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हिंदू महिला का दोस्तों से गैंगरेप कराने वाले मुस्लिम डॉक्टर को देवबंद पुलिस ने दबोचा: अमन दीक्षित बन की थी 5वीं शादी, फिर जबरन बनाया था मुस्लिम

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में बंगाल की युवती से लव जिहाद करने वाले शादीशुदा मुस्लिम डॉक्टर अहबर हुसैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, उसके साथियों की तलाश की जा रही है। अहबर ने खुद को अमन दीक्षित बताकर एक महिला से हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया था। बाद उसे जबरन इस्लाम कबूल करवा दिया था। महिला ने अहबर पर गैंगरेप का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी थी।

सहारनपुर जिले के देवबंद थाना क्षेत्र में पीड़िता ने 1 जुलाई को शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने बताया था कि वह मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली है। वह पहले से शादीशुदा है और 7 साल की एक बच्ची की माँ भी है। उसने आगे बताया था कि देवबंद का रहने वाला अहबर हुसैन उसे अमन दीक्षित नाम से मिला था और उसे प्यार के जाल में फँसा लिया था।

दरअसल, अहबर कोलकाता में रहता था और वहीं पर उसने पीड़िता से हिन्दू विधि-विधान से शादी भी कर ली थी। पीड़िता ने इसकी फोटो और वीडियो सबूत के रूप में उपलब्ध कराए थे, जो ऑपइंडिया के पास मौजूद है। शादी के बाद आरोपित डॉक्टर पीड़िता को देवबंद ले आया। यहाँ उसने पीड़िता को एक कमरे में बंद कर दिया। यहाँ अहबर महिला के साथ अक्सर रेप करता था।

महिला का आरोप है कि अहबर हुसैन के अपने कुछ दोस्तों से भी उसका रेप करवाया था। जब वह मना करती थी तो उसकी पिटाई की जाती थी। खाना भी ठीक से नहीं दिया जाता था। आरोपित डॉक्टर ने महिला पर नजर रखने के लिए कमरे में CCTV भी लगवा दिया था। इस गैंगरेप में डॉक्टर आरिफ और शहज़ाद के नाम के बताए गए हैं।

देवबंद में ही अहबर हुसैन ने पीड़िता और उसकी 7 वर्षीया नाबालिग बेटी को को जबरन इस्लाम भी कबूल करवा दिया। पीड़िता का दावा है कि वो पश्चिम बंगाल की महिला है, जिसे हिंदी भाषा का ठीक से ज्ञान नहीं है। इसी का फायदा उठाकर अहबर हुसैन से उससे कुछ कागजातों पर दस्तखत करवा लिए थे। इन कागजातों के आधार पर पीड़िता और उसकी बेटी का आधार कार्ड भी बनवा दिए।

पीड़िता ने बताया कि जब तक उसे अहबर हुसैन के मुस्लिम होने का पता चला तब तक वो आरोपित के जाल में फँस चुकी थी। उसके पास इस चंगुल से निकलने का कोई उपाय नहीं था। इस बीच देवबंद के बेबी केयर हॉस्पिटल में बच्चों के डॉक्टर अबहर की पूर्व पत्नी फौजिया भी मीडिया के सामने गई। सहारनपुर की रहने वाली फौजिया ने बताया कि 13 साल पहले उसका निकाह अहबर से हुआ था।

फौजिया ने बताया कि 4 साल पहले अहबर ने उसे बेसहारा छोड़ दिया। अब फौजिया अपनी 2 बेटियों का अकेले पालन-पोषण कर रही हैं। फौजिया का आरोप है कि उसकी जानकारी में उसका शौहर 5 निकाह कर चुका है। उसने आशंका जताई कि अहबर ने चोरी-छिपे कई और निकाह भी किए होंगे।

तहरीर मिलने के बाद पुलिस लगातार इस मामले की जाँच कर रही थी। महिला के बयानों के आधार पर अहबर हुसैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, अब उसके दो दोस्तों डॉक्टर आरिफ और शहजाद की तलाश की जा रही है।

कैंसर से जूझ रहे पूर्व दिग्गज क्रिकेटर और टीम इंडिया के 2 बार कोच रहे खिलाड़ी के लिए BCCI ने बढ़ाया मदद का हाथ, ₹1 करोड़ इलाज के लिए दिए

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच और क्रिकेटर अंशुमान गायकवाड़ कैंसर से जूझ रहे हैं। उनका लंदन में इलाज चल रहा है। उनके इलाज के लिए विश्व विजेता कप्तान कपिल देव ने बीसीसीआई से मदद की अपील की थी, जिसके बाद बीसीसीआई ने उनकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। बीसीसीआई ने अंशुमान गायकवाड़ के इलाज के लिए 1 लाख रुपए जारी किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लड कैंसर से जूझ रहे अंशुमान गायकवाड़ का इलाज इंग्लैंड के किंग्स मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। इसकी जानकारी मिलने के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की तरफ से मदद का हाथ बढ़ाया गया। अंशुमान गायकवाड़ के इलाज के लिए बोर्ड की तरफ से 1 करोड़ रुपये की राशि तुरंत दिए जाने का फैसला लिया गया है।

