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CM योगी पहुँच रहे हाथरस, लाशों और तड़पते लोगों को देख हॉस्पिटल के सुरक्षाकर्मी की हार्ट अटैक से मौत: फरार हुआ ‘भोले बाबा’ (असली नाम – सूरजपाल)

उत्तर प्रदेश में ‘भोले बाबा’ उर्फ़ ‘नारायण साकार हरि’ के आयोजन में 130 से भी अधिक श्रद्धालुओं की हुई मौतों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जिले में पहुँचे रहे हैं। घटना के अगले दिन बुधवार (3 जुलाई, 2024) को वो घटनास्थल का दौरा करेंगे और अस्पताल जाकर पीड़ितों से मिलेंगे। भगदड़ में हुई मौतों के बाद कई लाशें तो कई अधमरे लोगों को मेडिकल कॉलेज में ले जाया गया। वहाँ तैनात 32 वर्षीय रवि कुमार इतनी लाशों और तड़पते लोगों को देख कर सदमे में आ गए और हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई।

इस हादसे की एक पीड़िता किशोरी ने बताया कि उसकी माँ घायल है, वो खुद मरते-मरते बची है। ज्योति ने बताया कि भीड़ काफी बढ़ गई थी, 3 घंटे तक सत्संग चला था। पंडाल से निकलने का रास्ता काफी संकरा था, ऐसे में लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे और भगदड़ मच गई। कई लोग बेहोश होकर जमीन पर गिरे हुए थे। हाथरस प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर 05722227041 जारी किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहत व बचाव कार्य के संबंध में CM योगी आदित्यनाथ से बात की है, साथ ही इस घटना पर दुःख जताया है।

हाथरस में हुए इस सत्संग में न सिर्फ उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, एटा, आगरा, मैनपुरी, इटावा, फिरोजाबाद, कासगंज, बल्कि दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा जैसे आसपास के राज्यों से भी लोग पहुँचे हुए थे। पंडाल में उमस थी। जल्दी-जल्दी में श्रद्धालु बाहर निकलने लगे। SDM की तरफ से इस ‘प्राइवेट आयोजन’ की अनुमति दी गई थी। आसपास के जिलों से डॉक्टर बुलाए जा रहे हैं। कीचड़ से सनी चप्पलें और कपड़े इस हादसे की भयावहता बयाँ कर रहे हैं।

हाथरस में ‘भोले बाबा’ उर्फ़ ‘नारायण साकार हरि’ के कार्यक्रम के आयोजकों की सूची

सिकंदराराऊ के अस्पताल में लोग अपनों की तलाश करते रहे। पुलिस ने आयोजकों की सूची और उनका विवरण भी जारी किया है। ‘भोले बाबा’ उर्फ़ ‘नारायण साकार हरि’ का असली नाम सूरजपाल है और वो एटा के बहादुर नगरी का रहने वाला है। फ़िलहाल वो फरार हो गया है और उसका फोन भी ऑफ आ रहा है। CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार घटना के तह तक जाएगी। गुलाबी ड्रेस में बाबा की अपनी ‘फ़ौज’ भी होती है जो ट्रैफिक देखती है, रामघाट रोड में ये आयोजन हुआ था।

31 साल बाद गिरफ्तार हुआ 1993 के मुंबई दंगों का आरोपित सैयद नादिर शाह अब्बास खान, कोर्ट से जमानत लेकर हो गया था गायब

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) शहर में 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी ढाँचे के गिराए जाने के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे। इन दंगों में करीब 900 लोग मारे गए थे। इन दंगों के एक आरोपित सैयद नादिर शाह अब्बास खान को 31 साल की फरारी के बाद मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उस पर हत्या की कोशिश का केस है।

बताया जा रहा है कि वो दंगों के समय गिरफ्तार हुआ था, लेकिन उसके बाद जमानत पाकर वो फरार हो गया था और किसी अदालती कार्यवाही में शामिल नहीं हुआ था, जिसके बाद उसके खिलाफ लंबे समय से गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन वो पुलिस को लगातार चकमा दे रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैयद नादिर शाह अब्बास खान (65) को रफी अहमद किदवई मार्ग थाने की टीम ने सोमवार को शिवडी इलाके से पकड़ा। वो शहर में दंगों के दौरान हत्या की कोशिश एवं अवैध रूप से एकत्र होने के मामले में आरोपित है। अधिकारी ने बताया कि खान को पहले पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और वह जमानत पाने के बाद कभी भी अदालत की कार्यवाही में शामिल नहीं हुआ।

अधिकारी के मुताबिक, अदालत ने खान को फरार घोषित किया था और उसके खिलाफ गैर ज़मानती वारंट जारी किया था। पुलिस मध्य मुंबई के शिवडी स्थित उसके घर कई बार गई, लेकिन वह नहीं मिला। आखिरकार पुलिस को उसके एक रिश्तेदार के मोबाइल फोन की जाँच के दौरान उसके ठिकाने का सुराग मिला। 29 जून को रफी अहमद किदवई मार्ग थाने को सूचना मिली कि खान अपने घर जा रहा है, जिसके बाद जाल बिछा कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारी ने बताया कि खान को 1993 मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की आगे की जाँच जारी है।

बता दें कि छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिराए जाने के बाद मुंबई में दंगे भड़क गए थे। इन दंगों में करीब 900 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद मुंबई में 13 जगहों पर सीरियल ब्लास्ट भी हुए थे, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। मुंबई उसके बाद से लेकर आतंकियों और दंगाइयों के निशाने पर रहा था।

हाथरस हादसे से पहले हुईं 13 ऐसी घटनाएँ, जब भगदड़ में बिछ गईं लाशें: हर बार वही कहानी, अधूरे इंतजामों और प्रशासनिक नाकामी का दोषी कौन?

उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक धार्मिक जुटान के दौरान भगदड़ मचने से 100 से अधिक लोगों की जान चली गई, तो दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। इस तरह के हादसे कोई नए नहीं हैं, बल्कि अतीत में ऐसे कई हादसे सामने आए हैं, जिसमें धार्मिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक जुटानों के दौरान भगदड़ जैसी घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जानें गँवानी पड़ी हैं।

धार्मिक आयोजनों से जुड़े ऐसे हादसों में एक हादसा साल 2005 में महाराष्ट्र के मंधारदेवी मंदिर में हुआ था, जिसमें 340 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी, तो साल 2008 में राजस्थान के चामुंडा देवी मंदिर में हुए एक हादसे में कम से कम 250 लोगों की जान चली गई थी। यही नहीं, साल 2008 में ही एक हादसा हिमाचल प्रदेश के नैना देवी मंदिर में हुआ था, जिसमें 162 लोगों की मौत हुई थी।

