7 दिन, 6 हमले, 5 हत्याएँ: संघी ही ‘फासिस्ट’, और संघी ही असुरक्षित

तथाकथित ‘अपने राज’ में ही संघी-भाजपाई मारे जा रहे हैं। फिर भी, असहिष्णु भी संघ है, हत्यारा भी संघ है, सब मीडिया पर कब्ज़ा भी संघियों का हो गया है…

सोशल मीडिया में चर्चित स्तंभकार और दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापक अभिनव प्रकाश ने आज सुबह ही लिखा:

Real Fascism in the last 7 days –

1.RSS leader murdered by Islamists in Kashmir

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2. BJP MLA murdered by leftists in CG.

3. 75 yr old Modi supporter lynched by Cong-DMK supporter in TN.

4. BJP Mandal President shot dead in Odisha.

Media & activists in seminars: BJP is fascist.’

उन्हें शायद खुद यह अंदेशा नहीं होगा कि उनकी पोस्ट पुरानी पड़ते-पड़ते दो और मामले प्रकाश में आ जाएंगे- तमिलनाडु में भाजपा सदस्य की लाश पानी में तैरती मिली, और महाराष्ट्र में भाजपा के महज समर्थन के लिए एक आदमी की न केवल पिटाई हुई, बल्कि एनडीटीवी पत्रकार ने उसे हल्का करने की भी कोशिश की

और विडंबना यह है कि इतने के बावजूद कि ‘अपने राज’ में ही संघी-भाजपाई मारे जा रहे हैं, मीडिया और समाज का एक वर्ग उन्हीं पर देश को असुरक्षित करने का आरोप लगा रहा है। ‘फासिस्ट’ से लेकर ‘आतंकवादी’ और ‘चड्ढी गैंग’ तक शायद ही ऐसी कोई राजनीतिक गाली है, जो संघ परिवार ने नहीं खाई है।

कश्मीर में संघ पदाधिकारी की दिनदहाड़े हत्या

संघ के पदाधिकारी चंद्रकांत शर्मा की न केवल अपने सुरक्षाकर्मी सहित हत्या होती है, बल्कि हत्या भी कश्मीर में होती है। एक अस्पताल के भीतर होती है– एक ओर ‘पुलिस स्टेट’ यानी अत्यधिक पुलिसिंग वाले राज्य के रूप में कश्मीर बदनाम है, और आरोप भाजपा पर ही है। वहीं दूसरी ओर लोकसभा चुनाव जैसे सुरक्षा के लिहाज से वैसे भी संवेदनशील समय में, पुलिस स्टेट के नाम से बदनाम राज्य में, भाजपा अपने ही लोगों को सुरक्षित नहीं रख पा रही है।

माओवादियों ने भाजपा विधायक को गोलियों से भूना

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में भाजपा विधायक भीमा मंडावी को 4 सुरक्षा कर्मियों समेत घेर कर मार डाला गया। माओवादियों ने उनकी गाड़ी के मार्ग में विस्फोटक लगा दिए और धमाके में उनके और गाड़ी में मौजूद लोगों के चीथड़े उड़ा दिए। माओवादी आतंकियों को भीमा मंडावी के जाने का मार्ग इतने सटीक तरीके से कैसे मालूम था, यह भी अभी साफ नहीं है।

मोदी का समर्थन करने के लिए वृद्ध की हत्या   

तमिलनाडु में एक 75 साल के कृशकाय वृद्ध व्यक्ति की केवल इसलिए हत्या कर दी गई कि उसने मोदी का ‘फैन’ होने की हिमाकत की थी। गोविंदराजन केवल मोदी ही नहीं, जयललिता और एमजी रामचंद्रन के भी फैन थे। पर अफ़सोस की बात यह हुई कि उन्हें पीटने वाला गोपीनाथ कॉन्ग्रेस-द्रमुक गठबंधन का फैन था, अतः उसके लिए तीनों ही नाम असह्य थे।

ओडिशा में भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष को गोली मारी

ओडिशा में भाजपा के क्षेत्रीय (ज़ोनल) अध्यक्ष मंगुली जेना की ओडिशा के खुर्दा में ‘अज्ञात हमलावर’ ने गोली मारकर हत्या कर दी।  रविवार (14 अप्रैल) रात को दिन भर की दोहरी राजनीतिक गहमागहमी (ओडिशा में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं) के बाद जेना अपने घर के लिए ही निकल रहे थे। इस हमले में उनके बगल में खड़े खुर्दा विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार कालू खंडयात्रेय बाल-बाल बचे।

भाजपा समर्थक की पिटाई, पत्रकारिता के समुदाय विशेष की चीयरलीडिंग   

महाराष्ट्र में किसी मोदी समर्थक ने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे की आलोचना कर दी। मनसे वालों को इतना बुरा लगा कि उसके घर में घुसकर, उसे उसके घर वालों के सामने पीटा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो एनडीटीवी के पत्रकार ने मामले की सीधी भर्त्सना करने की बजाय घुमा-फिर कर यह जताने की कोशिश की पीड़ित यदि खुद ‘गुंडा’ (यानी भाजपा समर्थक) न होता तो उसके साथ यह न होता।

तालाब में मिली भाजपाई की लाश

तमिलनाडु अब केरल-बंगाल के बाद भाजपाइयों-संघियों के तीसरे कब्रगाह में तब्दील हो रहा है। पहले भाजपा का फैन भर होने की कीमत एक बूढ़े व्यक्ति को जान देकर चुकानी पड़ी, और अब भाजपा के सदस्य की लाश एक तालाब में तैरती मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आना जरूर बाकी है पर सोशल मीडिया में हंसिया से कत्ल किए जाने की खबर तैर रही है।

मीडिया में हमेशा की तरह सन्नाटा

मुख्यधारा की मीडिया ने हमेशा की तरह मौन व्रत ले रखा है। किसी-किसी मामले में बोलना पड़ भी रहा है तो एक-एक शब्द इतनी कंजूसी से निकल रहा है कि मानों शोक जताने पर भी आचार संहिता लगी हुई है। न अब कहीं असहिष्णुता फ़ैल रही है न ही ‘emerging pattern of violence in the society’ पर प्राइम-टाइम डिबेट चल रहा है।

फिर भी, असहिष्णु भी संघ है, हत्यारा भी संघ है, सब मीडिया पर कब्ज़ा भी संघियों का हो गया है…


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