बीसीसीआई सचिव जय शाह की तरफ से तुरंत एक्शन लिया गया। उन्होंने परिवारजनों से बात करते दिग्गज के तबीयत का हाल पता किया और मदद की घोषणा की। बता दें कि पूर्व कप्तान कपिल देव ने कहा था कि उनके साथी अंशुमान गायकवाड़ कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं। कपिल ने बीसीसीआई से मदद की गुहार लगाई थी। इस खबर के सामने आने के साथ ही बीसीसीआई सचिव ने अंशुमान गायकवाड़ को 1 करोड़ की मदद की घोषणा की।

शानदार रहा है क्रिकेट करियर

अंशुमान गायकवाड़ ने 27 दिसंबर 1974 को कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था। उन्होंने साल 1984 में आखिरी टेस्ट मैच खेला था। गायकवाड़ ने 40 टेस्ट मैचों के अपने करियर में 30.07 की औसत से 1985 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 10 अर्धशतक शामिल रहे। पाकिस्तान के खिलाफ 201 रनों का उनका बेस्ट स्कोर रहा। उन्होंने 14 वनडे मैचों में 20.69 की औसत से 269 रन बनाए।

टीम इंडिया के कोच भी रहे थे गायकवाड़

अंशुमान गायकवाड़ ने क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कोचिंग को अपना करियर बनाया। वह 1997-99 के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच रहे। गायकवाड़ ने गुजरात राज्य उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के लिए भी काम किया और 2000 में इस कंपनी से सेवानिवृत्ति ले ली। जून 2018 में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने गायकवाड़ को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। अंशुमान गायकवाड़ के पिता दत्ता गायकवाड़ ने भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला था।

जिसने चलाई डोनाल्ड ट्रंप पर गोली, उसने दिया था बाइडेन की पार्टी को चंदा: FBI लगा रही उसके मकसद का पता

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गोली मारने वाले 20 साल के थॉमस मैथ्यू क्रुक्स को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पेंसिल्वेनिया के मतदाता डेटाबेस के मुताबिक, क्रूक्स रिपब्लिकन के मतदाता के रूप में पंजीकृत था। क्रूक्स राष्ट्रपति चुनाव में पहली बार मतदान करता, लेकिन उससे पहले ही हमला करने के कारण उसे ढेर कर दिया गया।

क्रूक्स पेंसिल्वेनिया के बेथेल पार्क में रहता था, जो बटलर से लगभग 35 मील (56 किलोमीटर) दक्षिण में है। बटलर वही जगह है, जहाँ ट्रम्प अपनी चुनावी रैली कर रहे थे। यहीं पर क्रुक्स ने उनकी हत्या करने की कोशिश की। हालाँकि, डोनाल्ड ट्रंप बेहद भाग्यशाली रहे और बंदूक की गोली उनके कान को छूती हुई निकल गई और वे बाल-बाल बच गए।

हालाँकि, रिपब्लिकन मतदाता के रूप में पंजीकरण के बावजूद अमेरिका के संघीय चुनाव आयोग ने अपने रिकॉर्ड में पाया है कि क्रुक्स ने जनवरी 2021 में जो बाइडेन वाली पार्टी डेमोक्रेट को 15 अमेरिकी डॉलर का चंदा दिया था। वहीं, हमलावर के पिता मैथ्यू क्रुक्स का कहना है कि जब तक वह अधिकारियों से बात नहीं करेंगे, तब तक वह अपने बेटे के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

एफबीआई का कहना है कि वह हमले के पीछे के मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रही है। क्रुक्स के हमले में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप बच गए, लेकिन रैली में आए एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई है। वहीं, दो अन्य दर्शक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस मामले की जाँच में कई एजेंसियाँ लगी हुई हैं।

थॉमस क्रुक्स ने साल 2022 में बेथेल पार्क हाई स्कूल से स्नातक किया। उसे नेशनल मैथ एंड साइंस इनिशिएटिव से 500 अमेरिकी डॉलर का ‘स्टार अवॉर्ड’ मिला था। न्यूयॉर्क टाइम्स ने 2022 के स्नातक समारोह के वीडियो में क्रुक्स को अपना हाई स्कूल डिप्लोमा सर्टिफिकेट लेते हुए दिखाया गया है। इसमें वह काले रंग के ग्रेजुएशन गाउन में स्कूल के अधिकारी के साथ पोज दे रहा है।

कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने शनिवार (13 जुलाई 2024) को बताया कि क्रुक्स शूटिंग स्थल पर अपना कोई पहचान पत्र लेकर नहीं गया था। एफबीआई के विशेष एजेंट केविन रोजेक ने कहा, “हम अभी तस्वीरों को देख रहे हैं और हम उसके डीएनए की जाँच कर बायोमेट्रिक पुष्टि प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।”

‘आंगनवाड़ी को मदरसा न बनाया जाए’: कहीं बच्चों से पढ़वाया नमाज़ तो कहीं लगवाए ‘या हुसैन’ के नारे, गुजरात के 2 सेंटरों का वीडियो वायरल, कार्रवाई की माँग

जामनगर के बाद अब वडोदरा के करनाली आंगनवाड़ी में बच्चों को नमाज पढ़ाने पर विवाद खड़ा हो गया है। खबर सामने आई है कि हिंदू बच्चे सिर पर रुमाल बाँधकर ईद मना रहे हैं। पूरी घटना पर स्थानीय हिंदू संगठनों ने विरोध जताया है। इतना ही नहीं, बल्कि वडोदरा के विधायक शैलेश मेहता ने भी इस घटना पर विरोध जताया है। विधायक ने घटना की जानकारी राज्य के शिक्षा मंत्री को दी है। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि आंगनवाड़ी केंद्रों को मदरसा न बनने दिया जाए। उन्होंने पूरे मामले में कार्रवाई की माँग की है।

जानकारी के मुताबिक, वडोदरा के दाभोई स्थित करनाली आंगनवाड़ी में बच्चों को नमाज अदा की गई है। पाठ्यक्रम में ईद पर कोई पाठ न होने के बावजूद हिंदू बच्चों को जश्न मनाने का यह तरीका सिखाया जाने पर हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया है। आरोप है कि आंगनबाडी संचालिका ने बच्चों के सिर पर रूमाल बाँधकर ईद मनाई और इस दौरान उन्हें नमाज अदा करना सिखाया। स्थानीय हिंदू संगठनों ने घटना की सूचना शिक्षा प्राधिकरण को दी है और तत्काल कार्रवाई की माँग की है।

पूरे मामले में विधायक शैलेश मेहता का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि करनाली करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। शुक्रवार (12 जुलाई, 2024) को यहाँ एक आंगनवाड़ी में छोटे बच्चों को ईद और नमाज पढ़ाई गई। छोटे-छोटे बच्चों के सिर पर रूमाल बाँधकर प्रार्थना कराने का प्रयास किया गया। विधायक ने कहा कि ये घटना बेहद दुखद है, जैसे ही घटना उनके संज्ञान में आई, उन्होंने कलेक्टर, डीडीओ, दाभोई प्रांतीय अधिकारी आदि से संपर्क किया और उन्हें जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने व्हाट्सएप्प के जरिए राज्य के शिक्षा मंत्री को भी इसकी सूचना दी गई।

उन्होंने आगे कहा, “घटना के बाद हमने मुख्यमंत्री के निजी सचिव को भी सूचित किया। ये मामला बेहद गंभीर है। छोटे बच्चों को दूसरे मजहब की शिक्षा देना बहुत गंभीर मामला है। बच्चे शिक्षा के लिए आंगनबाड़ियों में जाते हैं, वहाँ मजहबी ज्ञान की जरूरत नहीं है। यदि वह धार्मिक शिक्षा प्राप्त करना चाहता है, यदि वह मुस्लिम है, तो वह मदरसे में जाएगा। लेकिन आंगनबाड़ियों को मदरसे में बदलने का चल रहा कार्यक्रम बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि जामनगर की आंगनवाड़ी में भी इस तरह की घटना हुई, यह गंभीर मामला है, सरकार को भी इसे गंभीरता से लेना होगा। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, गुजरात में किसी भी आंगनवाड़ी को मदरसा नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सोमवार को आंगनवाड़ियाँ खुलते ही इस पर कार्रवाई की जाएगी और अगर नहीं हुई तो हम इस मामले को गंभीरता से लेकर गाँधीनगर तक जाएँगे।

गौरतलब है कि इससे पहले जामनगर के सोनलनगर स्थित आंगनवाड़ी में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी। सोशल मीडिया पर आंगनवाड़ी का एक वीडियो वायरल हो गया। इसमें व्यवस्थापक बच्चों को ईद के बारे में पढ़ा रहा था और बच्चों से दुआ पढ़वा रहा था। इतना ही नहीं बच्चों से ‘या हुसैन’ के नारे भी लगवाए गए। व्यवस्थापक बच्चों को बिरयानी बनाकर ईद के दिन सुबह जल्दी उठकर मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए प्रेरित भी कर रहा था। इस घटना के बाद भी हिंदू संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया और कार्रवाई की माँग की।

डोनाल्ड ट्रंप को मारी गई गोली, अमेरिकी मीडिया बता रहा ‘भीड़ की आवाज’ और ‘पॉपिंग साउंड’: फेसबुक पर भी वामपंथी षड्यंत्र हावी

अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में 13 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की कोशिश ने दुनिया को हिलाकर रख दिया। हालाँकि ट्रंप सुरक्षित हैं, लेकिन एक गोली उनके कान में लगी जिससे उनके चेहरे पर खून बहने लगा। घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। यह घटना पेंसिलवेनिया के बटलर में ट्रंप की रैली में हुई। उन्हें तुरंत अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के एजेंटों द्वारा मंच से उतार दिया गया और एक काफिले में ले जाया गया। एक तरफ दुनिया भर के नेताओं के ट्रंप की हत्या के प्रयास की निंदा की, तो अमेरिकी मीडिया ने इस घटना को ‘डाउन प्ले’ किया और इस तरह से रिपोर्ट किया कि कोई ‘घटना’ ही नहीं हुई, बल्कि भीड़ के शोर सरीखी रिपोर्टिंग की। यही नहीं, मेटा एआई जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी ऐसी ही कोशिश की गई।

एसोसिएटेड प्रेस की पहली वायर रिलीज़ में रिपोर्ट लिखी गई, “पेंसिल्वेनिया में भीड़ में तेज़ आवाज़ें गूंजने के बाद डोनाल्ड ट्रंप को मंच से उतार दिया गया”। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट को कई मीडिया हाउस ने इसी तरह की हेडलाइन के साथ छापा।

एबीसी न्यूज की रिपोर्ट , जो एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट पर आधारित थी, में लिखा था, “भीड़ में तेज शोर होने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प को रैली के दौरान सीक्रेट सर्विस द्वारा मंच से उतार दिया गया”।

