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मदरसा जा रही 12 साल की लड़की का अपहरण, चाकू के बल पर बलात्कार: केरल पुलिस अब तक खाली हाथ

केरल के कासरगोड में एक 12 वर्ष की बच्ची का अपहरण कर रेप किया गया। उसके साथ यह घटना मदरसा में पढ़ने जाते समय हुई। बच्ची के साथ हुई घटना का खुलासा एक महीने बाद हुआ है। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर जाँच चालू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कासरगोड की बेकल की रहने वाली एक 12 वर्षीय बालिका एक माह पहले सुबह 7 बजे अपने घर से पास के मदरसे में पढ़ने जा रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति ने आकर उसे दबोच लिया। आरोपित ने उसे शॉल में पकड़ लिया और अपने साथ उठा कर ले गया।

इसके बाद बालिका से चाकू के बल पर रेप किया गया। बालिका ने इस बात का अंदेशा जताया कि उससे रेप करने वाला कोई प्रवासी मजदूर था। मेडिकल टेस्ट में बालिका से रेप की बात सामने आई है। हालाँकि, डॉक्टरों का कहना है कि उसके शरीर पर मिले घाव एक महीने पुराने ना होकर 1-2 सप्ताह ही पुराने लगते हैं।

वहीं पुलिस इस मामले में बालिका के दावों पर संदेह जता रही है। पुलिस को आशंका है कि रेप की इस घटना को बच्ची के जानने वाले किसी व्यक्ति ने अंजाम दिया है। बालिका ने अपने साथ जिस इमारत में बलात्कार की बात कही है, उसकी जाँच भी पुलिस ने की है और उसका शक और गहरा हो गया है।

बताया गया कि बच्ची अपनी माँ के पैतृक आवास पर रहती है और आठ भाई बहनों में सबसे छोटी है। उसकी सबसे बड़ी बहन का निकाह हो चुका है। उसने अपने साथ हुई इस वारदात की जानकारी सबसे पहली अपनी सबसे बड़ी बहन को ही दी थी, इसके बाद इस मामले में शिकायत दर्ज की गई।

पुलिस ने अब बालिका के बयान के आधार पर FIR दर्ज कर ली है और मामले की आगे जाँच कर रही है। अभी इस मामले में आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री DK शिवकुमार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चलती रहेगी आय से अधिक संपत्ति मामले CBI की जाँच: दौलत के 5 साल में ही ₹33 करोड़ से ₹162 करोड़ होने का आरोप

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति माले में CBI जाँच को रद्द करने की माँग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। उनके खिलाफ CBI का मामला अब बंद नहीं होगा।

जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और सतीश चन्द्र शर्मा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कोई राहत नहीं दी। डीके शिवकुमार इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट का निर्णय रद्द करने की माँग कर रहे थे। उसने भी उनके खिलाफ केस जारी रखने की अनुमति दी थी।

हाई कोर्ट ने अपने इस निर्णय में CBI को आदेश दिया था कि वह अपनी जाँच तीन महीने में पूरी कर ले और इसकी रिपोर्ट जमा करे। यह निर्णय नवम्बर, 2023 में हाई कोर्ट ने दिया था। डीके शिवकुमार के खिलाफ CBI यह जाँच 2013 से 2018 के बीच आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में कर रही है।

वह इस दौरान कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री थे। यह मामला CBI ने 2020 में दर्ज किया था। इसके बाद डीके शिवकुमार ने इसको चुनौती दी थी। यह पूरा मामला 2017 में चालू हुआ था जब आयकर विभाग ने डीके शिवकुमार के ठिकानों पर छापेमारी की थी।

इस छापेमारी में उनके आय से अधिक सम्पत्ति का पता लगा था। इसके बाद उनके खिलाफ आयकर विभाग ने मामला दर्ज किया था। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने इस मामले में CBI जाँच की अनुमति भी दी थी। CBI तब से ही इस मामले में जाँच कर रही है।

CBI से डीके शिवकुमार के खिलाफ जाँच करवाने की अनुमति राज्य की भाजपा सरकार ने दी थी। जब कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो उसने CBI से जाँच अनुमति वापस ले ली। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इस जाँच को चुनौती दी गई लेकिन शिवकुमार को राहत नहीं मिली।

शिवकुमार के विरुद्ध दर्ज CBI की FIR में कहा गया है कि 2013 में उनके पास ₹33.9 करोड़ की संपत्ति थी लेकिन 2018 आते-आते यह बढ़ कर ₹162 करोड़ से अधिक हो गई। इसी को लेकर आरोप लगाए गए थे।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय कॉन्ग्रेस के लिए बड़ा झटका है और अब INC का मतलब आई नीड करप्शन हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब कॉन्ग्रेस द्वारा किया गया भ्रष्टाचार सब कहीं उजागर हो रहा है।

