शारीरिक रूप से स्वस्थ भिखारियों के पुनर्वास के लिए शहर के 5.8 लाख घरों से कचरा इकट्ठा करने और इसके बदले उपयोगकर्ता शुल्क वसूलने का काम सौंपा जाएगा। इनमें से कुछ को दैनिक स्वच्छता कार्यों में प्रतिनियुक्त किया जाएगा, जैसे कि कचरा इकठ्ठा करना, नालियों की सफाई और सड़कों की सफाई आदि।
महबूबा मुफ्ती के ट्वीट पर दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ कासमी ने कहा कि यह महबूबा की अपनी सोच है। लेकिन मुस्लिम महिलाओं के लिए बुर्का जरूरी है। बिकिनी या कोई और पहनावे की इस्लाम और शरीयत कतई इजाजत नहीं देता।
ध्रुव राठी की इस घटिया हरकत पर ट्विटर यूज़र्स ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उसे जमकर लताड़ लगाई। साथ ही, ध्रुव राठी को यह याद दिलाया कि पेट्रोल पम्प पर काम करने वाले लोगों की भी इज्जत होती है और वो एलिटिज्म के नाम पर समाज को तोड़ने के षड्यंत्र भी नहीं रचते हैं।
यह दर्दनाक घटना गुरुवार (27 जून) की है, जब पीड़ित के परिजन शिक़ायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहुँचे। बुधवार की सुबह वो नाबालिग किसी काम के लिए सुबह घर से निकला था। लेकिन, जब वो दोपहर को घर वापस आया तो वो दर्द से तड़प रहा था। उसने चेहरे को एक कपड़े से ढका हुआ था।
त्यागराजन ने तमिलनाडु कॉन्ग्रेस कमिटी के मीडिया कोऑर्डिनेटर गोपन पर राहुल गाँधी के प्रेस मीट को 50,000 रुपए से 1,00,000 रुपए में बेचने का गंभीर आरोप लगाया है।
"अगर कोई मुस्लिम महिला हिंदू से शादी करती है और बिंदी, बिछिया, मंगलसूत्र पहनती है, तो मुस्लिम मौलवी उसे हराम कहते हैं। लेकिन कई मुस्लिम पुरुष हमारी हिंदू बेटियों को लव जिहाद के नाम पर फँसाते हैं और उनसे बुर्का पहनने को कहते हैं, तो यह हराम नहीं है। यह उनके लिए उचित है।”
"संसद का सत्र चल रहा है। सरकार को यह जानने के लिए मतदान कराना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A को कौन-कौन रद्द कराना चाहते हैं। इससे राष्ट्र को राष्ट्रवादियों और गद्दारों के बारे में जानकारी मिलेगी।"
राज्य सरकार द्वारा अमरावती में नायडू के आवास और चित्तूर जिले में उनके मूल स्थान नरवरिपल्ले में सुरक्षा वापस ले ली गई है। उनके परिवार के सदस्यों के लिए सुरक्षा भी हाल ही में वापस ले लिया गया था और उनके बेटे नारा लोकेश को सुरक्षा के लिए सिर्फ दो कांस्टेबल दिए गए हैं।
यूपी में अनुसूचित जातियों के लिए 17 लोकसभा और 403 विधानसभाओं में से 86 सीटें रिजर्व हैं। इनमें इन जातियों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा। जबकि, ओबीसी के लिए सीटें रिजर्व नहीं हैं। इसका दुष्परिणाम जातिगत राजनीति करने वाली सपा-बसपा जैसी पार्टियों को भुगतना पड़ेगा।