Homeदेश-समाज219 साल से तारीख़ पे तारीख़, भारत का सबसे पुराना केस 1800 में हुआ...

219 साल से तारीख़ पे तारीख़, भारत का सबसे पुराना केस 1800 में हुआ था दर्ज़

आखिरी सुनवाई 20 नवंबर 2018 को - कलकत्ता हाई कोर्ट में भी पिछले 48 साल से मिली तारीख़ पे तारीख़!

कलकत्ता हाई कोर्ट बना 1862 में। लेकिन यहां के सबसे पुराने पेंडिंग केस की बात करें तो यह लगभग 219 साल पुराना है। चौंक गए! लाज़िमी भी है। क्योंकि जिस पेंडिंग केस AST/1/1800 की बात यहाँ की जा रही है, वो साल 1800 में दर्ज़ की गई थी। यह आंकड़ा सरकारी है – नेशनल जूडिशियल डेटा ग्रिड का।

साल 1800 में दर्ज़ ‘ऐतिहासिक’ केस

कलकत्ता हाई कोर्ट भारत का पहला हाई कोर्ट था। 1 जुलाई 1862 में जब इसकी स्थापना हुई, तब इसे फोर्ट विलियम हाई कोर्ट के नाम जाना जाता था। इसका मतलब यह हुआ कि जिस ‘ऐतिहासिक’ केस AST/1/1800 की बात इस ख़बर में की जा रही है, वो साल 1800 में किसी लोअर कोर्ट में दर्ज़ की गई होगी।

निचली अदालतों में लगभग 170 साल ख़ाक छानने के बाद 1 जनवरी 1970 को यह ‘ऐतिहासिक’ केस AST/1/1800 कलकत्ता हाई कोर्ट में रजिस्टर किया गया। अफ़सोस, हाई कोर्ट में भी इसे पिछले 49 साल से तारीख़ पे तारीख़ ही नसीब हुई। इस केस में आखिरी सुनवाई 20 नवंबर 2018 को हुई थी।

कलकत्ता हाई कोर्ट में भी पिछले 49 साल केस पर फैसला नहीं

नेशनल जूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) एक सरकारी वेबसाइट है। यहाँ देश भर की अदालतों के पेंडिंग केसों की जानकारी आपको एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाती है।

NJDG के चौंकाने वाले आंकड़े:

  • देश भर की कुल पेंडिंग केसों की संख्या 2.94 करोड़
  • देश की 24 हाई कोर्ट में करीब 49 लाख केस पेंडिंग
  • 2.44 लाख पेंडिंग केस के साथ कलकत्ता हाई कोर्ट सबसे ऊपर
  • देश की सभी हाई कोर्ट में 10 लाख से ज्यादा केस, जो 10-30 साल से पेंडिंग
  • सभी केसों को खत्म होने में लगेंगे 324 साल (सरकारी सर्वे)

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

चंदन कुमार
चंदन कुमारhttps://hindi.opindia.com/
चलते जाना है... एकला या भीड़ में!

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -