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कॉन्ग्रेस के चुनावी चोचले ने KSRTC का भट्टा बिठाया, ₹295 करोड़ का घाटा: पहले महिलाओं के लिए बस सेवा फ्री, अब 15-20% किराया बढ़ाने की तैयारी

चुनाव के वक्त फ्री सेवाओं का वादा करना आसान है लेकिन उन्हें पूरा करना बहुत मुश्किल। यही वजह है कि अब कर्नाटक सरकार की फ्री बस सेवा देने के मामले में कमर टूटने लगी है। खबर आई है कि राज्य में महिलाओं को फ्री बस सेवा मुहैया कराने की वजह से कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC) ₹295 करोड़ रुपए के घाटे में चला गया है इसीलिए KSRTC ने बस के किराए में 15-20 फीसदी का इजाफा करने की माँग की है।

जानकारी के मुताबिक, कॉर्पोरेशन ने बस के किराए में इजाफा करने की डिमांड राज्य सरकार को भेजी है। KRCTC के अध्यक्ष और कॉन्ग्रेस विधायक एस आर श्रीनिवास ने बताया, “परसों बोर्ड मीटिंग हुई थी और उसमें हमने बस किराया बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया और इसकी जानकारी सीएम को दी है…।”

उन्होंने आगे कहा कि बस एक आवश्यक सेवा है। अगर एक ड्राइवर नहीं आता है तो गाँव को उस दिन बस सेवा नहीं मिल पाएगी। ऐसा हुआ, तो लोग हमें नहीं छोड़ेंगे। अब शक्ति योजना के बावजूद हमें पिछले 3 महीनों में 295 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। यही वजह है हम किराए में 15-20 फीसद बढ़ोतरी की माँग कर रहे हैं। हमें देखना होगा कि सीएम कितना किराए बढ़ाने को मंजूरी देते हैं। अगर उन्होंने हमारी नहीं सुनी तो संगठन नहीं बच पाएगा।”

वहीं इस मामले में एनडब्लूकेआरसीटी या उत्तर पश्चिमी कर्नाटक सड़क परिवहन निगम के अध्यक्ष और कॉन्ग्रेस विधायक राजू कागे ने कहा कि राज्य में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा प्रदान करने वाली शक्ति योजना की वजह से KRCTC को घाटा हो रहा है। वह बोले, “हमें अब बस किराए में संशोधन करना होगा। पिछले 10 सालों से किराया नहीं बढ़ा है। चाहे डीजल हो, पेट्रोल हो, तेल हो या टायर… कीमतें हर चीज की बढ़ी हैं इसलिए हम संशोधन करने के बारे में सोच रहे हैं।” उन्होंने यह भी जानकारी दी उत्तर पश्चिमी कर्नाटक सड़क परिवहन निगम घाटे में है, लेकिन फिर भी वो लोग किसी तरह मैनेज कर रहे हैं। लेकिन, शक्ति योजना जो पाँच गारंटियों में से एक है उसकी वजह से KRSTC इसे मैनेज कर रही है।

बता दें कि साल 2023 में कर्नाटक में कॉन्ग्रेस ने चुनाव लड़ने से पहले पाँच वादे किए थे। इन्हीं पाँच वादों में से एक वादा ये था कि अगर कर्नाटक में कॉन्ग्रेस आई तो गैर प्रीमियम सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त में यात्रा करवाई जाएगी। शुरू में इस योजना से सब बहुत खुश हुए। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार भी आ गई, लेकिन मुफ्त वाली कोई भी सेवा जनता को देना इतना आसान नहीं होता। नतीजतन कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को नुकसान झेलना पड़ा और अब किराया चालू करने की बजाय किराए बढ़ाने पर बात हो रही है।

‘बैकफुट पर आने की जरूरत नहीं, 2027 भी जीतेंगे’: लोकसभा चुनावों के बाद हुई पार्टी की पहली बैठक में CM योगी ने भरा जोश, कहा- वोट प्रतिशत घटा नहीं है

लोकसभा चुनावों के बाद पहली बार भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की लखनऊ में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को बैकफुट पर आने की जरूरत नहीं है। सीएम योगी ने विपक्ष के जातिवाद पर नजर रखते हुए 2027 की तैयारी शुरू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का कानून-व्यवस्था अब बदल चुका है। पहले मोहर्रम में ताजिया के नाम पर घर तोड़े जाते थे। अब मनमानी नहीं चलती है।

प्रदेश नेताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “जहाँ हम अति आत्मविश्वास में रहते हैं, लगता है कि जीत ही रहे हैं, वहाँ कई बार चोट पहुँच जाती है। इसकी वजह से विपक्ष उछलकूद कर रहा है। बीजेपी के कार्यकर्ताओं को किसी भी स्थिति में बैकफुट में आने की जरूरत नहीं है। हमने 500 वर्षों का इंतजार खत्म कर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का सपना साकार किया है।”

