कापड़ी ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक रिपोर्टर को इसीलिए जॉब छोड़नी पड़ी थी क्योंकि मोदी-विरोधी स्टोरीज करने के लिए उसपर दबाव बनाए जा रहे थे। रिपोर्टर को कापड़ी की मोदी-विरोधी एडिटोरियल पॉलिसी से आपत्ति थी।
शोभा डे ने अपने लेख में कहा था कि बुरहान वानी को भले ही 'अल्ट्रा-पेट्रियट' आतंकी कहें या गद्दार, कश्मीर के लोगों का वो हीरो था, उसमें 'करिज़्मा' था। हिंदुस्तान के नेताओं को घेरते हुए उन्होंने लिखा था कि वे अपने घरों में आराम से बैठकर 'शांतिप्रिय' कश्मीरियों के बारे में खोखले भाषण देते हैं।
कनौजिया द्वारा विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के सेनाध्यक्ष जनरल रावत की तुलना एक ऐसे व्यक्ति से की गई, जिसने भारतीय जनता का नरसंहार किया था। जनरल डायर का गुनाह इतना बड़ा था कि उन्हें अपनी ही सरकार द्वारा शुरू की गई जाँच का सामना करना पड़ा था।
रवीश कुमार ने पुलवामा हमले के बाद एक इंटरव्यू में कहा था कि भारतीय मीडिया बेरोजगारी जैसे मसलों की बजाए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को तूल दे रही है ताकि सत्ताधारी दल को चुनावी फायदा हो सके। पाकिस्तानी मीडिया ने इस बयान का हवाला देकर भारत पर युद्धोन्माद पैदा करने का आरोप लगाया।
कॉन्ग्रेस के भीतर कुछ लोगों का मानना है कि पार्टी अध्यक्ष के रूप में अगर कोई ग़ैर-गाँधी पद पर आसीन होगा तो पार्टी टूट जाएगी। बता दें कि पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा जैसे नाम भी इस दौड़ में शामिल थे।
कश्मीर में अनुच्छेद-370 के कुछ प्रावधानों के निष्क्रिय होने के बाद से पाकिस्तानियों को ज़ाहिर तौर पर सदमा लगा है। और इसी सदमे की प्रतिक्रिया में इमरान खान सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनका आखिर में नुकसान हमेशा की ही तरह उन्हें ही उठाना पड़ेगा।
पाकिस्तान के Addl IGP डॉ. जमील अहमद ने 'बेचारे कश्मीरियों के मानवाधिकार का हनन' के अपने प्रोपगेंडा को हवा देने के लिए हिन्दुस्तान की सरकार को 'अमानवीय' करार देने वाले बरखा दत्त के ट्वीट को शेयर किया है। यह प्रोपगेंडा भारत के खिलाफ पाकिस्तान वर्षों से चला रहा है और बरखा के बयान कई मौकों पर उनके काम आए हैं।
न्यूज़ 18 कन्नड़' ने एक ऑडियो टेप जारी किया है। इस टेप में आईपीएस अधिकारी भास्कर राव किसी फराज नामक व्यक्ति से बात कर रहे हैं, ताकि वह बेंगलुरू के पुलिस कमिश्नर बन सकें। फराज अहमद पटेल सहित कई कॉन्ग्रेस नेताओं का नाम लेता है।
जब भारत सरकार का रुख साफ़ है कि पूरा का पूरा जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और यह हमारा आंतरिक मुद्दा है, ऐसे में इन प्रोपेगेंडा पोर्टल्स द्वारा पाकिस्तानी अजेंडे को आगे बढ़ाना कहाँ तक उचित है?
जम्मू-कश्मीर पर फैसला आने के बाद सक्रिय हुए पाकिस्तानी कलाकारों की सूची में आतिफ असलम, वीना मलिक, माहिरा खान जैसे कई नाम शामिल हैं। ये वह लोग हैं जिन्होंने नाम और शोहरत भारत से कमाई लेकिन जब बात अपने मुल्क की आई तो कर्मभूमि भारत पर शाब्दिक हमला करने से ये नहीं चूँके।