ऐसे ही हादसों पर एक नजर…

31 मार्च 2023: मध्य प्रदेश के इंदौर में राम नवमी के मौके पर एक मशहूर मंदिर में पुरानी बावड़ी (कुआँ) के आसपास लोगों की भारी भीड़ जमा थी। यहाँ हवन कार्यक्रम के दौरान बावड़ी की स्लैब गिर गई थी, जिसमें कम से कम 36 लोगों की मौत हो गई थी।

1 जनवरी 2022: जम्मू-कश्मीर में विश्वविख्यात वैष्णो देवी मंदिर क्षेत्र में भगदड़ मचने की वजह से कम से कम 12 लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे में दर्जनों लोग घायल भी हुए थे। भारी भीड़ की वजह से फैली अव्यवस्था के चलते ये भगदड़ की ये घटना हुई थी।

14 जुलाई 2015 : आँध्र प्रदेश के राजमुंदरी जिले में ‘पुष्करम’ पर्व के दौरान बड़ा हादसा हो गया था। ये हादसा गोदावरी नदी के किनारे बने घाट पर हुआ था, जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई थी, तो 20 लोग घायल हो गए थे।

3 अक्टूबर 2014 : पटना के गाँधी मैदान में दशहरे की भीड़ जमा थी। इसी दौरान भगदड़ मचने से बड़ा हादसा हो गया था, जिसमें 32 लोगों की मौत हो गई थी, तो 26 लोग घायल हो गए थे।

13 अक्टूबर 2013: मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित रतनगढ़ के मंदिर में नवरात्रि के जश्न के दौरान बड़ा हादसा हुआ था। भगदड़ मचने से 115 लोगों की मौत हो गई थी, तो 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

19 नवंबर 2012: पटना के अदालत घाट पर आयोजित छठ पूजा कार्यक्रम के दौरान भगदड़ मचने से 20 लोग घायल हो गए थे, तो 2 दर्जन लोग घायल हो गए थे। ये भगदड़ एक पुल से टूटने की अफवाह से मची थी।

8 नवंबर 2011 : हरिद्वार की हर की पौड़ी घाट पर मचे भगदड़ में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई थी।

14 जनवरी 2011 : केरल के इडुक्की जिले में विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से लौट रहे श्रद्धालुओं पर पुलमेडू के पास जीप चढ़ गई थी, जिसके बाद मचे भगदड़ में कम से कम 104 लोगों की मौत हो गई थी, तो 40 से अधिक लोग घायल हो गए।

4 मार्च 2010 : उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में कृपालू महाराज द्वारा बाँटे जा रहे मुफ्त कपड़े और खाने के पाने के लिए पहुँचे लोगों के बीच भगदड़ मच गई थी। ये भगदड़ कृपालू महाराज के राम जानकी मंदिर में मची थी, जिसमें 63 लोगों की मौत हो गई थी।

30 सितंबर 2008: राजस्थान के जोधपुर में चामुंडा देवी मंदिर के पास बम की अफवाह से भगदड़ मच गई थी, जिसमें 250 लोगों की मौत हो गई थी, तो 60 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

3 अगस्त 2008: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में नैना देवी मंदिर के पास चट्टान खिसकने की अफवाह फैलने से भदगड़ मच गई थी। इस हादसे में 162 लोगों की मौत हो गई, तो 47 लोग घायल हो गए थे।

25 जनवरी 2005 : महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित मंधारदेवी के मंदिर में लगने वाले सालाना जलसे में भगदड़ मच गई थी, जिसमें 340 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, तो सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। ये हादसा सीढ़ियों पर नारियल फोड़ने की वजह से हुई फिसलन के चलते हुआ था।

27 अगस्त 2003: महाराष्ट्र के नासिक जिले में आयोजित कुँभ मेला के दौरान स्नान के समय फैली भगदड़ में 39 लोगों की मौत हो गई थी, तो करीब 140 लोग घायल हो गए थे।

अखिलेश यादव लगाते हैं जयकारा, IB/सेना में होने की चर्चा: कौन है हाथरस हादसा वाला बाबा, जिसकी पाँव के नीचे दबी मिट्टी लेने के लिए होती है खींचतान

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक सत्संग के दौरान भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में 130 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हो गई है जबकि सैकड़ों अन्य घायल भी हुए हैं। जिस सत्संग में यह भगदड़ मची है उसमें कथावाचक के तौर पर भोले भाबा का नाम सामने आ रहा है। भोले बाबा को नारायण साकार हरि के नाम से भी जाना जाता है। कुछ लोग उन्हें कासगंज के पटियाली वाले बाबा भी कहते हैं। नारायण साकार हरि लोगों को ‘मानव धर्म’ अपनाने की सलाह देते हैं। उनके अधिकतर अनुयायी पश्चिम उत्तर प्रदेश से हैं। अखिलेश यादव भी नारायण साकार हरि के भक्त हैं।

नारायण साकार हरि उर्फ़ भोले बाबा का पूर्व में इतिहास क्या है ये उनके असली नाम की तरह रहस्य ही है। कुछ लोग और मीडिया की रिपोर्ट्स उनको इंटेलिजेंस ब्यूरो का पूर्व अधिकारी बताती हैं जबकि कुछ जगहों पर उन्हें भारतीय सेना का रिटायर्ड सैनिक लिखा गया है। कई लोग उन्हें पुलिस का सेवानिवृत जवान भी बताते हैं। कहा जाता है कि रिटायरमेंट के बाद नारायण साकार हरि अलीगढ़, एटा और आसपास के जिलों में लोगों के समूहों को सम्बोधित करने लगे। धीरे-धीरे उनका प्रचार बढ़ता गया जिस से लोगों की तादाद में बढ़ोतरी होने लगी।

कथित भोले बाबा उर्फ़ नारायण साकार हरि के आयोजनों से पहले आयोजक पोस्टरों और पदयात्रा आदि से इलाके में खूब प्रचार करते हैं। वो ‘मानव धर्म’ की बात करते हैं। उनका अर्श वाक्य है, “मानव धर्म सत्य था, है और रहेगा।” उनके पोस्टरों के ऊपर नारायण साकार हरि की समूचे ब्रह्माण्ड में जय-जयकार लिखी जाती थी। उनके प्रवचनों में ‘सोचकर देखो साथ क्या जाएगा’ जैसी लाइनें अक्सर दोहराई जाती थीं। उनके अनुयायी आयोजित होने वाले सम्मेलनों को ‘मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम’ कह कर बुलाते हैं।

कोरोना काल में भी तमाम रोकटोक के बावजूद भोले बाबा के सत्संग जारी थे। तब उन्होंने 50 लोगों की अनुमति माँगी थी लेकिन इसके बावजूद 50 हजार से अधिक लोगों का जमावड़ा लगा दिया था। नारायण साकार हरि खुद को सोशल मीडिया से दूर रखते हैं। उनका आधिकारिक एकाउंट अभी तक किसी भी प्लेटफॉर्म पर नहीं है। उनके अनुयायियों की अच्छी तादाद मूलतः पश्चिम उत्तर प्रदेश में हैं। हालाँकि, उनके सम्मेलनों में पूरे उत्तर प्रदेश एक अलावा उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से भी लोगों के आने का दावा किया जाता है।