उन्होंने कहा, “आप सबके सहयोग से हमने यूपी को माफियाओं से मुक्त किया है। यूपी में आज सुरक्षा का माहौल है। पहले मोहर्रम में ताजिया के नाम पर घर तोड़े जाते थे, तार हटाए जाते थे लेकिन अब कोई मनमानी नहीं चलती है। हमने जाति और मजहब के नाम पर कभी कोई भेदभाव नहीं किया। तकरीबन 56 लाख गरीबों को बिना किसी भेदभाव के मकान दिए हैं।”

उन्होंने कार्यकर्ताओं से साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू कर देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीत का सिलसिला 2027 में भी जारी रखना होगा। इसके लिए आज से संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि जिले में बीजेपी का महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, चेयरमैन और पार्षद भी है। अगर यहाँ कोई खरोंच आती है तो इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव में पड़ेगा।

उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को तालमेल बैठाने को लेकर कहा, “ब्लॉक प्रमुख हो या चेयरमैन, महापौर हो या जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक हो या विधान परिषद के सदस्य, लोकसभा के सांसद हों या राज्यसभा के सांसद… सभी को संगठन के साथ तालमेल बनाकर काम करना होगा। संगठन जिसे तय करे, उसके साथ खड़ा होकर कमल के फूल को विजयी बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ें।”

विपक्षी दलों के जातिवाद पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चुनाव के दौरान समाज को जाति के नाम पर बाँटा गया। इसके लिए विदेशी ताकतों के जरिए सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार किया गया। बड़े पैमाने पर षडयंत्र करके सामाजिक सौहार्द्र को चोट पहुँचाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि सपा के लोगों ने राम-कृष्ण और शिव को भी कलंकित करने की कोशिश की।

सीएम योगी ने जाति के नाम पर विद्वेष फैलाने वालों को लेकर भी कार्यकर्ताओं को सावधान किया। उन्होंने कहा, “दुनिया की ताकतें जानती हैं कि अगर समाज बिखरा होगा तो आसानी से शिकार हो जाएगा, एकजुट होगा तो बड़ी-बड़ी ताकतें इसके सामने धराशायी हो जाएँगी। आपकी इस ताकत को जाति के नाम पर विभाजित करके जो पाप चुनाव के दौरान हुआ है, हमें इसको लेकर भी सावधान रहना होगा।”

उन्होंने कहा, “आज सभी के पास स्मार्टफोन हैं, लेकिन क्या कारण था कि जिस षड्यंत्र की आशंका दिखाई दे रही थी उसे अंजाम देने में विरोधी सफल हो गए। बीजेपी कार्यकर्ताओं को देखना चाहिए कि सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है। अगर कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की योजनाएँ, महापुरुषों और चिंतकों को लेकर बीजेपी की उपलब्धियाँ सोशल मीडिया से वोटर्स तक पहुँचाई होतीं तो संभव है कि परिणाम कुछ और हो सकते थे।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “हालिया लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने पीएम मोदी के नेतृत्व में 2014, 2017, 2019 और 2022 में विपक्ष को हराया था। जितना वोट परसेंट 2014, 2017 और 2022 में बीजेपी के पक्ष में था, 2024 में भी बीजेपी उतना वोट पाने में सफल रही है।” यूपी में 10 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भी उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरा।

इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सहित प्रदेश स्तर के सारे दिग्गज नेता मौजूद थे। इस दौरान अन्य नेताओं ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

NSUI के 40 उपद्रवियों ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ परिसर में शराब पी, फिर तोड़फोड़ की: भगवान राम की मूर्ति को भी नहीं छोड़ा, किया खंडित

दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) कार्यालय में कॉन्ग्रेस की छात्र ईकाई NSUI से जुड़े छात्रों ने तोड़-फोड़ की। रविवार (14 जुलाई 2024) की सुबह लगभग 3 दर्जन उपद्रवियों द्वारा 3 बजे से 4 बजे के बीच अंजाम दिए गए इस वारदात के दौरान भागवान राम की मूर्ति को भी तोड़ दी गई।

भाजपा की छात्र की ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है डूसू कार्यालय में तोड़फोड़ में NSUI से डूसू उपाध्यक्ष अभि दहिया, यश‌ नांदल, रौनक खत्री, सिद्धार्थ शेयोरन सहित लगभग 40 उपद्रवी छात्र शामिल थे। इन सभी ने डूसू अध्यक्ष तुषार डेढ़ा, डूसू सचिव अपराजिता तथा डूसू सह-सचिव सचिन बैसला के कार्यालय में तोड़फोड़ की है।

