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10 साल का इस्कॉन, 30 साल का युवक और न्यूयॉर्क में पहली रथयात्रा… जब महाप्रभु जगन्नाथ का प्रसाद ग्रहण कर डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा ‘हाँ’, हिन्दुओं का दिया साथ

पेंसिलवानिया के बटलर में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड J ट्रम्प पर एक रैली के दौरान हमला हुआ, जिसमें वो बाल-बाल बच गए। इस हमले में हमलावर समेत 2 लोगों की मौत हो गई। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति व इस साल होने वाले चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प के दाएँ कान में जख्म हो गया और खून बहने लगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। आपको ये जान कर हैरानी होगी कि डोनाल्ड ट्रम्प और जगन्नाथ यात्रा के बीच कनेक्शन है।

भारत में जगन्नाथ महाप्रभु की रथयात्रा चल रही है, जिसके तहत श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को मंदिर से जनसामान्य के बीच लाया जाता है। लाखों लोग इस रथ को खींचते हैं और 10 दिनों तक भगवान गुंडिचा मंदिर में भक्तों को दर्शन देते हैं। ओडिशा के पुरी में होने वाली इस यात्रा के सामानांतर पूरे भारत में अलग-अलग शहरों व मंदिरों में रथयात्रा निकाली जाती है। भारत ही नहीं, विदेशों में भी भक्त यात्रा निकालते हैं। ऐसी ही एक यात्रा से डोनाल्ड ट्रम्प का कनेक्शन है।

ये वाकया 1976 का है, जब इस्कॉन (अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ) संस्था ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शहर न्यूयॉर्क में 3 भव्य रथों को लेकर भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकालने का निर्णय लिया। मैनहटन में ही तब ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ हुआ करता था, सितंबर 2001 में अमेरिकी आतंकियों ने ध्वस्त कर दिया। इस्कॉन के भक्तों को मैनहटन में कोई बड़ी जगह चाहिए थी, जहाँ रथों का निर्माण हो सके और फिर से यात्रा वाले मार्ग पर ले जाया जा सके।

मैनहटन में संपत्ति होना बहुत बड़ी बात मानी जाती है, कई रईसों के लिए भी ये संभव नहीं हो पाता। और इस्कॉन को तो ऐसी संपत्ति चाहिए थी, जहाँ खुली जमीन हो। टोसन कृष्णा दास ने तब ये जिम्मेदारी सँभाली। इन्होंने पेंसिलवानिया रेलरोड यार्ड्स को इस जगह के लिए चुना। एक तरह से वहाँ ये एकमात्र जगह थी, जहाँ ये काम हो सकता था। बिना किसी रिजर्वेशन के ही इस्कॉन ने उस कॉर्पोरेट कंपनी से संपर्क किया, जिसके पास उस संपत्ति का स्वामित्व था।

कंपनी से निवेदन किया गया कि रथों के निर्माण के लिए कुछ दिन के लिए वो एरिया कृष्णभक्तों को दी जाए। हालाँकि, उस कंपनी ने तब कहा कि ये जमीन बिकने वाली है और करार के तहत अब इसके नए मालिकों के ऊपर है कि वो ये जमीन देते हैं या नहीं। इस जमीन के नए मालिक डोनाल्ड J ट्रम्प ही थे, जो इसके 41 वर्षों बाद राष्ट्रपति बनने वाले थे। टोसन ने एक प्रस्ताव लिखा और उन्हें भेजा। उन्हें तब आश्चर्य हुआ, जब कहा गया कि वो ‘फॉर सीजंस रेस्टॉरेंट’ पहुँचे।

वहीं पर इस जमीन की खरीद-बेच संबंधित प्रक्रियाओं के अलावा दस्तावेजों का आदान-प्रदान होना था। वहीं पर डोनाल्ड ट्रम्प ने लिखित में इस्कॉन को उस जमीन के इस्तेमाल की अनुमति दी। वो प्रस्ताव को रद्द कर सकते थे, लेकिन उन्होंने रथयात्रा के लिए इस जगह को देने का विकल्प चुना। उन्होंने ऐसा क्यों किया, किसी को नहीं पता। आज जब डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या का प्रयास हुआ और वो बाल-बाल बचे हैं, इस्कॉन के के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमण दास इसे दैवीय हस्तक्षेप के रूप में देखते हैं।

जब की ये घटना है तब डोनाल्ड ट्रम्प मात्र 30 वर्ष के थे और इस्कॉन अपना 10वाँ स्थापना दिवस मना रहा था। इस तरह ये न्यूयॉर्क में भी पहली रथयात्रा बन गई। इससे पहले अन्य कंपनियों ने इस्कॉन को मना कर दिया था, वो इन्सुरेंस से लेकर अन्य चीजों को लेकर आशंकित थे। जब इस्कॉन के लोग डोनाल्ड ट्रम्प के पास प्रस्ताव लेकर गए थे, तब महाप्रसाद भी साथ लेकर गए थे। उनके सेक्रेटरी ने तो इस्कॉन के प्रतिनिधियों को कह भी दिया था कि वो इस तरह के प्रस्तावों को स्वीकार नहीं करते, आप उनके सामने इसे रख सकते हैं लेकिन उनका उत्तर ‘ना’ ही होगा।

