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छात्र झारखंड के, राष्ट्रगान बांग्लादेश-पाकिस्तान का, जनजातीय लड़कियों से ‘लव जिहाद’, फिर ‘लैंड जिहाद’: HC चिंतित, मरांडी ने की NIA जाँच की माँग

झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने आवाज़ उठाई है। बांग्लादेशी घुसपैठ के राज्य में क्या दुष्परिणाम हो रहे हैं, ये बताने के लिए उन्होंने 4 साल पुरानी एक खबर भी साझा की है। बता दें कि तब घाटशिला के एक स्कूल में बच्चों को बांग्लादेश और पाकिस्तान का राष्ट्रगान याद करने का होमवर्क दिया गया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है कि झारखंड को ‘मिनी बांग्लादेश’ बनाने की साजिश चरम पर है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर इस तब अख़बार में छपी खबर की तस्वीर शेयर की। साथ ही उन्होंने लिखा, “LKG और UKG कक्षा के बच्चों को बांग्लादेश और पाकिस्तान का राष्ट्रगान रटवा कर नन्ही उम्र में ही ब्रेनवॉश किया जा रहा है। यह संयोग नहीं, बल्कि झारखंड की आदिवासी मूलवासी पहचान को मिटाने का खतरनाक प्रयोग है। देश विरोधी गतिविधि में संलिप्त इस स्कूल का संचालन और फंडिंग करने वाले गिरोह की सघनता से जाँच करने की आवश्यकता है।”

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अपने संरक्षण में बांग्लादेशी घुसपैठियों के फ़र्जी कागजात तैयार कर उन्हें झारखंड में बसाने वाली झामुमो-कॉन्ग्रेस गठबंधन सरकार से ऐसे संवेदनशील विषयों में कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती। इस कारण उन्होंने NIA से अनुरोध किया है कि वो मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करें। बता दें कि जुलाई 2020 में जब ये मामला सामने आया था, तब भी ये काफी तूल पकड़ा था। उस समय भी आरोप लगाया गया था कि झारखंड में शिक्षा का इस्लामीकरण शुरू हो गया है।

हाल ही में झारखंड उच्च न्यायालय ने भी इस समस्या पर चिंता जताई है, जिसके बाद ये मामला फिर से गर्म हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार (3 जुलाई, 2024) को कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिह्नित कर उनके प्रत्यर्पण के लिए एक एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा है। संथाल परगना क्षेत्र में ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ PIL पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ऐसा कहा। राज्य सरकार को 2 हफ़्तों के भीतर एफिडेविट दायर करने के लिए कहा गया है।

झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रभाव बढ़ने का सबसे अधिक खामियाजा जनजातीय समाज को भुगतना पड़ता है। मशरूम की तरह अवैध मदरसे उग रहे हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ जा जनजातीय समाज की लड़कियों को फाँस कर शादी कर ली जाती है, फिर उन लड़कियों को पंचायत चुनाव में खड़ा कर दिया जाता है। जनप्रतिनिधि का पद परिवार में आ जाने के बाद ये लोग उसकी आड़ में ड्रग्स तक का धंधा भी करते हैं। साथ ही अन्य घुसपैठियों को सरकारी फायदे दिलाने के लिए उनके दस्तावेज भी बना दिए जाते हैं।

बाबूलाल मरांडी ने जो खबर शेयर की है, वो ये बताता है कि कैसे शिक्षा व्यवस्था पर इस्लामी प्रभाव पड़ने के कारण बच्चे अपने देश की संस्कृति भूलते चले जाते हैं। ‘नंदलाल स्मृति विद्या मंदिर’ नामक स्कूल में छात्रों को भारत नहीं बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश का राष्ट्रगान याद करने का होमवर्क दिया गया था। अभिभावकों का कहना था कि वो अपने बच्चों को पाकिस्तान और बांग्लादेश का राष्ट्रगान नहीं पढ़ने देंगे। विद्यालय प्रबंधन को ये टास्क विरोध के बाद वापस लेना पड़ा था।

हमने बिहार में भी इसका प्रभाव देखा है, जहाँ सीमांचल में मुस्लिम आबादी बढ़ने और घुसपैठियों को शरण मिलने के बाद रविवार की जगह शुक्रवार (जुमा) के दिन साप्ताहिक अवकाश दिया जाने लगा। बड़ी बात ये है कि झारखंड वाली समस्या पर भाजपा विरोधी राजनीतिक दल भी चुप रहते हैं, जबकि वो खुद को पिछड़ों का रहनुमा कहते नहीं थकते हैं। जनजातीय समाज की समस्याओं पर उनकी चुप्पी मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर उनके झुकाव को प्रदर्शित करती है।

नोटों की गड्डियाँ बिछाकर मुनीम करता था वीडियो कॉल: इमरान ने लिव-इन पार्टनर दीप्ति के जरिए प्रेमजाल में फँसाया, फिर लूट लिए 50 लाख रुपए

राजस्थान की राजधानी जयपुर में इमरान ने अपनी लिव-इन पार्टनर के साथ मिलकर एक मुनीम को हनी ट्रैप में फँसा लिया और उससे 50 लाख रुपए लूट लिए। मुनीम मालिक की अनुपस्थिति में अलमारी में रखे नोटों की गड्डियों को बिछाकर उसे दिखाने के लिए अपने दोस्तों को वीडियो कॉल करता था। इसकी जानकारी इमरान के गैंग को लगी तो उसने मुनीम को हनी ट्रैप में फँसा लिया।