साकार नारायण हरि का जन्म जाटव परिवार में हुआ था। उनके अनुयायियों में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक हैं। अखिलेश यादव साल 2023 में भोले बाबा के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। तब उन्होंने इस कार्यक्रम की तस्वीरें न सिर्फ अपने ‘X’ हैंडल पर शेयर की थीं बल्कि कैप्शन में ‘नारायण साकार हरि की सम्पूर्ण ब्रह्मांड में सदा-सदा के लिए जय जयकार हो’ भी लिखा था। इसी दौरान अखिलेश यादव ने भोले बाबा की सभा में उमड़ी भीड़ को भी दिखाया था। भीड़ में सिख समुदाय के लोग भी दिख रहे थे।

बताया जाता है कि नारायण साकार हरि का सत्संग खत्म होने के बाद उनके पैरों के नीचे दबी मिट्टी को छूने और हासिल करने के लिए खींचतान होती थी। कई बार आयोजक लोगों को लाइन में लग कर नारायण साकार हरि के पैरों से दबी मिट्टी देते थे।

रिफा बनीं रिया सागर जबकि महक खानम हो गईं सोनम सक्सेना, बरेली में एक ही दिन में 2 मुस्लिम लड़कियों की घर वापसी: देवताओं को साक्षी मान कर चुने हिन्दू जीवनसाथी

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 2 मुस्लिम लड़कियों ने घर वापसी कर के हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया है। यहाँ के अगस्त्य मुनि आश्रम में महक खानम वैदिक विधि-विधान से अब सोनम सक्सेना बन गईं हैं। वहीं रिफा अब रिया नाम की लड़की अब रिया सागर नाम से जानी जाएगी। इन दोनों लड़कियों ने अपने-अपने हिन्दू प्रेमियों से विवाह भी कर लिया है। महक और रिफा ने हवन-पूजन किया और हिन्दू देवी-देवताओं के जयकारे लगाए। घर वापसी का यह कार्यक्रम सोमवार (1 जुलाई, 2024) को सम्पन्न हुआ।

घर वापसी करने वाली पहली लड़की रिफा बी हैं। वली हसन की बेटी 22 वर्षीया रिफा मूल रूप से बरेली की ही रहने वाली हैं। रिफा को उनके अब्बा ने कक्षा 8 तक ही पढ़ाया। रिफा के मुताबिक स्कूल आते-जाते उनकी मुलाकात अक्सर राहुल सागर से होती थी। राहुल सागर अनुसूचित जाति (SC वर्ग) से हैं। एक दिन राहुल सागर ने रिफा से अपने प्यार का इजहार किया। रिफा ने भी राहुल के प्रपोजल को कबूल कर लिया। इसके बाद दोनों लोग अक्सर मिलने लगे। कुछ ही दिनों बाद दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया। रिफा ने आगे बताया कि उनके घर वालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था।

रिफा पर पाबंदियाँ कायम कर दी गईं। इधर राहुल सागर लगातार रिफा से शादी के प्रयास में लगे थे। आखिरकार 1 जुलाई को राहुल बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम पहुँचे। रिफा भी जैसे-तैसे वहाँ पहुँचने में सफल रहीं। इस प्रेमी जोड़े ने अपने सभी जरूरी कागजात आश्रम के पुजारी पंडित के के शंखधर को दिखाए। रिफा ने बताया कि उन पर कोई जोर-जबरदस्ती नहीं है। आखिरकार दोनों का विवाह अगत्स्य मुनि आश्रम में सम्पन्न हो गया। विवाह से रिफा ने स्वेच्छा से घर वापसी की। घर वापसी के बाद उनका नाम रिया सागर पड़ा। शादी के बाद खुद को बेहद खुश बताते हुए रिफा अपने पति के घर चली गईं।

मेहक खानम बनीं सोनम सक्सेना

सोमवार (1 जुलाई, 2024) को बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में मेहक खानम ने भी हिन्दू धर्म में घर वापसी की है। शुद्धिकरण के बाद मेहक खानम का नाम सोनम सक्सेना पड़ा। 22 वर्षीया सोनम ने अपने प्रेमी अंश सक्सेना से आश्रम में वैदिक विधि-विधान से शादी रचाई। मेहक खानम मूल रूप से UP के रामपुर की रहने वाली हैं। उनके अब्बा इरशाद अहमद काम के सिलसिले में बरेली बस गए थे। मेहक सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं। वो इंस्टाग्राम पर रील भी बनाती हैं। इसी के साथ रोजगार के तौर पर मेहक साडी में डिजाइन भी बनाने का काम करती थीं।

मेहक ने बताया कि अंश सक्सेना अक्सर उनके पड़ोस में आया करता था। यहाँ दोनों ने एक दूसरे को देखा और पसंद करने लगे। कुछ दिनों की मुलाकात के बाद मेहक और अंश ने शादी का फैसला किया। मेहक के परिजनों को हिन्दू लड़के से रिश्ता मंजूर नहीं था। मेहक के घर से निकलने आदि पर पाबन्दी लगा दी गई। सोमवार (1 जुलाई) को मेहक अपने प्रेमी के साथ अगत्स्य मुनि आश्रम पहुँची। दोनों ने खुद को बालिग़ बताते हुए अपने कागजात पंडित के के शंखधर को दिए। महक शुद्धिकरण करवा कर सोनम सक्सेना बनीं। विवाह के बाद वो अपने पति के साथ ससुराल चली गईं।

तीन तलाक और हलाला को मानती हैं गलत

घर वापसी करने वाली रिफा बी और मेहक तीन तलाक और हलाला को गलत परम्परा मानती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब वो हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा करेंगी। विवाह के दौरान दोनों लड़कियों ने वैदिक विधि-विधान से हवन-पूजन किया और हिंदू देवताओं के जयकारे लगाए। पंडित के के शंखधर ने दोनों नव दंपतियों को सदा सुखी रहने का आशीर्वाद दिया।

हाथरस में 130 की मौत: ‘भोले बाबा’ के सत्संग में उमस के कारण बेकाबू हुई भीड़, कथावाचक को निकालने के लिए लोगों को एक तरफ रोका था

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक सत्संग के दौरान मची भगदड़ में लगभग 130 लोगों की मौत हो गई है जबकि कई अन्य घायल हो गए हैं। मृतकों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। भगदड़ की वजह सत्संग करने वाले बाबा का काफिला निकलने के लिए एक तरफ की भीड़ को रोकना बताया जा रहा है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर गहरा दुःख जताया है। उन्होंने प्रदेश के मुख्य सचिव और DGP को तत्काल घटनास्थल पर पहुँच कर राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

