‘वाशिंगटन पोस्ट’ की खबर हो या 'गार्डियन' का संपादकीय, ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ का कवरेज हो या ‘सीएनएन’ की कवरेज, ये सभी बस 'व्हाइट मेन्स बर्डन सिंड्रोम' का ज्वलंत उदाहरण है।
सवाल बस इतना था कि क्या गाँधी परिवार ने अस्थायी क्वारंटाइन सेंटर्स, अस्पताल, ऑक्सीजन प्लांट्स बनवाने या प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था करने में कोई योगदान दिया है?
भारत में जब कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में एनडीटीवी को कोरोना में गैर विशेषज्ञता वाले व्यक्ति की जरूरत थी। अपनी राजनीतिक टिप्पणियों से एरिक ने देश में मोदी विरोधी लॉबी को भय और डर फैलाने की खुराक दे दी है।
एक अन्य लिबरल भी अपने भीतर की पीड़ा छिपा नहीं पाए। उन्होंने खिलाड़ी को तथाकथित योग्य, प्रामाणिक मूवमेंट को जोड़ने के लिए आगे बढ़ने की सलाह दे डाली। यह एक और उदाहरण है अपने देश को नीचा दिखाने का।
जबसे टीकाकरण के तृतीय चरण की घोषणा हुई है तब से बहस और अफवाहों का बाजार फिर से गर्म है। अब कॉन्ग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने टीकाकरण के तृतीय चरण के अभियान में अपने राज्यों की भागीदारी से इंकार कर दिया है।