Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाज़रूरत पड़ी तो परमाणु हथियारों के प्रयोग की नीति बदल भी सकती है: रक्षामंत्री...

ज़रूरत पड़ी तो परमाणु हथियारों के प्रयोग की नीति बदल भी सकती है: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को पोखरण में अपने एक बयान में कहा, "यह बात सच है जहाँ तक हमारी परमाणु हथियारों को लेकर नीति का सवाल है उसमें आज तक 'नो फर्स्ट यूज़' की रही है। लेकिन अब भविष्य में क्या होता है, यह उस वक्त के हालात पर निर्भर करता है।"

पाकिस्तान लगातार युद्ध से जुड़े या परमाणु हथियारों के उपयोग की धमकी भारत को देता रहा। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में 370 हटने के बाद बदले माहौल में पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार(अगस्त 16, 2019) को संकेत दिए कि भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल न करने से जुड़ी अपनी नीति को बदल भी सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को पोखरण में अपने एक बयान में कहा, “यह बात सच है जहाँ तक हमारी परमाणु हथियारों को लेकर नीति का सवाल है उसमें आज तक ‘नो फर्स्ट यूज़’ की रही है। लेकिन अब भविष्य में क्या होता है, यह उस वक्त के हालात पर निर्भर करता है।”

राजनाथ सिंह के इस बयान को मौजूदा हालात में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही पाकिस्तान को परोक्ष रूप से संकेत भी कि परमाणु हथियारों की रट वह छोड़ दे। वर्ना आज का भारत पहले वाला भारत नहीं है अब देश एक ऐसे मजबूत नेतृत्व के हाथों में है जो ज़रूरत पड़ने पर किसी भी तरह के निर्णय से हिचकेगा नहीं।

इससे पहले, पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद के संयुक्‍त सत्र में अनुच्छेद-370 के विषय पर धमकी देते हुए कहा था कि जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 (Article-370) हटाने के कारण भारत में पुलवामा जैसी घटनाएँ होंगी। उन्‍होंने कहा कि वो इस मामले को संयुक्त राष्‍ट्र लेकर जाएँगे। इमरान खान का कहना है कि पाकिस्तान अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय को बताएगा कि बीजेपी की नस्‍लवादी विचारधारा के कारण भारत में अल्‍पसंख्‍यकों के साथ कैसा बर्ताव किया जा रहा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -