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नीरज चोपड़ा से छिन जाएगा गोल्ड मेडल? गलत निशाने पर लगा था भाला, पावरफुल लोगों ने की शिकायत

नीरज चोपड़ा मोदी या देश का समर्थक हो सकता है, लेकिन उसे जैवलिन फेंकने पर ध्यान देना चाहिए था। ये जो समय-समय पर उसने ट्वीट फेंका था, शास्त्रों में उसे ही दिशाभटकम भाला कहा गया है, ऐसा भाला जो...

भारत के छोरे ने टोक्यो में लठ गेर दी भाई! पूरी दुनिया में डंका बजा दिओ भाले से। ऋतिक रोशन जैसे लंबे बाल में छोरा सेक्सी भी लागे हे। हँसी एकदम गोविंदा सी हे, ताकत धर्मेंद्र सी।

सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा ही चल रहा है। लड़कियों के कुछ पोस्ट असंसदीय भाषा (अश्लील कैटिगरी भी कह सकते हैं) वाले भी देखे गए। इसमें गलत कुछ भी नहीं। लड़का जवान है, विपरीत लिंग वाला है और सबसे बड़ी बात – Why should boys have all the fun?

खैर! सोशल मीडिया पर ही एक खबर और दिख गई। खबर भारत के लिए बुरी हो सकती है। खबर के पीछे पावरफुल लोगों का हाथ बताया गया है। शीर्षक था – गलत निशाने के बाद भी नीरज चोपड़ा को क्यों मिला गोल्ड मेडल? खबर के भीतर था – ओलंपिक वालों से कर दी गई है शिकायत।

नीरज चोपड़ा मेरा कोई नहीं। मेरा राज्य भी अलग है, जाति भी। लेकिन… खबर के कारण मेरी नींद उड़ गई है। क्यों? क्योंकि मैं भारतीय हूँ। खबर के कारण मेरा चैन खो गया है। क्यों? क्योंकि जिन लोगों (पावरफुल) ने ओलंपिक वालों के पास शिकायत की है, वो इंडिया के ही हैं। कैसे भारतीय हैं, आप सोच सकते हैं!

OK. काम की बात करते हैं। नीरज ने जैवलिन फेंका। ओलंपिक वालों ने देखा। गोल्ड मेडल दिया। कोई बवाल नहीं। लेकिन एक चूक कर दी ओलंपिक वालों ने। चूक जो इन पावरफुल इंडियंस ने नहीं की। पूरे स्टेडियम से सिर्फ एक एंगल से लिया गया वीडियो ओलंपिक वालों को भेजा। क्यों? क्योंकि इसी एक एंगल से नीरज का जैवलिन गलत जगह घुसता वीडियो में साफ-साफ दिख गया।

ऊपर का वीडियो अगर देख चुके तो समझिए कि दर्द कितना हो रहा होगा। इंडियन हों या पाकिस्तानी… गलत जगह भाला चला जाए तो दर्द होना लाजिमी है। लिबरल, वामपंथी, मोदी-विरोधी आदि कह कर उनके दर्द को कम मत आँकिए। प्लीज!

और हाँ! नीरज चोपड़ा मोदी या देश (जिसे हम भारत कहते हैं, पावरफुल लोग इंडिया) का समर्थक हो सकता है, लेकिन उसे जैवलिन फेंकने पर ध्यान देना चाहिए था। ये जो समय-समय पर उसने ट्वीट फेंका था, शास्त्रों में उसे ही दिशाभटकम भाला कहा गया है, यह बिना वजह बतकुच्चन करने वालों के अंदर कहीं भी-कभी भी घुस जाता है।

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चंदन कुमार
चंदन कुमारhttps://hindi.opindia.com/
चलते जाना है... एकला या भीड़ में!

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