रिपोर्ट के अनुसार करौली में हिंसा से पहले ही हथियार जुटा लिए गए थे। इनमें पत्थर, लाठी और डंडे शामिल हैं। पुलिस ने हमलावरों को रोकने के प्रयास नहीं किए।
प्रवीण राउत शिवसेना नेता के करीबी हैं और उस कंपनी के निदेशक भी जिसे चॉल के पुनर्विकास का जिम्मा मिला। उन्होंने इसी मौके का फायदा उठाकर घोटाले को अंजाम दिया।