Homeराजनीतिमध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व जज रोहित आर्य BJP में हुए शामिल, ओडिशा...

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व जज रोहित आर्य BJP में हुए शामिल, ओडिशा हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश चितरंजन दास बोले- मैं भी RSS का सदस्य

कलकत्ता और ओडिशा हाई कोर्ट में जज रह चुके चितरंजन दास ने एक इंटरव्यू में कहा कि वे आरएसएस के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि किसी को अपनी राजनीतिक पहचान छुपाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश के रूप में रहते हुए उन्होंने संविधान के तहत काम किया और उनकी व्यक्तिगत विचारधारा आड़े नहीं आई।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश रोहित आर्य रिटायरमेंट के लगभग तीन महीने बाद शनिवार (13 जुलाई 2024) को भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने प्रदेश भाजपा कार्यालय जाकर सदस्यता ली। वहीं, कलकत्ता और ओडिशा हाई कोर्ट में जज रह चुके चितरंजन दास ने कहा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें काम करने में कोई कठिनाई नहीं आई।

रोहित आर्य साल 1984 में एडवोकेट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। साल 2003 में इन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सीनियर एडवोकेट नियुक्त किया गया। उन्हें 2013 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और 2015 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई। वह 27 अप्रैल, 2024 को सेवानिवृत्त होंगे।

गौरतलब है कि साल 2020 में जस्टिस आर्य ने एक महिला की शील भंग करने के आरोपित एक व्यक्ति को इस शर्त पर जमानत दी थी कि वह पीड़िता को राखी बाँधेगा। साल 2021 में जस्टिस आर्य ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोपित कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी और नलिन यादव को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

वहीं, कलकत्ता और ओडिशा हाई कोर्ट में जज रह चुके चितरंजन दास ने एक इंटरव्यू में कहा कि वे आरएसएस के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि किसी को अपनी राजनीतिक पहचान छुपाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश के रूप में रहते हुए उन्होंने संविधान के तहत काम किया और उनकी व्यक्तिगत विचारधारा आड़े नहीं आई।

इतना ही नहीं, चितरंजन दास ने यह भी कहा कि RSS में हर विचारधारा के लोग जुड़े हैं। यह संगठन को किसी विचारधारा के लिए बाध्य नहीं करता। उन्होंने कहा, “कई लोग इसे अछूत संगठन मानते हैं, लेकिन इसने किसी की माइंड वॉशिंग की कोशिश नहीं की। यह लोगों का व्यक्तित्व निखारता है और उन्हें अच्छा नागरिक बनाता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस कोई क्रांतिकारी संगठन नहीं है। इंदिरा गाँधी को भी आरएसएस की मदद की जरूरत पड़ी थी। चीन के साथ युद्ध के समय भी आरएसएस ने काफी काम किया था। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने गलत जानकारी देकर इस संगठन की छवि धूमिल करने की कोशिश की।

बताते चलें कि जस्टिस चितरंजन दास ने अपने एक फैसले में कहा था कि महिलाओं को भी अपनी कामेच्छा पर भी काबू रखना चाहिए। उन्होंने कहा था कि कामेच्छा पर काबू नहीं रखने से कई बार महिलाओं को समाज की नजर में गिरना पड़ता है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी कि इस तरह की टिप्पणी से बचना चाहिए।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करो’: माँग जब जिद में बदल जाए, प्रदर्शन जब राजनीति की टूल बन जाए तो भीड़तंत्र को लोकतंत्र पर हावी...

कॉकरोचों को पता ही नहीं चला कि कब उनके नीचे की जमीन पर बैटिंग कोई और कर रहा है, और वो भी उस खेल में शामिल हो गए।

जौहर यूनिवर्सिटी के फायदे के लिए बना ₹150 करोड़ का फ्लाईओवर, आजम खान ने कौड़ियों के भाव जमीनें हड़पीं: रामपुर के ग्रामीणों ने ऑपइंडिया...

लोगों का आरोप है कि आजम खान अपने घर से सीधे और बिना किसी जाम के यूनिवर्सिटी पहुँचने के लिए इस ₹150 करोड़ के प्रोजेक्ट को पास करवाया था।
- विज्ञापन -