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DCW में 6 महीने से सैलरी नहीं, बजट 30% घटाया: CM अरविंद केजरीवाल से स्वाति मालीवाल का सवाल- महिलाओं की दुश्मन क्यों है AAP सरकार?

दिल्ली महिला आयोग लगभग निष्क्रिय हो चुका है। दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष पद पिछले 6 माह से खाली है। एससी सदस्य का पद 1.6 साल से खाली है। 2 सदस्य भी कम हैं। दिल्ली महिला आयोग का बजट करीब 30 प्रतिशत कम कर दिया गया है। कर्मचारियों को 6 महीने से वेतन नहीं मिला है। दिल्ली सरकार ने रेप पीड़ितों के लिए बनी हेल्पलाइन 181 को भी बंद कर दिया है। ये सब जानकारी दी है दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 4 पन्नों की चिट्ठी लिखी है और केजरीवाल से अपील की है कि उनकी सरकार महिलाओं से दुश्मनी न निकाले।

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने ‘रेप कैपिटल’ जैसे बदनामी वाले टैग लगे ‘दिल्ली’ को सेफ बनाए रखने के लिए अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखी है। स्वाति मालीवाल ने वो चिट्ठी सोशल मीडिया पर शेयर किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “जब से मैंने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिया है, तबसे दिल्ली सरकार के मंत्रियों और अफ़सरों ने आयोग के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। पिछले 6 महीने से किसी को सैलरी नहीं दी गई है, बजट 28.5 प्रतिशत कम कर दिया है, 181 हेल्पलाइन वापस ले ली गई है और अध्यक्ष और 2 मेम्बर की पोस्ट भरने के लिए कोई कार्य नहीं किया गया है। दलित मेम्बर की पोस्ट 1.5 साल से ख़ाली पड़ी है! मेरे जाते ही हर संभव कोशिश की जा रही है महिला आयोग को फिर से एक कमज़ोर संस्थान बनाने की। महिलाओं से दिल्ली सरकार क्यों दुश्मनी निकाल रही है? मैंने अरविंद केजरीवाल जी को पत्र लिखके उनसे जवाब माँगा है!”

दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और अब राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने ANI से कहा, “आठ साल में दिल्ली महिला आयोग ने 1,70,000 मामलों की सुनवाई की, लेकिन जब से मैंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है, पूरी दिल्ली सरकार दिल्ली महिला आयोग को बंद करने पर अड़ी हुई है। दिल्ली सरकार ने छह महीने से दिल्ली महिला आयोग के लिए एक रुपया भी फंड के तौर पर जारी नहीं किया है।”

स्वाति ने आगे कहा, “हम यह भी देख रहे हैं कि दिल्ली सरकार ने इस साल के लिए दिल्ली महिला आयोग के बजट में 30% की कटौती की है। दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष का पद अभी भी खाली है और छह महीने हो गए हैं…दो अन्य पद भी खाली हैं…दिल्ली सरकार ने 181 हेल्पलाइन बंद कर दी है। यह शर्मनाक है कि रेप कैपिटल माने जाने वाले राज्य की 181 हेल्पलाइन बंद कर दी गई है…मैंने सीएम अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा है कि वे ऐसा कैसे कर सकते हैं…जिस राज्य का महिला आयोग सक्षम नहीं है, वहाँ की महिलाओं की सुरक्षा कैसे हो सकती है?…मेरा मानना ​​है कि सरकार नहीं चाहती कि महिलाएँ सक्षम हों। मुझे लगता है कि सरकार को सवाल उठाने वाली महिलाओं से दिक्कत है…”

स्‍वाति मालीवाल ने पूछा है कि महिलाओं से दिल्ली सरकार क्यों दुश्मनी निकाल रही है? उन्होंने पत्र में लिखा है, “बहुत दुख हो रहा है कि जिस सिस्‍टम को इतना कष्‍ट झेलकर 2015 से लेकर अब तक बनाया उसे दिल्‍ली सरकार खत्‍म कर रही है। मेरे 8 साल के कार्यकाल में महिलाओं और बच्‍चों की ओर से कमीशन में आई 1.7 लाख शिकायतों को हैंडल किया। 2016 से आयोग की 181 हेल्‍पलाइन पर 41 लाख से ज्‍यादा कॉल्‍स दर्ज की गई हैं। इस हेल्‍पलाइन को 45 काउंसिलर्स की मदद से बेहतर ढंग से चलाया गया. राजधानी से उससे बाहर 2500 से ज्‍यादा रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन चलाए।”

स्वाति मालीवाल ने कहा, “स्‍वाति ने लैटर में आयोग की रेप क्राइसिस सेल में भर्ती किए गए वकीलों द्वारा दिल्‍ली की हर एक अदालत में की गई रेप पीड़‍ितों की मदद का हवाला दिया। इसके अलावा क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर की मदद से 60 हजार से ज्‍यादा सेक्‍सुअल असॉल्‍ट सर्वाइवर्स की मदद का आंकड़ा पेश किया।”

स्‍वाति ने लिखा कि दिल्‍ली सरकार की ओर से दिल्‍ली महिला आयोग के साथ किए जा रहे बर्ताव की वजह से करीब 674 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। आयोग में बहुत सारी ऐसी सर्वाइवर्स को भर्ती किया गया था जो अपने परिवार में खुद कमाकर घर चलाती हैं, लेकिन सैलरी न मिलने से इनके परिवारों पर भरण पोषण का संकट आ गया है। यहाँ तक कि वे अपने बच्‍चों को स्‍कूलों से निकाल रही हैं, उन्‍हें बीमारियों में भी इलाज नहीं दिलवा पा रही हैं। आरसीसी के लॉयर्स ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में रुकी हुई सैलरीज को लेकर याचिका दी थी, जिस पर हाईकोर्ट ने 9 मई 2024 को वेतन जारी करने का आदेश भी जारी किया था लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 30 मई को फिर से हाईकोर्ट ने सैलरी देने का आदेश दिया लेकिन अभी तक डब्‍ल्‍यूसीडी की ओर से इसे बहाल किया जाना बाकी है। इस पर तत्‍काल कदम उठाने की जरूरत है।