मुहर्रम के चंदा के नाम पर दुकानदारों से मारपीट, सामने आया राँची के मेन रोड की घटना का वीडियो: पूर्व CM बाबूलाल मरांडी बोले – दंगों की आग में झोंकने का प्रयास

झारखंड की राजधानी राँची में मुहर्रम के चंदे के नाम पर दुकानदारों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। राज्य में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए कार्रवाई की माँग की है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राँची में मुहर्रम की चंदा वसूली के नाम पर गुंडों द्वारा दुकानदारों के साथ मारपीट और बदसलूकी की जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी घटनाओं से पूरे शहर का शांति-सौहार्द बिगड़ सकता है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राँची मेन रोड अति संवेदनशील क्षेत्र है, पूर्व में भी ऐसे असामाजिक तत्वों द्वारा शहर को दंगों की आग में झोंकने का प्रयास किया जा चुका है। उन्होंने माँग की कि उक्त घटना में संलिप्त आरोपितों को गिरफ्तार कर मुहर्रम के चंदा वसूली में हो रही इस गुंडागर्दी को तुरंत बंद कराया जाए, साथ ही मेन रोड के सभी दुकानदारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। बता दें कि राँची के इस इलाके में कई मॉल और दुकानें स्थित हैं, सबसे ज़्यादा चहल-पहल भी यहीं रहती है।

CCTV वीडियो में कुछ लोगों को मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। राँची पुलिस ने जानकारी दी है कि घटना का संज्ञान लेते हुए त्वरित प्राथमिकी दर्ज कर कांड में संलिप्त दोनों अभियुक्तों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। बता दें कि अभी मुस्लिमों का पाक कहा जाने वाला मुहर्रम का महीना चल रहा है। इसे इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है। 7 जुलाई, 2024 को भारत में मुहर्रम शुरू हुआ, जो इसके एक महीने बाद ख़त्म होता है।

इससे पहले बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में घुसपैठ के कारण शिक्षा के इस्लामीकरण का मुद्दा उठाया था। उदाहरण के लिए उन्होंने 4 साल पुरानी एक खबर भी साझा की थी। तब घाटशिला के एक स्कूल में बच्चों को बांग्लादेश और पाकिस्तान का राष्ट्रगान याद करने का होमवर्क दिया गया था। बाबूलाल मरांडी ने कहा था कि अपने संरक्षण में बांग्लादेशी घुसपैठियों के फ़र्जी कागजात तैयार कर उन्हें झारखंड में बसाने वाली झामुमो-कॉन्ग्रेस गठबंधन सरकार से ऐसे संवेदनशील विषयों में कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसीलिए NIA को इस मामले को देखना चाहिए। 

पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी PTI को बैन करेगी शाहबाज़ शरीफ की सरकार: पहले से ही जेल में बंद हैं पूर्व प्रधानमंत्री, अब चलेगा राजद्रोह का मुकदमा

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। पाकिस्तान की शाहबाज शरीफ की अगुवाई वाली सरकार ने इसी के साथ इमरान कहाँ समेत PTI के बड़े नेताओं पर राजद्रोह का मुकदमा चलाने का भी निर्णय लिया है।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोमवार (15 जुलाई, 2024) को मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, “विदेशी फंडिंग मामले, 9 मई के दंगों और साइफर मामले के साथ ही प्रकरण के साथ-साथ अमेरिका में पास हुए प्रस्ताव को मद्देनजर रखते हुए हमारे पास PTI पर प्रतिबन्ध लगाने के मजबूत सबूत मौजूद हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “हम PTI पर प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं और हमारा मानना ​​है कि संविधान का अनुच्छेद 17 सरकार को राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है और इस मामले को आगे सुप्रीम कोर्ट में भेजा जाएगा।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आगे बढ़ने के लिए PTI पर प्रतिबंध लगाना ही होगा।

गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार (12 जुलाई, 2024) को ही PTI को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी। उसे पाकिस्तान की संसद में आरक्षित सीटों में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई थी और उसके बाद वह संसद में सबसे बड़ी पार्टी बन जाती। पाकिस्तान की सरकार ने इस निर्णय को भी चुनौती देने की बात कही है।

इस के अलावा हाल ही में PTI के मुखिया और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीवी को भी कोर्ट से कई मामलों में राहत दी गई है। उन्हें तोशाखाना और इद्दत मामले में हाल ही में राहत मिली है, इसके बाद उनके सक्रिय राजनीति में आने के कयास लग रहे थे।

हालाँकि, इन राहत की खबरों के बीच पाकिस्तान की PPP और मुस्लिम लीग नवाज की गठबंधन सरकार ने मुख्य विपक्षी पार्टी PTI पर प्रतिबन्ध लगाने का निर्णय ले लिया। इसके पीछे 9 मई, 2023 को हुए दंगों को बड़ा कारण बताया गया। 9 मई, 2023 को पाकिस्तान में इमरान खान के गिरफ्तार होने के बाद दंगे भड़क गए थे।

