आज बिहार लाचार है। बिहार के ग़रीब परिवारों के सामने उनके बच्चों की जानें जा रही हैं और सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं। आज बिहार के इन ग़रीबों की सुनने वाला कोई नहीं है। अस्पताल के अधिकारी भी इन्हें फटकार रहे हैं। 93 मौतों वाली भयंकर त्रासदी।
मुस्लिम समाज से पैसे निवेश करवा कर और उन्हें 14% से 18% के लाभ का सपना दिखाकर अब मंसूर खान रफ़ूचक्कर हो गया। निवेशक जब बेंगलुरु के शिवाजीनगर स्थित IMA के दफ्तर में अपना पैसा माँगने पहुँचे तो वहाँ कोई नहीं मिला। अब मंसूर खान कहाँ है, यह किसी को नहीं पता।
इससे पहले डॉक्टरों ने राज्य सचिवालय में बनर्जी के साथ बैठक के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और इसकी बजाय उनसे गतिरोध सुलझाने को लेकर खुली चर्चा के लिए एनआरएस मेडिकल कॉलेज अस्पताल आने को कहा था।
ऐसे छद्म तथाकथित बाबाओं की इन हरकतों से पूरा संत समाज बदनाम होता है। यज्ञ की विधियों का दुरुपयोग कर इस तरह की ग़ैरवाजिब भविष्यवाणी कर मिर्ची बाबा न सिर्फ अपना बल्कि अध्यात्म और कर्मकाण्ड की एक पूरी संस्कृति का मजाक बनाया है।
पुलिस ने बताया कि 21 फ़रवरी 2018 को जामा मस्जिद इलाक़े में मोहम्मद इक़बाल ने अपने दो साथियों नौशाद और रिज़वान के साथ मिलकर मक्की नाम के शख़्स पर गोली चलाई थी। हालाँकि मक्की इस हमले में अपनी जान बचाने में क़ामयाब रहा।
कानून के अंतर्गत डॉक्टरों के साथ मारपीट या फिर उनके ऊपर हमला करने की घटना संगीन अपराध की श्रेणी में आ सकता है और इस अपराध के लिए दोषियों को कम से कम 12 वर्ष तक की सजा मिल सकती है। इसके साथ ही इस कानून को गैर-जमानती रखने पर भी विचार किया जा रहा है।
दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों की असोसिएशन ने भी ममता सरकार को दो दिन (48 घंटे) का अल्टिमेटम दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि दो दिनों में पश्चिम बंगाल सरकार ने डॉक्टरों की माँगें स्वीकार नहीं की, तो फिर एम्स में भी अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।