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राहुल गाँधी ने हिंदुओं को बताया ‘हिंसक’, प्रदर्शनकारियों संग कॉन्ग्रेसियों ने की ‘हिंसा’: पथराव-तेजाब की बोतलों से हमला, ऑपइंडिया से बोले BJP नेता- पूर्व नियोजित थी हिंसा

लोकसभा में हिन्दुओं को हिंसक कहने वाले बयान के विरोध पर अहमदाबाद कॉन्ग्रेस दफ्तर से भाजपा कार्यकर्ताओं पर पत्थर बरसाए गए। कॉन्ग्रेस दफ्तर से लगातार बजरंग दल और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला हुआ। इस हमले में कई कार्यकर्ता घायल हो गए। हमला करने वाली भीड़ में कॉन्ग्रेस MLA शैलेश परमार और पार्षद शहजाद पठान भी शामिल थे। इस मामले में FIR दर्ज करवाई गई है और घायलों का इलाज चल रहा है।

यह वाकया मंगलवार (2 जुलाई, 2024) को हुआ। राहुल गाँधी के लोकसभा में हिन्दुओं को हिंसक कहने के बाद बजरंग दल और भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने अहमदाबाद कॉन्ग्रेस दफ्तर पर विरोध करने का ऐलान किया था। यह सभी कार्यकर्ता जब प्रदर्शन करते हुए कॉन्ग्रेस दफ्तर के पास पहुँचे तो उन पर हमला चालू हो गया।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हुआ हमला: भाजपा नेता

भाजपा नेता विनय देसाई ने ऑपइंडिया को इस हमले के विषय में बताया, “राहुल गांधी के हिंदू विरोधी बयान के विरोध में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कॉन्ग्रेस कार्यालय के सामने कुछ दूरी पर सिर्फ बैनर पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान हमारे कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया। जब हमारे कार्यकर्ता खड़े थे तभी कॉन्ग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं और उनके द्वारा बुलाए गए गुंडों ने पत्थरों, काँच की बोतलों, लाठियों और धारदार हथियारों से हमारे कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया।”

उन्होंने बताया, “वह सब भीड़ में आए और पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए और उन पर हमला कर दिया। इस हमले में हमारे कई कार्यकर्ता घायल हुए हैं। घायलों में 5 लोगों को ज्यादा चोटें आईं हैं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। सिर्फ भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। युवा मोर्चा के कार्यकर्ता शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हमने शैलेशभाई परमार, शहजाद पठान और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।”

अहमदाबाद शहर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी इस संबंध में बताया, “भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता राहुल गाँधी के हिंदू विरोधी बयान के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के लिए कॉन्ग्रेस कार्यालय गए थे। वे केवल हाथ में तख्तियाँ लेकर गए थे। लेकिन कॉन्ग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर पत्थर, शराब की बोतलें और तेजाब की बोतलें फेंकी गईं। इस हमले में हमारे 5 कार्यकर्ता घायल हो गए। घायलों को तुरंत इलाज के लिए एसवीपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।”

हमलावर भीड़ में शामिल थे MLA शैलेश परमार

इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हाथों में लाठी-डंडे लेकर पुलिस और BJP कार्यकर्ताओं की ओर दौड़ रहे हैं। इस वीडियो में कुछ कार्यकर्ता पथराव भी करते नजर आ रहे हैं। इस पूरे वीडियो में सबसे खास बात ये है कि इस भीड़ के साथ कॉन्ग्रेस विधायक भी मार्च कर रहे हैं। उनके आसपास के लोग विरोधी पक्ष पर हमला कर रहे हैं। वीडियो में शैलेश परमार जोर-जोर से कुछ कहते नजर आ रहे हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक शैलेश परमार भी भीड़ में दिखे

यह भी सामने आया है कि इस पूरी घटना में अहमदाबाद पुलिस के जवान और होम गार्ड के जवान भी घायल हुए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पथराव की घटना में अहमदाबाद पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी और अन्य पुलिसकर्मी और एक होम गार्ड जवान समेत कुल 7 लोग घायल हुए हैं।

ईसाई बनाने के लिए लोगों को गाँव से दिल्ली की ‘कल्याण सभा’ में ले गया था कैलाश, यूँ ही नहीं हाई कोर्ट को कहना पड़ा बंद करो हिंदुओं का धर्मांतरण

एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर अहम टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने सोमवार (1 जुलाई 2024) को कहा कि यदि धर्मांतरण वाले धार्मिक आयोजनों को नहीं रोका गया तो देश की बहुसंख्यक आबादी एक दिन अल्पसंख्यक बन जाएगी। इस दौरान उच्च न्यायालय धर्मांतरण से संबंधित धारा के आरोपित की जमानत याचिका खारिज कर दी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के तहत एक आरोपित कैलाश की जमानत याचिका खारिज कर दी। कैलाश हमीरपुर जिले के मौदाहा थाने का रहने वाला है। उस पर IPC की धारा 365 के तहत भी मामला दर्ज है।

सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, “यदि इस प्रक्रिया को जारी रहने दिया गया तो इस देश की बहुसंख्यक आबादी एक दिन अल्पसंख्यक हो जाएगी। ऐसे धार्मिक आयोजनों को तुरंत रोका जाना चाहिए, जहाँ धर्मांतरण हो रहा हो और भारत के नागरिकों का धर्म परिवर्तन हो रहा हो।”

दरअसल, आरोपित कैलाश ने हमीरपुर की रहने वाली रामकली प्रजापति के भाई रामफल को अपने साथ लेकर दिल्ली गया। यहाँ उसे ईसाई मजहब द्वारा आयोजित ‘कल्याण सभा’ में भाग लेने के लिए ले जाया गया था। इतना ही नहीं, रामफल के अलावा उस गाँव के सैकड़ों लोगों को ईसाई में धर्मांतरण के लिए ले जाया गया था।

इस दौरान आरोपित कैलाश ने महिला से कहा था कि मानसिक बीमारी से जूझ रहे उसके भाई का इलाज करके एक सप्ताह बाद उसे उसके गाँव भेज दिया जाएगा। जब एक सप्ताह बाद भी जब महिला का भाई वापस नहीं लौटा तो महिला ने आरोपित कैलाश से इस बारे में पूछा। हालाँकि, कैलाश ने जो जवाब दिया उससे महिला संतुष्ट नहीं हुई।

याचिकाकर्ता कैलाश के वकील साकेत जायसवाल ने कोर्ट को बताया कि रामफल ईसाई नहीं बना था, न ही वह ईसाई है। वह कई अन्य व्यक्तियों के साथ ईसाई धर्म और कल्याण के लिए आयोजित सभा में शामिल हुआ था। इसमें कैलाश कोई भूमिका नहीं है। सोनू पास्टर ही ऐसी सभा आयोजित कर रहा था और उसे जमानत मिल चुकी है।

राज्य सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल पीके गिरि ने दलील दी कि इस तरह की सभा आयोजित करके बड़ी संख्या में लोगों को ईसाई बनाया जा रहा है। इसके लिए उन्हें मोटी रकम दी जा रही है। इसके अलावा, कैलाश गाँव से लोगों को ईसाई बनाने के लिए ले जा रहा था। और इस काम के लिए उसे मोटी रकम दी जा रही थी।

इसके बाद कोर्ट ने कहा कि यदि इस प्रक्रिया को जारी रहने दिया गया तो एक दिन इस देश की बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक हो जाएगी। ऐसे धार्मिक समागमों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए, जहाँ धर्मांतरण करने का काम होता है। कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 25 के संवैधानिक आदेश के विरुद्ध है। यह धर्मांतरण की नहीं, बल्कि धर्म के अभ्यास और प्रचार-प्रसार की अनुमति देता है।

न्यायालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और आर्थिक रूप से गरीब व्यक्तियों सहित अन्य जातियों के लोगों का ईसाई धर्म में धर्मांतरण करने की अवैध गतिविधि बड़े पैमाने पर की जा रही है। इस न्यायालय ने प्रथम दृष्टया पाया है कि आवेदक जमानत का हकदार नहीं है। इसलिए, उपरोक्त मामले में शामिल आवेदक की जमानत याचिका खारिज की जाती है।

बेंगलुरु एयरपोर्ट पर नहीं लगी है कुलविंदर कौर की ड्यूटी, जारी है विभागीय जाँच: सस्पेंशन खत्म होने के दावों का CISF ने किया खंडन, कंगना रनौत को मारी थी थप्पड़

खबरें चल रही ऐन कि अभिनेत्री कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारने वाली CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) की कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर को नौकरी में पुनः बहाल कर दिया गया है। ये भी बताया जा रहा था कि उनका ट्रांसफर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कर दिया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। पंजाब के सुल्तानपुर लोधी की रहने वाली है। उनके पति भी CISF में ही हैं। इनके 2 बच्चे भी हैं। उन्हें पुनः बहाल किए जाने का विरोध भी हो रहा है।

हालाँकि, CISF ने अब सफाई देते हुए इन खबरों का खंडन किया है। सुरक्षा एजेंसी ने मीडिया के दावों को नकारते हुए कहा था कि कुलविंदर कौर अभी भी निलंबित हैं और उनके खिलाफ विभागीय जाँच भी चल रही है।

बता दें कि कंगना रनौत हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद बन गई हैं। उन्होंने भाजपा के टिकट पर लड़ते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस के मंत्री विक्रमादित्य सिंह को 74,000 से भी अधिक मतों से हराया है। अब सामने आ रहा है कि CISF कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर को तुरंत बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुँच कर सेवा ज्वाइन करने का आदेश देने वाली खबर गलत है। इस मामले में उन पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है। उन पर पूर्ववर्ती IPC की धारा-323 (मारपीट) और 341 (रास्ता रोकने) की धाराएँ लगाई गई थीं।

कुलविंदर कौर का परिवार ब्यास नदी के किनारे स्थित मंड महिवाल गाँव का रहने वाला है। उनका भाई शेर सिंह ‘किसान मजदूर संघर्ष कमिटी’ का ऑर्गेनाइजेशन सेक्रेटरी है। ये संगठन मोदी सरकार के खिलाफ हुए ‘किसान आंदोलन’ में भी खासा सक्रिय था। ये घटना 7 जून, 2024 की है। कुलविंदर कौर का कहना था कि कंगना रनौत ने ‘किसान आंदोलन’ के दौरान पंजाबी महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, इसी गुस्से में उन्होंने उन्हें थप्पड़ मारा।

कुलविंदर कौर का परिवार कई बार कह चुका है कि उन्हें कंगना रनौत को थप्पड़ मारने का कोई पछतावा नहीं है, माफ़ी माँगना तो दूर की बात नहीं है। कुलविंदर कौर की माँ वीर कौर ‘किसान आंदोलन’ में बैठी थी। वीर कौर ने कहा था कि कहा था, “मेरी बेटी ने जो किया वो ठीक किया।” कंगना रनौत ने इसके बाद पंजाब में बढ़ते आतंकवाद पर चिंता जताई थी। उन्होंने बताया था कि कुलविंदर कौर ने उन्हें गाली भी दी थी। CISF ने अब कुलविंदर कौर को फिर से सेवा में बहाल नहीं किया है।

फैजान और तंजीम ने की दुकान में घुस मारपीट, दुकानदारों ने पकड़ा तो ‘मॉब लिंचिंग’ का झूठ फैलाने लगे इस्लामी-वामपंथी: यूपी पुलिस ने बताई सच्चाई

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कुछ मुस्लिम युवकों ने एक दुकान में घुस कर दुकानदार और नौकरों के साथ मारपीट की। उन्होंने दुकान पर काफी हंगामा किया। इसके बाद जब आसपास के दुकानदारों ने उन्हें पकड़ लिया और दोंनो के बीच हाथापाई हुई तो इसे इस्लामी हैंडल और वामपंथी मॉब लिंचिंग का एजेंडा चलाने लगे।

