्र को चोट पहुँचाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि सपा के लोगों ने राम-कृष्ण और शिव को भी कलंकित करने की कोशिश की।

सीएम योगी ने जाति के नाम पर विद्वेष फैलाने वालों को लेकर भी कार्यकर्ताओं को सावधान किया। उन्होंने कहा, “दुनिया की ताकतें जानती हैं कि अगर समाज बिखरा होगा तो आसानी से शिकार हो जाएगा, एकजुट होगा तो बड़ी-बड़ी ताकतें इसके सामने धराशायी हो जाएँगी। आपकी इस ताकत को जाति के नाम पर विभाजित करके जो पाप चुनाव के दौरान हुआ है, हमें इसको लेकर भी सावधान रहना होगा।”

उन्होंने कहा, “आज सभी के पास स्मार्टफोन हैं, लेकिन क्या कारण था कि जिस षड्यंत्र की आशंका दिखाई दे रही थी उसे अंजाम देने में विरोधी सफल हो गए। बीजेपी कार्यकर्ताओं को देखना चाहिए कि सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है। अगर कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की योजनाएँ, महापुरुषों और चिंतकों को लेकर बीजेपी की उपलब्धियाँ सोशल मीडिया से वोटर्स तक पहुँचाई होतीं तो संभव है कि परिणाम कुछ और हो सकते थे।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “हालिया लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने पीएम मोदी के नेतृत्व में 2014, 2017, 2019 और 2022 में विपक्ष को हराया था। जितना वोट परसेंट 2014, 2017 और 2022 में बीजेपी के पक्ष में था, 2024 में भी बीजेपी उतना वोट पाने में सफल रही है।” यूपी में 10 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भी उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरा।

इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सहित प्रदेश स्तर के सारे दिग्गज नेता मौजूद थे। इस दौरान अन्य नेताओं ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

NSUI के 40 उपद्रवियों ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ परिसर में शराब पी, फिर तोड़फोड़ की: भगवान राम की मूर्ति को भी नहीं छोड़ा, किया खंडित

दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) कार्यालय में कॉन्ग्रेस की छात्र ईकाई NSUI से जुड़े छात्रों ने तोड़-फोड़ की। रविवार (14 जुलाई 2024) की सुबह लगभग 3 दर्जन उपद्रवियों द्वारा 3 बजे से 4 बजे के बीच अंजाम दिए गए इस वारदात के दौरान भागवान राम की मूर्ति को भी तोड़ दी गई।

भाजपा की छात्र की ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है डूसू कार्यालय में तोड़फोड़ में NSUI से डूसू उपाध्यक्ष अभि दहिया, यश‌ नांदल, रौनक खत्री, सिद्धार्थ शेयोरन सहित लगभग 40 उपद्रवी छात्र शामिल थे। इन सभी ने डूसू अध्यक्ष तुषार डेढ़ा, डूसू सचिव अपराजिता तथा डूसू सह-सचिव सचिन बैसला के कार्यालय में तोड़फोड़ की है।

डूसू अध्यक्ष के कार्यालय में हमले के दौरान भगवान श्रीराम की रखी प्रतिमा को भी नहीं बख्शा गया। विजिटर कक्ष में छात्रों के ठंडे पानी के लिए रखा गया वाटर डिस्पेंसर और प्रिंटर को भी तोड़ दिया गया।घटना के प्रत्यक्षदर्शी गार्ड ने बताया कि तोड़फोड़ के पहले NSUI के छात्रों ने डूसू कार्यालय परिसर में पीछे की तरफ बने डूसू उपाध्यक्ष के कमरे में बैठकर शराब पी।

ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस से इस पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगोें पर आपराधिक कार्रवाई करने की माँग की है। इस संबंध में ABVP के छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति तथा दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करेंगे। एबीवीपी ने डूसू उपाध्यक्ष अभि दहिया और अन्य उपद्रवी छात्रों को तुरंत गिरफ्तार करने की माँग की है।

इसके साथ ही ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन से यह भी माँग की है कि यूनिवर्सिटी अभि दहिया को डूसू उपाध्यक्ष पद से भी हटाए। उधर, NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने इन आरोपों को गलत बताया है। उधर, डूसू उपाध्यक्ष अभि दहिया ने ABVP सदस्यों पर ही दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उनके कार्यालय पर हमला करने का आरोप लगा दिया।