यूएसए टुडे की हेडलाइन थी , “तेज आवाजों से पूर्व राष्ट्रपति और भीड़ के घबरा जाने के बाद सीक्रेट सर्विस ने ट्रम्प को मंच से हटा दिया”।

एमएसएनबीसी की रिपोर्ट का शीर्षक था , “पेंसिल्वेनिया रैली में जोरदार आवाजें आने के बाद सीक्रेट सर्विस ने ट्रम्प को मंच से उतार दिया।”

अब इसमें बदलाव करते हुए, वाशिंगटन पोस्ट की हेडलाइन दिया गया, “पेंसिल्वेनिया रैली में जोरदार शोर के बाद ट्रम्प को बाहर निकाला गया”।

वाशिंगटन पोस्ट की एक्स पर पोस्ट में लिखा था, “ब्रेकिंग न्यूज़: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पेंसिल्वेनिया में रैली में तेज आवाज के बाद मंच से उतार दिया गया।”

मीडिया हाउस ने हत्या की कोशिश को कमतर आँका, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई पत्रकारों और एक्स यूजर्स ने इस बात पर निराशा जताई कि ट्रंप जिंदा हैं। टिकटॉक के लिब्स ने एक्स पर एक स्क्रीनशॉट शेयर किया जिसमें द स्ट्रेंजर की पत्रकार एशले नेरबोविग ने लिखा, “अमेरिका को फिर से निशाना बनाओ”। बाद में एशले ने अपना अकाउंट लॉक कर दिया और फिर डीएक्टिवेट कर दिया।

टिकटॉक के लिब्स ने हत्यारे के “लक्ष्य” चूक जाने पर वामपंथथियों की रुदाली के दो वीडियो भी साझा किए। टिकटॉक यूजर सेले2टी3 ने हत्या की चूक पर रोना रोया, जिसके बाद उसका टिकटॉक अकाउंट या तो डिलीट कर दिया गया, या फिर बंद कर दिया गया।

एक अन्य TikTok उपयोगकर्ता Super99x ने भी इसी तरह का व्यवहार व्यक्त किया। TikTok पर उसका अकाउंट “निजी” कर दिया गया है।

वैसे, बात सिर्फ मेनस्ट्रीम मीडिया की ही नहीं है, बल्कि मेटा एआई सरीखे प्लेटफॉर्म्स भी डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के प्रयास को डाउनप्ले करते दिखे। मेटा एआई ने डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के प्रयास पूछे गए सवाल पर कहा कि उसके पास इस बारे में कोई सूचना ही नहीं है।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप पर चलाई गई गोली उनके दाहिने कान के ऊपरी हिस्से में लगी। ट्रंप को तुरंत यूएस सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स ने स्टेज से उतारकर अस्पताल पहुँचाया। यूएस सीक्रेट सर्विस ने एक बयान में कहा कि 13 जुलाई को शाम 6:15 बजे बटलर में ट्रंप की कैंपेन रैली के दौरान रैली स्थल के बाहर एक ऊँची जगह से संदिग्ध शूटर ने स्टेज की ओर कई गोलियाँ चलाईं। हमलावर की पहचान पेंसिल्वेनिया के बेथेल पार्क निवासी 20 वर्षीय थॉमस मैथ्यू क्रुक्स के रूप में हुई है। उसने AR-15 प्रकार की अर्धस्वचालित राइफल से कई गोलियाँ चलाईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने उसे मार गिराया।

इस घटना में रैली में शामिल एक व्यक्ति की मौत हो गई तथा दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

गौरलत है कि पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप निश्चित रूप से अमेरिका के वामपंथी उदारवादियों के लिए ‘काँटे’ की तरह हैं। उनकी आवाज़ दबाने के लिए उनके सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने सहित अनगिनत प्रयास किए गए हैं। आने वाले महीनों में अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं और इस तरह के प्रयास केवल उनके समर्थन आधार को मजबूत करने वाले हैं, कुछ ऐसा जो ट्रम्प के विरोधियों को अभी तक समझ में नहीं आया है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व जज रोहित आर्य BJP में हुए शामिल, ओडिशा हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश चितरंजन दास बोले- मैं भी RSS का सदस्य

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश रोहित आर्य रिटायरमेंट के लगभग तीन महीने बाद शनिवार (13 जुलाई 2024) को भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने प्रदेश भाजपा कार्यालय जाकर सदस्यता ली। वहीं, कलकत्ता और ओडिशा हाई कोर्ट में जज रह चुके चितरंजन दास ने कहा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें काम करने में कोई कठिनाई नहीं आई।

रोहित आर्य साल 1984 में एडवोकेट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। साल 2003 में इन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सीनियर एडवोकेट नियुक्त किया गया। उन्हें 2013 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और 2015 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई। वह 27 अप्रैल, 2024 को सेवानिवृत्त होंगे।

गौरतलब है कि साल 2020 में जस्टिस आर्य ने एक महिला की शील भंग करने के आरोपित एक व्यक्ति को इस शर्त पर जमानत दी थी कि वह पीड़िता को राखी बाँधेगा। साल 2021 में जस्टिस आर्य ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोपित कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी और नलिन यादव को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

वहीं, कलकत्ता और ओडिशा हाई कोर्ट में जज रह चुके चितरंजन दास ने एक इंटरव्यू में कहा कि वे आरएसएस के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि किसी को अपनी राजनीतिक पहचान छुपाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश के रूप में रहते हुए उन्होंने संविधान के तहत काम किया और उनकी व्यक्तिगत विचारधारा आड़े नहीं आई।