मुनीम विजय फ्लैट में अकेला रहता था। वह तिजोरी से नोटों की गड्डियाँ निकालकर उनको बिछा लेता और उन पर लेट जाता। इस दौरान वह वीडियो कॉल करके अपने साथियों को दिखाया करता था। इस तरह उसने करीब 15 साथियों को वीडियो कॉल करके यह सब दिखाया था। इन्हीं में से किसी साथी के जरिए इमरान के शेखावटी गैंग को इसकी जानकारी मिली। 

मुनीम विजय की इस हरकत की जानकारी मिलते ही इमरान ने मुनीम को लूटने की योजना बनाई। उसने अपनी लिव-पार्टनर प्रभाती देवी उर्फ दीप्ति नाम की एक महिला को भेजा। दीप्ति ने मुनीम से दोस्ती की। दोनों के बीच वीडियो कॉल होने लगा। उस दौरान भी मुनीम दीप्ति को नोटों की गड्डियाँ दिखाता था। धीरे-धीरे दीप्ति ने मुनीम से अपनी नजदीकियाँ बढ़नी शुरू कर दी।

एक दिन भाटी कॉम्प्लेक्स के एक ऑफिस का इस मुनीम ने युवती को मिलने के लिए बुलाया। 21 जून की रात को कारोबारी के दफ्तर में ही मिलना तय हुआ। वहाँ पहुँचकर दीप्ति ने उसे नशीला ड्रिंक पिलाकर मुनीम को बेहोश कर दिया। इसके बाद अपने गैंग के लोगों के साथ मिलकर अलमारी में रखे 50 लाख रुपए लूटकर फरार हो गए। साथ में वे मुनीम का मोबाइल भी लेकर चले गए।

इस वारदात का खुलासा करते हुए पुलिस ने दीप्ति और उसके प्रेमी इमरान खान को पकड़ लिया। दोनों के पास से 35.25 लाख रुपए नकद बरामद कर लिए गए हैं। प्रभाती देवी चूरू के गाजसर की रहने वाली है, जबकि इमरान खान चूरू के रतननगर का रहने वाला है। प्रभाती देवी उर्फ दीप्ति तलाकशुदा है। कुछ समय से इमरान के साथ रह रही थी। 

पुलिस ने बताया कि मामले का खुलासा करने के लिए गठित आधा दर्जन टीमों ने 300 कैमरों के फुटेज व 110 मोबाइल नंबरों की सीडीआर का एनालिसिस किया। इसके बाद इस गैंग का खुलासा हुआ। इस मामले में तीन हिस्ट्रीशीटर सहित 4 अन्य आरोपित फरार हैं। फरार आरोपियों में शामिल साबिर, साहिल गाजी, अभिषेक व अमित कास्वां अलग-अलग थानों के हिस्ट्रीशीटर हैं।

ये गैंग इंटरनेट से वर्चुअल नंबर जनरेट कर आपस में बात करते थे, ताकि ये पुलिस की पकड़ में ना आ सकें। फिलहाल विद्याधर नगर थाना पुलिस गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर रही है। वहीं, फरार आरोपितों की तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही है।

‘अल्लाह के अलावा और कोई भगवान नहीं’: गायक लकी अली ने फिर दिखाई कट्टरता, पहले कहा था- इब्राहिम से निकला है ब्रह्म

गायक लकी अली ने एक बार फिर अपनी कट्टर सोच का प्रदर्शन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पहले विक्टिम कार्ड खेला और जब एक व्यक्ति ने उनसे प्रश्न किए तो वह बताने लगे कि इस दुनिया में अल्लाह के अलावा और कोई ईश्वर नहीं है। उनका यह पोस्ट अब वायरल हो रहा है।

‘ओ सनम’ गाने से प्रसिद्ध होने वाले गायक लकी अली ने पहले 12 जुलाई, 2024 को एक पोस्ट डाल कर विक्टिम कार्ड खेला। उन्होंने इस पोस्ट में लिखा, “आज दुनिया में मुसलमान होना एक अकेलेपन की बात है, पैगंबर की सुन्नत का पालन करना अकेलेपन की बात है, आपके दोस्त आपको छोड़ देंगे, दुनिया आपको आतंकवादी कहेगी।”

इसके कुछ ही देर बाद लकी अली ने एक और पोस्ट की जिसमें उन्होंने बताया कि सऊदी अरब में उन्हें कैसे एक बार जन्नत का अनुभव हुआ। उन्होंने इसमें एक मस्जिद में नमाज पढ़ने के दौरान एक आदमी से मुलाक़ात जिक्र इसमें किया था। उन्होंने इस पोस्ट में अल्लाह को धन्यवाद दिया और बताया कि इस्लाम ही सच्चा है और इस्लाम में विश्वास करने वाले धन्य हैं।

उन्होंने कहा,”मैं प्रार्थना करता हूँ कि हम इस्लाम में रहते हुए ही जिएँ और मरें। उनके इस पोस्ट के बाद एक व्यक्ति ने पूछा कि क्या इस्लाम में विश्वास करने वाले ही सौभाग्यशाली और उसमें विश्वास ना करने वाले अभिशप्त हैं, और क्या काफिर (इस्लाम ना मानने वाला) नरक में ही जाएगा।”

इसका जवाब देते हुए लकी अली ने कहा, “यदि आप अल्लाह की नेमत पर विश्वास नहीं करते हैं तो अल्लाह से उसकी उम्मीद भी कैसे कर सकते हैं? आपने सुना होगा कि माँगोगे और तुम्हें मिलेगा, खोजोगे और तुम पाओगे। अल्लाह का ही कहना है कि कोई और ईश्वर नहीं है, केवल अल्लाह ही हैं।”

