बैंकों के विलय और विदेशी निवेशकों को राहत के बाद अब सरकार ने एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए क़दम उठाए हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि महंगाई दर नियंत्रण में है। RBI को खुदरा महंगाई दर 2% से 6% के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया गया है।
स्वामी की ‘legacy’ के आकलन में पार्टी, विचारधारा और निष्ठा को एक ही चीज़ मानकर देखने पर वे शायद ‘मौकापरस्त’, नज़र आएँगे। लेकिन किसी नेता को आंकने के पैमाने के तौर पर उसके कर्म उसके शब्दों से अधिक सटीक होते हैं और स्वामी को इसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
आप सोचिए कि हिन्दी जानने से आपकी संस्कृति कैसे प्रभावित हो रही है? अगर यह कहा जाए कि तुम तेलुगु छोड़ दो, और हिन्दी पढ़ो; तमिल में लिखे सारे निर्देश हटा दिए जाएँगे; कन्नड़ में अब नाटक या फिल्म नहीं बनेंगे; मलयालम की किताबों को जला दो... तब उसे हम कहेंगे कि 'हिन्दी थोपी जा रही है।'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी तक देश के सभी हिस्सों में सामान रूप से सिविल कोड लागू करने के लिए किसी भी प्रकार का प्रयास नहीं किया गया है। शाहबानो मामले में अपने फैसले की याद दिलाते हुए कहा कि उसने इस सम्बन्ध में ध्यान भी दिलाया लेकिन तब भी प्रयास नहीं किए गए।
मात्रा बड़ी महत्वपूर्ण चीज़ होती है। सिर्फ खाने में ही नहीं, भाषा में भी इसका अपना महत्व है। इसके होने या न होने से कई बार शब्दों के अर्थ बदल जाते हैं। हिन्दी भाषा में मात्रा उच्चारण के हिसाब से लगती है- जो आप बोलते हैं, पक्का-पक्का वही लिखा जाता है।
28 मार्च 2019 को जारी इस नोटिस से पता चलता है कि 14 संदिग्ध कंपनियों और खातों में से एक का लाभार्थी आयकर विभाग अंबानी परिवार के सदस्यों को मानता है। हालाँकि कंपनी के प्रवक्ता ने आरोपों को खारिज करते हुए नोटिस मिलने से इनकार किया है।
ED ने अदालत को बताया कि 317 बैंक खातों के जरिए धन शोधन किया गया है। ईडी ने कहा कि शिवकुमार के खिलाफ जाँच के अनुसार, शोधित धन 200 करोड़ रुपए से अधिक है और करीब 800 करोड़ रुपए मूल्य की बेनामी संपत्ति है।
अब केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) को यह अधिकार है कि वह उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। हाईकोर्ट ने राजीव कुमार का यह तर्क खारिज कर दिया कि उन्हें जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है। इसके बाद से राजीव कुमार की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।
उन्होंने इस्लाम के नाम पाकिस्तान का समर्थन किया। जिन्ना पर भरोसा किया। कुरान की कसम खाने वाले सैन्य कमांडर पर यकीन किया। बदले में मिला नरसंहार, जो जारी है 72 साल से। अभिव्यक्ति की आजादी, मानवाधिकारों और मजहब के पैरोकारों के होठ फिर भी सिले।
वकील रहे पी चिदंबरम का यह मामला भारतीय कानून के इतिहास में संभवत चुनिंदा मामलों में से एक होगा, जहाँ खुद आरोपित ही न्यायिक हिरासत के बजाय संस्थागत हिरासत (CBI/ED) में जाना चाहते हैं। जानकारों की मानें तो तिहाड़ जेल में चिदंबरम को वो सुख-सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं, जो...