‘दैनिक जागरण’ के मुताबिक, घटना हाथरस के सिकंदराराऊ थाना क्षेत्र की है। मंगलवार (2 जुलाई, 2024) को यहाँ एटा रोड के गाँव फुलराई में एक बड़े सत्संग का आयोजन था। इस आयोजन में हजारों लोग शामिल हुए थे। सत्संग खत्म होने के बाद भीड़ अपने-अपने घरों की तरफ निकल पाई। इस दौरान कथावाचक भी बाहर निकलने लगे। उनको बाहर निकालने के लिए एक तरफ की भीड़ को रोक दिया गया। जिस तरफ रोक लगाई गई उधर पीछे से लोगों का दबाव आगे खड़े श्रद्धालुओं पर बढ़ना शुरू हो गया।

बताया जा रहा है कि थोड़ी देर बाद माहौल भगदड़ में बदल गया। हजारों लोगों की भीड़ को वहाँ मौजूद व्यवस्थापक और सुरक्षा तंत्र सँभाल नहीं पाया। भीड़ में शामिल लोगों ने एक दूसरे को कुचलना शुरू कर दिया। इस भगदड़ की वजह से कार्यक्रम स्थल पर घुटन और उमस का माहौल हो गया। खासकर महिलाएँ और बच्चे इस भगदड़ के सबसे पहले शिकार बने। हालात सँभालने के लिए प्रशासन भारी फ़ोर्स के साथ पहुँचा। हालाँकि तब तक लगभग 100 लोगों की जान जा चुकी थी। हालाँकि सरकारी तौर पर अभी 60 मौतों की पुष्टि हुई है।

इस घटना में सैकड़ों लोग घायल भी हुए हैं जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घायलों में कई की हालत गंभीर है इसलिए मृतकों की संख्या में बढोत्तरी होने की आशंका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर दुःख प्रकट किया है। उन्होंने मुख्य सचिव मनोज सिंह व DGP प्रशांत कुमार को फ़ौरन हाथरस पहुँच कर राहत और बचाव कार्यों की देखरेख करने का निर्देश दिया है। हादसे की जाँच के लिए ADG आगरा और अलीगढ़ मंडल के कमिश्नर को नामित कर दिया गया है। जाँच रिपोर्ट 24 घंटों के भीतर सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

‘इकोसिस्टम को अब उसी की भाषा में मिलेगा जवाब’: संसद में PM मोदी ने किया याद – दलितों से अन्याय के कारण आंबेडकर ने नेहरू कैबिनेट से दिया था इस्तीफा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (2 जुलाई, 2024) को संसद में राहुल गाँधी के प्रोपेगंडा का जवाब देते हुए लोकसभा अध्यक्ष से माँग की कि उन पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अब उन्हें बालक-बुद्धि मान कर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके पीछे इरादे नेक नहीं हैं बल्कि गंभीर खतरे के हैं। उन्होंने देशवासियों को जागरूक करते हुए कहा कि इनलोगों का झूठ हमारे देश के नागरिकों की विवेक-बुद्धि पर आशंका व्यक्त करता है, एक तमाचा मारने की निर्लज्ज हरकत है।

पीएम मोदी ने इस दौरान आपातकाल का भी जिक्र करते हुए कहा कि सरकारों को गिराया गया, मीडिया को दबाया गया, देश पर क्रूरता का पंजा चलाया गया। उन्होंने बताया कि संविधान के एक-एक शब्द के खिलाफ ये हरकतें थीं। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि इनलोगों ने देश के दलितों के साथ घोर अन्याय किया। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि बाबासाहब आंबेडकर ने कॉन्ग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता के कारण नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा दिया था।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने नेहरू से कैबिनेट से इस्तीफा देते हुए कहा था, “मैं सरकार द्वारा अनुसूचित जातियों की उपेक्षा पर अपने अंदर उत्पन्न आक्रोश को रोक नहीं सका।” पीएम मोदी ने याद दिलाया कि बाबासाहब आम्बेडकर का राजनीतिक राजनीतिक जीवन खत्म करने के लिए नेहरू ने पूरी ताकत लगा दी थी। पहले षड्यंत्रपूर्वक उन्हें चुनाव में हरवाया गया, उन्होंने बाबासाहब के पराजय का जश्न भी मनाया।

उन्होंने एक अन्य दलित नेता बाबू जगजीवन राम का भी जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें उनका हक़ नहीं दिया गया, आपातकाल के बाद उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना थी लेकिन इंदिरा गाँधी ने पक्का किया कि वो किसी भी हाल में पीएम न बनें। पीएम मोदी ने एक किताब का जिक्र करते हुए बताया कि इंदिरा गाँधी ने कहा था कि अगर जगजीवन राम प्रधानमंत्री बन गए तो वो कभी नहीं हटेंगे। उन्होंने चौधरी चरण सिंह के साथ भी कॉन्ग्रेस के व्यवहार का जिक्र करते हुए सवाल उठाए।

उन्होंने कॉन्ग्रेस के दलित अध्यक्ष सीताराम केसरी के अपमान का भी जिक्र किया और कहा कि इसी कॉन्ग्रेस ने ऐसा किया था। उन्होंने कॉन्ग्रेस को शुरू से आरक्षण का घोर विरोधी बताते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिख कर आरक्षण का विरोध किया था। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर ‘मंडल कमीशन’ की रिपोर्ट वर्षों तक ठण्डे बक्से में डालने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि राजीव गाँधी का सबसे लंबा भाषण आरक्षण के खिलाफ था, जो आज भी संसद के रिकॉर्ड में उपलब्ध है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और गंभीर विषय की चर्चा की – हिन्दुओं के अपमान की। उन्होंने याद दिलाया कि 131 वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में कहा था, मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से आता हूँ, जिसने पूरे विश्व को सहिष्णुता और वैश्विक स्वीकृति सिखाई है। उन्होंने हिन्दुओं पर हिंसक होने का आरोप लगाए जाने को लेकर कहा कि ये देश शताब्दियों तक इसे नहीं भूलेगा। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव के दौरान ‘शक्ति के विनाश’ की बात की गई थी, पूरा बंगाल माँ काली की समर्पित भाव से उपासना करता है।

उन्होंने कॉन्ग्रेस पर ‘हिन्दू आतंकवाद’ शब्द गढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि इनके साथी हिन्दू धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया से करते हैं और ये ताली बजाते हैं – देश ये माफ़ नहीं करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत इनके पूरे इकोसिस्टम ने हिन्दू समाज एवं परंपरा, संस्कृति एवं विरासत को नीचा दिखाने, गाली देने, अपमानित करने और मजाक उड़ाने को फैशन बना दिया है। पीएम मोदी ने राहुल गाँधी द्वारा भगवान शिव का पोस्टर संसद में लहराए जाने पर भी आवाज़ उठाई।

उन्होंने कहा कि निजी राजनीतिक स्वार्थ के लिए ईश्वर के रूपों का इस तरह से इस्तेमाल को माफ़ नहीं किया जा सकता, ईश्वर का हर रूप दर्शन के लिए होता है बल्कि प्रदर्शन के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज सोचे कि ये कोई संयोग है या किसी प्रयोग की तैयारी है। पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सेनाएँ, हमारे डिफेन्स सेक्टर में इतने रिफॉर्म हो रहे हैं, उन्हें आधुनिक बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में CDS का पद बनने के बाद समन्वय सशक्त हुआ है।

उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय सेना को सुधार न होने के कारण नुकसान झेलना पड़ा, ये मुद्दा सुरक्षा से जुड़ा है इसीलिए वो इस पर अधिक कुछ नहीं कह रहे। लगातार बदलती तकनीक की दुनिया में पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सेनाओं को इसके हिसाब से निभाना है, गालियाँ खाकर और झूठे आरोप सह कर भी हम मुँह पर ताला लगा कर काम कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि नेहरू के समय देश की सेनाओं को कमजोर बना दिया गया था, कॉन्ग्रेस ने लाखों-करोड़ों रुपयों के घोटाले किए।

जीप घोटाला, पनडुब्बी घोटाला, बोफोर्स घोटाला की बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश की ताकत को बढ़ने से इन सबने रोका। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय सेना के पास कॉन्ग्रेस के समय बुलेटप्रूफ जैकेट भी नहीं होते थे। न सिर्फ सत्ता में रहते बल्कि विपक्ष में जाने के बाद भी ये भारतीय सेना को कमजोर करने के प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि फाइटर जेट्स एयरफोर्स तक न पहुँच पाए, इसीलिए राफेल का विरोध किया गया, राफेल के छोटे-छोटे खिलौने बना कर उड़ाए गए और सेना का मजाक बनाया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सवाल दागा कि कॉन्ग्रेस पार्टी किसके फायदे के लिए भारतीय सेना को कमजोर करने में लगी हुई है? उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा सरकार ने OROP (वन रैंक, वन पेंशन) लागू किया, जबकि कॉन्ग्रेस ने इस पर गुमराह किया। उन्होंने बताया कि कोविड के दौरान भी पूर्व सैनिकों को रुपए दिए गए। उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे पर भी कहा कि परीक्षा की व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जा रहे हैं, कड़े कानून बनाए गए हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “बीते कुछ वर्षों में हमने विकास को अपना सबसे बड़ा संकल्प बनाया है। हमने भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनाने का संकल्प लिया है। आज़ादी के इतने वर्षों बाद पीने का शुद्ध पानी पहुँचाने के लिए हमने ‘हर घर जल’ का संकल्प लिया। हर गरीब को आवास देना हमारा संकल्प है। जैसे-जैसे भारत विश्व में ताकतवर बन रहा है, हमारी सेनाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का हमारा संकल्प है। ये हरित-युग है। 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के लिए हम आधुनिक इंफ़्रास्ट्रक्चर बनाना है, वैश्विक बेंचमार्क तक जाना है।”

पीएम मोदी ने बताया कि भारत में इंफ़्रास्ट्रक्चर पर जितना निवेश हुआ है उतना कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि रोजगार व स्व-रोजगार के अवसर बन रहे हैं, उसका विस्तार हो और उसे नया रूप-रंग दिया जाए, स्कील डेवलपमेंट हो, नौजवानों का भविष्य सँवरे – उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 18 वर्षों में प्राइवेट सेक्टर में जॉब क्रिएशन में सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना है। पीएम मोदी ने कहा कि डिजिटल पेमेंट्स को लेकर UPI भारत की सफलता की बड़ी कहानी है। पीएम मोदी ने लाहा, “मैं आज इकोसिस्टम को बता देना चाहता हूँ, उसकी हर साजिश का जवाब उसी की भाषा में मिलेगा।”

SEBI ने भेजा नोटिस तो हिंडनबर्ग ने कोटक को भी लपेटा, धड़ाम हुए बैंक के शेयर: अडानी को बदनाम कर के की थी मोटी कमाई

अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनवर्ग रिसर्च ने साल 2023 में अडानी ग्रुप के खिलाफ एक रिपोर्ट पब्लिश की थी, जिसके बाद अडानी ग्रुप को काफी नुकसान हुआ था। इसका असर भारत के बाजार पर भी पड़ा था। अब इस मामले में सेबी ने अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है और उससे सीधे-सीधे कुछ सवाल पूछे हैं। खास बात ये है कि सेबी ने जो सवाल हिंडनबर्ग रिसर्च ग्रुप से पूछे हैं, हिंडनबर्ग ने उनके जवाब सीधे तौर पर न देकर घुमाकर अपनी बात रखी है, साथ ही अब अडानी ग्रुप के साथ ही एक और ग्रुप-कोटक महिंद्रा ग्रुप को लपेटे में लेने की कोशिश की है। जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई पड़ा है, और कोटक महिंद्रा ग्रुप के साथ ही अडानी के शेयरों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

अडाणी मामले में घसीटा कोटक ग्रुप का नाम

अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग ने सेबी के कारण बताओ नोटिस पर कहा है कि उनसे अडानी ग्रुप के स्टॉक को शॉर्ट करने के लिए अपने निवेशक के एक ऑफ शोर फंड स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया और इस फंड स्ट्रक्चर को बनाने और इसकी देखरेख करने का काम कोटक महिंद्रा बैंक का था। बता दें कि कोटक मंहिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक हैं। ये एक प्राइवेट बैंक और ब्रोकरेज फर्म है।

हालाँकि हिंडनबर्ग ने ये नहीं बताया कि उसने अपनी शॉर्ट सेलिंग जिस इन्वेस्टर के जरिए की, वो कौन है, बल्कि उसने सेबी के नोटिस का सीधे जवाब देने की जगह कोटक महिंद्रा ग्रुप को बीच में घसीटा, साथ ही आरोप भी लगा दिया कि शॉर्ट सेलिंग का सबसे ज्यादा फायदा कोटक महिंद्रा ग्रुप ने उठाया। हिंडरबर्ग रिसर्च ने सेबी पर ही आरोप मढ़ते हुए कह दिया कि सेबी उसे ‘डरा’ रही है और कोटक ग्रुप को बचा रही है।

हिंडनबर्ग ने बताया है कि उसे 46 पन्नों का नोटिस 27 जून को मिला था। उसने सेबी के नोटिस वाले मेल का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। हिंडनबर्ग ने लिखा, “सेबी ने हम पर अधिकार क्षेत्र का दावा करने के लिए खुद को उलझा लिया, लेकिन इसके नोटिस में स्पष्ट रूप से उस पार्टी का नाम नहीं बताया गया जिसका भारत से असल में संबंध है- कोटक बैंक, भारत के सबसे बड़े बैंकों और ब्रोकरेज फर्मों में से एक, जिसकी स्थापना उदय कोटक ने की थी, इस कंपनी ने हमारे निवेशक पार्टनर के लिए एक ऑफ शोर फंड स्ट्रक्चर बनाया और इसकी देखरेख का काम किया, इस स्ट्रक्चर का इस्तेमाल हमारे निवेशक पार्टनर ने अडानी के खिलाफ़ बेटिंग में किया. लेकिन सेबी ने कोटक का नाम नहीं लिया। उसने केवल के-इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड का नाम दिया और ‘कोटक’ नाम को ‘केएमआईएल’ के शॉर्टफॉर्म नाम से छिपा दिया।”