3 दिन बाद उनके सेक्रेटरी ने फोन कर के कहा कि पता नहीं क्या हुआ, उन्होंने पत्र पढ़ा, प्रसाद खाया और फिर इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद किसी तरह पुलिस से भी अनुमति ली गई। पुलिस चीफ ने भी अनुमति पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि वो ये किसलिए कर रहे हैं, लेकिन ठीक है। इस तरह डोनाल्ड ट्रम्प का नाम रथयात्राओं के इतिहास में अंकित हो गया। शायद भगवान जगन्नाथ के पुण्यकार्य में सहभागी बनने का ही प्रतिफल है कि एक खतरनाक हमले में भी डोनाल्ड ट्रम्प जीवित बच गए हैं।

रियासी आतंकी हमला: लोकल पशु व्यापारी हाकम दीन ने आतंकियों को दिया खाना और रहने की जगह, देश से गद्दारी की कीमत सिर्फ ₹5000

जम्मू-कश्मीर के रियासी में हिंदू तीर्थयात्रियों की बस पर 9 जून 2024 को आतंकवादियों ने हमला किया था, जिसमें नौ तीर्थयात्री मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। इस हमले की जाँच के दौरान खुलासा हुआ है कि स्थानीय पशु व्यापारी हाकम दीन (45) ने आतंकियों की मदद की थी। हाकम दीन ने महज 5000 रुपए में अपने जमीर को गिरवी रखते हुए देश के साथ गद्दारी की थी और आतंकवादियों को न सिर्फ रसद बल्कि सिर छिपाने की जगह भी मुहैया कराई थी।

अब जाँच एजेंसियों ने रियासी हमले में शामिल रहे 2 और आतंकवादियों के स्केच तैयार किए हैं, जो हाकम दीन से पूछताछ कर तैयार किए गए हैं। अब इस मामले की जाँच जम्मू-कश्मीर पुलिस की जगह एनआईए को सौंप दी गई है। हाकम दीन राजौरी जिले का रहने वाला है। उसे पुलिस ने 20 जून को गिरफ्तार किया था।

बताया जाता है कि वह माता वैष्णो देवी मंदिर में कुली का काम करता था, लेकिन तीन साल पहले उसने नौकरी छोड़ दी और पशु व्यापारी बन गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मोहिता शर्मा ने एनआईए को जांच सौंपे जाने से पहले हाकम को “आतंकियों का मुख्य सहयोगी” माना था। गिरफ्तारी के बाद हाकम दीन से कई एजेंसियों ने पूछताछ की।

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्र के हवाले से बताया, “पहली बार 1 जून को शाम 5.30 बजे आतंकवादी उसके घर आए थे और उन्होंने तीन लोगों के लिए खाना बनाने के लिए कहा था। इसमें से एक नाम नाम ‘मंजूर भाई’ कहा था और अपने साथियों के लिए जंगल में खाना लेकर गया था। एनआईए की पूछताछ में हाकम दीन ने खुलासा किया था कि इस हमले के पीछे लश्कर के आतंकवादी थे। सूत्र ने बताया, “7 जून को तीनों आतंकवादी उसके घर फिर से आए और पौनी नाम की जगह की रेकी के लिए कहा। यहीं पर आतंकियों ने बस पर हमला किया था। इस दौरान तीनों आतंकवादी साढ़े तीन घंटे उसके घर रहे। उन्होंने हाकम से बसों के आने जाने की जानकारी पूछी और हमले की जगह भी चिन्हित की।”

आतंकवादी तीसरी बार 8 जून को उसके घर चाय पीने आए और हमले के बारे में चर्चा दी। सूत्र ने बताया, “वे खाना लेकर चले गए। 9 जून को वे अपने चिह्नित स्थानों पर वापस आए और तीर्थयात्रियों को ले जाने वाली एक खास बस का इंतजार करने लगे। उन्होंने सबसे पहले ड्राइवर को निशाना बनाया और बस खाईं में गिर गई, इसके बाद भी आतंकवादी बस पर गोलीबारी करते रहे।”

हमले के बाद आतंकियों ने हाकम को 5,000 रुपए दिए और भागने में उसकी मदद माँगी। आतंकियों ने हाकम दीन का आधार कार्ड भी ले लिया। इस मामले में सुरक्षाकर्मियों का मानना है कि आतंकी सीमा पार करके आए थे और अभी भी जंगलों में छिपे हुए हैं। दोनों आतंकियों का स्केच तैयार कर लिया गया है और आतंकियों की तलाश जारी है।

रियासी में हिंदू तीर्थयात्रियों की बस पर आतंकवादी हमला

गौरतलब है कि 9 जून को शिव खोरी मंदिर से कटरा में माता वैष्णो देवी मंदिर जा रही 53 सीटों वाली बस पर आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में नौ लोग मारे गए और 41 घायल हो गए। इस गोलीबारी के कारण बस रियासी में सड़क से उतरकर गहरी खाई में गिर गई। रियासी हमले के बाद घाटी में दो और आतंकी हमले हुए, कठुआ आतंकी हमला और डोडा आतंकी हमला। 13 जून को जम्मू-कश्मीर के रियासी के कांडा इलाके में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए आतंकवादी हमले के सिलसिले में 50 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। एसएसपी ने यह भी बताया कि ज़्यादा सबूत जुटाने और छिपे हुए आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अरनास और माहौर तक तलाशी अभियान को बढ़ा दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर 15 जून को रियासी आतंकी हमला मामले की जाँच अपने हाथ में ले ली थी। 9 जुलाई को यह खबर आई कि एनआईए ने पाया है कि पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आका इस हमले में शामिल थे। एनआईए ने हकीम दीन से पूछताछ की, जिसने हमले में लश्कर का हाथ होने का खुलासा किया।

ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की ऑडी सीज, ऊटपटांग माँगों के बचाव में रिटायर्ड IAS बाप: रिवॉल्वर लहराने पर FIR के बाद लाइसेंस रद्द करने का नोटिस

ट्रेनिंग के दौरान ही VIP सुविधाओं के लिए नखरा करने वाली IAS पूजा खेडकर की करस्तानियों का उनके पिता दिलीप खेडकर ने बचाव किया है। दिलीप ने कहा कि उनकी बेटी को बेवजह परेशान किया जा रहा है। वहीं, जिस निजी ऑडी गाड़ी पर लालबत्ती लगाकर पूजा चला करती थीं, उसे पुणे पुलिस ने सीज कर लिया है। इसके अलावा, लाइसेंसी रिवॉल्वर का गलत इस्तेमाल करने पर पुलिस ने पूजा की माँ मनोरमा खेडकर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

इंडिया टुडे टीवी के साथ एक विशेष बातचीत में दिलीप खेडकर ने अपनी बेटी का पक्ष लिया। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी ने कुछ भी गलत नहीं किया है। क्या एक महिला के लिए बैठने के लिए जगह माँगना गलत है? मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इसकी जाँच के लिए एक समिति नियुक्त की गई है। मेरा मानना ​​है कि कोई जानबूझकर इसे मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।”

जब उनसे पूछा गया कि वह कौन है जिसके बारे में उन्हें लगता है कि यह विवाद पैदा हो रहा है तो दिलीप ने किसी का नाम बताने से इनकार कर दिया। पूजा ने अपनी विकलांगता जाँच के लिए दिल्ली के एम्स में क्यों उपस्थित नहीं हुईं, इस सवाल पर दिलीप ने कहा, “यूपीएससी के सख्त नियम हैं, जिसमें अस्पताल में 20-25 लोगों का मेडिकल बोर्ड शामिल होता है, जिससे फर्जी दस्तावेज जमा करना असंभव हो जाता है।”

पूजा खेडकर ने क्रीमी लेयर श्रेणी के तहत आवेदन किया था या नहीं, इस बारे में पूछे जाने पर दिलीप खेडकर ने कहा, “हम समिति के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत करेंगे। कानूनी कार्यवाही चल रही है। इसलिए इस पर और टिप्पणी करना अनुचित होगा। सब कुछ नियमों के अनुसार किया गया था। कोई गलत काम नहीं हुआ है।”

पूजा की लालबत्ती वाली ऑडी सीज

पूजा खेडकर जिस ऑडी गाड़ी से पुणे कलेक्ट्रेट जाती थीं, उसे पुलिस ने सीज कर दिया है। खेडकर परिवार के ड्राइवर ने ट्रैफिक पुलिस स्टेशन जाकर ऑडी की चाबी पुलिस को सौंप दी। पुलिस का कहना है कि खेडकर परिवार ने अभी तक गाड़ी के कागजात नहीं सौंपे हैं।

पूजा खेडकर इसी निजी ऑडी कार का प्रयोग करती थीं। इस पर लाल-नीली बत्ती लगी हुई थी। इसके साथ ही इस पर ‘महाराष्ट्र सरकार’ भी लिखा हुआ था। ट्रेनी IAS द्वारा गाड़ी पर लाल-नीली बत्ती लगाने और ‘महाराष्ट्र सरकार’ लिखने पर विवाद हो गया था। इसके बाद पुणे ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें नोटिस भेजा था।

किसानों पर रिवॉल्वर लहराने पर पूजा की माँ को नोटिस

पूजा खेडकर की माँ मनोरमा खेडकर को लाइसेंसी रिवॉल्वर के दुरुपयोग के लिए पुणे पुलिस ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मनोरमा खेडकर अहमदनगर के भालगाँव की सरपंच भी हैं। उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह हाथ में रिवॉल्वर लेकर किसानों को धमकाती हुई दिख रही थीं। पुलिस ने इसका संज्ञान लिया है।

इस संंबंध में पुलिस नोटिस देने के लिए उनके घर गई थी, लेकिन नोटिस लेने के लिए वहाँ कोई उपलब्ध नहीं था। इसके बाद नोटिस को उनके आवास पर चिपका दिया गया। नोटिस में कहा गया है कि मनोरमा खेडकर बताएँ कि उनकी बंदूक का लाइसेंस क्यों रद्द नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें 10 दिनों के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है।

