Wednesday, January 27, 2021
Home फ़ैक्ट चेक सोशल मीडिया फ़ैक्ट चेक फैक्ट चेक: क्या हॉन्गकॉन्ग ने चीन के कब्जे वाले अक्साई क्षेत्र और तिब्बत को...

फैक्ट चेक: क्या हॉन्गकॉन्ग ने चीन के कब्जे वाले अक्साई क्षेत्र और तिब्बत को बताया भारत का हिस्सा? जानिए सच

जिस सोशल मीडिया एकाउंट से इन तस्वीरों को शेयर किया गया था वो हॉन्गकॉन्ग की चीफ एग्जीक्यूटिव के कैरी लैम चेंग नाम के नाम पर बनाया गया एक फर्जी अकाउंट है। दरअसल हॉन्गकॉन्ग सीई का आधिकारिक ट्विटर एकाउंट नहीं है। 2014 में, इसी फर्जी अकाउंट से भारत से ट्वीट पोस्ट किए थे। हैंडल पर उपलब्ध पुराने सारे ट्वीट भारत से संबंधित हैं और भारत से ही किए गए हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में कुछ दिनों से कई तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही है। जिनमें यह दावा किया गया कि हॉन्गकॉन्ग की चीफ एग्जीक्यूटिव कैरी लैम चेंग ने एक ट्वीट के जरिए बताया कि ‘रिपब्लिक ऑफ हॉन्गकॉन्ग’ एक नए नक्शे को मंजूरी देने जा रहा है, जिसमें चीनी-अधिकृत अक्साई चिन, ठग ला रिज, खिनज़मान और तिब्बत ऑटोनोमस क्षेत्रों को केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के अंतर्गत भारत के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है।

अलग-अलग सोशल मीडिया यूज़र्स ने ट्विटर के जरिए इस फर्जी पोस्ट को शेयर करते हुए यह दावा किया कि रिपब्लिक ऑफ हॉन्गकॉन्ग ने अपने देश का एक नया नक्शा जारी किया है, जिसमें उसने भारत के हिस्से के रूप में चीनी-अधिकृत क्षेत्रों को मंजूरी दी है।

बता दें ये सारी पोस्ट ऐसे समय में वायरल हुए थे जब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारत और चीन के बीच गतिरोध चल रहा था, जिसके कारण दोनों देशों में 15 जून को हिंसक झड़प हुई थीं।

वहीं एक यूजर ने दावा किया कि ‘रिपब्लिक ऑफ हॉन्गकॉन्ग’ ने एक नए नक्शे को मंजूरी दे दी है। जहाँ अक्साई चिन, ठग ला रिज, खिनज़मान और तिब्बत ऑटोनोमस क्षेत्रों को भारत के रूप में लद्दाख के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। साथ ही यूजर ने यह भी कहा कि ऐसे समय में भारत चीन से हॉन्गकॉन्ग की स्वतंत्रता का समर्थन करता है।

एक सोशल मीडिया यूजर ने भी एक इसी तरह की खबर को शेयर किया, जिसमें यह दावा किया गया कि हॉन्गकॉन्ग की सरकार ने इस नए नक्शे को मंजूरी दे दी है जिनमें चीनी-अधिकृत क्षेत्र शामिल हैं।

फैक्ट चेक

बता दें हॉन्गकॉन्ग की तरफ से नए नक्शे जारी करने का दावा गलत है। हॉन्गकॉन्ग सरकार ने ऐसे किसी भी नए नक्शे को मंजूरी नहीं दी है, जिसमें चीन के कब्जे वाले क्षेत्र को भारत के हिस्से के रूप में दिखाया गया हो।

हॉन्गकॉन्ग की चीफ एग्जीक्यूटिव कैरी लैम चेंग द्वारा हस्ताक्षर किए गए अध्यादेश की तस्वीरें नए नक्शे से संबंधित नहीं हैं, बल्कि इस महीने की शुरुआत में हॉन्गकॉन्ग के विधान परिषद द्वारा पारित राष्ट्रीय गान अध्यादेश से संबंधित हैं। तस्वीरों में चीफ एग्जीक्यूटिव कैरी लैम चेंग राष्ट्रीय गान अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर रही है, न कि नए नक्शे पर।

सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही तस्वीरों के पड़ताल करने पर यह मालूम पड़ा कि यह इमेज हॉन्गकॉन्ग सरकार के द्वारा की गई एक प्रेस रिलीज से संबंधित थी। जो कि चीफ एग्जीक्यूटिव द्वारा साइन किया गया राष्ट्रीय गान अध्यादेश है। यह अध्यादेश हॉन्गकॉन्ग में चीन के राष्ट्रीय गान के प्रचार और संरक्षण के लिए पेश किया गया था।

