"अगर विवादित स्थल पर इतिहास में कोई मंदिर था तो वह कब गायब हो गया होगा, किसी को नहीं पता। यह ढाँचा 19वीं सदी तक भारत के किसी अन्य सामान्य मस्जिद की तरह ही था, विवाद के बाद यह चर्चित हो गया।"
यह सर्वेक्षण साक्षात्कार आधारित था और इसमें 18 वर्ष से ऊपर की महिलाओं से बात की गई थी। इसमें 29 राज्य, 5 केंद्र शासित प्रदेश और 465 जिले की लगभग सभी धर्म की महिलाओं को शामिल किया गया था।
प्रस्तावित नागरिकता विधेयक संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रस्ताव लंबित है। संसद के आगामी सत्र में यह बिल लाने पर बल दिया गया। कई नेताओं ने कहा कि एनआरसी से पहले इस बिल को लाने की कवायद होनी चाहिए थी।
मुस्लिम पक्षकार ने दावा किया कि जन्मस्थान अयोध्या में ही है लेकिन विवादित स्थल पर नहीं है, कहीं और है। इससे पहले मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि पूरे अयोध्या को ही जन्मस्थान माना जाता है और इसके बारे में कोई सटीक स्थान का जिक्र नहीं है।
प्रद्योत ने प्रदेश के वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता लुइज़िन्हो फलैरो पर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस लेने का दबाव बनाया था। प्रद्योत ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर असम की तरह NRC की माँग की थी।
"ये एक पुरानी तस्वीर है। और एक कवि की कुछ पंक्तियों का यहाँ इस्तेमाल प्रोपगेंडा फैलाने के लिहाज से हुआ है। तस्वीर में दिख रहे अधिकारी उन नाबालिग बच्चों की कॉउंसलिंग कर रहे हैं, जो साल 2010 में पत्थरबाजी में शामिल थे।"
शाहजहाँपुर स्थित स्वामी सुखदेवानंद विधि महाविद्यालय में एलएलएम की एक छात्रा ने 24 अगस्त को एक वीडियो वायरल करके पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर बलात्कार के गंभीर आरोप लगाए थे। बाद में मीडिया के सामने छात्रा ने चिन्मयानंद पर बलात्कार का आरोप लगाया था।
सांसद बनने के बाद से ही भूमाफिया आजम खान पर करीब 84 से अधिक FIR दर्ज हैं। इसमें जौहर यूनिवर्सिटी की जमीनों घोटालों से संबंधित 30 मुकदमें भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक घर पर किसी द्वारा नोटिस रिसीव न किए जाने की स्थिति में नोटिस चस्पा किए गए हैं।
पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट के आतंकी ठिकानों पर बम बरसाए थे। यह पहला मौका है जब सार्वजनिक तौर पर इमरान ने यह बात कबूली है। इससे पहले कम से कम दो मौकों पर उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से एयरस्ट्राइक की बात मानी थी।
एक अति-उत्साही पाकिस्तानी पत्रकार ने अपने देश की बेइज्जती करवा दी। उसने कश्मीर को लेकर ट्रम्प के सामने पाकिस्तानी प्रोपगेंडा चलाने की कोशिश की, लेकिन इससे इमरान का ही मज़ाक बन गया। मजबूरी में पाकिस्तानी चैनलों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रसारण ही रोक दिया।