इतना ही नहीं, चितरंजन दास ने यह भी कहा कि RSS में हर विचारधारा के लोग जुड़े हैं। यह संगठन को किसी विचारधारा के लिए बाध्य नहीं करता। उन्होंने कहा, “कई लोग इसे अछूत संगठन मानते हैं, लेकिन इसने किसी की माइंड वॉशिंग की कोशिश नहीं की। यह लोगों का व्यक्तित्व निखारता है और उन्हें अच्छा नागरिक बनाता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस कोई क्रांतिकारी संगठन नहीं है। इंदिरा गाँधी को भी आरएसएस की मदद की जरूरत पड़ी थी। चीन के साथ युद्ध के समय भी आरएसएस ने काफी काम किया था। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने गलत जानकारी देकर इस संगठन की छवि धूमिल करने की कोशिश की।

बताते चलें कि जस्टिस चितरंजन दास ने अपने एक फैसले में कहा था कि महिलाओं को भी अपनी कामेच्छा पर भी काबू रखना चाहिए। उन्होंने कहा था कि कामेच्छा पर काबू नहीं रखने से कई बार महिलाओं को समाज की नजर में गिरना पड़ता है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी कि इस तरह की टिप्पणी से बचना चाहिए।

10 साल का इस्कॉन, 30 साल का युवक और न्यूयॉर्क में पहली रथयात्रा… जब महाप्रभु जगन्नाथ का प्रसाद ग्रहण कर डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा ‘हाँ’, हिन्दुओं का दिया साथ

पेंसिलवानिया के बटलर में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड J ट्रम्प पर एक रैली के दौरान हमला हुआ, जिसमें वो बाल-बाल बच गए। इस हमले में हमलावर समेत 2 लोगों की मौत हो गई। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति व इस साल होने वाले चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प के दाएँ कान में जख्म हो गया और खून बहने लगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। आपको ये जान कर हैरानी होगी कि डोनाल्ड ट्रम्प और जगन्नाथ यात्रा के बीच कनेक्शन है।

भारत में जगन्नाथ महाप्रभु की रथयात्रा चल रही है, जिसके तहत श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को मंदिर से जनसामान्य के बीच लाया जाता है। लाखों लोग इस रथ को खींचते हैं और 10 दिनों तक भगवान गुंडिचा मंदिर में भक्तों को दर्शन देते हैं। ओडिशा के पुरी में होने वाली इस यात्रा के सामानांतर पूरे भारत में अलग-अलग शहरों व मंदिरों में रथयात्रा निकाली जाती है। भारत ही नहीं, विदेशों में भी भक्त यात्रा निकालते हैं। ऐसी ही एक यात्रा से डोनाल्ड ट्रम्प का कनेक्शन है।

ये वाकया 1976 का है, जब इस्कॉन (अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ) संस्था ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शहर न्यूयॉर्क में 3 भव्य रथों को लेकर भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकालने का निर्णय लिया। मैनहटन में ही तब ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ हुआ करता था, सितंबर 2001 में अमेरिकी आतंकियों ने ध्वस्त कर दिया। इस्कॉन के भक्तों को मैनहटन में कोई बड़ी जगह चाहिए थी, जहाँ रथों का निर्माण हो सके और फिर से यात्रा वाले मार्ग पर ले जाया जा सके।

मैनहटन में संपत्ति होना बहुत बड़ी बात मानी जाती है, कई रईसों के लिए भी ये संभव नहीं हो पाता। और इस्कॉन को तो ऐसी संपत्ति चाहिए थी, जहाँ खुली जमीन हो। टोसन कृष्णा दास ने तब ये जिम्मेदारी सँभाली। इन्होंने पेंसिलवानिया रेलरोड यार्ड्स को इस जगह के लिए चुना। एक तरह से वहाँ ये एकमात्र जगह थी, जहाँ ये काम हो सकता था। बिना किसी रिजर्वेशन के ही इस्कॉन ने उस कॉर्पोरेट कंपनी से संपर्क किया, जिसके पास उस संपत्ति का स्वामित्व था।

कंपनी से निवेदन किया गया कि रथों के निर्माण के लिए कुछ दिन के लिए वो एरिया कृष्णभक्तों को दी जाए। हालाँकि, उस कंपनी ने तब कहा कि ये जमीन बिकने वाली है और करार के तहत अब इसके नए मालिकों के ऊपर है कि वो ये जमीन देते हैं या नहीं। इस जमीन के नए मालिक डोनाल्ड J ट्रम्प ही थे, जो इसके 41 वर्षों बाद राष्ट्रपति बनने वाले थे। टोसन ने एक प्रस्ताव लिखा और उन्हें भेजा। उन्हें तब आश्चर्य हुआ, जब कहा गया कि वो ‘फॉर सीजंस रेस्टॉरेंट’ पहुँचे।

वहीं पर इस जमीन की खरीद-बेच संबंधित प्रक्रियाओं के अलावा दस्तावेजों का आदान-प्रदान होना था। वहीं पर डोनाल्ड ट्रम्प ने लिखित में इस्कॉन को उस जमीन के इस्तेमाल की अनुमति दी। वो प्रस्ताव को रद्द कर सकते थे, लेकिन उन्होंने रथयात्रा के लिए इस जगह को देने का विकल्प चुना। उन्होंने ऐसा क्यों किया, किसी को नहीं पता। आज जब डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या का प्रयास हुआ और वो बाल-बाल बचे हैं, इस्कॉन के के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमण दास इसे दैवीय हस्तक्षेप के रूप में देखते हैं।

