बीजेपी नेता अर्चना विश्वास के घर पर TMC के गुंडों ने फायरिंग की। भाजपा का आरोप है कि उनके घर के ऊपर टीएमसी के गुंडों ने इसलिए फायरिंग की, क्योंकि उन्होंने 1 मार्च को अमित शाह की रैली में हिस्सा लिया था।
ये महिलाएँ हैं दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाक़ों की। ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान इन्होंने बताया कि वो पल-पल दंगाई भीड़ के डर के साए में जी रही हैं। महिलाओं ने अपना दुःखड़ा सुनाते हुए कहा कि समुदाय विशेष के लोग आकर उनके घरों को आग के हवाले करने की धमकी देते हैं।
शौहर पुलिस से: बहुत समझाता हूँ कि धरने पर मत जाओ, लेकिन चली जाती है, क्या करें! तभी बीवी अंदर से भाग कर आती है और डाँटते हुए कहती है: "तुमने कहा था कि धरने में जाओ।"
इलाके के नालों से निकलती लाशों से वहाँ पर हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी नालों से और भी शव निकल सकते हैं। स्थानीयों की मानें तो दंगाइयों ने हत्या करने के बाद शव को छिपाने के लिहाज से उन्हें नाले में फेंका था, इसलिए...
जहाँ भी उन्हें लगा कि बीमा और सरकारी मुआवजे का लाभ मिल सकता है, वहाँ दुकान से दो फर्नीचर बाहर निकाले और खुद ही लगा दी आग। उनकी तैयारी इतनी तगड़ी थी कि दूसरे मजहब के लोग अपने बच्चों को काफ़ी पहले ही स्कूल से ले गए और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा दिया था।
"दंगाइयों ने फिर से दुकान पर धावा बोल दिया। पहले तो दुकान में जमकर लूटपाट की ओर फिर देखते ही देखते उसे आग के हवाले कर दिया। इसी बीच पता चला कि गोदाम में रहने वाले हमारे कर्मचारी दिलबर नेगी के हाथ पैर काट कर उसे मार दिया गया।"
दंगाइयों ने उनसे पूछा, बता...ये पेट्रोल तुझपर छिड़कें या फिर गाड़ियों पर। दंगाइयों की बात सुनकर वर्कशॉप के मालिक ने उनके आगे बड़ी मिन्नतें की और अपनी जान को किसी तरह उनसे छुड़वाया। मगर, अपनी दुकान और वहाँ रखे सामान को वह उनसे न बचा सके। उनके सामने उपद्रवियों ने सर्विसिंग के लिए आई 15 गाड़ियो पर पेट्रोल डाला और सबको आग के हवाले कर दिया।
चाँद बाग़ में फूँक दी गई अमन ई-रिक्शा कम्पनी, आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन की बिल्डिंग के ठीक 3-4 मकान बाद मौजूद थी। हिन्दुओं की इस दुकान, अमन रिक्शा कम्पनी को पहले ताहिर हुसैन के लोगों ने लूटा और फिर उसमें आग लगा दी।
ये हरा-हरा सा एक फिल्टर
जो तुमने चढ़ा कर रक्खा है
उससे भगवा छँट जाता है
हिन्दू गायब हो जाता है
दिखता है बस इमरान-जुबैर
अंकित-दीपक छुप जाता है
ओ वामपंथ के रखवाले
ओ लम्पट लिबरल तुम साले!
दिल्ली दंगो की व्यथा सुनाती इस कविता को पढ़ें, सुनें औरों तक पहुँचाएँ। आप इसे अपनी आवाज में रिकॉर्ड कर आगे बढ़ाएँ।
"अगर तुम 'रसूल के गुलाम' हो तो तुम्हें 'ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुन रसूलुल्लाह' की कसम है कि तुम हिन्दुओं के पट्रोल पंप पर नहीं जाओगे। न तो हिन्दुओं की गाड़ियों पर चढ़ो और न ही उनकी दुकानों से दवाइयाँ खरीदने जाओ।"