अक्टूबर 2019 तक पाकिस्तान को काले धन के जिहादियों के हाथ में पहुँचने पर नियंत्रण करके दिखाना था। ऐसा न करने पर उसके नार्थ कोरिया और ईरान की तरह ब्लैक लिस्ट में चले जाने का खतरा था। लेकिन.....
इससे पहले इमरान खान ने ऐलान किया था कि करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन और गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर आने वाले श्रद्धालुओं से एंट्री फीस नहीं ली जाएगी, इसके बावजूद उन्हीं की सेना प्रमुख बाजवा ने पीएम की बात को खारिज कर दिया।
गुरुद्वारा परिसर में एक बोर्ड लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें लिखा है कि भारतीय वायुसेना ने 1971 में गुरुद्वारा दरबार साहिब श्री करतारपुर साहिब पर बमबारी की थी, लेकिन वाहे गुरुजी की कृपा से गुरुद्वारे को कोई नुकसान नहीं पहुँचा।
हलाल चश्मा बनाने वाली अटल्ला इंडोनेशिया कंपनी के निदेशक सिद्धार्थ ने बताया कि उनके प्रोडक्ट को 2 अक्टूबर को ही हलाल सर्टिफिकेट मिल गया था। उनका उद्देश्य इंडोनेशिया की बहुसंख्यक आबादी यानी मुस्लिम लोगों में अपने वस्तु की कीमत और ब्रांडिंग को बढ़ाना है।
'कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म 2018' के आँकड़े बताते हैं कि सीपीआई (एम) ने पिछले साल 177 घटनाओं में करीब 311 लोगों की हत्या की। तालिबान, इस्लामिक स्टेट और बोको हराम जैसे आतंकी संगठनों के साथ उसने इस सूची में जगह बनाई है।
सेना ने आजादी मार्च को समाप्त करने से ऐसे वक्त में इनकार किया है जब इमरान के तख्तापलट को लेकर अटकलें लगाई जा रही। बताया जा रहा कि सेना अब बिलावल भुट्टो जरदारी को देश का प्रधानमंत्री बनाने की योजना पर काम कर रही है।
पाकिस्तान ने भारत में, भारत-पाकिस्तान सीमा से हज़ारों किलोमीटर दूर हुए एक हादसे को अपनी सेना की बहादुरी और भारत की शिकस्त बताते हुए प्रोपेगंडा करने की कोशिश की है।
पिछले दिनों जॉंच में नमृता के कपड़ों और शरीर पर किसी पुरुष डीएनए के सैंपल मिलने की बात सामने आई थी। आखिरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी उसकी हत्या किए जाने की बात पर मुहर लगा दी है।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के लिए जिस बैटरी से चलने वाली गाड़ी का इंतजाम किया, वो चारों तरफ से खुली है और जेड प्लस सुरक्षा के बराबर भी नहीं हैं। पाकिस्तान की इन्हीं हरकतों के कारण भारतीय जत्थे के करतारपुर जाने को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इस जत्थे में नवजोत सिंह सिद्धू, कैप्टेन अमरिंदर सिंह समेत केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, हरसिमरत कौर बादल, शिरोमणि अकाली दल के......
इसी साल की शुरुआत में कई नन महिलाओं द्वारा ईसाई मिशनरियों में होने वाले शारीरिक शोषण को लेकर कई खुलासे किए गए थे जिसके बाद खुद पोप फ्रांसिस ने भी इस बात को स्वीकार किया था कि बहुत से बिशप-पादरियों ने कई नन महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया ।