कॉन्ग्रेस का ‘स्टार्टअप’ डूबा, बोहनी खराब होते ही सभी फरारियों ने कैंसिल कराई बुकिंग!

सब कुछ वैसा ही हो रहा था जैसा युवराज के सलाहकारों ने सोचा था। लॉन्च होने के चंद मिनट के भीतर ही स्टार्टअप हिट हो गया। सूत्र बताते हैं कि 'दलाल स्ट्रीट' की सभी लाइनें व्यस्त हो गईं। फरारियों के एक के बाद एक धड़ाधड़ कॉल आने लगे।

वाकई! अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहद भयावह है। देश की सबसे पुरानी पार्टी का स्टार्टअप लॉन्च होने के दो घंटे के भीतर ही डूब गया।

कानून से बच रहे लोगों को मीडिया से मुखातिब होने का मौका देने वाला यह स्टार्टअप बुधवार देर शाम कॉन्ग्रेस के ‘दलाल स्ट्रीट’ यानी नई दिल्ली के 24 अकबर रोड स्थित अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी के मुख्यालय में लॉन्च किया गया था।

वैसे, बुधवार शाम जब मीडिया को खबर मिली कि यहॉं 8.15 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जिसे कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और सलमान खुर्शीद संबोधित करेंगे, तो किसी को भी भनक नहीं थी कि मंदी को भगाने के लिए नया स्टार्टअप शुरू होने जा रहा है। पता तो तब चला जब शाम 8:18 बजे बीते 27 घंटे से सीबीआई और ईडी से लुकाछिपी खेल रहे पी चिदंबरम इस सेवा का लाभ उठाने वाले पहले कस्टमर बने।

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पहला कस्टमर चिदंबरम जैसा हो तो धंधा डूबने का खतरा नहीं होता। जरा उनके प्रोफाइल पर गौर करें। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता। केन्द्र में वित्त और गृह जैसे हाई प्रोफाइल महकमों को संभालने का अनुभव। कभी चिदंबरम साहब के सामने उनके बेटे के धंधे को चमकाने का मौका पाने के लिए आतुर लोगों की कतार लगी रहती थी। इधर चिदंबरम साहब की कृपा हुई, उधर बंदा उनके बेटे के धंधे को चमकाने में लग जाता था। कहते हैं उस दौर में अर्थव्यवस्था भी उफान मार रही थी। किसानों की आत्महत्या की ख़बरें प्रोपगेंडा थीं।

2014 में मोदी के आने के बाद यह धंधा चौपट हो गया। मंदी आ गई। सूत्र बताते हैं कि तब से ही कॉन्ग्रेस मंदी भगाओ धंधे की तलाश में लग गई थी। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड रहीं दिव्या स्पंदना ने कहा भी था, “पार्टी के पास पैसे नहीं हैं।”

बुधवार को गोटी फिट बैठ गई और धंधे की तलाश ख़त्म हुई। ‘सदैव आपकी सेवा में तत्पर’ का संदेश चोखा रहे इसलिए पहले कस्टमर की सेवा के लिए अगल-बगल तीन धाकड़ वकील भी बिठाए गए। इससे हर उस शख्स के पास डायरेक्ट मैसेज पहुँचा जो कानून से भागता फिर रहा है। वैसे भी कॉन्ग्रेस धर्म, जाति, संप्रदाय सब से ऊपर है। धंधा ही भगवान है।

स्टार्टअप हिट रहे इसलिए पहले कस्टमर ने खूब रोना रोया। मोदी सरकार पर बदला लेने, कानून का दुरुपयोग करने, विरोधियों को फॅंसाने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल करने जैसे सारे घोड़े एक साथ दौड़ाए। घोड़े से याद आया किसी जमाने में इन साहबों का घोड़ा फर्राटे भरता था। यकीन न हो तो गूगल कर लें। ​कस्टमर के साथ बैठे धाकड़ वकीलों में से एक का सीडी आया था कुछ साल पहले। कानून मुट्ठी में था तो साहब एक महिला वकील को जज बनाने के नाम पर लुभा रहे थे।

सब कुछ वैसा ही हो रहा था जैसा युवराज के सलाहकारों ने सोचा था। लॉन्च होने के चंद मिनट के भीतर ही स्टार्टअप हिट हो गया। सूत्र बताते हैं कि ‘दलाल स्ट्रीट’ की सभी लाइनें व्यस्त हो गईं। फरारियों के एक के बाद एक धड़ाधड़ कॉल आने लगे।

सूत्रों की मानें तो युवराज की सिफारिश पर पहली बुकिंग बिहार के एक निर्दलीय विधायक की कंफर्म हुई। घर से एके 47 मिलने के बाद से विधायक जी गायब हैं। एक वीडियो आया था जिसमें कह रहे थे भागे नहीं हैं, एक साथी बीमार है, उसका हाल जानने आए हैं।

सूत्रों ने बताया कि विधायक जी ने अपने हक के समर्थन में दो दावे किए। पहला, लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार में पार्टी की जी-जान से खातिरदारी का। दूसरा, तीन दशक बाद पटना के गॉंधी मैदान में रैली उनके ही प्रताप से हुई थी। सो टोकन मनी लेकर उनकी बुकिंग कंफर्म कर दी गई।

शीर्ष सूत्रों ने बताया है कि चिदंबरम साहब की गिरफ्तारी के साथ स्टार्टअप बैठ गया है। विधायक जी ने बुकिंग कैंसिल कर दी है। दूसरे लोग भी कह रहे हैं जब बोहनी ही खराब हो गई तो हम क्यों आपकी सेवा का लाभ उठाने का जोखिम उठाएँ।

करीबी सूत्र बताते हैं कि इस फीडबैक से युवराज बेहद नाराज हैं। उनका कहना है, “मैंने पहले ही कहा था स्टार्टअप मोदी बोलता है। हम टूजी, जीजाजी टाइप का कुछ नाम रखते हैं। लेकिन, मम्मी आपने ही तो कहा था स्टार्टअप नाम रखेंगे तो मेक इन इंडिया के नाम पर छूट मिलेगी।”

कैमरे पर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाने वाले एक सूत्र ने मैसेज किया है, “युवराज की इस हाल से लिबरलों का बुरा हाल है।” बकौल लिबरल, “मैं कहता था न साहस की मंदी है। मंदी दूर करने का साहस दिखाया तो आपने क्या किया? स्टार्टअप ही डूबो दिया। ऐसी भी क्या जल्दी थी देश के गृह मंत्री रहे व्यक्ति को उसके घर में घुसकर हिरासत में लेने की। अब आप चुप ही रहिए। बोलिए मत। भले लाखों लोगों की नौकरियॉं चली गईं हों। आप तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में खोए रहिए।”

परिवार के भीतर तक दखल रखने वाले सूत्र ने बताया कि ऐसे गमगीन माहौल में बुजुर्ग वोरा का अनुभव काम आ रहा है। वोरा साहब ने युवराज से कहा, “कोई नहीं हम धंधे के पुराने उस्ताद हैं। बोलिए तो दादा-परदादा के टाइम से गिना दूॅं। जुबानी याद है। फिर नया धंधा शुरू करेंगे। अब उसे स्टार्टअप नाम नहीं देंगे।”

सचमुच लोकतंत्र खतरे में है!

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