पाकिस्तानी और पाकिस्तानी मूल के अंग्रेज हमलावरों ने बच्चों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा। हमला करने वाले इन प्रदर्शनकारियों की संख्या 1000 के आस-पास थी। लंदन के मेयर सादिक खान (पाकिस्तानी मूल का) और पुलिस पर सवाल...
"इस बैठक में कश्मीर मसले पर विचारों का आदान-प्रदान होगा। जिसमें आधिकारिक रूप से किसी की बात का कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा और न ही उन बातों का कोई रिकॉर्ड रखा जाएगा। साथ ही इस बैठक में हुई कोई बातचीत सार्वजनिक नहीं की जाएगी, क्योंकि..."
मज़े की बात यह कि 2001 में संघ के मुख्यालय पर तिरंगा फ़हराए जाने पर तालियाँ पीटने वाला वायर कश्मीर में तिरंगे की सम्प्रभुता पर उसी साँस में सवाल खड़े कर रहा है! दोगलेपन की ऐसी सानी मिलना मुश्किल है।
"शेख मुजीब को देखते ही मोहिउद्दीन नर्वस हो गया। उसके मुॅंह से केवल इतना ही निकला, सर आपनी आशुन (सर आप आइए)। मुजीब ने चिल्ला कर कहा-क्या चाहते हो? क्या तुम मुझे मारने आए हो? भूल जाओ। पाकिस्तान की सेना ऐसा नहीं कर पाई। तुम किस खेत की मूली हो?"
चीन चाहता है कि इस अनौपचारिक चर्चा में पाकिस्तान के विदेश मंत्री एसएम कुरैशी द्वारा यूएनएसी अध्यक्ष जोआना रोनकेका को लिखे पत्र (भारत द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले) के बारे में सभी सदस्यों की राय ली जाए।
फेसबुक के साथ ही यह वीडियो ट्विटर पर भी शेयर किया जा रहा है। ट्विटर पर दावा किया जा रहा है कि आर्टिकल-370 पर बात करने वाली यह महिला जम्मू और कश्मीर के अंतिम डोगरा शासक, महाराजा हरि सिंह की पोती है।
रिटायर्ड सेनाधिकारी ने कहा कि देश में जब तक सेना है, वो अपना पेट काटकर दे देगी लेकिन कश्मीर को भूखा नहीं रहने देगी। वहाँ कोई बीमारी से नहीं मर सकता, सेना मदद करती है। हम वहाँ कर्फ्यू के लिए भी हैं और अपने लोगों के लिए भी हैं।
"विदेशी यात्रियों में एक विरोधाभास था क्योंकि कुछ ने कहा कि वो बाबर था जिसने मंदिर को ध्वस्त कर दिया जबकि कुछ का कहना है कि इसे औरंगजेब के कार्यकाल के दौरान नष्ट किया गया। लेकिन उनके बीच अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान होने को लेकर कोई मतभेद नहीं था।"
"जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में जो पुरानी व्यवस्था थी उसने वंशवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। महिलाओं, बच्चों व दलितों के साथ भेदभाव हो रहा था। अनुच्छेद 370 पर हमारे निर्णय का विरोध करने वालों से मेरा सवाल यह है कि अगर ये इतना ही महत्वपूर्ण था तो इसे स्थायी क्यों नहीं बनाया गया?"
महबूबा मुफ़्ती ने कहा था कि अगर अनुच्छेद 370 से छेड़छाड़ की गई तो J&K में कोई तिरंगे को कंधा देने वाला भी नहीं बचेगा। पिछले 3 साल में 700 आतंकियों को कन्धों की ज़रूरत पड़ चुकी है, वो भी चार-चार। समय बदल गया है। ब्लैकमेलिंग का ज़माना गया।