डूसू अध्यक्ष के कार्यालय में हमले के दौरान भगवान श्रीराम की रखी प्रतिमा को भी नहीं बख्शा गया। विजिटर कक्ष में छात्रों के ठंडे पानी के लिए रखा गया वाटर डिस्पेंसर और प्रिंटर को भी तोड़ दिया गया।घटना के प्रत्यक्षदर्शी गार्ड ने बताया कि तोड़फोड़ के पहले NSUI के छात्रों ने डूसू कार्यालय परिसर में पीछे की तरफ बने डूसू उपाध्यक्ष के कमरे में बैठकर शराब पी।

ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस से इस पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगोें पर आपराधिक कार्रवाई करने की माँग की है। इस संबंध में ABVP के छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति तथा दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करेंगे। एबीवीपी ने डूसू उपाध्यक्ष अभि दहिया और अन्य उपद्रवी छात्रों को तुरंत गिरफ्तार करने की माँग की है।

इसके साथ ही ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन से यह भी माँग की है कि यूनिवर्सिटी अभि दहिया को डूसू उपाध्यक्ष पद से भी हटाए। उधर, NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने इन आरोपों को गलत बताया है। उधर, डूसू उपाध्यक्ष अभि दहिया ने ABVP सदस्यों पर ही दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उनके कार्यालय पर हमला करने का आरोप लगा दिया।

अभि दहिया ने कहा, “ABVP मुझे और हमारे संगठन NSUI को बदनाम करने की साजिश कर रही है। मैं इसके कानूनी कार्रवाई करूँगा और अदालत के माध्यम से सच्चाई सामने लाऊँगा।” वहीं, ABVP ने आरोप लगाया है कि डूसू के इतिहास में इस तरह की घिनौनी हरकतें पहले भी NSUI के गुंडों द्वारा की जाती रही हैं। 

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कहा कि NUSI के संरक्षण में दिल्ली विश्वविद्यालय में बाहरी असामाजिक तत्वों द्वारा गुंडागर्दी और नशे का खुला खेल खेला जाता है। छात्र संघ ने यह भी कहा कि अपराधियों को संरक्षण और NUSI द्वारा की जाने वाली हिंसा का एबीवीपी ने पहले भी विरोध किया था और आगे भी करेगी।

‘मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता देना शरिया कानून के खिलाफ’: AIMPLB सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और UCC को देगा चुनौती, NCW बोला- सभी महिलाओं के लिए हो एक कानून

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रविवार (14 जुलाई 2024) को कहा कि मुस्लिम महिलाओं से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को वह चुनौती देगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को इद्दत की अवधि के बाद भी गुजारा भत्ता माँगने की अनुमति दी थी। बोर्ड उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) को भी चुनौती देगा। वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कहा है कि महिलाओं से संबंधित सभी धर्मों में कानून एक समान होने चाहिए।

दरअसल, आज रविवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यसमिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में इन दोनों मुद्दों सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने बताया कि बैठक में आठ प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इसमें पास पहला प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही है।

इलियास ने कहा, “पहला प्रस्ताव हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में था। यह फैसला शरिया कानून से टकराता है। इस्लाम में शादी को पवित्र बंधन माना जाता है। इस्लाम तलाक को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘महिलाओं के हित’ में बताया जा रहा है, लेकिन शादी के नजरिए से यह फैसला महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।”

सैयद कासिम रसूल इलियास ने आगे कहा, “अगर तलाक के बाद भी पुरुष को गुजारा भत्ता देना है तो वह तलाक क्यों देगा? और अगर रिश्ते में कड़वाहट आ गई है तो इसका खामियाजा किसे भुगतना पड़ेगा? हम कानूनी समिति से सलाह-मशविरा करके इस फैसले को वापस लेने के बारे में विचार-विमर्श करेंगे।”

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई को फैसला सुनाया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 मुस्लिम विवाहित महिलाओं सहित सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होती है और वे इन प्रावधानों के तहत अपने पतियों से भरण-पोषण का दावा कर सकती हैं। इसको लेकर मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 इस धर्मनिरपेक्ष कानून पर लागू नहीं होगा।

वहीं, यूसीसी को लेकर कासिम इलियास ने कहा कि उनकी कानूनी टीम इसको लेकर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “विविधता हमारे देश की पहचान है, जिसे हमारे संविधान ने सुरक्षित रखा है। यूसीसी इस विविधता को खत्म करने का प्रयास करती है। यूसीसी न केवल संविधान के खिलाफ है, बल्कि हमारी धार्मिक स्वतंत्रता के भी खिलाफ है।”

उधर, मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि महिलाओं के लिए सभी धर्मों को कानून समान होने चाहिए। शर्मा ने कहा, “महिलाओं के अधिकार सार्वभौमिक होने चाहिए, धर्म के आधार पर निर्धारित नहीं होने चाहिए। महिलाओं से संबंधित सभी धर्मों के कानून भी समान होने चाहिए।”

उन्होंने कहा, “हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के बाद आपको गुजारा भत्ता मिलता है तो मुस्लिम महिला को यह क्यों नहीं मिलना चाहिए? मैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा कही गई बात का स्वागत करती हूँ।” NCW प्रमुख ने कहा कि यह निर्णय इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि किसी भी महिला को कानून के तहत समर्थन और सुरक्षा के बिना नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

हिंदू महिला का दोस्तों से गैंगरेप कराने वाले मुस्लिम डॉक्टर को देवबंद पुलिस ने दबोचा: अमन दीक्षित बन की थी 5वीं शादी, फिर जबरन बनाया था मुस्लिम

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में बंगाल की युवती से लव जिहाद करने वाले शादीशुदा मुस्लिम डॉक्टर अहबर हुसैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, उसके साथियों की तलाश की जा रही है। अहबर ने खुद को अमन दीक्षित बताकर एक महिला से हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया था। बाद उसे जबरन इस्लाम कबूल करवा दिया था। महिला ने अहबर पर गैंगरेप का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी थी।

सहारनपुर जिले के देवबंद थाना क्षेत्र में पीड़िता ने 1 जुलाई को शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने बताया था कि वह मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली है। वह पहले से शादीशुदा है और 7 साल की एक बच्ची की माँ भी है। उसने आगे बताया था कि देवबंद का रहने वाला अहबर हुसैन उसे अमन दीक्षित नाम से मिला था और उसे प्यार के जाल में फँसा लिया था।

दरअसल, अहबर कोलकाता में रहता था और वहीं पर उसने पीड़िता से हिन्दू विधि-विधान से शादी भी कर ली थी। पीड़िता ने इसकी फोटो और वीडियो सबूत के रूप में उपलब्ध कराए थे, जो ऑपइंडिया के पास मौजूद है। शादी के बाद आरोपित डॉक्टर पीड़िता को देवबंद ले आया। यहाँ उसने पीड़िता को एक कमरे में बंद कर दिया। यहाँ अहबर महिला के साथ अक्सर रेप करता था।

महिला का आरोप है कि अहबर हुसैन के अपने कुछ दोस्तों से भी उसका रेप करवाया था। जब वह मना करती थी तो उसकी पिटाई की जाती थी। खाना भी ठीक से नहीं दिया जाता था। आरोपित डॉक्टर ने महिला पर नजर रखने के लिए कमरे में CCTV भी लगवा दिया था। इस गैंगरेप में डॉक्टर आरिफ और शहज़ाद के नाम के बताए गए हैं।

देवबंद में ही अहबर हुसैन ने पीड़िता और उसकी 7 वर्षीया नाबालिग बेटी को को जबरन इस्लाम भी कबूल करवा दिया। पीड़िता का दावा है कि वो पश्चिम बंगाल की महिला है, जिसे हिंदी भाषा का ठीक से ज्ञान नहीं है। इसी का फायदा उठाकर अहबर हुसैन से उससे कुछ कागजातों पर दस्तखत करवा लिए थे। इन कागजातों के आधार पर पीड़िता और उसकी बेटी का आधार कार्ड भी बनवा दिए।

पीड़िता ने बताया कि जब तक उसे अहबर हुसैन के मुस्लिम होने का पता चला तब तक वो आरोपित के जाल में फँस चुकी थी। उसके पास इस चंगुल से निकलने का कोई उपाय नहीं था। इस बीच देवबंद के बेबी केयर हॉस्पिटल में बच्चों के डॉक्टर अबहर की पूर्व पत्नी फौजिया भी मीडिया के सामने गई। सहारनपुर की रहने वाली फौजिया ने बताया कि 13 साल पहले उसका निकाह अहबर से हुआ था।

फौजिया ने बताया कि 4 साल पहले अहबर ने उसे बेसहारा छोड़ दिया। अब फौजिया अपनी 2 बेटियों का अकेले पालन-पोषण कर रही हैं। फौजिया का आरोप है कि उसकी जानकारी में उसका शौहर 5 निकाह कर चुका है। उसने आशंका जताई कि अहबर ने चोरी-छिपे कई और निकाह भी किए होंगे।

तहरीर मिलने के बाद पुलिस लगातार इस मामले की जाँच कर रही थी। महिला के बयानों के आधार पर अहबर हुसैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, अब उसके दो दोस्तों डॉक्टर आरिफ और शहजाद की तलाश की जा रही है।