लगातार कई सामान्य घटनाओं की जानकारी को तोड़मोड़ कर पेश करने वाले सचिन गुप्ता आने एक वीडियो डालते हुए लिखा, “UP के जिला बुलंदशहर में भीड़ हिंसा, तंजीम और फैजान कार्बोनेट को बदलने संतलाल की दुकान पर गए थे। वहाँ दुकानदार ने मना कर दिया। विरोध पर भीड़ ने दोनों भाइयों को खूब पीटा। भीड़ पर कोई एक्शन नहीं, बल्कि पिटने वाले दोनों भाई CRPC-151 (शांतिभंग) में अरेस्ट हुए।”

अंसार इमरान ने इस घटना को मॉब लिंचिंग बताने की कोशिश की। उसने लिखा, “ताजा मामला यूपी के बुलंदशहर का है जहाँ मुस्लिम लड़के तंजीम और फैजान को वहाँ की हिंसक भीड़ ने बहुत बुरी तरीके से मारा पीटा है। मोब लिंचिंग का पूर्ण प्रयास किया गया है। सबसे हैरानीजनक बात यह है कि उस हिंसक भीड़ पर एक्शन की जगह पुलिस ने उल्टा शांति भंग के आरोप में उन दोनों को ही गिरफ्तार कर लिया है।”

खुद को पत्रकार बताने वाले रिजवान हैदर ने भी यही झूठ फ़ैलाने की कोशिश की।

घटना मॉब लिंचिंग नहीं, हमले की- पुलिस

यह घटना बुलंदशहर के गुलावटी में 30 जून, 2024 को हुई। गुलावटी के मुख्य बाजार के भीतर एक दुकान पर फैजान और तंजीम पहुँचे थे। यह दोनों आम बेचने का काम करते हैं और इनको पकाने के लिए कार्बाइड केमिकल लेने राजीव नारंग की दुकान पर पहुँचे थे।

फैजान और तंजीम ने इसके बाद दुकानदार से बहस करने लगे। उन्होंने दुकानदार के साथ बदतमीजी की। इसके बाद वह हिंसक हो गए और अपने दो और साथियों को बुला लिया। यह सभी दुकानदार समेत उसके नौकरों को मारने पीटने लगे। दुकानदार के साथ मारपीट के बाद फैजान और तंजीम के दोनों साथी भाग गए।

दुकानदार पर हमला होता देख यहाँ आसपास के व्यापारी इकट्ठा हो गए। उन्होंने फैजान और तंजीम को घटनास्थल से पकड़ लिया। व्यापारियों ने गुस्से में उनके साथ हाथापाई भी की। दोनों के खिलाफ व्यापारियों ने गुलावठी थाने पहुँच कर इस मामले में कार्रवाई की माँग की।

इसके बाद पुलिस ने तंजीम और फैजान को पकड़ कर उनका शांतिभंग में चालान कर दिया। हालाँकि, दोनों को थाने से ही जमानत मिल गई। इन दोंनो ने भी दुकानदार के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया है। इसमें इन्होने आरोप लगाया है कि इनके साथ बिना बात के मारपीट की गई।

ऑपइंडिया से बात करते हुए सिकंदराबाद की CO पूर्णिमा सिंह ने बताया कि मामले को जिस तरह से प्रचारित कियाजा रहा है, यह ऐसा नहीं है। उन्होंने बताया कि मामला पहले दुकानदार पर हमले और बाद में उनके द्वारा जवाबा दिए जाने का है। दोनों पक्ष का मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया है।

CO पूर्णिमा सिंह ने बताया कि तंजीम और फैजान के दो साथी भाग गए थे। तंजीम और फैजान के विरुद्ध शांतिभंग का मामला दर्ज कर लिया गया था और उन्हें थाने जमानत मिली थी। उन्होंने कहा है कि अभी दोनों पक्ष शांत हैं और कोई विवाद की बात नहीं है।

पुलिस के बयान से साफ़ हो जाता है कि मामला मॉब लिंचिंग का ना होकर हमलावरों को पकड़ने और उनके साथ हाथापाई का है। ऐसे में इस्लामी हैंडल और पत्रकार लगातार झूठ फ़ैलाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसा ही प्रयास इन्होंने झारखंड के कोडरमा में एक दुर्घटना में मारे गए मौलाना के विषय में किया था।

‘जाँच एजेंसियों को भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली छूट, पेपर लीक करने वालों को भी नहीं छोड़ेंगे’: राज्यसभा में PM मोदी का ऐलान, कहा – मणिपुर में कम हो रहीं हिंसा की घटनाएँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (3 जुलाई, 2024) को राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण का जवाब देते हुए संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि UPA काल में देश के प्रधानमंत्री पद की गरिमा को चकनाचूर कर दिया गया था और रिमोट कंट्रोल से व्यवस्था चलाई गई, कौन सा संविधान इसकी अनुमति देता है? PM मोदी ने कहा कि हमारे देश में संविधान को तार-तार कर के एक परिवार को प्राथमिकता दी जाती थी। उन्होंने पूछा कि कौन से संविधान की मर्यादा रखी आपने, और आज संविधान लहराते हैं, ‘जय संविधान’ कहते हैं।

उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आपलोग तो ‘इंडिया इज इंदिरा, इंदिरा इज इंडिया’ का नारा लगा कर जिए हो। उन्होंने कॉन्ग्रेस को संविधान का सबसे बड़ा विरोधी बताते हुए कहा कि वो 200-500 वर्ष पहले की बातें तो करते हैं, लेकिन आपातकाल की चर्चा होने पर कहते हैं कि ये बहुत पुरानी बात है। PM मोदी ने कहा कि विपक्ष के कई नेता आपातकाल के भुक्तभोगी रहे हैं, लेकिन कुछ मजबूरियाँ रही होंगी कि वो आज कॉन्ग्रेस के साथ हैं। उन्होंने इसे अवसरवादिता बताते हुए कहा कि अगर संविधान के प्रति समर्पण होता तो वो ऐसा नहीं करते।

