“पाकिस्तान के सिंध का एक डाकू कश्मीर में लड़ाई लड़ना चाहता है। जैसे कि अब तक जो लोग कश्मीर में लड़ने के लिए आए थे, वे कमजोर डाकू थे। पाकिस्तानी सेना हमेशा से ही अपना काम ऐसे डाकुओं को आउट सोर्स कर करती रही है।"
पुलिस जाँच से पता चला है कि छ: रोहिंग्याओं को दिल्ली में एक मदरसे में प्रशिक्षण दिया गया और उन्हें दिल्ली तथा मणिपुर के कुछ एजेंटों की मदद से यहाँ लाया गया था।
राजनाथ सिंह के इस बयान को मौजूदा हालात में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही इसे पाकिस्तान को परोक्ष रूप से संकेत की तरह भी देखा जा रहा है कि परमाणु हथियारों की रट वह छोड़ दे।
कुछ दिन पहले जाँच एजेंसी को शेख के इंदौर के आजाद नगर थाना क्षेत्र के कोहिनूर कालोनी में होने की खबर मिली। जब जाँच की गई तो पता चला आतंकी वहाँ रहकर मजदूरी करता है। जिसके बाद एजेंसी के अधिरापी भी सब्जी वाले की वेशभूषा में आकर उसकी धड़-पकड़ में जुट गए।
जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “अभी तक आपने सब कुछ अच्छे तरीक़े से संभाला हुआ है, आपका आर्मी कमांडर होने के नाते मुझे आप सभी पर गर्व है, जो भी चुनौती हमारे सामने आएगी हम उस पर अच्छी तरह से फ़तह पाएँगे।”
ग़ौरतलब है कि वायु सेना के विंग कमांडर वर्धमान अभिननंदन ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान मार गिराया था। उनकी इस वीरता में उनकी सहयोगी मिंटी अग्रवाल ने अहम भूमिका निभाई थी। उस समय वो वायु सेना के रडार कंट्रोल स्टेशन पर तैनात थीं।
भारत में एक ब्यूरोक्रेट को मिलिट्री और सुरक्षा सम्बन्धी निर्णय लेने के लिए रखा जाता था। वो ब्यूरोक्रेट किसी भी क्षेत्र से आया हुआ हो सकता था और उसे सेना व सुरक्षा ऑपरेशन्स की कितनी समझ है, इससे कोई लेना-देना नहीं था। इसीलिए सीडीएस का पोस्ट क्रिएट करना आवश्यक था।
कारगिल युद्ध के बाद जब 2001 में तत्कालीन डिप्टी पीएम लाल कृष्ण अडवाणी की अध्यक्षता में गठित ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स (GOM) ने समीक्षा की तो पाया कि तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी रही है। तब इस बात पर ग़ौर किया गया कि...