जब की ये घटना है तब डोनाल्ड ट्रम्प मात्र 30 वर्ष के थे और इस्कॉन अपना 10वाँ स्थापना दिवस मना रहा था। इस तरह ये न्यूयॉर्क में भी पहली रथयात्रा बन गई। इससे पहले अन्य कंपनियों ने इस्कॉन को मना कर दिया था, वो इन्सुरेंस से लेकर अन्य चीजों को लेकर आशंकित थे। जब इस्कॉन के लोग डोनाल्ड ट्रम्प के पास प्रस्ताव लेकर गए थे, तब महाप्रसाद भी साथ लेकर गए थे। उनके सेक्रेटरी ने तो इस्कॉन के प्रतिनिधियों को कह भी दिया था कि वो इस तरह के प्रस्तावों को स्वीकार नहीं करते, आप उनके सामने इसे रख सकते हैं लेकिन उनका उत्तर ‘ना’ ही होगा।

3 दिन बाद उनके सेक्रेटरी ने फोन कर के कहा कि पता नहीं क्या हुआ, उन्होंने पत्र पढ़ा, प्रसाद खाया और फिर इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद किसी तरह पुलिस से भी अनुमति ली गई। पुलिस चीफ ने भी अनुमति पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि वो ये किसलिए कर रहे हैं, लेकिन ठीक है। इस तरह डोनाल्ड ट्रम्प का नाम रथयात्राओं के इतिहास में अंकित हो गया। शायद भगवान जगन्नाथ के पुण्यकार्य में सहभागी बनने का ही प्रतिफल है कि एक खतरनाक हमले में भी डोनाल्ड ट्रम्प जीवित बच गए हैं।

रियासी आतंकी हमला: लोकल पशु व्यापारी हाकम दीन ने आतंकियों को दिया खाना और रहने की जगह, देश से गद्दारी की कीमत सिर्फ ₹5000

जम्मू-कश्मीर के रियासी में हिंदू तीर्थयात्रियों की बस पर 9 जून 2024 को आतंकवादियों ने हमला किया था, जिसमें नौ तीर्थयात्री मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। इस हमले की जाँच के दौरान खुलासा हुआ है कि स्थानीय पशु व्यापारी हाकम दीन (45) ने आतंकियों की मदद की थी। हाकम दीन ने महज 5000 रुपए में अपने जमीर को गिरवी रखते हुए देश के साथ गद्दारी की थी और आतंकवादियों को न सिर्फ रसद बल्कि सिर छिपाने की जगह भी मुहैया कराई थी।

अब जाँच एजेंसियों ने रियासी हमले में शामिल रहे 2 और आतंकवादियों के स्केच तैयार किए हैं, जो हाकम दीन से पूछताछ कर तैयार किए गए हैं। अब इस मामले की जाँच जम्मू-कश्मीर पुलिस की जगह एनआईए को सौंप दी गई है। हाकम दीन राजौरी जिले का रहने वाला है। उसे पुलिस ने 20 जून को गिरफ्तार किया था।

बताया जाता है कि वह माता वैष्णो देवी मंदिर में कुली का काम करता था, लेकिन तीन साल पहले उसने नौकरी छोड़ दी और पशु व्यापारी बन गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मोहिता शर्मा ने एनआईए को जांच सौंपे जाने से पहले हाकम को “आतंकियों का मुख्य सहयोगी” माना था। गिरफ्तारी के बाद हाकम दीन से कई एजेंसियों ने पूछताछ की।

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्र के हवाले से बताया, “पहली बार 1 जून को शाम 5.30 बजे आतंकवादी उसके घर आए थे और उन्होंने तीन लोगों के लिए खाना बनाने के लिए कहा था। इसमें से एक नाम नाम ‘मंजूर भाई’ कहा था और अपने साथियों के लिए जंगल में खाना लेकर गया था। एनआईए की पूछताछ में हाकम दीन ने खुलासा किया था कि इस हमले के पीछे लश्कर के आतंकवादी थे। सूत्र ने बताया, “7 जून को तीनों आतंकवादी उसके घर फिर से आए और पौनी नाम की जगह की रेकी के लिए कहा। यहीं पर आतंकियों ने बस पर हमला किया था। इस दौरान तीनों आतंकवादी साढ़े तीन घंटे उसके घर रहे। उन्होंने हाकम से बसों के आने जाने की जानकारी पूछी और हमले की जगह भी चिन्हित की।”

आतंकवादी तीसरी बार 8 जून को उसके घर चाय पीने आए और हमले के बारे में चर्चा दी। सूत्र ने बताया, “वे खाना लेकर चले गए। 9 जून को वे अपने चिह्नित स्थानों पर वापस आए और तीर्थयात्रियों को ले जाने वाली एक खास बस का इंतजार करने लगे। उन्होंने सबसे पहले ड्राइवर को निशाना बनाया और बस खाईं में गिर गई, इसके बाद भी आतंकवादी बस पर गोलीबारी करते रहे।”

