आतंकी संगठन ‘फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ ने इजरायल की ओर कम से कम 200 रॉकेट दागे। इजरायल ने जवाबी कार्रवाई में 34 फिलिस्तीनी आतंकियों को मार गिराया। इसके बाद वो दया की भीख माँगते हुए...
"मुझे मदद की जरूरत है। मेरा नाम जैस्मीन सुल्तान है। मैं यूएई के शारजाह में रहती हूॅं। मेरे पति का नाम मोहम्मद खिजर उल्ला है, मेरे पति ने मुझे बहुत बुरी तरह मारा है…मुझे मदद चाहिए।"
"... पाकिस्तान आने वाले कश्मीरियों का यहाँ हीरो के तौर पर का स्वागत किया जाता था। हम उन्हें प्रशिक्षित करते थे और उनका समर्थन करते थे। हम उन्हें भारतीय सेना से लड़ने वाले मुजाहिदीन मानते थे। वे हमारे हीरो थे।"
"मेरे दस्तावेज़ों को 2000 में मेरी माँ द्वारा दायर किया गया था। उन्होंने भारत में कई वर्षों तक मेरी परवरिश एकल माँ के रूप में की। मेरे माता-पिता की शादी नहीं हुई थी। कोई भी सभ्य सरकार जो प्रतिशोध नहीं लेना चाहती थी, वो आगे आ सकती थी और लापता दस्तावेज़ों या किसी विसंगति के बारे में स्पष्टीकरण माँग सकती थी।"
चीन के मुस्लिम क्षेत्र शिनजियांग के लिए आजादी की माँग करने वाले वॉशिंगटन स्थित समूह ‘द ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल अवेकनिंग मूवमेंट’ ने 182 संदिग्ध ‘‘हिरासत शिविरों’’ के बारे में संकेत दिए हैं, जहाँ उइगरों पर उनकी संस्कृति छोड़ने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया जाता है।
इंटरनेशनल कोर्ट आफ जस्टिस (ICJ) के निर्देशों का पालन करने के लिए पाकिस्तान आर्मी एक्ट में बदलाव करेगा। इसके बाद जाधव सिविल कोर्ट में अपील दायर कर सकेंगे। फिलहाल यह मामला सैन्य अदालत में है।
60 साल का पाकिस्तानी राशिद खान मुंबई आकर कल्पना से उसका धर्म और नाम बदलवाकर निकाह किया। जबकि उसकी 2 बीवी पाकिस्तानी है, उनसे 4 लड़के और 2 लड़की है। एक और भारतीय बीवी भी है, 2 बेटियों वाली। कल्पना को भी 1-1 लड़का, लड़की...
नेतन्याहू ने कहा कि अबू-अल अता एक 'Ticking Bomb' था जो पूरे इजरायल में कई आतंकी हमले की साजिश रच रहा था। इसके बाद आतंकी संगठन 'फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद' ने 200 रॉकेट दाग कर निर्दोषों को निशाना बनाया और बदला लेने की धमकी दी।
"आखिर टिड्डे इतनी दूर से आए हैं। इसलिए यहाँ के लोगों को उन्हें खाना ही चाहिए। कराची के लोगों को टिड्डियों के पकवान बनाने चाहिए। टिड्डों के साथ बिरयानी और करी खाइए। इनके स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करके इस स्थिति का लाभ उठाना चाहिए।"
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 24 मई, 2018 तक 9,00,000 से अधिक रोहिंग्याओं ने म्यांमार के रखाइन प्रांत से पलायन किया है। 2017 में सैन्य कार्रवाई के बाद बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के कारण ये भागे हैं।