उनकी इस टिप्पणी से साफ़ हो गया कि वह इस्लाम को मानने वालों के अलावा बाकी लोगों को अभिशप्त मानते हैं। उनकी टिप्पणी से यह भी साफ हुआ कि वह जिस मजहब में विश्वास करते हैं, केवल उसी के अल्लाह को सही मानते हैं और बाकी धर्म के मानने वालों की इज्जत नहीं करते।

लकी अली का यह कट्टर रवैया कई लोगों को पसंद नहीं आया। कई लोगों ने उनकी तुलना मौलाना जाकिर नाइक से कर दी जो कि आतंक फ़ैलाने के मामलों में वांछित है। कुछ लोगों ने उन्हें सेवानिवृत्त होने की सलाह दी।

हालाँकि, यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब लकी अली ने अपनी कट्टरता प्रदर्शित की हो। इससे पहले इजरायल पर इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमले के बाद उन्होंने फिलिस्तीन जाने की इच्छा जताई थी। उन्होंने इससे पहले दावा किया था कि ब्रह्म नाम इब्राहिम से आया है और ब्राम्हण इब्राहिम की संतति से हैं। उन्हें इस पोस्ट को लेकर बाद में माफ़ी माँगनी पड़ी थी।

जलगाँव में बार-बार चेन खींचकर पैसेंजर ट्रेन रोकी, फिर उतरकर यात्रियों पर करने लगे पथराव: उपद्रवी भीड़ में बुर्के वाली महिलाएँ भी दिखीं, वीडियो वायरल

महाराष्ट्र के जलगाँव जिले में कुछ अज्ञात उपद्रवियों द्वारा भुसावल-नंदुरबार पैसेंजर ट्रेन पर पथराव किया गया है। इसको लेकर इलाके में तनाव की स्थिति बन गई है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बुर्का और नमाजी टोपी पहने लोग ट्रेन पर पर पथराव कर रहे हैं। इससे यात्रियों में दहशत का माहौल बन गया। इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है।

इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए @AshwiniSahaya नाम के X हैंडल ने लिखा, “महाराष्ट्र के जलगाँव में शुक्रवार को बुर्का पहनीं महिलाओं और टोपी पहने पुरुषों की भीड़ ने हिंदू श्रद्धालुओं से भरी ट्रेन पर जमकर पथराव किया। रिपोर्ट के अनुसार, सैकड़ों हिंदू श्रद्धालु अमलनेर तालुका के धार में एक पहाड़ी पर जात्रा/उरुस उत्सव के लिए एकत्र हुए थे।”

अश्विनी सहाय ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में आगे लिखा, “वे ट्रेन में चढ़े और पहाड़ी पर उतरने के लिए चेन खींची। जैसे ही वे उतरे, चलती ट्रेन पर पत्थर फेंके गए, जिससे अन्य यात्रियों में दहशत फैल गई, जो डर के मारे चिल्ला रहे थे।”

इस पोस्ट पर जवाब देते हुए मुंबई सेंट्रल रेलवे के डीआरएम ऑफिस ने कहा, “रेलवे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उक्त घटना में अमलनेर के आरपीएफ प्रभारी ने रेलवे अधिनियम 154 के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एएन सीआर 473/2024 दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए अमलनेर जीआरपी को भी घटना की जानकारी दे दी गई है।”

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक के अनुसार, शुक्रवार (12 जुलाई 2024) की सुबह बड़ी संख्या में लोग एक धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए भुसावल से भोरटेक जा रहे थे। उस दौरान ट्रेन में आरपीएफ के जवान भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि ट्रेन में यात्रा कर रहे छह आरपीएफ कर्मियों ने अभी तक घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

घटना 12 जुलाई की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, भुसावल से नंदुरबार जाने वाली पैसेंजर ट्रेन सुबह 10:50 बजे अमलनेर रेलवे स्टेशन से रवाना हुई। इसके करीब 10 मिनट बाद कुछ लोग ट्रेन की चेन खींचकर मलनेर तालुका के धार में पहाड़ी के पास उतर गए और चलती ट्रेन पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस दौरान नमाजी टोपी और बुर्के में भी लोग दिखे।

हालाँकि, विनीत अभिषेक का यह भी कहना है कि इस घटना में किसी को चोट लगने की जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर किसी ने अभी तक लिखित रिपोर्ट नहीं दी है। वायरल वीडियो के आधार पर जीआरपी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

बता दें कि इस तरह की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। अप्रैल 2024 में ग्वालियर से जौरा जा रही MEMU ट्रेन पर पथराव का मामला सामने आया था। घटना उस समय हुई जब ट्रेन ग्वालियर के बिरला नगर स्टेशन पर पहुँची थी। इससे पहले ग्वालियर-मुरैना के पास वंदे भारत एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस पर भी इसी तरह के पथराव की खबरें आई थीं।

NITI आयोग की रिपोर्ट में टॉप पर उत्तराखंड, यूपी ने भी लगाई बड़ी छलाँग: 9 साल में 24 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले

NITI आयोग ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) इंडेक्स 2023-24 जारी की है। देश में विकास का स्तर बताने वाली इस रिपोर्ट में उत्तराखंड टॉप पर है। उत्तर प्रदेश ने भी इस बार बड़ी छलाँग लगाई है और विकास के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। इस रिपोर्ट से अन्य कई तथ्य भी सामने आए हैं।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में बीते सालों के मुकाबले गरीबी तेजी से घटी है जबकि इस दौरान आम लोगों को मिलने वाली शिक्षा, बिजली और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं में सुधार आया है। इस रिपोर्ट में देश के 16 लक्ष्यों पर राज्यों की प्रगति का मुआयना किया गया है। भारत का SDG स्कोर भी इस दौरान 66 से बढ़ कर 71 हो गया है।

