लैंगिक संबंधों के मशहूर जानकार रॉलो तोमासी कहते हैं कि महिलाएँ अपना यौन और सामाजिक जोड़ीदार हमेशा अपने से ‘ऊँचे’ दर्जे का ही चाहतीं हैं- और यह उनकी प्राकृतिक-जेनेटिक प्रवृत्ति है। यह अनुवांशिक विकास से विकसित हुई विशेषता है।
मुख्यधारा की मीडिया ने हमेशा की तरह मौन व्रत ले रखा है। किसी-किसी मामले में बोलना पड़ भी रहा है तो एक-एक शब्द इतनी कंजूसी से निकल रहा है कि मानों शोक जताने पर भी आचार संहिता लगी हुई है। न अब कहीं असहिष्णुता फ़ैल रही है, न ही प्राइम-टाइम डिबेट चल रहा है।
आरएसएस नेता और उनके गार्ड पर हुए हमले में हमलावर आतंकी की पहचान कर ली गई है। साथ ही हत्या में इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त कर लिया गया है।जानकारी के मुताबिक, मामले में गुलाम मोहम्मद सागर के बेटे जाहिद हुसैन सागर की पहचान आरोपी के तौर पर की गई है।
कोरेगांव की लड़ाई की प्रशंसा ब्रिटेन की संसद तक में हुई थी और कोरेगाँव में एक स्मारक भी बनवाया गया था जिस पर उन 22 महारों के नाम भी लिखे हैं जो कम्पनी सरकार की ओर से लड़े थे। यह प्रमाणित होता है कि कोरेगाँव की लड़ाई दलित बनाम ब्राह्मण थी ही नहीं, यह तो दो शासकों के मध्य एक बड़े युद्ध का छोटा सा हिस्सा मात्र थी।
वीडियो में आप देख सकते हैं कि जिस वक्त वो महिला साँस लेने के लिए रुकती है उस समय लोग उसे गालियाँ देना शुरू कर देते हैं। जबकि सभी लोग हो-हल्ला मचाने के साथ-साथ उसका उपहास उड़ा रहे हैं। इस वीडियो में एक बुजुर्ग व्यक्ति नाचता हुआ भी दिखता है।
रामनवमी के मौके पर शोभायात्रा में हिस्सा लेने वाले लोग जब अपने घर लौट रहे थे, तभी उन पर कुछ लोगों ने अपनी छतों पर से पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। अचानक पत्थरों की बौछार से शोभायात्रा में शामिल लोगों में अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया।
सिकनी गाँव में जुलूस निकालने के दौरान एक समुदाय के विरोध किए जाने के बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प हुई और फिर पत्थरबाजी भी होने लगी। इस पथराव की वजह से जुलूस में शामिल लोगों के अलावा कई अधिकारियों को भी चोटें आई है।
बुद्धिजीवी एक दूसरे को पत्र लिख कर आकाश को गिरने से रोककर उसी प्रकार आश्वस्त हैं जैसे नेहरू जी अंग्रेजी में ट्रिस्ट विद मिडनाईट का भाषण दे कर हो गए थे और भारतीय पत्नियाँ पतियों को आदर्श पुरूष होने का आदेश दे कर संतुष्ट हो जाती हैं।
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से एक भारतीय डॉ प्रीती यादव ने मुश्किल में फंसे दूसरे भारतीय परिवार की मदद के लिए सुषमा स्वराज से अपील की है।
इस समस्या से उबरने के लिए पूरी दुनिया को एक होने की जरुरत है, हम सब को अपने अपने स्तर पर कोशिश करते रहने की जरुरत है। हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के पीछे भी यही मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा सके। लेकिन साल के किसी एक दिन को इस तरह की दिवस मनाकर हम इस विकराल समस्या को नही सुलझा सकते, इसके लिए पूरे वर्ष सतत प्रयास करते रहने की जरूरत है।