इसके अलावा इस पार्टी पर प्रतिबन्ध के पीछे साइफर मामला भी बताया गया। दरअसल, यह एक पत्र था जिसके आधार पर इमरान खान दावा कर रहे थे कि अमेरिका उनकी सरकार गिराना चाहता है। इन सभी को आधार बना कर अब इमरान खान की पार्टी को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। हालाँकि, इस मामले पर अंतिम निर्णय पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट का होगा।

पार्टी को प्रतिबंधित करने के साथ ही इमरान खान, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी पर राजद्रोह के तहत मुकदमा चलाने की बात कही गई है। पाकिस्तान की सरकार ने आरोप लगाया कि इमरान खान और उनसे जुड़े हुए लोग पाकिस्तान के रिश्तों को बिगाड़ने और उसकी IMF के साथ डील बिगाड़ने पर तुले हुए हैं।

PTI ने सरकार के इस कदम को आत्मघाती बताया है और इसके लिए पाकिस्तान की फ़ौज उसके मुखिया आसिम मुनीर को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी ने कहा है कि इससे जो नुकसान होगा वो देश को सहना पड़ेगा। PTI ने फ़ौज के मुखिया को अपनी पुरानी गलतियों से सीखने को कहा है।

मंगलौर के बहाने समझिए मुस्लिमों का वोटिंग पैटर्न: उत्तराखंड की जिस विधानसभा से आज तक नहीं जीता कोई हिन्दू, वहाँ के चुनाव परिणामों से मिलते हैं ये सबक

शनिवार (13 जुलाई, 2024) को देश भर में हुए विधानसभा उपचुनावों के नतीजे आए। इसमें उत्तराखंड की दो सीटें भी शामिल थी। एक सीट हरिद्वार जिले की मुस्लिम बहुल मंगलौर सीट थी जबकि दूसरी चमोली सीट की बद्रीनाथ सीट थी। इन दोंनो सीट पर कॉन्ग्रेस ने जीत दर्ज की। इस जीत को राहुल गाँधी की रणनीति का चमत्कार बना कर प्रचारित किया जा रहा है। हालाँकि, इस बीच मंगलौर सीट पर भाजपा की हार मुस्लिमों के विशेष वोटिंग पैटर्न की ओर ध्यान दिलाती है।

2011 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार, मंगलौर लगभग 90% मुस्लिम आबादी वाला शहर है। मंगलौर विधानसभा क्षेत्र में लगबग 45% मुस्लिम मतदाता हैं, जबकि 20% अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। इंडिया टुडे के अनुसार, मंगलौर विधानसभा में 52,000 मुस्लिम जबकि 18,000 दलित, 14,000 जाट और 8,000 गुज्जर मतदाता हैं।

यह सीट अक्टूबर, 2023 में इसके BSP विधायक सरवत करीम अंसारी के निधन के बाद खाली हो गई थी। मंगलौर 10वीं शताब्दी की शुरुआत से ही अस्तित्व में रहा है। इसका नाम चौहान वंश के मंगल सिंह के नाम पर पड़ा था, उन्होंने यहाँ एक मंगल किला बनवाया था। अब यह एक मुस्लिम बहुल शहर है।

हालिया उपचुनाव में, इस सीट पर जीतने वाले कॉन्ग्रेस के काजी मोहम्मद निजामुद्दीन को 37.91% वोट मिले। वहीं दूसरे नंबर पर भाजपा के करतार सिंह भड़ाना रहे, उन्हें 37.4% वोट मिले। इस चुनाव में तीसरे नंबर पर BSP के ओबेदुर रहमान थे, उन्हने 23.4% वोट हासिल हुए।

मंगलौर एक मुस्लिम बहुल सीट है। इसलिए काजी मोहम्मद निजामुद्दीन का जीतना कोई विशेष आश्चर्य की बात नहीं है। हालाँकि, अगर यहाँ से सामने आए आँकड़ों पर नजर डाली जाए तो मुस्लिम समुदाय के मतदान पैटर्न के बारे में काफी दिलचस्प जानकारी सामने आती है।

मंगलौर से कभी नहीं हुई गैर मुस्लिम की जीत

2002 से लगातार मंगलौर सीट से कॉन्ग्रेस और बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतते आ रहे हैं। 2024 में इस सीट से कॉन्ग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले निजामुदीन 2002 में बसपा के उम्मीदवार थे। 2002 में भी काजी निजामुद्दीन ने 40% वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