उत्तराखंड टॉप, यूपी आगे बढ़ा

इस SDG रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड SDG लक्ष्यों को पाने में देश में सबसे आगे है। उसका SDG स्कोर 100 में से 79 है। ये स्कोर केरल का भी है। SDG के पहले लक्ष्य गरीबी खत्म करने के मामले में उत्तराखंड ने 100 में से 83 का स्कोर किया है। वहीं भुखमरी खत्म करने के मामले में उसका स्कोर 66 है। इसके अलावा लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया करवाने के मामले में उत्तराखंड का स्कोर 100 में से 84 रहा है। शिक्षा के मामले में भी वह 74 के स्कोर के साथ सबसे अग्रणी राज्यों में है।

उत्तराखंड साफ़ पानी और बिजली पहुँचाने के मामले में भी आगे रहा है। ऐसे में उसे SDG के लक्ष्यों के तहत सबसे अधिक काम करने वाले राज्य का दर्जा दिया गया है। जहाँ एक ओर उत्तराखंड ने इस मामले में सबसे शीर्ष पर जगह बनाई है, वहीं देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश ने भी बड़ी छलाँग लगाई है।

SDG की रिपोर्ट में इस बार उत्तर प्रदेश को फ्रंट रनर की श्रेणी में रखा गया है। इससे पहले वह परफ़ॉर्मर की श्रेणी में था। उत्तर प्रदेश देश की रैंकिंग में 18वें स्थान पर पहुँच गया है। उसका SDG स्कोर 67 रहा है। उसने 2021-22 के मुकाबले 4 स्थानों की छलाँग लगाई है और अपने स्कोर में 7 बिन्दुओं का सुधार किया है। उत्तर प्रदेश ने स्वच्छ ऊर्जा के मामले में 100 में से 100 का स्कोर किया है। इसके अलावा स्वच्छ जल पहुँचाने के मामले में 100 में से 94 का स्कोर किया है।

गरीबी भी घटी

SDG इंडेक्स में सामने आया है कि देश में बीते कुछ वर्षों में गरीबी घटी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में गरीबी के मामले में भी कमी आई है। पिछली रिपोर्ट के मुकाबले इस बार की रिपोर्ट में गरीबी हटाने के मामले में SDG स्कोर 72 रही है। इससे पहले यह 64 पर था। 2015-16 में देश में बहुआयामी गरीबी लगभग 24% था, जिसके 2022-23 में 11% आ जाने का अनुमान है। यानी अब देश की लगभग 11% जनता ही बहुआयामी गरीबी को झेल रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2013-14 से 2022-23 के बीच 24 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

आदिल ने आदित्य बनकर हिंदू छात्रा को फँसाया, फिर लिव इन में रहने का बनवाया एफिडेविट: युवती के माता-पिता को भी मुस्लिम बनने के लिए देने लगा धमकी

मध्य प्रदेश के सतना में आदिल खान नाम के मुस्लिम युवक ने आदित्य यादव बनकर एक हिंदू लड़की को अपने जाल में फँसा लिया। इसके बाद लिव इन रिलेशन में रहने का एफिडेविट बनवाकर उसे अपने चंगुल में फँसा लिया। आदिल ने युवती के माता-पिता पर धर्मांतरण करके मुस्लिम बनने के लिए भी धमकाने लगा। शिकायत के बाद पुलिस ने आदिल और उसके परिजनों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

मामला सतना शहर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। शहर के इंदिरा कन्या महाविद्यालय में बीकॉम अंतिम वर्ष में पढ़ने वाली 22 साल की एक हिंदू छात्रा से मोहम्मद आदिल दोस्ती कर ली। इस दौरान लोटन अखाड़ा के पास के रहने वाले आदिल ने अपना नाम आदित्य यादव बताया। धीरे-धीरे दोनों में बातचीत होने लगी और आदिल ने लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसा लिया।

नवंबर 2023 में आदिल ने एक शपथ-पत्र (एफिडेविट) में युवती से लिव इन रिलेशन में रहने की सहमति पर दस्तखत करवा लिया। वह छात्रा के साथ लिव इन में रहने लगा। हालाँकि, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एफिडेविट छात्रा के इस्लाम अपनाने को लेकर है। आदिल ने छात्रा इसे छात्रा के माता-पिता के नंबर पर भेजकर उन्हें भी धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बनने के लिए धमकी देने लगा।

इस घटना की जानकारी जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को हुई तो वे छात्रा के परिजन से मिले और उन्हें शुक्रवार (12 जुलाई 2024) को लेकर सिटी कोतवाली थाने पहुँचे। वहाँ युवती के पिता ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि लगभग 15 दिन पहले पता चला कि उसकी बेटी किसी लड़के से फोन पर लगातार बातचीत करती रहती है।

पिता ने बताया कि जब उसने इस बारे में अपनी बेटी से पूछा तो उसने बताया कि यह लड़का आदित्य यादव है। इसके बाद पिता ने उससे बातचीत करने के लिए मना किया। पिता ने आगे बताया कि 9 जुलाई 2024 को उसकी बेटी परीक्षा देने के लिए कॉलेज गई थी। जब उसका भतीजा बेटी को लेने के लिए कॉलेज पहुँचा तो वह कॉलेज से नहीं निकली।

जब भतीजे ने पूछताछ की तो पता चला कि युवती उस दिन परीक्षा नहीं दी। उसे पता चला कि युवती कॉलेज आते ही कहीं चली गई थी। उसने युवती के एक सहेली से इस बारे में पता किया तो पता चाल कि जिस युवक वह बात करती थी, उसका नाम आदित्य यादव नहीं बल्कि आदिल खान है। उसने झूठा नाम बताकर छात्रा को झाँसे में लिया था।

