पूजा ने महात्मा गाँधी के पुतले पर खिलौने वाली पिस्टल (एयर पिस्टल) से तीन गोलियाँ चलाई थीं। इस दौरान वहाँ खड़े लोगों ने 'गोडसे जिंदाबाद' के नारे भी लगाए और गाँधीजी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल भी किया था।
मक़बूल शेरवानी के इस कृत्य को आज भी याद किया जाता है और बारामुला में भारतीय सेना ने उसका स्मारक भी बनवाया है। प्रसिद्ध उपन्यासकार मुल्कराज आनंद मक़बूल शेरवानी से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने उसके ऊपर एक उपन्यास लिखा जिसका शीर्षक था: Death of a Hero.
6 घंटे तक चली बैठक में दोनों बड़े नेताओं ने अन्ना की माँग को सुना और उन्हें लिखित आश्वासन भी दिया। अन्ना 7 दिनों से अपनी माँगों को लेकर अनशन पर बैठे थे।
सरकारी बयान के बाद मैंने कुंभ को एक पत्रकार के नजरिए से देखना शुरू कर दिया। मैं देखना चाहता था कि क्या वाकई में कुंभ में पहुँचने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए अच्छी तैयारी की गई है या सबकुछ कागजी और हवा-हवाई है?