बता दें कि स्वाति मालीवाल लंबे समय तक दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रही हैं। उन्हें आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा भेज दिया। कुछ समय पहले स्वाति मालीवाल के साथ अरविंद केजरीवाल के घर में कथित तौर पर मारपीट की घटना सामने आई थी, जिसमें अरविंद केजरीवाल के अहम सहयोगी विभव कुमार पर मारपीट का आरोप लगा। विभव को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया।

मुँह पर टेप, हाथ-पाँव बँधे, अर्धनग्न… मदरसे से गायब था 9 साल का बच्चा, 2 दिन बाद कुएँ में तैरती मिली बोरी में बंद लाश

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक मदरसा छात्र की हत्या कर दी गई है। मृत छात्र की लाश मदरसे के पास एक कुआँ से बरामद हुई है। 9 वर्षीय छात्र का शव एक बोरे में पैक कर दिया गया था। हाथों और पैरों को बाँध कर मुँह पर प्लास्टिक का टेप चिपका दिया गया था। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने 2 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। पीड़ित शनिवार (29 जून, 2024) से लापता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना फतेहपुर जिले के थाना क्षेत्र मलवाँ की है। यहाँ के सौरां गाँव में उलमा मदरसा है। आसपास के कई बच्चे यहाँ मज़हबी तालीम लेने जाते हैं। इन्हीं बच्चों में से 9 वर्षीय पीड़ित भी 2 माह से यहाँ रुक कर दीनी तालीम हासिल कर रहा था। यहाँ मौलवी रकीमुद्दीन छात्रों को पढ़ाते हैं। शनिवार (30 जून) को मौलवी ने छात्र के अब्बा को कॉल किया। उन्होंने बताया कि उनका इकलौता बेटा लापता है। परिजन फ़ौरन ही मदरसे में पहुँचे और अपनी तरफ से खोजबीन शुरू कर दी।

देर रात जब बच्चे का कुछ भी पता नहीं चला तो परिजनों ने रविवार (30 जून) को पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस भी बच्चे की खोजबीन में जुट गई। इसी दिन शाम लगभग 5 बजे मदरसे से लगभग आधे किलोमीटर दूर एक कुएँ में कुछ चरवाहों को एक पीले रंग की बोरी तैरती दिखाई पड़ी। यह कुआँ गाँव के ही सिंगरहा कब्रिस्तान के पास है। बोरी को बाहर निकाल कर देखा गया तो उसमें एक 9 वर्षीय बच्चे का शव था। शव के हाथ-पैर को बाँधा गया था और मुँह पर प्लास्टिक का टेप चिपका दिया गया था।

शरीर अर्धनग्न हालत में था। कमर के ऊपर कपड़ा नहीं था। मृतक ने काले रंग की पैंट पहन रखी थी। फ़ौरन ही इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने शव की पहचान करवाई तो वो मदरसे से लापता हुए छात्र का निकला। परिजनों को इसकी सूचना दी गई तो वो भी मौके पर पहुँचे। इस मामले में 2 आरोपितों के खिलाफ तहरीर दी गई है। पुलिस ने इस तहरीर पर केस दर्ज कर के जाँच-पड़ताल शुरू कर दी है। मृत छात्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फतेहपुर के एडिशनल एसपी विजय शंकर मिश्रा ने घटना का जल्द खुलासा किए जाने का आश्वासन दिया है।

29 जून को 11, 30 जून को 11… अगरतला रेलवे स्टेशन पर रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठियों का पकड़ा जाना हुआ आम, पहचान छिपाने के लिए जनरल डब्बों में करते हैं सफर

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला रेलवे स्टेशन से हाल ही में 11 बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए हैं। यह अगरतला से ट्रेन पकड़ देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल जाने वाले थे। इन सभी को GRP और RPF ने पकड़ा है। अगरतला रेलवे स्टेशन के सहारे लगातार अवैध तरीके से बांग्लादेशी और रोहिंग्या लगातार देश भर में जा रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में ही त्रिपुरा में घुसपैठ करने वाले हजारों बांग्लादेशी और रोहिंग्या को सुरक्षाबलों ने पकड़ा है।

अगरतला रेलवे स्टेशन पर तैनात GRP और RPF ने 30 जून, 2024 को स्टेशन से ही 11 बांग्लादेशी पकड़े हैं। इनमें 6 पुरुष, जबकि 5 महिलाएँ हैं। यह सभी अगरतला से बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई समेत अलग-अलग हिस्सों में जाने की फिराक में थे। इनमें से किसी के पास भी भारत के भीतर घुसने के लिए वैध कागज नहीं मिले हैं। अगरतला GRP ने इस संबंध में मामला दर्ज किया है और अब इनके खिलाफ कार्रवाई चालू की जाएगी। पुलिस इस मामले में मानव तस्करी के एंगल से भी जाँच कर रही है।