इसके साथ ही मोहम्मद आदिल खान ने लिव इन रिलेशन का शपथ पत्र बनवा लिया था और उसके परिजनों को भेजा था। वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एफिडेविट छात्रा द्वारा इस्लाम धर्म अपनाकर मुस्लिम बनने से संबंधित था। इसे आदिल खान के पिता ने पीड़ित पिता के भाई के नंबर पर भेजा था।

युवती के पिता की शिकायत के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने इस मामले में आदिल खान और उसके माता-पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 3 (5) तथा धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धारा 3 एवं 4 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

लैंड जिहाद की जिस ‘मासूमियत’ को देख आगे बढ़ जाते हैं हम, उससे रोज लड़ते हैं प्रीत सिंह सिरोही: दिल्ली को 2000+ मजार-मस्जिद जैसी अवैध इस्लामी निर्माणों से मुक्त करवाना है इनका संकल्प

रेलवे स्टेशन, सड़क, जंगल, पहाड़… लैंड जि​हाद का एक विकृत रूप है- मजार। देश की राजधानी हो या सीमावर्ती सुदूर गाँव अचानक उग जाती हैं- मस्जिदें। बतौर नागरिक हमारे लिए यह दृश्य अब असामान्य नहीं रहे। हममें ज्यादातर लोग जब ऐसे दृश्य देखते हैं तो एक मजहब की ‘नीयत’ को कोसते हैं, अपनी व्यवस्था को कोसते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं।

कुछेक बेहद जागरूक लोग ऐसी मजार-मस्जिद की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल देते हैं और अपने ‘कर्तव्यों’ को पूरा समझ लेते हैं। देश के अवैध मजार-मस्जिद की हालत आप इस बात से समझ सकते हैं कि दिल्ली की एक फ्लाईओवर तक पर मजार उगा दी गई। सालों तक इसके वीडियो सोशल मीडिया में चलते रहे। आखिरकार जनवरी 2024 में यह मजार हटाई जा सकी। पर मजहब की ‘मासूमियत’ देखिए उसने यह नहीं बताया कि एक फ्लाईओवर पर मजार उगी कैसे, उसने रोना रोया कि बिना नोटिस के मजार तोड़ दी कैसे!

34 साल के ​प्रीत सिंह सिरोही इस ‘मासूमियत’ से रोज लड़ते हैं। इस मासूमियत के खौफ से घर उनका ‘अस्थायी ठिकाना’ हो गया और अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी को ही ‘स्थायी ठिकाना’ बना लिया है। 2014 में सिरोही ने एक गाय को कटने से बचाया और उसके बाद इसे ही अपने जीवन का मिशन बना लिया।

आज वे दिल्ली को अवैध मस्जिद, दरगाह, कब्रिस्तानों से मुक्त कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं। दिल्ली में अब तक ऐसे 2000 से अधिक अवैध निर्माणों की पहचान करने वाले सिरोही को कुछेक मोर्चों पर सफलता भी मिली है, लेकिन उससे अधिक रफ्तार से उनके खिलाफ साजिशों का सिलसिला भी चल रहा है। सिरोही का दावा है कि ऐसी ही एक साजिश के तहत उन पर, उनके पिता और उनके भाई तक पर केस दर्ज करवाए गए।

उनका कहना है कि इन साजिशों/धमकियों से उनका यह विश्वास और भी दृढ़ हो रहा है कि वे ‘धर्म’ के रास्ते पर हैं। इससे उन्हें दिल्ली को जल्द से जल्द अवैध निर्माण से मुक्त कराने की ऊर्जा मिलती है।

गोमाता के लिए केश नहीं कटवाने का संकल्प

मेरी मुलाकात दिल्ली एनसीआर की एक ऊँची इमारत में प्रीत सिंह सिरोही से हुई। लम्बे केश और दाढ़ी वाले इस युवक ने कुछ कुछ भी खाने से मना कर दिया, क्योंकि उसका कहना था कि वह अन्न नहीं लेते। केवल फलाहार और पानी ग्रहण करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका संकल्प है कि जब तक देश में गौमाता प्लास्टिक खाएगी वे अपने केश नहीं कटाएँगे।

प्रीत सिंह सिरोही सोशल मीडिया पर लगातार दिल्ली की अवैध मस्जिदों और उनके अतिक्रमण की जानकारी और उनके संबंध में लिए गए एक्शन की अपडेट देते रहते हैं। उनका कहना है दिल्ली NCR में वर्तमान में 2000 से अधिक अवैध इस्लामी ढाँचे हैं, जिनसे जमीन मुक्त करवाने का उन्होंने संकल्प लिया है।

कौन हैं प्रीत सिरोही?