इस चुनाव में दूसरे नम्बर पर कॉन्ग्रेस के सरवत करीम अंसारी रहे थे। उन्हें 27.5% वोट मिले थे। 2007 में भी यही सिलसिला दोहराया गया था और निजामुद्दीन ने अंसारी को पटखनी दी थी। इस बार निजामुद्दीन को 37% वोट मिले थे। इस चुनाव में दूसरे नंबर पर रालोद के कुलवीर सिंह रहे थे।

2012 में काजी निजामुद्दीन ने बसपा छोड़ दी और कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। इसी सरवत करीम अंसारी बसपा में आ गए और उन्होंने 2012 चुनाव में निजामुद्दीन को पटखनी दे दी। सरवत करीम अंसारी को इस चुनाव में 34.3% वोट मिले जबकि काजी निजामुद्दीन 33.07% वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे।

2017 में काजी निजामुद्दीन ने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। इस बार उन्हें 38.5% वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंदी सरवत करीम अंसारी 35.2% के साथ दूसरे नम्बर पर रहे। 2022 में सरवत करीम अंसारी ने जोरदार वापसी की और निजामुद्दीन को पटखनी दे दी। लेकिन 2023 में अंसारी का निधन हो गया और यह सीट खाली हो गई।

इसके बाद हुए 2024 उपचुनाव में भाजपा ने यहाँ से करतार सिंह भड़ाना को जबकि कॉन्ग्रेस ने निजामुद्दीन को उतारा। बसपा ने इस सीट से उबैदुर रहमान को टिकट दिया। इस चुनाव में निजामुद्दीन को 37.9% जबकि भडाना को 37.4% वोट मिले। यानी कुल मिलाकर कहा जाए तो यहाँ से आज तक गैर मुस्लिम उम्मीदवार नहीं जीत पाया।

कॉन्ग्रेस को मिली जीत, भाजपा को बढ़त

मुस्लिम वोटर की बहुलता वाली इस सीट पर ऐतिहासिल रूप से हमेशा मुस्लिम उम्मीदवार ही जीते हैं। लेकिन इस बार एक बड़ा बदलाव यहाँ देखने को मिल रहा है। भाजपा ने इस बार के उपचुनाव में यहाँ हिंदू उम्मीदवार करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतारा था, जो काजी मोहम्मद निजामुद्दीन से केवल 422 वोटों से हारे।

वहीं BSP के से मैदान में उतारे गए ओबेदुर रहमान को 23.37% वोट मिले। इस प्रकार 2022 के मुकाबले 2024 में BSP वोट प्रतिशत में 13.8% की गिरावट हुई। वहीं दूसरी ओर, भाजपा का वोट प्रतिशत 16.04% बढ़ा। वोटों के इस हस्तांतरण से यह प्रतीत हो सकता है कि BSP का वोट भाजपा को ट्रांसफर हुआ।

इससे पहले मंगलौर में BSP के मतदाता पार्टी के मुस्लिम उम्मीदवारों को वोट दे रहे थे, इस बार BSP का हिन्दू वोटबैंक भाजपा में ट्रांसफर हुआ। इस वोटबैंक में जाट, गुज्जर और SC जातियाँ शामिल थी। 2024 में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब कोई हिन्दू उम्मीदवार दूसरे स्थान पर आया है और उसे अच्छे प्रतिशत में वोट मिले हैं।

इससे पहले किसी हिंदू उम्मीदवार को विधानसभा क्षेत्र में काफी वोट 2007 में मिले थे। 2007 में RLD के चौधरी कुलवीर सिंह को 32.01% वोट मिले थे और वह दूसरे नम्बर पर रहे थे। फिर भी सिंह का वोट प्रतिशत 2024 में भाजपा प्रत्याशी को मिले वोट की तुलना में कम था। भाजपा प्रत्याशी को इस बार जिन्हें 37.4% वोट मिले हैं।

2007 चुनाव में, RLD के कुलवीर सिंह 3393 वोटों से हार गए थे, जबकि 2024 में, भाजपा के हिंदू उम्मीदवार केवल 422 वोटों के अंतर से हारे। वोट प्रतिशत में यह बदलावमंगलौर विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव का संकेत देता है। स्पष्ट है कि यहाँ हिंदू वोट 2007 के बाद पहली बार एकत्रित हो पाया है।

भाजपा ने भी उतारा था मुस्लिम उम्मीदवार, हुई थी करारी हार

मंगलौर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने सिर्फ एक बार ही मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कलीम को अपना उम्मीदवार बनाया था। 2012 के इस विधानसभा चुनाव में, भाजपा उम्मीदवार कलीम को केवल 2,061 वोट मिले थे।

इसी चुनाव में BSP के सरवत करीम अंसारी को 24,706 वोट मिले और वह जीत गए, कॉन्ग्रेस के काजी मोहम्मद निजामुद्दीन 24,008 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। RLD द्वारा मैदान में उतारे गए हिंदू उम्मीदवार गौरीश चौधरी 19,354 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में अकेला हिन्दू उम्मीदवार RLD की तरफ से था लेकिन इस दौरान हिन्दू एकजुटता देखने को नहीं मिली थी जो 2024 में देखने को मिली।

