इस गंभीर आरोप को अमेरिकी राष्ट्रपति ने सिरे से खारिज कर दिया और कहा, “मैं अपने जीवन में इस महिला से कभी नहीं मिला।” अपने बयान में ट्रंप ने इस आरोप को फर्जी खबर बताया और सवाल किया कि इस घटना का कोई सबूत या गवाह क्यों नहीं है?
हालाँकि, अपनी इस हरकत पर लोगों की प्रतिक्रिया देखने के बाद लड़के ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर माफी माँग ली है। लेकिन लोगों का गुस्सा उसके प्रति शांत नहीं हो रहा है।
इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के भीतर बंद कमरे में योग किया गया। इसकी जानकारी संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधी सैयद अकबरुद्दीन ने दी। उन्होंने इस दौरान उम्मीद जताई कि जनरल असेंबली हॉल में किया गया ये पहला इनडोर योग सत्र योग करने वालों के लिए भविष्य में इसके महत्ता को और अधिक सुदृढ़ करेगा और खुशहाली लेकर आएगा।
फारस की खाड़ी में अमेरिका के युद्धपोत तैनात हो चुके हैं। ईऱानी नौसेना भी इस इलाके में अपनी तैनाती बढ़ा चुकी है। आशंका है कि ईरान औऱ अमेरिकी नौसेना के बीच टकराव की वजह से दूसरे देशों के पोत चपेट में आ सकते हैं। इसीलिए भारतीय व्यापारिक पोतों को सुरक्षा प्रदान करने के लिये भारतीय नौसेना ने अपने दो पोत वहाँ भेजे हैं।
ईरान के अमेरिकी ड्रोन मार गिराने की खबर के बाद से ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रूड यानी कच्चे तेल की कीमतों में आग लग चुकी है। कुछ ही मिनटों में क्रूड की कीमतों में 3% से ज्यादा का उछाल देखा गया। अगर दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बने रहते है या युद्ध की नौबत आती है तो कच्चा तेल के दाम में 10% की बढ़ोतरी का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।
यह हमला ऐसे वक्त पर हुआ है जब कुछ दिनों पहले ही अमेरिका ने इरान पर उनके ड्रोन पर मिसाइल हमला करने का आरोप लगा चुका है। बीते हफ्ते जून 13, 2019 को ओमान की खाड़ी में दो तेल टैंकरों पर भी हमले किए गए थे लेकिन यह हमले किसने किए थे इसके बारे में साफ नहीं हो सका। हालाँकि अमेरिका ने हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था।
इमरान ख़ान ने अपने ट्वीट के साथ लिखा कि जो खलील जिब्रान के इस उद्धरण को समझ लेते हैं, वो एक संतुष्टिपूर्ण जीवन जीते हैं। इसके बाद लोगों ने रिप्लाई में बताया कि यह पंक्तियाँ जिब्रान की नहीं बल्कि टैगोर की है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि चीन अल्पसंख्यकों की “नैतिक सफाई” कर रहा है। वह दिन दूर नहीं जब चीन अपनी सरजमीं से या तो इस्लाम को पूरी तरह मिटा देगा या उनकी मजहबीं परम्पराओं से लेकर, सभी मजहबी व्यवहार पूरी तरह बदल देगा। जिस तरह से चीन कार्य कर रहा है। उसकी सख्त नीतियों को देखते हुए, ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
श्री लंका के इस पहले उपग्रह (कक्षा में स्थापित) का वजन 1.5 किलोग्राम है। यह श्री लंका और उसके आसपास के क्षेत्रों के चित्र लेकर उस इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों को समझने में और बेहतरी प्रदान करेगा।