लगातार पकड़े जा रहे हैं घुसपैठिए

अगरतला रेलवे स्टेशन के रास्ते भारत के अलग-अलग शहरों में वाले घुसपैठियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे पहले 29 जून, 2024 को 11 घुसपैठिए पकड़े गए थे। 27 जून, 2024 को भी अगरतला रेलवे स्टेशन से दो बांग्लादेशी घुसपैठियों अख्तर और फिरोजा को पकड़ा गया था। यह दोनों कर्नाटक की ट्रेन पकड़ने का प्रयास कर रहे थे।

इसके एक दिन पहले 26 जून, 2024 को 4 बांग्लादेशी घुसपैठिए, रुबिया सुल्ताना, ऋतु बेगम, ज्योति खातून और मीम सुल्ताना पकड़ी गईं थी। यह लोग पुणे और अहमदाबाद जाने के लिए ट्रेन पकड़ने वाले थे। जून महीने में अगरतला के रेलवे स्टेशन से 39 घुसपैठिए पकड़े गए हैं।

इससे पहले मई माह में भी 28 घुसपैठिए अलग-अलग मौके पर पकड़े गए थे। 23 मई को 4, 21 मई को 2 बांग्लादेशी घुसपैठिए पकडे गए थे। 17 मई, 2024 को 4 बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए थे जो कि अगरतला सिकंदराबाद एक्सप्रेस में सवार होने जा रहे थे। इससे पहले 11 मई को 8 बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए थे, यह महाराष्ट्र जा रहे थे। कई घुसपैठिए स्टेशन पर सुरक्षा एजेंसियों के राडार से बचने के बाद बाहर भी पकड़े गए हैं। कई बार इनके साथ इनके भारतीय मददगारों को भी पकड़ा गया है।

2024 में ही 130+ गिरफ्तार, इनमें रोहिंग्या भी

ऑपइंडिया ने घुसपैठियों के अगरतला रेलवे स्टेशन से लगातार पकड़े जाने को लेकर यहाँ के सुरक्षा अधिकारियों से बात की। अगरतला रेलवे स्टेशन पर तैनात GRP के अधिकारी तापस दास ने ऑपइंडिया को बताया कि 2024 में ही 130+ बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें 4 रोहिंग्या घुसपैठिए भी हैं। उन्होंने बताया कि यह अगरतला से भारत के अलग-अलग हिस्से के लिए ट्रेन पकड़ते हैं। घुसपैठिए भारत के प्रमुख शहरों- चेन्नई, अहमदाबाद, कोलकाता और दिल्ली आदि में भी जाते हैं।

उन्होंने ऑपइंडिया को यह बताया कि अगरतला रेलवे स्टेशन पर पकड़े जाने वाले घुसपैठियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह घुसपैठिए रेलवे में जाँच से बचने के लिए ज्यादातर जनरल डिब्बों में सफर करते हैं। इनका टिकट लेने के लिए कोई पहचान पत्र नहीं दिखाना होता। उन्होंने यह भी बताया कि इनके लिए भारत के अलग-अलग शहरों में पहले से बसे घुसपैठिए भी ऑनलाइन टिकट करवाते हैं। कई ऐसे गैंग भी त्रिपुरा में सक्रिय हैं जो कि इन्हें देश के अलग अलग हिस्सों में भेजने का काम करते हैं।

ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि लगातार इन घुसपैठियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहाँ एक महीने में कहीं 2-4 अवैध बांग्लादेशी यहाँ पकड़े जाते थे वहीं अब इनकी संख्या 30-40 तक पहुँच रही है। उनकी इस बात की पुष्टि GRP त्रिपुरा के एक्स (ट्विटर) अकाउंट पर दी गई जानकारी भी करती है। GRP लगातार इन घुसपैठियों की गिरफ्तारी के विषय में जानकारी देती है। इसके अनुसार जनवरी 2024 से 30 जून, 2024 तक 118 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए हैं।

चित्र BG साभार: IndiaRailInfo

त्रिपुरा में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के रोज गिरफ्तार होने की खबरें लगातार आती रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, बीएसएफ ने जनवरी 2023 से 15 अप्रैल 2024 तक यानी करीब 16 महीने में अकेले त्रिपुरा से 1018 घुसपैठिए पकड़े हैं। इनमें 498 बांग्लादेशी हैं। पकड़े गए बांग्लादेशियों में औरतों और बच्चों की भी अच्छी-खासी तादाद है।

बीएसएफ के अनुसार, साल 2023 में उसने 744 घुसपैठिए पकड़े थे। इनमें 112 रोहिंग्या और 337 बांग्लादेशी थे। घुसपैठियों के पकड़े जाने की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। 2022 में बीएसएफ ने 369 घुसपैठिए पकड़े थे। इनमें 150 बांग्लादेशी और 57 रोहिंग्या थे। इसी तरह 2021 में 208 घुसपैठिए पकड़े गए थे, जिनमें 93 बांग्लादेशी थे।

रोहिंग्या को हिंदी-असमी का प्रशिक्षण, ₹10-20 लाख में घुसपैठ का पैकेज

भारत में म्यांमार से आने वाल रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने का भी सिंडिकेट चल रहा है। NIA की टीम ने हाल ही में इसके मास्टरमाइंड जलील मियाँ को गिरफ्तार किया है। रोहिंग्या मुस्लिमों को ₹10-20 लाख (14-28 लाख बांग्लादेशी टका) के पैकेज के तहत भारत में फर्जी दस्तावेज देकर बसाया जा रहा है। रोहिंग्या घुसपैठियों को भारत में बसाने के लिए हिंदी-असमी जैसी भाषाओं का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।

