Wednesday, April 17, 2024
Homeबड़ी ख़बरपत्रकार महोदय! जाति के नाम पर आप पीत नहीं, पतित पत्रकारिता कर रहे हैं

पत्रकार महोदय! जाति के नाम पर आप पीत नहीं, पतित पत्रकारिता कर रहे हैं

आशुतोष उस पार्टी से ट्रेनिंग लेकर आए हैं जिसका नेता चुनाव के दौरान वोट के लिए अपना परिचय बनिया के रूप में देता है, इसलिए आशुतोष अपने अंदर से उस आम आदमी कार्यकर्त्ता को शायद चाहकर भी नहीं निकाल पा रहे हैं।

किसान गजेंद्र की मौत पर TV शो के दौरान फूट-फूट कर रोने वाले और कपड़ों की तरह पेशा बदलने वाले बेचैनी से भरपूर पत्रकार आशुतोष जी, जो कभी केजरीवाल ‘सरजी’ एवं कंपनी में नेता हुआ करते थे, आजकल एकदम अलग किस्म की आग उगल रहे हैं। यानी अपनी वेबसाइट और ट्विटर पर एजेंडा-परस्त गिरोह के बीच सस्ती लोकप्रियता के लिए पूरे होशोहवास में ऐसा ट्वीट करते हैं, जिससे समाज में बंटवारे की खाई बढ़ती ही है लेकिन कम नहीं होती। इन्हें लगता है कि यह दलितों के आका हैं और इनकी वजह से ही गरीबों को रोटी मिल रही है।

तभी आशुतोष जी अचानक नींद से जागते हैं और फ़ौरन सीबीआई के नए निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला को लेकर ट्वीट फेंकते हुए लिखते हैं, ”शुक्ला जी तो हो गए सीबीआई निदेशक, कभी कोई दलित होगा सीबीआई निदेशक?” पत्रकार आशुतोष जी इस बात को लेकर यह कहना चाह रहे हैं कि शुक्ला जी को सवर्ण होने के कारण ही CBI का निदेशक बनाया गया है।

मगर आशुतोष जी शायद यह भूल गए हैं कि 1983 बैच के जिस आईपीएस अधिकारी ऋषि कुमार शुक्ला को सीबीआई का नया निदेशक बनाया गया है, उनके नाम पर जिस सेलेक्शन कमेटी ने मुहर लगाई है, उसमें मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल थे। इसके बाद भी आशुतोष का किसी दलित को सीबीआई निदेशक बनाए जाने को लेकर किया गया यह ट्वीट उनकी संकीर्ण सोच को ही दर्शाता है।

सवाल उठता है कि क्या आशुतोष को नहीं लगता है कि देश के प्रथम नागरिक, यानी
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, जो आज तीनों सेनाओं के कमांडर हैं, भी दलित हैं? क्या यह देश में अवसरों की समानता को नहीं दर्शाता है? इसके अलावा आशुतोष जी आपको याद दिला दें कि इससे पहले भारत के 10वें राष्ट्रपति के आर नारायणन भी दलित थे।

आशुतोष जी, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस कॉन्ग्रेस ने 60 सालों तक देश को तमाम घाव दिए हैं, आज आप उनकी हिमाकत करते हुए ऊल-जुलूल ट्वीट कर रहे हैं, जो वाकई शर्म की बात है। पत्रकार महोदय, आपको याद होना चाहिए कि कभी जिस पार्टी के ‘वॉलंटियर’ आप हुआ करते थे, उसके मुखिया जनता की सिम्पैथी और वोट बटोरने के लिए खुद को बनिया घोषित कर चुके हैं। दरअसल आप जैसे पत्रकार ही चाहते हैं कि समाज में जात-पात और भेदभाव का दायरा बढ़े, ताकि आपकी दुकान चलती रहे। यदि इस क्रांतिजीव पत्रकार की मानें तो इस देश के तमाम पदों पर किसी व्यक्ति के निर्वाचन का मापदंड उसकी योग्यता नहीं बल्कि उसकी जाति होनी चाहिए।

टुकड़े-टुकड़े दलों में आपकी चाह होना स्वाभाविक है, लेकिन मात्र चर्चा में बने रहने के लिए हर दूसरे किस्से में जाति और धर्म का बीज ढूंढकर बो देना अतार्किक है और ये आपकी कम अक्ल का परिचय है। जिस लोकतंत्र का प्रथम नागिरक दलित है, उसमें इस तरह के प्रश्न आपकी सस्ती लोकप्रियता का हथकंडा मात्र है। वैसे आपकी वेबसाइट फ़ेक न्यूज़ भी फैलाती है, ऐसा साबित हो चुका है।

पहले पीत पत्रकारिता होती थी। उसमें पत्रकार गिरते थे। लेकिन गिरने की सीमा से भी ज्यादा गिरने को पतित कहते हैं और आप कर रहे हैं पतित पत्रकारिता!

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

नॉर्थ-ईस्ट को कॉन्ग्रेस ने सिर्फ समस्याएँ दी, BJP ने सम्भावनाओं का स्रोत बनाया: असम में बोले PM मोदी, CM हिमंता की थपथपाई पीठ

PM मोदी ने कहा कि प्रभु राम का जन्मदिन मनाने के लिए भगवान सूर्य किरण के रूप में उतर रहे हैं, 500 साल बाद अपने घर में श्रीराम बर्थडे मना रहे।

शंख का नाद, घड़ियाल की ध्वनि, मंत्रोच्चार का वातावरण, प्रज्जवलित आरती… भगवान भास्कर ने अपने कुलभूषण का किया तिलक, रामनवमी पर अध्यात्म में एकाकार...

ऑप्टिक्स और मेकेनिक्स के माध्यम से भारत के वैज्ञानिकों ने ये कमाल किया। सूर्य की किरणों को लेंस और दर्पण के माध्यम से सीधे राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला के मस्तक तक पहुँचाया गया।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
282,677FollowersFollow
417,000SubscribersSubscribe