Monday, May 25, 2020
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क्या ट्रम्प ने वास्तव में ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात पर दी भारत को धमकी या मीडिया गिरोह ने फैलाया भ्रम?

"अगर वे ऐसा निर्णय लेंगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। मुझे अभी उनका निर्णय नहीं पता। मुझे मालूम है कि उन्होंने दवाई अन्य देशों के लिए प्रतिबंधित की हैं। मैंने उनसे कल बात की। हमारी अच्छे से बात हुई। हम देखेंगे कि अब आगे क्या होगा। मुझे बहुत हैरानी होगी कि अगर ऐसा होता है। क्योंकि आप जानते हैं कि भारत हमेशा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अच्छा व्यवहार करता है।"

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

खुशबूदार मसाले देखकर जिस तरह कोई भी लजीज खाना बनाने के लिए उत्सुक हो उठता है। वैसे ही मीडिया गिरोह के लोग एक शब्द को भी अपने पक्ष में देखकर उसे अपना एंगल देने के लिए आतुर हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही कल डोनॉल्ड ट्रंप की स्पीच के बाद हुआ। जिसमें उन्होंने रिटैलिएट शब्द का प्रयोग किया। इस शब्द का हिंदी मतलब ‘बदला लेना’ होता है। इस शब्द का इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति ने एंटी मलेरिया ड्रग ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ की सप्लाई बंद करने की बात सुनकर भारत के संदर्भ पर किया।

अब इसके बाद मीडिया में खबरें चलीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को धमकाया है कि अगर सप्लाई रोकी तो इसका बदला लेंगे और इसी आधार पर लिबरल गिरोह ने इस शब्द को खूब भुनाया। साथ ही इसे मोदी सरकार की विफलता के रूप में प्रदर्शित किया। लेकिन आपको बता दें जहाँ मीडिया गिरोह अपनी रूचि दिखाता है, उसका वास्तविकता में सच या तो सरकार के ख़िलाफ़ होता है या फिर किसी के सीधे से बयान का ऑल्टर्ड वर्जन।

सोमवार को भी डोनॉल्ड ट्रंप ने ऐसा कुछ नहीं कहा, जैसे मीडिया में प्रेषित हुआ। उन्होंने एक रिपोर्टर के सवाल पर अपनी टिप्पणी की। जिसमें डोनॉल्ड ट्रंप से एक रिपोर्टर ने पूछा था कि
यदि मोदी सरकार ने ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो क्या वे भारत के खिलाफ प्रतिशोध दिखाएँगे?

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एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक रिपोर्टर द्वारा पूछे गए इस सवाल का जवाब देते हुए, डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह आश्चर्यचकित होंगे यदि भारत दवा के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं हटाता है और ये भी कहा कि उन्होंने दवा की आपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री मोदी से भी इस मुद्दे पर बात की थी। इसके अलावा सबसे दिलचस्प ये दिखा कि ट्रम्प ने भी अपने संबोधन में कई बार दोहराया और बताया कि आखिर भारत अमेरिका के लिए कैसे एक महत्वपूर्ण साझेदार है और उम्मीद करता है कि भारत अमेरिका को आवश्यक दवाओं की आपूर्ति करेगा।

अपने बयानों के अंत में, डोनाल्ड ट्रम्प ने एकदम सामान्य तरह से कहा कि यदि भारत ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं हटाता तो किसी प्रकार का तो रिटैलियट होगा।

यहाँ याद दिला दें कि डोनॉल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। उनका फर्ज इस समय अपने लोगों को आश्वास्त करना हैं। ऐसे में यदि कोई पत्रकार ऐसे सवाल करेगा तो उन्हें इसके बदले जवाब देना होगा। पत्रकार के सवाल के बदले जो प्रतिक्रिया दी थी। वो ये थी कि आखिर प्रतिशोध क्यों नहीं होगा। ये जवाब अपने आप में संकेत हैं कि उन्होंने भारत पर आक्रमण या उससे कोई सुविधा छीनने जैसी बातें नहीं की थी। बल्कि उन्होंने एक गैर-गंभीर सवाल का जवाब स्थिति को परखते और अपने पद को देखते हुए दिया था।

अब यहाँ पर डोनॉल्ड ट्रंप और पत्रकार के बीच हुई बातचीत का अंश है। खुद समझिए कि आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति और पत्रकार ने किस तरह बात की और इसे सोशल मीडिया पर किस तरह संप्रेषित किया गया।

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रिपोर्टर:धन्यवाद महोदय। क्या आप मेडिकल सामानों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के अपने निर्णय के प्रति चिंतित हैं, जैसे कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों में ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’का निर्यात नहीं करने का निर्णय लिया है?