कैंसर से जूझ रहे पूर्व दिग्गज क्रिकेटर और टीम इंडिया के 2 बार कोच रहे खिलाड़ी के लिए BCCI ने बढ़ाया मदद का हाथ, ₹1 करोड़ इलाज के लिए दिए

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच और क्रिकेटर अंशुमान गायकवाड़ कैंसर से जूझ रहे हैं। उनका लंदन में इलाज चल रहा है। उनके इलाज के लिए विश्व विजेता कप्तान कपिल देव ने बीसीसीआई से मदद की अपील की थी, जिसके बाद बीसीसीआई ने उनकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। बीसीसीआई ने अंशुमान गायकवाड़ के इलाज के लिए 1 लाख रुपए जारी किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लड कैंसर से जूझ रहे अंशुमान गायकवाड़ का इलाज इंग्लैंड के किंग्स मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। इसकी जानकारी मिलने के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की तरफ से मदद का हाथ बढ़ाया गया। अंशुमान गायकवाड़ के इलाज के लिए बोर्ड की तरफ से 1 करोड़ रुपये की राशि तुरंत दिए जाने का फैसला लिया गया है।

बीसीसीआई सचिव जय शाह की तरफ से तुरंत एक्शन लिया गया। उन्होंने परिवारजनों से बात करते दिग्गज के तबीयत का हाल पता किया और मदद की घोषणा की। बता दें कि पूर्व कप्तान कपिल देव ने कहा था कि उनके साथी अंशुमान गायकवाड़ कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं। कपिल ने बीसीसीआई से मदद की गुहार लगाई थी। इस खबर के सामने आने के साथ ही बीसीसीआई सचिव ने अंशुमान गायकवाड़ को 1 करोड़ की मदद की घोषणा की।

शानदार रहा है क्रिकेट करियर

अंशुमान गायकवाड़ ने 27 दिसंबर 1974 को कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था। उन्होंने साल 1984 में आखिरी टेस्ट मैच खेला था। गायकवाड़ ने 40 टेस्ट मैचों के अपने करियर में 30.07 की औसत से 1985 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 10 अर्धशतक शामिल रहे। पाकिस्तान के खिलाफ 201 रनों का उनका बेस्ट स्कोर रहा। उन्होंने 14 वनडे मैचों में 20.69 की औसत से 269 रन बनाए।

टीम इंडिया के कोच भी रहे थे गायकवाड़

अंशुमान गायकवाड़ ने क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कोचिंग को अपना करियर बनाया। वह 1997-99 के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच रहे। गायकवाड़ ने गुजरात राज्य उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के लिए भी काम किया और 2000 में इस कंपनी से सेवानिवृत्ति ले ली। जून 2018 में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने गायकवाड़ को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। अंशुमान गायकवाड़ के पिता दत्ता गायकवाड़ ने भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला था।

जिसने चलाई डोनाल्ड ट्रंप पर गोली, उसने दिया था बाइडेन की पार्टी को चंदा: FBI लगा रही उसके मकसद का पता

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गोली मारने वाले 20 साल के थॉमस मैथ्यू क्रुक्स को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पेंसिल्वेनिया के मतदाता डेटाबेस के मुताबिक, क्रूक्स रिपब्लिकन के मतदाता के रूप में पंजीकृत था। क्रूक्स राष्ट्रपति चुनाव में पहली बार मतदान करता, लेकिन उससे पहले ही हमला करने के कारण उसे ढेर कर दिया गया।

क्रूक्स पेंसिल्वेनिया के बेथेल पार्क में रहता था, जो बटलर से लगभग 35 मील (56 किलोमीटर) दक्षिण में है। बटलर वही जगह है, जहाँ ट्रम्प अपनी चुनावी रैली कर रहे थे। यहीं पर क्रुक्स ने उनकी हत्या करने की कोशिश की। हालाँकि, डोनाल्ड ट्रंप बेहद भाग्यशाली रहे और बंदूक की गोली उनके कान को छूती हुई निकल गई और वे बाल-बाल बच गए।

हालाँकि, रिपब्लिकन मतदाता के रूप में पंजीकरण के बावजूद अमेरिका के संघीय चुनाव आयोग ने अपने रिकॉर्ड में पाया है कि क्रुक्स ने जनवरी 2021 में जो बाइडेन वाली पार्टी डेमोक्रेट को 15 अमेरिकी डॉलर का चंदा दिया था। वहीं, हमलावर के पिता मैथ्यू क्रुक्स का कहना है कि जब तक वह अधिकारियों से बात नहीं करेंगे, तब तक वह अपने बेटे के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

एफबीआई का कहना है कि वह हमले के पीछे के मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रही है। क्रुक्स के हमले में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप बच गए, लेकिन रैली में आए एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई है। वहीं, दो अन्य दर्शक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस मामले की जाँच में कई एजेंसियाँ लगी हुई हैं।