हमले के बाद आतंकियों ने हाकम को 5,000 रुपए दिए और भागने में उसकी मदद माँगी। आतंकियों ने हाकम दीन का आधार कार्ड भी ले लिया। इस मामले में सुरक्षाकर्मियों का मानना है कि आतंकी सीमा पार करके आए थे और अभी भी जंगलों में छिपे हुए हैं। दोनों आतंकियों का स्केच तैयार कर लिया गया है और आतंकियों की तलाश जारी है।

रियासी में हिंदू तीर्थयात्रियों की बस पर आतंकवादी हमला

गौरतलब है कि 9 जून को शिव खोरी मंदिर से कटरा में माता वैष्णो देवी मंदिर जा रही 53 सीटों वाली बस पर आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में नौ लोग मारे गए और 41 घायल हो गए। इस गोलीबारी के कारण बस रियासी में सड़क से उतरकर गहरी खाई में गिर गई। रियासी हमले के बाद घाटी में दो और आतंकी हमले हुए, कठुआ आतंकी हमला और डोडा आतंकी हमला। 13 जून को जम्मू-कश्मीर के रियासी के कांडा इलाके में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए आतंकवादी हमले के सिलसिले में 50 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। एसएसपी ने यह भी बताया कि ज़्यादा सबूत जुटाने और छिपे हुए आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अरनास और माहौर तक तलाशी अभियान को बढ़ा दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर 15 जून को रियासी आतंकी हमला मामले की जाँच अपने हाथ में ले ली थी। 9 जुलाई को यह खबर आई कि एनआईए ने पाया है कि पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आका इस हमले में शामिल थे। एनआईए ने हकीम दीन से पूछताछ की, जिसने हमले में लश्कर का हाथ होने का खुलासा किया।

ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की ऑडी सीज, ऊटपटांग माँगों के बचाव में रिटायर्ड IAS बाप: रिवॉल्वर लहराने पर FIR के बाद लाइसेंस रद्द करने का नोटिस

ट्रेनिंग के दौरान ही VIP सुविधाओं के लिए नखरा करने वाली IAS पूजा खेडकर की करस्तानियों का उनके पिता दिलीप खेडकर ने बचाव किया है। दिलीप ने कहा कि उनकी बेटी को बेवजह परेशान किया जा रहा है। वहीं, जिस निजी ऑडी गाड़ी पर लालबत्ती लगाकर पूजा चला करती थीं, उसे पुणे पुलिस ने सीज कर लिया है। इसके अलावा, लाइसेंसी रिवॉल्वर का गलत इस्तेमाल करने पर पुलिस ने पूजा की माँ मनोरमा खेडकर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

इंडिया टुडे टीवी के साथ एक विशेष बातचीत में दिलीप खेडकर ने अपनी बेटी का पक्ष लिया। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी ने कुछ भी गलत नहीं किया है। क्या एक महिला के लिए बैठने के लिए जगह माँगना गलत है? मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इसकी जाँच के लिए एक समिति नियुक्त की गई है। मेरा मानना ​​है कि कोई जानबूझकर इसे मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।”

जब उनसे पूछा गया कि वह कौन है जिसके बारे में उन्हें लगता है कि यह विवाद पैदा हो रहा है तो दिलीप ने किसी का नाम बताने से इनकार कर दिया। पूजा ने अपनी विकलांगता जाँच के लिए दिल्ली के एम्स में क्यों उपस्थित नहीं हुईं, इस सवाल पर दिलीप ने कहा, “यूपीएससी के सख्त नियम हैं, जिसमें अस्पताल में 20-25 लोगों का मेडिकल बोर्ड शामिल होता है, जिससे फर्जी दस्तावेज जमा करना असंभव हो जाता है।”

पूजा खेडकर ने क्रीमी लेयर श्रेणी के तहत आवेदन किया था या नहीं, इस बारे में पूछे जाने पर दिलीप खेडकर ने कहा, “हम समिति के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत करेंगे। कानूनी कार्यवाही चल रही है। इसलिए इस पर और टिप्पणी करना अनुचित होगा। सब कुछ नियमों के अनुसार किया गया था। कोई गलत काम नहीं हुआ है।”

पूजा की लालबत्ती वाली ऑडी सीज

पूजा खेडकर जिस ऑडी गाड़ी से पुणे कलेक्ट्रेट जाती थीं, उसे पुलिस ने सीज कर दिया है। खेडकर परिवार के ड्राइवर ने ट्रैफिक पुलिस स्टेशन जाकर ऑडी की चाबी पुलिस को सौंप दी। पुलिस का कहना है कि खेडकर परिवार ने अभी तक गाड़ी के कागजात नहीं सौंपे हैं।

पूजा खेडकर इसी निजी ऑडी कार का प्रयोग करती थीं। इस पर लाल-नीली बत्ती लगी हुई थी। इसके साथ ही इस पर ‘महाराष्ट्र सरकार’ भी लिखा हुआ था। ट्रेनी IAS द्वारा गाड़ी पर लाल-नीली बत्ती लगाने और ‘महाराष्ट्र सरकार’ लिखने पर विवाद हो गया था। इसके बाद पुणे ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें नोटिस भेजा था।

किसानों पर रिवॉल्वर लहराने पर पूजा की माँ को नोटिस

पूजा खेडकर की माँ मनोरमा खेडकर को लाइसेंसी रिवॉल्वर के दुरुपयोग के लिए पुणे पुलिस ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मनोरमा खेडकर अहमदनगर के भालगाँव की सरपंच भी हैं। उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह हाथ में रिवॉल्वर लेकर किसानों को धमकाती हुई दिख रही थीं। पुलिस ने इसका संज्ञान लिया है।