मंगलौर के नतीजे से मुस्लिमों के वोटिंग के तरीके भी स्पष्ट हुए

मंगलौर के इस चुनाव से उन लिबरल आलोचकों के मुंह पर ताला लग जाना चाहिए जो लगातार मुस्लिम प्रतिनिधित्व की बातें करते हैं। मंगलौर के नतीजों ने यह साफ़ कर दिया है कि जब सीट पर मुस्लिम आबादी 40% के निशान को पार कर जाती है, तो यहाँ से हमेशा लगभग मुस्लिम को ही जीत मिलती है। यह मुस्लिमों के उस वोटिंग पैटर्न को स्पष्ट करता है जिसमें वह अपने समुदाय के उम्मीदवार को जिताने के लिए एकजुट हो जाते हैं।

ऐसे में जब मुस्लिम हमेशा मुस्लिम उम्मीदवार को ही वोट करते हैं तो फिर लिबरल और वामपंथी इस बात पर नहीं रो सकते कि हिन्दू समुदाय मुस्लिमों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं देता। यदि मुस्लिम अपने समुदाय के उम्मीदवार के पीछे इकट्ठा हो सकते हैं, तो हिन्दू भी बिलकुल ऐसा ही कर सकते हैं। इसी मामले में उन पार्टियों पर भी मुस्लिम उम्मीदवार ना उतारने का आरोप नहीं लगाया जा सकता जो वोटबैंक के सामने नतमस्तक ना होती हों।

इसके अलावा लगातार इस बात पर प्रश्न उठते हैं कि भाजपा मुस्लिम उम्मीदवार क्यों नहीं देती। भाजपा ने 2012 में इस सीट से मुस्लिम उम्मीदवार को मौक़ा दिया था लेकिन तब उसकी बुरी गत हुई और मुस्लिमों ने ही अपने समाज के उम्मीदवार को वोट नहीं दिया। ऐसे में इससे साफ़ होता है कि मुस्लिम वोटर केवल अपने समुदाय से उम्मीदवार ही नहीं बल्कि वो उम्मीदवार चाहते हैं जो हमेशा उनके ही पक्ष में बोले। ऐसे में यदि कोई पार्टी बिना तुष्टिकरण की राजनीति के मुस्लिम उम्मीदवार उतारती भी है, तो वह भी हार जाएगा।

यह पैटर्न निश्चित रूप से भाजपा के लिए भी सबक है। उनके 2012 के प्रदर्शन और 2024 के प्रदर्शन में अंतर स्पष्ट रूप से इस बात का संकेत है कि हिंदू समुदाय से बनाया गया उम्मीदवार उन्हें अच्छे नतीजे दे देगा लेकिन मुस्लिमों को आगे करने से उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला।

भाजपा ने 2012 में मुस्लिम बहुल सीट पर जीत के लिए मुस्लिम वोट बटोरने की सोची। लेकिन इसका नतीजा सामने आ गया। ना उसे मुस्लिम वोट ही मिले और हिन्दू वोट भी उससे छिटक गया। वहीं जब उन्होंने एक हिंदू उम्मीदवार को मैदान में उतारा, तभी सीट पर में भाजपा के पक्ष में हिंदू वोटों का अभूतपूर्व एकीकरण हुआ।

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि जनसांख्यिकी परिवर्तन का खतरा मंगलौर के हिंदुओं पर भारी पड़ रहा है और इसीलिए वह इन उपचुनावों में भाजपा के पक्ष में एकजुट हो गए। इसके अलावा, भाजपा ने इस बार करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतारकर अपने जातिगत समीकरणों को भी साध लिया।

मंगलौर उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है इसलिए, हरियाणा के एक उम्मीदवार ने मंगलौर के हिंदुओं को आकर्षित किया। इसी कारण से उसका हार का अंतर घट कर मात्र 422 वोट रह गया। मंगलौर के परिणामों से यह साफ़ है कि हिंदू एकीकरण के साथ-साथ अगर जाति का मामला सही ढंग से समझा गया तो भाजपा मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति को पटखनी दे सकती है।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे अंग्रेजी में आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

बड़ी बहन ने कर ली आत्महत्या, अब छोटी वाली को धमकी… तौहीद ने ‘जानू मिश्रा’ बन फाँसा, पिता को गाली-गलौज कर भगाया तो SP के पास लगाई गुहार