थॉमस क्रुक्स ने साल 2022 में बेथेल पार्क हाई स्कूल से स्नातक किया। उसे नेशनल मैथ एंड साइंस इनिशिएटिव से 500 अमेरिकी डॉलर का ‘स्टार अवॉर्ड’ मिला था। न्यूयॉर्क टाइम्स ने 2022 के स्नातक समारोह के वीडियो में क्रुक्स को अपना हाई स्कूल डिप्लोमा सर्टिफिकेट लेते हुए दिखाया गया है। इसमें वह काले रंग के ग्रेजुएशन गाउन में स्कूल के अधिकारी के साथ पोज दे रहा है।

कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने शनिवार (13 जुलाई 2024) को बताया कि क्रुक्स शूटिंग स्थल पर अपना कोई पहचान पत्र लेकर नहीं गया था। एफबीआई के विशेष एजेंट केविन रोजेक ने कहा, “हम अभी तस्वीरों को देख रहे हैं और हम उसके डीएनए की जाँच कर बायोमेट्रिक पुष्टि प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।”

‘आंगनवाड़ी को मदरसा न बनाया जाए’: कहीं बच्चों से पढ़वाया नमाज़ तो कहीं लगवाए ‘या हुसैन’ के नारे, गुजरात के 2 सेंटरों का वीडियो वायरल, कार्रवाई की माँग

जामनगर के बाद अब वडोदरा के करनाली आंगनवाड़ी में बच्चों को नमाज पढ़ाने पर विवाद खड़ा हो गया है। खबर सामने आई है कि हिंदू बच्चे सिर पर रुमाल बाँधकर ईद मना रहे हैं। पूरी घटना पर स्थानीय हिंदू संगठनों ने विरोध जताया है। इतना ही नहीं, बल्कि वडोदरा के विधायक शैलेश मेहता ने भी इस घटना पर विरोध जताया है। विधायक ने घटना की जानकारी राज्य के शिक्षा मंत्री को दी है। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि आंगनवाड़ी केंद्रों को मदरसा न बनने दिया जाए। उन्होंने पूरे मामले में कार्रवाई की माँग की है।

जानकारी के मुताबिक, वडोदरा के दाभोई स्थित करनाली आंगनवाड़ी में बच्चों को नमाज अदा की गई है। पाठ्यक्रम में ईद पर कोई पाठ न होने के बावजूद हिंदू बच्चों को जश्न मनाने का यह तरीका सिखाया जाने पर हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया है। आरोप है कि आंगनबाडी संचालिका ने बच्चों के सिर पर रूमाल बाँधकर ईद मनाई और इस दौरान उन्हें नमाज अदा करना सिखाया। स्थानीय हिंदू संगठनों ने घटना की सूचना शिक्षा प्राधिकरण को दी है और तत्काल कार्रवाई की माँग की है।

पूरे मामले में विधायक शैलेश मेहता का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि करनाली करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। शुक्रवार (12 जुलाई, 2024) को यहाँ एक आंगनवाड़ी में छोटे बच्चों को ईद और नमाज पढ़ाई गई। छोटे-छोटे बच्चों के सिर पर रूमाल बाँधकर प्रार्थना कराने का प्रयास किया गया। विधायक ने कहा कि ये घटना बेहद दुखद है, जैसे ही घटना उनके संज्ञान में आई, उन्होंने कलेक्टर, डीडीओ, दाभोई प्रांतीय अधिकारी आदि से संपर्क किया और उन्हें जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने व्हाट्सएप्प के जरिए राज्य के शिक्षा मंत्री को भी इसकी सूचना दी गई।

उन्होंने आगे कहा, “घटना के बाद हमने मुख्यमंत्री के निजी सचिव को भी सूचित किया। ये मामला बेहद गंभीर है। छोटे बच्चों को दूसरे मजहब की शिक्षा देना बहुत गंभीर मामला है। बच्चे शिक्षा के लिए आंगनबाड़ियों में जाते हैं, वहाँ मजहबी ज्ञान की जरूरत नहीं है। यदि वह धार्मिक शिक्षा प्राप्त करना चाहता है, यदि वह मुस्लिम है, तो वह मदरसे में जाएगा। लेकिन आंगनबाड़ियों को मदरसे में बदलने का चल रहा कार्यक्रम बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि जामनगर की आंगनवाड़ी में भी इस तरह की घटना हुई, यह गंभीर मामला है, सरकार को भी इसे गंभीरता से लेना होगा। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, गुजरात में किसी भी आंगनवाड़ी को मदरसा नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सोमवार को आंगनवाड़ियाँ खुलते ही इस पर कार्रवाई की जाएगी और अगर नहीं हुई तो हम इस मामले को गंभीरता से लेकर गाँधीनगर तक जाएँगे।