उन्होंने आपातकाल को एक मानवीय संकट भी करार देते हुए कहा कि अनेक लोगों को प्रताड़ित किया गया, जयप्रकाश नारायण की स्थिति ऐसी ख़राब हुई कि वो बाहर निकलने के बाद भी ठीक नहीं हो पाए। पीएम मोदी ने अल्पसंख्यकों के हितैषी होने का दावा करने वालों से पूछा कि क्या आप मुजफ्फरनगर के तुर्कमान गेट पर मुस्लिमों के साथ क्या हुआ था इस पर बोलने की हिम्मत रखते हैं? उन्होंने याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस विरोधी दल ही आज उसका सहयोग कर रहे हैं।

उन्होंने 1 दिन पहले लोकसभा में अपने संबोधन को याद करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस अब ‘परजीवी’ हो गई है, जहाँ बिना किसी सहारे के जहाँ-जहाँ वो लड़ी है वहाँ वो परास्त हुई है, वो सहयोगी दलों के वोट खाकर फली-फूली है। पीएम मोदी ने कहा कि फेक नैरेटव और फेक वीडियो के द्वारा देश को गुमराह कर के इन्होंने अपना कारनामा किया। PM मोदी ने कहा कि बेशर्मी से ‘भ्रष्टाचार बताओ अभियान’ चलाया जा रहा है, पहले पूछते थे कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है लेकिन अब भ्रष्टाचारियों को जेल हो रही है तो पूछ रहे हैं कि ऐसा क्यों हो रहा।

पीएम मोदी ने कहा कि शराब घोटाला करें आप, बच्चों के क्लासरूम बनाने में घोटाला करें आप, पानी तक में घोटाला करें आप, आपकी शिकायत करे कॉन्ग्रेस, कोर्ट में घसीट कर ले जाए कॉन्ग्रेस, और जब कार्रवाई हो तो गाली देते हैं मोदी को। PM मोदी ने AAP से कहा कि हिम्मत है तो सदन में जवाब माँगो कि कॉन्ग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के AAP के घोटालों के सबूत देश के सामने रखे थे, वो सच्चे थे या झूठे। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजों का जवाब देते की हिम्मत नहीं है।

राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली में ED-CBI को भला-बुरा कहते हैं, वहीं केरल में ‘शहजादे’ वहाँ के CM को जेल भेजने के लिए इन्हीं जाँच एजेंसियों को कहते हैं। उन्होंने इसे ‘दोगलापन’ करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि AAP वालों ने छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला सामने आया तो इसी ED-CBI से कहते थे कि वहाँ के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री को जेल में डालो। पीएम मोदी ने इस दौरान 2013 के मुलायम सिंह यादव के बयान का जिक्र किया, “कॉन्ग्रेस से लड़ना आसान नहीं है। वो जेल में डाल देगी, वो CBI और IT विभाग का भय दिखा कर समर्थन लेती है।”

उन्होंने सपा के रामगोपाल यादव से पूछा कि क्या नेताजी भी झूठ बोलते थे? उन्होंने वामपंथी नेता प्रकाश करात का भी 2013 के बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जाँच एजेंसियों के दुरूपयोग का आरोप लगाया था। ‘CBI पिंजरे में बंद तोता है, जो मालिक की आवाज़ में बोलता है’ – PM नरेंद्र मोदी ने संसद में सुप्रीम कोर्ट के इस बयान का भी जिक्र किया। राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने जाँच एजेंसियों को ईमानदारी से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ काम करने की खुली छूट दे रखी है।

उन्होंने स्पष्ट ऐलान किया कि कोई भी भ्रष्टाचारी कानून से बच कर के नहीं निकलेगा, ये ‘मोदी की गारंटी’ है। पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक को राष्ट्रपति ने एक बड़ी समस्या बताया है, उन्हें अपेक्षा थी कि दलिया राजनीति से ऊपर उठ कर इस पर बात रखी जाती, लेकिन नौजवानों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दे को भी राजनीति की भेंट चढ़ा दिया। PM मोदी ने देश के नौजवानों को भरोसा दिलाया कि आपको धोखा देने वालों को हमारी सरकार छोड़ने वाली नहीं है, आपके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को सख्त से सख्त सज़ा मिले इसके लिए एक के बाद एक एक्शन लिए जा रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि संसद में इन गड़बड़ियों के खिलाफ कानून बनाया गया है, पूरी व्यवस्था को मजबूती दी जा रही है ताकि भविष्य में देश के नौजवानों को आशंका में न रहना पड़े, वो अपने सामर्थ्य का प्रदर्शन कर के अपना हक़ प्राप्त करें। पीएम मोदी ने UPA काल को याद करते हुए कहा कि पहले आतंकी घटनाएँ देश पर ग्रहण बनी हुई थीं, लेकिन जम्मू कश्मीर में आतंक के खिलाफ लड़ाई अंतिम दौर में हुई, बचे हुए नेटवर्क को भी नेस्तनाबूत करने के लिए हम पूरी व्यूह रचना कर के आगे बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब शायद ही जम्मू कश्मीर से पत्थरबाजी की खबरें आती हैं, अब वहाँ से आतंक और अलगाव खत्म हो रहा है। उन्होंने सबसे अधिक विश्वास पैदा करने वाली बात इसे बताया कि इन सब में जम्मू कश्मीर के नागरिक नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने राज्य में पर्यटन और कारोबार के बढ़ने पर ख़ुशी जताई। पीएम मोदी ने उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी विकास की बह रही धारा की बात करते हुए कहा कि सबको विश्वास में लेते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, “राज्यों के बीच सीमा-विवाद संघर्षों को जन्म देता रहा है। हम सबको साथ बिठा कर सहमति के साथ एक के बाद एक सीमा विवाद को खत्म करते जा रहे हैं। जो हथियारबंद गिरोह अंडरग्राउंड होकर व्यवस्था को चुनौती देते थे और खून-खराबा होता था, आज उनको साथ लेकर स्थायी समझौते हो रहे हैं। शस्त्र सरेंडर हो रहे हैं। अब ‘चलती है, होता है’ का ज़माना चला गया है। 21वीं सदी को भारत का बनाने के लिए हमारी शासन-डिलीवरी की व्यवस्था में Efficiency बढ़ानी होगी, इससे पारदर्शिता भी आती है, जीवन आसान बनता है।”

