यह फैसला पाँच जजों पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने दिया है जिसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस ए बोबडे शामिल थे।
आज हम गाज़ी फ़क़ीर की बात इसीलिए कर रहे हैं क्योंकि इससे जुड़ी एक बड़ी ख़बर आई है। उसके इतिहास और भूगोल को समझने से पहले हमें आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी के केस को समझना पड़ेगा, जिन्हें आज बर्ख़ास्त कर दिया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि उर्दू गेट को गिराने के पीछे शासन-प्रशासन की साजिश थी। उस गेट का नाम उर्दू गेट था इसलिए उसे गिराया गया।
सन 1989-90 के दौरान कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन करने पर मजबूर करने के लिए की गयी यह पहली हत्या थी। पंडितों के सर्वमान्य नेता पं० टपलू को मार कर अलगाववादियों ने स्पष्ट संकेत दे दिया था कि अब कश्मीर घाटी में ‘निज़ाम-ए-मुस्तफ़ा’ ही चलेगा।
दिसंबर 8, 1989 को रुबैया सईद के अपहरण के बाद पंद्रह दिनों तक ड्रामा चला था जिसके बाद वी पी सिंह सरकार द्वारा अब्दुल हमीद शेख़, शेर खान, नूर मोहम्मद कलवल, अल्ताफ अहमद और जावेद अहमद जरगर नामक आतंकियों को जेल से छोड़ा गया था।
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार को दिए इंटरव्यू में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है।
उम्र के जिस मोड़ पर आकर लोग घर-परिवार के साथ खुद के जीवन की स्मृतियों को भी भुलाने लगते हैं उस उम्र में इन बुजुर्गों में मतदान को लेकर जोश और सजगता आज भी बरकरार है।
उत्पात मचाने के बाद इस भीड़ ने दिल्ली रोड पर निजी वाहनों और रोडवेज बसों में भी तोड़फोड़ करके जमकर लूटपाट की। गनीमत सिर्फ़ इतनी रही कि वहाँ आम लोगों के संयम और सूझ-बूझ से शहर दंगे की आग में जलने से बच गया।