बोलने के लहजे के कारण वो पकड़े न जाएँ, इसीलिए ऐसा किया जाता है। ये गिरोह प्रतिदिन 5-10 रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत में घुसाता था। पहचान छिपाने के लिए घुसपैठियों का हुलिया तक बदल दिया जाता है। दिल्ली में ऐसे कई शिविर हैं, जहाँ रोहिंग्या रह रहे हैं। सिर्फ 2 वर्ष में भारत में रोहिंग्या मुस्लिमों की जनसंख्या दोगुनी हो गई है।

केंद्र सरकार कह चुकी है कि देश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए किसी कैम्प की व्यवस्था नहीं है। मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर में इनकी संख्या 10,000 बताई जाती है। कई अपराधों में भी ये रोहिंग्या शामिल रहे हैं। शाहीन बाग़ और जफराबाद में CAA के खिलाफ हुए आंदोलन में इन्होंने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया था। केंद्र सरकार इन्हें अवैध अप्रवासी बता चुकी है, साथ ही इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा तक घोषित कर चुकी है।

जज, ज्यूरी और जल्लाद… सब कुछ खुद बन जाता है ताजेमुल: जानिए बंगाल के तालिबानी को क्यों कहते हैं JCB, पीड़ित महिला बोलीं- मेरी मर्जी के बिना वीडियो बनाया

पश्चिम बंगाल में महिला का सरेआम उत्पीड़न करने वाला ताजेमुल हक इस समय सुर्खियों में है। उसकी गिरफ्तारी के बाद जहाँ उसकी कुछ अन्य वीडियो सामने आ रही हैं तो वहीं ये भी सवाल हो रहा है कि आखिर उसे ‘जेसीबी’ जैसे नाम से क्यों बुलाया जाता है, ये तो मशीन का नाम है जबकि ताजेमुल एक व्यक्ति है। इसके अलावा इस बीच उस महिला का भी बयान आया है जिसे ताजेमुल ने पीटा था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक ताजेमुल को उसके काम करने के तरीके के कारण ‘जेसीबी’ कहा जाता है। एक रिपोर्ट में स्थानीयो से बात करने के बताया गया कि कि चूँकि ताजेमुल का एक्शन एकदम जेसीबी की तरह ही काम करता है इसलिए उसे लोग जेसीबी कहने लगे। स्थानीय ताजेमुल के अत्याचार को लेकर कई कहानियाँ भी सुनाते हैं।

बता दें कि ताजेमुल की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की वीडियो आ रही हैं। एक वीडियो में ताजेमुल को महिला और उसके साथ एक व्यक्ति को हाथ-पाँव बाँधकर परेड करवाकर पीटते हुए दिखाया गया है।

इस वीडियो को भारतीय जनता पार्टी नेता और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी एक वीडियो एक्स पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा, “सड़क पर न्याय का एपिसोड 2, जिसमेंटी एमसी नेता तजमुल उर्फ JCB जज, ज्यूरी और जल्लाद है…।” वहीं सीपीआईएम नेता मोहम्मद सलीम ने भी इस वीडियो को शेयर किया है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे जेसीबी ऐसे अपराध खुलेआम करता था।

मालूम हो कि एक तरफ ताजेमुल की नई वीडियो सामने आने के बाद सवाल हो रहे हैं कि आखिर उसने ऐसे काम और कितने लोगों के साथ किए होंगे तो वहीं जिस महिला की पिटाई की वीडियो वायरल होने के बाद वो गिरफ्तार हुआ है उस महिला का बयान भी मीडिया में आया है। महिला ने अपने साथ हुई ज्यादती पर बोलने की बजाय उस शख्स पर नाराजगी जताई है जिसने उसकी वीडियो बनाई थी और जिसकी वजह से ताजेमुल गिरफ्तार हो पाया।

महिला ने कहा– “मुझे नहीं पता कि आखिर किसने मेरी वीडियो ब मैंने इस संबंध में थाने में शिकायत दर्ज करवाई है जिसने भी मेरी मर्जी के बगैर उस वीडियो को वायरल किया। मैं पुलिस से अपील करती हूँ कि उसे उचित सजा मिले। मेरा पुलिस में पूरा विश्वास है।”

बता दें कि ताजेमुल का मुद्दा सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के गर्माया। इस वीडियो में वो महिला और उसके प्रेमी को बाँस के डंडे से पीटते हुए ताजेमुल दिखा था। वहीं उसका बचाव करते हुए चोपरा के विधायक हमीदुल रहमान ने कहा था कि ‘मुस्लिम राष्ट्र’ के कुछ आचार-विचार होते हैं। ऐसे में सवाल पूछे जाने लगे थे कि चैतन्य महाप्रभु और रामकृष्ण परमहंस की धरती क्या अब ‘मुस्लिम राष्ट्र’ है? शरिया भारत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है, जहाँ मनमाने ढंग से भारत के संविधान और कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।

‘संपूर्ण जैव जगत में ईश्वर को देखता है हिन्दू, करता है विश्व के कल्याण की कामना’: जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर ने राहुल गाँधी को पढ़ाया धर्म का पाठ, कहा – माफ़ी माँगो

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देते हुए पूरे हिन्दू समाज को हिंसक बता दिया। इस दौरान उन्होंने हिन्दू देवी-देवताओं के ‘अभय मुद्रा’ को इस्लाम और कॉन्ग्रेस पार्टी के चुनाव चिह्न से जोड़ा। अब साधु-संतों ने उनके इस रवैये का विरोध शुरू कर दिया है। स्वामी अवेधशानंद गिरी महाराज ने उन्हें हिन्दू दर्शन का पाठ पढ़ाया है। राहुल गाँधी के भाषण के इन हिस्सों को संसद की कार्यवाही के रिकॉर्ड्स से भी हटा दिया गया है।