“मैं फिर से एक बार दोहराना चाहता हूँ। मणिपुर की स्थिति सामान्य करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। वहाँ जो कुछ भी घटनाएँ घटी हैं, 11,000 से अधिक FIR की गई है, 500 से अधिक लोग गिरफ्तार हुए हैं। वो छोटा सा राज्य है। हमने स्वीकार करना होगा कि मणिपुर में लगातार हिंसा की घटनाएँ कम होती जा रही हैं, शांति पर भरोसा रखना संभव हो रहा है। आज मणिपुर के अधिकांश हिस्सों में आम दिनों की तरह स्कूल-कॉलेज-दफ्तर व दूसरे संस्थान खुले हुए हैं। मणिपुर में भी देश के अन्य भागों की तरह परीक्षाएँ हुई हैं, बच्चों की विकास-यात्रा जारी है। केंद्र और राज्य सरकार सभी से बातचीत कर के शांति-सौहार्द के लिए रास्ता खोलने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। छोटी-छोटी इकाइयों को जोड़ कर के सब किया जा रहा है। पहले की सरकारों में ऐसा नहीं हुआ। गृह मंत्री और गृह राज्य मंत्री कई दिनों तक वहाँ रहे। बार-बार वहाँ जाकर संबंधित लोगों को जोड़ने के प्रयास हुए। राजनीतिक नेतृत्व तो है ही, लेकिन सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी वहाँ जाते हैं और समस्या के समाधान के लिए हर प्रयास के प्रयास कर रहे हैं, संपर्क में रहते हैं। इस समय मणिपुर में बाढ़ का भी संकट चल रहा है। केंद्र सरकार, राज्य के साथ मिल कर पूरा सहयोग कर रही है। NDRF की 2 टीमें वहाँ पहुँची है। प्राकृतिक मुसीबत में भी केंद्र और राज्य मिल कर मणिपुर की चिंता कर रहे हैं। हम सबको राजनीति ऊपर उठ कर वहाँ की स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश करनी चाहिए। मणिपुर की आग में घी डालने वालों को मैं आगाह करता हूँ – ये हरकतें बंद करें। मणिपुर ही ऐसे लोगों को रिजेक्ट करने वाला है।”

पीएम मोदी ने याद दिलाया कि मणिपुर में पहले 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा था, 1990 के दशक में भी वहाँ हिंसक घटनाएँ हुई थीं। उन्होंने याद दिलाया कि G20 के कार्यक्रम उन्होंने सिर्फ दिल्ली में नहीं करवाया क्योंकि उन्हें केवल खुद की वाहवाही नहीं करनी थी, कई राज्यों की ब्रांडिंग इन बैठकों के जरिए की गई। उन्होंने कोरोना के दौरान भी मुख्यमंत्रियों से लगातार संवाद और बैठकों को याद करते हुए कहा कि वो परस्पर सहयोग में यकीन रखते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि आज जब दुनिया भारत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है तो वो राज्यों से जुड़े इस सदन में आग्रह करेंगे कि सभी राज्य आगे आएँ और इसका फायदा उठाएँ। उन्होंने इस दौरान राज्यों के बीच रोजगार के लिए स्वस्थ स्पर्धा को देश के नौजवानों के लिए अच्छा बताया। उन्होंने जानकारी दी कि असम में सेमीकंडक्टर पर तेज़ी से काम चल रहा है, वहाँ के नौजवानों को, नॉर्थ-ईस्ट को, देश को इसका फायदा मिलेगा। उन्होंने जानकारी दी कि UN ने 2023 को ‘सुपर फ़ूड’ मिल्लेट्स ईयर घोषित किया, जो भारत के छोटे किसानों की ताकत है और जहाँ पानी कम है वहाँ भी ये उपजता है।

उन्होंने राज्यों से आगे आने की अपील करते हुए कहा कि हर राज्य अपने-अपने मोटे अनाज को लेकर आगे आएँ। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार का दखल आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन में कम से कम हो, हम इस ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो अपने बलबूते आगे बढ़ रहे हैं, उन्हें सरकार रोके नहीं। कलाइमेट चेंज पर भी पीएम मोदी ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति बढ़ती जा रही है, हमें मिल कर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ जल और आरोग्य को भी उतना ही महत्व देना होगा, राज्य इस मूलभूत कार्य की तरफ जुड़ें।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत निवेशकों की पहली पसंद है, राज्य आगे आकर इस अवसर का फायदा उठाएँगे तो उन राज्यों का भी विकास होगा।

‘PM मोदी ने विमान गिराने की रची साजिश, उनको चुनाव लड़ने से रोकें’: दिल्ली हाई कोर्ट ने पायलट की याचिका खारिज की, कहा- इसे इलाज की जरूरत, इस पर नजर रखें

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लोकसभा चुनाव से अयोग्य ठहराने को लेकर दायर की गई एक याचिका को ठुकरा दिया है। हाई कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले को लताड़ा भी है। हाई कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता को इलाज की जरूरत है।

दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गडेला ने इस मामले की सुनवाई की। हाई कोर्ट ने बुधवार (3 जुलाई, 2024) को मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “क्या आप ठीक हैं? आपकी याचिका आधी अधूरी है। आप एक छोर से दूसरे छोर पर जा रहे हैं। आप कह रहे हैं कि पीएम मोदी ने झूठी शपथ ली है और आपके प्लेन पर हमला हुआ था, आपकी बेटी गायब है, या कोई पूर्व चीफ जस्टिस आपको मारने की कोशिश कर रहा है।”

हाई कोर्ट ने कहा, “कोई भी इंसान आपकी याचिका समझ नहीं सकता। इसका कोई मतलब ही नहीं है। सिंगल बेंच ने बिल्कुल सही कहा कि याचिका में हवा-हवाई आरोप हैं।” कोर्ट ने कहा कि पीएम मोदी पर लगाए गए आरोप कल्पना का परिणाम हैं और इसके पीछे कोई सबूत नहीं है।