इस संंबंध में पुलिस नोटिस देने के लिए उनके घर गई थी, लेकिन नोटिस लेने के लिए वहाँ कोई उपलब्ध नहीं था। इसके बाद नोटिस को उनके आवास पर चिपका दिया गया। नोटिस में कहा गया है कि मनोरमा खेडकर बताएँ कि उनकी बंदूक का लाइसेंस क्यों रद्द नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें 10 दिनों के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है।

पूजा के माता-पिता के खिलाफ मुकदमा

किसानों को पिस्टल लेकर धमकाती हुई पूजा की माँ का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ है। इसके बाद उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मनोरमा खेडकर पर मुलशी में जमीन कब्जाने का आरोप है। वीडियो में मनोरमा खेडकर को किसानों को धमकाते हुए देखा गया था। यह मामला लगभग एक वर्ष पुराना है।

किसानों का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिशें कीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें लौटा दिया था। पूजा के नाम पर 22 करोड़ रुपए की जमीन और 2 फ्लैट्स दर्ज हैं। 24 वर्षीय पूजा खेडकर का UPSC में 841 रैंक आया था। उनके पिता दिलीप IAS से रिटायर्ड हैं। कहा जा रहा है कि उनके पास लगभग 110 एकड़ जमीन है।

पुणे ग्रामीण पुलिस ने पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर और माँ मनोरमा खेडकर सहित 7 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 504 और 506 के साथ ही आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। इस तरह जाँच के दायरे में पूजा सहित उनके माता-पिता भी आ गए हैं।

पूजा खेडकर के खिलाफ जाँच

दरअसल, पूजा ने खुद को दिव्यांग और OBC बताकर UPSC परीक्षा दी थी। अब केंद्र सरकार इस मामले की जाँच करेगी। केंद्र सरकार ने एक अधिकारी को इसकी जाँच सौंप दी है। अगर गलत तथ्य पेश करने का आरोप सही पाया जाता है तो उन पर कार्रवाई होगी। ‘डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एन्ड ट्रेनिंग (DoPT)’ के एडिशन सेक्रेटरी मनोज द्विवेदी इस मामले की जाँच करेंगे।

दस्तावेजों की जाँच तक इसकी सत्यता की पुष्टि की जाएगी। जिस अथॉरिटी ने उन्हें दस्तावेज दिए हैं, पता लगाया जाएगा कि उसने बारीकी से जाँच की थी या नहीं। साथ ही पूजा खेडकर AIIMS में मेडिकल टेस्ट के लिए क्यों नहीं उपस्थित हुईं, इसे भी खँगाला जा रहा है। इससे न सिर्फ उनकी नौकरी जा सकती है, बल्कि धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज किया जा सकता है।

‘अकाल तख़्त’ को स्वर्ण मंदिर में चाहिए 3 खालिस्तानी आतंकियों की तस्वीरें, शहीद बता कर निज्जर का भी महिमामंडन

‘अकाल तख़्त’ के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कुछ ऐसी माँग कर दी है, जो अलगाववाद को बढ़ावा देने वाला है। उन्होंने ‘शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC)’ से माँग की है कि खालिस्तानी आतंकियों हरदीप सिंह निज्जर, परमजीत सिंह पंजवार और और गजिंदर सिंह की तस्वीरें स्वर्ण मंदिर परिसर स्थित सेन्ट्रल सिख म्यूजियम में लगाने के लिए कहा है। बता दें कि ये तीनों ही भारत में ‘वॉन्टेड’ रहे हैं। इन्होंने भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ा।

जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने SGPC और ‘दल खालसा’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ये बातें कहीं। ये आयोजन गुरुद्वारा शहीद गंज बाबा गुरबक्श सिंह में हुआ था। इस सभा में गजिंदर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। बता दें कि गजिंदर सिंह वही शख्स है, जिसके नेतृत्व में खालिस्तानी आतंकियों ने 1981 में इंडियन एयरलाइन्स के विमान का अपहरण किया था। हाईजैक करने के बाद प्लेन को पाकिस्तान के लाहौर ले जाया गया था।

सबसे खतरनाक खालिस्तानी आतंकी रहे जनरैल सिंह भिंडराँवाले की रिहाई के लिए इनलोगों ने ऐसा किया था। अब ‘अकाल तख़्त’ ने इन तीनों खालिस्तानी आतंकियों को बलिदानी बताया है। वहीं पंजवार ‘खालिस्तानी कमांडो फ़ोर्स (KCF)’ का मुखिया था, जिसे लाहौर में 6 मई, 2023 को मार डाला गया था। वहीं भारत सरकार द्वारा आतंकी घोषित हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा स्थित ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में हत्या कर दी गई थी। कनाडा ने इसका दोष भारत पर मढ़ा था।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस आरोप के बाद दोनों देशों में रिश्ते तल्ख़ भी हो गए थे। भारत ने इन आरोपों को नकार दिया था। गजिंदर सिंह को लेकर ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि उन्होंने सिख सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया, सरकारों के सामने झुके नहीं। उन्होंने उसे तख़्त द्वारा सम्मान में तमगा देने की भी बात कही। 1995 में पाकिस्तान की जेल से निकलने के बाद से वो भटकता रहा था। SGPC के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी भी इस समारोह में मौजूद थे।