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि हिन्दू संपूर्ण जैव जगत से प्रेम करता है, सबमें ईश्वर को देखता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू अहिंसक है, समन्वयवादी है और सहिष्णु है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिन्दू समाज संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानता है और सबके कल्याण की कामना करता है। संत ने कहा कि निरंतर पूरे विश्व के सुख-सम्मान की कामना करना अपना धर्म समझता है। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं को हिंसक और घृणा फैलाने वाला कहना ठीक नहीं है।

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा, “इस प्रकार की बातें कह कर आप पूरे समाज को लांछित और अपमानित कर रहे हैं। हिन्दू समाज अत्यंत उदार है और वो सबका सम्मान करता है। वह सभी जातियों, पंथों, और धर्मों का सम्मान करता है। हमारे लिए सभी प्राणी आदरणीय हैं, हम सबमें ईश्वर को देखते हैं। राहुल गाँधी द्वारा हिन्दुओं को हिंसक और मिथ्या बोलने वाला बताना गलत है, मैं इसकी निंदा करता हूँ, भर्त्सना करता हूँ। राहुल गाँधी विपक्ष के नेता हैं, इसीलिए उन्हें इन शब्दों को वापस लेना चाहिए।”

बता दें कि स्वामी अवधेशानंद गिरी न सिर्फ संत, बल्कि लेखक एवं दार्शनिक भी हैं। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित खुर्जा में जन्मे अवधेशानंद गिरी ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में संन्यास ले लिया था। फ़िलहाल वो दशनामी संप्रदाय के जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर हैं। वो पिछले 26 वर्षों से इस पद पर हैं। साथ ही वो ‘अमरनाथ श्राइन बोर्ड’ के सदस्य भी हैं। वो हरिद्वार स्थित ‘समन्वय सेवा ट्रस्ट’ का संचालन करते हैं, जो वहाँ स्थित ‘भारत माता मंदिर’ का भी प्रबंधन करता है।

संयुक्त राष्ट्र में भी उद्बोधन दे चुके अवधेशानंद गिरी ने अब राहुल गाँधी के बयान का जिक्र करते हुए कहा है कि इससे हिन्दू समाज को ठेस पहुँची है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने अत्यंत कोमल और करुणामयी संवेदनाओं पर आधारित मान्यताओं पर प्रहार किया है, जिसके लिए उन्हें क्षमा माँगनी चाहिए। राहुल गाँधी ने संसद में भगवान शिव की भी तस्वीर लहराई और दावा किया कि वो त्रिशूल का उपयोग नहीं करते, उसे जमीन में गाड़ देते हैं। ‘अभय मुद्रा’ को इस्लाम से जोड़ने के कारण इस्लामी विद्वान भी उनसे नाराज़ हैं।

नग्न हो सरेआम एक-दूसरे पर किया पेशाब… ‘प्राइड परेड’ के नाम पर टोरंटो से लेकर सैन फ्रांसिस्को तक दिखाई नंगई, बच्चों को भी प्राइवेट पार्ट दिखाया

बीते वीकेंड विश्व के कई देशों में जगह-जगह LGBTQIA+ समुदाय द्वारा निकाली गई ‘प्राइड परेड’ देखने को मिली। हर जगह इस परेड में शामिल लोगों का अलग अंदाज देखने को मिला। कहीं लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहन इस परेड में अपनी खुशी जाहिर करते दिखाई दिए तो कहीं नंगे होकर दूसरों के साथ चलते दिखे। कुछ जगह इन परेडों में अश्लीलता की हद भी पार की गई। वहीं कई जगह प्राइड परेड में मारपीट की घटना हो गई। सबकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

पहले सैन फ्रांसिसको की प्राइड परेड के हाल देखिए। यहाँ पर लोग इस परेड में खुलेआम ओरल सेक्स करते दिखे। इसके अलावा एक दूसरे से अपने ऊपर पेशाब करवाते भी नजर आए। सामने आए वीडियो में देख सकते हैं कि एक शख्स प्लास्टिक टब को पूल बनाकर लेटा है और महिला उसके ऊपर खुले में पेशाब कर रही है। वहीं दूसरा व्यक्ति अपने प्राइवेट पार्ट पर काले रंग का कपड़ा बाँधकर खड़ा है।

अजीब बात ये है कि वैसे तो इस परेड को 18 से ऊपर उम्र के लोगों के लिए रखा गया था लेकिन इसमें शामिल होने वालों से कोई आईडी कार्ड नहीं लिया जा रहा था। अगली वीडियो में एक व्यक्ति को दूसरे के प्राइवेट पार्ट्स पर मारते हुए देखा जा सकता है। वहीं एक अन्य वीडियो में बड़े लोगों के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी रास्ते से गुजरते दिख रहे हैं।

सामने आई एक वीडियो में एक पत्रकार नंगे खड़े लोगों से सवाल पूछ रहा है कि क्या ये सब करना उचित है। ऐसे में परेड में शामिल लोग उसे कह रहे हैं कि इसमें कुछ गलत नहीं है। यहाँ सब कर रहे हैं। उनका मकसद तो सिर्फ अपनी अपनी पहचान पर गर्व करना है।