पूजा के माता-पिता के खिलाफ मुकदमा

किसानों को पिस्टल लेकर धमकाती हुई पूजा की माँ का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ है। इसके बाद उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मनोरमा खेडकर पर मुलशी में जमीन कब्जाने का आरोप है। वीडियो में मनोरमा खेडकर को किसानों को धमकाते हुए देखा गया था। यह मामला लगभग एक वर्ष पुराना है।

किसानों का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिशें कीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें लौटा दिया था। पूजा के नाम पर 22 करोड़ रुपए की जमीन और 2 फ्लैट्स दर्ज हैं। 24 वर्षीय पूजा खेडकर का UPSC में 841 रैंक आया था। उनके पिता दिलीप IAS से रिटायर्ड हैं। कहा जा रहा है कि उनके पास लगभग 110 एकड़ जमीन है।

पुणे ग्रामीण पुलिस ने पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर और माँ मनोरमा खेडकर सहित 7 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 504 और 506 के साथ ही आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। इस तरह जाँच के दायरे में पूजा सहित उनके माता-पिता भी आ गए हैं।

पूजा खेडकर के खिलाफ जाँच

दरअसल, पूजा ने खुद को दिव्यांग और OBC बताकर UPSC परीक्षा दी थी। अब केंद्र सरकार इस मामले की जाँच करेगी। केंद्र सरकार ने एक अधिकारी को इसकी जाँच सौंप दी है। अगर गलत तथ्य पेश करने का आरोप सही पाया जाता है तो उन पर कार्रवाई होगी। ‘डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एन्ड ट्रेनिंग (DoPT)’ के एडिशन सेक्रेटरी मनोज द्विवेदी इस मामले की जाँच करेंगे।

दस्तावेजों की जाँच तक इसकी सत्यता की पुष्टि की जाएगी। जिस अथॉरिटी ने उन्हें दस्तावेज दिए हैं, पता लगाया जाएगा कि उसने बारीकी से जाँच की थी या नहीं। साथ ही पूजा खेडकर AIIMS में मेडिकल टेस्ट के लिए क्यों नहीं उपस्थित हुईं, इसे भी खँगाला जा रहा है। इससे न सिर्फ उनकी नौकरी जा सकती है, बल्कि धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज किया जा सकता है।

‘अकाल तख़्त’ को स्वर्ण मंदिर में चाहिए 3 खालिस्तानी आतंकियों की तस्वीरें, शहीद बता कर निज्जर का भी महिमामंडन

‘अकाल तख़्त’ के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कुछ ऐसी माँग कर दी है, जो अलगाववाद को बढ़ावा देने वाला है। उन्होंने ‘शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC)’ से माँग की है कि खालिस्तानी आतंकियों हरदीप सिंह निज्जर, परमजीत सिंह पंजवार और और गजिंदर सिंह की तस्वीरें स्वर्ण मंदिर परिसर स्थित सेन्ट्रल सिख म्यूजियम में लगाने के लिए कहा है। बता दें कि ये तीनों ही भारत में ‘वॉन्टेड’ रहे हैं। इन्होंने भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ा।

जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने SGPC और ‘दल खालसा’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ये बातें कहीं। ये आयोजन गुरुद्वारा शहीद गंज बाबा गुरबक्श सिंह में हुआ था। इस सभा में गजिंदर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। बता दें कि गजिंदर सिंह वही शख्स है, जिसके नेतृत्व में खालिस्तानी आतंकियों ने 1981 में इंडियन एयरलाइन्स के विमान का अपहरण किया था। हाईजैक करने के बाद प्लेन को पाकिस्तान के लाहौर ले जाया गया था।

सबसे खतरनाक खालिस्तानी आतंकी रहे जनरैल सिंह भिंडराँवाले की रिहाई के लिए इनलोगों ने ऐसा किया था। अब ‘अकाल तख़्त’ ने इन तीनों खालिस्तानी आतंकियों को बलिदानी बताया है। वहीं पंजवार ‘खालिस्तानी कमांडो फ़ोर्स (KCF)’ का मुखिया था, जिसे लाहौर में 6 मई, 2023 को मार डाला गया था। वहीं भारत सरकार द्वारा आतंकी घोषित हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा स्थित ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में हत्या कर दी गई थी। कनाडा ने इसका दोष भारत पर मढ़ा था।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस आरोप के बाद दोनों देशों में रिश्ते तल्ख़ भी हो गए थे। भारत ने इन आरोपों को नकार दिया था। गजिंदर सिंह को लेकर ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि उन्होंने सिख सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया, सरकारों के सामने झुके नहीं। उन्होंने उसे तख़्त द्वारा सम्मान में तमगा देने की भी बात कही। 1995 में पाकिस्तान की जेल से निकलने के बाद से वो भटकता रहा था। SGPC के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी भी इस समारोह में मौजूद थे।

अनंत-राधिका की शादी में घुस गया लुकमान मोहम्मद शफी शेख, जाँच में नहीं मिला इन्विटेशन कार्ड: बिन बुलाया मेहमान हो गया गिरफ्तार

मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में सुरक्षाकर्मियों ने लुकमान मोहम्मद शफी शेख नाम के एक व्यक्ति को अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी में घुसने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार कर लिया। पेशे से व्यवसायी शेख को शादी वाली जगह पर पहले फ्लोर से शनिवार (13 जुलाई) को तड़के करीब पौने तीन बजे सिक्योरिटी चेकिंग के दौरान पकड़ा गया। वो गेट नंबर 10 से अवैध रूप से घुसा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लुकमान से सुरक्षाकर्मियों ने पूछताछ की, तो वो गुमराह करने लगा। उसके पास इन्विटेशन कार्ड नहीं मिला, जिसके बाद उसे सिक्योरिटी मैनेजमेंट के हवाले कर दिया गया। इसके बाद उसे जिओ सेंटर से जाने के लिए कहा गया, तो उसने मना कर दिया, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसे बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) पुलिस के हवाले कर दिया।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा, “लुकमान शेख संदिग्ध तरीके से जिओ सेंटर में घूम रहा था। हमने जाँच में पाया कि उसके पास इन्विटेशन कार्ड नहीं था, यानी वो बिन बुलाया मेहमान था, इसकी वजह से उसे सिक्योरिटी एजेंसी को सौंप दिया गया।” लुकमान शेख पालघर का रहने वाला है और वो गेट नंबर 10 से अवैध तरीके से अंदर घुसा था। पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। शेख ने माना कि वो जिओ सेंटर में बिना इन्विटेशन के घुसा था।

आंध्र प्रदेश का यूट्यूबर भी हुआ था गिरफ्तार

इससे पहले, आंध्र प्रदेश के एक यूट्यूबर वेंकटेश नरसैया अलूरी (26) ने अवैध रूप से शादी वाली जगह पहुँचने पर पकड़ लिया गया था। वो 12 जुलाई की सुबह पवैलियन नंबर 1 के पास से पकड़ा गया था। अलूरी गेट नंबर 23 से घुसने में फेल रहा था, तो गेट नंबर 19 से घुसा। उसे बाहर जाने के लिए कहा गया था, तो उसने मना कर दिया और सुरक्षाकर्मियों से भिड़ गया था, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

माथे पर टीका, हाथ में कलावा पहन 16 साल की हिंदू लड़की को इदरीस ने फँसाया: मुसलमान बनी, निकाह के बाद रेप भी… अब हिंदू संगठनों ने बचाया

उत्तर प्रदेश के जौनपुर की 16 साल की लड़की हिमाचल प्रदेश में अपने भाई के साथ रहकर नौकरी करती थी। वहीं पर बरेली का अमन इदरीस नाम का युवक मिला, वो भी साथ काम करता था। अमन ने इदरीस नाम छिपाते हुए खुद की हिंदू पहचान बताई। हाथ में कलावा पहनता, माथे पर टीका लगाता था। अमन ने नाबालिग हिंदू लड़की को जाल में फंसा कर लव जिहाद को अंजाम दिया और उसे लेकर यूपी के बरेली भाग आया। यहाँ आकर लड़की को पता चला कि अमन हिंदू नहीं बल्कि मुस्लिम है, क्योंकि इदरीस नाम का खुलासा बरेली पहुँचने पर हुआ।

बरेली में अमन इदरीस और उसके पिता इदरीस ने हिंदू लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बनाया और नाजरीन नाम दिया। इसके बाद अमन ने हिंदू लड़की से निकाह कर लिया और फिर जबरन संबंध बनाने लगा। यही नहीं, लड़की के साथ मारपीट भी की जाती थी। इस बीच, किसी तरह से लड़की अपनी जान बचाकर भागी, जहाँ रास्ते में हिंदुत्व वादी संगठनों से जुड़े लोग मिले, और उन्होंने लड़की की जान बचाई। साथ ही पुलिस तक पहुँचने में मदद की। इसके बाद पुलिस ने आरोपित अमन को हिरासत में ले लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये पूरा मामला बरेली के बिथरी थाना इलाके में आने वाले उदयपुर जसरतपुर गाँव से जुड़ा है। जहाँ का अमन इदरीस हिमाचल के सिरमौर जिले से हिंदू लड़की को भगाकर ले आया था। हिंदू लड़की जौनपुर के सरपतहा थाना इलाके की रहने वाली है। वो हिमाचल में अपने भाई के साथ रह कर काम करती थी, जहाँ अमन ने अपनी पहचान छिपाकर उसे अपनी जाल में फंसाया और उदयपुर जसरतपुर ले आया। यहाँ उसने अपने पिता इदरीस के साथ मिलकर उसे नाजरीन बनाया और निकाह कर लिया।

नाजरीन बनाने के बाद अमन उसके साथ जबरन संबंध बनाता था और विरोध करने पर मारपीट करता था। जब शनिवार (13 जुलाई 2024) को वो किसी तरह से भागी, तो रास्ते में विहिप से जुड़े कपिल पटेल से मिलकर उन्हें अपनी आपबीती सुनाई। इसके बाद हिमाँशु पटेल के नेतृत्व में हिंदू कार्यकर्ता बिथरी थाने पहुँचे और कार्रवाई की माँग की। इस मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने अमन को हिरासत में ले लिया और पीड़ित किशोरी के परिजनों को सूचना दी।

एसपी देहात मुकेश चंद्र मिश्र ने कहा है कि उन्हें मामले की जानकारी है और पुलिस मामले की जाँच कर रही है। इस मामले में पुलिस ने अपहरण, कन्वर्जन, रेप के मामले में अमन को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि षडयंत्र में शामिल उसके अब्बू इदरीस की तलाश में दबिशें जारी हैं।