ट्रंप- अगर वे ऐसा निर्णय लेंगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। मुझे अभी उनका निर्णय नहीं पता। मुझे मालूम है कि उन्होंने दवाई अन्य देशों के लिए प्रतिबंधित की हैं। मैंने उनसे कल बात की। हमारी अच्छे से बात हुई। हम देखेंगे कि अब आगे क्या होगा। मुझे बहुत हैरानी होगी कि अगर ऐसा होता है। क्योंकि आप जानते हैं कि भारत हमेशा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अच्छा व्यवहार करता है। कई वर्षों से, वे यहाँ के व्यापार का लाभ उठा रहे हैं। इसलिए मुझे आश्चर्य होगा कि अगर ये उनका निर्णय होगा। वह मुझे फोन करके बताएँगे।

ट्रंप- मैंने रविवार सुबह उनसे बात की। मैंने उन्हें फोन किया और कहा, “अगर आप हमारे लिए दवाइयों की आपूर्ति करेंगे तो हम इसकी सराहना करेंगे।” इसके बावजूद अगर वे दवाई नहीं भेजते, तो भी कोई बात नहीं। लेकिन हाँ, इसके मद्देनजर बदला लिया जाएगा। आखिर क्यों नहीं लेंगे?

इसके अलावा यदि बाकी की बातचीत आपको सुननी है तो आप नीचे दिए लिंक पर पूरी बात को सुन सकते हैं। उक्त अंश सिर्फ़ ये बात स्पष्ट करने के लिए हैं कि बदला लेने की कोई बात ट्रंप ने भारत के लिए नहीं की।

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यहाँ बता दें कि ट्रंप से पूछे गए सवालों का पर्याय रिपोर्टर के लिए यह जानना था कि ट्रंप के लिए दवाई पर बैन लगना एक चिंता का विषय है या फिर नहीं। जिसपर ट्रंप ने सीधे रीटैलिएशन की बात नहीं की। बल्कि उसके बदले पीएम मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत का उल्लेख किया।

हालाँकि, यदि सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियोज को बिना संदर्भ के देखा जाए तो बिलकुल यही लगेगा कि उन्होंने धमकी ही दी। मगर, इसपर यदि पूरी बातचीत सुनी जाए। सवाल संदर्भ और जवाब के क्रम पर गौर किया जाए तो स्पष्ट होगा कि रिपोर्टर द्वारा पूछे गए प्रश्न के संदर्भ में ट्रम्प वास्तव में अपने स्वयं के निर्णय के खिलाफ संभावित प्रतिशोध के संबंध में उत्तर दे रहे थे। इसलिए ये कह सकते हैं कि डोनॉल्ड ट्रंप को मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया सही फ्रेम में देनी चाहिए थी। मगर ये नहीं कह सकते हैं कि उन्होंने प्रतिशोध की बात की।

उल्लेखनीय है कि जब से कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ तब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दवा के उपयोग की वकालत कर रहे हैं और ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ को एक “गेम-चेंजर” के रूप में पेश किया है, भले ही स्वास्थ्य सलाहकारों ने महामारी के खिलाफ इसकी प्रभावकारिता के बारे में अनिश्चितता की बात की है।

बता दें कि मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक पुरानी और सस्ती दवा ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ है। जिसे राष्ट्रपति ट्रम्प कोरोनोवायरस के लिए एक व्यवहार्य चिकित्सीय समाधान के रूप में देखते हैं। वे इसे इस समय इसलिए भी महत्तवपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस से अब तक वहाँ 10,000 से अधिक अमेरिकी मर चुके हैं और 3.6 लाख से अधिक संक्रमित हैं। ऐसे में भारत ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, जो एक मलेरिया-रोधी दवा है, जिसकी इस महामारी से रोगियों की मदद करने में संभावित उपयोगिता को देखते हुए बहुत माँग है।

शायद, डोनाल्ड ट्रम्प ने उम्मीद की थी कि भारत, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है, वह अमेरिका में ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात मानदंडों में ढील दे सकता है। लेकिन भारत द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद डोनॉल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करके मदद माँगी थी ताकि वे अमेरिका अपने देश में कोरोनोवायरस रोगियों की बढ़ती संख्या के इलाज के लिए ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ की गोलियों की बिक्री की अनुमति दे सकें।

बता दें, कई देशों की गुहार के बाद भारत ने दवाई के निर्यात का दोबारा फैसला ले लिया है और अब भारत कुछ देशों के मामलों के आधार पर विशिष्ट खेपों के निर्यात की अनुमति देगा।

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