"किसान भाइयों से मिलें तो हमारा संबोधन राम-राम होना चाहिए और हमारी बहन-बेटियों की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों की राम नाम सत्य है की यात्रा निकलनी चाहिए।"
वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ कार्यकर्ता तो केक के लिए मंच पर ही अपने साथियों को धक्का देकर गिरा देते हैं। कुछ अपने एक या दोनों हाथों में केक लेकर भागते हुए भी नज़र आते हैं।
"पाकिस्तान और बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आने के बाद मटुआ समुदाय के लोग भारत में शरणार्थी की तरह रह रहे हैं। हम उन्हें किसी भी सूरत में नागरिकता देकर रहेंगे और ऐसा करने से हमें कोई नहीं रोक सकता है।"
किसानों ने कहा, "हमलोग उन प्रदर्शनकारियों के साथ नहीं हैं।" केंद्रीय मंत्री तोमर के साथ उन्होंने अपने अनुभव साझा कर के बताया कि उन्हें कैसे नए कानूनों से लाभ हो रहा है।