जगन्नाथ मंदिर के ‘रत्न भंडार’ और ‘भीतरा कक्ष’ में क्या-क्या: RBI-ASI के लोगों के साथ सँपेरे भी तैनात, चाबियाँ खो जाने पर PM मोदी ने उठाए थे सवाल

पहली बार ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में ‘रत्न भंडार’ को खोला जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ये कदम उठाया जा रहा है। 46 वर्षों पहले इसे खोला गया था। इसे रहस्यमयी माना जाता है और किसी को भी नहीं पता है कि इसके भीतर क्या-क्या है। इसे 1985 में खोला गया था। तब इसमें जो-जो चीजें हैं उसकी सूची बनाई गई थी। हालाँकि, ये टीम तब ‘भीतरा कक्ष’ में नहीं घुस पाई थी। तब माना गया था कि कई साँप इसकी रक्षा करते हैं।

उसके बाद से अब तक कुछ नहीं पता लगाया जा सका है कि इसमें कितना धन है, इसकी कीमत कितनी है। कहा जाता है कि इसकी चाबियाँ खो गई हैं, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सवाल उठाया था। राज्य में भाजपा की पहली बार जीत हुई है, वर्षों से यहाँ BJD की सरकार थी। ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि सारे आभूषणों का ऑडिट किया जाएगा। मौजूदा मंदिर 12वीं सदी में बनाया गया था। कई राजाओं, भक्तों और व्यापारियों द्वारा दान में दिए गए कीमती धातु यहाँ रखे गए हैं।

‘श्री जगन्नाथ टेम्पल एडमिनिस्ट्रेशन (SJTA)’ के मुखिया के नेतृत्व में टीम इस काम पर लगाई गई है। इसमें ‘भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI)’ के लोग भी होंगे। ASI इस इस मंदिर के मेंटेनेंस का काम देखती है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) के प्रतिनिधि को भी इसमें शामिल किया गया है। 1978 में 70 दिनों में ये प्रक्रिया पूरी की गई थी। अगर पुरी प्रबंधन के बाद चाबी नहीं मिलती है तो मजिस्ट्रेट की निगरानी में ताला तोड़ा जाएगा।

सँपेरों को भी तैनात किया गया था। अगर मेडिकल सप्लाई की ज़रूरत पड़ती है तो इसके लिए डॉक्टरों की एक टीम को भी तैनात किया गया है। 2018 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसकी संरचना का परीक्षण किया गया था। हालाँकि, कुछ विद्वानों का कहना है कि ‘रत्न भंडार’ के भीतर साँप होने की बातें किवदंती भी हो सकती है। लेकिन, वो इस बात से इनकार नहीं करते हैं कि कुछ छोटे-मोटे साँप यहाँ हो सकते हैं। ‘भीतरा भंडार’ 25*40 फ़ीट का है।

मांस-मछली से मुक्त हुआ गुजरात का पालिताना, इस्लाम और ईसाइयत से भी पुराना है इस शहर का इतिहास: जैन मंदिर शहर के नाम से प्रसिद्ध

गुजरात के भावनगर में स्थित पालिताना शहर में माँसहारी भोजन और माँस की बिक्री पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है। पालिताना शहर जैन धर्म के सबसे पवित्र नगरों में से एक है। इसी के साथ पालिताना दुनिया का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहाँ माँसाहारी भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया है।

भावनगर जिले में स्थित पालिताना में 250 से अधिक माँस बिक्री केंद्र चल रहे थे, जिसका विरोध जैन धर्म के साधु-संत लगातार कर रहे थे। जैन साधुओं ने कहा कि अहिंसा जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत है। ये जगह जैन धर्म के लिए पवित्र है, खासकर शत्रुंजय पहाड़ियों का क्षेत्र, इसलिए यहाँ मांसाहार, पशु वध पर पूरी तरह से बैन लगना चाहिए। प्रशासन ने उनकी माँगों को सुना और पालिताना में मांस पर संपूर्ण बैन का आदेश जारी कर दिया। पालिताना शहर में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल का भी समर्थन मिला है। 

पालिताना जैनियों के लिए सबसे पवित्र तीर्थ स्थानों में से एक है और यह स्थान, जो शत्रुंजय पहाड़ियों में स्थित है, इसको जैन मंदिर शहर के रूप में भी जाना जाता है, पालिताना शहर में 800 जैन मंदिर हैं। शहर में सबसे प्रसिद्ध जैन मंदिर आदिनाथ मंदिर है, और यह भगवान आदिनाथ को समर्पित है, जो जैन धर्म के पहले तीर्थंकर थे। पालिताना न केवल पर्यटन के लिए बल्कि अपने धार्मिक महत्व के कारण भी ऐतिहासिक शहरों में से एक है। यह मंदिर, इस क्षेत्र के अन्य मंदिरों के समूह के साथ, जैनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक रहा है, और यह 5वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व का है।

