"मैं सदन को और सदन के माध्यम से देश को विश्वास दिलाता हूँ कि दंगो के लिए जिम्मेदार लोग और दंगों का षड्यंत्र करने वाले लोग, चाहे वे किसी भी जाति, मजहब या पार्टी के हो, उन्हें किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा।"
इतिहास का यह पन्ना सन् 57 से भी पुराना है। तब सम्पूर्ण भारतवर्ष में मराठा शासन का प्रभाव चरम पर था। मुगलों से अपने तलवे चटवाने वाला एक सिंधिया भी था। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के पूर्वजों की बगावत को कुचलने वाला भी सिंधिया ही था।
कल गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में खुलासा किया था कि आईबी के अफसर अंकित शर्मा की हत्या की जाँच में जुटी एसआईटी को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। एसआईटी को वह वीडियो भी हाथ लगा है, जिसमें अंकित शर्मा की हत्या के कई राज छिपे हैं। यह वीडियो एक आम नागरिक ने पुलिस के पास भेजा है।
जयपुर के दो रिसॉर्ट में कॉन्ग्रेस ने मध्य प्रदेश के अपने विधायकों को रखा है। रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का यह 14वॉं मौका है। अब तक नौ राज्यों की सियासी उठापठक की वजह से यह देखने को मिला है। इस सिलसिले की शुरुआत 1982 में कॉन्ग्रेस के ही भय से हुई थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार संजय सिंह और उदित राज से पीएफआई सरगना की लगातार बातचीत होती थी। इसके लिए कॉल, मैसेज और व्हाट्सप्प का इस्तेमाल किया जाता था। मोहम्मद परवेज़ कई भड़काऊ व्हाट्सप्प ग्रुप्स से भी जुड़ा हुआ है, जो दंगा फैलाने का काम करते हैं।
WHO ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दिया है। अमेरिका ने भी यूरोप से आवाजाही पर 1 महीने के लिए रोक लगा दी है। इटली में सारी दुकानों पर ही ताले जड़ दिए गए हैं।
अमित शाह ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने 27 फरवरी से आज तक 700 से ज्यादा FIR दर्ज की हैं और 2,647 लोगों को हिरासत में लिया है। इस दौरान शाह ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि CCTV फुटेज में व्यक्ति का चेहरा दिखाई देता है यह न तो कोई धर्म देखता है और न ही किसी के कपड़े, क्योंकि ओवैसी ने आरोप लगाया था कि एक ही धर्म के लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है।
प्रदेश में इन दिनों काला दिन चल रहा है। सिंधिया जी के कारण प्रदेश में सरकार बनी लेकिन उनकी और उनके साथ उनके समर्थक विधायकों की कमलनाथ सरकार में उपेक्षा की गई। कमलनाथ ने ठान लिया था कि सिंधिया जी के समर्थित विधायकों को न तो कोई काम देना है न ही उनकी सुननी है।
यदि वह बिल कानून बन जाता तो आज ताहिर हुसैन पुलिस के शिकंजे में नहीं होता। उलटा दिवंगत आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा के परिवार पर ही कार्रवाई हो रही होती। फ़ारूक़ फैसल गिरफ़्तार नहीं होता, उलटा प्राचीन हनुमान मंदिर की रक्षा के लिए जान हथेली पर रखने वाले हिन्दू ही जेल में होते।
"मेरे गृह राज्य के लिए हमने एक सपना पिरोया था। 2018 में वहॉं सरकार बनी, लेकिन 18 महीनों में वे सपने बिखर गए। किसानों से 10 दिन में कर्ज माफी की बात कही गई थी। लेकिन 18 महीनों में नहीं हो पाया। रोजगार की जगह भ्रष्टाचार के अवसर पैदा हुए।"