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Saturday, May 30, 2020
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फैक्ट चेक: पुणे ट्रेन में हुई सागर मरकड की लिंचिंग में क्या कोई मजहबी एंगल भी था?

असल में मेनस्ट्रीम मीडिया इस मामले में इतनी बदनाम हो चुकी है कि कई बार उसको गैर वाजिब आलोचना का शिकार होना पड़ता है। इसके लिए जिम्मेदार अपराधियों के मुस्लिम होने की बात को शरारतपूर्ण ढंग से छिपाने, उन्हें हिन्दू नाम देने के उसके कुत्सित प्रयास हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

पुणे की ट्रेन में 26 साल के सागर मरकड की उसकी पत्नी और बच्चे के सामने पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना मुंबई-लातूर-बीदर एक्सप्रेस में गत मंगलवार को घटित हुई, जिसमें एक छोटी सी बहस ने बड़े झगड़े का रूप ले लिया। अंततः 12 लोगों ने 26 वर्षीय सागर की लाठियों से पीट-पीट कर हत्या कर दी।

पीड़ित की पत्नी ज्योति के अनुसार ट्रेन का कोच पूरा भरा हुआ था। बैठने की भी जगह नहीं थी। इस कारण उसके पति ने कुछ औरतों से मेरे लिए बैठने की जगह बनाने की गुजारिश की। उन औरतों ने न केवल जगह बनाने से इंकार कर दिया बल्कि बहस भी शुरू कर दी। इसके बाद इन औरतों और उनके साथ यात्रा कर रहे पुरुषों ने सागर को लाठियों से पीटना शुरू कर दिया जिससे उसके पति की जान चली गई।

ज्योति बताती हैं कि कोच में सबसे मदद माँगने पर भी कोई उनकी हेल्प को आगे नहीं आया। बाद में रेलवे पुलिस उनके बचाव में आगे आई जिसने दौण्ड जंक्शन पर सागर को ट्रेन से उतार कर गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया, जहाँ डॉक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया।

आजकल के दौर में जब आम लोगों और मीडिया बीच अविश्वास बढ़ता जा रहा है, ऐसी दुर्घटनाएँ तुरंत अफवाहों को हवा देने वाली साबित होती हैं। मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह सही तथ्यों को सामने लाए। इस दुखद घटना के चर्चा में आने के बाद जब आरोपितों के मुस्लिम होने की अफवाह फैली, सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस दुर्घटना पर दुख जताते हुए मीडिया को घेरना शुरू कर दिया कि वह किसी हिन्दू आदमी के मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई लिंचिंग पर ही मौन रह जाता है।

हालाँकि इस घटना पर मीडिया के खिलाफ गुस्सा जाहिर करना अनुचित है। लेकिन मेनस्ट्रीम मीडिया इस मामले में इतनी बदनाम हो चुकी है कि कई बार उसको गैर वाजिब आलोचना का शिकार होना पड़ता है। ह्वाट्सएप पर वायरल हुए मैसेज में ‘बुरका’ पहने औरत को शिफ्ट होने को कहने पर उसके साथ चल रहे मुस्लिमों ने सागर नामक हिन्दू की पीट पीट हत्या कर दी की अफवाह चल रही है।

महाराष्ट्र के लोकप्रिय अखबार लोकमत के अनुसार लिंचिंग में दर्ज किए गए आरोपियों के नाम ताईबाई मारुति पवार (30), कलावती धोंडिबा चह्वाण (65), रुपाली सोमनाथ चह्वाण (21), गणेश शिवाजी चह्वाण (24), निकिता अशोक काले (35), जमुना दत्ता काले (20), ताई हनुमंत गणपत पवार (30), गंगूबाई नामदेव काले (40), सोनू आपका काले (24) हैं। इनके अलावा सोमनाथ नामक आदमी फरार हो गया है और एक नाबालिग लड़के से भी पुलिस पूछताछ कर रही है।

ठीक यही नाम महाराष्ट्र के दूसरे लोकप्रिय अखबार ‘साकल’ ने भी छापे हैं। इसके अलावा ऑपइंडिया ने स्वयं भी पुलिस से इन नामों की पुष्टि की है। इस हत्या में आरोपितों के मुस्लिम होने की अफवाहें हर लिहाज से गलत हैं, भ्रामक हैं।

इस तरह की अफवाहें इस बात की साक्ष्य हैं कि किस प्रकार लोगों और मीडिया के बीच अविश्वास बढ़ता जा रहा है। कई ऐसे उदाहरण दिए जा सकते हैं जहाँ मीडिया ने अपराधियों के मुस्लिम होने की बात को शरारतपूर्ण ढंग से न सिर्फ छुपाया, बल्कि उसे हिन्दू नाम देने का कुत्सित प्रयास भी किया। बतौर उदाहरण THE NEWS MINUTE ने मुस्लिम दोषी को हिन्दू नाम दिया था। साथ-साथ कई बार मुस्लिम मौलवियों द्वारा हत्या जैसे अपराधों में उन्हें ‘तांत्रिक’ लिखा भ्रम फैलाया गया, क्योंकि ‘तांत्रिक’ का अर्थ हिन्दू धर्म से संबंधित ‘तंत्र विद्या करने वालों’ से लिया जाता है।

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