सन् 1715 में चार्ल्स बून को मुंबई का गवर्नर बना कर भेजा गया और उसने प्रण लिया कि वो कान्होजी आंग्रे की ताकत को ख़त्म कर देगा। अभिमानी बून ने एक बड़ी सेना लेकर विजय दुर्ग पर आक्रमण किया।
ये वो समय था जब इंग्लैंड में सिविल वॉर चल रहा था। पुर्तगाल को स्पेन ने अपने अधीन किया हुआ था। भारत की गद्दी पर औरंगज़ेब को बैठे 5 साल भी नहीं हुए थे। इधर बॉम्बे का भाग्य लिखा जा रहा था।
राजा दाहिर ने जब कई दिनों तक शरण देने की एवज में खलीफा के उन दुश्मनों से मदद माँगी, तो उन्होंने कहा, "हम आपके आभारी हैं, लेकिन हम इस्लाम की फौज के खिलाफ तलवार नहीं उठा सकते। हम जा रहे हैं।"
सिख सम्राट रणजीत सिंह जब तक जीवित थे, तब तक उनके साम्राज्य में गोहत्या पर प्रतिबंध रहा। लेकिन, हिन्दुओं और सिखों के लिए दुर्भाग्य ये रहा कि महाराजा का 1839 में निधन हो गया।