खुद को हिंदू बताने वाले प्रीत सिंह सिरोही एक जाट किसान ​परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने बताया कि उनके दादा 1965 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दिल्ली आकर बस गए थे। दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में पढ़ाई करने गए प्रीत अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाए। पढ़ाई बीच में छोड़ने का कारण बताते हुए वे कहते हैं- मैं स्वयं को ऐसी शिक्षा में नहीं झोंकना चाहता था, जिसका उद्देश्य केवल नौकरी पाना हो।

प्रीत सिरोही का कहना है कि वह स्कूल के समय से ही गौसेवा और हिंदुत्व के प्रति आकर्षित हो गए थे। उन्होंने बताया कि उनके दादा लगातार मुग़ल और इस्लामी आक्रान्ताओं की क्रूरता की कहानियाँ उन्हें बताया करते थे। वह महाराजा सूरजमल की कहानियाँ सुनते थे। ऐसे में इन कहानियों का असर उन पर पड़ा और वह हिंदुत्व के काम करने लिए अग्रसर हो गए।

प्रीत सिरोही ने बताया कि एक बार उन्होंने दिल्ली में एक बार गाय कटने से बचाई थी। यह वाकया 2014 का है। सिरोही का कहना है कि जबसे वह इस काम में जुड़े, उन्होंने घर छोड़ दिया। उन्होंने 2019 में एक सेव इंडिया फाउंडेशन भी बनाया था। इसमें कई बड़े लोग शामिल हुए। इसके जरिए उन्होंने धर्मांतरण, गौरक्षा और अवैध मस्जिद के खिलाफ काम करने का प्रयास किए। उन्होंने बताया कि वह इसी समय से दिल्ली में बन रही अवैध मजहबी इमारतों को लेकर जानकारी इकट्ठा करने लगे थे।

प्रीत सिरोही ने आरोप लगाया कि हिन्दुओं के लिए आवाज उठाने पर उन्हें निशाना बनाया गया। उनका आरोप है कि वामपंथी मीडिया ने उनका परिवार बर्बाद कर दिया। उनके परिवार को लेकर झूठी FIR दर्ज करवाई गईं। प्रीत सिरोही का कहना है कि जब उन्होंने हिन्दुओं के लिए आवाज उठाई तो उनके पूरे परिवार को फँसाया गया।

दिल्ली की अवैध इस्लामी निर्माणों के खिलाफ मुहिम

प्रीत सिरोही इन दिनों दिल्ली में अवैध रूप से बनाई गई मस्जिदों, दरगाहों, कब्रिस्तानों के खिलाफ काम कर रहे है। प्रीत का कहना है कि उन्होंने दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में 2000+ अवैध इमारतों की पहचान की है। सिरोही का दावा है कि इन इमारतों को सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाया गया है और कई जगह इनके लिए कोई सरकारी अनुमति नहीं है। वह इनके खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं।

प्रीत सिरोही बताते हैं कि दिल्ली में DDA लगातार किसानों से विकास के लिए जमीन लेती आई है। इन जमीनों में प्लाट बनाए जाते हैं और इन्हें बाद में बेंच दिया जाता है। अधिकांश जगह इन्हीं पर अतिक्रमण हुआ है। प्रीत सिरोही का कहना है किसानों ने अपनी जमीन दिल्ली के विकास के लिए दी थी। इसके बाद इस जमीन पर मकान बनाकर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले मुस्लिमों को दिए गए, ऐसा उनके पुनर्वास के लिए किया गया। लेकिन उन्होंने यहाँ पर अवैध मस्जिदें और दरगाहें बनाना चालू कर दिया।

प्रीत सिरोही ने कहा है कि दिल्ली में 45 ऐसी कॉलोनियाँ हैं जिनमें झुग्गी बस्ती में रहने वालों को मकान दिया गया। प्रीत सिरोही इसका एक उदारहण तुर्कमान गेट का भी बताते हैं। उनका कहना है कि यहाँ से भी मुस्लिम हटाए गए थे और उन्हें DDA ने जमीन दी थी। सिरोही का दावा है कि जिन लोगों को यह मकान और जमीनें मिली, उनमें से 90% मुस्लिम हैं। प्रीत सिरोही का आरोप है कि यह मुस्लिम यहाँ आकर इन जमीनों पर अवैध इबादतखाने बनाने लगे और इन पर रोक लगाने में MCD फेल रही।

सिरोही बताते हैं कि ऐसी कालोनियों में धार्मिक स्थान के लिए जगह छोड़ी जाती है। यदि कॉलोनी के निवासी चाहें तो वह यह जमीन खरीद कर उस पर धार्मिक स्थान बना सकते हैं। उनका आरोप है कि DDA की कई ऐसी ही कालोनियों में मुस्लिमों ने बिना जमीन खरीदे ही मस्जिदें खड़ी कर दी हैं। इसके लिए कोई अनुमति भी नहीं ली गई है।

सिरोही का अभियान: खाली करवाएँगे जमीन

प्रीत सिरोही का कहना है कि वह इन अवैध इमारतों को खाली करवाएँगे। इन खाली हुई जमीनों पर वह स्कूल और अस्पताल बनाने का प्रयास करेंगे। सिरोही ने आरोप लगाया कि दिल्ली के भीतर 125 मदरसे ऐसे हैं जो कि पूर्णतया अवैध हैं और बिना किसी अनुमति के चल रहे हैं। सिरोही का कहना है कि वह इनकी सूची बना चुके हैं, जल्द ही वह इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट जाएँगे। उनका कहना कि उनके पास इन अवैध मदरसों, मस्जिदों और कब्रिस्तानों के जमीन कब्जे से सम्बन्धित पक्के कागज हैं।

सिरोही का कहना है कि वह एक-एक कर इनको कोर्ट में ले जाएँगे। उनका कहना है कि विरोधी पक्ष अपना दावा कोर्ट में साबित नहीं कर पाएगा जबकि वह उस समय से उस जमीन की मिल्कियत की बात साबित कर सकते हैं जब वह किसान के पास थी। सिरोही ने कहा कि उन्हें अलग-अलग स्रोत से इन सभी के बारे में जानकारी जुटाते हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में कई अवैध ढाँचे गिराए जाएँगे। उन्होंने बताया कि MCD इन पर कार्रवाई के लिए तैयार है लेकिन पुलिस बल की कमी के कारण देर हो रही है।