हिंडनबर्ग ने नोटिस का स्क्रीनशॉट शेयर किया है।(फोटो साभार : hindenburgresearch)

अपने ब्लॉग पोस्ट में हिंडनबर्ग ने लिखा, “भारत में सबसे शक्तिशाली लोगों की ओर से भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी को उजागर करने वालों को चुप कराने तथा डराने का प्रयास है।” हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा, “क्या हिंडनबर्ग ने अडानी को नुक़सान पहुँचाने के लिए दर्जनों कंपनियों के साथ काम किया, जिससे करोड़ों डॉलर कमाए? नहीं…हमारे पास एक निवेशक पार्टनर थे और लागतों के बाद हम अदानी ‘शॉर्ट’ पर ‘ब्रेक-ईवन’ से ऊपर नहीं आ पाएँ।” उसने आगे लिखा, “आज तक अडानी हमारी रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का जवाब नहीं दे पाया है। इसके बजाय उन्होंने हर सवाल जो हमने उठाए उसे नजरअंदाज करते हुए मीडिया में हमारी रिपोर्ट का खंडन किया है।”

केएमआईएल का पूरा नाम है कोटक महिंद्रा इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड है। हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया कि सेबी के कोटक का नाम न लेने के पीछे की वजह शायद बिजनेसमैन को जाँच के दायरे से बचाना हो सकती है।

हिंडनबर्ग ने लिखा, “बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने व्यक्तिगत रूप से सेबी की 2017 की कॉरपोरेट गवर्नेंस समिति का नेतृत्व किया था। हमें संदेह है कि सेबी द्वारा कोटक या कोटक बोर्ड के किसी अन्य सदस्य का उल्लेख न करना शायद एक और शक्तिशाली भारतीय व्यवसायी को जाँच की संभावना से बचाने के लिए किया गया है, एक ऐसी भूमिका जिसे सेबी अपनाता हुआ प्रतीत होता है।”

इस मामले में इंडियन एक्सप्रेस ने कोटक महिंद्रा ग्रुप से भी संपर्क किया, जिसमें कोटक ग्रुप ने अपना बयान जारी किया है। कोटक ग्रुप ने हिंडनबर्ग रिसर्च से जुड़ी फर्म, इन्वेस्टमेंट के बारे में कोई भी जानकारी होने से इन्कार कर दिया है। कोटक ग्रुप ने कहा, “के-इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड लिमिटेड (केआईओएफ) एक सेबी पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक है और मॉरीशस के वित्तीय सेवा आयोग द्वारा विनियमित है। विदेशी ग्राहकों को भारत में निवेश करने में सक्षम बनाने के लिए 2013 में इस फंड की स्थापना की गई थी। यह फंड ग्राहकों को जोड़ते समय उचित केवाईसी प्रक्रियाओं का पालन करता है और इसके सभी निवेश सभी लागू कानूनों के अनुसार किए जाते हैं। हमने अपने संचालन के संबंध में नियामकों के साथ सहयोग किया है और ऐसा करना जारी रखेंगे।”

कोटक महिंद्रा इंटरनेशनल लिमिटेड (केएमआईएल) और केआईओएफ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि हिंडनबर्ग कभी भी फर्म का ग्राहक नहीं रहा है और न ही वह कभी फंड में निवेशक रहा है। फंड को कभी पता नहीं चला कि हिंडनबर्ग उसके किसी निवेशक का भागीदार था। केएमआईएल को फंड के निवेशक से एक पुष्टि और घोषणा भी मिली है कि उसके निवेश किसी अन्य व्यक्ति की ओर से नहीं बल्कि एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में किए गए थे, कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड के प्रवक्ता ने कहा।

गौरतलब है कि हिंडनबर्ग रिसर्च ने जनवरी 2023 में अडाणी ग्रुप पर एक रिपोर्ट जारी की थी और अडानी ग्रुप पर गंभीर आरोप लगाए थे। हिंडनबर्ग ने कहा था कि अडानी ग्रुप के शेयरों को गलत तरीके से अधिक दाम का दिखाया जा रहा है, जबकि अडानी ग्रुप की असली वैल्यूएशन बेहद कम है। हिंडनबर्ग की ये रिपोर्ट अडाणी एंटरब्राइजेज के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर-एफपीओ के ठीक पहले जारी किया गया था, जिसके बाद कंपनी ने अपने एफपीओ को वापस ले लिया था। इस रिपोर्ट की वजह से अडानी के शेयरों के दाम काफी गिर गए थे और अडानी दुनिया के शीर्ष अमीरों की सूची से भी बाहर हो गए थे। हालाँकि मौजूदा समय में अडानी ग्रुप अपने नुकसान की भरपाई करने में सफल हो गया है।

‘परजीवी हो गई है कॉन्ग्रेस, एक जाति को दूसरे से लड़ा कर फैला रही अराजकता’: संसद में PM ने ‘बालक-बुद्धि’ पर सुनाए किस्से, कहा – आदमखोर की तरह कॉन्ग्रेस ने चखा झूठ का लहू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय ‘आज़ादी लेकर रहेंगे’ वाला जो विश्वास था, आज देश के कोटि-कोटि जनों में उसी तरह का विश्वास पैदा हुआ है जिस कारण ‘विकसित भारत’ का शिलान्यास इस चुनाव में हो चुका है। संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए मंगलवार (2 जुलाई, 2024) को कहा कि हमें देश को विकास के नए स्तर पर ले जाना है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में हमने जो गति पकड़ी है, अब हमारा मुकाबला उसी स्पीड को और अधिक करने पर है।

पीएम मोदी ने याद दिलाया कि देश अब दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, अब इसे तीसरे नंबर पर ले जाएँगे। उन्होंने बताया कि भारत अब मोबाइल फोन का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर और एक्सपोर्टर है, इस कार्यकाल में सेमीकंडक्टर व अन्य सेक्टरों में हम यही कारनामा करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की मिट्टी में पैदा हुई चिप दुनिया के उपकरणों में होगी। उन्होंने बताया कि अब तक 4 करोड़ ग़रीबों को घर दिया जा रहा है, इस कार्यकाल में 3 करोड़ और लोगों को घर मिलेगा ताकि कोई घर के बिना न रहे।

