मीडिया

मोदी पर चिल्लाने वाले मीडिया गिरोह से कुछ सवाल जो राहुल गाँधी से नहीं पूछे गए

विपक्ष की यह पुरज़ोर कोशिश रहती है कि पीएम मोदी द्वारा दिए गए साक्षात्कार में उन्हें किस तरह से बेवजह के मुद्दों पर घेरा जा सके। इनमें कुछ मीडिया संस्थान और मीडियाकर्मी भी शामिल हैं जिन्हें दुष्प्रचार करने में महारत प्राप्त है।

राहुल ने स्वीकारा कि कुछ पत्रकार ‘उनके साइड के हैं’ जो मोदी से कड़े सवाल पूछते हैं

राहुल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई कि देखिए कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी खुद स्वीकार रहे हैं कि पार्टी के 'पाले हुए' कुछ पत्रकार है जो कॉन्ग्रेस के लिए काम करते हैं।

बनारस के लोगों ने राजदीप का मुँह किया बंद, कहा, ‘कॉन्ग्रेस का कोई एक काम बता दो’

सरदेसाई पर इस तरह से सीधा अटैक करने के बाद, कॉन्ग्रेस के लिए तमाम तरह से जीवन भर पैडलिंग करने के बावजूद, राजदीप के पास ऐसा एक भी काम नहीं था कॉन्ग्रेस का जिसे वो बनारस की जनता को गिना सकें। वहाँ बैठे बनारसियों ने उन्हें पानी पीला दिया और दुकान पर बैठे लोगों ने इस सन्नाटे को चीरने के लिए माहौल मोदी मय कर दिया। साथ ही यह भी बता दिया कि बनारस किसी के भड़कावे में नहीं आने वाला, वह विकास के साथ है, मोदी के साथ है।

BJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पत्रकारिता के ‘नाराज फूफा’ गायब

नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने की प्रबल इच्छा रखकर महागठबंधन की रैली से लेकर चार्टर प्लेन में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ घूमने वाले NDTV के वरिष्ठ पत्रकार कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। विगत 4-5 सालों में देखने को मिला है कि अक्सर यह पत्रकार, शादी-बरात में नाराज फूफा की तरह ही मीडिया और प्राइम टाइम में नजर आते रहे हैं।

एडिटर्स गिल्ड की चुप्पी: लाख गाली खा लें, लेकिन चाटेंगे उन्हीं के… तलवे

चाहे बात रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों पर हमले की हो, या मणिशंकर 'नीच' अय्यर जैसे व्यक्ति द्वारा पत्रकार को 'फ़क ऑफ़' कहने की, गुप्ता जी के लड़के के एडिटर्स गिल्ड को साँप सूँघ जाता है। इसलिए कि ‘दुधारू गाय की लात सहनी पड़ती है।’

‘मस्जिद बन्दर’ = बंदरों की मस्जिद: मोदी का मजाक उड़ाने वाली गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी की समझ

गालीबाज ट्रोल ने इस एडिटेड वीडियो से एक बार फिर अपनी बकलोली का परिचय दिया है। वैसे भी अभी फेक न्यूज़ का धंधा मंदा चल रहा है तो ऐसे एडिटेड वीडियो पर अपनी बकलोली को डिफेंड करके अपनी काल्पनिक 'निष्पक्ष' पत्रकारिता का प्रमाण दे रही है।

स्क्रॉल डॉट इन: यहाँ मोदी-विरोध की खबरों का पंक्चर ठीक किया जाता है

जब ट्वॉयलेट पेपर खत्म हो जाता है तो आप ढूँढते हैं कि वो कहाँ रखा हुआ है। इसी क्रम में जब स्क्रॉल वेबसाइट पर यह देखने पहुँचा कि क्या इन्होंने ममता बनर्जी के बंगाल में हो रहे चुनावी हिंसा पर कुछ लिखा है? तो, कुछ नहीं मिला।

ख़बर का असर: Exit Poll दिखाने वाले 3 मीडिया संस्थानों को EC से नोटिस, माँगा स्पष्टीकरण

स्वराज एक्सप्रेस के लिए यौन शोषण आरोपित विनोद दुआ ने एग्जिट पोल दिखाए थे, जिसे उन्होंने न्यूज़क्लिक नामक प्रोपेगेंडा वेबसाइट से उठाया था। समाचार एजेंसी आईएएनएस ने भी एग्जिट पोल खुलेआम ट्विटर पर जारी किया था।

Exit Poll का प्रकाशन कर IANS ने किया अचार संहिता का उल्लंघन, EC की कार्रवाई का इंतज़ार

आईएएनएस ने खुद ही ट्वीट करते हुए ये बताया कि जारी किए गए एग्जिट पोल में सीटों की संख्या "मतदाताओं के एक सर्वेक्षण" पर आधारित है, जो कि साफ तौर पर आचार संहिता का उल्लंघन है, क्योंकि किसी को भी मतदान के सभी चरणों के समाप्त होने के 30 मिनट बाद तक एग्जिट पोल प्रकाशित करने की अनुमति नहीं है।

‘फैक्ट-चेकर’ ने छिपाया फैक्ट, मीडिया गिरोह ने फैलाया झूठ: मोदी इंटरव्यू पर प्रतीक सिन्हा की ‘नंगई’

आदरणीय(?) प्रतीक सिन्हा जी, इंटरव्यू ऐसे ही होता है- यही नियम है इंटरव्यू का कि कोई भी औड़म-बौड़म सवाल झटके में नहीं पूछा जा सकता। पत्रकारिता के समुदाय विशेष को “ब्रेकिंग न्यूज़” का माल मत परोसिए। यहाँ सबकी पोल-पट्टी खोली जाएगी।

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