वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो 'आजादी' के नारे लगा रहे हैं। ये वीडियो राजधानी दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के पास का बताया जा रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है जब एक बच्चा कहता है, "हम क्या चाहते" और उसके पीछे-पीछे खुर्शीद कहते हैं, "आजादी"
किंजल ने अहमदाबाद पुलिस पर भी कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि क्राइम ब्रांच के अधिकारी रात के 10 बजे घर में घुस जाते हैं और जबरदस्ती तलाशी लेते हैं। उनका कहना है कि गुजरात पुलिस और सरकार उनके पति को बेवजह प्रताड़ित कर रही है।
मुनाफ हलारी 1993 में जावेरी बाज़ार में ब्लास्ट मामले में दोषी था। जाँच एजेंसियों को लंबे समय से इसकी तलाश थी। मुंबई ब्लास्ट के बाद मूसा पाकिस्तान भाग गया था। वो पाकिस्तानी पासपोर्ट पर ही यात्रा भी कर रहा था, जब उसे मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि विरोध ऐसा हो कि किसी दूसरे को कोई परेशानी न हो। सुनवाई को दौरान जजों ने तीखी टिप्पणी भी की और कहा कि अनिश्चित समय के लिए कोई कैसे पूरी सड़क को जाम कर सकता है?
“हमें ध्यान रखना है कि हमें इतना भी न्यूट्रल (तटस्थ) नहीं होना है कि हमारी पहचान ही खत्म हो जाए। पहले हम मुस्लिम हैं और उसके बाद कुछ और हैं। हमारे अंदर का जो दीन है, जो इमान है, वह जिंदा रहना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि हम अल्लाह को भी मुँह दिखाने लायक न रह जाएँ।”
जानकारी न हो तो ठगने में आसानी रहती है। ये गणित तीन पार्टी वाले चुनाव तक चलता है, मगर कई पार्टियों के बीच होने वाले चुनावों में नहीं, ऐसा बताए बिना अगर विश्लेषण सुनाए जाएँ तभी तो लोग देखेंगे-सुनेंगे! अगर पता हो कि इसके नाकाम होने की ही संभावना ज्यादा है तो भला न्यूज़ बेचने वाले पर भरोसा कौन करेगा?
एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों को सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है। अर्थात यदि किसी के खिलाफ इस कानून के तहत केस दर्ज किया जाता है, तो बगैर जाँच के उसकी गिरफ्तारी हो सकेगी।
"जो मोदी-शाह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा वो सही मायने में मर्द-ए-मुजाहिद कह लाएगा। मैं वतन में रहूँगा, पर कागज नहीं दिखाऊँगा। कागज अग़र दिखाने की बात होगी, तो सीना दिखाएँगे कि मार गोली। मार दिल पे गोली मार, क्योंकि..."
हनुमान चालीसा के वितरण से शहर में कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है, पुस्तक मेले में आने वाले लोग भावनाओं में बह सकते हैं। - ममता सरकार की पुलिस ने हनुमान चालीसा के वितरण पर रोक लगाने के पीछे यही तर्क दिया।
“मुझे खुशी है कि भारत का बँटवारा हुआ क्योंकि अगर भारत का बँटवारा नहीं होता तो हमें कई 'डायरेक्ट एक्शन डेज' देखने पड़ते। ऐसी पहली कार्रवाई हमने जिन्ना के जीवित रहते 16 अगस्त 1946 को देखी थी, उस समय कलकत्ता में हजारों हिंदुओं को मार दिया गया था।"