पीएम मोदी ने इस दौरान महिलाओं के सेल्फ-हेल्प ग्रुप के विस्तार का वादा करते हुए कहा कि 3 करोड़ बहनों को ‘लखपति दीदी’ बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में भाजपा द्वारा खाता खोलने का जिक्र किया, तमिलनाडु में कई सीटों पर भाजपा की दमदार उपस्थिति का जिक्र किया और कहा कि कर्नाटक, यूपी और राजस्थान में पिछली बार की तुलना में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ा है, आने वाले समय में 3 राज्यों में चुनाव है – महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछली विधानसभा चुनाव में भाजपा को जितने वोट मिले थे, इस लोकसभा चुनाव में उससे अधिक वोट मिले। उन्होंने पंजाब में भी बढ़त का जिक्र किया। पीएम मोदी ने विपक्षियों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जनता ने इन्हें विपक्ष में बैठने का आदेश दिया, जिनका काम है कि तर्क खत्म हो जाए तो चीखते-चिल्लाते रहो। उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास में पहली बार लगातार तीसरी बार कॉन्ग्रेस 100 का आँकड़ा पार नहीं कर पाई है।

पीएम मोदी ने कहा, “अच्छा होता कि कॉन्ग्रेस अपनी हार स्वीकार कर जनता के आदेश को सर-आँखों पर चढ़ाते हुए आत्ममंथन करती, लेकिन ये तो शीर्षासन करने में लगे हुए हैं। कॉन्ग्रेस और उसका इकोसिस्टम दिन-रात बिजली जला कर हिंदुस्तान के नागरिकों के मन में ये प्रस्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने हमें हरा दिया है। कोई छोटा बच्चा साइकिल लेकर निकला और और अगर वो गिर कर रोने लगता है तो कोई बड़ा व्यक्ति आकर उसे ढाँढस बँधाते हुए कहने लगता है – देखो चींटी मर गई, चिड़िया उड़ गई, तुम बढ़िया साइकिल चलाते हो, तुम गिरे नहीं हो। बच्चे का ध्यान भटका कर उसका मन बहला दिया जाता है। यही चल रहा है।”

पीएम मोदी ने इस दौरान 1994 के चुनाव को याद करते हुए कहा कि उसके बाद 10 चुनाव हुए लेकिन कॉन्ग्रेस 50 के आँकड़े को नहीं छू पाई है, इस बार किसी तरह 99 के चक्कर में फँसी है। उन्होंने एक और किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि एक बालक 99 मार्क्स लेकर घूम रहा था और सबको दिखाता था कि कितने अधिक मार्क्स आए हैं, लोग 99 सुन कर शाबाशी देते थे। पीएम मोदी ने आगे कहा कि जब शिक्षक आए और पूछा कि किस बात की ख़ुशी बाँट रहे हो, ये 100 में से नहीं बल्कि 543 में 99 लेकर आया है।

पीएम मोदी ने कहा कि अब उस बालक बुद्धि को कौन समझाए कि तुमने फेल होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि फर्जी बयानबाजी में कॉन्ग्रेस ने ‘शोले’ फिल्म को भी पीछे छोड़ दिया है। ‘शोले’ की मौसी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि तीसरी बार हारे हैं ये बात तो सही हैं, लेकिन मौसी, मोरल विक्ट्री तो है न। अरे मौसी, 13 राज्यों में जीरो सीटें आई हैं पर हीरो तो है न। अरे मौसी, पार्टी अभी भी साँसें तो ले रही है।

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पार्टी को ‘परजीवी’ बताते हुए कहा कि वो जिस शरीर के साथ रहता है उसको ही खाता है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस अपनी सहयोगी पार्टियों का ही वोट खा जाती है और उसके बल पर फलती-फूलती है। उन्होंने आँकड़े गिनाए कि जहाँ-जहाँ कॉन्ग्रेस-भाजपा का सीधा मुकाबला था वहाँ कॉन्ग्रेस का स्ट्राइक रेट सिर्फ और सिर्फ 26% है। जहाँ किसी का पल्लू पकड़ कर चलते थे, वहाँ कॉन्ग्रेस का स्ट्राइक रेट 50% है और 99% से अधिक सीटें उनके सहयोगियों ने उन्हें जिताया है।

पीएम मोदी ने कहा कि 16 राज्यों में जहाँ कॉन्ग्रेस अकेले लड़ी वहाँ उसका वोट शेयर गिरा है। उन्होंने बताया कि गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में अपने दम पर लड़ कर कॉन्ग्रेस ने 64 में सिर्फ 2 सीटें जीती हैं। पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये दक्षिण भारत जाकर उत्तर के खिलाफ बोलते हैं, उत्तर में पश्चिम के खिलाफ बोलते हैं, महापुरुषों के खिलाफ बोलते हैं, भाषा के आधार पर बाँटने की कोशिश की है, जिन नेताओं ने देश को खंडित करने की बात की थी उन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी ने संसद का टिकट दिया।

पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी खुलेआम एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाने के लिए काम कर रही है। कॉन्ग्रेस देश में आर्थिक अराजकता फैलाने की दिशा में भी सोची समझी चाल चल रही है। उनके शासन वाले राज्य देश पर आर्थिक बोझ बन जाएँ, ये खेल खेला जा रहा है। इन्होंने घोषणा की थी कि इनके मन मुताबिक परिणाम नहीं आया तो देश में आग लगा दी जाएगी। भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सवालों के घेरे में लाकर अराजकता फैलाई गई। CAA को लेकर पूरे इकोसिस्टम ने यही खेल खेला।”

पीएम मोदी ने एक और किस्सा सुनाया – एक बच्चा स्कूल से आकर जोर-जोर से रोने लगा और कहने लगा कि उसे पीटा गया है लेकिन माँ के कहने पर वो कुछ बता नहीं पा रहा था। उन्होंने कहा कि बच्चा ये नहीं बता रहा था कि स्कूल में उसने किसी बच्चे को माँ की गाली दी थी, किसी की किताबें फाड़ दी थी, उसने ये नहीं बताया कि उसने शिक्षक को ‘चोर’ कहा था, वो किसी का टिफिन चुरा कर खा गया था। पीएम मोदी ने कहा कि हमने सदन में यही बचकाना हरकत देखी है।

उन्होंने कहा कि सदन में ‘मुझे इसने मारा, मुझे उसने मारा, मुझे यहाँ मारा, मुझे वहाँ मारा’ का ड्रामा सहानुभूति हासिल करने के लिए चल रहा है। उन्होंने कहा कि जनता जानती है कि हजारों करोड़ रुपयों की हेराफेरी के मामले में जमानत पर बाहर हैं। उनका इशारा राहुल गाँधी पर था। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी OBC वर्ग के लोगों को चोर बताने के मामले में सज़ा पा चुके हैं, देश की सर्वोच्च अदालत पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने के बाद माफ़ी माँगनी पड़ी है।

उन्होंने कहा कि इन पर वीर सावरकर जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी के अपमान का मुकदमा चल रहा है। उन्होंने कहा कि बाल-बुद्धि सदन में किसी को भी आँखें मारने लगते हैं, गले पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि पूरा देश राहुल गाँधी से कह रहा है कि तुमसे ना हो पाएगा। उन्होंने संत तुलसीदास का ‘झूठइ लेना, झूठइ देना, झूठइ भोजन, झूठइ चबेना’ का जिक्र कॉन्ग्रेस के लिए किया। उन्होंने कहा कि आदमखोर जानवर के मुँह पर खून लग जाता है, वैसे ही कॉन्ग्रेस झूठ फैला रही है।