गौरतलब है कि इससे पहले जामनगर के सोनलनगर स्थित आंगनवाड़ी में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी। सोशल मीडिया पर आंगनवाड़ी का एक वीडियो वायरल हो गया। इसमें व्यवस्थापक बच्चों को ईद के बारे में पढ़ा रहा था और बच्चों से दुआ पढ़वा रहा था। इतना ही नहीं बच्चों से ‘या हुसैन’ के नारे भी लगवाए गए। व्यवस्थापक बच्चों को बिरयानी बनाकर ईद के दिन सुबह जल्दी उठकर मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए प्रेरित भी कर रहा था। इस घटना के बाद भी हिंदू संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया और कार्रवाई की माँग की।

डोनाल्ड ट्रंप को मारी गई गोली, अमेरिकी मीडिया बता रहा ‘भीड़ की आवाज’ और ‘पॉपिंग साउंड’: फेसबुक पर भी वामपंथी षड्यंत्र हावी

अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में 13 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की कोशिश ने दुनिया को हिलाकर रख दिया। हालाँकि ट्रंप सुरक्षित हैं, लेकिन एक गोली उनके कान में लगी जिससे उनके चेहरे पर खून बहने लगा। घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। यह घटना पेंसिलवेनिया के बटलर में ट्रंप की रैली में हुई। उन्हें तुरंत अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के एजेंटों द्वारा मंच से उतार दिया गया और एक काफिले में ले जाया गया। एक तरफ दुनिया भर के नेताओं के ट्रंप की हत्या के प्रयास की निंदा की, तो अमेरिकी मीडिया ने इस घटना को ‘डाउन प्ले’ किया और इस तरह से रिपोर्ट किया कि कोई ‘घटना’ ही नहीं हुई, बल्कि भीड़ के शोर सरीखी रिपोर्टिंग की। यही नहीं, मेटा एआई जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी ऐसी ही कोशिश की गई।

एसोसिएटेड प्रेस की पहली वायर रिलीज़ में रिपोर्ट लिखी गई, “पेंसिल्वेनिया में भीड़ में तेज़ आवाज़ें गूंजने के बाद डोनाल्ड ट्रंप को मंच से उतार दिया गया”। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट को कई मीडिया हाउस ने इसी तरह की हेडलाइन के साथ छापा।

एबीसी न्यूज की रिपोर्ट , जो एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट पर आधारित थी, में लिखा था, “भीड़ में तेज शोर होने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प को रैली के दौरान सीक्रेट सर्विस द्वारा मंच से उतार दिया गया”।

यूएसए टुडे की हेडलाइन थी , “तेज आवाजों से पूर्व राष्ट्रपति और भीड़ के घबरा जाने के बाद सीक्रेट सर्विस ने ट्रम्प को मंच से हटा दिया”।

एमएसएनबीसी की रिपोर्ट का शीर्षक था , “पेंसिल्वेनिया रैली में जोरदार आवाजें आने के बाद सीक्रेट सर्विस ने ट्रम्प को मंच से उतार दिया।”

अब इसमें बदलाव करते हुए, वाशिंगटन पोस्ट की हेडलाइन दिया गया, “पेंसिल्वेनिया रैली में जोरदार शोर के बाद ट्रम्प को बाहर निकाला गया”।

वाशिंगटन पोस्ट की एक्स पर पोस्ट में लिखा था, “ब्रेकिंग न्यूज़: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पेंसिल्वेनिया में रैली में तेज आवाज के बाद मंच से उतार दिया गया।”

मीडिया हाउस ने हत्या की कोशिश को कमतर आँका, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई पत्रकारों और एक्स यूजर्स ने इस बात पर निराशा जताई कि ट्रंप जिंदा हैं। टिकटॉक के लिब्स ने एक्स पर एक स्क्रीनशॉट शेयर किया जिसमें द स्ट्रेंजर की पत्रकार एशले नेरबोविग ने लिखा, “अमेरिका को फिर से निशाना बनाओ”। बाद में एशले ने अपना अकाउंट लॉक कर दिया और फिर डीएक्टिवेट कर दिया।

टिकटॉक के लिब्स ने हत्यारे के “लक्ष्य” चूक जाने पर वामपंथथियों की रुदाली के दो वीडियो भी साझा किए। टिकटॉक यूजर सेले2टी3 ने हत्या की चूक पर रोना रोया, जिसके बाद उसका टिकटॉक अकाउंट या तो डिलीट कर दिया गया, या फिर बंद कर दिया गया।

एक अन्य TikTok उपयोगकर्ता Super99x ने भी इसी तरह का व्यवहार व्यक्त किया। TikTok पर उसका अकाउंट “निजी” कर दिया गया है।

