सरिता और अनुज के अनुसार रविवार की सुबह वे दवाई लेने के लिए घर से निकलने वाले थे। तभी सरिता के मायके पक्ष से 20 लोगों ने उनपर हमला बोला और लाठी-डंडो से उनसे मारपीट की गई। उनपर पत्थर बरसाए गए।
पुलिस ने बताया कि देर रात छात्रों ने नारेबाजी की तो उन्हें शांत करा दिया गया। इसके बाद सुबह दोबारा करीब 150 छात्रों ने पत्थरबाजी की। लेकिन, हालात पर काबू पाने में पुलिस को ज्यादा देर नहीं लगी।
"छात्र होने का मतलब यह नहीं है कि वे कानून-व्यवस्था अपने हाथ में ले सकते हैं। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अधिकारों के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुॅंचाया जा सकता। ऐसे हालात में पुलिस को कदम उठाना ही होगा।"
तिहाड़ जेल में बंद निर्भया मामले के चारों दोषियों को इस हफ्ते फॉंसी दी जा सकती है। जल्लादों को वन टाइम मेहनताना मिलता है और यह रकम वह राज्य तय करता है जहॉं फॉंसी देने के लिए वे बुलाए जाते हैं।
मालदा, उत्तर दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिले में इंटरनेट सेवा पर रोक लगाई गई है। नदिया, बीरभूम, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जिलों में हिंसा, लूट और आगजनी की घटनाएँ सामने आई हैं।
यूनिवर्सिटी 5 जनवरी तक बंद कर दिया गया है। सुरक्षा लिहाज से अलीगढ़ में इंटरनेट सेवाएँ भी बंद कर दी गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 6 जिलों मेरठ, बुलंदशहर, कासगंज, बागपत, सहारनपुर एवं बरेली में एहतियातन धारा 144 लागू की गई है।
दिल्ली के जामिया नगर में जहॉं यह यूनिवर्सिटी स्थित है जिहादी नारे लगाए गए। कथित प्रदर्शनकारी 'हिंदुओ से लेंगे आजादी, छीन के लेंगे आजादी और लड़ के लेंगे आजादी' जैसे नारे लगा रहे थे। हिंसा भी हुई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 50 छात्रों को हिरासत में लिया। हालॉंकि देर रात उन्हें छोड़ दिया गया।
आठ दिसंबर को पीड़िता दादी के घर जाने के लिए हशमाबाद रोड पर खड़ी थी। इस दौरान ऑटो रिक्शा चालक आमिर उनके पास आया और दादी के घर तक लिफ़्ट देने की बात कही। लेकिन, दोनों बहनों को लेकर वह वाट्टेपल्ली चला गया और उन्हें बंधक बना लिया।
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने आशंका जताई है कि ये दिल्ली में गोधरा दोहराने की साज़िश है। वहीं मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और इस तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं है।
उनकी नज़र में हनुमान चालीसा का पाठ कर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने वाले छात्र 'धब्बा' हैं। लेकिन, स्टेशन पर लोगों को बंधक बना कर ट्रेन परिचालन ठप्प करने वालों से शांति की अपील करना भी उन्हें गॅंवारा नहीं। शायद इसलिए क्योंकि दंगाई अपने ही कौम के हैं।