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लताड़ा भी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को दिन में तारे नहीं दिखाई दे रहे तो भी उसे इलाज की जरूरत है। कोर्ट ने याचिककर्ता के घर वाले इलाके के SHO, SDM और जिला जज से नजर रखने को कहा है। कोर्ट ने इसी के साथ उसकी याचिका खारिज कर दी।

यह याचिका डालने वाले का नाम कैप्टन दीपक कुमार है और वह पूर्व में एयर इंडिया का पायलट था। उसने दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिका लगाई थी कि पीएम मोदी और उनके मंत्रियों ने 8, जुलाई, 2018 को कथित तौर पर एयर इंडिया का एक विमान गिराने की साजिश रची थी और राष्ट्रीय सुरक्षा को अस्थिर करने का प्रयास किया था।

दीपक कुमार ने दावा किया था कि यह कथित कृत्य पीएम मोदी की संविधान के प्रति ली गई शपथ का उल्लंघन था। दीपक कुमार ने इसी कारण पीएम मोदी को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराने की माँग की थी। इससे पहले इस याचिका की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट की एकल बेंच ने की थी।

इस एकल बेंच ने भी 30 मई, 2024 को इस याचिका को रद्द कर दिया था। मामले की सुनवाई करते हुए एकल बेंच ने कहा था कि याचिकाकर्ता बिना किसी सबूत के फर्जी दावे कर रहा है। उसके द्वारा लगाए गए सभी आरोप फर्जी हैं। हाई कोर्ट की एकल बेंच के निर्णय के खिलाफ उसने चुनौती दाखिल की थी जो 3 जुलाई, 2024 को रद्द कर दी गई।

मौलाना का हुआ एक्सीडेंट, पुलिस अपनी गाड़ी में ले गई अस्पताल… फैलाया मुस्लिम की मॉब लिंचिंग का झूठ: कहा- भीड़ ने पीटकर मार डाला, हिंदू सही में हिंसक

झारखंड के कोडरमा जिले में हुई एक मौलाना की मौत पर पूरा इस्लामी-वामपंथी गैंग एक्टिव हो गया। मौलाना की मौत को लेकर कई इस्लामी हैंडल्स और ‘मुस्लिम पत्रकारों’ ने फर्जी दावे किए और झूठ फैलाया। इन लोगों ने झूठ फैलाते हुए दावा कि मुस्लिम को एक हिन्दू महिला को टक्कर मारने के कारण भीड़ ने मार दिया। मृतक मौलाना कोडरमा के बरकट्ठा इलाके में बसरामो तुर्काबाद में इमाम था।

मीर फैसल की लिखी ऑब्जर्वर पोस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि घुटारी करिया के पास अपनी बाइक से लौटते समय मौलाना की भीड़ ने पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट में आगे दावा किया गया है कि उसकी बाइक एक ऑटो से टकरा गई, इसमें पास के एक गाँव की महिला अनीता देवी अपने पति और देवर के साथ बैठी थी। महिला को बाइक टकराने के बाद गंभीर चोटें आईं। रिपोर्ट में आगे दावा किया गया कि मृतक के बेटे और AIMIM नेताओं ने इस मामले में मॉब लिंचिंग का आरोप लगाया है।

इस्लामवादियों के फर्जी दावे – मुस्लिम पहचान के कारण हुआ हमला

घटना के बाद, इस्लामवादियों ने सोशल मीडिया पर एक झूठी कहानी फैलानी शुरू कर दी कि एक हिंदू भीड़ ने मौलाना को पीट-पीटकर मार डाला। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में मौलाना के चेहरे पर खून बहता हुआ दिखाई दे रहा है। एक ‘कथित पत्रकार’ नसीर गियास ने शहाबुद्दीन की मौत को एक महीने में मुस्लिमों की ‘मॉब लिंचिंग’ सातवीं घटना करार दे दिया।

गियास ने पोस्ट किया, “यह भारत में एक महीने के भीतर मुस्लिम की सातवीं मॉब लिंचिंग है। झारखंड के कोडरमा जिले के रघुनियाडीह के इमाम मौलाना शहाबुद्दीन को बाइक से घर लौटते वक्त भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।”

एक अन्य ‘कथित पत्रकार’ वारिस मसीह ने मौलाना की मौत का जिम्मेदार मोदी सरकार और ‘गोदी मीडिया’ को बताया और कहा कि मुसलमानों के प्रति मोदी सरकार की ‘नफरत के कारणअसहिष्णुता और हिंसा को बढ़ावा मिला है।

मसीह ने लिखा, ”मौलाना शहाबुद्दीन की दुखद मौत के लिए मोदी सरकार और गोदी मीडिया जिम्मेदार हैं, जिनकी मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के प्रति निरंतर नफरत ने हिंसा और असहिष्णुता को बढ़ावा दिया है। अगर नफरत की इस लहर को रोका नहीं गया, तो एक दिन ऐसा आएगा जब कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा। मौन बहुसंख्यकों बोलों।”

महमूद अहमद ने एक कदम आगे बढ़कर इस मामले में हिंदुत्व को घसीट लिया और आरोप लगाया कि मौलाना की हत्या हिंसक ‘हिंदुत्ववादी भीड़’ ने की। अहमद ने लिखा, “झारखंड: कोडरमा में मौलाना की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। मौलाना शहाबुद्दीन की बाइक एक ऑटो से टकरा गई और महिला चोटिल हो गई। उसके पति महेन्द्र यादव ने पास के क्रिकेट मैदान से युवकों को बुलाया और कथित तौर पर उनकी पिटाई की। हिंदुत्व सही में हिंसक है।”

हेट डिटेक्टर नाम के अकाउंट ने भी यही झूठ चलाया। स्क्रॉल के लिए लिखने वाले एक शाहनवाज राणा ने भी यही झूठ प्रसारित करने का प्रयास किया।