सिरोही ने बताया है कि दिल्ली की मंगोलपुरी के Y ब्लाक, बवाना में स्थित एक मस्जिद और शाहबाद मस्जिद पर अब तक वह कार्रवाई चालू करवा चुके हैं। इसके अलावा वह निकट भविष्य में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कार्रवाई चालू करवाएँगे। वह बताते हैं कि वर्तमान में लगभग 100 अवैध ढांचों के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे हैं।

धमकी मिलती है, लोग साथ नहीं देते

प्रीत सिरोही ने बताया कि उन्हें अवैध मस्जिदों और अतिक्रमण पर काम करने के कारण लगातार धमकियाँ मिलती हैं। वह बताते हैं कि उनकी जान को लगातार खतरा बना हुआ है। उन्हें पाकिस्तान समेत विदेशी नम्बरों से फोन भी आते हैं। कुछ लोग पीछा भी करते हैं।

उन्होंने बताया कि इसी कारण से वह अपनी गाड़ी में ही रहते हैं और घर छोड़ रखा है। उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत दिल्ली पुलिस से भी हुई है लेकिन कार्रवाई ना होने के कारण वह निराश हो गए हैं। प्रीत सिरोही का कहना है कि आने वाले 18 महीने में वह अपनी कार्रवाई और तेज करेंगे।

माथे पर तिलक और हाथ में कलावा का छलावा: आर्यन बनकर मोहम्मद इबनैन ने हिंदू युवती को फँसाया, मंदिर में शादी के एक साल बाद घर से निकाला

बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के दरभंगा में मोहम्मद इबनैन ने आर्यन यादव बनकर एक हिंदू लड़की को अपने झाँसे में ले लिया। इसके बाद उसने आर्य समाज मंदिर भी उससे शादी भी कर ली। खुद को हिंदू दिखाने के लिए इबनैन हाथ में कलावा बाँधता था और माथे पर तिलक भी लगाता था। शादी के कुछ समय उसने मुस्लिम लड़की से निकाह कर हिंदू लड़की को घर से निकाल दिया।

दरभंगा के हायाघाट अंतर्गत रसूलपुर गाँव का रहने वाला मोहम्मद इबनैन दरभंगा में एक हिंदू लड़की के घर में किरायेदार के रूप में रहता था। यहाँ उसने अपना नाम आर्यन यादव बताया था। वह हाथ में कलावा बाँधता था और माथे पर तिलक भी लगाता था। इतना ही नहीं, वह खुद को हिंदू साबित करने के लिए मंदिर जाने का भी दिखावा भी करता था।

किरायेदार के रूप में रहते हुए मोहम्मद इबनैन ने हिंदू युवती से दोस्ती कर ली। उसने अपने झाँसे में लेते हुए उससे प्यार होने की बात कही। कुछ समय के बाद वह लड़की को शादी का झाँसा दिया और उसे लेकर सोनपुर स्थित हरिहरनाथ मंदिर ले गया। साल 2019 में दोनों ने भागकर एक स्थानीय मंदिर में शादी कर ली।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विवाह के एक साल बाद प्रीति को पता चला कि आर्यन का असली नाम मोहम्मद इबनैन है। उसकी अम्मी का नाम मरियम खातून और अब्बू का नाम अबू रब है। मरियम खातून रसूलपुर पंचायत की मुखिया भी रह चुकी है। लड़की का कहना है कि उस समय दोनों दिल्ली में रह रहे थे।

उस समय कोरोना के कारण लॉकडाउन देश भर में लॉकडाउन लग चुका था। लॉकडाउन के कारण उसे वहाँ से निकलने का कोई रास्ता नहीं था। इसके बाद उसने इबनैन पर स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह के लिए दबाव डाला। दोनों ने स्पेशल मैरेज एक्ट के तहत शादी कर ली। इस दौरान वह अपने परिवार का भरण-पोषण करती रही।

इतना ही नहीं, वह मेहनत-मजदूरी के साथ-साथ मोहम्मद इबनैन की पढ़ाई का खर्च भी उठाती रही। युवती का आरोप है कि जब उसके शौहर इबनैन की नौकरी लग गई तो उसका व्यवहार बदल गया। इबनैन और उसके घरवालों ने उस हिंदू युवती को अपने घर से निकाल दिया है। इबनैन ने 1 जुलाई को एक दूसरी मुस्लिम लड़की से निकाह भी कर लिया।

अब यह युवती ने इंसाफ की गुहार लगाई है। वहीं, उसके घरवाले भी उसे अपनाने को तैयार नहीं हैं। युवती ने महिला थाने में जाकर अपनी शिकायत दी है। युवती ने एसएसपी ऑफिस जाकर अधिकारी से मुलाकात भी की और न्याय की माँग की है।

‘आपातकाल तो उत्तर भारत का मुद्दा है, दक्षिण में तो इंदिरा गाँधी जीत गई थीं’: राजदीप सरदेसाई ने ‘संविधान की हत्या’ को ठहराया जायज

इंडिया टुडे के ‘पत्रकार’ और अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस (एआईटीसी या टीएमसी) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष के पति राजदीप सरदेसाई ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा देश पर लगाए गए आपातकाल को जायज ठहराने की कोशिश की है। द लल्लनटॉप के ‘नेता नगरी’ शो में बोलते हुए सरदेसाई ने कहा कि वर्तमान में आपातकाल का मुद्दा उठाने से मौजूदा समस्याओं से ध्यान हट जाएगा।

सरदेसाई ने कहा कि आपातकाल के काले दौर में पूरे देश पर अत्याचार करने के बाद भी कॉन्ग्रेस चुनावों में विजयी हुई, जिसका मतलब है कि लोग आगे बढ़ चुके हैं और एक बार फिर कॉन्ग्रेस को स्वीकार कर चुके हैं।