अभि दहिया ने कहा, “ABVP मुझे और हमारे संगठन NSUI को बदनाम करने की साजिश कर रही है। मैं इसके कानूनी कार्रवाई करूँगा और अदालत के माध्यम से सच्चाई सामने लाऊँगा।” वहीं, ABVP ने आरोप लगाया है कि डूसू के इतिहास में इस तरह की घिनौनी हरकतें पहले भी NSUI के गुंडों द्वारा की जाती रही हैं। 

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कहा कि NUSI के संरक्षण में दिल्ली विश्वविद्यालय में बाहरी असामाजिक तत्वों द्वारा गुंडागर्दी और नशे का खुला खेल खेला जाता है। छात्र संघ ने यह भी कहा कि अपराधियों को संरक्षण और NUSI द्वारा की जाने वाली हिंसा का एबीवीपी ने पहले भी विरोध किया था और आगे भी करेगी।

‘मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता देना शरिया कानून के खिलाफ’: AIMPLB सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और UCC को देगा चुनौती, NCW बोला- सभी महिलाओं के लिए हो एक कानून

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रविवार (14 जुलाई 2024) को कहा कि मुस्लिम महिलाओं से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को वह चुनौती देगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को इद्दत की अवधि के बाद भी गुजारा भत्ता माँगने की अनुमति दी थी। बोर्ड उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) को भी चुनौती देगा। वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कहा है कि महिलाओं से संबंधित सभी धर्मों में कानून एक समान होने चाहिए।

दरअसल, आज रविवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यसमिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में इन दोनों मुद्दों सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि बैठक में आठ प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इसमें पास पहला प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही है।

इलियास ने कहा, “पहला प्रस्ताव हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में था। यह फैसला शरिया कानून से टकराता है। इस्लाम में शादी को पवित्र बंधन माना जाता है। इस्लाम तलाक को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘महिलाओं के हित’ में बताया जा रहा है, लेकिन शादी के नजरिए से यह फैसला महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।”

सैयद कासिम रसूल इलियास ने आगे कहा, “अगर तलाक के बाद भी पुरुष को गुजारा भत्ता देना है तो वह तलाक क्यों देगा? और अगर रिश्ते में कड़वाहट आ गई है तो इसका खामियाजा किसे भुगतना पड़ेगा? हम कानूनी समिति से सलाह-मशविरा करके इस फैसले को वापस लेने के बारे में विचार-विमर्श करेंगे।”

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई को फैसला सुनाया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 मुस्लिम विवाहित महिलाओं सहित सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होती है और वे इन प्रावधानों के तहत अपने पतियों से भरण-पोषण का दावा कर सकती हैं। इसको लेकर मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 इस धर्मनिरपेक्ष कानून पर लागू नहीं होगा।

वहीं, यूसीसी को लेकर कासिम इलियास ने कहा कि उनकी कानूनी टीम इसको लेकर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “विविधता हमारे देश की पहचान है, जिसे हमारे संविधान ने सुरक्षित रखा है। यूसीसी इस विविधता को खत्म करने का प्रयास करती है। यूसीसी न केवल संविधान के खिलाफ है, बल्कि हमारी धार्मिक स्वतंत्रता के भी खिलाफ है।”

उधर, मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि महिलाओं के लिए सभी धर्मों को कानून समान होने चाहिए। शर्मा ने कहा, “महिलाओं के अधिकार सार्वभौमिक होने चाहिए, धर्म के आधार पर निर्धारित नहीं होने चाहिए। महिलाओं से संबंधित सभी धर्मों के कानून भी समान होने चाहिए।”

उन्होंने कहा, “हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के बाद आपको गुजारा भत्ता मिलता है तो मुस्लिम महिला को यह क्यों नहीं मिलना चाहिए? मैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा कही गई बात का स्वागत करती हूँ।” NCW प्रमुख ने कहा कि यह निर्णय इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि किसी भी महिला को कानून के तहत समर्थन और सुरक्षा के बिना नहीं छोड़ा जाना चाहिए।