वैसे, बात सिर्फ मेनस्ट्रीम मीडिया की ही नहीं है, बल्कि मेटा एआई सरीखे प्लेटफॉर्म्स भी डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के प्रयास को डाउनप्ले करते दिखे। मेटा एआई ने डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के प्रयास पूछे गए सवाल पर कहा कि उसके पास इस बारे में कोई सूचना ही नहीं है।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप पर चलाई गई गोली उनके दाहिने कान के ऊपरी हिस्से में लगी। ट्रंप को तुरंत यूएस सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स ने स्टेज से उतारकर अस्पताल पहुँचाया। यूएस सीक्रेट सर्विस ने एक बयान में कहा कि 13 जुलाई को शाम 6:15 बजे बटलर में ट्रंप की कैंपेन रैली के दौरान रैली स्थल के बाहर एक ऊँची जगह से संदिग्ध शूटर ने स्टेज की ओर कई गोलियाँ चलाईं। हमलावर की पहचान पेंसिल्वेनिया के बेथेल पार्क निवासी 20 वर्षीय थॉमस मैथ्यू क्रुक्स के रूप में हुई है। उसने AR-15 प्रकार की अर्धस्वचालित राइफल से कई गोलियाँ चलाईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने उसे मार गिराया।

इस घटना में रैली में शामिल एक व्यक्ति की मौत हो गई तथा दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

गौरलत है कि पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप निश्चित रूप से अमेरिका के वामपंथी उदारवादियों के लिए ‘काँटे’ की तरह हैं। उनकी आवाज़ दबाने के लिए उनके सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने सहित अनगिनत प्रयास किए गए हैं। आने वाले महीनों में अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं और इस तरह के प्रयास केवल उनके समर्थन आधार को मजबूत करने वाले हैं, कुछ ऐसा जो ट्रम्प के विरोधियों को अभी तक समझ में नहीं आया है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व जज रोहित आर्य BJP में हुए शामिल, ओडिशा हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश चितरंजन दास बोले- मैं भी RSS का सदस्य

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश रोहित आर्य रिटायरमेंट के लगभग तीन महीने बाद शनिवार (13 जुलाई 2024) को भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने प्रदेश भाजपा कार्यालय जाकर सदस्यता ली। वहीं, कलकत्ता और ओडिशा हाई कोर्ट में जज रह चुके चितरंजन दास ने कहा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें काम करने में कोई कठिनाई नहीं आई।

रोहित आर्य साल 1984 में एडवोकेट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। साल 2003 में इन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सीनियर एडवोकेट नियुक्त किया गया। उन्हें 2013 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और 2015 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई। वह 27 अप्रैल, 2024 को सेवानिवृत्त होंगे।

गौरतलब है कि साल 2020 में जस्टिस आर्य ने एक महिला की शील भंग करने के आरोपित एक व्यक्ति को इस शर्त पर जमानत दी थी कि वह पीड़िता को राखी बाँधेगा। साल 2021 में जस्टिस आर्य ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोपित कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी और नलिन यादव को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

वहीं, कलकत्ता और ओडिशा हाई कोर्ट में जज रह चुके चितरंजन दास ने एक इंटरव्यू में कहा कि वे आरएसएस के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि किसी को अपनी राजनीतिक पहचान छुपाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश के रूप में रहते हुए उन्होंने संविधान के तहत काम किया और उनकी व्यक्तिगत विचारधारा आड़े नहीं आई।

इतना ही नहीं, चितरंजन दास ने यह भी कहा कि RSS में हर विचारधारा के लोग जुड़े हैं। यह संगठन को किसी विचारधारा के लिए बाध्य नहीं करता। उन्होंने कहा, “कई लोग इसे अछूत संगठन मानते हैं, लेकिन इसने किसी की माइंड वॉशिंग की कोशिश नहीं की। यह लोगों का व्यक्तित्व निखारता है और उन्हें अच्छा नागरिक बनाता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस कोई क्रांतिकारी संगठन नहीं है। इंदिरा गाँधी को भी आरएसएस की मदद की जरूरत पड़ी थी। चीन के साथ युद्ध के समय भी आरएसएस ने काफी काम किया था। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने गलत जानकारी देकर इस संगठन की छवि धूमिल करने की कोशिश की।

बताते चलें कि जस्टिस चितरंजन दास ने अपने एक फैसले में कहा था कि महिलाओं को भी अपनी कामेच्छा पर भी काबू रखना चाहिए। उन्होंने कहा था कि कामेच्छा पर काबू नहीं रखने से कई बार महिलाओं को समाज की नजर में गिरना पड़ता है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी कि इस तरह की टिप्पणी से बचना चाहिए।