पालिताना जैन धर्म के लिए अयोध्या जैसा शहर

बता दें कि जैनियों के लिए पालिताना का वही महत्व है जो हिंदुओं के लिए राम जन्मभूमि, ईसाइयों के लिए यरुशलम और मुसलमानों के लिए मक्का का है। जैन पालिताना को पवित्र मानते हैं क्योंकि यह शत्रुंजय पहाड़ियों का उद्गम स्थल है, जिसे ‘शाश्वत भूमि’ या शाश्वत भूमि कहा जाता है जो समय के उतार-चढ़ाव से बच जाएगी और आने वाले समय में अरबों आत्माओं के लिए धार्मिकता और मोक्ष का प्रतीक बनी रहेगी।

जैन धर्म के अनुसार, अनगिनत आत्माओं ने पवित्र शत्रुंजय तीर्थ के माध्यम से मोक्ष या ‘निर्वाण’ प्राप्त किया है, जिसमें वर्तमान चक्र के पहले तीर्थंकर, भगवान आदिनाथ, इक्ष्वाकु वंश के संस्थापक शामिल हैं – यह नाम एक घटना से लिया गया है जिसमें एक जैन श्रावक ने भगवान आदिनाथ की 400 दिनों से अधिक की कठोर तपस्या को तोड़ने के लिए इक्षु रस (गन्ने का रस) चढ़ाया था, जिसे जैन भाषा में ‘वर्षिप्तप’ के रूप में जाना जाता है। जैनियों के अनुसार, यह धार्मिक तीर्थस्थल अरबों साल पुराना है और आने वाले समय तक अनंत काल तक सुरक्षित रहेगा।

जैन धर्म के मूल में अहिंसा, सिर्फ इंसान ही नहीं जानवरों के लिए भी नियम मान्य

शत्रुंजय पहाड़ियों की यह पवित्रता और शीर्ष पर स्थित धार्मिक मंदिर, साथ ही जैन धर्म का मूल सिद्धांत अहिंसा है जो पालिताना में मांस की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगाने की मांग का आधार बनता है। अहिंसा जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है जो इसके नैतिकता और सिद्धांत की आधारशिला है। इसका अर्थ है पूरी तरह से हानिरहित होना, न केवल अपने प्रति बल्कि दूसरों के प्रति भी, जिसमें जीवन के सभी रूप शामिल हैं, सबसे बड़े स्तनधारियों से लेकर पृथ्वी पर सबसे छोटे सूक्ष्मजीवों तक।

जैन धर्म सभी जीवित प्राणियों के लिए समान अधिकारों का दावा करता है, चाहे उनका आकार, रूप या आध्यात्मिक विकास कुछ भी हो। किसी भी जीवित प्राणी को किसी अन्य जीवित प्राणी को नुकसान पहुँचाने, घायल करने या मारने का अधिकार नहीं है, चाहे वह जानवर, कीड़े या पौधे हों। सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीवित प्राणी का जीवन पवित्र है।

सड़क के गड्ढे में पड़ गया ऑटो का पहिया, पानी का छींटा पड़ने से नाराज़ नन्नू खान ने ड्राइवर को चाकू घोंपा फिर बाइक से हो गया फरार: अस्पताल में चल रहा इलाज

महाराष्ट्र के ठाणे में शाहबाज़ नामक शख्स ने रात चलते एक ऑटो ड्राइवर को चाकू घोंप दिया है। ऑटो चालक को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। असल में इस पूरे विवाद का कारण मामूली है। बताया जा रहा है कि ड्राइवर जब ऑटो लेकर सड़क से गुजर रहा था, उसका पहिया बारिश के पानी से भरे गड्ढे में पड़ गया। इससे बाइक से उधर से गुजर रहे शाहबाज़ के शरीर पर पानी के छींटे पड़ गए, जिससे वो आक्रोशित हो गया।

ठाणे पुलिस ने शनिवार (13, जुलाई, 2024) को बताया कि शाहबाज़ ने इस दौरान ऑटो ड्राइवर से बदला लेने की ठानी। उसने ऑटो के वापस आने का इंतज़ार किया, जैसे ही ड्राइवर दिखा उसने ताबड़तोड़ चाकू से वार करना शुरू कर दिया। ये घटना शुक्रवार की शाम को करीब साढ़े 5 बजे घोड़बंदर रोड की है। शाहबाज़ उर्फ़ नन्नू खान की उक्त ऑटो चालक के साथ कहासुनी भी हुई थी। ऑटो का सिर्फ एक पहिया ही पानी में पड़ा था, जिसके छींटे नन्नू खान पर पड़े थे।

नन्नू खान ने न सिर्फ ऑटो ड्राइवर को चाकू घोंपा, बल्कि उसकी पिटाई भी की। ऑटो चालक ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत की है, जिसके बाद नए BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 127(1) (गलत तरीके से रोकना), 118(1) (गंभीर चोट पहुँचाना), 115(2) (चोट पहुँचाना), 352 (जानबूझकर अपमान करना) और 351(2) (आपराधिक आतंकवाद) के तहत मामला दर्ज किया गया है। बता दें कि IPC (भारतीय दंड संहिता) की जगह अब BNS ने ले ली है।