उत्तर प्रदेश के रायबरेली से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। मामला खीरों था अंतर्गत आने वाले क्षेत्र का है। इस मामले में जहाँ एक नाबालिग हिन्दू लड़की की मौत हो गई है, वही दूसरी लड़की को धमकी मिल रही है। यूपी पुलिस पर भी टालमटोल का आरोप है। रामशरण तिवारी के बेटे रामप्रकाश तिवारी ने इस संबंध में FIR दर्ज करवाई है। उनकी 16 वर्षीया बेटी कुमारी शालू सरस्वती इंटर कॉलेज में 11वीं की छात्रा थी। कॉलेज आने-जाने के दौरान तौहीद उसके साथ छेड़छाड़ करता था।

तौहीद उर्फ़ जानू रनापुर पहरौली का रहने वाला है। उसके अब्बा का नाम ललन है। कॉलेज आने-जाने के दौरान वो शालू को परेशान करता था, उससे एकतरफा प्यार करने लगा था। रामप्रकाश तिवारी को उनकी दूसरी बेटी प्रतिभा ने इसकी जानकारी दी। शालू ने अपना झूठा नाम ‘जानू मिश्रा’ बता रखा था, उसने शालू को अपने जाल में फँसा लिया था। फरवरी 2024 में शालू ने फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। जब रामप्रकाश तिवारी तौहीद की शिकायत करने उसके घर गए तो उनके साथ गाली-गलौज कर उन्हें भगा दिया गया।

पीड़ित पिता ने SP को दिया ज्ञापन

उनके साथ बदसलूकी करने वालों में बसीर का बेटा लल्लन और लल्लन का बेटा तस्लीम उर्फ़ छोटू शामिल था। उन्होंने धमकाया कि मुकदमा लिखवाने पर उन्हें जान से मार डाला जाएगा। तब वो डर कर वापस आ गए, अब उन्होंने कहा है कि हिम्मत कर के वो मुकदमा लिखवा रहे हैं। पीड़िता प्रतिभा ने भी इस संबंध में बयान दिया है। उन्होंने बताया कि उनकी बहन ने एक दिन बाजार जाने के बहाने उन्हें साथ लेकर तौहीद को भी साथ ले लिया, उस दौरान तौहीद ने शादी की भी बात कही थी।

पीड़िता पिता ने एसपी को दिया ज्ञापन

प्रतिभा ने बताया कि उनकी दीदी ने आत्महत्या कर ली, उसके बाद तौहीद और उसका छोटा भाई रोज जान से मार डालने की धमकी देने लगा। एसपी ऑफिस में इन्होंने अपनी बात रखी है। प्रतिभा 8वीं कक्षा में पढ़ती हैं। परिवार ने कहा है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो उन्हें खतरा है, फिर वो मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाएँगे। एसपी ने थानाध्यक्ष से बात करने का आश्वासन दिया है। देश में ‘लव जिहाद’ की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं।

‘हाँ 42 लोगों का किया कत्ल… पत्नी को भी नहीं छोड़ा’ : केन्या पुलिस ने पकड़ा ‘सीरियल किलर’, 9 शव क्षत-विक्षत मिलने के बाद मचा था हड़कंप

केन्या में पिछले दिनों कूड़ा फेंकने वाली जगह पर 9 शव क्षत-विक्षत हालत में बरामद हुए थे। इसी के बाद इलाके में सनसनी थी। अब पुलिस ने केस की गुत्थी को सुलझाते हुए 9 लोगों की नृशंस हत्या करने के वाले ‘सीरियल किलर’ को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि पुलिस से पूछताछ में उस किलर ने स्वीकार किया है कि वो अब तक 42 महिलाओं को मौत के घाट उतार चुका है। इन 42 महिलाओं में उसकी पत्नी भी शामिल है।

आरोपित की पहचान 33 वर्षीय जोमैसी खलीसिया के रूप में हुई है। उसे सोमवार (15 जुलाई 2024) को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्होंने एक दूसरे संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया है उसके पास मृतक लोगों में से एक का हैंडसेट मिला है।

बता दें कि 12 जुलाई को केन्या के मुकुरु झुग्गी बस्ती क्षेत्र में कूड़े के ढेर में प्लास्टिक की थैलियों में बंधे क्षत-विक्षत 9 शव मिले थे। पुलिस ने छानबीन के बाद पता लगाया था कि इनमें 8 शव महिलाओं के थे।

आसपास इन शवों के मिलने की जानकारी होने के बाद आक्रोश व्याप्त हो गया था। हालाँकि आज खबर आई कि पुलिस ने संदिग्ध को अरेस्ट कर लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल होते पोस्टों के अनुसार, आरोपित के पास से पुलिस को धारदार हथियार, कई मोबइल फोन, लैपटॉप, आईडी कार्ड, पर्स और लोहे की वस्तुएँ बरामद हुई हैं।

प्रेम-विवाह से खफा मुस्लिमों ने नवबौद्धों की बस्ती पर किया हमला, पत्थरबाजी के पीछे AIMIM विधायक का हाथ होने का दावा: दलित महिलाओं ने बयाँ किया दर्द

धुले जिले के साक्री में दलित बस्ती पर मुस्लिम जिहादियों ने पत्थरबाजी की है, जिसके बाद दंगे भड़क गए। महाराष्ट्र के धुले जिले के साक्री में गुरुवार (11 जुलाई, 2024) को रात 8.30 बजे मुस्लिम भीड़ ने दलित समाज पर हमला बोल दिया। मुस्लिम कट्टरवादियों ने दलित बस्ती पर जोरदार पथराव किया। इसमें महिलाओं-बच्चों समेत कई घायल हुए। इस मामले में पुलिस ने दोनो तरफ के 70 से ज्यादा लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। दलित महिलाओं ने बताया कि उन्होंने किसी तरह भाग कर जान बचाई।

बताया जा रहा है की इस घटना के पीछे मूल कारण एक प्रेम विवाह है, जिसमें नवबौद्ध समाज के युवा ने मुस्लिम युवती के साथ शादी की। इससे स्थानीय मुस्लिम आक्रोशित हो गए। गुरुवार की शाम को एक किशोर नवबौद्ध समाज के व्यक्ति के किराना दुकान पर आया। उसने दुकानदार को गालियाँ दी, इस कारण दुकानदार ने उसको डाँटा। उक्त किशोर ने इसके बाद घर जाकर इस मामले को बढ़ा-चढ़ा कर बताया। फिर इलाके में हिंसा भड़क गई।

इस दंगे के पीछे धुलिया में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM विधायक फारूक अनवर शाह का हाथ होने का दावा किया जा रहा है। विधायक के करीबी आरिफ और जाकिर शेख यही इस घटना के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। नवबौद्ध समाज का आरोप है कि पुलिस उनको बचा रही है। साक्री के सकल हिंदू समाज ने नवबौद्ध भाइयों के न्याय के लिए पुलिस को मूल आरोपियों पर कार्रवाई करने का निवेदन दिया। उन्होंने कहा है कि जो मूल आरोपी है वह अभी भी हिरासत में नहीं लिए गए हैं।

जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है उनमें जगदीश वाघ, कपिल वाघ, निखिल गोंड, उदय मोर, यश पाथरे, जय मोरे शामिल हैं। नवबौद्ध समाज का आरोप है कि इन लोगों को फँसाया गया है। घटना के मास्टरमाइंड आरिफ और जाकिर शेख को तुरंत गिरफ्तार करने के लिए पुलिस से माँग की गई है। ‘सकल हिन्दू समाज’ ने कहा है कि पुलिस किसी मजहब विशेष के लोगों का पक्ष न लेते हुए मूल आरोपितों पर कार्रवाई करे। ऐसा न होने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

IAS बेटी ऑडी पर बत्ती लगाकर बनाती थी भौकाल, माँ-बाप FIR के बाद फरार: पूजा खेडकर को जाँच के बाद डॉक्टरों ने नहीं माना था मानसिक दिव्यांग, फिर भी बोला झूठ

महाराष्ट्र की विवादित ट्रेनी आईएएस (IAS) ऑफिसर अपने दुर्व्यवहार के कारण पिछले दिनों चर्चा में आई थीं, लेकिन अब उनसे जुड़े विवाद बढ़ते ही जा रहे हैं। हाल में उनकी माँ की वीडियो वायरल हुई थी। वीडियो में वो किसानों को धमकाती दिखाई दे रह थीं। इसी वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने शुक्रवार को उनके खिलाफ इस मामले में कार्रवाई करते हुए एफआईआर कर ली है और आरोपितों की तलाश जारी है। न पूजा खेडकर के पिता मिल रहे हैं न माँ।

पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक पंकज देशमुख ने इस मामले में कहा, “आरोपित फरार हैं। हम उनसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कहीं कोई बात नहीं हो पा रही हैं। उन लोगों का फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है। हम उनके आवास तक पहुँचने की भी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वहाँ कोई है ही नहीं। स्थानीय अपराध शाखा की कई टीमें उनकी तलाश कर रही हैं। उनके फार्म हाउस और अन्य जगहों पर छानबीन हो रही हैं। अगर वे लोग मिल जाते हैं तो हम उनसे पूछताछ करेंगे। उसके बाद कार्रवाई होगी।”

