भारत की बात

भारत स्वतंत्र हुआ, पर कैद ही रह गया पुराणों का अक्षयवट: पहली बार प्रयागराज महाकुंभ में हिंदू कर सकेंगे दर्शन, अकबर का लगाया प्रतिबंध...

कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक एवं सांस्कृतिक समागम है, जो पूर्णत: वैज्ञानिक अवधारणाओं पर आधारित है।

नागा संन्यासियों ने दिखाया पराक्रम, महाराणा प्रताप ने मुगलिया फौज के छुड़ा दिए छक्के: छापली तालाब-राणाकड़ा घाट की समाधियाँ आज भी सुना रहीं शौर्य...

कहा जाता है कि जब मुगल आक्रांता अकबर के खिलाफ मेवाड़ के महाराणा प्रताप युद्ध कर रहे थे, उस समय नागा साधुओं ने भी उनका साथ दिया था।

हम गुरु गोविंद सिंह के पुत्र हैं, अपना धर्म नहीं छोड़ सकते… जब साहिबजादों ने इस्लाम की जगह चुना बलिदान: वीर बाल दिवस पर...

गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों- जोरावर सिंह और फतेह सिंह के समक्ष वजीर खान ने इस्लाम कबूलने की शर्त रखी थी। लेकिन दोनों साहिबजादों ने धर्म बदलने से साफ मना कर दिया

‘गरीब नवाज’ कहलाए मणिपुर के मैतेई राजा पम्हीबा, हिंदुत्व को बनाया राजधर्म, संस्कृत में रखा राज्य का नाम: जन्म के बाद से ही मौत...

मैतेई राजा पम्हीबा ने हिंदू धर्म को राजधर्म बना दिया था और अपने राज्य कांगलीपक का नाम बदलकर मणिपुर कर दिया था।

इस्लामी लुटेरे अहमद शाह अब्दाली को रोका, मुगल हो या अंग्रेज सबसे लड़े: जूनागढ़ के निजाम ने जहर देकर हिंदू संन्यासियों को मारा, जो...

जूना अखाड़े के संन्यासियों ने इस्लामी लुटेरे अहमद शाह अब्दाली और जूनागढ़ के निजाम को धूल चटाया और अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया।

यह सनातनी आस्था का ही महाकुंभ नहीं, अर्थव्यवस्था को भी देता है गतिः आयोजन पर जितना खर्च करते थे अंग्रेज, उससे अधिक आता था...

सन 1906 तक महाकुंभ के आयोजन में ब्रिटिश भारत की सरकार जितना खर्च करती थी, उससे अधिक इस मेले से उसे राजस्व मिल जाता था।

मुगलों ने खुद लिखा, अंग्रेजों के इतिहास में भी दर्ज, सरकारी दस्तावेज भी… फिर भी संभल में कैसे मंदिर पर बन गई मस्जिद

हिन्दू पक्ष ने कहा है कि संभल में जहाँ आज जामा मस्जिद खड़ी है, वहाँ उनके आराध्य विष्णु का मंदिर हुआ करता था। उन्होंने सबूत भी रखे हैं।

जिन कपिल मुनि के कारण गंगा धरती पर आईं, मकर संक्रांति के दिन हिंदुओं को मिलता है मोक्ष… खतरे में उनका मंदिर, सो रही...

चक्रवात 'दाना' ने मिट्टी के कटाव को तेज कर दिया है। अब समुद्र और मंदिर के बीच सिर्फ एक किलोमीटर का फासला रह गया है।

नाथूराम गोडसे का शव परिवार को क्यों नहीं दिया? दाह संस्कार और अस्थियों का विसर्जन पुलिस ने क्यों किया? – ‘नेहरू सरकार का आदेश’...

नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे के साथ ये ठीक उसी तरह से हुआ, जैसा आजादी से पहले सरदार भगत सिंह और उनके साथियों के साथ अंग्रेजों ने किया था।

5000 भील योद्धा, गुरिल्ला युद्ध… और 80000 मुगल सैनिकों का सफाया: महाराणा प्रताप ने पूंजा भील को ऐसे ही नहीं दी थी राणा की...

आज हल्दीघाटी के युद्ध के नतीजे महाराणा प्रताप की तरफ झुकते दिखते हैं, तो उसके पीछे राणा पूंजा जैसे वीरों का अतुलनीय योगदान है।

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