बता दें कि परेड की वीडियो आने के बाद सैन फ्रांसिसको पुलिस से सवाल हो रहे हैं। वहीं कनाडा के टोरंटो में भी ऐसा नजारा देखने को मिला है जिसे देख लोग हैरान हैं। यहाँ लोग शरीर पर बिन एक भी कपड़ा पहने सड़कों पर घूमते दिखे। एक दूसरे के प्राइवेट पार्ट्स पर मारते दिखे। वीडियो को शेयर करते हुए कहा जा रहा है कि इस परेड को आयोजित करने से पहले कहा गया था कि चर्च स्ट्रीट स्कूल में परिवार आ सकते हैं। यहाँ चेहरों पर पेंटिंग होगी, स्टोरी सुनाई जाएगी और भी मजेदार काम होंगे… इसलिए लोग अपने बच्चों को भी लेकर आएँ, हालाँकि अब यहाँ क्या हो रहा है इसे आप देख सकते हैं।

इसके बाद बात करें तो न्यूयॉर्क में हुई प्राइड परेड की तो यहाँ से सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि परेड में महिलाओं ने एक दूसरे से मारपीट की। इसके अलावा यहाँ गोली भी चली और एक दूसरे के बाल भी नोचे गए। इस परेड की वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इसके अलावा खबरों की माने तो इस परेड में गोली चलने की घटना भी हुई। बाद में यहाँ खूब हुड़दंग हुआ।

दोस्त के साथ कार में थी 16 साल की छात्रा, गेट खोलते ही गुफरान ने काट दिया गला: मृतका ने ठुकरा दिया था प्रपोजल, कहा था- तुमसे मतलब नहीं रखना चाहती

मध्य प्रदेश के जबलपुर में गुफरान ने एक नाबालिग छात्रा की चाकू मार कर हत्या कर दी। गुफरान ने नाबालिग के गले में चाकू मारा, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। गुफरान, नाबालिग को दूसरे लड़के के साथ देख कर गुस्सा था, इसलिए उसने यह कदम उठाया। गुफरान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (1 जुलाई, 2024) को जबलपुर के नया मोहल्ला रिपटा निवासी नाबालिग छात्रा तमन्ना (16) अपने एक दोस्त के साथ गाड़ी से कहीं घूमने गई थी। नाबालिग छात्रा की आवाजाही को उसी के मोहल्ले का गुफरान (21) देख रहा था। वह उसकी हत्या करने का पहले ही मन बना चुका था।

नाबालिग जैसे ही घूम कर वापस आने के बाद ओमती घंटाघर इलाके में गाड़ी का दरवाजा खोल कर उतरी, गुफरान ने उसके गले में चाकू मार दिया। उसने नाबालिग पर चाकू से कई वार किए। इस कारण नाबालिग गंभीर रूप से घायल हो गई। छात्रा को अस्पताल ले जाया गया जहाँ से उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

नाबालिग के साथ कार में मौजूद युवक भी इस हमले के बाद भाग निकला। वहीं हत्यारा गुफरान भी मौके पर मची भगदड़ का फायदा उठा कर भाग गया। बताया गया कि मृतका और आरोपित गुफरान के बीच पहले से जान पहचान थी। गुफरान कपड़े की एक दुकान पर काम करता है।

दोनों एक दूसरे को 1 वर्ष से जानते थे। नाबालिग ने इससे पहले गुफरान का प्रपोजल भी ठुकरा दिया था। नाबालिग ने उससे कहा था कि वह गुफरान से कोई संबंध नहीं रखना चाहती। इसके बाद नाबालिग एक और युवक के साथ आने जाने लगी थी। इस कारण से गुफरान कुपित था और उसने हत्या का यह फैसला लिया।

पुलिस ने इस घटना के बाद मामले में FIR दर्ज करके जाँच चालू कर दी है। घटनास्थल के आसपास के CCTV कैमरों से फुटेज भी निकलवाई गई है। पुलिस ने फरार गुफरान को रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया है। जिस कार में नाबालिग बैठकर गई थी, उसे भी जब्त कर लिया गया है।

अग्निवीर पर राहुल गाँधी के झूठ की पोल बलिदानी के परिजनों ने खोली, सदन में गुमराह करने पर कॉन्ग्रेस नेता को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फटकारा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने हाल में अग्निवीर योजना पर सवाल खड़ा करते हुए तमाम तरह के दावे किए थे। उन्होंने कहा था कि अग्निवीर केवल यूज एंड थ्रो वाले मजदूर होते हैं। उन्हें न तो शहीद का दर्जा मिलता है और न ही उन्हें कोई मुआवजा मिलता है। उनके इसी बयान के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को अग्निवीर योजना की सच्चाई बताई। उन्होंने राहुल गाँधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।

रक्षा मंत्री रानाथ सिंह ने राहुल गाँधी के बयान के बाद तत्काल सीट से खड़े होकर जवाब दिया। उन्होंने राहुल गाँधी के बयान पर आपत्ति जताते कहा, “राहुल गाँधी को गलत बयान देकर सदन को गुमराह करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। हमारी सीमाओं की रक्षा करते हुए या युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले अग्निवीर के परिवार को एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।”

उन्होंने कहा, “मैं नेता प्रतिपक्ष से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करना चाहता हूँ कि कृपया वो संसद को गुमराह करने की कोशिश न करें। अग्निवीर योजना के संबंध में बहुत सारे लोगों से, 158 संस्थाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया गया, उनके सुझाव लिए गए, तब यह अग्निवीर योजना लाई गई है। बहुत सोच समझकर यह योजना लाई गई है। ऐसे में बिना अग्निवीर योजना के बारे में समझे। बिना उस संबंध में कोई पूरी जानकारी हासिल किए, इस तरीके से सदन को गुमराह करना, इसे कदापि उचित नहीं ठहराया जा सकता।”