गौरतलब है कि कई समाचार रिपोर्टों ने भी इसी तरह की तस्वीरों को राष्ट्रीय गान अध्यादेश से जोड़ते हुए साझा किया था।

जिस सोशल मीडिया एकाउंट से इन तस्वीरों को शेयर किया गया था वो हॉन्गकॉन्ग की चीफ एग्जीक्यूटिव के कैरी लैम चेंग नाम के नाम पर बनाया गया एक फर्जी अकाउंट है। दरअसल हॉन्गकॉन्ग सीई का आधिकारिक ट्विटर एकाउंट नहीं है। 2014 में, इसी फर्जी अकाउंट से भारत से ट्वीट पोस्ट किए थे। हैंडल पर उपलब्ध पुराने सारे ट्वीट भारत से संबंधित हैं और भारत से ही किए गए हैं।

इस प्रकार फैक्ट चैक में यह बात साबित होता है कि हॉन्गकॉन्ग के समाचारों में नए नक्शे को मंजूरी देने वाली खबर जिसमें केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के तहत भारत के हिस्से के रूप में चीन के कब्जे वाले क्षेत्र को शामिल किया है, सरासर गलत हैं।

इसके अलावा कोई ‘रिपब्लिक ऑफ हॉन्गकॉन्ग’ नहीं हैं। हॉन्गकॉन्ग एक विशेष मेट्रोपोलिटन क्षेत्र है जो वर्तमान में चीन के प्रशासन के अधीन है। इसकी एक विधान परिषद है जिसके चीफ एग्जीक्यूटिव कैरी लैम चेंग हैं। यह शहर 1997 तक ब्रिटेन के शासन में था, लेकिन चीन को उनके समझौते के अनुसार इसको सौंप दिया गया था। जिसके चलते अब हॉन्गकॉन्ग के लोग चीन से इसे पूर्ण लोकतंत्र की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

प्रचलित ख़बरें

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

हिंदुओं को धमकी देने वाले के अब्बा, मोदी को 420 कहने वाले मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता: ‘लोकतंत्र की हत्या’ गैंग के मुँह पर 3...

पद्म पुरस्कारों में 3 नाम ऐसे हैं, जो ध्यान खींच रहे- मौलाना वहीदुद्दीन खान (पद्म विभूषण), तरुण गोगोई (पद्म भूषण) और कल्बे सादिक (पद्म भूषण)।

रस्सी से लाल किला का गेट तोड़ा, जहाँ से देश के PM देते हैं भाषण, वहाँ से लहरा रहे पीला-काला झंडा

किसान लाल किले तक घुस चुके हैं और उन्होंने वहाँ झंडा भी फहरा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।
- विज्ञापन -

 

लालकिला में देर तक सहमें छिपे रहे 250 बच्चे, हिंसा के दौरान 109 पुलिसकर्मी घायल; 55 LNJP अस्पताल में भर्ती

दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। किसानों द्वारा की गई इस हिंसा में 109 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जिनमें से 1 की हालात गंभीर बताई जा रही है।

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

‘RSS नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक, संघ समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं’: कॉन्ग्रेसी सांसद और CM भूपेश बघेल का ज्ञान

कॉन्ग्रेस के सीएम भूपेश ने कहा कि आरएसएस के समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं। महात्मा गाँधी की हत्या कैसे किया गया था? पहले पैर छुए फिर उनके सीने में गोली मारी।

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

‘लाल किले पर लहरा रहा खालिस्तान का झंडा- ऐतिहासिक पल’: ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने मनाया ‘ब्लैक डे’

गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर 'खालिस्तानी झंडा' फहराने को लेकर ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (APML) काफी खुश है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा स्थापित पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टी ने इसे 'ऐतिहासिक क्षण' बताया है।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

देशी-विदेशी शराब से लदी मिली प्रदर्शनकारी किसानों की ट्रैक्टर: दिल्ली पुलिस ने किया सीज, देखें तस्वीरें

पुलिस ने शराब से भरे एक ट्रैक्टर को सीज किया है। सामने आए फोटो में देखा जा सकता है कि पूरा ट्रैक्टर शराब से भरा हुआ है। यानी कि शराब के नशे में ट्रैक्टरों को चलाया जा रहा है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
386,000SubscribersSubscribe