राजदीप सरदेसाई ने कहा, “उत्तर भारत ने आपातकाल का सबसे ज़्यादा खामियाजा भुगता है। इंदिरा गाँधी और कॉन्ग्रेस 1977 में दक्षिण भारत में जीतने और हावी होने में कामयाब रहीं। हालाँकि, वे महाराष्ट्र में उस तरह से जीत हासिल नहीं कर पाईं, जैसा उन्होंने उत्तर में किया था। अब आप 2024 में युवाओं को बता रहे हैं, जो आज की पीढ़ी के हैं या आपातकाल के बाद पैदा हुए हैं और जिनकी उम्र 18 से 38 साल के बीच है, उन्हें यह सीखना चाहिए कि 25 जून को क्या हुआ था। आप पिछली घटनाओं से राजनीति नहीं कर सकते।”

सरदेसाई ने कहा, “यदि आप अतीत को दोहराते रहेंगे तो आप बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, अग्निवीर, नीट-यूजी पेपर लीक, जम्मू में आतंकवादी हमले, मणिपुर में हिंसा और बिहार में बाढ़ सहित आज की चुनौतियों से कैसे निपटेंगे?”

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आपातकाल के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए 26 जून को “संविधान हत्या दिवस” घोषित किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 11 जुलाई को एक गजट अधिसूचना जारी कर कहा कि भारत सरकार ने 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” घोषित किया है।

अधिसूचना में कहा गया है कि 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई थी, जिसके बाद तत्कालीन सरकार द्वारा सत्ता का घोर दुरुपयोग किया गया और भारत के लोगों पर ज्यादतियाँ और अत्याचार किए गए। इसमें कहा गया है कि भारत के लोगों को भारत के संविधान और भारत के लचीले लोकतंत्र की शक्ति पर अटूट विश्वास है।

अधिसूचना में आगे कहा गया है, “इसलिए, भारत सरकार 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में घोषित करती है, ताकि आपातकाल के दौरान सत्ता के घोर दुरुपयोग के खिलाफ लड़ने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी जा सके और भारत के लोगों को भविष्य में किसी भी तरह से सत्ता के ऐसे घोर दुरुपयोग का समर्थन न करने के लिए प्रतिबद्ध किया जा सके।”

छात्र समझेंगे ‘बहन’ और ‘गुरु’ शब्द का महत्व, ‘नमस्ते’ और ‘जय हिन्द’ से करेंगे अभिवादन: यूपी के स्कूलों में अब आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कार भी

उत्तर प्रदेश के संबल जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नए निर्देश जारी किए हैं, जिसमें महिला शिक्षकों को ‘मैडम’ की जगह ‘दीदी या बहन जी’ कहना होगा, तो पुरुष शिक्षकों को ‘गुरुजी’। बच्चे स्कूलों में शिक्षकों से ‘नमस्ते’ या ‘जय हिंद’ कहकर अभिवादन करेंगे। ये आदेश इसलिए जारी किया गया है, ताकि बच्चे भारतीय संस्कृति को अपनाएँ।

संभल जिले के डीएम के आदेश के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने ये आदेश जारी किया गया है। संभल जिले की बीएसए अलका शर्मा ने बताया कि, भारतीय संस्कृति की झलक सरकारी स्कूलों में दिखे, इसके लिए सभी सरकारी स्कूलों के लिए ये आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत सरकारी स्कूलों की महिला शिक्षिकाओं को अब दीदी अथवा बहन जी कहकर संबोधित किया जाएगा, जबकि पुरुष शिक्षकों के लिए गुरुजी शब्द का इस्तेमाल होगा। इस कदम से बच्चों के भीतर शिक्षकों के प्रति सम्मान बढ़ेगा।

बीएसए अलका शर्मा ने कहा है कि स्कूल के समय में कोई भी शिक्षक पान ,सिगरेट, तंबाकू आदि का इस्तेमाल नहीं करेगा, यदि कोई भी शिक्षक इनका इस्तेमाल करते पाया गया तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं विद्यालय में प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल पूरी तरह से वर्जित रहेगा अगर कोई भी इनका इस्तेमाल करता है तो उस पर अर्थदंड की कार्रवाई की जाएगी।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलका शर्मा ने बताया कि, विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे अपने शिक्षकों को नमस्ते या फिर जय हिंद कहेंगे। उन्होंने बताया कि जय हिंद कहने से बच्चों के मन में राष्ट्र प्रेम की भावना जागृत होगी। इससे बच्चे देश के लिए कुछ सोच पाएँगे, इसके अलावा विद्यालय में आने वाले पुरुष और महिला शिक्षक जींस शर्ट आदि पहन कर नहीं आएँगे बल्कि भारतीय परिधान पहनकर ही स्कूल में आएँगे।

अलका शर्मा ने कहा कि विद्यालय एक मंदिर की तरह होता है इसलिए जैसा आचरण हम मंदिर में करते हैं ऐसा ही आचरण विद्यालय में भी अपनाएँ। बीएसए के आदेश के मुताबिक, विद्यालय के कक्ष में शिक्षक और बच्चे जूते पहन कर नहीं जाएँ, बल्कि जूते या चप्पल कक्ष से बाहर निकाल कर ही भीतर जाएँ। बीएसए के आदेश के मुताबिक, कोई भी अधिकारी किसी भी विद्यालय का निरीक्षण करने जाता है तो वह प्रधानाचार्य की कुर्सी पर नहीं बैठेगा बल्कि शिक्षकों से शिष्टाचार के साथ चर्चा करेगा।