Fact Check: जाधव केस में शशि थरूर ने की थी सुषमा स्वराज की मदद?

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला आने के बाद एबीपी के पत्रकार ने ट्वीट कर कहा कि भारत के पक्ष में आए निर्णय का क्रेडिट थरूर को भी जाता है।

क्या शशि थरूर ने कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ड्राफ्ट तैयार करने में भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और इस मामले में भारत की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे की मदद की थी? यह प्रश्न आज इस वजह से उठा है, क्योंकि ABP न्यूज़ के एक पत्रकार ने
ऐसा दावा किया है। ABP न्यूज़ के सीनियर कोरेस्पोंडेंट आदेश रावल ने यह बात कही है।

आदेश रावल अपने ट्वीट में लिखते हैं –

दरअसल, ये ट्वीट बुधवार (जुलाई 18, 2019) को कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को लेकर किया गया था। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस मुहैया कराने के साथ-साथ उनकी फाँसी की सज़ा पर रोक लगा दी है। पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव को मौत की सज़ा सुनाई थी। इंटरनेशनल कोर्ट ने इस निर्णय की समीक्षा करने का भी आदेश दिया।

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पत्रकार आदेश रावल ने अपने ट्वीट में लिखा हमें शशि थरूर को भी धन्यवाद देना चाहिए, क्योंकि सुषमा स्वराज के मार्गदर्शन में उन्होंने शुरुआत में जाधव वाले मामले में भारत की तरफ से ड्राफ्ट तैयार किया था। आदेश रावल के मुताबिक़, इंटरनेशनल कोर्ट का जो भारत के पक्ष में निर्णय आया है, उसका क्रेडिट थरूर को भी जाता है। जबकि, यह पूरी तरह ग़लत है। अपने ट्वीट के जरिए आदेश रावल ने झूठ फैलाया है।

आपको बता दें कि इससे पहले भी अप्रैल 2017 में ऐसी ही ख़बर आई थी, जब कहा गया था कि कुलभूषण जाधव को फाँसी की सज़ा दिए जाने के विरोध में भारत द्वारा तैयार प्रस्ताव में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने थरूर की मदद ली थी। जब सुषमा के सामने यह सवाल आया तो उन्होंने इसे मीडिया में प्लांट की गई ख़बर बताया था। उन्होंने कहा था कि ये ख़बर बिलकुल झूठी है और दुष्टतापूर्वक प्लांट की गई है। सुषमा स्वराज ने कहा था:

“भारतीय विदेश मंत्रालय में टैलेंट की कमी नहीं है। मुझे मेरे योग्य व सक्षम सचिवों का सहयोग हर विषय पर मिलता रहता है।”

लेखक साकेत सूर्येश ने एबीपी न्यूज़ के पत्रकार को डाँट पिलाते हुए झूठ न फैलाने की सलाह दी। उन्होंने सुषमा स्वराज के बयान का स्क्रीनशॉट लगाते हुए ट्वीट किया कि एक प्रमुख चैनल के पत्रकार को फेक न्यूज़ नहीं फैलाना चाहिए।

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