पीएम मोदी ने 1 जुलाई को ‘खटखट दिवस’ बताते हुए कहा कि लोग चेक कर रहे थे कि उनके बैंक खातों में पैसे आए या नहीं, देशवासियों को गुमराह किया गया। EVM, संविधान, आरक्षण, राफेल, HAL, LIC, बैंकों, कर्मचारियों को लेकर झूठ फैलाने का आरोप कॉन्ग्रेस पर लगाया। पीएम मोदी ने सदन की गरिमा से खिलवाड़ को संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान बताते हुए कहा कि सभापति को अब जो हो रहा है और कल जो हुआ है उसे गंभीरता से लिए बिना हम संसदीय लोकतंत्र को रक्षित नहीं कर पाएँगे।

अमन दीक्षित बन देवबंद के मुस्लिम डॉक्टर ने हिंदू महिला से की 5वीं शादी, जबरन इस्लाम कबूल करवा दोस्तों से कराया गैंगरेप: पीड़िता बोली- अपने हाथों से जलाने का हो रहा मन

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक शादीशुदा मुस्लिम डॉक्टर ने खुद को अमन दीक्षित बताकर हिन्दू लड़की को पहले प्यार के जाल में फँसाया फिर इस्लाम कबूल करवा दिया। मूलतः कोलकाता निवासी पीड़िता को देवबंद के एक घर में बंधक बनाकर बेरहमी से पिटाई की गई। आरोपित का नाम अहबर हुसैन है। अहबर हुसैन अब तक 5 निकाह कर चुका है जिसमें से 4 बीवियाँ मुस्लिम हैं। सोमवार (1 जुलाई 2024) को पुलिस ने आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह घटना सहारनपुर जिले के थानाक्षेत्र देवबंद की है। यहाँ सोमवार को पीड़िता ने पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज करवाई है। पीड़िता ने बताया कि वो मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली है। वह पहले से शादीशुदा और 7 वर्षीया एक बच्ची की माँ है। यहाँ देवबंद का रहने वाला अहबर हुसैन उसे अमन दीक्षित नाम से मिला था। अमन ने पीड़िता को प्यार के जाल में फँसाया। कोलकाता में ही अहबर ने पीड़िता से हिन्दू विधि-विधान से शादी की। विवाह के फोटो और वीडियो भी पीड़िता ने पुलिस को सबूत के और पर उपलब्ध करवाए हैं। ऑपइंडिया के पास शादी के वीडियो फुटेज मौजूद हैं।

हिन्दू विधि विधान से पीड़िता से शादी करता अहबर हुसैन

दोस्तों से करवया गैंगरेप

शादी के बाद आरोपित डॉक्टर पीड़िता को देवबंद ले आया। यहाँ उसने पीड़िता को एक कमरे में बंद कर दिया। यहाँ वो महिला के साथ रेप करता था। मना करने पर पीड़िता की पिटाई की जाती थी। खाना भी ठीक से नहीं दिया जाता था। आरोपित डॉक्टर ने कमरे में CCTV भी लगवा दिया था जिसके बाद वो पीड़िता की एक-एक हरकत पर नजर रखता था। इस बीच अहबर हुसैन के कुछ दोस्तों ने भी पीड़िता से रेप किया। 25 जून 2023 को हुए इस गैंगरेप में डॉक्टर आरिफ और शहज़ाद के नाम बताए गए हैं। महिला ने अपनी शिकायत में आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

नाबालिग बेटी का भी धर्मान्तरण

देवबंद में ही अहबर हुसैन ने पीड़िता और उसकी 7 वर्षीया नाबालिग बेटी को को इस्लाम कबूल करवा दिया। पीड़िता का दावा है कि वो पश्चिम बंगाल की एक अनपढ़ महिला है जिसे हिंदी भाषा का ठीक से ज्ञान नहीं है। इसी का फायदा उठाकर अहबर हुसैन से उससे कुछ कागजातों पर दस्तखत करवा लिए थे। बाद में इन्हीं कागजातों के आधार पर पीड़िता और उसकी बेटी का आधार कार्ड भी बनवा दिया गया। उसने बताया कि जब तक उसे अहबर हुसैन के मुस्लिम होने का पता चला तब तक वो आरोपित के जाल में फँस चुकी थी।

नाबालिग बेटी सहित पुलिस से न्याय की गुहार

अहबर हुसैन देवबंद के बेबी केयर हॉस्पिटल में बच्चों का डॉक्टर है। महिला ने रोते हुए आगे कहा, “उसे जेल भेजा जाए। नहीं तो हमारे हाथ में दें उसे। हम तो जलाएँगे उसे। हमें बहुत ज्यादा दुःख दिया है उसने।”

नहीं मिला न्याय तो कर लूँगी आत्महत्या

शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि अगर आरोपित अहबर हुसैन पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई और चारा नहीं बचेगा। पुलिस ने इस शिकायत पर अहबर हुसैन, शहजाद और डॉक्टर आरिफ को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता IPC की धारा 376 डी और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के सेक्शन 5(1) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। सहारनपुर के एडिशनल एसपी ने बताया कि केस में जाँच कर के जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

डॉक्टर की मुस्लिम बीवी भी आई सामने

इस बीच डॉक्टर अहबर की पूर्व पत्नी फौजिया भी मीडिया के सामने आई है। मूलतः सहारनपुर की रहने वाली फौजिया ने बताया कि 13 साल पहले उनका निकाह डॉक्टर अहबर हुसैन से हुआ। 4 साल पहले अहबर ने पीड़िता को बेसहारा छोड़ दिया। अब फौजिया अपनी 2 बेटियों का अकेले पालन-पोषण कर रहीं हैं। फौजिया का आरोप है कि उनकी जानकारी में उनका शौहर 5 निकाह कर चुका है। साथ ही उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इसके अलावा भी अहबर ने चोरी-छिपे कई और निकाह भी किए होंगे। फौजिया भी चाहती हैं कि अहबर को जेल भेजा जाए।

हिन्दू संगठनों ने उठाई कार्रवाई की माँग

इस मामले में बजरंग दल ने भी दस्तक की। सहारनपुर के बजरंग दल पदाधिकारी विकास त्यागी ने बताया कि फिलहाल अहबर हुसैन 2 बीवियों को साथ ले कर देवबंद रह रहा था जिसमें एक हिन्दू पीड़िता भी शामिल हैं। इसकी एक बीवी सहारनपुर के सरसावा, दूसरी इसी जिले के गंगोह और तीसरी के उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में होने की आशंका जताई गई है। विकास त्यागी ने अहबर हुसैन के करतूतों की गहराई से जाँच की माँग उठाई है।