रक्षा मंत्री ने राहुल गाँधी की ऐसी हरकत के लिए लोकसभा अध्यक्ष से अपील की कि वह ऐसा झूठ फैलाने के लिए राहुल गाँधी को सदन से ही बाहर कर दें। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि सदन झूठ बोलने की जगह नहीं। फैक्चुअल पोजिशन रखनी चाहिए अगर नेता प्रतिपक्ष अपने स्टेटमेंट का सत्यापन नहीं करते तो उन्हें माफी माँगनी चाहिए।

इसके अलावा अगर हम टाइम्स नाऊ की एक रिपोर्ट देखें तो उससे पता चलता है कि राहुल गाँधी सदन में साफ झूठ बोलते देखे गए। यहाँ अग्रिवीर बलिदानी का परिवार बता रहा है कि उन्हें एक बार 50 लाख रुपए मिले, फिर दोबारा में 50 लाख रुपए मिले और महाराष्ट्र सरकार से भी 10 लाख रुपए भी मिले है। यानी कुल मिलाकर उन्हें अभी तक 1 करोड़ 10 लाख रुपए की सहायता सरकार से मिल चुकी है।

बता दें कि अग्निवीर योजना को बदनाम करने का काम शुरुआत से ही होता रहा है। अब सदन में भी इस पर झूठ फैलाया जा रहा है जबकि हकीकत तो यह है कि इस योजना के तहत सेना में शामिल अग्निवीरों को अगर वीरगति प्राप्त होती है तो उन्हें अंतिम विदाई दी जाती है। अग्निवीर की सेवा शर्तों के मुताबिक युद्ध में बलिदान होने पर परिवार वालों को इंश्योरेंस (नॉन कॉन्ट्रिब्यूटरी) के 48 लाख रुपए, अग्निवीर द्वारा जमा सेवा निधि (30 पर्सेंट) और इतना ही अमाउंट सरकार द्वारा दिया जाएगा। वहीं एक्स ग्रेशिया के तौर पर 44 लाख रुपए, बाकी बचे कार्यकाल की सैलरी (चार साल कुल कार्यकाल) दी जाएगी। साथ ही आर्म्ड फोर्सेस बैटल कैजुअल्टी फंड से 8 लाख रुपए और AWWA की तरफ से तुरंत मदद के तौर पर 30 हजार रुपए दिए जाएँगे। मालूम हो कि यही सेवाएँ सामान्य प्रत्येक सैनिक के लिए होती हैं। इसलिए राहुल गाँधी का सदन मेंकिया दावा गलत होता है।

तौसीफ की दुकान पर गई हिंदू बच्ची, दुकानदार के भांजे ने पैंट खींचकर की गंदी हरकत: पीड़ित पिता बोले- पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई, झारखंड के साहेबगंज का मामला

झारखंड के साहेबगंज जिले में एक पाँच वर्षीय बच्ची के साथ एक मुस्लिम युवक ने छेड़छाड़ की। डरी सहमी बच्ची ने अपने घर आकर पूरी बात बताई। पीड़िता के पिता ने इस मामले में FIR दर्ज करवाने के लिए शिकायत दी है।

पीड़िता के पिता द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, थाना राजमहल के गुणिहारी पंचायत की रहने वाली एक पाँच वर्षीय बालिका सोमवार (1 जुलाई, 2024) को पास की ही एक कबाड़ की दुकान पर गई थी। इस दुकान का संचालन तौसीफ शेख करता है। यहीं दुकान पर उसका भांजा भी मौजूद था। जब बच्ची ने उसे कबाड़ के पैसे माँगे तो उसने इससे मना कर दिया।

शिकायत के अनुसार, इसके बाद जब बच्ची वापस घर जाने लगी तो वह उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। कथित तौर पर उसने बच्ची की पेंट खींच कर गन्दी हरकत की कोशिश की। इससे बच्ची को गहरा आघात लगा। वह किसी तरह खुद को बचाते हुए अपने घर वापस आई और परिजनों को घटना बताई।

बच्ची के परिजनों ने इसके बाद तौसीफ और उसके भांजे के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए पुलिस के पास शिकायत की है। बच्ची के पिता द्वारा दी गई शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। ऑपइंडिया से बात करते हुए बच्ची के पिता ने बताया कि अभी तक इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। वह लगातार इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।

बच्ची की माँ ने बताया, “मेरी बेटी तौसीफ के पास कबाड़ के बाकी ₹25 रुपए लेने के लिए गई थी। इसके बाद तौसीफ के भांजे ने बच्ची की पैंट खोल दी। उसने मुझे घर आकर पूरी घटना बताई। इसके बाद हमने शिकायत की।”

ऑपइंडिया ने इस संदर्भ में राजमहल थाने समेत साहेबगंज जिले के पुलिस अधिकारियों से सम्पर्क करने प्रयास किया है। हालाँकि, खबर लिखे जाने तक किसी भी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया है। मामले में नई जानकारी मिलने पर खबर अपडेट कर दी जाएगी।

खेल क्रिकेट का, झगड़ा पार्किंग का… वामपंथी मीडिया ने हिन्दू-मुस्लिम का दिया रंग: पुलिस ने दावे किए खारिज, झगड़े में युवक की मौत

हाल ही में गुजरात के आणंद जिले में हुए एक पार्किंग विवाद में एक मुस्लिम युवक की जान चली गई। विवाद के पीछे क्रिकेट टूर्नामेंट में बाइक की पार्किंग को लेकर हुई बहस थी। पार्किंग के चक्कर में हुई इस घटना को द वायर, मकतूब मीडिया, कश्मीरियत और क्विंट जैसी वामपंथी मीडिया ने हिन्दू-मुस्लिम विवाद के रूप में पेश किया। इन्होंने इस हत्या के मामले में हिन्दू-मुस्लिम विवाद पैदा करने की कोशिश की। पुलिस ने इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया है और साथ ही इन वामपंथी मीडिया के दावों को नकार दिया है।