भारत विरोधी पत्रकार राणा अय्यूब ने भी इस झूठ को हवा दी और लिखा, “पहलू, अखलाक और जुनैद की लिंचिंग ने लोगों में आक्रोश और आक्रोश पैदा किया और राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। सड़कों पर मुसलमानों की लिंचिंग को इस हद तक सामान्य बना दिया गया है कि वह अब अखबारों में भी नहीं आते।”

झारखंड पुलिस ने नकारे दावे

जहाँ सोशल मीडिया पर इस्लामी हैंडल्स इस मामले को मॉब लिंचिंग बता रहे हैं, वहीं झारखंड पुलिस ने इन दावों का खंडन किया है। झारखंड पुलिस ने बताया है कि इसमें कोई सांप्रदायिक पहलू नहीं है। पुलिस ने यह भी पुष्टि की है कि दुर्घटना के बाद अस्पताल ले जाए गए मौलाना ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

पुलिस ने कहा, “इमाम को दुर्घटना के कारण चोटें आईं। इसमें कोई धार्मिक एंगल नहीं है। उन्हें पुलिस की गाड़ी में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।”

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में भी मुस्लिमों को लेकर झूठा नैरेटिव प्रचारित किया गया था। हत्या की अलग-अलग घटनाओं को झूठी कहानी गढ़ी गई थी, इनमें पीड़ित मौलाना या इमाम थे। इन सब अलग-अलग कारणों से हुई घटनाओं को आधार बनाकर यह प्रचार करने की कोशिश की गई थी कि मुस्लिम खतरे में हैं।

बंगाल की ‘कंगारू कोर्ट’ में एक और महिला की पिटाई, आहत हो पीड़िता ने जहर पीकर दे दी जान: पीड़ित पति ने बताया- TMC नेता ने जबरन पंचायत में बुलवाया था

पश्चिम बंगाल में तालिबानी अदालतों का दौर थम नहीं रहा है। अब न्यू जलपाईगुड़ी जिले में एक महिला ने जनता के बीच पिटाई होने के बाद जहर पीकर आत्महत्या कर ली है। महिला पर एक लड़के के साथ अवैध सम्बन्धों का आरोप लगाकर उसे पीटा और बेइज्जत किया गया था। महिला को प्रताड़ित करने वाले इस कंगारू कोर्ट का आयोजन करने का आरोप TMC की नेता और उसके पति पर है। अब इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यू जलपाईगुड़ी जिले के फूलबाड़ी इलाके में यह घटना हुई। बताया जा रहा है कि 29 जून, 2024 को महिला और उसके पति को पंचायत में बुलाया गया और बेइज्जत करते हुए पीटा गया। महिला पर अवैध संबंध का आरोप इस कोर्ट में लगाया गया। इसके बाद महिला ने आहत होकर जहर पी कर आत्महत्या कर ली।

महिला के पति ने बताया कि उसकी पत्नी किसी के साथ चली गई थी। पति ने उसके गुमशुदा होने की रिपोर्ट भी लिखवाई थी। हालाँकि, इसके कुछ दिनों बाद वह लौट आई थी। महिला के लौटने पर स्थानीय नेता और पंचायत की मुखिया TMC नेता मालती राय और उसके पति शंकर राय ने उसे बुलाया। जब महिला और उसका पति वहाँ पहुँचे तो उनके साथ बदसलूकी की गई और उन्हें मारा पीटा गया। महिला का चरित्र हनन भी किया गया।

महिला के पति ने बताया कि उसकी पत्नी सबसे सामने यह पिटाई और चरित्र हनन की बात बर्दाश्त नहीं कर पाई। घर वापस आने के बाद उसने जहर पी लिया। इस कारण उसकी मौत हो गई। महिला के पति ने कुछ लोगों के विरुद्ध इस मामले में FIR दर्ज करवाई है।

TMC नेता मालती राय और शंकर राय ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि यह विवाद उनके पड़ोसियों के साथ हुआ है, हम वहाँ मौजूद नहीं थे। शंकर राय ने बताया है कि महिला वहाँ से कुछ देर के लिए जाने की बात कहकर गई और उसने जहर पी लिया।

पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस घटना के सामने आने के बाद फिर से एक बार ममता बनर्जी की सरकार पर प्रश्न खड़े हुए हैं। इस घटना के एक दिन पहले ही उत्तरी दिनाजपुर में ताजेमुल इस्लाम नाम के माफिया ने एक महिला को सार्वजनिक तौर पर पीटा था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। ताजेमुल को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था।

‘एक बार जो गिरा वह उठा नहीं’: हाथरस-एटा के अस्पताल में रात भर पोस्टमार्टम, मैनपुरी के आश्रम पर छापा, सूरजपाल को खोज रही UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के हाथरस में नारायण साकार हरि के प्रवचन में हुई भगदड़ के बाद अब प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। प्रशासन ने इस मामले में एक आयोजक के विरुद्ध FIR दर्ज कर ली है। वहीं जिस स्वयंभू बाबा के कार्यक्रम में यह भगदड़ हुई, उसकी तलाश में छापेमारी जारी है। घटना में मौतों का आँकड़ा 116 पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार (3 जुलाई, 2024) को हाथरस जाकर घायलों का हाल पूछेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाथरस भगदड़ में हुई मौतों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 110, 126 (2), 223 और 228 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस FIR में देवप्रकाश मधुकर को आरोपित बनाया गया है। वह इस स्वयंभू बाबा का मुख्य सेवादार बताया गया है। उसके साथ ही 21 और सेवादारों को इस मामले में आरोपित बनाया गया है।

वहीं इस नारायण साकार हरि उर्फ़ भोले बाबा उर्फ सूरजपाल की भी तलाश चल रही है। वह कार्यक्रम में भगदड़ होने के बाद अंडरग्राउंड हो गया है। उसकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। उसके हाथरस से निकल कर मैनपुरी पहुँचने की जानकारी पहले सामने आई थी। इसी सूचना पर पुलिस यहाँ पहुँची थी। लेकिन वह यहाँ नहीं मिला। बताया गया कि उसके समर्थकों ने पुलिस का रास्ता रोक लिया।