मालूम हो कि मनोरमा खेडकर की तलाश के क्रम में पुणे नगर निगम भी है। उन्होंने मनोरमा खेडकर को बंगले से सटे ‘अवैध निर्माण’ को लेकर नोटिस जारी किया है। हालाँकि ये नोटिस वो खेडकर को नहीं दे पाए। शनिवार शाम को नगर निगम के अधिकारियों ने शहर के बानेर रोड स्थित ‘ओम दीप’ बंगले पर मनोरमा खेडकर को नोटिस सौंपने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे की घंटी बजाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अधिकारियों ने बंगले के मुख्य दरवाजे पर नोटिस चिपका दिया। नोटिस में कहा गया है, “हमें आपके बंगले के बाहर अवैध निर्माण के बारे में शिकायत मिली है जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। कृपया अगले सात दिनों में बंगले की चारदीवारी से सटे ‘अवैध निर्माण’ को हटा दें।”

पूजा खेडकर को प्रमाण पत्र देने से कर दिया गया था मना

बता दें कि आईएएस पूजा खेडकर और उनके माता-पिता इस समय हर ओर से फँसे हुए हैं। पहले उनके ऊपर नीली-लाल बत्ती वाली कार, वीआईपी नंबर प्लेट, अलग चैंबर आदि सेवाओं के लिए अधिकारियों को तंग करने आरोप था लेकिन अब जब से ये पूरा मामला खुला है उसके बाद से पता चला है उनके आईएएस बनने पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जैसे कहा जा रहा है कि उन्होंने मानसिक दुर्बलता के बारे में झूठ बोला। एनडीटीवी की खबर के अनुसार अगस्त 2022 में पूजा ने दिव्यांगता दिखाने के लिए प्रमाण पत्र आवेदन किया था, लेकिन डॉक्टरों ने जाँच के बाद उसे खारिज कर दिया। उन्हें कहा गया कि आपको दिव्यांगता का सर्टिफिकेट देना संभव नहीं है।

देख सकते हैं कि खबर में जोड़े गए सर्टिफिकेट में सर्टिफिकेट देने से साफ है मना किया गया था। इससे पहले पूजा खेडकर मामले में खबरें आई थीं जिसमें बताया गया था कि उन्होंने नियुक्ति के लिए होने वाले मेडिकल चेक अप 6 बार स्किप किया था। हर बार अलग-अलग बहाने देकर। बावजूद इसके यह स्पष्ट नहीं है कि जब पूजा ने सही से मेडिकल टेस्ट कराया ही नहीं, तो उन्हें नियुक्त कैसे किया गया।

पत्नी-बच्चे के साथ गाड़ी से जा रहा था हिंदू, मुहर्रम जुलूस में शामिल युवकों ने लाठी-तलवार से कर दिया हमला: मोहम्मद इश्तियाक सहित 5 धराए, बिहार की घटना

बिहार के समस्तीपुर में मुहर्रम जुलूस में शामिल मुस्लिम लड़कों ने एक हिन्दू परिवार पर हमला बोल दिया। गाड़ी में बैठे हिन्दू परिवार पर लाठियों और तलवारों से हमला किया गया। इस हमले में उनकी गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई और परिवार भी जख्मी हो गया। मामले में पुलिस ने पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, समस्तीपुर के दलसिंह सराय में रविवार (14 जुलाई, 2024) को मोहर्रम का एक जुलूस निकला रहा। यह जुलूस ताजिया की मिट्टी लाने के लिए निकाला गया था। इसमें शामिल लोग तलवारों से करतब हुए जा रहे थे। यह जुलूस मुख्य मार्ग पर निकल रहा था।

इसी दौरान मधुबनी जिले के निवासी अभीतेश कुमार यहाँ से निकल रहे थे। उनके साथ उनकी गाड़ी में उनकी पत्नी और और बेटा था। उन्होंने अपनी गाड़ी सड़क किनारे लगा ली थी। इसी दौरान उन पर हमला कर दिया गया। जुलूस में शामिल लड़कों ने उनकी गाड़ी के शीशे तोड़ दिए, इससे वह और उनका परिवार जख्मी हो गया।

बताया गया कि जुलूस में शामिल इन युवकों ने इस दौरान अन्य राहगीरों से भी मारपीट की। इसके बाद यह सभी यहाँ से फरार हो गए। पीड़ित परिवार ने बताया कि बिना वजह उन पर हमला किया गया और वह हमले के दौरान सड़क किनारे थे। पीड़ित परिवार ने बताया कि वह हमलावरों की शक्लें पहचानते हैं।

पीड़ित अभीतेश कुमार ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस के पास FIR भी दर्ज करवाई है। अभीतेश कुमार की FIR के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पाँच उपद्रवियों को पकड़ा है। इन उपद्रवियों का नाम मोहम्मद सज्जाद, मोहम्मद इश्तियाक और मोहम्मद सोनू हैं। हमले में दो नाबालिग भी शामिल थे।

इन सभी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले में CCTV फुटेज निकाल कर आगे की जाँच कर रही है। पुलिस ने इस घटना के बाद अपनी तैनाती भी इलाके में बढ़ा दी है। इस संबंध में अब इलाके में शान्ति बैठक का आयोजन किया जाना है।