यह घटना 22 जून, 2024 को हुई थी। इसमें मरने वाले युवक का नाम सलमान वोहरा था और वह 23 वर्ष का था। वह आणंद के चिखोदरा में देर शाम आयोजित एक क्रिकेट टूर्नामेंट देखने पहुँचा था, जहाँ यह विवाद हुआ। यहाँ सलमान के साथी युवक इमरोज अब्दुल रहीम का घटना के आरोपित से बाइक पार्किंग को लेकर विवाद हो गया।

थोड़ी ही देर में इस विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया और दोनों के बीच लात घूंसे चलने लगे। इसी बीच सलमान वोहरा ने इमरोज की तरफ से इस लड़ाई में बीच बचाव करने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बाद आरोपितों ने सलमान पर क्रिकेट बैट और धारदार हथियारों से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सलमान को अस्पताल ले जाया गया जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

इस मामले में इमरोज ने पुलिस के पास एक शिकायत दर्ज करवाई है। इमरोज़ की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। पहले इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और 2 को बाद में पुलिस ने पकड़ा। 2 आरोपित अब भी फरार हैं।

पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। गिरफ्तर सभी आरोपितों को पुलिस ने कोर्ट के सामने पेश किया हिया, जहाँ से उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया। इस मामले में, पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ धारा IPC की धारा 143, 147, 148, 149, 302, 324, 323 और 504 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पार्किंग विवाद को हिन्दू-मुस्लिम विवाद बताने लगा वामपंथी मीडिया

इस घटना के विषय में वामपंथी मीडिया पोर्टल्स वायर, द क्विंट, मकतूब मीडिया, कश्मीरियत ने खूब झूठ फैलाया। इन्होने इस पूरी घटना को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया।

इन मीडिया पोर्टल्स ने दावा किया कि घटना से पहले हिंदुत्व समर्थक मुसलमानों पर नाराज थे क्योंकि वह अच्छा खेल रहे थे और इसीलिए उन्होंने एक मुस्लिम लड़के को मार डाला। इन मीडिया पोर्टल्स ने दावा किया कि हिंदू भीड़ में इकट्ठा हुए थे और मैच के दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे।

मीडिया के दावे फर्जी: डिप्टी एसपी

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में पूरी सच्चाई जानने की कोशिश की। ऑपइंडिया ने आणंद के DSP जयेश पांचाल से संपर्क किया। ऑपइंडिया ने DSP पंचाल से इस घटना के विषय में जानकारी माँगी। उन्होंने बताया, ”मीडिया जिस तरह के सांप्रदायिक एंगल के विषय में बात कर रहा है, वह पूरी तरह गलत है। घटना के बाद पुलिस लगातार जाँच कर रही है। हमने गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ की है, उन्होंने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया है। घटना के दौरान मैदान में मौजूद लोगों के बयान भी लिए गए हैं। किसी ने अपने बयान में ऐसा कुछ नहीं कहा है।”

बातचीत के दौरान, उन्होंने आगे बताया कि खुद शिकायतकर्ता ने भी ऐसी कोई बात FIR में नहीं कही है। ऑपइंडिया ने जय श्री राम और हिन्दू भीड़ के दावों के विषय में भी पूछा। इस पर भी उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी जाँच में कोई भी ऐसी बात सामने नहीं आई है। उन्होंने साफ किया कि यह केवल बाइक पार्किंग को लेकर हुआ एक विवाद था, जो हिंसक हो गया और इसमें लड़के की मौत हो गई। इसके अलावा मीडिया में किए गए सारे दावे फर्जी हैं।

घटना में कोई साम्प्रादायिक एंगल नहीं: स्थानीय मुस्लिम नेता

डिप्टी एसपी से बातचीत के बाद ऑपइंडिया ने एक स्थानीय मुस्लिम नेता इस्माइल भाई से बात की। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया,”मैच के दौरान लगाए गए नारों का हत्या से कोई लेना -देना नहीं है। इस पूरी घटना में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है। जो हुआ है वह बहुत गलत है। मृतक की हाल ही में शादी हुई थी। हमलावरों ने उसे गुर्दे में मारा और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। हम सभी चाहते हैं कि जो लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें सजा मिले”

जब ऑपइंडिया ने उनसे हत्या में साम्प्रादायिक एंगल के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया, ”देखिए, घटना बहुत बुरी और गंभीर है। लेकिन इसमें कोई सांप्रदायिक तत्व नहीं है। कोण दिखाई नहीं देता है।” इस्माइल भाई से बात करने के बाद, ऑपइंडिया ने एक अन्य स्थानीय से बात भी की।

नाम न छापने की शर्त पर, उन्होंने बताया, ”दोनों पक्षों के लोग घटना के समय जमीन पर मौजूद थे। क्रिकेट मैच हमेशा यहाँ आयोजित किए जाते रहे हैं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। जो लोग कह रहे हैं कि यह दो समुदायों के बीच एक मामला है, वह पूरी तरह से गलत हैं। हर कोई यहाँ सद्भाव में रहता है। पूरा झगड़ा एक बाइक की पार्किंग को लेकर था। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार किया है और मामला अब अदालत में है। आशा है कि अदालत न्याय करेगी और आरोपितों को दण्डित करेगी।”