पुलिस ने बताया कि ऑटो चालक का उपचार किया जा रहा है, जल्द ही उसका बयान भी दर्ज किया जाएगा। पीड़ित ऑटो ड्राइवर की पहचान शकील रसूल शेख के रूप में हुई है। वो आनंदनगर स्थित परदेशी बाबा चॉल का रहने वाला है। इस घटना को अंजाम देने के बाद शाहबाज़ बाइक से फरार हो गया, पुलिस उसकी तलाश कर रही है।कासरवडवली पुलिस थाने में इस संबंध में FIR दर्ज की गई है। पुलिस आरोपित की तलाश में जुटी हुई है।

US में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लगी गोली, हमलावर सहित 2 की मौत: PM मोदी ने जताया दुख, कहा- ‘राजनीति में हिंसा की जगह नहीं’

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हमला हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप पेन्सिलवेनिया के बटलर में रैली कर रहे थे। उन पर दूर से हमलावर ने गोली चलाई, जो उनके कार को चीरती हुई निकल गई। इस दौरान गोलीबारी में एक समर्थक की भी मौत हो गई, तो 2 लोग घायल हो गए। इस गोलीबारी के दौरान ही सुरक्षाबलों ने हमलावर को मार गिराया। इस हमले में डोनाल्ड ट्रंप घायल हो गए और उनके कान से निकला खून उनके चेहरे पर दिखा। हालाँकि वो घबराए हुए बिल्कुल नहीं लगे और मुट्ठी तानकर लोगों से डटे रहने का इशारा किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये हमला बटलर में मतदाताओं और समर्थकों को संबोधित करते समय हुआ। हमले के दौरान का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप मंच से रैली को संबोधित कर रहे हैं, तभी गोलियाँ चलने की आवाज आती है। गोलियाँ चलने के बाद ट्रंप कान पर हाथ लगाकर पोडियम के नीचे झुक जाते हैं और इसके बाद उनके सिक्योरिटी गार्ड उन्हें घेर लेते हैं। करीब 50 सेकंड के बाद ट्रंप पोडियम से पीछे से उठते हैं, और हवा में मुट्ठी भींचकर लोगों से कुछ बोलते हैं। इस दौरान ट्रंप के चेहरे और कान के नीचे खून देखा जा सकता है।”

ट्रंप ने ट्वीट करके कहा- “भगवान बचाए अमेरिका को”

इस घटना के बाद ट्रंप की ओर से एक्स पर बयान जारी किया गया। ट्रंप ने एक्स पर लिखा, “मैं US सीक्रेट सर्विस और सभी कानूनी एजेंसियों को धन्यवाद देना चाहता हूँ जिन्होंने बटलर, पेनसिल्वेनिया में हुई गोलीबारी पर तुरंत कदम उठाए। मैं रैली में मारे गए शख्स के परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूँ, और साथ ही एक अन्य व्यक्ति जो घायल हुआ है उसके परिवार के प्रति मेरी सहानुभूति है। यह अविश्वसनीय है कि हमारे देश में ऐसा कुछ हो सकता है। इस समय मारे गए हमलावर के बारे में कुछ भी पता नहीं चला है। मेरे दाहिने कान के ऊपरी हिस्से में एक गोली लगी। मुझे तुरंत अहसास हो गया कि कुछ गड़बड़ है क्योंकि मैंने एक तेज़ गोली की आवाज सुनी और तुरंत महसूस किया कि गोली स्किन को चीरती हुई निकल गई है। मुझे अहसास हुआ कि बहुत खून बह रहा है। अमेरिका को भगवान बचाए।”

ट्रम्प के बेटे डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर ने एक्स पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “वह अमेरिका को बचाने के लिए लड़ना कभी बंद नहीं करेंगे।”

इस बीच राष्ट्रपति जो बायडेन ने भी बयान जारी किया है। बायडेन ने कहा, “मुझे पेंसिल्वेनिया में डोनाल्ड ट्रम्प की रैली में हुई गोलीबारी के बारे में जानकारी मिली है। मुझे यह सुनकर खुशी हुई कि वह सुरक्षित हैं और उनका स्वास्थ्य अच्छा है। अमेरिका में इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। हमें एक राष्ट्र के रूप में इसकी निंदा करनी चाहिए।”

पीएम मोदी बोले – ‘राजनीति में हिंसा की जगह नहीं’

पीएम मोदी ने इस हमले को लेकर दुख जताया है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “मेरे मित्र, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर हुए हमले से मैं बहुत चिंतित हूँ। इस घटना की कड़ी निंदा करता हूँ। राजनीति और लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। हमारी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएँ मृतकों के परिवार, घायलों और अमेरिकी लोगों के साथ हैं।”

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति जो बायडेन और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप आमने-सामने हैं। जो बायडेन विपक्ष समेत अपने ही दल के साथियों के निशाने पर हैं कि उनकी उम्र 81 वर्ष हो चुकी है, जिसकी वजह से वो सबकुछ भूल जाते हैं। ऐसे में उन्हें खुद को चुनाव से अलग कर लेना चाहिए, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इन्कार कर दिया है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप तमाम मुसीबतों के बावजूद मैदान में डटे हुए हैं। उनकी जीवटता की मिशाल तब देखने को मिली, जब लहू-लुहान होकर भी उन्होंने मुट्ठी भींचकर लोगों से डटे रहने का आह्वान किया।