काफी देर बाद मैनपुरी के इस आश्रम में पुलिस घुस पाई तब तक वह यहाँ से फरार हो गया। पुलिस अब अन्य जगह उसकी तलाश कर रही है। वहीं इस भगदड़ में मरने वालों का आधिकारिक आँकड़ा 116 हो चुका है। मृतकों का रात भर पोस्टमार्टम चला है। इनका पोस्टमार्टम हाथरस और एटा में किया गया है।

हाथरस में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज सिंह और DGP प्रशांत कुमार पहुँच चुके हैं। वह यहाँ बचाव के कार्यक्रम पर नजर रख रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बुधवार (3 जुलाई, 2024) को हाथरस का दौरा कर रहे हैं। वह यहाँ घायलों और उनके परिजनों से मिलेंगे।

मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद उनके घर भेजा जा रहा है। इसके बाद भी बड़ी संख्या में शव अपस्ताल में ही हैं। कई शवों की पहचान भी नहीं हो पाई है। मृतकों के परिजन लगातार उन्हें ढूंढ रहे हैं। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने घटना के बाद आपबीती सुनाई है।

हादसे से बचने वाली एक लड़की ने बताया है कि बाबा का प्रवचन खत्म होते ही यह भगदड़ चालू हो गई। बताया गया कुछ लोग बाबा के चरणों की धूल लेने दौड़े। इसके साथ ही बड़ी भीड़ कार्यक्रम से भी निकली। इसके कारण व्यवस्था बिगड़ गई। कुछ लोग खेतों से होकर जाने लगे। तभी भीड़ अनियंत्रित हो गई और एक दूसरे को कुचल कर लोग आगे बढ़ने लगे। जो इस भीड़ के कारण गिरा, वह दोबारा उठ नहीं सका। इसी कारण से नीचे दब कर बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।

पोर्शे से 2 इंजीनियरों को कुचलने वाले किशोर के बाद अब उसके पिता और दादा को जमानत, ड्राइवर और परिवार के अपहरण का है आरोप

पुणे पोर्श कांड के आरोपित किशोर के पिता और दादा को जमानत मिल गई है। दोनों को ड्राइवर के अपहरण के मामले में जमानत मिली है। जमानत मिलने के बाद नाबालिग के दादा सुरेंद्र कुमार अग्रवाल को जेल से रिहाई मिल जाएगी, लेकिन अभी आरोपित के पिता और मशहूर बिल्डर विशाल अग्रवाल को जेल में ही रहना होगा। चूँकि विशाल अग्रवाल पर कई आरोप हैं, ऐसे में 2-3 मामलों में जमानत मिलने के बावजूद अभी खून की अदला-बदली के मामले में उसे जमानत नहीं मिल पाई है। वहीं, सोमवार को महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि आरोपित किशोर की रिहाई के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी की जा रही है।

बुजुर्ग दादा जेल से रिहा, पिता अभी जेल में ही रहेगा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने पारिवारिक ड्राइवर का अपहरण करने और उसे गलत तरीके से कैद करने के मामले में दोनों को जमानत मिली है। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने ड्राइवर को मामले का दोष अपने सिर पर लेने के लिए मजबूर किया, इसके लिए उसका अपहरण किया गया था। पुणे की कोर्ट ने इस अपहरण के मामले में दोनों लोगों को जमानत दे दी है। अदालत के फैसले के बाद आरोपित किशोर के दादा जेल से रिहा हो जाएँगे, लेकिन पिता को जेल में ही रहना होगा। पिता विशाल अग्रवाल पर खून के अदला-बदली करने में मिली-भगत के आरोप हैं।

इस मामले में पुणे पुलिस ने दावा किया कि 19 मई की आधी रात को दुर्घटना के बाद सुरेंद्र कुमार अग्रवाल ने ड्राइवर का अपहरण कर लिया था और उसे अपने बंगले में ले गए थे। क्राइम ब्रॉन्च ने कोर्ट को बताया कि उसकी पत्नी और बच्चों को भी यहीं लाया गया था। इस संबंध में क्राइम ब्रॉन्च ने अग्रवाल के बंगले के सीसीटीवी फुटेज की जाँच की थी। तलाशी अभियान भी चलाया गया। हालाँकि बचाव पक्ष के वकील प्रशांत पाटिल ने अदालत को बताया कि ड्राइवर खुद ही बंगले पर आया था। इसके साथ ही पाटिल ने कोर्ट को बताया कि मॉब लिंचिंग के डर से ड्राइवर उस रात अपने परिवार के साथ अग्रवाल के बंगले पर रुका था।

विशाल अग्रवाल को भी इस मामले में जमानत मिल गई है, लेकिन खून की अदला-बदली मामले में उनकी हिरासत जारी रहेगी। पहले के एक मामले में जमानत हासिल करने के बावजूद, विशाल अग्रवाल तीन अन्य चल रहे मामलों के कारण यरवदा सेंट्रल जेल में ही रहेंगे। विशाल अग्रवाल पर एक मामला सबूतों से छेड़छाड़ से संबंधित है। जिसमें आरोप है कि जाँच शराब का पता लगाने से बचने के लिए नाबालिग के खून के नमूने को उसकी माँ के साथ बदल दिया गया था।

किशोर की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी महाराष्ट्र सरकार

पुणे पुलिस पोर्श कार दुर्घटना मामले में नाबालिग की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी। अपनी इस याचिका में पुलिस बॉम्बे हाईकोर्ट के नाबालिग की हिरासत को गैरकानूनी बताते हुए जमानत देने के फैसले को चुनौती देगी। इसके लिए पुलिस को मुख्यमंत्री और राज्य के गृह मंत्रालय ने याचिका दायर करने की मंजूरी दे दी है। बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने पुणे पोर्श कांड के मुख्य नाबालिग आरोपी हिरासत को गैरकानूनी बताते हुए 25 जून को रिहाई का आदेश दिया था। कोर्ट ने नाबालिग की कस्टडी उनकी मौसी को देने का निर्देश दिया था, क्योंकि नाबालिग के माता-पिता और दादा भी जेल में बंद हैं। इसके बाद 26 जून को किशोर को बाल सुधार गृह से रिहा कर दिया गया था।